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  • चिंकी को खेलों में माता-पिता की जिद ने दिया भविष्य

    चिंकी को खेलों में माता-पिता की जिद ने दिया भविष्य

    नई दिल्ली। भोपाल की रहने वाली निशानेबाज चिंकी यादव ने कतर में खेली गई एशियाई चैम्पियनशिप में भारत को ओलम्पिक कोटा दिलाया। चिंकी ने 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 588 का स्कोर किया और फाइनल में रजत पदक जीत अगले साल टोक्यो ओलम्पिक-2020 का टिकट कटाया। अगर तकरीबन 10 साल पहले की बात की जाए तो चिंकी को यह तक नहीं पता था कि वह किस खेल में अपने हाथ आजमाएं।

    शायद किस्मत चिंकी को निशानेबाजी में लाना चाहती थी और इसलिए माली हालत ठीक न होने के बाद भी उन्होंने इस खेल को चुना और आज वह भारत के लिए बड़ी सफलता अर्जित कर स्वदेश लौट चुकी हैं।

    चिंकी के पिता मेहताब सिंह यादव भोपाल में मध्य प्रदेश सरकार की खेल अकादमी में इलेक्ट्रीशियन के पद पर कार्यरत हैं और उनका निवास भी वहीं हैं। यहीं से चिंकी के खेल में आगे बढ़ने की कहानी शुरू होती है।

    चिकी ने आईएएनएस से कहा, “मैं जहां रहती हूं वो जगह अकादमी कैम्पस में ही है। मेरे पिता वहीं पर इलेक्ट्रीशिन का काम करते हैं। वहां खेल होते रहते हैं तो मैं कुछ न कुछ खेला करती थी। मुझे पता था कि वहां निशानेबाजी है लेकिन मैंने ज्यादा कुछ इस खेल के बारे में पता नहीं किया था क्योंकि यह काफी महंगा खेल है और इसकी एक गोली भी खरीदना हमारे लिए मुश्किल था। इसलिए मैंने कुछ इस खेल के बारे में पता नहीं किया क्योंकि अगर करती तो शायद रूचि जाग जाती।”

    चिकी ने निशानेबाजी से पहले जिम्नास्टिक, बैडमिंटन जैसे खेल भी खेले। उन्होंने कहा, “तब मैं काफी छोटी हुआ करती थी इसलिए ज्यादा अच्छे से याद नहीं है लेकिन मुझे इतना पता है कि मैं जिम्नास्टिक किया करती थी। तीन साल तक मैंने वो खेल खेला। इसके बाद मैंने एक-दो साल बैडमिंटन खेला, लेकिन यह निरंतर नहीं खेलती थी। इसके बाद शायद मैंने स्नूकर खेला।”

    चिकी को खेल की दुनिया से रूबरू उनके परिवार ने ही कराया क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटी खेले और एक्टीव रहे।

    उन्होंने कहा, “मुझे अच्छे से याद है, मेरे मम्मी पापा कहा करते थे कि जाओ खेलो, सभी बच्चों के साथ मिलकर खेलो। एन्जॉय करो। मेरा माता-पिता हमेशा मुझे कुछ न कुछ करने के लिए कहते रहते थे और कहा करते थे कि तुम बैठो मत बस एक्टिव रहो।”

    कई तरह के खेल खेलने के बाद चिकी शूंटिंग रेंज तक एक स्कीम के आने के बाद पहुंची जिसने उनकी निशानेबाजी के खर्चे की चिता को खत्म कर दिया और यहीं से उनके लंबे सफर की शुरुआत हुई।

    उन्होंने कहा, “अकादमी में एक वेदप्रकाश सर हुआ करते थे और उन्होंने स्कीम निकाली थी कि अकादमी खिलाड़ी का पूरा खर्च उठाएगी। उस स्कीम के माध्यम से मैंने कोशिश की। मैंने 2012 से निशानेबाजी इसकी शुरुआत की थी।”

    2013 से चिंकी ने 25 मिटर पिस्टल की शुरुआत की और लगतार पदक जीतना शुरू किए। 2015 से चिकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं और कुल 10 पदक जीत चुकी हैं।

    चिकी से जब ओलम्पिक कोटा हासिल करने पर उमड़ी भावनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं जितनी मेहनत करती थी अब मैं उससे डबल मेहनत करूंगी। फिलहाल मुझे यही खुशी थी कि मैंने देश के लिए कोटा लिया है। मुझे इस बात की बहुत खुशी हुई थी कि मैं अपने देश के लिए ओलम्पिक कोटा हासिल करने का कारण बनी।”

