Category: sports

  • मिताली ने कहा, भारतीय खिलाड़ी के रूप में ट्रेन में अनारक्षित सीट पर यात्रा की

    मुंबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने शीर्ष तक की अपनी यात्रा को याद किया और खुलासा किया कि भारतीय खिलाड़ी के रूप में उन्होंने ट्रेन में अनारक्षित सीट पर भी यात्रा की। मिताली ने यहां ‘वी द वुमेन’ पहल के एक सत्र के दौरान कहा, ‘‘मेरी यात्रा के दौरान मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा। अब हम बीसीसीआई के अंतर्गत हैं लेकिन उस समय (जब महिला खिलाड़ी बीसीसीआई के अंतर्गत नहीं थी) हमें खिलाड़ी के रूप में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलती थी।

    भारतीय क्रिकेटर के रूप में मैंने हैदराबाद से दिल्ली की यात्रा रेल से अनारक्षित सीट पर की। पुरुषों के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ।’’ जोधपुर में जन्मीं मिताली ने कहा, ‘‘यही राहुल द्रविड़ ने कहा। भारतीय खिलाड़ी के रूप में उन्होंने कभी रेल से यात्रा नहीं की। लेकिन मैंने की। लेकिन इन मुश्किलों ने हमें मजबूत बनाया।

    महिला के रूप में हमें शुरुआती चरण में इतनी अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, इसके बाद जब हम परिपक्व हुए और चुनौतियों को स्वीकार किया, इसलिए हम मानसिक रूप से मजबूत हुए।’’ मिताली ने याद किया कि किस तरह उनके दादा-दादी उनके खेल से जुड़ने में सहज नहीं थे।

  • इरोज इंटरनेशनल को डिजिटल क्षेत्र से तीन साल में 75% आय की उम्मीद

    नयी दिल्ली। मनोरंजन क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी इरोज इंटरनेशनल को अपनी कुल आय का 75% अगले तीन साल में डिजिटल क्षेत्र से मिलने की उम्मीद है। अभी डिजिटल माध्यम से कंपनी की आय की हिस्सेदारी 25% है।

    कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्योति देशपांडे का मानना है कि देश में इंटरनेट डाटा की कीमतें वहनीय हुई हैं। इसलिए और ज्यादा लोगों के ऑनलाइन मनोरंजन सामग्री का उपयोग किए जाने की उम्मीद है जिससे कंपनी को डिजिटल माध्यम से अपनी आय में वृद्धि होने की संभावना नजर आती है।,

    ज्योति ने कहा कि इरोज इंटरनेशनल मीडिया अपने आप को एक ‘पूर्ण स्टूडियो कंपनी से एक डिजिटल कंपनी’ में बदलने की राह पर है, क्योंकि कंपनी ओवर द टॉप (ओटीटी) मीडिया में एक बेहतर अवसर को देख रही है। ओटीटी, मीडिया से जुड़ी सामग्री के वितरण का एक प्रकार हैं। इसमें ऑनलाइन माध्यम से सामग्री सीधे ग्राहक तक पहुंचाई जाती है और बीच की कई प्रक्रियाओं से गुजरने की जरुरत नहीं पड़ती।

    आम लोग इसे डिजिटल मीडिया के तौर पर देखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि इस साल हमारी 26-27 करोड़ डॉलर की कुल आय में से चार करोड़ डॉलर डिजिटल कारोबार से होगी। यह कुल आय का करीब 25% है। अगले तीन साल में यह बढ़कर 75% हो सकेगा।

  • हिन्दी से ‘‘खिलवाड़’’ को लेकर सुशील दोशी ने खोला पूर्व क्रिकेटरों के खिलाफ मोर्चा

    इंदौर। पद्मश्री से सम्मानित मशहूर खेल कमेन्टेटर सुशील दोशी टीवी चैनलों पर ज्यादातर पूर्व क्रिकेटरों की हिन्दी कमेंट्री के गिरते स्तर के कारण बेहद खफा हैं। उनका कहना है कि क्रिकेट को देश के घर-घर तक पहुंचाने वाली जुबान से इन कमेंटेटरों का ‘‘खिलवाड़’’ रोकने के लिये बीसीसीआई को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही चाहिये। अगले साल खेल कमेंट्री की दुनिया में 50 साल पूरे करने जा रहे दोशी ने कहा, ‘‘ज्यादातर पूर्व क्रिकेटर व्याकरण के हिसाब से निहायत गलत और अशुद्ध हिन्दी बोलकर कमेंट्री कर रहे हैं। नतीजतन खासकर टीवी चैनलों पर हिन्दी को उचित मान-सम्मान नहीं मिल रहा है।’’

