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  • HC पहुंचा कंगना रनोट के दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई का मामला; सुनवाई जारी

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    नई दिल्ली। अभिनेत्री कंगना रनोट के मुंबई पहुंचने से पहले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने कंगना के दफ्तर में तोड़फोड़ शुरु कर दी है। बीएमसी ने बांद्रा वेस्ट के पाली हिल रोड पर स्थित कंगना रनौत के दफ्तर के कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बीएमसी की टीम जेसीबी और मजदूरों के साथ कंगना के दफ्तर पहुंच गई है और अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है। इस बीच कंगना ने बीएमसी की टीम को बाबर की सेना कहा है। बीएमसी अफसरों का कहना है कि कंगना के दफ्तर के अंदर कई अवैध निर्माण किए गए हैं और इसलिए कार्रवाई की जा रही है।

    बता दें कि मुंबई जाने के लिए कंगना चंडीगढ़ से फ्लाइट से रवाना हो गई है। कंगना के साथ बहन रंगोली चंदेल, निजी सहायक और सुरक्षाकर्मी उनके साथ हैं। वाई श्रेणी की सुरक्षा मिलने के बाद सीआरपीएफ दस्ते ने मंगलवार देर रात मनाली पहुंचकर उनकी सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है।

    गौरतलब है कि बीते दिनों ही बीएमसी टीम ने कंगना रनोट के दफ्तर का मुआयना किया था और पाया था कि ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर कई अवैध निर्माण किया गया है। यह दफ्तर कंगना रनोट के स्वामित्व वाली मणिकर्णिका प्रोडक्शंस का है। इसका मतलब है कि कंगना रनौत के मुंबई पहुंचने से पहले उनके दफ्तर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    तोड़फोड़ के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका

    वहीं कंगना रनोट के वकील ने उनकी संपत्ति पर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर आज दोपहर 12.30 बजे सुनवाई होगी।

    स्त्री सम्मान और अस्मिता के लिए अपना खून भी दे सकती हूं: कंगना

    बीएमसी की कार्रवाई का अंदेशा कंगना रनोट को पहले से है। इस वजह से कंगना ने आज सुबह ही ट्वीट करके कहा कि मेरे आने से पहले ही महाराष्ट्र सरकार और उनके गुंडे मेरे ऑफिस के बाहर पहुंच गए हैं और उसे गिराने की तैयारी कर रहे हैं। मैं वादा करती हूं कि महाराष्ट्र के सम्मान के लिए खून देने के लिए तैयार हूं। ये कुछ नहीं है, चाहे तो सबकुछ छीन सकते हो लेकिन मेरी भावनाएं लगातर ऊंची होती जाएंगी। एक अन्य ट्वीट में उन्होंनेकहाकि मणिकर्णिका फ़िल्म्ज़ में पहली फिल्म अयोध्या की घोषणा हुई, यह मेरे लिए एक इमारत नहीं राम मंदिर ही है, आज वहां बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा राम मंदिर फिर टूटेगा मगर याद रख बाबर यह मंदिर फिर बनेगा यह मंदिर फिर बनेगा। जय श्री राम , जय श्री राम , जय श्री राम।

    कंगना ने मंदिर में की पूजा

    चंडीगढ़ जाते समय रास्ते में अभिनेत्री कंगना रनोट ने हमीरपुर जिले के कोठी इलाके में एक मंदिर में पूजा-अर्चना की। वह मंडी जिले से चंडीगढ़ मार्ग पर है।

    रानी लक्ष्मीबाई के पद चिन्हों पर चलूंगी- कंगना रनोट

    बुधवार को कंगना ने ट्वीट कर लिखा कि रानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य और बलिदान को मैंने फिल्म के जरिए जिया है। दुख की बात यह है मुझे मेरे ही महाराष्ट्र में आने से रोका जा रहा है। मैं रानी लक्ष्मीबाई के पद चिन्हों पर चलूंगी ना डरूंगी, ना झुकूंगी। गलत के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाती रहूंगी, जय महाराष्ट्र, जय शिवाजी। साथ एक दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि मैं बारह साल की उम्र में हिमांचल छोड़ चंडीगढ़ हॉस्टल गयी फिर दिल्ली में रही और सोलह साल की थी जब मुंबई आई। कुछ दोस्तों ने कहा मुंबई में वही रहता है जिसे मुम्बादेवी चाहती है,हम सब मुम्बादेवी देवी के दर्शन करने गए,सब दोस्त वापिस चले गए और मुम्बादेवी ने मुझे अपने पास ही रख लिया।

