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  • विजडन ने चुनी ऑल-टाइम मेन्स T20 वर्ल्ड कप इलेवन, 2 भारतीय 3 पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मिली जगह

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    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2021 का आयोजन इस साल भारत में अक्टूबर-नवंबर में आयोजित किया जाएगा। इस टूर्नामेंट के लिए दुनिया की हर टीमों ने अपने-अपने तरीके से तैयारियां भी शूरू कर दी हैं। हालांकि इसके लिए अभी लंबा वक्त है, लेकिन एक बेहतर टीम बनाने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है और खिलाड़ियों को पूरी तरह से आजमाने के बाद ही इस तरह से अहम टूर्नामेंट के लिए टीमों का चयन किया जाता है। बहरहाल विजडन ने अपनी पसंदीदा ऑल-टाइन मेन्स टी20 वर्ल्ड कप इलेवन का चयन किया है।

    विजडन की इस टीम में दो भारतीय खिलाड़ियों एम एस धौनी और विराट कोहली को जगह दी गई है। टीम का कप्तान एम एस धौनी को बनाया गया है जो भारत को 2007 में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब दिलवा चुके हैं। धौनी हालांकि अब टीम इंडिया से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उनकी उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खास है। इस टीम में पाकिस्तान के तीन खिलाड़ियों शाहिद अफरीदी, उमर गुल और सईद अजमल को चुना गया है। अफरीदी जहां बतौर ऑलराउंडर टीम में हैं तो वहीं उमर गुल तेज गेंदबाज हैं और अजमल स्पिनर हैं।

    विजडन की इस टीम में बतौर ओपनर वेस्टइंडी के क्रिस गेल और श्रीलंका के महेला जयवर्धने का चयन किया गया है। विराट कोहली टीम में तीसरे नंबर के बल्लेबाज के तौर पर मौजूद हैं तो वहीं चौथे नंबर के लिए इंग्लैंड के केविन पीटरसन का चयन किया गया है। पांचवें नंबर के बल्लेबाज के तौर पर पर मार्लन सैमुअल्स को टीम में रखा गया है और माइक हसी छठे नंबर पर रखे गए हैं। एम एस धौनी टीम के कप्तान व विकेटकीपर हैं और वो सातवें क्रम पर बल्लेबाजी करे लिए रखे गए हैं।

    एम एस धौनी के बाद शाहिद अफरीदी को रखा गया है जो आठवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे। बल्लेबाजों के क्रम को देखकर लगता है कि, इसमें काफी गहराई है। टीम में बतौर तेज गेंदबाज श्रीलंका के लसिथ मलिंगा और पाकिस्तान के उमर गुल शामिल हैं। वहीं बतौर शुद्ध स्पिनर सईद अजमल टीम का हिस्सा हैं।

    विजडन की ऑल-टाइम मेन्स टी20 वर्ल्ड कप XI

    क्रिस गेल, महेला जयवर्धने, विराट कोहली, केविन पीटरसन, मार्लन सैमुअल्स, माइक हसी, एम  एस धौनी (कप्तान), शाहिद अफरीदी, लसिथ मलिंगा, उमर गुल, सईद अजमल।

  • जसप्रीत बुमराह करने जा रहे हैं शादी और इसलिए क्रिकेट से लिया ब्रेक, जानिए किनसे होगी शादी

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    अहमदाबाद।  हाल ही में भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे और आखिरी टेस्ट से अपना नाम वापस ले लिया था। बुमराह ने निजी कारणों का हवाला देते हुए हटने का फैसला किया। टेस्ट सीरीज के बाद भारत और इंग्लैंड को 12 मार्च से पांच टी-20 मैचों की सीरीज खेलनी है, जिसमें बुमराह को आराम दिया गया है। इसके बाद दोनों टीमें 23 मार्च से तीन मैचों की वनडे सीरीज में भिड़ेंगी। इसके बाद होने वाली वनडे सीरीज से भी बुमराह हट सकते हैं।

    बुमराह और बीसीसीआइ ने इसके पीछे सिर्फ निजी कारण बताया है, लेकिन इसकी असली वजह यह है कि भारत का यह तेज गेंदबाज जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रहा है। बुमराह से जुडे़ एक सूत्र ने बताया कि यह खिलाड़ी एक सप्ताह के अंदर शादी करने वाला है। एक स्पो‌र्ट्स एंकर से उनकी शादी गोवा में होने वाली है। हालांकि तारीख को गुप्त रखा गया है। सीरीज चल रही है और टीम बायो-बबल में है, इसलिए उनकी शादी में टीम इंडिया के खिलाडि़यों का शामिल होना मुश्किल है। बुमराह मूलत: अहमदाबाद के हैं, लेकिन अब उनका परिवार मुंबई में रहता है। सूत्र ने कहा कि कोरोना के कारण शादी में ज्यादा लोगों को बुलाया नहीं जाएगा और यही कारण है कि शादी गोवा में की जा रही है।

