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  • साइबर ठगी: डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर 34 लाख रुपये की लूट

    साइबर ठगी: डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर 34 लाख रुपये की लूट

    साइबर ठगी का नया तरीका: डिजिटल गिरफ्तारी और 34 लाख रुपये की लूट

    क्या आप जानते हैं कि साइबर ठग अब नये-नये तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं? हाल ही में नोएडा में एक महिला के साथ एक हैरान करने वाली घटना घटी, जहाँ साइबर ठगों ने उसे ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का डर दिखाकर 34 लाख रुपये की ठगी कर ली! यह घटना आपको चौंका सकती है, लेकिन यह सच्चाई है। इस लेख में हम इस घटना के बारे में विस्तार से जानेंगे और समझेंगे कि कैसे आप इस तरह की ठगी से खुद को बचा सकते हैं।

    मुंबई से ईरान जा रहा पार्सल और ED का फर्जी नोटिस

    घटना के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-41 में रहने वाली निधि पालीवाल को साइबर ठगों ने एक हैरान करने वाला मैसेज भेजा। उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर एक पार्सल मुंबई से ईरान भेजा जा रहा है, जिसमें 5 पासपोर्ट, 2 डेबिट कार्ड, 2 लैपटॉप, 900 अमेरिकी डॉलर और 200 ग्राम नशीला पदार्थ है! इसके बाद उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) के फर्जी नोटिस भी भेजे गए, जिसमें उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। ठगों ने महिला को डरा-धमका कर 34 लाख रुपये उनके खाते में ट्रांसफर करवा लिए।

    वाट्सएप और स्काइप पर की गई संपर्क

    यह सारा खेल वाट्सएप और स्काइप के जरिए खेला गया। ठगों ने निधि को पहले वाट्सएप पर मैसेज भेजा और फिर स्काइप पर वीडियो कॉल किया, हालांकि कॉल के दौरान आरोपी ने अपना वीडियो बंद रखा था। इस तरह उन्होंने अपनी पहचान छुपाए रखी और महिला को अपनी बातों में फंसा लिया। यह घटना दिखाती है कि कैसे ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आपकी व्यक्तिगत जानकारी चुराकर और आपको धोखा देकर आपसे पैसे ऐंठ सकते हैं।

    साइबर ठगी से बचने के उपाय

    ऐसी ठगी के शिकार होने से बचने के लिए, आपको हमेशा सतर्क रहना होगा। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण उपाय दिए गए हैं:

    संदिग्ध कॉल और मैसेज से सावधान रहें

    अगर आपको कोई अनजान नंबर से कॉल आता है या कोई संदिग्ध मैसेज मिलता है, तो उस पर तुरंत विश्वास न करें। कभी भी अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि बैंक अकाउंट डिटेल, पासवर्ड, आदि, किसी को भी न दें।

    ऑफिशियल सोर्स से ही जानकारी प्राप्त करें

    किसी भी सरकारी नोटिस या सूचना के लिए, हमेशा सरकारी वेबसाइट या आधिकारिक चैनल देखें। ईमेल या सोशल मीडिया पर मिले मैसेज को सत्यापित करें। यदि आप संदेह में हैं, तो आधिकारिक स्रोत से संपर्क करें।

    अपना एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपडेट रखें

    अपने कंप्यूटर और मोबाइल में हमेशा एक अपडेटेड एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का प्रयोग करें। यह आपके डिवाइस को मैलवेयर और अन्य खतरों से बचाने में मदद करता है।

    पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई

    गौतम बुद्ध नगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। हालांकि, यह मामला हमें साइबर ठगी के खतरों के बारे में जागरूक करता है और इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए हमें सावधानी बरतनी होगी।

    Take Away Points

    • साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें।
    • संदिग्ध कॉल और मैसेज पर तुरंत विश्वास न करें।
    • हमेशा ऑफिशियल सोर्स से ही जानकारी प्राप्त करें।
    • अपने एंटीवायरस सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें।
    • यदि आपको कभी भी इस तरह की ठगी का सामना करना पड़े तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
  • सत्येंद्र जैन को मिली जमानत: दिल्ली की सियासत में तूफान

    सत्येंद्र जैन को मिली जमानत: दिल्ली की सियासत में तूफान

    सत्येंद्र जैन को मिली जमानत: दिल्ली की सियासत में तूफान!

    दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिल गई है. यह फैसला कई महीनों तक चली कानूनी लड़ाई का नतीजा है और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. क्या सचमुच जैन बेगुनाह हैं या यह एक राजनीतिक चाल है? आइए जानते हैं पूरी कहानी.

    लंबी जेल यात्रा का अंत

    सत्येंद्र जैन को 30 मई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था. लगभग 18 महीने जेल में बिताने के बाद, उन्हें अदालत ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी. इस फैसले से AAP में खुशी की लहर दौड़ गई है, जबकि विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं. जमानत के साथ कई शर्तें भी जुड़ी हुई हैं: जैन को देश से बाहर नहीं जा सकते, मामले से जुड़े गवाहों से संपर्क नहीं कर सकते और न ही किसी तरह से मुकदमे को प्रभावित कर सकते हैं.

