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  • MP: दिग्विजय सिंह पार्टी नेताओं में टकरार के बाद बोलें, किसी के खिलाफ नहीं हैं सिंधिया, कांग्रेस पार्टी कमलनाथ के नेतृत्व में एक साथ

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    भोपाल। मध्‍य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ और सिंधिया के बीच चल रही टकरार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी की इस टकरार को दूर करने में जुट गए हैं। इस टकरार को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि सिंधिया किसी के खिलाफ नहीं हैं, कांग्रेस पार्टी कमलनाथ के नेतृत्व में एक साथ है। सिधिया ने सरकार द्वारा किए गए वादे पूरे न होने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी प्रतिक्रिया में दो टूक जवाब देते हुए कहा था कि तो वो उतर जाएं।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को मीडिया से कहा कि वादा पत्र 5 साल के लिए है हमने कई वादे पूरे किए हैं और अन्य वादों को पूरा करने का काम चल रहा है। सिंधिया किसी के खिलाफ नहीं हैं, कांग्रेस पार्टी कमलनाथ के नेतृत्व में एक साथ है।

    उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद नेताओं के बीच शुरू हुई टकरार धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगी। यहां पार्टी के नेताओं के बीच क्या चल रहा है इसको लेकर नेताओं की अपनी नाराजगी सामने आ रही है। उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस टकरार को दूर करने में जुटे हैं।

    वैसे देखा जाएं तो सरकार के काम को लेकर पहले भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नाराजगी जताई थी और अब एक बार फिर उन्होंने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है।

    हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अतिथि शिक्षकों को लेकर कहा था कि यदि सरकार वचनपत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करती तो वह भी अतिथि शिक्षकों के साथ सड़क पर उतरेंगे।

    उधर जब इस बात को लेकर शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से सवाल किया गया तो उन्होंने दो टूक कह दिया कि ‘तो वो उतर जाएं।’

  • कई वर्षों से चलवा रहे हैं लड़कियों की कॉलेज की पढ़ाई के लिए मुफ्त बसें

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    चंडीगढ़, । पूर्व सैनिक विनोद 22 गांवों की बेटियों के लिए किसी फ़रिश्ते से कम नहीं है । आसपास कोई कॉलेज नहीं होने की वजह से बेटियों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो रहा था । सैकड़ों छत्राओं को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर न होने पड़े, इसलिए विनोद साम्रा ने उनके लिए मुफ्त बसें चलवा दीं ।
    सरहद की रखवाली करते जख्मी होने वाले विनोद साम्रा ने एक हादसे में अपनों को खो दिया था । नौकरी छूटने के बाद भी विनोद की इच्छा कुछ ऐसा करने की थी जिससे इलाके की बेटियों को कोई फायदा मिल सके । हरियाणा में जींद जिले के भंभेवा गांव लौटने पर उसने देखा कि बेटियों को कॉलेज जाने में दिक्कतें आ रही हैं. कॉलेज जाने वाली छात्राओं के मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इनके लिए मुफ्त बसें चलाने के फैसला कर लिया.
    इस समय 22 गांवों की करीब 200 छात्राएं इसी वजह से स्कूल-कॉलेज जा पा रही हैं. करीब 36 साल के विनोद सामरा बॉक्सर हैं. दिल्ली में वर्ष 2002 में हुई बॉक्सिंग प्रतियोगिता में नेशनल चैम्पियन का ख़िताब जीतने के बाद ही सेना में हवलदार के पद पर उनका चयन किया गया था । एक सड़क हादसे में जख्मी होने के बाद उनके सिर में चोट लगी और खेल से नाता टूट गया । उन्हें सेना की नौकरी भी छोड़नी पड़ी ।
    सेना से वापस घर लौटने के बाद समरा ने गुरुग्राम में एलएंडएल सिक्युरिटी सर्विसेज नाम से कम्पनी शुरू की और अपनी पत्नी सुमन के कहने पर गांवों की बेटियों को पढ़ाई में आने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए मुफ्त बस सेवा भी शुरु करवा दी ।इन बसों में कंडक्टर के पद पर भी महिलाओं को ही नियुक्ति दी गई है. भंभेवा गांव की राखी और प्राची का कहना है कि अगर पूर्व सैनिक विनोद समरा उनके लिए बसें नहीं चलवाते तो हम शायद उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पातीं ।