    भारतीय टीम ने अहमदाबाद में डे-नाइट टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ जीत हासिल की थी। उस मैच में भी बुमराह को स्पिन पिच के कारण ज्यादा गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिला था। चेन्नई में हुए दूसरे टेस्ट में भी उन्हें आराम दिया गया था और मुहम्मद सिराज ने इशांत शर्मा के साथ तेज गेंदबाजी की कमान संभाली थी। तीसरे टेस्ट के बाद बीसीसीआइ ने बयान जारी करके कहा था कि बुमराह चौथे टेस्ट में नहीं खेलेंगे। उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में आराम दिया गया है, जो संयोग से उनके गृहनगर अहमदाबाद में ही खेली जानी है। अब उनका वनडे सीरीज में भी लौटना मुश्किल है, जो पुणे में प्रस्तावित है।

    दैनिक जागरण को बीसीसीआइ के एक पदाधिकारी ने कहा कि बुमराह को शादी के लिए और समय चाहिए था, इसलिए ऐसा किया गया है। शादी के बाद बुमराह की क्रिकेट के मैदान पर वापसी अब सीधे आइपीएल 2021 में होगी, जिसका आगाज इंग्लैंड सीरीज समाप्त होने के बाद अप्रैल में होना है। बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में चार विकेट झटके थे, जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा। हाल में इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज से पहले बुमराह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों में 11 विकेट लिए और ब्रिसबेन में खेले गए आखिरी टेस्ट में पेट की मांसपेशी में खिंचाव के कारण नहीं खेल सके थे।

  • इस टीम के साथ मुकाबला, आज मैदान पर उतरेगी वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर की ओपनिंग जोड़ी

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    नई दिल्ली। लंबे समय बाद एक बार फिर से दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ओपनिंग जोड़ी में से एक सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग मैदान पर नजर आएंगे। रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज के पहले मुकाबला में भारत की तरफ से यह दोनों धुरंधर पारी की शुरुआत करने उतरेंगे। 5 मार्च से 21 मार्च तक खेली जाने वाली इस सीरीज में कुल 6 टीमें हिस्सा ले रही है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सीरीज को खेला जाना है।

    आज से रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज की शुरुआत होने जा रही है। सीरीज के पहले मैच में भारत का सामना बांग्लादेश की टीम के साथ होना है। इस बहुचर्चित सीरीज का आगाज रायपुर के शहीद वीरनारायण स्टेडियम में होना है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस सीरीज का शुभआरंभ करने वाले हैं। आधे महीने तक चलने वाली इस सीरीज में भारत, बंग्लादेश, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड की टीमें हिस्सा लेंगी।

    इस सीरीज में क्रिकेट को अलविदा कह चुके दिग्गज ही शामिल होते हैं। हाल ही में भारत के ऑलराउंडर यूसुफ पठान, तेज गेंदबाज आर विनय कुमार और विकेटकीपर नमन ओझा ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा है। ये सभी इस सीरीज में खेलते नजर आएंगे। बड़े नामों में भारत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, इरफान पठान, युवराज सिंह हैं।

    वहीं दुनिया के बाकी बड़े नामों में वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा साउथ अफ्रीका के जोंटी रोड्स इंग्लैंड के केविन पीटरसन और बांग्लादेश के मोहम्मद नजीमुद्दीन हिस्सा ले रहे है। भारत आज शाम पहले मैच में बांग्लादेश के साथ खेलेगा। इसके बाद 9 और 13 मार्च को भारत को बाकी की चार टीमों से खेलना है। 17 और 19 मार्च को सीरीज का सेमीफाइनल मैच खेला जाएगा। 21 मार्च फाइनल मुकाबले के साथ इस साल की सीरीज का समापन होगा।

  • दर्शक बोले वन्समोर, वीरू का बोला बल्ला

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    रायपुर।  दुनिया की नंबर वन जोड़ी ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि आखिर वह नंबर वन क्यूं हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले चुके सहवाग और सचिन का बल्ला एक बार फिर जमकर बोला। मौका था नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायाण सिंह स्टेडियम में 21 मार्च तक आयोजित रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज का।

    जिस उम्मीद के साथ सचिन और सहवाग की ओपनिंग जोड़ी को देखने के लिए हजारों की संख्या में समर्थक पहुंचे थे कुछ वैसा ही देखने को मिला। पहले ही ओवर से सहवाग ने चौके-छक्के से शुरुआत की। मैच में सहवाग का बल्ला जमकर बोला। पूरा स्टेडियम वीरू…वीरू…वीरू नाम से गूंजा। दर्शकों ने मैच का जमकर लुफ्त उठाया।