    2 बजे मुंबई पहुंचेगी कंगना

    मालूम हो कि मुंबई जाने से पहले कंगना रनोट का दो बार कोरोना टेस्ट किया गया। कंगना का कोरोना टेस्ट के लिए लिया गया पहला सैंपल सही नहीं पाया गया। जिससे उनकी रिपोर्ट नहीं जांची जा सकी। इसलिए दोबारा उनका ये टेस्ट हुए। उनकी कोरोना टेस्ट की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई। रिपोर्ट निगेटिव आने के साथ ही कंगना का मुंबई जाने का रास्ता साफ हो गया है। कंगना चंडीगढ़ से फ्लाइट से मुंबई के लिए रवाना हो गई है।  ये फ्लाइट 2 बजे मुंबई उतरेगी करेगी।

    कंगना रनौट को लेकर सामना में लेख

    शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के आज के लेख में लिखा है कि हिंदुत्व और संस्कृत का धर्म और 106 शहीदों के त्याग का अपमान किया गया तथा ऐसा अपमान करके छत्रपति शिवाजी के महाराष्ट्र पर नशे की पिचकारी फेंकने वाले व्यक्ति को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा की पालकी का सम्मान दे रही है। लेख में लिखा गया है कि अहमदाबाद, गुड़गांव, लखनऊ, वाराणसी, रांची, हैदराबाद, बेंगलुरु और भोपाल जैसे शहरों के बारे में अगर कोई अपमानजनक बयान देता तो केंद्र ने उसे वाई सुरक्षा की पालकी दी होती क्या? यह महाराष्ट्र के भाजपाई स्पष्ट करें।

    कंगना और शिवसेना के बीच जुबानी जंग

    बता दें कि पिछले कई दिनों से कंगना और शिवसेना के बीच जुबानी जंग देखने को मिल रही है। कंगना ने कहा था कि मुंबई में उन्हें सुरक्षित नहीं महसूस होता और उन्हें मुंबई पीओके की तरह लगता है। इसके बाद शिवसेना नेता ने उन्हें मुंबई न आने के लिए कहा था। बस यहीं से मामला बढ़ता चला गया। अब कंगना को केंद्र सरकार ने Y प्लस सिक्योरिटी कवर दिया है।

    कंगना के पीओके वाले बयान पर मचा था बवाल

    बीते दिनों कंगना ने मुंबई पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे और कहा था कि उन्‍हें मुंबई से डर लगात है कि क्‍योंकि वहां हालात पीओके जैसे हो गए हैं। कंगना के इस बयान से महाराष्ट्र शासन और प्रशासन दोनों में नाराजगी है। इस बीएमसी ने यह भी कहा है कि यदि कंगना 7 दिनों से ज्‍यादा समय के लिए मुंबई आ रही हैं तो उन्‍हें क्‍वॉरंटीन कर दिया जाएगा।

  • 29 साल पुराने हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने खारिज की पूर्व डीजीपी की जमानत याचिका

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    चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुमेध सिंह सैनी को 29 वर्ष पुराने अपहरण और हत्या के मामले में एक बड़ा झटका लगा, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले के संबंध में सैनी ने हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं। पहली याचिका में सैनी ने मामले की पंजाब से बाहर किसी अन्य जांच एजेंसी या सीबीआई से जांच की मांग की है। वहीं अन्य याचिका में सैनी ने मोहाली की ट्रायल कोर्ट द्वारा एक सितंबर को उनकी अंतरिम जमानत को खारिज किए जाने के खिलाफ दायर की है।