    क्या मनीष सिसोदिया केस का असर?

    कोर्ट ने अपने फैसले में मनीष सिसोदिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें त्वरित सुनवाई के अधिकार पर जोर दिया गया था. क्या इस फैसले का सत्येंद्र जैन के मामले पर असर पड़ा? यह सवाल अब भी बना हुआ है. कई कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जमानत के लिए रास्ता साफ किया.

    ED का विरोध और कोर्ट का तर्क

    ED ने जैन की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया था. हालांकि, कोर्ट ने माना कि जैन जेल में काफी समय बिता चुके हैं और मुकदमे में अभी समय लगेगा. कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया मामले में निर्धारित मापदंडों के आधार पर सत्येंद्र जैन भी जमानत के हकदार हैं. क्या ED के पास पर्याप्त सबूत हैं, ये एक महत्वपूर्ण सवाल है.

    व्यक्तिगत स्वतंत्रता का महत्व

    अदालत ने अपने फैसले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया. यह फैसला PMLA जैसे सख्त कानूनों से जुड़े मामलों में एक अहम पहलू है. कोर्ट ने कहा कि लंबी हिरासत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकती है.

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    जैन को जमानत मिलने के बाद AAP नेताओं में खुशी का माहौल है. मनीष सिसोदिया ने X पर एक पोस्ट में इस फैसले को ‘तानाशाही का तमाचा’ बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे आरोपों के आधार पर जैन को जेल में रखा गया. वहीं, BJP ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और मामले में ED द्वारा जाँच को जारी रखने का आह्वान किया है. यह स्पष्ट है कि यह मामला राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बिंदु बना हुआ है.

    सत्येंद्र जैन की बेटी का बयान

    सत्येंद्र जैन की बेटी श्रेया जैन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “हमें हमेशा से यकीन था कि ऐसा होगा, यह बस समय की बात थी.” उन्होंने इस फैसले को जल्दी आई दिवाली की तरह बताया.

    टेक अवे पॉइंट्स

    • सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिली है.
    • जमानत सशर्त है, उन्हें देश से बाहर नहीं जा सकते और मुकदमे को प्रभावित नहीं कर सकते.
    • कोर्ट ने मनीष सिसोदिया मामले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया.
    • ED ने जमानत का विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने लंबी हिरासत और मुकदमे में समय लगने का तर्क दिया.
    • यह फैसला राजनीतिक तौर पर अहम है और कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
  • हरदोई सड़क हादसा: 5 की मौत, 4 घायल

    हरदोई सड़क हादसा: 5 की मौत, 4 घायल

    हरदोई सड़क हादसा: शादी की खुशियां हुईं मातम में तब्दील, 5 की मौत, 4 घायल

    उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों भरे शादी समारोह को मातम में बदल दिया है। एक कार में सवार होकर शादी समारोह से लौट रहे 9 लोगों पर हादसे का साया छा गया। इस दर्दनाक घटना में 5 लोगों की मौत हो गई और 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के कटरा बिल्हौर हाईवे पर हुआ, जब उनकी कार एक बस से टकरा गई। यह खबर सुनकर हर किसी के दिल में सिहरन दौड़ गई है।

    हादसे का मंजर: कैसे हुई ये दर्दनाक घटना?

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार कार और बस की आमने-सामने की भीषण टक्कर हुई। कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दुखद खबर ये है कि 5 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है और हमें सतर्क रहने की याद दिलाता है।

    बचाव और राहत कार्य

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का काम किया गया। पुलिस द्वारा हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और वाहन चालकों से पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही, अधिकारियों ने हादसे के पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

    मुख्यमंत्री का संज्ञान और निर्देश

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भीषण सड़क हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने प्रशासन को घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद पहुंचाएं और मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट दें। मुख्यमंत्री जी के त्वरित कार्रवाई ने प्रभावितों को कुछ राहत दी है।

    सरकारी मदद का वादा

    सरकार ने हादसे में मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद का ऐलान किया है। साथ ही, घायलों के इलाज का खर्चा सरकार वहन करेगी। ये कदम सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और उनके प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

    सड़क सुरक्षा: जरूरी है जागरूकता और सावधानी

    यह हादसा हमें सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की याद दिलाता है। तेज रफ्तार वाहन चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी, और लापरवाही से कई बार जानलेवा हादसे हो जाते हैं। हमें सभी को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा और जागरूकता फैलाकर इस तरह के हादसों को रोकने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

    कैसे बचें सड़क हादसों से?

    • गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करें।
    • हमेशा सीट बेल्ट लगाएँ।
    • तेज रफ्तार से गाड़ी न चलाएँ।
    • शराब पीकर गाड़ी न चलाएँ।
    • यातायात नियमों का पालन करें।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • हरदोई में हुए सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत और 4 घायल हुए हैं।
    • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख व्यक्त किया और घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए।
    • सरकार पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद मुहैया कराएगी।
    • सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • कानपुर में रेलवे पुलिस की बहादुरी: 11 सेकंड में बची महिला की जान

    कानपुर में रेलवे पुलिस की बहादुरी: 11 सेकंड में बची महिला की जान

    कानपुर में रेलवे पुलिसकर्मी की सतर्कता से महिला की जान बचाई

    कानपुर सेंट्रल में एक दिल दहला देने वाली घटना में, एक रेलवे पुलिसकर्मी ने अपनी तेजतर्रार कार्रवाई से एक महिला की जान बचाई। यह घटना तब हुई जब महिला अपने बच्चों को ट्रेन में चढ़ाने के बाद खुद ट्रेन में चढ़ गई, लेकिन बच्चे गलती से ट्रेन से बाहर रह गए. चलती ट्रेन में बच्चों का इंतजार करते हुए महिला ने ट्रेन से छलांग लगा दी और वो ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गई।

    जीआरपी कर्मचारियों की बहादुरी

    रेलवे पुलिसकर्मी की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई के कारण ही महिला को बाल-बाल बचाया जा सका। पुलिसकर्मी ने महिला को चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच से निकालकर उसे सुरक्षित बचा लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है और हर तरफ लोग रेलवे पुलिस की तारीफ़ कर रहे हैं।

    11 सेकेंड की जानलेवा दौड़

    यह घटना 23 नवंबर की है, जब दिल्ली जाने वाली श्रमशक्ति एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर एक से रवाना हुई। एक महिला कोच के गेट पर अपने बच्चों को अंदर बुलाने की कोशिश कर रही थी। जैसे ही ट्रेन चलने लगी, उसे एहसास हुआ कि उसके बच्चे प्लेटफॉर्म पर रह गए हैं। उसने ट्रेन से कूदने की कोशिश की, लेकिन वो ट्रेन और प्लेटफॉर्म के खतरनाक गैप में फंस गई। 11 सेकंड में, जीआरपी के जवानों ने उसे बाहर निकाल लिया, जिससे उसकी जान बच गई।

    वायरल वीडियो और लोगों की प्रतिक्रिया

    इस घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे लोगों ने जीआरपी कर्मचारियों की बहादुरी की खूब तारीफ़ की है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि जीआरपी दौड़ते हुए ट्रेन की तरफ गए और आश्चर्यजनक तेज़ी से महिला को खतरे से बचाया।

    रेलवे पुलिसकर्मी ने क्या बताया

    महिला को बचाने वाले दारोगा शिवसागर शुक्ला ने बताया कि तीन महिलाएं और एक बच्चा ट्रेन से दिल्ली जा रहे थे। जब ट्रेन चलने लगी तो महिला का बच्चा प्लेटफॉर्म पर छूट गया और चीखने लगी। दारोगा जी ने अपनी सूझबूझ से महिला को बचाया।

    ‘जान जोखिम में डालकर बचाई जान’

    उन्होंने बताया कि, “मैं समझ गया था कि महिला ट्रेन से नीचे आने वाली है, और तभी मैंने अपने साथियों के साथ उसे बचाने के लिए दौड़ लगा दी। महिला की जान को बचाते हुए हम खुद भी खतरे में आ गए थे लेकिन महिला को समय पर बचा लिया गया”। उन्होंने अपनी बहादुरी के लिए मीडिया का शुक्रिया अदा किया।

    बचाव कार्य में महत्वपूर्ण पहलू

    इस घटना से हमें कई महत्वपूर्ण बातें समझने को मिलती हैं: रेलवे सुरक्षा में जीआरपी की भूमिका, पुलिस की तत्परता, और अचानक घटनाओं में तेज़ प्रतिक्रिया की ज़रूरत। यह भी याद दिलाता है कि यात्रियों की सुरक्षा बनाए रखना कितना ज़रूरी है, खासकर व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर।

    सुरक्षा उपायों पर ध्यान

    रेलवे प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी उपाय मौजूद हैं और उचित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाए। रेलवे स्टेशनों पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और जागरूकता फैलाने की भी ज़रूरत है।

    ‘Take Away Points’

    • रेलवे पुलिस की सतर्कता से एक महिला की जान बच गई
    • जीआरपी के जवानों की तेज-तर्रार कार्रवाई की सभी ने तारीफ़ की
    • घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ
    • रेलवे प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए
    • यात्रियों को भी सतर्क रहने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की आवश्यकता है।
  • संजीव नासियार: डिग्री विवाद और राजनीतिक तूफ़ान

    संजीव नासियार: डिग्री विवाद और राजनीतिक तूफ़ान

    संजीव नासियार का मामला: क्या है पूरा सच?