  • एक मई से महाराष्ट्र में लागू होगा NPR, सहयोगियों के बीच टकराव

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    मुंबई। महाराष्ट्र में एक मई से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) लागू करने का निर्णय करके एनसीपी और कांग्रेस को एक झटका दिया है। क्योंकि देशभर में कांग्रेस एनपीआर को विरोध कर रही है। वहीं महाराष्ट्र सरकार में वह एक सहयोगी है। सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर हो रहे देशव्यापी विरोध के बावजूद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक मई से 15 जून तक एनपीआर के तहत सूचनाएं इकट्ठा करने की अधिसूचना जारी की है।

    वहीं महाराष्ट्र के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (आरजीसीसी) के कार्यालय ने एनपीआर और जनगणना को लेकर राज्य के अधिकारियों के साथ छह फरवरी को एक बैठक की और दोनों प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए लगभग 3.34 लाख कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। इसे लेकर राज्य सरकार जल्द ही अधिसूचना जारी करेगी। राज्य में एनपीआर लागू करने को लेकर शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाविकास अघाड़ी में तनातनी नजर आ रही है। कांग्रेस सीएए, एनआरसी और एनपीआर का लगातार विरोध कर रही है। इस बीच महाराष्‍ट्र में कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा है कि एनपीआर के प्रावधानों पर कांग्रेस का विरोध है। इस संबंध में कांग्रेस के मंत्री सरकार से बात करेंगे।

    दूसरी ओर शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने बताया है कि उद्धव साहब ने साफ-साफ कहा है कि एनपीआर अगर जनगणना जैसा ही है, तो कोई बात नहीं, क्योंकि जनगणना तो हर 10 साल में होती ही है। इस मुद्दे पर एनसीपी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हाल ही में गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एनपीआर के विरोधियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान कहा था कि सरकार कानून विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर रही है।

  • ट्रांसफर-पोस्टिंग में मंत्री जी आगे, लेकिन प्राचार्यों के 267 रिक्त पद भरने में फिसड्‌डी

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    जयपुर । राजस्थान के 292 राजकीय कॉलेजों में से अभी वर्तमान में 290 कॉलेज संचालित है, लेकिन शर्मनाक बात यह है कि विभागीय पदोन्नति नहीं होने की वजह से प्राचार्यों के 267 पद रिक्त है। राजस्थान विधानसभा में लगे एक सवाल से यह खुलासा हुआ है। जवाब में बताया गया है कि नियम, 1986 में संशोधन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने से, विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठक आयोजित नहीं होने के कारण प्राचार्य के पद रिक्‍त है।
    उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने यूं तो ताबड़तोड़ तबादले करने में आगे रहे, लेकिन राजकीय कॉलेजों के प्राचार्यो के पद भरने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित नहीं करवा सके।
    अगर विधानसभा में पेश जिलेवार आंकड़ें देखें तो अजमेर जिले के राजकीय कॉलेजों में 11 प्राचार्यों के पद स्वीकृत है, लेकिन यहां पर 9 पद रिक्त है। इसी तरह अलवर में 16 पद है, लेकिन रिक्त 12, बांसवाड़ा में 4 पद है, लेकिन चारों ही खाली है। बारां में 8 पद है, लेकिन यह भी रिक्त है। बाड़मेर में 10 पद है, लेकिन यह भी रिक्त है। भरतपुर में 12 प्राचार्यों के पद है, लेकिन यह भी खाली है। भीलवाड़ा में 11 पदों में से 10 पद रिक्त है। बूंदी में 3 पदों में 2 पद रिक्त चल रहे है। चित्तौड़गढ़ में 8 प्राचार्यों के पद है, जो रिक्त है। चूरू में भी 12 के 12 पद खाली है। दौसा के 10 पदों में से 9 पद खाली है। धौलपुर में 7, डूंगरपुर में 5, हनुमानगढ़ में 4 प्राचार्यों के पद है, जो की रिक्त चल रहे है। इसी तरह जयपुर जिले में 19 पद है, इनमें से 14 पद रिक्त है। जैसलमेर में 4, जालौर में 7, झालावाड़ में 8, झुुंझुनूं में 7, जोधपुर में 13, नागौर में 11, पाली में 10, प्रतापगढ़ में 5, राजसमंद में 9, सवाईमाधोपुर में 6 प्राचार्यों के पद स्वीकृत है,जो सभी रिक्त चल रहे है। करौली जिले में 7 पद स्वीकृत है, जो सभी रिक्त चल रहे है। सीकर में 11 पद स्वीकृत है, इसमें से 9 पद रिक्त चल रहे है। कोटा में 11 पद है, जिसमें से 8 पद रिक्त चल रहे है। सिरोही में 7 पदों में से 6 पद रिक्त चल रहे है । श्रीगंगानगर में 6 पद स्वीकृत है, लेकिन यहां पर 4 पद रिक्त चल रहे है। टोंक में 8 प्राचार्यों के पद स्वीकृत है, लेकिन यहां भी 7 पद रिक्त चल रहे है। इसी तरह उदयपुर जिले में 11 पद रिक्त है, जिसमें से 9 रिक्त चल रहे है।