    सचिन, सहवाग और युवराज के समर्थक

    सचिन-सहवाग के बाद युवराज सिंह के समर्थक सबसे ज्यादा पहुंचे। लोगों ने परिवार के साथ मैच का आनंद उठाया।

    कड़ी सुरक्षा के बीच स्टेडियम में इंट्री

    कोरोना काल को देखते हुए सभी गेंटों में आटोमैटिक तापमान मापने वाली मशीन लगी थी। वहीं सैनिटाइजर भी था। बिना मास्क अंदर किसी को जाने की अनुमति नहीं दी गई। सिक्के तक बाहर रखवा दिए गए।

    दिव्यांग भोला भी पहुंचे मैच देखने

    क्रिकेट और सचिन को चाहने वाले विश्व भर में हैं। ऐसे ही छत्तीसगढ़ में दिव्यांग भोला भी हैं। भोला चल नहीं सकते। 14 साल से सचिन के फैन हैं। उन्होंने कई दिनों पहले ही आनलाइन टिकट बुक कर लिया था। भोला मंडल स्वजनों के साथ मैच देखने पहुंचे थे।

    जानिए क्या कहना है दर्शकों का

    ‘सचिन-सहवाग की पुरानी जोड़ी एक बार फिर देखने को मिली। पहली बार लाइव मैच देखने का मौका मिला।’

    -अभिरल तिवारी

    ‘युवराज सिंह पसंदीदा खिलाड़ी हैं। बल्लेबाजी नहीं आई। गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन किया। मैच देखकर अच्छा लगा।’

    • प्रकाश दुबे

    ‘सहवाग का बहुत बड़ा फैन हूं। जिस उम्मीद को लेकर मैच देखने आया था सहवाग ने वैसी ही बल्लेबाजी की।’

    • मारकुश सिंह

    मैं वीरेेंद्र सहवाग का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उन्हें पहली बार लाइव देखने का मौका मिला। बहुत खुशी हुई।’

  • गावस्कर की फिफ्टी; जानिए क्रिकेट की दुनिया में MS Dhoni क्यों आए याद

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    अहमदाबाद। छह मार्च 1971 को जब पोर्ट ऑफ स्पेन में पांच फुट पांच इंच का भारतीय लड़का पहली बार उस समय की सर्वश्रेष्ठ कैरेबियाई टीम के खिलाफ उसके घर में बिना हेलमेट के उतरा तो किसी को नहीं लगा था कि वह इतनी दूर तक जाएगा। वह लड़का पहले दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बना और बाद में क्रिकेट का सबसे बड़ा दिग्गज। जी हम बात कर रहे हैं 71 साल के सुनील गावस्कर की। शनिवार को गावस्कर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के 50 वर्ष हो जाएंगे। इस मौके पर अभिषेक त्रिपाठी ने सुनील गावस्कर से विशेष बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश-

    -अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के 50 वर्ष, क्या सोचते हैं?

    -यह 50 वर्ष बहुत खुशी देने वाले रहे हैं। यह मेरा सौभाग्य था कि भारत के लिए खेलने का मौका मिला। कुछ ऐसे क्षण थे जिसका हिस्सा बनने का मौका मिला। कुछ अच्छे क्षण थे और कुछ खराब क्षण जिसमें भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था। हालांकि हम उससे भी उबरे और जीत हासिल की। निश्चित तौर पर इस समय विशेष तरह की अनुभूति हो रही है।

    -क्रिकेटर नहीं होते तो क्या होते?

    -मेरा मन था कि मैं डॉक्टर बन जाऊं। मेरी बुआ डॉक्टर थीं। मैं उनकी डिस्पेंसरी में जाया करता था। वहां मध्यम वर्ग और गरीब लोग इलाज कराने आते थे। वह उनकी देखभाल करती थीं। मरीजों की आंखों में मेरी बुआ के लिए जो आदर और प्यार था उसे देखकर मैं डॉक्टर बनना चाहता था। मैं हमेशा मानता आया हूं कि ये दुनिया का सबसे बेहतर प्रोफेशन है। किसी को कोई बीमारी हो तो आप ठीक कर लेते हैं, किसी को दर्द हो रहा है तो दवाइयां देते हैं, दिलासा देते हैं। हालांकि जब मैं दूसरी या तीसरी कक्षा में आया तो मुझे पता चला कि मेरे अंदर उतनी प्रतिभा नहीं है कि मैं आगे डॉक्टर बनूं।

    -क्या इसी वजह से आप बीमार बच्चों की मदद करते हो?