    दिल्ली विधिज्ञ परिषद के उपाध्यक्ष संजीव नासियार की कानून की डिग्री की प्रामाणिकता पर उठे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में तूफ़ान सा मचा दिया है। क्या यह मामला सिर्फ़ एक डिग्री की जाँच तक सीमित है या इसके पीछे कुछ और ही राज़ छुपे हैं? आइये जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक पहलुओं को।

    नासियार की डिग्री पर उठे सवाल

    भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) ने संजीव नासियार की एलएलबी (ऑनर्स) डिग्री की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। BCI ने एक जाँच समिति गठित की जिसने पाया कि नासियार की डिग्री की प्रामाणिकता संदिग्ध है। इस रिपोर्ट के बाद BCI ने नासियार को दिल्ली विधिज्ञ परिषद के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है और सीबीआई से मामले की जाँच का अनुरोध किया है। यह निर्णय कानूनी पेशे की साख और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए लिया गया है।

    आप का विरोध और राजनीतिक आरोप

    आम आदमी पार्टी (आप) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। पार्टी का मानना है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और नासियार को उनके वैचारिक समर्थन के लिए दंडित किया जा रहा है। आप नेता दुर्गेश पाठक ने आरोप लगाया है कि BCI ने डेढ़ साल पुरानी एक हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाई गई शिकायत को सीबीआई को भेजकर नासियार को उनके पद से हटा दिया है। पाठक का दावा है कि यह ‘घोर अन्याय’ है।

    कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई

    मामले की जाँच अब सीबीआई के हाथों में है। सीबीआई की जाँच रिपोर्ट नासियार के भविष्य और इस पूरे विवाद के समाधान में अहम भूमिका निभाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या इस मामले में कोई और राजनीतिक मोड़ आता है। इस मामले में सबकी नज़रें अब सीबीआई की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

    जनता का विश्वास बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण

    यह मामला कानूनी पेशे की साख और जनता के विश्वास को बनाए रखने की महत्ता को दर्शाता है। यह आवश्यक है कि कानूनी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। इस घटनाक्रम से यह साफ़ पता चलता है कि कानूनी पेशेवरों की योग्यता और नैतिकता की जाँच होना अत्यंत ज़रूरी है।

    टेकअवे पॉइंट्स

    • संजीव नासियार की कानून की डिग्री की प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं।
    • BCI ने नासियार को दिल्ली विधिज्ञ परिषद के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है।
    • आप ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
    • मामले की जाँच अब सीबीआई कर रही है।
    • यह मामला कानूनी पेशे की साख और जनता के विश्वास को बनाए रखने की महत्ता को दर्शाता है।
  • संभल हिंसा: एक विस्तृत विश्लेषण

    संभल हिंसा: एक विस्तृत विश्लेषण

    संभल हिंसा: एक विस्फोटक घटना जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया!

    उत्तर प्रदेश के संभल में हुई भीषण हिंसा ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। रविवार को हुई इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस खूनी झड़प ने सांप्रदायिक सौहार्द को गहरा धक्का दिया है और कई सवाल खड़े किए हैं। क्या थी इस हिंसा की असली वजह? क्या पुलिस ने सही तरीके से काम किया? क्या इस हिंसा को रोका जा सकता था? आइए, इस लेख में हम संभल हिंसा के सभी पहलुओं पर गौर करेंगे और जानेंगे कि आखिर क्या हुआ था और इसके क्या निष्कर्ष निकलते हैं।

    जामा मस्जिद सर्वे और उसके बाद का बवाल

    यह सब शुरू हुआ एक स्थानीय अदालत के आदेश के साथ जिसने जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। इस सर्वे को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाए गए कि इस सर्वे का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव फैलाना था। सर्वे के बाद, स्थिति हाथ से निकल गई और प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, वाहनों में आग लगाई और पुलिस पर हमला किया, जबकि पुलिस ने आंसू गैस के गोले और लाठियां चलाकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की।

    हिंसा में चारों तरफ फैला भय

    इस हिंसा के दौरान भय का माहौल छाया रहा। कई लोग अपने घरों में कैद थे, डर के मारे अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। दुकानें बंद हो गई, सड़कों पर सन्नाटा पसर गया और एक ऐसा माहौल बन गया जैसे कोई युद्ध चल रहा हो। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा डरे हुए थे, और हिंसा के दौरान हुए भारी नुकसान का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।

    घायलों और मृतकों का दर्दनाक सच

    संभल हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई, और कई अन्य घायल हो गए। 20 पुलिसकर्मियों सहित, कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं और उनके परिवार दुख में डूबे हुए हैं। इस हिंसा ने एक बार फिर इस सच्चाई को सामने ला दिया कि इस तरह की घटनाओं से सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को होता है।

    राजनीति में उठे सवाल

    संभल हिंसा ने राजनीति में तूफान ला दिया है। विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने सांप्रदायिक तनाव को भड़काने दिया और हिंसा को रोकने में नाकाम रही। कई लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने भी सरकार पर तीखा हमला किया है। समाजवादी पार्टी के नेता ने एक ट्वीट में सर्वोच्च न्यायालय से इस घटना का संज्ञान लेने का अनुरोध भी किया है।

    क्या सरकार ने समय पर कदम उठाया?