    चिंकी के पिता को भी पता है कि उनकी बेटी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेटी के घर लौटने पर पिता ने चिंकी से यही कहा था कि अब असल इम्तिहान शुरू हुआ है। चिंकी के पिता जानते हैं कि उनकी बेटी की जिंदगी में संघर्ष है और आगे भी रहेगा जिसमें वह हर कदम पर अपनी बेटी का साथ देने को तैयार हैं।

    उनके पिता ने कहा, “अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है। आगे का सफर और कठिन है। करेगी संघर्ष और हम उसका पूरा साथ देंगे। ओलम्पिक कोटा के बारे में नहीं सोचा था क्योंकि यह खेल है इसमें हार जीत होती रहती है। बच्चा हार भी जाए तो निराश नहीं होना चाहिए और जीत भी जाए तो ज्यादा खुशी भी जाहिर नहीं करनी चाहिए।”

    पिता ने कहा, “माली हालत ठीक नहीं थी। लेकिन उसका साथ दिया है मैंने और आगे भी करूंगा क्योंकि संघर्ष में साथ नहीं देंगे तो बच्चा पिछड़ जाता है इसलिए जो कमी है पूरी करनी पड़ती है।”

    चिंकी के पिता अपनी बेटी के बारे में कहते हैं कि वह गंभीर है और उसे शोर शराबा पसंद नहीं है।

    उन्होंने कहा, “उसका सरल स्वाभाव है। वह गंभीर है और फोकस रहती है। उसे बच शोर शराबा नहीं चाहिए। वो शांत माहौल में रहने वाली है।”

    चिकी ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में कोटा हासिल किया, हालांकि इस स्पर्धा में भारत के पास राही सरनाबात जैसी अन्य खिलाड़ी भी हैं इसलिए यह देखना अब दिलचस्प होगा कि ओलम्पिक में इस स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।

  • ये क्रिकेटर अछूते नहीं रहे अंधविश्वास से, जानें आजमाए कौनसे तरीके सचिन, कोहली, द्रविड़…ने

    ये क्रिकेटर अछूते नहीं रहे अंधविश्वास से, जानें आजमाए कौनसे तरीके सचिन, कोहली, द्रविड़…ने

    नई दिल्ली। क्रिकेट जैसे खेल को भारत में धर्म समझा जाता है और खिलाडिय़ों को भगवान। इसका कारण खिलाडिय़ों के द्वारा किया गया प्रदर्शन होता है जिसके दम पर वे अपनी टीम को जीत दिलाते हैं और खुद भी नाम कमाते हैं। लेकिन कई बार खिलाड़ी इस अच्छे प्रदर्शन के लिए मेहनत, काबिलियत के अलावा कई तरह के टोटकों और अंधविश्वास पर भी निर्भर रहते हैं।

    कोई खास रंग और नंबर को अपने साथ रखना पसंद करता है तो कोई अपनी पसंदीदा चीजों को साथ लेकर चलना चाहते हैं ताकि उन्हें असुरक्षा की भावना नहीं आए और वे अपने इन टोटकों से अच्छे प्रदर्शन का विश्वास हासिल कर सकें। छोटी सी उम्र से गेंदबाजों के लिए काल बन क्रिकेट में भगवान का दर्जा पाने वाले सचिन तेंदुलकर भी इससे अछूते नहीं रहे।

    क्रिकेट बुक में लगभग हर रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले सचिन बल्लेबाजी के लिए जाने से पहले खास तरह का पैटर्न फॉलो करते थे। सचिन हमेशा अपने बाएं पैर में पहले पैड पहनते थे,क्योंकि खेल के भगवान को लगता था कि इससे वे मैदान पर अच्छा करेंगे। इसी तरह 2011 विश्व कप से पहले सचिन ने अपना पसंदीदा बल्ला भी ठीक करवाया था जिसे वो लकी मानते थे।

    सचिन के कई रिकॉर्ड तोडऩे वाले और बाकी के रिकॉर्ड के पीछे हाथ धोकर पड़े भारत के मौजूदा कप्तान विराट कोहली भी अपने प्रेरणास्त्रोत सचिन की तरह एक समय तक अंधविश्वास से घिरे हुए थे। कोहली ने जब रनों का अंबार लगाने की शुरुआत की थी, तब उन्होंने जो ग्लव्स पहने थे, कोहली लंबे समय तक उन्हें ही दोहराते रहे क्योंकि उन्हें लगता था कि इन्ही ग्लव्स के दम पर उनके बल्ले से रन निकल रहे हैं। एक समय के बाद जब उन्हें यह अहसास हो गया कि उनकी प्रतिभा इस अंधविश्वास से कहीं ज्यादा ताकतवर है तो उन्होंने इससे छुटकारा पा लिया।