    -मैं हार्ट टू हार्ट फाउंडेशन का ट्रस्टी हूं। ये तीन जगह पर सत्य साई संजीवनी अस्पताल चलाते हैं। इसमें छोटे बच्चे आते हैं जिन्हें दिल की बीमारी होती है। 17-18 साल तक कभी तो उससे भी ज्यादा समय तक उनका इलाज मुफ्त होता है। जो मेरे से होता है वह मैं सहयोग करता हूं, लेकिन यह कुछ भी नहीं हैं क्योंकि जरूरत इससे बहुत ज्यादा है। मैं आपका थोड़ा वक्त लेकर बताना चाहूंगा कि हर साल भारत में तीन लाख से ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं जिनको कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट होता है। इसमें से 90,000 से ज्यादा अपना अगला जन्मदिन भी नहीं देख पाते। उसमें अगर थोड़ा सा भी कर लूं तो आनंद मिलता है। जब माता-पिता इन बच्चों को लेकर अस्पताल आते हैं तो उनके चेहरों पर आशा नहीं होती है। ऑपरेशन के बाद उनको जब बताया जाता है कि आपका बच्चा ठीक हो गया तो उनके चेहरे पर जो आनंद आता है, वह मैंने देखा है। किसी मैच में दोहरा शतक लगाने से ज्यादा इसमें आनंद मिलता है।

    -आप पहलवान भी बनना चाहते थे?

    -जी हां, मेरे ताऊ मुझे वर्ली के वल्लभभाई पटेल स्टेडियम में लेकर जाया करते थे। वहां पर फ्रीस्टाइल कुश्ती करने दारा सिंह जी आया करते थे। वहां पाकिस्तान से अकरम नाम के पहलवान भी आया करते थे। जब दारा सिंह और अकरम के बीच कुश्ती होती थी तो बहुत मजा आता था। दारा सिंह जब एरोप्लेन स्पिन करते थे, मतलब जब विपक्षी को सिर पर उठाकर चकरी जैसा घुमाते थे तो सब उठकर जाने लगते क्योंकि सबको पता चल जाता था कि अब मुकाबला खत्म हो गया। एक उनका स्कॉर्पियन स्टिंग दांव होता था। वह विरोधी पहलवान को पैरों से जकड़ लेते थे, और हम जीत जाते थे। तब मुझे कुश्ती में बहुत लगाव था।

    -क्या अभी कुछ ऐसा मलाल है कि वो काम मैं नहीं कर पाया?

    -नहीं, कोई मलाल नहीं है। मैं काफी संतुष्ट हूं। भगवान की दया है। उसी की वजह से आज मैं यहां हूं।

    -सात जून 1975 को इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप में 174 गेंदों में आपने 36 रन बनाए। क्या आप वनडे फॉर्मेट से खफा थे?

    -देखिए क्या हुआ, उस समय भारतीय टीम ज्यादा वनडे खेलती नहीं थी और हमें उसका अभ्यास नहीं था। पिच पर थोड़ी सी घास थी और गेंद हिल रही थी। 10-15 ओवर तो गेंद बल्ले में आई ही नहीं। मैं या तो प्ले एंड मिस कर रहा था या गेंद पैड में लग रही थी। जब गेंद हॉफ वॉली आई या हाफ पिच पर आई तो मैंने उस पर कट और ड्राइव किए, लेकिन गेंद सीधे फील्डर के पास गई। दो-तीन साल पहले (2018 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे में) उसी लॉ‌र्ड्स मैदान पर दिग्गज बल्लेबाज महेंद्र सिंह धौनी को खेलते देखा, जिनके पास मुझसे बहुत ज्यादा शॉट हैं। उनकी पारी वैसी ही चल रही थी। वह जहां भी शॉट मार रहे थे, गेंद फील्डर के पास जा रही थी। आप शायद थे उस मैच में.. आखिरकार उन्होंने कुछ बड़े शॉट लगाए। वह मैच भारत हार गया था। उनकी पारी देखकर मुझे अपनी 36 रनों की पारी याद आ गई। मैं तुलना नहीं करना चाहता क्योंकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में धौनी मुझसे बहुत अच्छे क्रिकेटर हैं। मैं उन्हें तुलना करके नीचे नहीं लाना चाहता है। कभी-कभी अच्छी पारियां देखकर आपको अपनी बल्लेबाजी याद आ जाती है। ऐसे ही किसी खराब पारी को देखकर आपको कुछ याद आता है। उस मैच में जब मैंने धौनी को संघर्ष करते हुए देखा तो मुझे पहली बार अपनी पारी याद आ गई। मैंने उनकी पारी देखकर सोचा कि 40-42 साल पहले मैंने इसी मैदान पर फालतू पारी खेली थी।

    -आधा दशक हो गया आपको पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हुए। क्रिकेट कितना बदला?