    सरकार की तरफ से जो भी कदम उठाए गए, वह पर्याप्त थे या नहीं, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है जिस पर विचार करने की जरूरत है। समय रहते सख्त कार्रवाई न किये जाने से इस हिंसा को रोकना बहुत कठिन हो गया होगा। यह पूछना बहुत जरुरी है कि क्या सुरक्षाबलों को आक्रामक भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और साधनों से लैस किया गया था?

    चंद्रशेखर आजाद का बयान

    भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घायलों से मिलने और सच्चाई को उजागर करने की बात कही है।

    संभल हिंसा के बाद उठे मुद्दे और चुनौतियाँ

    संभल हिंसा ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया है। सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने की चुनौती, हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र की आवश्यकता, पुलिस की भूमिका, और राजनीति का इस तरह की घटनाओं में रोल सब महत्वपूर्ण प्रश्न है जिनपर ध्यान देने की जरूरत है।

    सामाजिक सौहार्द कैसे बनाए रखें?

    इस घटना ने देश में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस तरह के संघर्ष को भविष्य में रोकने के लिए समुदाय के लोगों के बीच संवाद और आपसी विश्वास बनाना महत्वपूर्ण है। धार्मिक नेताओं की भूमिका यहाँ महत्वपूर्ण है, उनका सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में अहम योगदान हो सकता है।

    NSA के तहत कार्रवाई और आगे की चुनौतियाँ

    हिंसा में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने का निर्णय, इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस घटना को गंभीरता से ले रहा है। पर यह भी पूछना महत्वपूर्ण है कि क्या NSA का इस्तेमाल सही तरीके से किया जा रहा है? क्या केवल यह कार्रवाई इस समस्या के जड़ से निपटने के लिए काफी होगी या यह केवल लक्षणों पर ध्यान देने जैसा है?

    टेक अवे पॉइंट्स

    • संभल हिंसा एक भयानक घटना है जिसने चार लोगों की जान ले ली और कई को घायल कर दिया।
    • जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में यह हिंसा भड़की।
    • इस हिंसा ने राजनीति में तूफान ला दिया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
    • सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने, हिंसा को रोकने, और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
  • डिजिटल गिरफ्तारी: सावधान रहें, ठगों के जाल में न फँसें

    डिजिटल गिरफ्तारी: सावधान रहें, ठगों के जाल में न फँसें

    डिजिटल गिरफ्तारी का खेल: कैसे ठग बनाते हैं आपको अपना शिकार?

    क्या आप जानते हैं कि कैसे साइबर अपराधी आपको डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठग सकते हैं? यह लेख आपको उन तकनीकों के बारे में बताएगा जिनका उपयोग ये ठग करते हैं और आपको कैसे सतर्क रहना चाहिए। हम आपको ऐसे वास्तविक अनुभवों से अवगत कराएंगे जिससे आप सावधान हो सकते हैं और खुद को ठगी से बचा सकते हैं।

    साइबर ठगों की चालें: कैसे वे आपको निशाना बनाते हैं?

    ये ठग आपको एक रिकॉर्डेड फोन कॉल से संपर्क करते हैं, जिसमें आपको बताया जाता है कि आपका आधार कार्ड या मोबाइल नंबर किसी अपराध में शामिल है। इसके बाद आपको एक नंबर दिया जाता है जिस पर संपर्क करने को कहा जाता है। यह कॉल एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो खुद को पुलिस अधिकारी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का सदस्य बताता है।

    पुलिस की वर्दी और फर्जी दस्तावेज़ों का प्रयोग

    इन ठगों का सबसे चौंकाने वाला तरीका यह है कि वे वीडियो कॉल के जरिए आपको एक पुलिस वाले के रूप में दिखाई देते हैं। वे एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जैसे वे किसी थाने में बैठे हों। उनके पीछे पुलिस का लोगो और तमाम सामान दिखाई देता है।

    यह सब इसलिए किया जाता है ताकि आपके मन में उन पर विश्वास पैदा हो।

    Google पर सर्च करने का दबाव

    अक्सर आपको उस थाने के संपर्क नंबर को Google पर सर्च करके वेरिफाई करने को कहा जाता है। जिस थाने का नंबर दिखाया जाता है, वह वास्तव में मौजूद होता है, लेकिन ठग उस नंबर के जरिए अपनी साजिश को अंजाम देते हैं।

    फर्जी वेबसाइटें और डराने की रणनीति

    फिर ये ठग आपको एक लिंक भेजते हैं, जिस पर क्लिक करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट खुलती है। इस वेबसाइट में केस नंबर डालने पर एक फर्जी अरेस्ट वारंट दिखाई देता है।

    पैसा निकालने की योजना

    यह पूरी कहानी इस तरह बुनी जाती है कि ठगी का शिकार हुआ व्यक्ति आतंकित हो जाए और ठगों के जाल में फँस जाए।

    ये अपराधी शुरू में कुछ सामान्य सवाल पूछते हैं जैसे आपका नाम, आधार कार्ड नंबर, परिवार के सदस्यों की जानकारी, बैंक खाते और कमाई के बारे में। यह सारी जानकारी इकठ्ठा करने के बाद, आपको डराने धमकाने और फिर फीस के नाम पर पैसा मांगने की शुरुआत करते हैं।

    बचाव के उपाय: खुद को कैसे बचाएं?