    सचिन जहां पहले बाएं पैर में पैड पहनना पसंद करते थे वहीं उनके साथी और भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ठीक सचिन से उल्टा दाएं पैर में थाईपैड पहनना पसंद करते थे। साथ ही अंधविश्वास के कारण राहुल कभी भी मैच में नए बल्ले से नहीं खेलते थे। हम सभी जानते हैं कि द्रविड़ को दीवार कहा जाता था। सचिन और राहुल के साथी अनिल कुंबले भी अपने करियर में एक समय इससे पीछे नहीं रहे।

    कुंबले ने ऐतिहासिक फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट मैच की एक पारी में पूरे 10 विकेट लिए थे। इस मैच में कुंबले जब भी गेंदबाजी करने जाते थे,तो सचिन को अपनी कैप और स्वेटर देते थे। आम तौर पर गेंदबाज गेंदबाजी करने से पहले अपने सभी सामना चाहे वो कैप हो, स्वेटर हो या चश्मा, गेंदबाजी छोर पर खड़े अंपायर को देता है, लेकिन कुंबले ने उस मैच में सचिन को दिए थे।

    भारत के पूर्व हरफनमौला खिलाड़ी मोहिंदर अमरनाथ और उनके लाल रुमाल का किस्सा भी काफी प्रचलित है। 1983 विश्व कप के फाइनल में मैन ऑफ द मैच अमरनाथ मैदान पर जब भी फील्डिंग करने जाते थे तो वे अपनी जेब में लाल रुमाल रखते थे। सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी से पहले भारत के सबसे सफल और चतुर कप्तान माने जाने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन भी टोटके आजमाने से पीछे नहीं रहे थे।

    उनके गले में डला काला ताबीज इसकी गवाही था जिसे इस दिग्गज बल्लेबाज ने कभी नहीं उतारा। फील्डिंग के दौरान कई बार अजहर को यह ताबीज चूमते हुए भी देखा जा सकता था, लेकिन खास बात यह थी कि अजहर जब भी बल्लेबाजी करने आते थे, तो वे अपने इस ताबीज को टी-शर्ट के बाहर ही रखते थे।

    भारत रीति-रिवाजों और मान्यताओं का देश है ऐसे में यहां के कई खिलाड़ी इसी तरह के टोटकों और अंधविश्वास में भी विश्वास रखते हैं तो इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं होती, लेकिन जब विदेशी खिलाड़ी इस तरह के टोटकों के साथ मैदान पर कदम रखते हैं तो थोड़ा अजीब जरूर लगता है। दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाने वाले ऑस्ट्रेलिया के स्टीव वॉ भी अमरनाथ की तरह लाल रुमाल रखकर चलते थे।

    स्टीव को यह रुमाल उनकी दादी ने दिया था और उन्हें लगता था कि दादी का यह आशीर्वाद उनके लिए भाग्यशाली है। श्रीलंका के दिग्गज बल्लबाजों में शुमार माहेला जयवर्धने बल्लेबाजी करते हुए कई बार अपने बल्ले को चूमते थे। यह उनकी मान्यता का हिस्सा था। उन्हें लगता था कि यह उनके लिए अच्छा साबित होगा।

  • पहला टेस्ट पहला दिन : बांग्लादेश सिमटा 50 रन पर, भारत को लगा पहला झटका, रोहित आउट

    पहला टेस्ट पहला दिन : बांग्लादेश सिमटा 50 रन पर, भारत को लगा पहला झटका, रोहित आउट

    इंदौर। बांग्लादेश के कप्तान मोमिनुल हक ने भारत के खिलाफ आज यहां होल्कर स्टेडियम में दो मैच की सीरीज के पहले टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। भारतीय गेंदबाजों के जबरदस्त प्रदर्शन के बाद तीसरे सत्र के खेल में बांग्लादेश की पहली पारी 58.3 ओवर में 150 रन पर ही ढेर हो गई। जवाब में अंतिम समाचार मिलने तक भारत के 10 ओवर में 22/1 रन हो गए थे। रोहित शर्मा (6) पैवेलियन लौट गए।

    इससे पहले भारत के लिए मोहम्मद शमी ने 3, रविचंद्रन अश्विन, ईशांत शर्मा व उमेश यादव ने 2-2 विकेट चटकाए। बांग्लादेश की ओर से मुश्फिकुर रहीम ने सर्वाधिक 43 रन बनाए। रहीम के अलावा चार और बल्लेबाज दोहरे अंकों तक पहुंचे। कप्तान मोमिनुल हक ने 37, विकेटकीपर लिटन दास ने 21, मोहम्मद मिथुन ने 13 और महमूदुल्ला ने 10 रन का योगदान दिया।

