Category: state-news

  • 8वें माउंटेन गोट शीतकालीन अभियान को राज्यपाल ने किया रवाना

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    शिमला । राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने यहां माउंटेन गोट के 8वें शीतकालीन अभियान स्पीति-2020 को हरी झण्डी दिखाई। यह अभियान राज्य में ग्रामीण व शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है।

    राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक व ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ऐसी गतिविधियां राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि ‘होम स्टे’ के माध्यम से पर्यटकों को प्रदेश के आंतरिक क्षेत्रों के लोगों की संस्कृति व परम्पराओं को जानने का अवसर प्राप्त होगा।
    यह अभियान 22 फरवरी को संपन्न होगा। इस दौरान अभियान का कल्पा, काजा व रामपुर में ठहराव होगा।
    इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 110 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो 45 वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं।

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  • बाईपास ही एकमात्र विकल्प रेल फाटकों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए : डॉ. बी.डी कल्ला

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    जयपुर। ऊर्जा एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी डॉ. बी डी कल्ला ने कहा कि बीकानेर में रेल फाटकों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए बाईपास ही एकमात्र विकल्प है। इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई हो, इसके लिए बीकानेर का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक कर समस्या के समाधान संबंधी सुझाव देगा। साथ ही रेल मंत्री के साथ भी एक बैठक आयोजित कर राज्य सरकार का पक्ष रखा जाएगा, जिसमें बीकानेर में रेल बाईपास बनाने पर सहमति हो सके इसके लिए उच्च स्तर पर सार्थक प्रयास किए जाएंगे।

    यह बात डॉ. कल्ला ने शनिवार को बीकानेर में अपने निवास पर, रेल बाईपास निर्माण की मांग के संबंध में आए शिष्टमंडल को कही। डॉ. कल्ला ने कहा कि रेल बाईपास बनाने के लिए वर्षों से वे प्रयासरत हैं और शीघ्र ही इस पर निर्णय करवा कर आमजन को राहत पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केन्द्रीय रेल मंत्री, बीकानेर के सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और वे स्वयं इस विषय पर बैठक करेंगे जिससे रेल बाईपास पर कोई ठोस नीतिगत निर्णय लिया जा सके।

    डॉ. कल्ला ने कहा कि इसके साथ ही 25 से 29 फरवरी के बीच मुख्यमंत्री के साथ बीकानेर के प्रबुद्ध लोगों की एक बैठक आयोजित की जाएगी, इस शिष्टमंडल में पूर्व विधायक व वरिष्ठ अधिवक्ता आर के दासगुप्ता, अध्यक्ष व्यापार एसोसिएशन नरपत सेठिया, उमेश मेंहदीरत्ता, शांतिलाल कोचर, लोकेश राजवानी, सुमित कोचर सहित अन्य गणमान्य लोगों व विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि बीकानेर बाईपास निर्माण संबंधी पक्ष मुख्यमंत्री के सामने रखा जा सके और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाकर रेल फाटकों की समस्या से बीकानेर की जनता को निजात दिलाई जा सके।

    ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्षों पूर्व भी रेल मंत्रालय को बाईपास बनाने के लिए 61 करोड़ 62 लाख रुपए दिए गए थे। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह रेलवे महाप्रबंधक से मिलकर रेल बाईपास बनाने के लिए उन्हें बताया गया था तब महाप्रबंधक ने सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमति व्यक्त करी थी कि बीकानेर में रेल फाटकों की समस्या का एकमात्र समाधान रेल बाईपास ही है।

    डॉ. कल्ला ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में रेलवे द्वारा पूरे देश में रेल यातायात विद्युत आधारित होगा और रेलवे सभी स्थानों पर डबल लाइन भी डालेगा। ऐसे में बीकानेर के कोटगेट सहित अन्य स्थानों पर न तो विद्युत लाइन से चलने वाली रेल निकल पाएगी और ना ही डबल लाइन बन सकेगी, ऐसे में रेल मंत्रालय को बाईपास बनाना अनिवार्य होगा। अगर अभी रेल मंत्रालय राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से बाईपास का निर्माण कार्य करता है तो यह कार्य तेजी से और बेहतर ढंग से पूर्ण हो सकेगा।