    यहाँ कुछ उपाय दिए गए हैं जिससे आप खुद को डिजिटल गिरफ़्तारी जैसे ठगी से बचा सकते हैं:

    • किसी अनजान नंबर से आने वाली कॉल का तुरंत जवाब न दें।
    • अगर कोई अनजान नंबर पर आपको ऐसा कॉल आता है, तो उसकी तुरंत रिपोर्ट करें।
    • सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करें।
    • कभी भी अपने व्यक्तिगत या बैंक डिटेल किसी अनजान व्यक्ति को न बताएँ।

    Take Away Points

    डिजिटल गिरफ़्तारी का यह खेल बहुत ही खतरनाक है। इससे बचने के लिए, आपको सतर्क रहने और सावधानी बरतने की जरूरत है। याद रखें, कोई भी सरकारी अधिकारी आपसे कभी भी फोन पर आपकी व्यक्तिगत या बैंक की जानकारी नहीं मांगेगा। अगर ऐसा होता है, तो तुरंत ही उसे रिपोर्ट करें।

  • संभल हिंसा: क्या मस्जिदें अब निशाना बन रही हैं? शिया धर्मगुरु का दर्दनाक इज़हार

    संभल हिंसा: क्या मस्जिदें अब निशाना बन रही हैं? शिया धर्मगुरु का दर्दनाक इज़हार

    संभल हिंसा: क्या मस्जिदें अब निशाना बन रही हैं? शिया धर्मगुरु का दर्दनाक इज़हार

    क्या आप जानते हैं कि यूपी के संभल में हुई हिंसा ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है? क्या वाकई में मस्जिदें अब निशाना बन रही हैं? शिया धर्मगुरु कल्बे सिब्तैन ने इस घटना को बेहद अफसोसनाक बताया है और आम मुसलमानों की चिंता को जाहिर किया है. आइये, जानते हैं पूरी कहानी…

    संभल हिंसा: एक दर्दनाक सच्चाई

    संभल में हुई हिंसा की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. तीन नौजवानों की मौत हो गई, और कई घायल हुए. यह घटना सिर्फ़ हिंसा की नहीं, बल्कि एक बड़े सवाल की भी निशानी है: क्या मस्जिदों को अब जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है?

    मस्जिदों पर सर्वे: एक बढ़ता सवाल

    कल्बे सिब्तैन के अनुसार, मस्जिदों पर सर्वे का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है. कई बार, बिना मुस्लिम पक्ष को सुने, एकतरफा सर्वे के आदेश दिए जा रहे हैं. यह एक बड़ी चिंता का विषय है, जो धार्मिक सौहार्द को खतरे में डालता है.

    आरएसएस प्रमुख का बयान: अनसुना सच

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने हर मस्जिद में मंदिर ढूंढने की कोशिश ना करने का आह्वान किया था, कल्बे सिब्तैन ने कहा कि इस महत्वपूर्ण बयान को भी अनसुना कर दिया जा रहा है. यह एक गंभीर बात है और साफ़तौर पर ये सवाल उठाती है कि क्या वाकई कुछ ताकतें मस्जिदों को निशाना बनाना चाहती हैं?

    एक समाधान: मस्जिदों की चाबियाँ सौंपना?

    इस स्थिति से निपटने के लिए कल्बे सिब्तैन ने एक विचार रखा है: सभी मस्जिदों की चाबियाँ उन संगठनों को सौंप देना जो हिंसा फैलाने में शामिल नहीं हैं और अपने घरों में नमाज पढ़ना शुरू कर देना. यह बात ज़रूर विचलित करने वाली लग सकती है, लेकिन यह उनकी चिंता की गहराई को दर्शाता है.

    एक बढ़ती हुई बेचैनी

    लाखों मुसलमानों के दिल में यह डर बैठ गया है कि उनकी मस्जिदें निशाना बन सकती हैं. यह डर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के बिल्कुल विपरीत है. यह बेहद अफ़सोसजनक है कि एक ऐसा माहौल पैदा हो रहा है जहाँ एक धार्मिक समुदाय को खुद को असुरक्षित महसूस करना पड़ रहा है.

    राजनीतिक दलों की ज़िम्मेदारी

    कल्बे सिब्तैन ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे राजधर्म निभाएँ और सभी के साथ इंसाफ़ करें. उन्होंने कहा कि सभी को समान न्याय मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी समुदाय से हो.