    इस मैच में तेज गेंदबाज ईशांत की वापसी हुई है। भारत ने बांग्लादेश को हाल ही में टी20 सीरीज में 2-1 से हराया। इससे पहले उसने अपने घर में ही दक्षिण अफ्रीका का तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 3-0 से सफाया किया था।

  • पहला टेस्ट पहला दिन : बांग्लादेश के भारतीय गेंदबाजों ने निकाले 7 विकेट

    पहला टेस्ट पहला दिन : बांग्लादेश के भारतीय गेंदबाजों ने निकाले 7 विकेट

    इंदौर। बांग्लादेश के कप्तान मोमिनुल हक ने भारत के खिलाफ आज यहां होल्कर स्टेडियम में दो मैच की सीरीज के पहले टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। चायकाल तक बांग्लादेश के 54 ओवर में 140/7 रन हो गए थे। मोहम्मद शमी ने तीन, रविचंद्रन अश्विन ने दो और ईशांत शर्मा व उमेश यादव ने 1-1 विकेट लिया है। इस मैच में तेज गेंदबाज ईशांत की वापसी हुई है। भारत ने बांग्लादेश को हाल ही में टी20 सीरीज में 2-1 से हराया। इससे पहले उसने अपने घर में ही दक्षिण अफ्रीका का तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 3-0 से सफाया किया था।

  • INDIA VS BANGLADESH LIVE 1ST TEST DAY 3 : बांग्लादेश को ईशांत-उमेश ने दिए बड़े झटके, गिरे 2 विकेट 16 रन पर

    INDIA VS BANGLADESH LIVE 1ST TEST DAY 3 : बांग्लादेश को ईशांत-उमेश ने दिए बड़े झटके, गिरे 2 विकेट 16 रन पर

    इंदौर। भारत और बांग्लादेश के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जा रहा है। आज तीसरा दिन है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम 150 रन पर ढेर हो गई थी। भारत ने इसके जवाब में अपनी पहली पारी में 6 विकेट पर 493 रन बनाकर पारी को घोषित कर दिया था। इस प्रकार भारत को पहली पारी में 343 रनों की बढ़त मिल गई थी। दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश ने 2 विकेट गंवा कर 16 रन बना लिए हैं। इमरुल काएस (6) को उमेश यादव और शादमान इस्लाम (6) को ईशांत शर्मा ने बोल्ड कर पवेलियन लौटा दिया है।

    LIVE …

    -मोहम्मद मिथुन (0 रन) और मोमिनुल हक (4 रन) क्रीज पर मौजूद हैं।

    इससे पहले दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने मयंक अग्रवाल (243) और अजिंक्य रहाणे (86) की बेहतरीन पारियों की मदद से बांग्लादेश पर 343 रनों की मजबूत बढ़त ले ली। भारत ने मैच के पहले दिन बांग्लादेश को 150 रनों पर समेट दिया था। जवाब में भारत ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक छह विकेट खोकर 493 रन बना लिए हैं। रवींद्र जडेजा 60 और उमेश यादव 25 रन बनाकर खेल रहे हैं।

    भारत ने पहले दिन रोहित शर्मा (6) का विकेट खो दिया था, लेकिन मयंक और चेतेश्वर पुजारा ने दूसरा झटका नहीं लगने दिया था। दूसरे दिन इस जोड़ी ने एक विकेट के नुकसान पर 86 रनों से भारतीय पारी को आगे बढ़ाया। पुजारा ने अपना अर्धशतक पूरा किया तो मयंक ने एक छोर संभाले रखते हुए अपने टेस्ट करियर का तीसरा शतक और दूसरा दोहरा शतक जमाया। उन्हें इसमें उप-कप्तान अंजिक्य रहाणे का साथ मिला।

    पुजारा को 105 के कुल स्कोर पर अबु जायेद ने अपना शिकार बनाया। उन्होंने 72 गेंदों पर नौ चौकों की मदद से 54 रन बनाए। जायेद ने कप्तान विराट कोहली को खाता खोले बिना पवेलियन भेज दिया। कोहली के जाने के बाद भारत का स्कोर 119 रनों पर तीन विकेट हो गया था।

    मेजबान टीम को यहां एक लंबी साझेदारी की जरूरत थी जो उसे मयंक और रहाणे ने दी। दोनों ने पहले सत्र में भारत को दिन का तीसरा झटका नहीं लगने दिया और दूसरे सत्र में भी बांग्लादेशी टीम इन दोनों को आउट नहीं कर पाई। दूसरे सत्र में मयंक ने अपना शतक पूरा किया और रहाणे ने अर्धशतक।