    डॉ. कल्ला ने कहा कि रेल मंत्रालय अपने वरिष्ठ अभियंताओं को भेजकर अगर बाईपास बनाने की वर्तमान स्थिति को देखे तो यह बहुत स्पष्ट हो जाएगा कि बाईपास के लिए जो संपूर्ण कार्य होना है उसमें से 50 प्रतिशत कार्य तो वर्तमान में हो चुका है, ऎसे में अब शेष 50 प्रतिशत कार्य करवा कर रेल बाईपास का निर्माण शीघ्र पूरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि पूर्व में जब एलिवेटेड रोड बनाने की बात हुई थी तो इस रोड को नेशनल हाईवे अथॉरिटी के व अन्य अभियंताओं का यह कहना था कि यहां तकनीकी रूप से एलिवेटेड रोड नहीं बन सकती है, साथ ही एलिवेटेड रोड से स्थानीय नागरिकों को भी परेशानी होगी।

    इस दौरान पूर्व विधायक और वरिष्ठ अधिवक्ता आर के दास गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1992 में डॉ. कल्ला के नेतृृत्व में रेल मंत्रालय के साथ आयोजित बैठक में यह निश्चित किया गया था कि बड़ी लाइन का कार्य लालगढ़ से बीकानेर तक हो जाने दिया जाए और फिर रेल मंत्रालय जल्द ही बाईपास भी बना देगा। गुप्ता ने कहा कि रेलवे के उच्च अधिकारियों द्वारा बाईपास निर्माण के आश्वासन के बाद ही बड़ी लाइन का कार्य आरंभ करने में हम लोगों ने सकारात्मक सहयोग किया था मगर रेलवे द्वारा अपना वादा नहीं निभाया गया और आज तक बाईपास का निर्माण नहीं हो पाया है।

  • RAJASTHAN: तबादला 12 RAS अधिकारियों का, इनमें पोस्टिंग मिली 8 APO को, यहां देखें लिस्ट

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    जयपुर। कार्मिक विभाग ने आज 12 राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इनमें 8 एपीओ को पोस्टिंग दी गई हैं।

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  • सीएम ममता बनर्जी मेट्रो उद्घाटन की सूचना न दिए जाने से आहत

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    कोलकाता । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर के उद्घाटन की सूचना न दिए जाने से वह आहत हैं, क्योंकि इस परियोजना को मंजूरी उस दौरान मिली थी, जब वह रेलमंत्री थीं। रेलमंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कोलकाता में साल्ट लेक सेक्टर-5 से साल्ट लेक स्टेडियम रूट (4.8 किलोमीटर) मेट्रो कॉरिडोर का उद्घाटन किया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया, लेकिन उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कुछ प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। तृणमूल प्रतिनिधियों ने इस आमंत्रण का बहिष्कार किया और ममता बनर्जी को न बुलाए जाने पर आक्रोश प्रकट किया।

    ममता ने कहा, “ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए मैंने कड़ी मेहनत की थी। उस समय मैं यूपीए सरकार में रेलमंत्री थी। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने में मुझे काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसके लिए हमने बड़ी मुश्किल से फंड जुटाया था। यहां के लोग यह बात जानते हैं। मुझे दुख है कि इसके उद्घाटन की मुझे जानकारी तक नहीं दी गई।”

  • मडुआ बेचकर खरीदी थी झारखंड की पुंडी ने हॉकी स्टिक, अमेरिका में लेगी प्रशिक्षण

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    रांची। झारखंड के नक्सल प्रभावित जिला खूंटी के एक छोटे से गांव हेसल की रहने वाली पुंडी सारू ने एक सपना देखा था। सपना था हॉकी के मैदान में दौड़ते-दौड़ते सात समुद्र पार जाने की। पुंडी के उस सपने को अब पंख लग चुका है।