    न्यायमूर्ति फतेह दीप सिंह ने एक दिन पहले ही अपना आदेश सुरक्षित रखा था।

    सैनी, जो राज्य पुलिस के अनुसार फरार हैं, उन्हें दिसंबर 1991 में बलवंत सिंह मुल्तानी के अवैध अपहरण, हिरासत और हिरासत में मौत के मामले में अदालत से कोई संरक्षण नहीं मिल सका है।

    हाईकोर्ट की ओर से उनकी अग्रिम जमानत की मांग खारिज होने के बाद सैनी के पास अब सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने या पुलिस के समक्ष समर्पण करने का ही विकल्प बचा है।

    पिछले हफ्ते एसएएस नगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सैनी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

    पूर्व पुलिस महानिदेशक ने तब अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    पंजाब पुलिस ने सैनी के सुरक्षा विस्तार को वापस लेने से इनकार कर दिया था, जिसने कहा था कि वह अपने सुरक्षाकर्मियों को पीछे छोड़कर फरार हो गए।

    विशेष जांच दल (एसआईटी) के एक प्रवक्ता ने, जो हत्या के एक मामले में बदले गए अतिरिक्त न्यायिक हत्या के मामले की जांच कर रहे हैं, उन्होंने सैनी की पत्नी के इस आरोप से इनकार किया कि पूर्व डीजीपी की सुरक्षा वापस ले ली गई थी, जिससे उनका जीवन खतरे में पड़ गया।

    प्रवक्ता ने कहा कि डीजीपी दिनकर गुप्ता को लिखे पत्र में सैनी की पत्नी ने जो दावा किया था, उसके विपरीत, सुरक्षा विस्तार में कोई बदलाव नहीं किया गया और सुरक्षा बॉक्स और जैमर वाहन सहित सभी आवश्यक उपकरण पूर्व पुलिस प्रमुख को प्रदान किए गए थे। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से उन्हें ‘जेड’ प्लस श्रेणी की सुरक्षा भी मुहैया कराई गई है।

    प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में तथ्य यह है कि सैनी ने अपनी सुरक्षा को खतरे में डालते हुए पंजाब पुलिस के सुरक्षाकर्मियों और सुरक्षा वाहनों के बिना ही अपने चंडीगढ़ आवास को छोड़ दिया था, जिसमें जैमर वाहन भी शामिल है।

    अपहरण का मामला 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकवादियों द्वारा सैनी पर एक बम हमले से संबंधित है। उस समय, वह चंडीगढ़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) थे। उन्हें उस समय कुछ चोटें आई थी, मगर वह बच गए थे। हालांकि उस हमले में तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए।

    मुल्तानी के लापता होने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच 2007 में सैनी के खिलाफ शुरू हुई, लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई और जांच रोक दी गई।

    चंडीगढ़ से सटे एसएएस में सैनी के खिलाफ 7 मई को एक ताजा शिकायत के आधार पर कार्रवाई हुई, जिसमें हत्या के लिए अपहरण, साक्ष्य मिटाने, गलत तरीके से कारावास और आपराधिक साजिश जैसी कई बड़ी धाराएं जोड़ी गई हैं।

  • NDA की ओर से JDU सांसद हरिवंश और विपक्षी उम्मीदवार हो सकते हैं DMK सांसद तिरुची शिवा

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    नई दिल्ली। संसद का  मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू होने वाला है। सत्र के पहले दिन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुनाव होना है और विपक्षी पार्टियों की ओर से  DMK  सांसद तिरुची शिवा को अपने उम्मीदवार के तौर पर उतारने की योजना बनाई जा रही हैवहीं एनडीए की ओर से इस पद के लिए जदयू के राज्यसभा सांसद हरिवंश नारायण सिंग को चुना गया है और उन्होंने इसके लिए आज नामांकन दाखिल किया है। । नामांकन की अंतिम तारीख 11 सितंबर दोपहर 12 बजे तक है।

