Category: state-news

  • WEST BENGAL :ममता ने लिया वर्चुअल माध्यम का सहारा 2021 के चुनाव के लिए…

    [object Promise]

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने एक साल के भीतर होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्यभर के पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ने के लिए और उन तक अपनी पहुंच बनाने के लिए वर्चुअल माध्यमों का सहारा लिया है। गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण चुनाव को अभी तक स्थगित करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी आज शाम को 2021 चुनाव के लिए पार्टी के प्रचार अभियान के लिए ब्लूप्रिंट को लेकर पार्टी विधायकों, सांसदों, जिला अध्यक्षों और अन्य नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने वाली हैं।

    इस उच्च स्तरीय बैठक में बनर्जी कोरोना संकट और उसके बाद के ‘नए सामान्य’ परिस्थितियों पर चर्चा करेंगी। गौरतलब है कि कोविड-19 से दुनिया भर में सामाजिक भीड़ को लेकर समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि तृणमूल सुप्रीमो आगामी चुनावों से पहले राज्य भर के सभी मतदाताओं के साथ जुड़ने के लिए पूरी तरह से नई अभियान नीति बनाएंगी, क्योंकि कोविड -19 की स्थिति को देखते हुए बैठक, रैली निकालने जैसे कार्यों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाएगा।

    सूत्रों ने आगे बताया कि पार्टी जनता तक पहुंचने के लिए अपने सोशल मीडिया टूल पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है। इसके लिए जमीनी स्तर के कार्यकतार्ओं को भी जिलों में मतदाताओं से जुड़ने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करने को लेकर और वर्चुअल अभियान चलाने को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    तृणमूल सुप्रीमो ने यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बिहार में होने वाली 7 जून को भाजपा की वर्चुअल रैली के मद्देनजर बुलाई है। इसमें शाह इंटरनेट के माध्यम से 60,000 बूथों पर पार्टी कार्यकतार्ओं को लाइव-स्ट्रीम से संबोधित करेंगे।

  • मांझी के आवास पर देर रात मिले कुशवाहा , सहनी, महागठबंधन को लेकर हुई चर्चा

    [object Promise]

    पटना। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं वहीं दोनों गठबधनों में शामिल दल अपने नफो-नुकसान को लेकर तौल-मोल कर रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार रात विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल तीन दलों ने आपस में मुलाकात की और बिहार तथा महागठबंधन को लेकर चर्चा की।

    सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के आवास पर देर रात तक चली इस बैठक में राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी शामिल रहे।

    हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने नेताओं की मुलाकात और बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी रात को पूर्व मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे और काफी देर तक इन नेताओं के बीच बातचीत हुई।

    सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में महागठबंधन में सीट बंटवारे तथा महागठबंधन में समन्वय समिति के गठन को लेकर चर्चा की गई। सूत्रों का दावा है कि ये नेता अलग मोर्चा बनाने पर भी विचार कर रहे है।

    इन तीनों पार्टियों के किसी नेता ने भी बैठक का ब्योरा देने से इंकार किया है।

    उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इन तीनों दलों के नेता एक बैठक कर चुके हैं, जिसमें कांग्रेस और राजद को निमंत्रित नहीं किया गया था। राजद और कांग्रेस की गैरहाजरी में हुई इस बैठक को कई लोग कांग्रेस और राजद जैसे बड़े दलों पर दबाव बनाने की भी कोशि बता रहे हैं।

  • 21 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, चलेगी 3 अगस्त तक

    [object Promise]

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में इस साल की अमरनाथ यात्रा 21 जुलाई से शुरू होकर 3 अगस्त को तक चलेगी। यह 15 दिनों की अवधि की होगी। इस बात श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने पुष्टि की है। जो जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में समुद्र तल से 3,880 मीटर ऊपर स्थित गुफा मंदिर में यात्रा के मामलों का प्रबंधन करता है। यात्रा के लिए ‘प्रथम पूजा’ शुक्रवार को आयोजित की गई थी। कोरोनावायरस महामारी के कारण इस बार यात्रा की अवधि में कटौती की गई है। साधुओं को छोड़कर अन्य तीर्थयात्रियों में 55 वर्ष से कम उम्र के लोगों को ही अनुमति दी जाएगी। यात्रा करने वाले सभी लोगों के पास कोविड निगेटिव प्रमाणपत्र होने चाहिए।

    [object Promise]

  • जवान ने दो दिन से भूखी बच्ची को ट्रेन के पीछे दौड़कर पिलाया दूध, रेल मंत्री बोले….