    तीसरे सत्र में रहाणे शतक पूरा करने की तरफ बढ़ रहे थे। जायेद ने इस बार फिर अपनी टीम को बड़ी सफलात दिलाई और रहाणे को 309 के कुल स्कोर पर पवेलियन भेजा उनकी शतकीय मंशा को शांत किया। रहाणे और मयंक ने चौथे विकेट के लिए 190 रनों की साझेदारी की।

    मयंक के साथ अब जडेजा थे। इन दोनों ने मिलकर पांचवें विकेट के लिए 123 रन जोड़े। इस बीच मयंक ने अपना दूसरा दोहरा शतक पूरा किया और महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमेन से आगे निकल गए। मंयक ने छक्के के साथ दोहरा शतक पूरा किया।

    मयंक ने 12वीं पारी तक जाते-जाते दो दोहरे शतक लगा लिए हैं जबकि ब्रैडमैन ने दो दोहरो शतकों के लिए 13 पारियों का इंतजार किया था। इस फेहरिस्त में भारत के विनोद काम्बली सबसे आगे हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआती पांच पारियों में ही दो दोहरे शतक लगा लिए थे।

    200 का आंकड़ा छून के बाद मयंक आक्रामक हो गए और तेजी से रन बनाने लगे। इसी कोशिश में वह मेहेदी हसन मिराज की गेंद पर जायेद के हाथों लपके गए। मयंक ने अपनी पारी में 330 गेंदों का सामना किया और 28 चौकों के अलावा छह छक्के लगाए।

    मयंक का विकेट 432 के कुल स्कोर पर गिरा और 454 के स्कोर पर रिद्धिमान साहा को 12 के निजी स्कोर पर इबादत हुसैन ने पवेलियन पहुंचा दिया।

    लेकिन मैच का रोमांच यहां से शुरू हुआ क्योंकि यहां से उमेश और जडेजा ने तेजी से रन बनाए। आखिरी के 10 ओवरों में भारत ने 97 रन बनाए हैं जिसमें से 39 रन इस जोड़ी ने 19 गेंदों पर बनाए। उमेश ने 10 गेंदों का सामना किया है और तीन छक्के तथा एक चौका मारा। जडेजा ने अभी तक अपनी पारी में 76 गेंदें खेलीं हैं जिनमें से सात पर चौके और दो पर छक्के उड़ा चुके हैं।

    बांग्लादेश की ओर से जायेद ने चार विकेट लिए हैं जबकि इबादत हुसैन और मेहेदी हसन मिराज को एक-एक सफलता मिली है।

  • INDIA VS BANGLADESH LIVE 1ST TEST DAY 3 : बांग्लादेश पर भारत ने कसा शिकंजा , 37 रन पर गिरे 3 विकेट

    INDIA VS BANGLADESH LIVE 1ST TEST DAY 3 : बांग्लादेश पर भारत ने कसा शिकंजा , 37 रन पर गिरे 3 विकेट

    इंदौर। भारत और बांग्लादेश के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जा रहा है। आज तीसरा दिन है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम 150 रन पर ढेर हो गई थी। भारत ने इसके जवाब में अपनी पहली पारी में 6 विकेट पर 493 रन बनाकर पारी को घोषित कर दिया था। इस प्रकार भारत को पहली पारी में 343 रनों की बढ़त मिल गई थी। दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश ने 3 विकेट गंवा कर 43 रन बनाए हैं। मोहम्मद इमरुल काएस (6) को उमेश यादव और शादमान इस्लाम (6) को ईशांत शर्मा ने बोल्ड कर पवेलियन लौटा दिया है।

    LIVE …

    -मिथुन (14 रन) और मुश्फिकुर रहीम (0 रन) क्रीज पर मौजूद हैं।

    इससे पहले दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने मयंक अग्रवाल (243) और अजिंक्य रहाणे (86) की बेहतरीन पारियों की मदद से बांग्लादेश पर 343 रनों की मजबूत बढ़त ले ली। भारत ने मैच के पहले दिन बांग्लादेश को 150 रनों पर समेट दिया था। जवाब में भारत ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक छह विकेट खोकर 493 रन बना लिए हैं। रवींद्र जडेजा 60 और उमेश यादव 25 रन बनाकर खेल रहे हैं।