  • दिल्ली एयरपोर्ट से हरियाणा पुलिस ने गैंगस्टर राजू बसौदी को किया गिरफ्तार

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    चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने गैंगस्टर राजू बसौदी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया है। बसौदी पर हरियाणा पुलिस ने ढाई लाख का इनाम घोषित किया हुआ था। बसौदी 13 हत्याओं का आरोपी है और उसका ताल्लुक लॉरेंस बिश्नोई गैंग से रहा है। हरियाणा के अलावा बसौदी को पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ पुलिस को भी तलाश थी।

    कुख्यात अपराधी बसौदी को पकड़ने के लिए हरियाणा पुलिस के आग्रह पर हाल में एक लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। बसौदी के खिलाफ 24 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। हत्या के 13 मामलों के अलावा उसके खिलाफ हत्या के प्रयास के तीन और डकैती व लूट के 12 मामले भी शामिल हैं।

    बसौदी पर वसूली गिरोह चलाने के आरोप हैं। उसका करीबी संदीप और काला हाल ही में फरीदाबाद में पुलिस हिरासत से फरार होने में कामयाब हो गया था। यह गिरोह दिल्ली, पंजाब व चंडीगढ़ में जबरन वसूली के मामलों में सक्रिय रहा है। पुलिस के मुताबिक लौरेंस बिश्नोई, सम्पत नेहरा, अनिल छीपी, अक्षय पालरा और नरेश सेठी जैसे खूंखार अपराधी, जो इस समय विभिन्न जेलों में बंद हैं, बसौदी के इन गैंगस्टर्स के साथ संबंध रहे हैं।

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  • पंजाब में परिवार के 4 लोगों की हेड कांस्टेबल ने गोली मारकर की हत्या

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    चंडीगढ़। पंजाब के एक गांव में संपत्ति विवाद के कारण अपनी सर्विस राइफल एके 47 से एक पुलिस हेड कांस्टेबल ने पत्नी सहित परिवार के चार सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। हेड कांस्टेबल, जो दंगा-रोधी दस्ते का हिस्सा है, को पहले अपनी सर्विस राइफल से हवा में फायरिंग के लिए निलंबन का सामना करना पड़ा है।

    पत्नी के अलावा कुलविंदर सिंह ने रविवार को मोगा जिले के धरमकोट उपमंडल के सैद जलालपुर गांव में अपने ससुराल के तीन सदस्यों की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में उसने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया।

    पुलिस ने बताया कि आरोपी का अपने ससुराल वालों के साथ संपत्ति का विवाद था। झगड़े के बाद, उसने गोली चला दी, जिससे सभी की मौके पर ही मौत हो गई।