    -मेरे हिसाब से यह खेल बहुत बदला है और अच्छे के लिए बदला है। पिछले 15 साल में यह करियर का विकल्प बन गया है। आइपीएल से पहले और सेटेलाइट टीवी राइट्स आने से पहले हर क्रिकेटर खेलने के साथ नौकरी भी करता था। तब भारतीय टीम भी साल में 10-11 महीने क्रिकेट नहीं खेलती थी। तब तीन-चार महीने का क्रिकेट था और उसके बाद क्रिकेटरों को नौकरी करनी होती थी। क्रिकेटर ऑफ सीजन में टाटा, रेलवे, एसबीआइ और अन्य कंपनियों में 10 से छह की नौकरी करते थे। अब वह नहीं है। आइपीएल और प्रसारणकर्ता से मिलने वाले धन की वजह से क्रिकेटर अब लगातार 12 महीने क्रिकेट पर ध्यान लगा सकते हैं। अभ्यास कर सकते हैं। यह अच्छी बात है। हां, अब खेलने के अंदाज में क्रिकेट कुछ बदल गया है। अब बल्लेबाज बहुत कम डिफेंसिव खेलते हैं। वे फटाफट आक्रामक खेलना चाहते हैं। जब गेंद सीम कर रही हो, स्विंग या स्पिन कर रही हो तो दिक्कत होती है। तब डिफेंस नहीं दिखाई देता। हालांकि, यह भी सच है कि आक्रामक शॉट देखने में मजा आता है।

    -इस सीरीज में भी कमजोर डिफेंस की बात हुई है। बल्लेबाजों को टी-20 और टेस्ट की बल्लेबाजी में सामंजस्य कैसे बनाना चाहिए?

    -ये तो मानसिकता की बात है। अगर आप रोहित और विराट को देखेंगे तो उनकी मानसिकता हर प्रारूप के लिए बदलती है। इसके लिए आपको दिमागी तालमेल बैठाना होता है और फिर बल्ले की गति में तालमेल करना होता है। इसी वजह से वे दोनों सभी प्रारूप में सफल हैं। अगर ये होता रहेगा तो कभी दिक्कत नहीं होगी। जो ये नहीं कर पा रहे हैं वह संघर्ष कर रहे हैं। अब बहुत कम ऐसी विकेट मिलती हैं जहां चैलेंज होता है। आजकल वनडे और टी-20 क्रिकेट पाटा पिच में होता मिलेगा, बाउंड्री छोटी हो गई हैं, बल्ले ताकतवर आ रहे हैं, अगर मिस हिट भी होती है तो गेंद छक्के के लिए जाती है, इसलिए बल्लेबाज डिफेंस के बारे में कम सोचते हैं। अगर दो-तीन डॉट गेंदें गई तो फिर उनके दिमाग में आता है कि इसको बाहर जाकर लपेटूं। अगर शॉट सही हो गया तो छक्का जाता है। बल्लेबाज जेल ब्रेक शॉट इस्तेमाल करते हैं। यह कभी सफल होता है, कभी नहीं। जहां पर गेंद सीम हो रही, स्विंग हो रही, वहां पर आक्रामक शॉट चलता नहीं है।

    -आपके पसंदीदा क्रिकेटर कौन रहे हैं?

    -मेरे सबसे पसंदीदा क्रिकेटर एमएल जयसिम्हा थे। अभी तीन दिन पहले ही उनका जन्मदिन था। वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। मेरा सौभाग्य था कि मेरा जो पहला वेस्टइंडीज दौरा था उसमें वह भी शामिल थे। उनका जो अनुभव था उससे सीखने का मौका मिला। उनके साथ कई सीनियर खिलाड़ी जैसे अजित वाडेकर, इरापल्ली प्रसन्ना और सत्य साई थे। इनसे काफी सीखा। उसके बाद में गुंडप्पा विश्वनाथ, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, महेला जयवर्धने मुझे पसंद थे। जिस तरह से वे बल्लेबाजी को आसान करते थे, उन्हें देखने में काफी मजा आता था। अभी मैंने पूरी लिस्ट नहीं बताई है क्योंकि मुझे कई और क्रिकेटर पसंद हैं। कुछ नाम भूल गया हूं, मुझे माफ करिएगा।

    -वर्तमान क्रिकेटरों में कौन पसंदीदा है?

    -अभी जो खेल रहे हैं उसमें मुझे रोहित शर्मा बहुत पसंद हैं क्योंकि वह बल्लेबाजी को बहुत आसान करते हैं। दूसरे केन विलियमसन हैं जिनके पास बहुत अच्छी तकनीक है। वह जिस तरह से सारे प्रारूप में बल्लेबाजी करते हैं वह बहुत अच्छा लगता है। विराट कोहली की जो मानसिकता है, जिस तरह से वह बल्लेबाजी भी करते हैं वह भी अच्छा है। पाकिस्तान के बाबर आजम को मैंने ज्यादा नहीं देखा है, लेकिन जो भी देखा है उसमें वह बहुत प्रभावी नजर आए हैं। उनको देखकर भी मजा आता है

    -71 बसंत पार करने के बावजूद आप अभी भी बहुत यंग हैं। तीसरे टेस्ट मैच के बाद आप जिस तरह दर्शकों के उत्साह बढ़ाने पर मैदान के किनारे थिरक रहे थे, ऐसी एनर्जी कहां से लाते हैं?