    दोशी ने जावरा कम्पाउंड इलाके में अपने घर में कहा, ‘‘हिन्दी वह जुबान है जिसने भारत में क्रिकेट को मशहूर करने में अहम भूमिका निभायी है। बड़े दर्शक और श्रोता वर्ग के कारण हिन्दी का महत्व दिनों-दिन बढ़ ही रहा है लेकिन मुझे अफसोस है कि देश में पूर्व क्रिकेटरों की गलत हिन्दी कमेंट्री खामोशी से सहन की जा रही है। कमेंट्री के नाम पर इस भाषा से पूर्व क्रिकेटरों का खिलवाड़ बंद होना चाहिये।’’

    दोशी ने कहा, ‘‘अच्छे कमेंटेटरों से मुझे कोई शिकायत नहीं है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर अच्छी हिन्दी कमेंट्री कर लेते हैं। पूर्व बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू भी हिन्दी कमेंटेटर के रूप में खासे लोकप्रिय हैं।’’ भाषाई शुद्धता की कसौटी पर हिन्दी और अंग्रेजी कमेंट्री की तुलना करते हुए वह सवाल करते हैं, ‘‘क्या टीवी चैनलों पर कमेंट्री के दौरान गलत अंग्रेजी बोली जा सकती है। मुझे याद है कि दक्षिण अफ्रीका में कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने जब एक बार कमेंट्री के वक्त व्याकरण की दृष्टि से गलत अंग्रेजी बोली थी, तो वहां के अखबारों में उनकी कड़ी आलोचना की गयी थी।’’

    दोशी ने जोर देकर कहा कि कमेंट्री की दुनिया में हिन्दी की अस्मिता की रक्षा की जिम्मेदारी से बीसीसीआई पल्ला नहीं झाड़ सकता। इस 70 वर्षीय कमेंटेटर ने कहा, ‘‘बीसीसीआई टीवी चैनलों को​ ​क्रिकेट मैचों के प्रसारण के अधिकार बेचता है। लेकिन इस देश में हिन्दी भाषा की अस्मिता को हर्गिज नहीं बेचा जा सकता। बीसीसीआई को मैचों के प्रसारण अधिकार बेचने के अनुबंध में विशेष प्रावधान करने चाहिये, ताकि संबंधित टीवी चैनलों पर शुद्ध हि​न्दी कमेंट्री सुनिश्चित हो सके।’’

    दोशी ने यह भी कहा कि बीसीसीआई को अच्छे हिन्दी कमेंटेंटरों का चुनाव कर एक पैनल तैयार करनी चाहिये। इसके साथ ही, पूर्व ​क्रिकेटरों को हिन्दी कमेंट्री का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये। वह इस बात से कतई सहमत नहीं हैं कि अच्छी क्रिकेट कमेंट्री के लिये एक पेशेवर खिलाड़ी के रूप में खेल की बारीकियां जाननी अनिवार्य है। हिन्दी के सबसे ज्यादा अनुभवी खेल कमेंटेटरों में शामिल दोशी ने कहा, ‘‘क्रिकेट कोई रॉकेट साइंस नहीं है। कोई गैर खिलाड़ी कमेंटेटर भी अध्ययन और मनन के जरिये इस खेल की बारीकियां समझकर अच्छी कमेंट्री कर सकता है। इस सिलसिले में हमारे पास उदाहरणों की कोई कमी नहीं है।’’

