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  • सीएम गहलोत के करीबी राजीव अरोड़ा के घर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मारी रेड

    सीएम गहलोत के करीबी राजीव अरोड़ा के घर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मारी रेड

    जयपुर । राजस्थान की राजनीति में भूचाल मचाने वाली एसओजी की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग की कार्रवाई और हड़कंप मच गया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी और कांग्रेस नेता राजीव अरोड़ा के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा है। साथ ही धर्मेंद्र राठौड़ जो सीएम गहलोत के नजदीकी है, उनके यहां भी छापेमारी की कार्रवाई चल रही है।
    वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करके कहा कि आख़िर भाजपा के वकील मैदान में आ ही गए। इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर में रेड शुरू कर दी। ई॰डी कब आएगी?वहीं सुरजेवाला ने ट्वीट किया है कि भाजपा का दूसरा अंग्रिम संगठन भी मैदान में आया ई.डी भी जयपुर आ ही गई, जैसा कहा था। अब CBI कब आएगी?

  • भाजपा ने अपनाई ‘वेट एंड वाच’ की नीति, संकट में गहलोत सरकार

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    नई दिल्ली। राजस्थान में गहलोत सरकार का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नाराज उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ गुड़गांव के एक होटल में हैं। लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उधर भाजपा ने साफ कर दिया है कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में चल रहे रस्साकशी से उनका कोई लेना देना नहीं है। फिलहाल भाजपा राजस्थान में वेट और वाच की नीति पर चल रही है। पार्टी का मानना है कि पूरा विवाद कांग्रेस में पॉवर शेयरिंग को लेकर चल रहे विवाद और गहलोत सरकार को लेकर नाराजगी से उपजा है।
    राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता और भाजपा उपाध्यक्ष ओम माथुर ने इस पर साफ-साफ कहा, “अशोक गहलोत अपना घर संभालें, भाजपा पर आरोप ना लगाएं। गहलोत भाजपा पर नाहक ही आरोप लगा रहे हैं। यह उनकी आपस की अंदरूनी लड़ाई है, जो सरकार के गठन के बाद से ही चलती आ रही है। जहां तक सचिन पायलट का सवाल है तो सचिन पायलट ने मेहनत की और लड्डू अशोक गहलोत खा रहे हैं। सीधी सी बात है कि असंतोष इन बातों को लेकर है। भाजपा इस विवाद में कहीं नहीं है, भाजपा पर गलत आरोप लगाया जा रहा है।”
    नाम नहीं छापने की शर्त पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्थिति भिन्न थी, लेकिन इसके उलट राजस्थान में सीटों का अंतर भाजपा और कांग्रेस के बीच ज्यादा है। ऐसे में इसको पाटना फिलहाल संभव नहीं है।
    जाहिर है राजस्थान की घटना पर भाजपा की नजर तो है। पार्टी को सचिन पायलट से हमदर्दी भी है, लेकिन पार्टी सरकार बनाने या गिराने के मूड में नहीं दिख रही है। पार्टी का मानना है कि ये लड़ाई कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी लड़ाई है।

  • संपन्न हुई राजस्थान राज्य मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद की बैठक,कल करेंगे सचिन प्रेस कॉन्फ्रेंस

    संपन्न हुई राजस्थान राज्य मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद की बैठक,कल करेंगे सचिन प्रेस कॉन्फ्रेंस

    जयपुर । राजस्थान CM अशोक गहलोत के आवास पर राज्य मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद की बैठक संपन्न हो गई है।

    इधर कल सुबह राजस्थान के डिप्टी सीएम पद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए गए सचिन पायलट दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

    माना जा रहा है कि इस बैठक मंत्रिपरिषद की बैठक में मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अंतिम रूप दिया जा सकता है। इससे पहले मुख्यमंत्री गहलोत अपने विधायकों के साथ बसों के जरिये अपने निवास पहुंचे। पहले कैबिनेट की बैठक हुई। माना जा रहा है कि तीन कैबिनेट मंत्रियों के बर्खास्त होने के बाद नए सिरे से मंत्रिमंडल की कवायद तेज करने के लिए इस्तीफे लिये जा सकते है।