    -यह तो भगवान की कृपा है। (मजाक में) मैं ये कहूंगा कि ऐसी पत्नी खोजें जो किचन में नहीं जाती हो। मैंने अपनी पत्नी को किचन में नहीं जाने दिया। बात सीधी सी है भाई, अगर बीवी खाना बनाती है तो आपको पसंद हो या ना हो पूरा खाना ही पड़ता है और जितना आप खाएंगे वजन बढ़ता जाएगा। अगर आपकी बीवी ऐसी है जो किचन में नहीं जाती तो वह नहीं कहेगी कि ये खा लो, वो खा लो। फिर आपके पेट में जितनी जगह है उतना ही खा सकते हो। शायद उसी की वजह से मेरी काफी मदद हो गई।

    -क्रिकेट में आपका सबसे अच्छा और खराब पल?

    -मेरा सर्वश्रेष्ठ पल एक ही है, जब भारतीय टीम ने 1983 में विश्व कप जीता था। वह मेरे लिए अविस्मरणीय पल था और हमेशा वही रहेगा। और सबसे खराब पल वही है जिसका आपने जिक्र किया था, वह 36 रनों की पारी। मैं वहां अपने देश के लिए कुछ नहीं कर पाया।

    -आप टेस्ट में 10,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज थे। क्या आपको लगता है कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से क्रिकेट का यह फॉर्मेट बच जाएगा?

    -हो सकता है कि इससे टेस्ट बच जाए। हालांकि अगर देखा जाए तो आजकल जो क्रिकेट खेलते हैं वे सभी टेस्ट क्रिकेट के फैन हैं। वे सब जानते हैं कि आगे जाकर इतिहास में अगर उनका नाम होना है तो उन्हे टेस्ट में रन बनाने होंगे, विकेट लेने होंगे। वनडे और टी-20 के रन ठीक हैं, लेकिन टेस्ट में जिन्होंने सफलता प्राप्त की है उनको ही याद किया जाएगा।

  • विराट कोहली ने पहले मिली हार की वजह बताई और इस डिपार्टमेंट को टी20 मैच में न्यूनतम स्तर का करार दिया

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    नई दिल्ली।विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया को इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में हार के साथ शुरुआत करनी पड़ी। पहले ही मैच में इयोन मोर्गन की कप्तानी वाली इंग्लिश टीम ने भारत को 8 विकेट से धो डाला। इंग्लैंड की टीम ने घातक गेंदबाजी करते हुए पहले भारत को 124 रन पर रोक दिया और फिर आसानी से 2 विकेट पर जीत के लिए मिले 125 रन के लक्ष्य को हासिल कर लिया। इस मैच में ना तो भारतीय गेंदबाजी और ना ही भारतीय बल्लेबाजी ज्यादा प्रभावी दिखी।

    अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में मिली हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि, हमें पिच के बारे में ज्यादा पता नहीं था कि इस तरह की सरफेस पर क्या करना चाहिए। इसके अलावा कुछ शॉट्स को खेलने में कमी रही और अब हमें मजबूत इरादे और योजना की स्पष्टता के साथ वापस आना होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि, इस विकेट ने हमें उस तरह से शॉट्स खेलने की अनुमति नहीं दी जैसा कि हम चाहते थे। बल्लेबाजी में हमारा प्रदर्शन न्यूनतम स्तर का रहा और हमें इसका भुगतान हार के तौर पर करना पड़ा।

    विराट कोहली ने कहा कि, हम कुछ अलग करना चाहते थे, लेकिन हमें ये भी स्वीकार करना होगा कि हमने अच्छी बल्लेबाजी नहीं की। उन्होंने श्रेयस अय्यर की तारीफ करते हुए कहा कि, उन्होंने अच्छी बल्लेबाजी की, लेकिन बोर्ड पर जीतने के लिए पर्याप्त रन नहीं थे। ये इंटरनेशनल क्रिकेट के सफर का हिस्सा है और खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन आपको फिर खेल में वापसी करना होता है। आपको बता दें कि, श्रेयस अय्यर ने इस मैच में सबसे ज्यादा 67 रन की पारी खेली थी जबकि विराट कोहली शून्य पर आउट हुए थे। शून्य पर आउट होने के साथ ही वो बतौर भारतीय कप्तान सबसे ज्यादा बार आउट होने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। विराट इंटरनेशनल क्रिकेट में 14वीं बार शून्य पर आउट हुए और सौरव गांगुली (13 बार) का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