    सांसद शिवा चार बार चुन कर राज्यसभा में आए हैं। वहीं लोकसभा में  तमिलनाडु के पुडुक्कोत्ताइ से 1996 में  उनका निर्वाचन हुआ था।  शिवा 10 सितंबर को दिल्ली आएंगे। इसके बाद उनकी उम्मीदवारी को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बता दें कि मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी की रणनीति समूह की बैठक में फैसला लिया गया है कि राज्यसभा के उप सभापति के चुनाव के लिए विपक्ष की तरफ से साझा उम्मीदवार खड़ा किया जाएगा। बैठक में संसद सत्र के दौरान मोदी सरकार को घेरने के लिए विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसमें सीमा पर चीन के साथ तनाव, कोविड-19 महामारी संकट और जीडीपी विकास दर में गिरावट समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

    सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई रणनीतिक समूह की डिजिटल बैठक में तय हुआ कि उप सभापति पद के चुनाव के लिए विपक्ष का का साझा उम्मीदवार खड़ा करने के साथ संप्रग के घटक दलों और समान विचारधारा वाले अन्य दलों को साथ लेने का प्रयास किया जाएगा।

    विपक्ष के वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दी कि कांग्रेस उप सभापति पद के चुनाव में द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा के नाम पर चर्चा चल रही है। उल्लेखनीय है कि महामारी के मद्देनजर मानसून सत्र के लिए संसद में उचित व्यवस्था की गई है। इस बार सदन की बैठक के लिए कई बदलाव भी किए गए हैं।

  • ग्वालियर- सतीश सिंह सिकरवार ने कांग्रेस में शामिल हो दिया भाजपा को झटका

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    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। यहां से पार्टी के वरिष्ठ नेता और पिछला विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले सतीश सिंह सिकरवार ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ की मौजूदगी में मंगलवार को सिकरवार ने ग्वालियर से अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भोपाल पहुंचकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर संगठन प्रभारी चंद्र प्रभाष शेखर, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे।

    ज्ञात हो कि सिकरवार ने पिछला चुनाव ग्वालियर के पूर्व क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था और उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार मुन्ना लाल गोयल ने परास्त किया था। गोयल ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्येातिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। गोयल को भाजपा आगामी उप-चुनाव में उम्मीदवार बनाने वाली है। सिकरवार के कांग्रेस का दामन थामने से इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस सिकरवार को ग्वालियर पूर्व से उम्मीदवार बना सकती है।

  • सोमेन मित्रा के निधन के बाद से खाली पड़े बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष पद को संभाला इस नेता ने…

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    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोक सभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। ये पद सोमेन मित्रा के निधन के बाद से खाली था। उनका देहांत इसी साल जुलाई में कोलकाता में हो गया था।
    अधीर रंजन चौधरी यूपीए के समय केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। वो बंगाल में कांग्रेस के एक तेज तर्रार नेता माने जाते हैं।
    अगले साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधान सभा चुनाव के मद्देनजर अधीर रंजन चौधरी के लिए कांग्रेस पार्टी को राज्य में फिर से खड़ा करना एक बड़ी चुनौती होगी।

  • महागठबंधन में छोटे दल विपक्षी दलों के हाशिये पर!

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    पटना। बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या में भले ही वृद्घि हो रही हो, लेकिन इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अब अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस बीच, सत्ता पक्ष के गठबंधन हो या विपक्षी दलों का महागठबंधन, दोनों में सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंसा हुआ है।

    इधर, महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा छोटे दलों को तरजीह नहीं दिए जाने के कारण सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है। महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) की भी परेशानी बढ़ गई है। सियासी हलकों में तो चर्चा यहां तक है कि दोनों दल पूर्व सहयोगी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की तरह कहीं अलग राह नहीं पकड़ लें।

    वैसे, सूत्रों का कहना है कि राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से राजद किसी भी हाल में 150 से कम सीटों पर राजी नहीं है। ऐसे में शेष बची सीटों में से अन्य दलों में बंटवारा होगा, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है।

    कांग्रेस इस चुनाव में पहले से ही 80 सीटों पर दावा ठोंककर अपनी स्थिति साफ कर चुकी है। माना जा रहा है कि किसी भी स्थिति में कांग्रेस भी 50 से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगी। इधर, वामपंथी दलों के महागठबंधन में आने की संभावना के बाद रालोसपा और वीआईपी के नेताओं की चिंता और बढ़ गई है।