  • राजस्थान में एक हाथ से नहीं, दोनों ही हाथों से बजी थी बगावत की ताली

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    जयपुर । एक कहावत है ताली एक हाथ से नहीं बजती है, लेकिन राजस्थान के राजनीतिक घटनाक्रम पर विश्लेषण करने वाले बुद्धिजीवी अगर शासन सचिवालय में सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा की ब्यूरोक्रेसी के साथ कार्यशैली को जानते होंगे, यह जरूर कहेंगे, कि पिछले डेढ़ साल से ताली दोनों ही हाथों से बज रही थी। इन तीनों दिग्गज नेताओं का ब्यूरोक्रेसी के साथ रवैया अड़ियल जैसा ही रहा। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सचिन पायलट समेत इन दोनों दिग्गज मंत्रियों को भी उकसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
    सबसे पहले बात करें, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की, तो जिस दिन शासन सचिवालय में डिप्टी सीएम बनने के बाद पहली बार आते है, तो मुख्य भवन में अपने कक्ष को बाहर से देखते, जबकि आईएएस अधिकारी पदभार ग्रहण कराने की औपचारिकता के कागज लेकर खड़े रहते है। पायलट आईएएस अफसरों से पूछते है कि यहां कौन-कौन अफसर बैठते है, तो आईएएस अफसर बता देते है कि यहां फला-फला अफसर बैठते है। इसके बाद पायलट सीएमओ की बिल्डिंग में जाते है। यहां भी पायलट बेसमेंट से लेकर टॉप फ्लोर को देखते है, लेकिन जैसे ही अधिकारी कहते है कि यहा सिर्फ मुख्यमंत्री ही बैठ सकते है, अन्य मंत्री नहीं, तो इसके बाद मंत्रिमंडल सचिवालय का पायलट दौरा करते है। तो यह पहला दिन रहता है सचिन पायलट का। इसके बाद मुहुर्त के साथ पायलट शासन सचिवालय में अपने कक्ष में पदभार ग्रहण करते है। लेकिन डेढ़ साल मेें कभी-कभार ही इस कमरे में वह बैठे होंगे। इसके अलावा आयोजना मंत्री होने के नेता योजना भवन में भी उन्होंने अपना कक्ष तैयार करवाया था। जिससे कि वह विदेशी डेलीगेट्स या अपने कार्यकर्ताओे के साथ खुलकर बैठ सके। यहां भी वह कम आए। अगर मीडियाकर्मी से बातचीत का रवैया देखे, जो शासन सचिवालय में न्यूज चैनल, प्रिंट के पत्रकार न्यूज कवर करते है, उन्हे मोबाइल पर कभी भी बाइट नहीं दी, और बातचीत नहीं की। या तो बंगले आने को कह दिया, या पीसीसी आने को कह दिया। यह तो पायलट का रवैया था, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास वित्त विभाग होने के कारण पायलट की प्रशासनिक स्वीकृति होने के बाद जो फाइलें सीएम तक जाती थी, वह लौट आती थी। वित्त विभाग कुछ ना कुछ अंडगा लगा ही देता था।

    अब बात करें, पूर्व खाद्य मंत्री रमेश मीणा की, तो पहले तो यूडीएच मंत्री शांतिधारीवाल के साथ कैबिनेट सबकमेटी की बैठकों में कभी डॉ. किरोडीलाल मीणा के मसले पर, तो कभी एससी-एसटी के बैकलॉक और केसों को लेकर उलझते रहे। इसके बाद डीएसओ के ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर अपने ही विभाग की सचिव से उलझ पड़े। साथ ही बिना सचिव की जानकारी के अपने चेहते अधिकारियों के जरिये कभी पेट्रोल-पंप तो कभी खाद्य सामानों के स्टोरों पर छापे पड़वाते रहे। विवाद बढ़ता देख सचिव मुग्धा सिन्हा का तबादला हो गया।