    पुंडी खूंटी के हेसल गांव से निकलकर सीधे अमेरिका जाने वाली है। लेकिन जरा ठहरिए, पुंडी के इस सपने के सच होने की कहानी इतनी आसान नहीं रही। काफी संघर्ष के बाद पुंडी का यह सपना पूरा हुआ है।

    पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर की पुंडी का बड़ा भाई सहारा सारू इंटर (12वीं) तक की पढ़ाई कर छोड़ चुका है। पुंडी नौंवी कक्षा की छात्रा है। पुंडी की एक और बड़ी बहन थी, जो अब नहीं रही। पिछले साल मैट्रिक की परीक्षा में फेल हो जाने के कारण उसने अपने गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उस वक्त पुंडी टूट चुकी थी।

    उस दौर में पुंडी दो महीने तक हॉकी से दूर रही थी, मगर वह हॉकी को भूली नहीं थी। पुंडी के पिता एतवा उरांव अब घर में रहते हैं। पहले वे दिहाड़ी मजदूरी का काम करते थे। मजदूरी करने के लिए हर दिन साइकिल से खूंटी जाते थे। वर्ष 2012 में एक दिन साइकिल से लौटने के दौरान किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उनका हाथ टूट गया। प्लास्टर से हाथ जुड़ गया, लेकिन उसके बाद से वे मजदूरी करने लायक नहीं रहे।

    पुंडी बताती है कि तीन साल पहले जब उसने हॉकी खेलना शुरू किया था और झारखंड के अन्य हॉकी खिलाड़ियों की तरह नाम रौशन करने का सपना देखा था, तब उसके पास हॉकी स्टिक तक नहीं थी।

    पुंडी ने आईएएनएस को बताया, “हॉकी स्टिक खरीदने के लिए घर में पैसे नहीं थे, तब मैंने मडुआ (एक प्रकार का अनाज) बेचा और छात्रवृत्ति में मिले 1500 रुपये को उसमें जोड़कर हॉकी स्टिक खरीदी।”

    पुंडी के पिता एतवा सारू जानवरों को चराने का काम करते हैं। मां चंदू घर का काम करती है। घर की पूरी अर्थव्यवस्था खेती और जानवरों के भरण पोषण और उसके खरीद बिक्री पर निर्भर है। घर में गाय, बैल, मुर्गा, भेड़ और बकरी है।

    पुंडी से उसकी दिनचर्या के बारे में पूछा तो उसने कहा, “पिछले तीन साल से हर दिन अपने गांव से आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर हॉकी खेलने खूंटी के बिरसा मैदान जाती हूं।”

    खूंटी में खेलते हुए पुंडी कई ट्रॉफी जीत चुकी है। पुंडी के प्रशिक्षक भी उसके मेहनत के कायल हैं। वे कहते हैं कि पुंडी मैदान में खूब पसीना बहाती है।

    अमेरिका जाने के लिए चयन होने के बाद पुंडी ने आईएएनएस से कहा, “हॉकी स्टिक खरीदने से लेकर मैदान में खेलने तक के लिए काफी जूझना पड़ा है। लेकिन लक्ष्य सिर्फ अमेरिका जाना नहीं है। हमें निक्की दीदी (भारतीय हॉकी टीम की सदस्य निक्की प्रधान) जैसा बनना है। देश के लिए हॉकी खेलना है।”

    पुंडी कहती है, “पहले पापा बोलते थे कि खेलने में इतनी मेहनत कर रही हो, क्या फायदा होगा? कुछ काम करो तो घर का खर्च भी निकलेगा, लेकिन मां ने हमेशा साथ दिया और उत्साहित किया।”

    उल्लेखनीय है कि रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा की 107 बच्चियों को रांची के ‘हॉकी कम लीडरशिप कैम्प’ में प्रशिक्षण दिया गया। यह ट्रेनिंग यूएस कंसोलेट (कोलकाता) और स्वयंसेवी संस्था ‘शक्तिवाहिनी’ द्वारा आयोजित था। सात दिनों के कैम्प में पांच बच्चियों का अमेरिका जाने के लिए चयन हुआ, जिसमें पुंडी का नाम भी शामिल है।