    राजद के एक नेता की मानें तो पार्टी नेतृत्व को लगता है कि उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा और मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी में इतनी क्षमता नहीं है कि वे अपनी जाति के वोटों को भी अपनी सहयोगी पार्टियों के हिस्से स्थानांतरित करवा सके।

    राजद के नेता कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में रालोसपा ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा ने खुद दो सीटों से चुनाव लड़े थे, लेकिन पार्टी का खाता तक नहीं खुला। यही स्थिति मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी की भी थी। वीआईपी ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट पर सफ लता नहीं मिल सकी।

    वैसे, रालोसपा के प्रमुख कुशवाहा इस चुनाव में किसी भी परिस्थिति में सत्ता परिवर्तन करने को लेकर आतुर हैं। कुशवाहा पिछले दिनों यह कह कर कि ‘वे जहर भी पीने को तैयार हैं’ से संकेत दे चुके हैं कि वे किसी भी परिस्थिति में समझौता करने को तैयार हैं। दीगर बात है कि कुशवाहा ने 49 सीटों पर दावेदारी ठोंक दी है।

    वैसे, राजद को यह भी डर सता रहा है कि छोटे दलों के विधायकों के जीतने के बाद उनके टूटने का खतरा ज्यादा बना रहता है, ऐसे में वे किसी भी हाल में छोटे दलों को तरजीह देने के मूड में नहीं है।

    इस बीच हालांकि कोई भी दल इस मामले को लेकर खुलकर नहीं बोल रहा। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह कहते हैं कि महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कहीं कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द सीट बंटवारा हो जाएगा।

    इधर, राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भी कहते हैं कि महागठबंधन में शामिल दल अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं। इसके बाद सीट बंटवारा हो जाएगा। सीट बंटवारे को लेकर कहीं कोई उलझन नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि महागठबंधन से कोई जा नहीं रहा है बल्कि महागठबंधन का आकार बड़ा हो रहा है।

  • नीतीश के मंत्री ने कही ये बड़ी बात, लालू के जेल से पत्र लिखने पर…

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    पटना। बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ‘पत्रों’ को लेकर राजनीति गर्म है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह के पत्र लिखकर इस्तीफा दिए जाने के बाद चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद ने जेल से पत्र लिखा। अब इस पत्र को लेकर ही बिहार के मंत्री नीरज कुमार ने सवाल उठाते हुए इसे नियम के विरूद्ध बता दिया है। बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए जेल से लालू प्रसाद के पत्र लिखने को ही जेल मैनुअल का उल्लंघन बताया है।

    जदयू नेता ने कहा, सजायाफ्ता लालू प्रसाद का जेल में दरबार लगाने से मन नहीं भरा तो अब फिर जेल मैनुअल की धारा-999 की धज्जी उड़ा दी, जो स्पष्ट कहता है कि कैदी की ओर से राजनीतिक पत्र व्यवहार नहीं किया जा सकता है। फिर जेल अधीक्षक ने इसकी अनुमति कैसे दी? ये गंभीर मामला है, पर जान लें कानून के हाथ लंबे होते हैं।

    उल्लेखनीय है कि पार्टी से नाराज चल रहे राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने लालू प्रसाद को पत्र लिखकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू ने भी जेल से ही रघुवंश को पत्र लिखकर उनको मनाने की कोशिश करते हुए लिख है कि ‘आप कहीं नहीं जा रहे हैं।’

  • राजनेता नई पीढ़ी को ‘राजनीतिक विरासत’ सौंपने की तैयारी में

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    पटना। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी अब दिखने लगी है। टिकटार्थियों की भीड़ पार्टी कार्यालयों से लेकर वरिष्ठ नेताओं के आवासों तक में जुट रही है तो कई नेता अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए दल-बदल भी कर रहे हैं।