    कुंदरकी उपचुनाव और सर्वे का सवाल

    उन्होंने कुंदरकी उपचुनाव में बीजेपी को मिले मुस्लिम वोटों का ज़िक्र करते हुए सवाल उठाया कि मतगणना के अगले दिन ही सर्वे क्यों शुरू कर दिया गया. उन्होंने इस जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए संदेह जताया कि क्या इसके पीछे कोई साज़िश है?

    आगे का रास्ता: न्याय और सौहार्द

    संभल हिंसा की घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए, कल्बे सिब्तैन ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और बेगुनाहों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि ऐसे हालात न बनें जिससे मुस्लिम वर्ग को अन्याय का शिकार होना पड़े.

    भविष्य के लिए सबक

    संभल की घटना से सबक सीखते हुए, हमें धार्मिक सौहार्द और न्यायपूर्ण व्यवहार को प्राथमिकता देनी चाहिए. सभी को कानून के सामने समान समझा जाना चाहिए, और किसी भी तरह की भेदभाव पूर्ण कार्रवाई अस्वीकार्य है. सभी को मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहाँ सभी समुदाय शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें।

    Take Away Points

    • संभल हिंसा की घटना ने धार्मिक सौहार्द पर सवाल उठाया है.
    • मस्जिदों पर सर्वे और बढ़ता डर एक बड़ी चिंता है.
    • राजनीतिक दलों को राजधर्म निभाना चाहिए और सभी के साथ इंसाफ़ करना चाहिए.
    • न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है।
    • धार्मिक सौहार्द बनाए रखना और सभी समुदायों के बीच समानता स्थापित करना आवश्यक है।
  • दिल्ली में गोलीबारी: क्या है पूरा मामला?

    दिल्ली में गोलीबारी: क्या है पूरा मामला?

    दिल्ली में गोलीबारी: क्या है पूरा मामला?

    दिल्ली की राजधानी में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने एक बार फिर से शहर को दहला दिया है। वेलकम इलाके में दो गुटों के बीच हुई इस भीषण झड़प में एक युवती गंभीर रूप से घायल हो गई है। इस घटना ने दिल्लीवासियों में दहशत और चिंता फैला दी है। आइए, जानते हैं इस घटना से जुड़ी हर अहम जानकारी:

    घटना का विवरण

    शनिवार को नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के वेलकम इलाके के जेड ब्लॉक में दो गुटों के बीच हुई इस गोलीबारी में लगभग 60 राउंड गोलियां चलाई गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, गोलीबारी इतनी तेज थी कि आसपास के लोग दहशत में आ गए। इस दौरान एक 22 वर्षीय युवती, जो घर की बालकनी में खड़ी थी, गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस की कार्रवाई

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। उन्होंने मामले की जांच शुरू कर दी है और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। उत्तर पूर्वी दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गोलीबारी जींस के थोक विक्रेताओं के बीच हुए पैसों के लेनदेन को लेकर हुए विवाद का नतीजा है। पुलिस ने मौके से कई खाली कारतूस, जिंदा कारतूस और अन्य सबूत बरामद किए हैं।

    घायल युवती की हालत

    घायल युवती, जिसका नाम इफरा है, का इलाज जीटीवी अस्पताल में चल रहा है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, उसका जीवन खतरे से बाहर है।

    क्या है पूरा मामला?

    पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गोलीबारी दो जींस के थोक विक्रेताओं के बीच पैसे के लेनदेन को लेकर हुए विवाद का परिणाम है। दोनों पक्षों के बीच पहले से ही कहासुनी चल रही थी, जो बाद में हिंसक रूप ले लिया। इस घटना से साफ है कि दिल्ली में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा भी कभी-कभी खतरनाक रूप ले सकती है।

    आगे क्या?

    पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि वे इस मामले में सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं ताकि इस घटना के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

    दिल्ली में बढ़ती अपराध दर

    यह घटना दिल्ली में बढ़ती जा रही अपराध दर का एक और उदाहरण है। हाल के वर्षों में, दिल्ली में अपराध के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस तरह की घटनाओं से दिल्लीवासियों में डर और असुरक्षा का भाव बढ़ता है। सरकार को दिल्ली की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने होंगे।

    समाधान के उपाय

    दिल्ली में अपराध को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को और अधिक सतर्क रहना होगा। साथ ही, लोगों को भी जागरूक होने और अपनी सुरक्षा के प्रति सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

    निष्कर्ष

    यह घटना दिल्ली के लिए एक चिंता का विषय है। इससे लोगों में डर और असुरक्षा का भाव बढ़ा है। सरकार और पुलिस को मिलकर दिल्लीवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

    टेकअवे पॉइंट्स

    • दिल्ली के वेलकम इलाके में हुई गोलीबारी में एक युवती घायल हुई।
    • गोलीबारी दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी।
    • पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।
    • यह घटना दिल्ली में बढ़ती अपराध दर की ओर इशारा करती है।
  • दिल्ली में आदिवासी कला प्रदर्शनी: एक अद्भुत अनुभव

    दिल्ली में आदिवासी कला प्रदर्शनी: एक अद्भुत अनुभव

    दिल्ली में आयोजित ‘साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर’ नामक आर्ट एग्जीबिशन ने आदिवासी कला और संस्कृति को विश्व पटल पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है! इस प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न कोनों से एकत्रित आदिवासी कलाकृतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आर्ट शो में न सिर्फ़ खूबसूरत कलाकृतियाँ देखने को मिलीं, बल्कि आदिवासी जीवन और संस्कृति की गहरी समझ भी प्राप्त हुई। आइए, इस प्रदर्शनी के रोमांचक पहलुओं पर विस्तार से नज़र डालते हैं!