    भारत ने पहले दिन रोहित शर्मा (6) का विकेट खो दिया था, लेकिन मयंक और चेतेश्वर पुजारा ने दूसरा झटका नहीं लगने दिया था। दूसरे दिन इस जोड़ी ने एक विकेट के नुकसान पर 86 रनों से भारतीय पारी को आगे बढ़ाया। पुजारा ने अपना अर्धशतक पूरा किया तो मयंक ने एक छोर संभाले रखते हुए अपने टेस्ट करियर का तीसरा शतक और दूसरा दोहरा शतक जमाया। उन्हें इसमें उप-कप्तान अंजिक्य रहाणे का साथ मिला।

    पुजारा को 105 के कुल स्कोर पर अबु जायेद ने अपना शिकार बनाया। उन्होंने 72 गेंदों पर नौ चौकों की मदद से 54 रन बनाए। जायेद ने कप्तान विराट कोहली को खाता खोले बिना पवेलियन भेज दिया। कोहली के जाने के बाद भारत का स्कोर 119 रनों पर तीन विकेट हो गया था।

    मेजबान टीम को यहां एक लंबी साझेदारी की जरूरत थी जो उसे मयंक और रहाणे ने दी। दोनों ने पहले सत्र में भारत को दिन का तीसरा झटका नहीं लगने दिया और दूसरे सत्र में भी बांग्लादेशी टीम इन दोनों को आउट नहीं कर पाई। दूसरे सत्र में मयंक ने अपना शतक पूरा किया और रहाणे ने अर्धशतक।

    तीसरे सत्र में रहाणे शतक पूरा करने की तरफ बढ़ रहे थे। जायेद ने इस बार फिर अपनी टीम को बड़ी सफलात दिलाई और रहाणे को 309 के कुल स्कोर पर पवेलियन भेजा उनकी शतकीय मंशा को शांत किया। रहाणे और मयंक ने चौथे विकेट के लिए 190 रनों की साझेदारी की।

    मयंक के साथ अब जडेजा थे। इन दोनों ने मिलकर पांचवें विकेट के लिए 123 रन जोड़े। इस बीच मयंक ने अपना दूसरा दोहरा शतक पूरा किया और महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमेन से आगे निकल गए। मंयक ने छक्के के साथ दोहरा शतक पूरा किया।

    मयंक ने 12वीं पारी तक जाते-जाते दो दोहरे शतक लगा लिए हैं जबकि ब्रैडमैन ने दो दोहरो शतकों के लिए 13 पारियों का इंतजार किया था। इस फेहरिस्त में भारत के विनोद काम्बली सबसे आगे हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआती पांच पारियों में ही दो दोहरे शतक लगा लिए थे।

    200 का आंकड़ा छून के बाद मयंक आक्रामक हो गए और तेजी से रन बनाने लगे। इसी कोशिश में वह मेहेदी हसन मिराज की गेंद पर जायेद के हाथों लपके गए। मयंक ने अपनी पारी में 330 गेंदों का सामना किया और 28 चौकों के अलावा छह छक्के लगाए।

    मयंक का विकेट 432 के कुल स्कोर पर गिरा और 454 के स्कोर पर रिद्धिमान साहा को 12 के निजी स्कोर पर इबादत हुसैन ने पवेलियन पहुंचा दिया।

    लेकिन मैच का रोमांच यहां से शुरू हुआ क्योंकि यहां से उमेश और जडेजा ने तेजी से रन बनाए। आखिरी के 10 ओवरों में भारत ने 97 रन बनाए हैं जिसमें से 39 रन इस जोड़ी ने 19 गेंदों पर बनाए। उमेश ने 10 गेंदों का सामना किया है और तीन छक्के तथा एक चौका मारा। जडेजा ने अभी तक अपनी पारी में 76 गेंदें खेलीं हैं जिनमें से सात पर चौके और दो पर छक्के उड़ा चुके हैं।

    बांग्लादेश की ओर से जायेद ने चार विकेट लिए हैं जबकि इबादत हुसैन और मेहेदी हसन मिराज को एक-एक सफलता मिली है।

  • मुश्ताक की नजर में सुधर सकते हैं रिश्ते भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट सीरीज से

    मुश्ताक की नजर में सुधर सकते हैं रिश्ते भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट सीरीज से

    अबू धाबी। पूर्व पाकिस्तानी लेग स्पिनर मुश्ताक अहमद का मानना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार करने के लिए दोनों देशों के बीच फिर से क्रिकेट बहाल होना चाहिए। भारत-पाकिस्तान ने 2013 के बाद से कोई भी द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली है।