    इस बीच, कई राजनेता अपनी अगली पीढ़ी को सियासी विरासत सौंपने को लेकर जोड़तोड में जुटे हैं। ऐसा नहीं की ऐसे नेता किसी एक दल में हैं। बिहार के करीब सभी प्रमुख दलों में कई ऐसा नेता हैं, जो अपनी राजनीतिक विरासत अपने पुत्रों को सौंपने के जुगाड में हैं। कई नेता ऐसे भी हैं जो अपने रिश्तेदारों को भी टिकट देकर उसे ‘सेट’ करना चाह रहे हैं। ऐसे नेता भले ही सभी दलों में हैं, लेकिन ऐसे नेताओं की सबसे लंबी सूची कांग्रेस के पास है। कांग्रेस के एक नेता ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कहते हैं कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं, जो अपने बेटों को ‘सेट’ करने को लेकर दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। हालांकि यह कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रहा है।

    सूत्रों का कहना है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा जहां अपने पुत्र माधव झा को बेनीपुर से टिकट दिलाने की जोड़तोड कर रहे हैं वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह अपने पुत्र शुभानंद मुकेश को कहलगांव से अपना सियासी उतराधिकारी बनाने के लिए गोटी फिट कर रहे हैं।

    इसके अलावा कांग्रेस के नेता डॉ़ अशोक कुमार अपने पुत्र अतिरेक को दलसिंहसराय से पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनावी मैदान में उतारने की कवायद में जुटे हैं तो गरीबदास अपने दिवंगत पिता पूर्व विधायक रामदेव राय की विरासत संभालने के लिए बछवाड़ा सीट से टिकट पाने की चाहत रखे हुए हैं।

    इधर, कांग्रेस के बुजुर्ग नेता और पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार से जब इस संबंध में बात की तब उन्होंने कहा, “अगर कोई नेता खुद को सेवानिवृत्त कर अपनी आने वाली पीढ़ी को राजनीति में लाना चाहता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं हैं। आखिर पार्टी खड़ी भी तो युवाओं के आगे आने से ही होगी।”

    उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए, खुद भी टिकट के दावेदार हैं और बेटा या बेटी के लिए अन्य क्षेत्रों से भी टिकट मांग रहे हैं। ये गलत बात है। वैसे, ऐसा नहीं कि ऐसी स्थिति केवल कांग्रेस में ही है। भाजपा में भी कई नेता अपने पुत्रों को टिकट दिलवाने की रेस में शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे अपने पुत्र अर्जित शाश्वत के लिए भागलपुर से टिकट के लिए प्रयासरत बताए जा रहे हैं तो भाजपा सांसद छेदी पासवान अपने पुत्र रवि पासवान को इस चुनाव में मैदान में उतारने की इच्छा रखे हुए हैं।

    राजद में तो पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद के दोनों पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव का चुनावी मैदान में उतरना तय माना जा रहा है। वैसे राजद के सूत्रों का कहना है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह अपने पुत्र सुधाकर सिंह को रामगढ़ विधानसभा से टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं।

    इधर, जदयू में भी कई नेता ऐसे हैं जो अपनी अगली पीढ़ी को चुनावी मैदान में उतारने की इच्छा पाले हुए हैं। वैसे, यह कोई नई बात नहीं है कि राजनेता अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए आने वाली पीढ़ी को चुनावी मैदान में उतारेंगे।

    बहरहाल, कमोबेश सभी पार्टियों में ऐसे राजनेता की भरमार है, जो अपनी आने वाली पीढ़ी को इस चुनाव में सियासी मैदान में उतारने की इच्छा रखे हुए हैं, लेकिन देखने वाली बात होगी इसमें कितने राजनेता सफल होते हैं और मतदाता किन्हें पसंद करते हैं।

  • दीवान सिंह नयाल ने कहा- दिल्ली जैसा मॉडल बनेगा उत्तराखंड

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    बागेश्वर: आम आदमी पार्टी के प्रदेश पर्यवेक्षक दीवान सिंह नयाल ने कहा कि उत्तराखंड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। यहां शिक्षा और स्वास्थ बदतर है। बिजली उत्तराखंड पैदा कर रहा है और भारी भरकम बिल भी भर रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लोगों को सुविधाएं देना चाहती है और दिल्ली जैसा मॉडल उत्तराखंड को बनाना चाहती है।