    इसके बाद बात करें पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, तो इन्होंने तो सबसे पहले पर्यटन भवन जाते ही जाने क्या दिख जाए, राजस्थान टूरिज्म का लोगो बदलवाकर पधारो म्हारे देस करवा दिया। साथ ही राजस्थान टूरिज्म के लोगो में भरतपुर के डीग पैलेस का फोटो लगवा दिया। फिर डीग पैलेस के लोगो लगाकर राजस्थान टूरिज्म के प्रचार-प्रसार की बड़ी-बड़ी बातें की। यहां यह महोदय पहले आरटीडीसी के चैयरमेन आईएएस से उलझे। सीएम से दखल करवाकर विदेश यात्रा रूकवा दी। फिर संबंधित आईएएस ने दूसरे राज्य ही जाना मुनासिब समझा। इसके बाद विश्वेंद्र सिंह अपनी मनमानी नहीं होने के कारण प्रमुख शासन सचिव श्रेहा गुहा से उलझते रहे। साथ ही देवस्थान विभाग के अधिकारियों से भी नहीं बनी। इसके चलते फाइलों पर साइन नहीं करते, तो मुख्यमंत्री कार्यालय से ही फाइलें साइन होकर आती थी। तो कुल मिलाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के स्तर से और इन तीन मंत्रियों ने दोनों हाथों से ही ताली बजाई और नौबत बर्खास्तगी और बगावत तक आ पहुंची।

  • गुना में आदेश दिए गए दलित किसान परिवार की पिटाई मामले की जांच के

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    गुना/भोपाल। मध्यप्रदेश के गुना जिले में एक दलित परिवार के सदस्यों की पिटाई के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तंज कसा है, वहीं सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। गुना जिले में एक दलित किसान परिवार के साथ हुई मारपीट के सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। कांग्रेस हमलावर है और सरकार ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

    पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने बुधवार को एक वीडियो के साथ ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “ये शिवराज सरकार प्रदेश को कहां ले जा रही है? ये कैसा जंगलराज है? गुना में कैंट थाना क्षेत्र में एक दलित किसान दंपति पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों द्वारा इस तरह बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज।”

    उन्होंने आगे कहा, “यदि पीड़ित युवक का जमीन संबंधी कोई शासकीय विवाद है तो भी उसे कानूनन हल किया जा सकता है, लेकिन इस तरह कानून हाथ में लेकर उसकी, उसकी पत्नी की, परिजनों की व मासूम बच्चों तक की इतनी बेरहमी से पिटाई, यह कहां का न्याय है? क्या यह सब इसलिए कि वो एक दलित परिवार से है, गरीब किसान है?”

    पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “क्या ऐसी हिम्मत इन क्षेत्रों में तथाकथित जनसेवकों व रसूखदारों द्वारा कब्जा की गई हजारों एकड़ शासकीय भूमि को छुड़ाने के लिए भी शिवराज सरकार तत्परता दिखाएगी? ऐसी घटना बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसके दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो, अन्यथा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।”

    राज्य के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “गुना के कैंट थाना क्षेत्र की घटना का वीडियो देखकर व्यथित हूं। इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचा जाना चाहिए। मैंने तत्काल अधिकारियों को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। भोपाल से जांच दल मौके पर जाकर पूरी घटना की जांच करेगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई करेंगे।”

    गुना के कलेक्टर एस. विश्वनाथन ने बताया कि जगनपुर में कॉलेज के लिए आरक्षित जमीन पर स्थानीय भू-माफिया गब्बू पारदी द्वारा अवैध कब्जा किया गया था। कब्जे की जमीन को गब्बू पारदी ने बटाई पर राजकुमार अहिरवार को दे रखा था। कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान लोगों के उकसावे में आकर राजकुमार और उसकी पत्नी द्वारा पेस्टिसाइड का सेवन किया गया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत पहले से बेहतर है।

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  • बिहार में 20 हजार के पार हुई कोरोना संक्रमितों की संख्या,1,320 नए मामले

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    पटना। बिहार में कारोना संक्रमितों की संख्या में अब तेजी से वृद्धि हो रही है। राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान 1,320 कोविड-19 मरीजों की पुष्टि होने के बाद यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 20,173 तक पुहंच गई है। इस बीच 14 लोगों की मौत हो गई है। राहत वाली बात है कि राज्य में अब तक 13,533 लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पटना जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान 242 मरीेजों की पुष्टि हुई है, जिससे पटना में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,501 हो गई है।

    उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे में राज्य में 1,320 पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं जिसमें सबसे अधिक पटना में 242, भागलपुर में 125, पश्चिम चंपाारण में 93, सीवान में 90, खगड़िया में 80, बेगूसराय में 75, मुजफ्फरपुर में 59 तथा नवादा में 52 लोग शामिल हैं।