    यूएस स्टेट की सांस्कृतिक विभाग (असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ यूएस, डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट, फॉर एडुकेशनल एंड कल्चरल अफेयर) की सहायक सचिव मैरी रोईस बताती हैं कि चयनित सभी लड़कियां 12 अप्रैल को यहां से रवाना होंगी और अमेरिका के मिडलबरी कॉलेज, वरमोंट में पुंडी को हॉकी का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    शक्तिवाहिनी के प्रवक्ता ऋषिकांत ने आईएएनएस से कहा कि इन लड़कियों के साथ दो महिलाएं और पुरुष भी अमेरिका जाएंगे। इन लड़कियों को वहां 21 से 25 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • बिहार: HAM जुटा शराबबंदी को चुनावी मुद्दा बनाने में!, मांझी ने कहा- थोड़ा शराब पीना संजीवनी के बराबर श्रमिकों के लिए

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    पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि थोड़ा शराब पीना काम करने वाले श्रमिकों के लिए संजीवनी के बराबर होता है, जो दिन भर कमरतोड़ मेहनत कर अपने घर लौटते हैं। हमारी सरकार या हम समर्थित सरकार बनी तो शराबबंदी कानून बदलने का काम करेगी।

    बिहार महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी राज्य में शराबबंदी को इस साल होने वाले चुनाव में मुद्दा बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। मांझी जहां एक ओर शराब को कभी-कभी दवा के रूप में पेश करने की बात करते हैं, वहीं बिहार में शराबबंदी को वह पूरी तरह असफल भी बताते हैं। बिहार में शराबबंदी को लेकर भले ही कई लोग खुश हैं, परंतु इस कानून के लागू होने से कई लोग सरकार से नाराज भी हैं। ऐसे में मांझी इस शराबबंदी को लेकर चुनाव में उतरने की कोशिश में लगे हुए हैं

    मांझी ने कहा कि, “शराब कभी-कभी दवा के रूप में भी पेश की जाती है। हमें इसका अनुभव है। बहुत पहले मैं हैजा से पीड़ित था तब एक नुस्खे ने मुझे बचा लिया।”

    उल्लेखनीय है कि उन्होंने पूर्णिया के एक कार्यक्रम में कहा, “थोड़ा शराब पीना काम करने वाले श्रमिकों के लिए संजीवनी के बराबर होता है, जो दिन भर कमरतोड़ मेहनत कर अपने घर लौटते हैं। हमारी सरकार या हम समर्थित सरकार बनी तो शराबबंदी कानून बदलने का काम करेगी।”

    इस बयान के बाद बिहार में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बिहार के भूमि सुधार मंत्री राम नारायण मंडल ने कहा कि शराब किसी के लिए भी नुकसानदेह है। उन्होंने दावा किया कि लोग शराब पर प्रतिबंध लगाने से खुश हैं और यह हमेशा के लिए रहने वाला है।

    भाजपा के विधान पार्षद संजय मयूख ने कहा कि शराबबंदी राजनीतिक मुद्दा नहीं है, और इसे राजनीति में नहीं घसीटा नहीं जाना चाहिए।

    उल्लेखनीय है कि बिहार में वर्ष 2016 से किसी भी प्रकार की शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है।

  • सियासत: विपक्ष ने बिहार में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण के 24 घंटे बाद प्रतिमा का किया शुद्धिकरण

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    बेगूसराय। बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही जहां राजनीतिक पार्टियां चुनावी मोड़ में आ गई हैं, वहीं अब महापुरुषों की प्रतिमा को लेकर भी सियासत परवान चढ़ने लगी है। बेगूसराय के बलिया में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था। इसके बाद अब शनिवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और वामपंथी दलों के नेताओं ने उनकी प्रतिमा को धोकर उसका शुद्धिकरण किया।