    हिन्दी कमेंट्री करने वाले कुछ पूर्व क्रिकेटरों का नाम लिये बगैर वह कटाक्ष करते हैं, ‘‘हिंदी कमेंट्री की दुनिया में कुछ ऐसे पूर्व क्रिकेटर भी सक्रिय हैं, जिन्होंने अपने करियर में इक्का-दुक्का टेस्ट मैच खेले हैं और इनमें उन्हें नाकाम होते देखा गया है। लेकिन आज वे कमेंटेटर के रूप में देश के स्टार क्रिकेटरों के खेल की कुछ इस तरह कमियां निकालते हैं, मानो मौजूदा खिलाड़ियों को खेलना ही नहीं आता।’’ ​ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने तो अपनी पारी खेल ली। मैं बस इतना चाहता हूं कि नयी पीढ़ी को शुद्ध हिन्दी कमेंट्री सुनने को मिले और इस भाषा की गरिमा बरकरार रह सके।’’

    दोशी ने वर्ष 1968 में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच इंदौर के नेहरू स्टेडियम में खेले गये रणजी मैच के लिये पहली बार हिन्दी में कमेंट्री की थी। गुजरे 49 वर्षों में वह अलग-अलग रेडियो और टेलीविजन चैनलों के लिये 400 से ज्यादा एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों और टी-20 मैचों की कमेंट्री कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने 85 से ज्यादा टेस्ट मैचों के लिये भी कमेंट्री की है।

    दोशी संभवत: ऐसे अकेले हिन्दी कमेंटेटर हैं, जिन्होंने क्रिकेट के एक दिवसीय और टी-20 प्रारूपों के कुल 10 विश्व कप का आंखों देखा हाल श्रोताओं और दर्शकों को सुनाया है। खेल कमेंट्री की दुनिया में उल्लेखनीय योगदान के लिये उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान “पद्मश्री” से वर्ष 2016 में नवाजा गया था।

  • भारतीय क्रिकेटरों की सैलरी, हो सकती है दोगुनी

    नई दिल्ली  । भारतीय क्रिकेटरों को बड़ा तोहफा मिल सकता है और टीम इंडिया के टॉप क्रिकेटरों के अलावा घरेलू क्रिकेट में खेल रहे खिलाडिय़ों की सैलरी में काफी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त कमिटी ऑफ एडमिनेस्ट्रेटर्स (सीओए) नए फॉर्म्युले पर काम कर रही है जिसके बाद क्रिकेटरों को सैलरी में बड़ा फायदा हो सकता है। सीओए 180 करोड़ के मौजूदा कॉर्पस में 200 करोड़ रुपये और जोडऩे पर विचार कर रही है।
    सीओए से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कमिटी इस बात पर काम कर रही है कि सीनियर और जूनियर टीमों को सही से उनका हिस्सा दिया जा सके। उम्मीद है कि अगले सत्र से क्रिकेटरों को फायदा मिल सकता है। कमिटी अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई की जनरल बॉडी को सौंपेगी।
    भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और हेड कोच रवि शास्त्री ने भी सैलरी बढ़ाने की वकालत की थी। मौजूदा फॉर्म्युले के तहत, बीसीसीआई को सालाना रेवेन्यू का 26 प्रतिशत हिस्सा 3 हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें से 13 प्रतिशत रेवेन्यू अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों को, 10.6 प्रतिशत डमेस्टिक क्रिकेटरों को और बाकी हिस्सा महिला और जूनियर खिलाडिय़ों को दिया जाता है। क्रिकेटरों की अलग-अलग कैटिगरी में हिस्सा अब बदला जा सकता है।
    नए फॉर्म्युले के लागू होने का मतलब है कि विराट कोहली जैसे टॉप प्लेयर को अब बीसीसीआई से साल भर में 10 करोड़ रुपये से भी ज्यादा मिल सकते हैं। विराट ने साल 2017 में 46 मैचों के लिए 5.51 करोड़ रुपये कमाए थे। इसके अलावा कोहली आईपीएल और विज्ञापन से इससे भी ज्यादा पैसे कमा सकते हैं। इसी तरह एक रणजी क्रिकेटर, जो सालाना 12 से 15 लाख रुपये कमाते हैं, को नए फॉर्म्युले के बाद 30 लाख रुपये तक सैलरी पा सकते हैं।
    सीओए से जुड़े एक सूत्र ने कहा, सीनियर क्रिकेटरों की सैलरी 100 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और डमेस्टिक क्रिकेटरों की भी इसी अनुपात में सैलरी बढ़ जाएगी। सूत्रों ने बताया कि पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली ने सोमवार को हुई बीसीसीआई एसजीएम में डमेस्टिक क्रिकेटरों की सैलरी बढ़ाने का मुद्दा उठाया था। गांगुली ने साथ ही बताया कि डमेस्टिक क्रिकेटरों की सैलरी बढ़ाना कितना जरूरी है। फिलहाल घरेलू क्रिकेटर को एक मैच के लिए उसके राज्य क्रिकेट संघ से 10 हजार रुपये मिलते हैं जो दोगुना हो सकता है।
    बीसीसीआई के ऐक्टिंग प्रेजिडेंट सी.के. खन्ना ने कहा है कि इस बारे में कुछ भी फाइनल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पे-बढ़ाने के मामले पर अभी और बैठक होंगी। बीसीसीआई के कार्यवाहक कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ड्राफ्ट पर काम कर रहे हैं। इस बारे में बीसीसीआई की फाइनैंस कमिटी और एसजीएम में चर्चा की जाएगी।