    हालांकि दोनों टीमें आईसीसी टूर्नामेंटों में एक-दूसरे के खिलाफ खेलती आ रही है। मुश्ताक ने यहां एक लीग से इतर आईएएनएस से कहा कि मेरा मानना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच फिर से क्रिकेट संबंध शुरू होनी चाहिए। मुझे लगता है कि क्रिकेट के जरिए दोनों देश अपने संबंधों को सुधार सकते हैं। क्रिकेट फैंस के चेहरे पर प्यार, आनंद और खुशी लाता है।

    उन्होंने कहा, इसलिए यह जरूरी है कि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ क्रिकेट खेले क्योंकि फैन्स उन्हें फिर से खेलते देखना चाहते हैं। जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला होता है तो फिर काफी प्रतिस्पर्धात्मक हो जाता है। मुझे लगता है कि एशेज से भी बड़ी है भारत-पाकिस्तान की सीरीज।

    हाल में भारत-पाकिस्तान के बीच शुरू किए गए करतारपुर कॉरिडोर को, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की सुधार में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। 49 वर्षीय पूर्व लेग स्पिनर ने कहा, जब हम क्रिकेट खेलेंगे तो चीजें आसान हो जाएंगी। यह नेताओं को बातचीत करने और चीजों को सही रास्ते पर लाने का मौका देगा।

    इसलिए मेरा मानना है कि दोनों सरकारों के बीच बातचीत होनी जरूरी है। उन्होंने कहा, दोनों देशों को बैठकर मौजूदा हालातों और अपनी समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। करतारपुर कॉरिडोर का खुलना दोनों देशों के बीच एक अच्छी शुरुआत है। जब बातचीत होगी तो तभी चीजें हल हो सकती है और खेल, खासकर क्रिकेट इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है।

  • सबसे पहले पहुंचेंगे कोलकाता कोहली और रहाणे डे-नाइट टेस्ट के लिए

    सबसे पहले पहुंचेंगे कोलकाता कोहली और रहाणे डे-नाइट टेस्ट के लिए

    कोलकाता। भारतीय कप्तान विराट कोहली और उपकप्तान अजिंक्य रहाणे शुक्रवार से बांग्लादेश के साथ होने वाले पहले दिन-रात टेस्ट मैच के लिए सबसे पहले कोलकाता पहुंचेंगे।

    बांग्लादेश और भारत की टीमें 22 नवंबर से कोलकाता के ईडन गार्डेन स्टेडियम में पहली बार दिन-रात प्रारूप का टेस्ट मैच खेलेंगी, जिसमें गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जाएगा। सोमवार को प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक, कोहली और रहाणे मंगलवार सुबह करीब नौ बजकर 40 मिनट पर पहुंचेंगे जबकि बाकी टीम बाद में आएगी।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अभी यह तय नहीं है कि कप्तान कोहली ईडन गार्डन्स जाकर पिच का मुआयना करेंगे या नहीं। कोहली और रहाणे के अलावा रोहित शर्मा बुधवार तड़के करीब दो बजे जबकि मोहम्मद शमी और उमेश यादव इसी दिन सुबह नौ बजकर 35 मिनट पर कोलकाता पहुंचेंगे।

    तीसरे गेंदबाज ईशांत शर्मा मंगलवार रात 10 बजकर 45 मिनट पर और बाकी टीम बांग्लादेश टीम के साथ मंगलवार दोपहर 12.30 बजे पहुंचेगी। भारतीय टीम इंदौर में पहला टेस्ट मैच पारी और 130 रन से जीतकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाए हुए है।

  • ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्ट : टीम इंडिया को बांग्लादेश ने दिया दूसरा झटका

    ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्ट : टीम इंडिया को बांग्लादेश ने दिया दूसरा झटका

    कोलकाता। बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने भारत के साथ शुक्रवार से यहां ईडन गार्डन्स स्टेडियम में शुरू हुए पहले ऐतिहासिक दिन-रात टेस्ट मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। बांग्लादेश की पहली पारी 30.3 ओवर में 106 रन पर सिमट गई। ईशांत शर्मा ने पांच, उमेश यादव ने तीन और मोहम्मद शमी ने दो विकेट लिए। जवाब में चायकाल के बाद अंतिम समाचार मिलने तक भारत के पहली पारी में 14 ओवर में 56/2 रन हो गए थे। मयंक अग्रवाल (14) व रोहित शर्मा (21) आउट हो गए।

    बांग्लादेश की ओर से शादमान इस्लाम ने सबसे अधिक 29 रन बनाए जबकि लिटन दास (रिटायर्ड हर्ट) ने 24 रन जोड़े। मेहमान टीम के तीन बल्लेबाज ही दहाई तक पहुंच सके। दास के स्थान पर मेहेदी हसन को कॉनसेशन प्लेयर के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। उन्होने आठ रन बनाए।