    शुक्रवार को बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन में रैली निकाली थी। इस दौरान उन्होंने आंबेडकर पार्क पहुंचकर संविधान निर्माता बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और एक सभा को संबोधित किया था।

    केंद्रीय मंत्री के माल्यार्पण के 24 घंटे बाद ही राजद और वामपंथी दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ ही बहुजन क्रांति मोर्चा के नेताओं ने आंबेडकर की प्रतिमा की साफ-सफाई कर इसका शुद्धिकरण किया।

    शुद्धिकरण करने वाले नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री नफरत की राजनीति करते हैं और उन्होंने माल्यार्पण करके बाबा साहेब की प्रतिमा को अशुद्ध किया है, इसलिए उन्होंने इस प्रतिमा का शुद्धिकरण किया है।

    भाजपा के जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पूरे देश में सीएए के विरोध के नाम पर समाज को बांटने का माहौल बनाया जा रहा है।

    बेगूसराय में सांसद के प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार अमर ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि आज टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्यों के द्वारा घटिया राजनीति की जा रही है और पूरे देश को तोड़ने की साजिश की जा रही है।

  • वित्तायोग ने 19309 करोड़ रुपये हिमाचल प्रदेश को देने की सिफारिश की

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    शिमला । 15वें वित्तायोग ने वर्ष 2020-21 के लिए हिमाचल प्रदेश को 19,309 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है। वित्तायोग ने इससे सम्बन्धित सूचना भारत सरकार को भेज दी है।

    उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि इसमें 11431 करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान, 6833 करोड़ रुपये कर अदायगी, 636 करोड़ स्थानीय निकायों के लिए और 409 करोड़ रुपये राज्य आपदा राहत कोष को देने की सिफारिश की गई है।

    14वें वित्त आयोग की तुलना में 15वें वित्त आयोग में राजस्व घाटा अनुदान में 40.69 प्रतिशत, केंद्रीय कर अंशदान में 21.05 प्रतिशत, ग्रामीण स्थानीय निकायों में 18.51 प्रतिशत, शहरी निकायों में 417.50 प्रतिशत और राज्य आपदा राहत कोष में 74.04 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 14वें वित्त आयोग के दौरान 14,407 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे जबकि 34.03 प्रतिशत वृद्धि के साथ 15वें आयोग में वर्ष 2020.21 के लिए 19,309 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

    उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों का अनुदान जिला परिषदों, पंचायत समितियों और राज्य के कैंट बोर्डों के अलावा नगर परिषदों, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों को अधिक अनुदान प्रदान करने का मामला वित्तायोग से उठाया था। उनके ही प्रयासों का नतीजा है कि वित्तायोग ने इस बार राज्य के राजस्व घाटा अनुदान को बढ़ाया है।

    मंत्री ने कहा कि 15वें वित्तायोग की सिफारिशों से राज्य सरकार को प्रदेश में विकासात्मक और अधोसंरचना गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। इस अनुदान से समाज के सभी वर्ग विशेषकर कमजोर वर्ग लाभान्वित होंगे।

    उन्होंने कहा कि 15वें वित्तायोग द्वारा 2021-22 से 2025-25 के लिए सिफारिशें देना बाकी है। राज्य सरकार वित्तायोग के समक्ष हिमाचल प्रदेश के मामले उठाना जारी रखेगी, जिसकी रिपोर्ट अक्तूबर, 2020 में आना अपेक्षित है।

    उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वित्तायोग के समक्ष अधिक अनुदान जारी करने की अपनी मांग को मनवाने में सफल रही है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने स्वयं 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष से मिलकर अनुदान में वृद्धि का मामला उठाया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश को केरल राज्य के बाद सर्वाधिक राजस्व घाटा अनुदान मिला है।

    उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल के दौरान 13वें वित्तायोग ने हिमाचल प्रदेश को केवल 4338.4 करोड़ रुपये का औसत वार्षिक अनुदान प्रदान किया था। इससे राज्य को अपना जायज हिस्सा प्राप्त नहीं हुआ। यूपीए सरकार ने हिमाचल के साथ भेदभाव किया।