    कुलविंदर सिंह ने अपने साले की बेटी जसप्रीत कौर (10) पर भी गोली चलाई, जो गोली लगने से घायल हो गई।

    पुलिस ने कहा कि मृतकों की पहचान उसकी पत्नी राजविंदर कौर, बहनोई जसकरन सिंह, भाभी इंद्रजीत कौर और सास सुखविंदर कौर के रूप में हुई है।

  • राजस्थान में सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें मिलावटखोरों के खिलाफ , कार्रवाई नाममात्र पर, देखें आंकड़ें

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    जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भले ही मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कानून लाने की बात करें, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी की मिलावटखोरों से मिलीभगत के चलते पिछले एक साल में पकड़े गए मिलावटखोरों के खिलाफ सिर्फ नाममात्र की कार्रवाई हुई है।
    राजस्थान विधानसभा में लगे एक सवाल से यह खुलासा हुआ है कि जनवरी 2019 से 5 फरवरी 2020 तक खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत पूरे प्रदेश में 1867 मामले मिलावटी पदार्थों के सामने आए है।

    लेकिन इस अवधि में घी, मसाले एवं दुग्‍ध के मिसब्राण्‍ड एवं सबस्‍टैण्‍डर्ड पाये गये 360 प्रकरणों में से 189 प्रकरण खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 एवं विनियम 2011 की धारा 51 व 52 के तहत् न्‍याय निर्णयन अधिकारी (एडीएम) के समक्ष प्रस्‍तुत किये गये जा चुके है । वहीं अनसेफ पाये गये 76 प्रकरणों में से 26 प्रकरण एक्‍ट की धारा 59 के तहत् मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट के समक्ष प्रस्‍तुत किये जा चुके है। यानी अभी तक एक भी मिलावटखोर को सजा नहीं मिली है और ना ही कोई सख्त कार्रवाई हुई है।
    इस तरह जनवरी 2019 से 5 फरवरी 2020 के दौरान दवाईयों के 17 नमूनें मिलावटी श्रेणी में पाये गये।
    इस प्रकरणों में भी औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत् कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

    अगर राजस्थान विधानसभा में पेश आंकड़ों पर नजर डाले तो जनवरी 2019 से 5 फरवरी 2020 तक जयपुर (प्रथम ) में 208, टोंक में 120, अलवर 96, अजमेर और सिरोही में 80-80, कोटा और जयपुर (द्वितीय ) में 76-76, जोधपुर में 79, नागौर में 60, चूरू में 65, उदयपुर में 55, धौलपुर में 48, भरतपुर में 46, बाड़मेर में 46, सीकर में 53, हनुमानगढ़ में 51, बूंदी में 45, सवाईमाधोपुर में 57, चित्तौड़गढ़ में 49 मामले मिलावटखोरी के दर्ज हुए है। लेकिन कार्रवाई की आंकड़ा देखे, तो इनमें से सिर्फ 360 मामलों में से 189 मामले अदालत में पेश हुए है। इसी तरह अनसेफ पाए गए 76 मामलों में से 26 मामले भी अदालत में विचाराधीन है।

  • महाराष्ट्र: NCP नाराज काेरेगांव हिंसा का मामला NIA को सौंपने से, शरद पवार ने बुलाई मंत्रियों की बैठक

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    मुंबई। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बीच खींचतान बढ़ती ही जा रही है। इसका मुख्य कारण भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने के मामला बताया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने एनपीआर भी एक मई से लागू करने के निर्णय से भी नाराज बताया जा रहा है। इसी बीच एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने उद्धव सरकार के निर्णय पर नाखुशी जाहिर करते हुए आज पार्टी के सभी 16 मंत्रियों की बैठक बुलाई है।