    [object Promise]

    भोपाल। कोरोना महामारी के संकट के दौर में सुखद तस्वीरें भी नजर आ रही है। भोपाल से गुजरती एक गाड़ी में सवार तीन माह की बच्ची की भूख को मिटाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल के जवान ने दूध का पैकेट बच्चे की मां तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस घटनाक्रम के वीडियों को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपने ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है कि ‘एक हाथ में राइफल और एक हाथ में दूध। किस तरह भारतीय रेलवे ने उसैन बोल्ट को पछाड़ा।’

    वाक्या भोपाल के रेलवे स्टेशन का है, कर्नाटक से बेलगांव से गोरखपुर श्रमिक ट्रेन जा रही थी। इसमें साफिया अपनी तीन माह की बच्ची के साथ सफर कर रही थी। वे जब गाड़ी में सवार हुई तो बच्ची क लिए दूध रखना भूल गई। बच्ची दो दिन से भूखी थी। भोपाल रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ जवान इंदर सिंह यादव को साफिया ने बच्ची के लिए दूध लाने की बात कही।

    आरपीएफ जवान इंदर यादव से साफिया ने बच्ची के लिए दूध लाने का आग्रह किया। इंदर स्टेशन के बाहर दूध लेने गया, जब लौटा तो गाड़ी चल दी थी। इंदर उस कोच की तरफ दौड़ा जिसमें साफिया सवार थी। वह अपनी कोशिश में कामयाब रहा। एक हाथ में रायफल और दूसरे में दूध लिए इंदर की भागते हुए तस्वीर प्लेटफार्म पर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। इंदर की यह कोशिश जरुरतमंद की मदद का संदेश देने वाली है।

    रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस घटनाक्रम के वीडियो को अपने ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है। एक हाथ में राइफल और एक हाथ में दूध : देखिये किस तरह भारतीय रेलवे ने उसैन बोल्ट को पछाड़ा।

  • बिहार के पूर्वे मुख्यमंत्री भाेला पासवान शास्‍त्री के वंशज तरस रहे पहचान को…

    [object Promise]

    पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड की एक पंचायत गणेशपुर का एक गांव है बैरगाछी, जहां मुफलिसी में जी रहे एक परिवार को सहायता से ज्यादा जरूरत पहचान की है। इस गांव ने न सिर्फ बिहार, बल्कि देश की सियासत को एक नई दिशा दी। अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री बना। भोला पासवान शास्त्री तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रहे। उनकी सादगी और ईमानदारी की मिसाल दी जाती रही है। मुफलिसी में जिंदगी गुजार रहा उनका परिवार आज अपनी पहचान को तरस रहा है।

    गुमनामी में जी रहे स्‍वजन, माली हालत बहुत ही खराब

    बैरगाछ़ी गांव के लोगों की माली हालत अच्छी नहीं कही जा सकती है। उनमें पूर्व मुख्यमंत्री के स्वजन भी हैं। सब मजदूरी कर गुजर-बसर करते हैं। चूंकि शास्त्री जी का कद बहुत बड़ा था, इसलिए आज भी हर राजनीतिक दल के नेता-मंत्री उनकी जयंती पर गांव आते हैं। यह और बात है कि उस परिवार को किसी ने नहीं पूछा, जो उनका असली वारिस होने का दावा करता है। जयंती हो या कोई भी आयोजन, उन्हें बुलावा नहीं आता। अभी तक लोग बिरंची पासवान को ही जानते हैं, जो खुद को उनका भतीजा बताते हैं।

    परिवार में 30 सदस्‍य, परपोते ने इस साल किया 10वीं पास

    भोला पासवान शास्त्री की कोई संतान नहीं थी। तीन भतीजे थे, जो अब जीवित नहीं हैं। उन्हीं का वंश चला आ रहा है, जिसमें उनके एक परपोते बिट्टू पासवान ने इस साल मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा पास की है। अन्‍य बच्चे गांव के ही स्कूल में पढ़ने जाते हैं। परिवार में कुल 30 सदस्य हैं। आज तक कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं पा सका। गांव में पेयजल और शौचालय की कमी है। हां, जब से भाेला पासवान शास्त्री की जयंती मनाई जाने लगी, तब से पक्की सड़क जरूर बन गई है।

    वंशजों का दावा: दूसरे लेते रहे मदद, मामले की जांच शरू

    खुद को उनका भतीजा बताने वाले बिरंची पासवान को गाहे-बगाहे राजनीतिक दलों से मदद मिलती रही है। प्रशासन भी सहयोग करता रहा है। लेकिन अब पूर्व मुख्‍यमंत्री के रक्त संबंधियों ने पहली बार जिलाधिकारी को आवेदन देकर बताया है कि वे लोग ही उनके असली वारिस हैं, उन्हें पहचान चाहिए। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। गांव के टुनटुन पासवान कहते हैं, ”हमने प्रशासन को वंशावली दी है। हमलोग शास्त्री जी के सगे भाई के वंशज हैं, लेकिन हमारी कोई पहचान नहीं। हमें इसका दर्द है।”