    बिक्रम सिंह ने कहा कि 14वें वित्तायोग में 2015-20 की अवधि के लिए राज्य की अनुदान राशि में 13वें वित्तायोग द्वारा 2010-15 की तुलना में 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की वृद्धि करने के लिए प्रदेशवासी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं। इसके अतिरिक्त, 13वें वित्तायोग में हिमाचल प्रदेश को 4338.4 करोड़ रुपये का वार्षिक औसत अनुदान प्रदान किया, जिसे नरेंद्र मोदी ने 14वें वित्तायोग ने 14,407 करोड़ रुपये किया और अब 15वें वित्तायोग में वर्ष 2020-21 के लिए 19,309 करोड़ रुपये किया गया है।

    उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की डबल ईंजन की सरकार राज्य के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य कर रही है। प्रदेशवासी कांग्रेस शासन के दौरान हिमाचल प्रदेश के साथ हुए भेदभावपूर्ण व्यवहार को खत्म करने और राज्य को उदार वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री के आभारी हैं।

  • राज्य प्रदूषण नियन्त्रण मंडल ने बनाया रिकार्ड 2,740 लम्बित प्रकरणों का निस्तारण कर: पवन कुमार गोयल

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    जयपुर। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियन्त्रण मण्डल द्वारा जनवरी माह में 2,740 लम्बित आवेदनों का निस्तारण कर रिकाॅर्ड कायम किया है। इससे पूर्व प्रतिमाह 1,800 लम्बित आवेदनों का ही निस्तारण किया जा रहा था।

    मण्डल के अध्यक्ष पवन कुमार गोयल ने बताया कि जनवरी माह में कुल लम्बित प्रकरणों के 37 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा कर उल्लेखनीय कार्य किया है जिससे न केवल उद्योगों को वर्षों से लंबित प्रकरणों का निस्तारण हुआ है अपितु प्रकरण निस्तारित होने से विभिन्न प्रकार के उद्योगों, होटल, हॉस्पिटल, माइन्स, क्रेशर तथा बड़ी बिल्डिंग परियोजनाओं की की गतिविधियों में भी गति आई है।

    उन्होंने बताया कि माह जनवरी, 2020 में निस्तारित 2,740 आवेदनों में से 1,350 आवेदन 4 माह की निर्धारित समय सीमा पार कर चुके थे जिनमें से 289 आवेदन एक वर्ष से अधिक समय से लम्बित थे। वर्ष 2019 में जनवरी माह से सितम्बर माह तक राजस्थान राज्य प्रदूषण नियन्त्रण मण्डल में 15,231 आवेदन प्राप्त हुये, परन्तु इस अवधि में 15,930 आवेदनों का ही निस्तारण किया गया, जबकि विगत 4 माह (अक्टूबर, 2019 से जनवरी, 2020) में राज्य मण्डल को 4,450 आवेदन प्राप्त हुये तथा मण्डल द्वारा 7,052 आवेदनों का निस्तारण किया गया है जो प्राप्त आवेदनों की तुलना में डेढ़ गुणा से भी अधिक है।

    गोयल ने कहा कि मण्डल द्वारा लगातार प्रक्रिया में सरलीकरण कर आवेदनों के निपटारा करने की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा रहा है और यही वजह है कि लम्बित आवेदनों का तेजी से निस्तारण करना संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि मण्डल में आवेदन करने से लेकर उसके निस्तारण तक की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, इससे निवेशकों, उद्योगपतियों तथा आम लोगों को मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं पडती है।