    शनिवार को स्थानीय होटल में आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में प्रदेश पर्यवेक्षक नयाल ने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस ने जमकर भ्रष्टाचार किया है। बिजली उत्तराखंड पैदा कर रहा है और लोग भारी-भरकम बिल दे रहे हैं। जबकि दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली उपभोक्ताओं को मुफ्त दी जा रही है। जबकि दिल्ली में बिजली का उत्पादन नहीं होता है। पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। गांवों में पानी पहुंचाने में भाजपा-कांग्रेस पूरी तरह नाकाम हैं और साफ पानी दिए बगैर बिल वसूल लिए जा रहे हैं। स्वास्थ सेवा के नाम पर भी राज्य के लोगों को ठगा गया है। प्रसूता को यहां के अस्पतालों से रेफर कर दिया जाता है और उसकी जान पर बन आती है। अन्य बीमारी के इलाज के लिए भी दिल्ली और हल्द्वानी की शरण में लोग जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि भाजपा-कांग्रेस ने बारी-बारी उत्तराखंड को लूटा है। लोग टैक्स भर रहे हैं और यह लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। विकास के मायने में उत्तराखंड पिछड़ गया है। उन्होंने कहा कि लोगों से मिलने वाला टैक्स उनका है और उनकी सुख-सुविधाओं पर व्यय होना चाहिए। आम आदमी पार्टी उत्तराखंड से चुनाव लड़ रही है और लोगों को सुविधा संपन्न बनाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने आयोजित बैठक में सदस्यता अभियान पर चर्चा की। तमाम लोगों ने पार्टी सदस्यता ली। इस मौके पर पूर्व विधायक प्रत्याशी कांडा भरत सिंह, नंदनसिंह परिहार, हरीश भाकुनी, कैलाश चंद्र जोशी, गिरीश तिवारी, पूरन सिंह, जीवन भारती आदि मौजूद थे।

  • 3 और उपहारों की बिहार के लिए मोदी रविवार को करेंगे घोषणा

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    नई दिल्ली। बिहार में चुनावी माहौल के लिए विकास संबंधी परियोजनाओं की एक श्रृंखला को आगे बढ़ाने पर जोर देने के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रविवार को राज्य में पेट्रोलियम क्षेत्र से संबंधित तीन प्रमुख परियोजनाओं को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन परियोजनाओं का अनावरण करेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

    परियोजनाओं में पारादीप-हल्दिया-दुगार्पुर पाइपलाइन परियोजना के तहत दुगार्पुर-बांका खंड और दो एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र शामिल हैं।

    इंडियन ऑयल द्वारा निर्मित 193 किलोमीटर लंबा दुगार्पुर-बांका पाइपलाइन खंड, पारादीप-हल्दिया-दुगार्पुर पाइपलाइन परियोजना का हिस्सा है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने पिछले साल 17 फरवरी को आधारशिला रखी थी। पाइपलाइन पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार से होकर गुजरती है।

    दुगार्पुर-बांका खंड में पाइप लाइन बिछाने में कई प्राकृतिक और मानव निर्मित बाधाओं को पार करने की आवश्यकता थी। बताया गया है कि इसके लिए कुल 154 ह्यक्रॉसिंग को पाटा गया और जिसमें 13 नदियां, पांच राष्ट्रीय राजमार्ग और तीन रेलवे क्रॉसिंग शामिल हैं।

    बांका स्थित एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र से राज्य में एलपीजी की बढ़ती मांग को पूरा कर बिहार की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। यह बॉटलिंग संयंत्र बिहार के भागलपुर, बांका, जमुई, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के साथ-साथ झारखंड के गोड्डा, देवघर, दुमका, साहिबगंज और पाकुड़ जिलों की जरूरतों को पूरा करेगा। इस पर करीब 131.75 करोड़ रुपये का खर्च आया है। केंद्र का मानना है कि यह संयंत्र राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

    इसके साथ ही पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि में एचपीसीएल के बॉटलिंग संयंत्र के निर्माण में 136.4 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह संयंत्र बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीवान, गोपालगंज और सीतामढ़ी जिलों की एलपीजी आवश्यकता को पूरा करेगा।