    कोरोना से पिछले 24 घंटे में 514 लोग स्वस्थ हुए हैं। अब तक 13,533 लोग कोविड-19 संक्रमण से स्वस्थ होकर वापस अपने घर जा चुके हैं। बिहार राज्य में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों का रिकवरी रेट 67़ 08 प्रतिशत है।

    उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान 10,052 नमूनों की जांच की गई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान 14 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है।

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  • BSP हुई गहलोत सरकार के खिलाफ फोन टैपिंग पर और आक्रामक, बताया…

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    नई दिल्ली। राजस्थान में फोन टैपिंग मामले में गहलोत सरकार अब चारों तरफ से घिरती नजर आ रही है। एक तरफ जहां भाजपा, इस मामले पर उनके खिलाफ लगातार हमलावर है। इसी बीच देश की एक और अहम राजनीतिक पार्टी ने भी फोन टैपिंग मामले में गहलोत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। राजस्थान में विधायकों की फोन टैपिंग मामले पर एक दिन पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के गहलोत सरकार पर हमला बोलने के बाद अब बहुजन समाजवादी पार्टी(बसपा) आक्रामक रुख अपना रही है।

    बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधींद्र भदोरिया ने अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार को कथित फोन टैपिंग के लिए फटकार लगाई है और कहा है कि इस तरह की करतूतें गौर-लोकतांत्रिक और असंवैधानिक हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ से बात करते हुए भदौरिया ने कहा कि मुझे लगता है कि फोन टैपिंग का मुद्दा बहुत गंभीर है। यह संविधान और लोकतांत्रिक मानदंडों की भावना के खिलाफ है। यह लोगों के जीवन में अतिक्रमण करने जैसा है और इसलिए इस तरह की चाजें लोकतांत्रिक मानदंड और संविधान के खिलाफ हैं। फोन टैपिंग में शामिल सभी लोगों की जांच की जानी चाहिए और इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    भदोरिया ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत ने कांग्रेस में बसपा के सभी छह विधायकों के दलबदल का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बार-बार वे इंजीनियरिंग डिफेक्शन में लिप्त हैं। यह संसद द्वारा बनाए गए कानून के खिलाफ है। मुझे लगता है कि फ्लोर टेस्ट एक लोकतांत्रिक प्रथा है, लेकिन गहलोत सरकार द्वारा दलबदल में कुछ ऐसा है जिस पर हमें गंभीर आपत्ति है।

    मायवती ने किया गहलोत सरकार पर हमला

    इससे पहले शनिवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने फोन टैपिंग पर गहलोत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग करते हुए ट्वीट किए। बसपा प्रमुख ने कहा, गहलोत ने दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन किया। दूसरी बार दगाबाजी कर बसपा विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया और अब जग-जाहिर तौर पर फोन टैप कराकर गैर-कानूनी व असंवैधानिक काम किया है। मायावती ने कहा कि इस प्रकार राजस्थान में लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध, आपसी उठापटक व सरकार की अस्थिरता के हालात का राज्य के राज्यपाल को प्रभावी संज्ञान लेना चाहिए और राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए, ताकि राज्य में लोकतंत्र की और ज्यादा दुर्दशा न हो।

    इससे पहले शनिवार को, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फोन टैपिंग मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की थी और इस बात पर कई सवाल उठाए थे कि क्या कांग्रेस फोन टैपिंग में लिप्त है।

     

  • सनसनीखेज खुलासा: कांग्रेस विधायक बोले- आठ महीने पहले हुई थी संजय जैन से मुलाकात

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    नई दिल्ली। राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच फोन टैपिंग कांड में गिरफ्तार संजय जैन को लेकर कांग्रेस विधायक राजेंद्र गुडा ने सनसनीखेज खुलासा किया है। गुडा के अनुसार जैन ने आठ महीने पहले उनसे मुलाकात की थी और भाजपा नेता वसुंधरा राजे सिंधिया और अन्य लोगों से मिलने को कहा था। उन्होंने आगे कहा कि जैन जैसे कई एजेंट हैं, लेकिन वे अपने प्रयासों में सफल नहीं हुए। जैन लंबे समय से सक्रिय था। फ्लोर टेस्ट को लेकर उन्होंने कहा, ‘हम संख्या (विधायकों) में 100 से अधिक हैं। हमारे पास बहुमत है। अगर हमारे पास बहुमत नहीं होता, तो वे (भाजपा) फ्लोर टेस्ट की मांग करते। वे जानते हैं कि हमारे पास बहुमत है। इसलिए वे फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं कर रहे हैं।’