    मण्डल अध्यक्ष ने बताया कि लम्बित प्रकरणों के निस्तारण के लिए नीतिगत स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इसके लिए उन्होंने समीक्षा बैठकें आयोजित की तथा मुद्दों की प्रभावी मोनिटरिंग के साथ-साथ क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों के साथ विडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से निरन्तर फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि मण्डल द्वारा आवेदनों के निस्तारण में देरी की वजहें खोजकर उन्हें दूर करने के हरसंभव प्रयास किये गये। इसमें प्रक्रिया के सरलीकरण और नियमों की पालना का पूरा ध्यान रखा गया है। मण्डल में लम्बे समय से विचाराधीन आवेदनों के ”बैक लॉग“ को समाप्त करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जहां लम्बित सम्मति एवं प्राधिकार आवेदनों के निस्तारण का काम मुख्यालय के स्थान पर क्षेत्रीय कार्यालयों को सौंपा गया है ताकि निस्तारण का काम त्वरित गति से हो सके, वहीं कुछ उद्योगों को स्वीकृतियों के नियमों में शिथिलता भी प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त स्वीकृतियां देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किये गये हैं, जिससे किसी भी प्रकार की दुविधा की स्थिति से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए क्षेत्रीय अधिकारियों से सम्मति एवं प्राधिकार के निलम्बन का अधिकार समाप्त कर दिया गया है। इससे सम्मति रद्द करने से पूर्व उद्योगों को अपना पक्ष मुख्यालय के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा।

  • विधायक बलरज कुंडू ने जांच के लिए एसआईटी गठित नहीं करने पर सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने की दी चेतावनी

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    चंडीगढ़। हरियाणा में महम क्षेत्र के आज़ाद विधायक बलरज कुंडू साढ़े चार हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के सबूत लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दरबार पहुंच गए और उन्हें दस्तावेज सौंपते हुए मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के गठन का आग्रह किया। भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार को समर्थन दे रहे कुंडू का आरोप है कि चीनी मिलों में तेतीस सौ करोड़ और स्थानीय निकाय विभाग में बारह सौ करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है।
    कुंडू ने इससे पहले भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए गृह मंत्री अनिल विज का दरवाजा खटखटाया था।

    विज ने जो एसआईटी गठित की, उसमें कमजोर अफसरों को शामिल करने का आरोप लगाते हुए कुंडू ने कहा कि जांच सीनियर आईएएस अफसर अशोक खेमका, वी.एस. कुंडू या फिर वजीर सिंह गोयत से करवाई जाये। वह अपनी इसी मांग को लेकर वे मुख्यमंत्री खट्टर से मिले थे। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे चंडीगढ़ में टेंट लगा कर धरने पर बैठ जाएंगे और भाजपा-जजपा सरकार से अपना समर्थन भी वापस ले लेंगे।

    मीडिया से बात करते हुए कुंडू ने कहा कि, ‘औने-पौने दामों पर चीनी मिलों ने एक पूर्व मंत्री की पुत्र वधू और उनके भतीजे की कंपनियों को शीरा सप्लाई किया। दो महीने पहले तक जो शीरा 157 रुपए प्रति क्विंटल दिया जा रहा था, वही शीरा नए प्रबंध निदेशक की नियुक्ति के बाद 830 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। इसी से यह सारा खेल उजागर हो जाता है।’ उन्होंने कहा कि पानीपत की चीनी मिल में 80 हजार क्विंटल शीरे का रिकॉर्ड ही गायब है। चीनी मिलों को घाटे में दिखाए जाने को फ्राॅड करार देते हुए कुंडू ने कहा कि असल में घाटे के नाम पर यह खुली लूट थी।

    स्थानीय निकाय विभाग में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए आज़ाद विधायक कुंडू ने कहा कि, ‘अमृत योजना के लिए केंद्र से 2,650 करोड़ रुपए आये थे, इसमें 50 फीसदी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।’ उन्होंने कहा कि आने वाले बजट सत्र में भी वे इस मुद्दे को उठाएंगे, साथ ही राज्य सतर्कता ब्यूरो से भी इसकी शिकायत करेंगे। कुंडू ने कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर चलने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री को समर्थन दिया था। अब जब भ्रष्टाचार के दस्तावेज सौंप दिए गए हैं तो बिना देर किये इनकी जांच कराइ जानी चाहिए।

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