    रिसों को पहचान दिलाने में मदद करेगी ग्राम कचहरी

    गणेशपुर पंचायत की सरपंच किरण चौधरी कहती हैं कि शास्त्री जी के असली वारिस वाकई गुमनाम हैं, यह बात आहत करती है। ग्राम कचहरी की अोर से इस दिशा में पहल की जाएगी। गणेशपुर पंचायत के पूर्व मुखिया सुरेन्द्र चौधरी ने भी कहा कि बिरंची पासवान ही शास्त्री जी का भतीजा होने का श्रेय लेते रहे हैं।

    वंशज होने का श्रेय लेने वाले ने दी थी मुखाग्नि

    भोला पासवान शास्‍त्री का वंशज होने का श्रेय लेते रहे बिरंची पासवान स्वीकार करते हैं कि शास्त्री जी के पिता या भाई से उनका सीधा संबंध नहीं है, पर रिश्ते में भतीजा हैं। शास्त्री जी को मुखाग्नि भी दी थी। केनगर के बीडीओ राजेश ठाकुर ने बताया कि वारिस की दावेदारी के संबंध में जांच का आदेश मिला है। वंशावली के आधार पर जांच की जा रही है।

    ईमानदारी के लिए जाने जाते थे भोला पासवान शास्त्री

    भोला पासवान शास्त्री का जन्म 21 सितंबर 1914 और निधन 1984 में हुआ था। उनकी कोई संतान नहीं थी। वे 1968 से 1972 के बीच तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वे अपनी सादगी व ईमानदारी के लिए जाने जाते थे।

  • प्रशांत किशोर को पंजाब CM ने दिया खुला न्योता प्रदेश कांग्रेस की चुनाव मुहिम संभालने के लिए

    [object Promise]

    चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए अपने इरादे फिर से जाहिर किये। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी का नेतृत्व करने का फैसला कांग्रेस अध्यक्ष के हाथ में है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि उन्होंने शुरुआत में साल 2017 के चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बताया था परन्तु इसके बाद अपने पार्टी साथियों द्वारा प्रेरित करने पर साल 2022 के चुनाव लडऩे के फैसले का ऐलान किया था और अब इसमें कोई बदलाव नहीं है।
    साल 2022 में कांग्रेस की चुनाव मुहिम तैयार करने के लिए प्रशांत किशोर को शामिल करने के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि किशोर ने उनकी अपील के प्रति सकारात्मक जवाब दिया था। राज्य में कांग्रेस की मुहिम न संभालने बारे प्रशांत किशोर की तरफ से इन्कार करने सम्बन्धी मीडिया रिपोर्टों में इस बारे अटकलों पर रोक लगाते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, ‘‘किशोर ने कहा है कि पंजाब आकर मदद करने में उसे बहुत खुशी होगी।’’
    मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि अखबारों में वह जो कुछ पढ़ते हैं, उससे अक्सर हैरानी होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रशांत किशोर के मुहिम तैयार करने के मामले पर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विचार-विमर्श किया था जिन्होंने फैसला उन पर छोड़ दिया है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बारे अपनी पार्टी के विधायकों को भी विश्वास में लिया और 80 विधायकों में से 55 विधायक मुहिम संभालने के लिए श्री किशोर को लाने के पक्ष में थे।
    एक सवाल के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब कांग्रेस को सहयोग करने के लिए अपना समर्थन जाहिर करते हुए किशोर ने इस बात से इन्कार किया है कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में नवजोत सिद्धू या आम आदमी पार्टी (आप) के साथ किसी तरह की बातचीत चल रही है। प्रशांत किशोर को पारिवारिक मैंबर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया में चल रही अटकलों और अरविन्द केजरीवाल के दावों के उलट श्री किशोर ने सिद्धू या आप के साथ किसी तरह के संबंध को रद्द किया है।
    कांग्रेस लीडरशिप के साथ सिद्धू के मेल-मिलाप के बारे में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि नवजोत सिद्धू कांग्रेस पार्टी का हिस्सा है और वह इसी क्षमता के मुताबिक पार्टी हाई कमान के संपर्क में है।
    एक अन्य सवाल के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सिद्धू या कांग्रेस के किसी अन्य सदस्य को किसी भी मुद्दे से कोई चिंता है तो वह आकर उनके साथ बातचीत कर सकता है। बेअदबी के मामले पर सिद्धू की नुकताचीनी वाली टिप्पणियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बरगाड़ी और बेअदबी के अन्य मामलों की जांच जारी है परन्तु हम निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किये बिना लोगों को सलाखों के पीछे नहीं भेज सकते। उन्होंने कहा कि बरगाड़ी केस में बहुत से चालान पेश किये जा चुके हैं परन्तु राज्य सरकार अदालतों के कामकाज में दखल नहीं दे सकती।