    गौरतलब है कि फोन टैपिंग मामले में भाजपा और कांग्रेस आमने सामने हैं। कांग्रेस ने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से जांच कराने की मांग पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा की सीबीआइ जांच की मांग ‘क्लीन चिट’ देने और ‘सच को दबाने’ के लिए की गई है। वहीं राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है, ‘अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ने कहा कि उन्हें फोन टैपिंग की जानकारी नहीं है। इसलिए सवाल यह है कि क्या राजस्थान सरकार इस तरह के किसी भी टैपिंग की अनुमति दे सकती है? गृह मंत्रालय ने इस मामले का संज्ञान लिया है और मुझे लगता है कि कई चीजें सामने आएंगी।’

    LIVE Rajasthan Political Crisis: 

    गहलोत समर्थक विधायक होटल में खेल रहे अंताकक्षरी 

    राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक विधायक जयपुर में फेयरमोंट में ठहरे हुए हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ ने उनका एक वीडियो जारी किया है। इसमें वे अंताकक्षरी खेलते दिखाई दे रहे हैं।

    सिंघवी का ट्वीट

    सिंघवी ने ट्वीट करके कहा, ‘ केंद्रीय मंत्री समेत राजस्थान के विधायकों और हॉर्स ट्रेडिंग और सरकार गिराने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले मे एफआइआर दर्ज हो गई है और पुलिस जांच जारी है। इसमें बाधा डालने के लिए भाजपा ने सुविधा अनुसार सीबीआइ जांच की मांग की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय भी इसमें कूद गया है। क्या क्लीन चिट देने और सच्चाई को दबाने के लिए मामले की जांच सीबीआइ के सौंप दी जाएगी!’

    किसी निजी व्यक्ति के पास फोन टैप करने का अधिकार नहीं- कटारिया

    वहीं राज्य में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सरकार के पास फोन टैप करने का अधिकार है, लेकिन  गृह विभाग के संज्ञान में लाने और अनुमति मिलने के बाद ही ऐसा किया जा सकता है। किसी निजी व्यक्ति के पास ऐसा करने के लिए अधिकार नहीं है। कोई लोकेश शर्मा ने यह किया, जो सीएम के ओएसडी बताए जा रहे हैं। वह इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने कानून का उल्लंघन किया है।

    गृह मंत्रालय ने राजस्थान के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी

    सूत्रों ने शनिवार को जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने राजस्थान के मुख्य सचिव से राज्य में फोन-टैपिंग मुद्दे पर एक रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले शनिवार को भाजपा ने राजस्थान राजनीतिक संकट के संबंध में फोन टैपिंग के मामले की सीबीआइ जांच की मांग की थी और इसे लेकर कई सवाल उठाए थे कि क्या कांग्रेस फोन टैपिंग में लिप्त है?

    भाजपा ने की सीबीआइ जांच की मांग

    भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम इस मामले की सीबीआइ जांच की मांग करते हैं, चाहे फोन टैपिंग हुई हो या एसओपी का पालन किया गया हो। क्या राजस्थान में आपातकालीन स्थिति है? क्या सभी राजनीतिक दलों को इस तरह से निशाना बनाया जा रहा है? राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए कि क्या वह फोन टैपिंग में लिप्त है? मुख्यमंत्री और उनके अन्य नेता कह रहे हैं कि ऑडियो प्रामाणित है, जबकि एफआइआर में इसका जिक्र कथित तौर पर किया गया है।’