  • इशान किशन4 रन बनाकर आउट, तीसरा विकेट गिरा भारत का

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    नई दिल्ली।  भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस वक्त दोनों ही टीमों सीरीज में एक- एक मैच जीतकर बराबरी पर हैं। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मॉर्गन ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी है। खबर लिखे जाने तक भारत ने 5.2 ओवर में 3 विकेट के नुकसान के 24 रन बनाए थे। रिषभ पंत और विराट कोहली ने पारी की शुरुआत की है।

    भारत की बल्लेबाजी, रोहित और राहुल आउट

    भारतीय टीम के लिए रोहित शर्मा के साथ केएल राहुल ने पारी की शुरुआत की। लागतार तीसरे मैच में राहुल ने टीम को निराश किया। 4 गेंद पर बिना खाता खोले वो मार्क वुड की गेंद पर बोल्ड होकर वापस लौट गए। इसके बाद 15 रन बनाकर वुड ने जोफ्रा आर्चर के हाथों कैच करवा वापस भेजा। पिछले मैच में धमाकेदार अर्धशतक से डेब्यू करने वाले इशान किशन भी महज 4 रन बनाकर क्रिस जॉर्डन की गेंद पर आउट हुए।

    दोनों ही टीमें आज मैच में एक एक बदलाव के साथ उतरी है। भारतीय टीम में रोहित शर्मा की वापसी हुई है और सूर्यकुमार यादव को बाहर बिठाया गया है। चोटिल तेज गेंदबाज मार्क वुड फिट होकर इंग्लैंड की टीम में वापसी कर रहे हैं। टॉम कुर्रन की जगह उनको प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई है।

    भारत का प्लेइंग इलेवन-

    रोहित शर्मा, केएल राहुल, ईशान किशन, विराट कोहली (कप्तान), रिषभ पंत, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पांड्या, वाशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर, भुवनेश्वर कुमार, युजवेंद्रा चहल।

    इंग्लैंड का प्लेइंग इलेवन 

    जेसन रॉय, जोस बटलर, डेविड मलान, जॉनी बेयरस्टो, इयोन मोर्गन, बेन स्टोक्स, सैम कुर्रन, जोफ्रा आर्चर, मार्क वुड, क्रिस जॉर्डन, आदिल रशिद।

    इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मैच में इशान किशन और सूर्यकुमार यादव ने डेब्यू किया था। इशान ने पहली ही पारी में धमाकेदार अर्धशतक बनाकर सबका ध्यान खींचा। सूर्यकुमार को खेलने का मौका नहीं मिला।

  • जब ‘क्रिकेट के भगवान’ ने ठोका ‘शतकों का महाशतक, बने थे दुनिया के इकलौते खिलाड़ी

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    नई दिल्ली। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने 16 मार्च 2012 को वो कमाल का विश्व रिकॉर्ड बनाया था, जिसे तोड़ पाना अगले कई सालों में नामुमकिन है। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने आज ही के दिन शतकों का महाशतक बनाया था। जी हां, सचिन तेंदुलकर ने इसी दिन 2012 को 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया था। सचिन ने शतकों के सिलसिले की शुरुआत करीब दो दशक पहले की थी।

    सचिन तेंदुलकर ने एशिया कप 2012 में बांग्लादेश के खिलाफ 147 गेंदों में 12 चौके और 1 छक्के की मदद से 114 रन की पारी खेली थी। ये सचिन तेंदुलकर के अंतरराष्ट्रीय करियर का 100वां और आखिरी शतक था। 100वें शतक के लिए सचिन तेंदुलकर एक दो मैचों का नहीं, बल्कि दर्जनों मैचों का इंतजार किया था। 12 मार्च 2011 को वर्ल्ड कप में उन्होंने आखिरी शतक लगाया था, जो उनके करियर का 99वां शतक था।

    100वें शतक के लिए उनको लंबा इंतजार करना पड़ा। यहां तक कि एशिया कप में अगला मैच खेलने के बाद वे कभी भी वनडे टीम में शामिल नहीं हुए, लेकिन टेस्ट क्रिकेट थोड़े और समय तक खेली। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में वे दो साल से ज्यादा समय तक शतक नहीं जड़ पाए थे और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, लेकिन शतकों के महाशतक का रिकॉर्ड आज भी अटूट है।

    शतकों के सिलसिले की शुरुआत साल 1992 में हुई थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 100 शतकों का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। सचिन तेंदुलकर ने 51 शतक टेस्ट क्रिकेट में जड़े हैं, जबकि 49 शतक उन्होंने वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में जमाए हैं। 200 टेस्ट मैच उन्होंने अपने करियर में खेले हैं, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। 14 नवंबर 2013 को उन्होंने आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था।

  • कैसा होगा टीम इंडिया का प्लेइंग इलेवन आखिरी टी20 में, हो सकता है एक बदलाव

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    नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला निर्णायक होने वाला है। इस वक्त दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर है और आखिरी मैच जीतने वाली टीम ही खिताब पर कब्जा करेगी। इस मैच में उतरने से पहले भारतीय टीम किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहेगी लिहाजा प्लेइंग इलेवन में एक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