    [object Promise]

  • MADHYA PRADESH : शिवराज आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम में भाग लेने चौथी बार सीएम बनने के बाद आज पहली बार जाएंगे इंदौर

    [object Promise]

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज (सोमवार को) इंदौर जा रहे है। इंदौर राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित है। चौहान का यह पहला इंदौर दौरा है। इस प्रवास के दौरान कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों से बैठक करेंगे, वहीं उद्योगपतियों से चर्चा भी प्रस्तावित है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री चौहान हवाई मार्ग से दोपहर 12 बजे भोपाल से इंदौर पहुंचेंगे। उसके बाद वे कलेक्टर कार्यालय में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। जिला एवं राज्य स्तर की समीक्षा बैठक लेंगे और कोरोना शहीदों के परिजनों से भेंट करेंगे।

    चौहान अपने प्रवास के दौरान चिकित्सकों से भेंट करेंगे। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास केंद्र द्वारा आयोजित उद्योग संबंधी कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान वर्ष 2015 से 2018 तक आरंभ किए गए विभिन्न प्रोजेक्ट्स का प्रजेंटेशन, समीक्षा और उद्योगपतियों से चर्चा करेंगे। इंदौर जिले के जनप्रतिनिधियों से रेसीडेंसी कोठी में भेंट करेंगे। मुख्यमंत्री चौहान मंगलवार की सुबह इंदौर से भोपाल लौटेंगे।

  • कार्यकर्ताओं के साथ थाली बजाकर शाह की रैली का तेजस्वी, राबड़ी और तेज प्रताप ने किया विरोध

    [object Promise]

    पटना। बिहार में इस साल के अंत में होने वाले संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर अब करीब सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावी मोड में नजर आने लगी हैं। रविवार को भाजपा के नेता और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के लोगों के लिए वर्चुअल रैली करेंगे, वहीं इस रैली के विरोध में राजद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जमकर थाली बजाई। पटना स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी आवास के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी , विधानसभा मे विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव और उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव अपने समर्थको के साथ सड़क पर उतरे और जम कर थाली बजायी।

    इस क्रम में तेजस्वी ने केन्द्र और राज्य सरकार पर मजदूरों के साथ दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह का व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि पूरे देश में करीब 12 करोड़ मजदूर सड़क पर हैं।

    तेजस्वी ने ट्वीट कर लिखा, प्रचार के लिए एक एलईडी स्क्रीन पर औसत खर्च 20,000 रुपये। भाजपा की आज की रैली में 72 हजार एलईडी स्क्रीन लगाए गये है मतलब 144 करोड़ सिर्फ एलईडी स्क्रीन पर खर्च किए जा रहे है। श्रमिक एक्सप्रेस का किराया 600 रुपये था वो देने ना सरकार आगे आयी और न ही भाजपा। इनकी प्राथमिकता गरीब नहीं बल्कि चुनाव है। इसके अलावे राजद के कई नेताओं ने भी अपने घरों से बाहर निकले और थाली बजाई।

    [object Promise]

  • बिहार: BJP आज फूंकेगी चुनावी बिगुल अमित शाह की ऑनलाइन रैली से

    [object Promise]

    पटना| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज बिहार में ऑनलाइन रैली करेंगे। इस रैली को इसी साल अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। किसी राजनीतिक दल की ओर से डिजिटल माध्यम से हो रहे इस तरह के पहले कार्यक्रम को भाजपा जहां प्रत्येक क्षेत्र में सफल बनाने में जुटी है, वहीं इसे लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह भी है।

    भाजपा के एक नेता की मानें तो इस रैली के जरिए शाह जहां कार्यर्काओं में जोश भरने की कोशिश करेंगे, वहीं चुनाव जीतने को लेकर टिप्स भी देंगे।

    इस रैली को लेकर प्रदेश भाजपा मुख्यालय में विशेष इंतजाम किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन पटना से ही होगा। इस दिन मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ संजय जयसवाल, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित सभी वरिष्ठ नेताओं के रहने की संभावना है।