    एनसीपी चीफ शरद पवार ने कोल्हापुर में एक रैली के दौरान मोदी सरकार पर जांच को राज्य से वापस अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया था। शरद पवार का कहना था कि भीमा कोरेगांव मामले में महाराष्ट्र सरकार कुछ एक्शन लेने वाली थी, इसलिए केंद्र ने एल्गार परिषद के मामले को अपने हाथ में ले लिया। कानून व्यवस्था पूरी तरह से राज्य के हाथ में होनी चाहिए, लेकिन हैरानी वाली बात है कि राज्य सरकार ने केंद्र के इस निर्णय का पुरजोर विरोध नहीं किया। एल्गार परिषद केस की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भीमा कोरेगांव मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेजने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को धन्यवाद देता हूं। शरद पवार इसका विरोध कर रहे थे क्योंकि उन्हें डर था कि एनआईए की जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी।

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    इसके साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) पर भी शिवसेना और एनसीपी के बीच खींचतान बनी हुई है। दरअसल, उद्धव सरकार ने 1 मई से राज्य में एनपीआर प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी कर दी है। मई ही केंद्र की ओर से दी गई तारीख है. हालांकि, कांग्रेस और एनसीपी ने साफ कह दिया है कि हम एनपीआर का भी विरोध कर रहे हैं।

    एल्गार परिषद केस की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार एसआईटी गठन करना चाहती है।एनसीपी नेता और गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि एल्गार परिषद केस की जांच के लिए एसआईटी गठन करने को राज्य सरकार कानूनविदों की सहायता ले रही है। पुणे की एक कोर्ट के आदेश पर महाराष्ट्र सरकार ने केस की जांच एनआईए को दे दी है। फिर भी महाराष्ट्र सरकार चाहती है कि इस मामले के लिए एसआईटी का गठन किया जाए।

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  • MP : आक्रामक अध्यक्ष की कांग्रेस को दरकार, अभी CM कमलनाथ के पास है जिम्मेदारी

    MP : आक्रामक अध्यक्ष की कांग्रेस को दरकार, अभी CM कमलनाथ के पास है जिम्मेदारी

    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा मध्य प्रदेश इकाई की कमान युवा सांसद वी.डी. शर्मा को दिए जाने के बाद कांग्रेस को भी अब एक आक्रामक नेता को प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने की जरूरत महसूस होने लगी है। इसके लिए पार्टी के भीतर से भी आवाज उठ रही है।

    राज्य में डेढ़ दशक बाद सत्ता में आई कांग्रेस बीते एक साल से नए अध्यक्ष की तलाश में है। फिलहाल प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री दोनों ही पदों पर कमलनाथ आसीन हैं। कमलनाथ खुद ही कई बार पार्टी हाईकमान के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया से लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ तक जल्दी प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति की बात कह चुके हैं।

    कांग्रेस में नए अध्यक्ष को लेकर मंथन का दौर जारी है तो दूसरी ओर भाजपा ने सांसद वी.डी. शर्मा को नया अध्यक्ष बना दिया है। शर्मा को सांसद राकेश सिंह के स्थान पर यह जिम्मेदारी दी गई है। लगातार इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि राकेश सिंह या कोई वरिष्ठ नेता अध्यक्ष बनाया जाएगा, मगर युवा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस को नए अध्यक्ष के लिए बेहतर नाम पर विचार करने को मजबूर कर दिया है।

    कांग्रेस के विधायक संजय यादव ने खुले तौर पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी युवा को सौंपने की पैरवी की है। उनका कहना है, “भाजपा ने युवा नेता वी.डी. शर्मा को अध्यक्ष बनाया है, इसलिए कांग्रेस को भी युवा को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहिए। राज्य सरकार में तीन-चार मंत्री इसके लिए उपयुक्त हैं। वहीं कई विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने संगठन में काम किया है, उन्हें भी यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।”

    कांग्रेस में अध्यक्ष पद के सबसे बड़े दावेदार के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लिया जा रहा है, मगर उनकी राह में कांटे भी खूब बिछाए दिए गए हैं। इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, सुरेश पचौरी, राज्य सरकार में मंत्री उमंग सिंघार, कमलेश्वर पटेल, सज्जन वर्मा, बाला बच्चन, जीतू पटवारी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नाम भी सुर्खियों में हैं।

    राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को आक्रामक के साथ प्रदेशव्यापी पहचान रखने वाले नेता को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपनी होगी। इसके अलावा नेता ऐसा हो जो संगठन और सत्ता के बीच समन्वय बनाकर रख सके। सत्ता और संगठन में किसी तरह का टकराव पार्टी के लिए घातक हो सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस में नए अध्यक्ष को लेकर अनिश्चय की स्थिति बनी हुई है।

    राज्य में आगामी दिनों में सियासी गर्मी बढ़ने की संभावना है। अगले माह जहां विधानसभा बजट सत्र है तो दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव और नगरीय निकायों के चुनाव भी करीब हैं। इन स्थितियों में दोनों ही दल जोर लगाएंगे। भाजपा संगठन के पास नई टीम होगी, वहीं कांग्रेस को भी ऐसी टीम तैयार करने की चुनौती है, जो मुकाबले में खड़ी नजर आए।

  • नीतीश काे घेरते हुए PK ने कहा, हमें नहीं चाहिए पिछलग्गू नेता, JDU नेता अजय आलोक बोले…

    नीतीश काे घेरते हुए PK ने कहा, हमें  नहीं चाहिए पिछलग्गू नेता, JDU नेता अजय आलोक बोले…

    पटना। प्रशांत किशोर ने सबसे पहले नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधो के लेकर खुलासा करते हुए कहा कि नीतीश कुमार मेरे पिता जैसे हैं। उनसे मेरा राजनीतिक संबंध नहीं है। यह बात आज प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संबोधित करते हुए कही। इस पर जेडीयू नेता अजय आलोक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन लोगों को बुद्धि से टोटा पड़ गया है। इनका राजनीतिक अस्तित्व कभी था ही नहीं, जो थोड़ा बहुत वजूद फेसबुक, ट्विटर से बना, वो भी आज खत्म हो गया।

    गांधी-गोडसे चल नहीं सकते एक साथ…

    प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि गांधी-गोडसे साथ नहीं चल सकते हैं। इसी को लेकर मेरा नीतीश कुमार से मतभेद था। हम एक सशक्त नेता चाहते हैं, पिछलग्गू नहीं। जो बिहार के लिए खड़ा होगा, बिहार की जनता उसके साथ खड़ी होगी। मैं भाजपा के साथ चुनाव लड़ने को लेकर सहमत नहीं हूं। पिछले 15 सालों में विकास में बहुत विकास हुआ है लेकिन ऐसा विकास नहीं हुआ है जिससे बिहार की स्थिति में अमूल-चूल बदलाव आया है।

    प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि आज भी बिहार की स्थिति दुसरे राज्यों की तुलना में वहीं बनी हुई है। नीतीश ने बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया, साइकिल और पोशाक बांटी, लेकिन एक अच्छी शिक्षा नहीं दे सके। मैं हर घर बिजली पहुंचाने के लिए नीतीश कुमार को धन्यवाद देता हूं।

    सबसे ज्यादा गरीब आज भी बिहार में…
    प्रशांत किशोर ने कहा कि 2005 में बिहार के लोगों की प्रति व्यक्ति आय 22वें स्थान पर था आज भी वहीं है। हमें 10वें स्थान पर पहुंचना है। सबसे ज्यादा गरीब आज भी बिहार में हैं।
    जो बिहार को अगले दस सालों में टॉप 10 राज्यों में देखना चाहते हैं, नीतीश उन्हें बताएं अगले 10 सालों में क्या करेंगे। मैं बिहार में राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर 10 साल पहले अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।

    20 फरवरी से बात बिहार की कार्यक्रम की शुरूआत…
    प्रशांत किशोर ने कहा कि जब तक जीवित हूं, बिहार के लिए पूरी तरह समर्पित हूं, मैं कहीं नहीं जाने वाला हूं। मैं आखिरी सांस तक बिहार के लिए लड़ूंगा। मैं ऐसे लोगों को जोड़ना चाहता हूं जो बिहार को अग्रणी राज्यों की दौर में शामिल करना चाहते हैं। 20 फरवरी से मैं एक नया कार्यक्रम बात बिहार की शुरू करने जा रहा हूं।