  • मेंटली स्ट्रॉन्ग होने के लिए न्यूरोट्रैकर का सहारा ले रही भारतीय महिला हॉकी टीम

    नई दिल्ली ,15 दिसंबर (आरएनएस)। अगले साल होने वाले कई महत्वपूर्ण टूर्नमेंटों के मद्देनजर मानसिक दृढ़ता (मेंटल स्ट्रॉन्ग) बढ़ाने के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम न्यूरोट्रैकर कार्यक्रम का इस्तेमाल कर रही है। कोच हरेंद्र सिंह इस तकनीक के साथ ही आत्मविश्वास के जरिए खिलाडिय़ों को मजबूत बनाने में जुटे हैं। अमेरिका और कनाडा में काफी लोकप्रिय न्यूरोट्रैकर कार्यक्रम का इस्तेमाल ओलिंपिक पदक विजेता, एनएफएल, एनबीए और ईपीएल खिलाड़ी मानसिक तैयारी के लिए करते आए हैं।
    भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने अक्टूबर में प्रायोगिक आधार पर इसे शिविर में दिया और मौजूदा शिविर में भारतीय टीम नियमित तौर पर इसके 15 से 20 मिनट के सत्र ले रही हैं। हरेंद्र ने कहा, हमने अक्टूबर में प्रायोगिक आधार पर न्यूरोट्रैकर का इस्तेमाल किया था, लेकिन अब रोज इसके सत्र हो रहे हैं। खिलाडिय़ों की एकाग्रता बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग होता है। मैच के वास्तविक नतीजों से इसके महत्व का पता चलेगा, लेकिन तैयारी के दौरान मुझे खिलाड़ी अधिक फोकस नजर आ रहे हैं।
    कप्तान रानी ने कहा, अगले साल हमें राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई चैंपियंस ट्रोफी, एशियाई खेल और वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नमेंट खेलने हैं और बड़ी टीमों के खिलाफ मानसिक तैयारी भी शीर्ष स्तर की होनी चाहिए। 4-5 खिलाड़ी रोज 15 से 20 मिनट के न्यूरोट्रैकर सत्र में जाते हैं। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इसके तहत खिलाडिय़ों को थ्री डी स्क्रीन के सामने थ्री डी चश्मे पहनकर बैठना होता है। स्क्रीन पर 8 गेंद घूम रही होती है, जिनमें चार नारंगी और चार हरे रंग की होती हैं। खिलाडिय़ों को नारंगी रंग की गेंद पर फोकस करने को कहा जाता है और उनसे पूछा जाता है कि ये गेंद कहां जाती हैं। इससे उन्हें फोकस करने में मदद मिलती है।
    भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और 4 साल बाद मेलबर्न मे रजत पदक अपने नाम किया। इसके बाद हालांकि उसकी झोली खाली रही, लेकिन कोच और कप्तान को यकीन है कि अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में भारत के हिस्से में फिर पदक आएगा। रानी ने कहा, हम राष्ट्रमंडल स्वर्ण को ध्यान में रखकर ही तैयारी कर रहे हैं। इससे आने वाले टूर्नमेंटों के लिए टीम का मनोबल बढ़ेगा। हमने इस साल जापान में चीन और जापान जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों को हराकर एशिया कप जीतकर अपनी क्षमता साबित की है और हम उस लय को आगे भी कायम रखना चाहेंगे।
    कोच हरेंद्र ने भी कहा कि एशिया कप में मिली जीत ने टीम के लिए टॉनिक का काम किया है और खिलाडिय़ों में किसी भी टीम को हराने का आत्मविश्वास आ गया है। उन्होंने कहा, हमारा पहला लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेलों में पोडियम फिनिश है। इसके बाद एशियाई खेल जीतकर ओलिंपिक में सीधे जगह बनाना चाहेंगे और मुझे यकीन है कि मेरी टीम मानसिक रूप से इतनी मजबूत है कि किसी भी टीम को हरा सके।