    दो मैचों की सीरीज में भारत 1-0 से आगे है। उसने इंदौर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में पारी के अंतर से जीत हासिल की थी। यह दोनों टीमों का पहला दिन-रात का टेस्ट है। इससे पहले टॉस जीतकर बांग्लादेश के कप्तान ने कहा कि हम पहले बल्लेबाजी करेंगे, विकेट सूखा और कठोर है, इसलिए हम पहले बल्लेबाजी करना चाहते हैं। यह एक बहादुर निर्णय है जिसे हम महसूस करते हैं। यह सभी के लिए बहुत अच्छा अवसर है। हमारे लिए दो बदलाव। अल अमीन, मेहदी हसन के लिए तईजुल और नईम हसनैन की जगह आता है।

    इस मैच के लिए खास तैयारियां की गई हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना इस मैच के लिए भारत आ चुकी हैं। साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मैच का लुत्फ लेंगी।

  • कप्तान कोहली ने विंडीज की 70 के दशक की टीम के साथ तुलना पर दिया यह जवाब

    कप्तान कोहली ने विंडीज की 70 के दशक की टीम के साथ तुलना पर दिया यह जवाब

    कोलकाता। अपनी कप्तानी में भारत को लगातार चौथी बार पारी के अंतर से टेस्ट मैच में जीत दिलाने वाले विराट कोहली ने रविवार को कहा कि वेस्टइंडीज के 1970 के समय की टीम के साथ मौजूदा भारतीय टीम की तुलना करना जल्दबाजी होगी। भारत ने यहां ईडन गार्डन्स स्टेडियम में खेले गए अपने पहले दिन-रात के टेस्ट मैच में रविवार को बांग्लादेश को एक पारी और 46 रनों से हरा दिया। यह भारत की पारी के अंतर से लगातार चौथी जीत है और वह ऐसा करने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है।

    कप्तान के रूप में विराट कोहली की यह 33वीं जीत है। इसके साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। उसने इंदौर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भी बांग्लादेश को एक पारी और 130 रनों से हराया था। घर में भारत की यह लगातार 12वीं सीरीज जीत है और उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वेस्टइंडीज की टीम भी 1970 से 1980 तक अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थी और अब भारत भी उसी फॉर्म में है।

    कोहली ने मैच के बाद कहा कि यह सवाल उनसे सात साल बाद पूछा जाना चाहिए ना कि सात मैचों के बाद। कोहली ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि इस समय हम अपने खेल में टॉप पर हैं। आप केवल सात मैचों के बाद ही टीम के दबदबे का आंकलन नहीं कर सकते। आप वेस्टइंडीज की टीम की बात कर रहे हैं, जिन्होंने 15 वर्षों तक अपना दबदबा कायम रखा।

    उन्होंने हंसते हुए कहा, आप मुझसे यह सवाल संन्यास के समय पूछ सकते हैं। हां, आप सात साल बाद यह सवाल यह पूछ सकते हैं, ना कि सात मैचों के बाद। कोहली ने कहा कि अब सोच बदल गई है और वे अब किसी विश्व में किसी भी टीम को हरा सकते हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अभी समय (तुलना के लिए) बाकी है। लेकिन जिस तरह से हम खेल रहे हैं, उससे काफी उत्साहित हैं। अब हम न्यूजीलैंड में खेलेंगे और हमारे दिमाग में अब अगली सीरीज जीत है।

    देखते हैं कि विदेश में क्या होता है। कप्तान ने कहा, हम टेस्ट क्रिकेट खेलने का इंतजार करते हैं। यही सोच बदली है। हमें पता है कि अगर हम अच्छा खेलते हैं तो हम दुनिया में कहीं भी जीत सकते हैं। आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप शुरू होने के बाद से भारत की सात मैचों में यह लगातार सातवीं जीत है। अंकतालिका में भारत के अब 360 अंक हो गए हैं और वह मजबूती से टॉप पर कायम है। कोहली ने कहा कि अगर टीम एक सीरीज घर में और एक बाहर खेलती है तो इससे इस प्रारूप में संतुलन बना रहेगा।

    उन्होंने कहा, अगर हम एक सीरीज घर में और एक बाहर खेलते हैं तो इससे यह प्रारूप अधिक संतुलित होगा। जैसा कि मैंने कहा कि हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं। लेकिन हमने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप में केवल दो टेस्ट मैच ही घर से बाहर खेले हैं। उन्होंने कहा, अगर हम दो सीरीज घर में और और दो बाहर खेलें और इसमें 300 अंक हासिल करते हैं तो फिर आप कह सकते हैं हम वास्तव में अच्छा खेल रहे हैं।