    आदिवासी कला का जादू: एक अनोखा संग्रह

    ‘साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर’ प्रदर्शनी ने देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित की गई आदिवासी कलाकृतियों का अनोखा संग्रह प्रस्तुत किया। इन कलाकृतियों में चित्रकारी, मूर्तियां, हस्तशिल्प, और वस्त्र शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक अपनी अनोखी शैली और तकनीक से भरपूर था। इन कलाकृतियों से आदिवासी जीवनशैली, मान्यताएँ, और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंधों की झलक मिली।

    रंगों का खेल: आदिवासी चित्रकारी का आकर्षण

    प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्रकारियों ने अपनी जीवंत रंग योजनाओं और आकर्षक डिज़ाइनों से दर्शकों को मोहित किया। इन चित्रों में प्रकृति, पशु-पक्षी, और आदिवासी जीवन के विभिन्न पहलुओं का सटीक चित्रण किया गया था। प्रत्येक चित्र में आदिवासी कलाकारों की कलात्मकता और कल्पनाशीलता झलकती थी।

    कारीगरी का कमाल: हस्तशिल्प और वस्त्रों की विविधता

    आदिवासी हस्तशिल्प और वस्त्रों ने भी प्रदर्शनी में अपनी खास जगह बनाई। इनमें लकड़ी के नक्काशीदार सामान, मिट्टी के बर्तन, और रंग-बिरंगे वस्त्र शामिल थे। प्रत्येक वस्तु में पारंपरिक तकनीकों का बेहतरीन उपयोग किया गया था, जो कलाकारों के कौशल और परंपराओं के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करता था।

    हाशिए के कलाकारों की आवाज़

    इस एग्जीबिशन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों की कला और संस्कृति को मुख्यधारा में लाना था। यह प्रदर्शनी उन कलाकारों को एक मंच प्रदान करती है जो आमतौर पर हाशिये पर रहते हैं। इसके माध्यम से, इन कलाकारों की प्रतिभा और कहानियों को दुनिया तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

    एक वैश्विक मंच

    ‘साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर’ केवल एक आर्ट एग्जीबिशन नहीं, बल्कि एक वैश्विक संवाद का मंच था। इस प्रदर्शनी ने दुनिया भर से लोगों को आदिवासी कला और संस्कृति से जोड़ा, जिससे विभिन्न संस्कृतियों के बीच सम्पर्क और समझदारी बढ़ी।

    अंत्योदय का संदेश

    एग्जीबिशन के उद्घाटन समारोह में विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा अंत्योदय योजना का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि कैसे सरकार हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान के लिए काम कर रही है। यह योजना भारत के विकास में सभी के समान सहयोग को सुनिश्चित करती है।

    संरक्षण और सम्मान: एक संयुक्त प्रयास

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी ने संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। यह दिखाता है कि कैसे कला और संस्कृति के संरक्षण से पर्यावरण और आदिवासी समुदायों का समर्थन किया जा सकता है।

    साझेदारी का महत्व

    इस प्रदर्शनी के आयोजन में कई संस्थाओं की भागीदारी ने सहयोगात्मक प्रयास के महत्व को रेखांकित किया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, सांकला फाउंडेशन, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस जैसे संगठनों ने मिलकर इस प्रदर्शनी को सफल बनाया।

    टाइगर रिजर्व्स का संरक्षण और आदिवासी कला का संरक्षण: एक साथ जुड़े हुए

    ‘हिडेन ट्रेजर्स: इंडियाज हेरिटेज इन टाइगर रिजर्व्स’ नामक पुस्तक और ‘बिग कैट्स’ नामक पत्रिका के विमोचन ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है – टाइगर रिजर्व्स के संरक्षण के साथ ही आदिवासी कला और संस्कृति को भी संरक्षित करना होगा। यह दोनों आपस में जुड़े हुए हैं, और हम सभी का दायित्व बनता है कि हम इनकी रक्षा करें।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • ‘साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर’ प्रदर्शनी ने आदिवासी कला और संस्कृति को वैश्विक मंच प्रदान किया।
    • इस प्रदर्शनी ने हाशिए पर पड़े कलाकारों को उनकी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया।
    • प्रदर्शनी में शामिल विभिन्न कलाकृतियों ने आदिवासी जीवन और संस्कृति की समृद्धि को दर्शाया।
    • प्रदर्शनी में पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों के उत्थान का संदेश भी दिया गया।
    • विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से इस प्रदर्शनी ने संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।