  • विजेंदर सिंह को अफ्रीकी मुक्केबाज ने दी चुनौती, कहा- तोड़ के रख दूंगा उन्हें

    नई दिल्ली । अफ्रीकी चैंपियन अर्नेस्ट अमुजु ने कहा है कि जब वह 23 दिसंबर को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में विजेंदर सिंह से भिड़ेंगे तो भारत के इस स्टार मुक्केबाज को करारी शिकस्त देंगे. विजेंदर ने अभी तक नौ मुकाबले लड़े हैं और उन सभी में उन्हें जीत मिली है. उनके पास अभी डब्ल्यूबीओ एशिया पैसेफिक और ओरिएंटल सुपर मिडिलवेट खिताब हैं. अमुजु ने अब तक 25 मुकाबले लड़े हैं, जिनमें से 23 में उन्होंने जीत दर्ज कर की है. इनमें से 21 नाकआउट हैं. वह अब तक 122 राउंड तक मुकाबले कर चुके हैं और विजेंदर से भिडऩे के लिये कड़ी मेहनत कर रहे हैं.
    उन्होंने कहा, ‘मैं इस मुकाबले के लिये हर दिन आठ से दस घंटे तक कड़ी मेहनत कर रहा हूं. मुझे मुकाबले की तैयारी के लिये पर्याप्त समय मिला है. मैं विजेंदर और रिंग पर वह जो भी करेगा उसके लिये पूरी तरह से तैयार रहूंगा.Ó अमुजु ने कहा, ‘मैंने अभी उसका नाम सुना है और मैंने कभी उसे मुकाबला करते हुए नहीं देखा है. मुझे विजेंदर सिंह को पहली बार हार का मजा चखाते हुए बहुत आनंद आएगा. मैं उसे उसके दर्शकों के सामने तोड़ के रख दूंगा.Ó
    उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताता हूं कि मैं उसके खिलाफ क्या करूंगा. मैं उसके शरीर पर प्रहार करूंगा, ताकि वह ढीला पड़ जाए और फिर दायें हाथ से करारा मुक्का जड़कर उसे नाकआउट कर दूंगा.Ó अमुजु ने कहा कि पेशेवर सर्किट पर उनका अनुभव विजेंदर के खिलाफ काफी काम आएगा.
    उन्होंने कहा, ”मैं विजेंदर की तुलना में पेशेवर सर्किट पर अनुभवी फाइटर हूं. उसने अभी तक मेरे जैसे किसी अनुभवी और दमदार मुक्केबाज का सामना नहीं किया है और उसे जयपुर में पता चलेगा कि असली पेशेवर मुक्केबाज से भिडऩा क्या होता है.

  • गौतम गंभीर ने हासिल किया ये ख़ास मुकाम

    टीम इंडिया में वापसी की कवायद में जुटे ओपनर गौतम गंभीर ने रणजी ट्रॉफी में 6000 रन पूरे कर लिए हैं. वह दिल्ली के ​लिए 6000 या फिर उससे ज़्यादा रन बनाने वाले सिर्फ चौथे बल्लेबाज़ हैं. गंभीर ने यह उपलब्धि सोमवार को बंगाल के खिलाफ खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल मैच में अपनी शतकीय पारी के दौरान हासिल की.

    दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड मिथुन मन्हास के नाम है जिन्होंने 7911 रन बनाए हैं. जबकि अजय शर्मा 7421 रन के साथ दूसरे सबसे कामयाब बल्लेबाज़ हैं तो रमन लांबा के नाम 6346 रन दर्ज हैं.

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    रणजी ट्रॉफी में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड मुंबई के वसीम जाफर के नाम है जिन्होंने 10552 रन बनाये हैं.