    बसपा का गहलोत सरकार पर हमला

    बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधींद्र भदोरिया ने अशोक गहलोत सरकार की कथित फोन टैपिंग को लेकर आलोचना की है और कहा है कि इस तरह की निगरानी गैर-लोकतांत्रिक और संविधान विरोधी है। समाचार एजेंसी एएनआइ से बात करते हुए भदौरिया ने कहा, ‘मुझे लगता है कि फोन टैपिंग का मुद्दा बहुत गंभीर है। यह संविधान और लोकतांत्रिक मानदंडों की भावना के खिलाफ है। फोन टैपिंग में शामिल सभी लोगों की जांच की जानी चाहिए। इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। ‘

    मामले में दोनों पार्टियों ने केस दर्ज कराया

    कांग्रेस नेता महेश जोशी द्वारा शुक्रवार को राजस्थान सरकार को गिराने की कथित साजिश पर ऑडियो क्लिप से संबंधित दो प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। वहीं भाजपा ने भी नेताओं की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए सुरजेवाला सहित कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज कराया है।

     

  • कोर्ट का फैसला तय करेगा राजस्थान की राजनीति में पायलट की किस्मत, HC ने फैसला सुरक्षित रखा

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    जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक लड़ाई के बीच, सभी निगाहें अब राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी हैं। अदालत पायलट द्वारा दायर एक मामले की मंगलवार को सुनवाई कर रही है।

    कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि अदालत का फैसला जिस किसी के भी पक्ष में जाता है, तो उस खेमे में सौदेबाजी के मामले में दूसरे पर बढ़त होगी, हालांकि अशोक गहलोत के पास बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा में आवश्यक संख्या है। पायलट खेमे के करीबी सूत्रों ने कहा कि अगर अदालत का फैसला उनके पक्ष में आया, तो कांग्रेस नेतृत्व को उनकी शर्तो पर सचिन पायलट से बात करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

    पायलट की ‘घर वापसी’ के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, भाजपा चुनी हुई सरकार को गिराने की कोशिश करने के लिए बेनकाब हो गई है, और अब वे कह रहे हैं कि बहुमत परीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है और विधायकों के मामले पर चर्चा पार्टी के भीतर की जा सकती है।

    कांग्रेस विधायक दल ने मंगलवार को हाईकोर्ट के फैसले के पहले एक बैठक की। सुरजेवाला ने कहा, परिवार के मामले को परिवार के भीतर सुलझाया जाना चाहिए। मीडिया चैनलों के माध्यम से इसका समाधान नहीं किया जा सकता है और सचिन पायलट को भाजपा से मदद लेना फौरन बंद कर देना चाहिए। कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पायलट तक पहुंचने के प्रयासों का कोई परिणाम नहीं निकला है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने कहा कि पायलट मोर्चे पर कोई प्रगति नहीं हुई है, लेकिन सरकार अब सुरक्षित है, और सचिन पायलट को पार्टी के साथ तालमेल पर फैसला करना है।

    राजस्थान हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

    राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से जारी आयोग्यता के नोटिस के खिलाफ कांग्रेस के बागी सचिन पायलट और 18 कांग्रेस विधायकों द्वारा दाखिल एक याचिका पर राजस्थान हाई कोर्ट ने फैसला 24 जुलाई तक सुरक्षित रखा है। सचिन पायलट खेमे की याचिका की सुनवाई राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह मोहंती और न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता की पीठ कर रही है।

  • पूर्णिया में मां और बेटी समेत 5 की सिलेंडर में आग लगने से मौत

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    पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के बायसी थाना क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडर में रिसाव के कारण लगी आग से झुलसकर एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से जख्मी हो गए। पुलिस के मुताबिक, ग्वालगांव निवासी अखिलेश यादव के घर में सोमवार की रात खाना बन रहा था, इसी क्रम में सिलेंडर में गैस रिसाव के कारण आग लग गई। शोर सुनकर सभी लोग खाना बनने वाले स्थान की ओर ही दौड़ गए, जिससे सभी लोग आग की चपेट में आ गए।

    इस घटना में तीन वर्षीय बच्ची प्रीति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि शेष लोगों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से इलाज के लिए पूर्णिया सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के क्रम में और चार लोगों ने दम तोड़ दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मृतकों में प्रीति, पिंटु कुमार, गगन, बॉबी कुमारी व प्रियांशु शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दो अन्य जख्मी लोगों की स्थिति अभी चिंताजनक बनी हुई है।