    भाजपा के उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने बताया कि बिहार के सभी विधानसभा क्षेत्रों के बूथों पर लाखों लोग फेसबुक लाइव के माध्यम से अमित शाह को सुनेंगे। ‘बिहार जनसंवाद’ कार्यक्रम को सफल बनाने में पार्टी के सांसद, विधायक, विधान पार्षद, सभी प्रदेश पदाधिकारी, जिला प्रभारी, विधानसभा प्रभारी और चुनाव लड़े हुए पूर्व प्रत्याशी भी लगे हैं।

    उन्होंने कहा कि ‘बीजेपी फॉर बिहार लाइव’ के माध्यम से बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्र के 72 हजार 723 बूथों, संगठनात्मक 45 जिलों के 9547 शक्तिकेंद्र व 1099 मंडलों में भाजपा कार्यकर्ता गृहमंत्री को सुनेंगे। कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सभी जगहों पर बैनर-होर्डिग लगाए जा रहे हैं।

    बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल-युनाइटेड (जदयू) और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के साथ गठबंधन है। शाह पहले ही कह चुके हैं कि विधानसभा चुनाव नीतीश की अगुआई में लड़ा जाएगा।

  • स्कूलों को देनी ही होगी ट्यूशन फीस, बस भाड़ा व अन्य शुल्क नहीं लेंगे अभी

    [object Promise]

    रांची। झारखंड से बड़ी खबर आ रही है। निजी स्कूलों में फीस माफी की शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की घोषणा धरी रह गई है। उलटे निजी स्कूलों को लॉक डाउन अवधि की ट्यूशन फीस अभिभावकों से वसूलने की छूट दे दी। मंत्री निजी स्कूलों से ट्यूशन फीस माफ नहीं करा सके। निजी स्कूलों के प्राचार्यों के साथ मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में हुई बैठक में महज यह तय हुआ कि निजी स्कूल फिलहाल लॉक डाउन अवधि का ट्यूशन फीस अभिभावकों से वसूलेंगे। वहीं, बस भाड़ा सहित अन्य कोई भी शुल्क अभी नहीं लेंगे।

    बैठक में निजी स्कूल ट्यूशन फीस लेने को लेकर अड़े रहे। उनका कहना था कि इस शुल्क से ही वे शिक्षकों और अन्य स्टॉफ का वेतन भुगतान करते हैं। स्कूलों की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। अंत में तय हुआ कि स्कूल फिलहाल टयूशन शुल्क लेंगे। बस भाड़ा तथा अन्य कोई शुल्क अभी नहीं वसूलेंगे। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग शीघ्र ही एक आदेश जारी करेगा।

    प्राइवेट स्‍कूलों में लगेगा ट्यूशन फीस

    • ट्यूशन फीस माफ नहीं करा सके शिक्षा मंत्री, वार्षिक शुल्क पर भी निर्णय नहीं
    • बैठक में ट्यूशन फीस माफ करने को तैयार नहीं हुए निजी स्कूल
    • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद होगा अंतिम निर्णय

    बैठक में मंत्री वार्षिक शुल्क भी माफ नहीं करा सके। बकौल मंत्री, स्कूलों ने इसपर सहमति दी है कि वे दो माह की राशि काटकर वार्षिक शुल्क लेंगे। उनके अनुसार, स्कूलों ने तीन माह तक बस भाड़ा व अन्य शुल्क नहीं लेने की बात स्वीकार की है। निजी स्कूल फीस वृद्धि भी नहीं करेंगे। फीस नहीं देने पर किसी बच्चे का नाम नहीं काटा जाएगा, परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।

    मंत्री के अनुसार, फीस माफी को लेकर अन्य राज्यों का मामला सर्वोच्च न्यायालय तथा दिल्ली हाईकोर्ट में भी लंबित है। न्यायालय का फैसला आने के बाद इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इधर, सीबीएसई स्कूलों के संगठन सहोदया के अध्यक्ष सह डीपीएस स्कूल के प्राचार्य डा. राम सिंह ने कहा कि अभी स्कूलों को ट्यूशन फीस लेने की छूट मिली है।

    अन्य दूसरे तरह का शुल्क प्राइवेट स्कूल अभी नहीं लेंगे। इसपर बाद में निर्णय लिया जाएगा। पिछली बैठक में निजी स्कूलों द्वारा बस शुल्क सहित अन्य रियायतें देने पर बनी सहमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज की बैठक में उसपर कोई चर्चा नहीं हुई है। बता दें कि निजी स्कूल बस भाड़ा माफ करने तथा शुल्क नहीं बढ़ाने को पहले से ही तैयार थे।