    बहरहाल, महाराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम में बंगाल और दिल्ली के बीच खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में कुनाल चंदेला (113) और गौतम गंभीर (127) की शतकीय पारियों के दम पर दिल्ली ने शानदार पलटवार किया है. गंभीर और चंदेला ने 232 रनों की शानदार दोहरी शतकीय साझेदारी निभाई. जबकि दिल्ली ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने पर तीन विकेट खोकर 271 रन बना लिए और वह अब बंगाल के पहली पारी के 286 रन के स्कोर से सिर्फ 15 रन पीछे है. दिल्ली के कप्तान ऋषभ पंत और नीतिश राणा क्रीज़ पर हैं.

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  • रीयाल मैड्रिड के साथ ही रिटायर होना चाहते हैं रोनाल्डो

    अबु धाबी दिग्गज फुटबाल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने रीयाल मैड्रिड को क्लब विश्व कप का खिताब दिलाने के बाद कहा है कि वह स्पेन की इसी दिग्गज टीम के साथ खिलाड़ी के रूप में अपने करियर का अंत करना चाहते हैं। रोनाल्डो के गोल की बदौलत मैड्रिड की टीम ने ग्रेमियो को 1-0 से हराकर क्लब विश्व कप का चैथी बार खिताब जीता और वह सात गोल के साथ टूर्नामेंट के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ गोल स्कोरर हैं। यह पूछने पर कि क्या वह मैड्रिड के साथ ही रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, रोनाल्डो ने कहा कि मैं ऐसा करना चाहूंगा, लेकिन चीजें मेरे ऊपर निर्भर नहीं हैं। मेरे ऊपर यह निर्भर करता है कि मैदान पर मैं कैसा प्रदर्शन करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं क्लब नहीं चला रहा, यह फैसला उन्हें करना है जो प्रभारी हैं। मेरा काम मैदान पर खेलना है और मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं, बाकी चीजों पर मेरा नियंत्रण नहीं है।’’ रोनाल्डो 32 साल के हैं और उन्होंने एक साल पहले क्लब के साथ नया करार किया है जो 2021 तक चलेगा।

  • कोहली नहीं इस तूफानी बल्लेबाज़ के कायल हैं बाबर आज़म

    टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को मौजूदा बल्लेबाज़ों में से बेस्ट माना जाता है. कोहली ने सभी फॉरमेट में ग़ज़ब का खेल दिखाकर सभी को प्रभावित किया है.

    लेकिन हाल ही में पाकिस्तान के युवा बल्लेबाज़ बाबर आज़म ने अपनी तुलना कोहली से करने पर बयान दिया है. बाबर ने कहा कि मेरी तुलना कोहली से नहीं की जानी चाहिए. बाबर ने कहा कि विराट कोहली मॉर्डन क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ हैं और मुझे उनकी बराबरी करने के लिए अभी बहुत वक्त लगेगा. कोहली से तुलना किसी और ने नहीं बल्कि ख़ुद बाबर के कोच मिकी आर्थर ने की थी.

    एबी डिविलियर्स हैं पसंदीदा बल्लेबाज़
    ईएसपीएन के साथ एक इंटरव्यू में आज़म ने कहा कि साउथ अफ्रीका के बैट्समैन एबी डिविलियर्स उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं. बाबर ने कहा कि मुझे उनकी बैटिंग देखने में बड़ा मज़ा आता है. शुरुआती दिनों में उनके शॉट्स को ध्यान से देखता था और फिर नेट्स पर उनकी तरह शॉट्स लगाने की प्रैक्टिस किया करता था. अब आजकल मैं डिविलियर्स के अलावा हाशिम अमला और विराट कोहली को फॉलो करता हूं.कमाल के हैं बाबर के आंकड़े
    23 साल के बाबर आज़म ने साल 2015 में पाकिस्तान वनडे टीम के लिए डेब्यू किया था. उन्होंने वनडे में अभी तक 36 मैच खेले हैं जिसमें 85.88 के स्ट्राइक रेट के साथ 1758 रन बनाए. जिसमें 7 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं. वहीं 11 टेस्ट में 475 रन बनाए. जिसमें 4 अर्धशतक हैं. टी20 में बाबर 14 मैचों में 468 रन बना चुके हैं.