    ओपनिंग में बदलाव की संभावना

    रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग में शिखर धवन को मौका दिया जा सकता है। केएल राहुल पिछले चार मैच में रन बनाने में नाकाम रहे हैं। इस अहम मौके में टीम के अनुभव की जरूरत हो धवन के पास है।

    सूर्यकुमार, विराट, अय्यर

    मिडिल आर्डर में भारत के पास काफी मजबूत तिकड़ी है। सूर्यकुमार ने अपने पहले मैच में घरेलू मुकाबलों का अनुभव झोंकते हुए शानदार पारी खेली। कप्तान कोहली और श्रेयस अय्यर टीम को मिडिल आर्डर को मजबूती देते हैं।

    विकेटकीपर रिषभ पंत

    रिषभ पंत ने इस सीरीज से टी20 में वापसी की है और छोटी छोटी लेकिन अहम पारियां खेली है। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी एक बार फिर से उनके पास ही होगी।

    हार्दिक पांड्या ऑलराउंडर

    पिछले मैच में गेंदबाजी के कमाल करने वाले हार्दिक से आखिरी मुकाबले में बल्ले से भी वैसे ही प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।

    शार्दुल, भुवनेश्वर तेज गेंदबाज

    टीम में तेज गेंदबाजी का जिम्मा अनुभवी भुवनेश्वर कुमार के साथ शार्दुल ठाकुर के हाथों में रहेगी। पिछले मैच में शार्दुल ने अपने दम पर मैच को पलट दिया था।

    सुंदर और चाहर

    राहुल चाहर को पिछले मैच में युजवेंद्र चहल की जगह मौका दिया गया था और वह इसपर खरे उतरे। उनके साथ वॉशिंग्टन सुंदर दूसरे स्पिनर की भूंमिका अदा करेंगें।

    भारत का संभावित प्लेइंग इलेवन 

    रोहित शर्मा, केएल राहुल/शिखर धवन, सूर्यकुमार यादव, विराट कोहली, रिषभ पंत, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पांड्या, शार्दुल ठाकुर, वॉशिंग्टन सुंदर, भुवनेश्वर कुमार, राहुल चाहर

  • लांस क्लूजनर ने बताई दिलचस्प वजह, विराट कोहली Dhoni के मुकाबले ज्यादा क्लासी बल्लेबाज क्यों हैं

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    नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर लांस क्लूजनर ने विराट कोहली को एम एस धौनी के मुकाबले ज्यादा क्लासी बल्लेबाज करार दिया। लांक क्लूजनर इस वक्त 49 साल के हैं और वो अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं। जब क्लूजनर से विराट कोहली और एम एस धौनी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसके बारे में बड़ी ही शानदार बातें कहीं, लेकिन विराट कोहली कौ धौनी के मुकाबले ज्यादा बेहतर बल्लेबाज करार दिया।

    लांस क्लूजनर ने कहा कि, ये दोनों खिलाड़ी क्रिकेट के सच्चे लीजेंड्स हैं। मैं इन दोनों खिलाड़ी जिस तरह से अपनी टीम को आसानी से मैच में जीत दिलाते हैं उसे मैं देखना पसंद करता हूं। धौनी खेल को गहराई तक ले जाते हैं और जिस तरह से निचले क्रम के बल्लेबाज के साथ मिलकर मैच में जीत दिलाते हैं वो कमाल का है और इस आर्ट में वो माहिर हैं। क्लूजनर ने कहा कि, मैं उनमें अपनी छवि देखता हूं। विराट कोहली जैसे बल्लेबाज ज्यादातर पारियों में एक एंकर की भूमिका निभाते हैं, लेकिन धौनी एक आक्रामक बल्लेबाज हैं और वो गेंदबाजों पर हावी होना पसंद करते हैं बिल्कुल मेरी तरह।

    उन्होंने आगे कहा कि, विराट कोहली से तुलना करें तो हमारा काम ज्यादा आसान था। टॉप-ऑर्डर में बल्लेबाजी करना और पारी को संवारना ये दोनों काम एक साथ क्वालिटी गेंदबाजों के सामने करना काफी कठिन होता है। यही वजह है कि, विराट कोहली का क्लास अलग है और वो ज्यादा बेहतर बल्लेबाज हैं। लांस क्लूजनर ने कहा कि, टी20 के आने से टेस्ट क्रिकेट का रोमांच खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि, टी20 काफी पॉपुलर है, लेकिन पारंपरिक फॉर्मेट से ही क्रिकेटर्स का रियल टेस्ट होता है। टेस्ट क्रिकेट का रोमांच कभी खत्म नहीं हुआ था और ना ही ऐसा होगा। टेस्ट क्रिकेट की असल क्रिकेट है और इससे सभी इत्तेफाक रखते हैं।