  • मुझसे पहले भिड़ता तो नहीं देता अमुजु ऐसा बयान : विजेंदर

    नई दिल्ली। 23 दिसंबर को जयपुर में होने वाले पेशेवर मुक्केबाजी के मुकाबले में विजेंदर सिंह को रिंग में तोडऩे की धमकी देने वाले अफ्रीकी मुक्केबाज अर्नेस्ट अमुजु पर विजेंदर सिंह ने जवाबी हमला किया है। भारतीय मुक्केबाज विजेंदर ने कहा कि अगर अमुजु की किसी भारतीय मुक्केबाज के साथ पहले फाइट हो जाती तो वह ऐसे बयान नहीं देता। विजेंदर ने कहा कि अमुजु अफ्रीकी चैंपियन जरूर है, लेकिन अफ्रीका के बाहर कभी नहीं खेला है। उसने अमेरिका, भारत, इंग्लैंड नहीं देखा है। अगर वह घर में ही फाइट खेलकर खुश है तो वहीं रहकर खेले। मैं 23 दिसंबर को उसको दिखाऊंगा कि मुक्केबाजी जुबान से नहीं मुक्कों से खेली जाती है।

    पेशेवर मुक्केबाजी का अमुजु के पास ज्यादा अनुभव होने के सवाल पर विजेंदर ने कहा कि मैंने उसका खेल देखा है। वह दो बार 10 या 12 राउंड तक फाइट लेकर गया लेकिन दोनों ही हार गया। मैंने नौ फाइट जरूर खेली हैं, लेकिन सभी जीती हैं और अब पेशेवर मुक्केबाजी में मुझे तीन साल हो गए हैं। मेरे पास उसके लिए प्लान है, जिसे मैं रिंग में ही सामने रखूंगा।

    भारत में विजेंदर से भिडऩे से पहले पीछे भी दोनों मुक्केबाजों ने बड़े-बड़े बयान दिए थे, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। विजेंदर ने कहा कि मुझे दर्शकों से अच्छा समर्थन मिलता है। मैं अपने देश में अपने लोगों के साथ खेलता हूं तो उत्साहित होता हूं। लोग दिल से मेरे लिए मैच देखने आते हैं, तो मैं उन्हें निराश नहीं देख सकता हूं।

    ओलंपिक में स्वर्ण नहीं जीत पाने पर विजेंदर ने कहा कि मुझे लगता है कि मुझे स्वर्ण जीतना चाहिए था। मैं तीन ओलंपिक खेल चुका हूं। जीतने की कोशिश भी की थी, लेकिन कहते हैं कि ना किस्मत बड़ी चीज है। ओलंपिक की बात करना आसान है, लेकिन वहां जाकर अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होता है। अभी युवाओं का समय है। कई युवा और भी आएंगे।

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    ट्रेनिंग पर बोलते हुए ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज ने कहा कि मुक्केबाजी करनी है, परिणाम लाने हैं तो ट्रेनिंग तो करनी ही पड़ती है। मैं इसके लिए कड़ी मेहनत करता हूं। डब्ल्यूबीओ एशिया पैसेफिक और ओरियंटल सुपर मिडिलवेट बेल्ट जीते हुए विजेंदर ने कहा मैंने अब तक नौ में से दो ही फाइट भारत में खेली हैं। अनुभव की बात करूं तो काफी अच्छा रहा। मेरी भारत में ये तीसरी फाइट है। मेरा मकसद है कि भारत में ही फाइट करूं। भारत में मुक्केबाजी आगे ले जाऊं और चाहता हूं कि देश के लिए कई मुक्केबाज निकले जो ओलंपिक में पदक जीतें। विजेंदर ने हाल ही में यूथ विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पांच स्वर्ण जीतने वाली महिला मुक्केबाजों की भी खुलकर तारीफ की। पेशेवर मुक्केबाजी छोडऩे के बाद के करियर पर विजेंदर ने कहा कि मैंने अपनी विजेंदर सिंह नाम की मुक्केबाजी प्रमोशन कंपनी खोली है। इसमें मैं मुक्केबाजी को प्रमोट कर रहा हूं। साथ ही कई बच्चे भी तैयार करूंगा।

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