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  • जेम्स वेब ने तोड़ा एक और रिकॉर्ड, मिल्की वे से भी छोटी है ये गैलेक्सी

    डेस्क। जेम्स वेब टेलीस्कोप नई-नई रिकॉर्ड तोड़ तस्वीरें इन दिनों शेयर कर रहा है, इसी कड़ी में जेम्स वेब टेलीस्कोप ने अब तक की सबसे पुरानी गैलेक्सी को खोजने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है।

    बता दें कि इस गैलेक्सी का नाम ग्लास-जेड 13 है। उनके अनुसार ये गैलेक्सी ब्रह्मांड के बनने यानी बिग बैंग के लगभग 30 करोड़ साल बाद ही बन चुकी थी। क्या आप जानते हैं कि इससे पहले सबसे पुरानी गैलेक्सी का रिकॉर्ड हबल टेलीस्कोप के पास था, जिसने 2016 में जीएन-जेड11 गैलेक्सी की खोज कर दुनिया को अचंभे में डाल दिया था।

    जीएन-जेड11 बिग बैंग के लगभग 40 करोड़ साल बाद बनने वाली गैलेक्सी है। ग्लास-जेड13 गैलेक्सी की रोशनी अब धुंधली हो चुकी थी। इसकी रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने में 13.4 अरब वर्ष लग गए। शोधकर्ताओं ने अब सबसे पुरानी गैलेक्सी के खिताब से इसी को नवाजा है।

    शोधकर्ता रोहन नायडू की माने तो हम सबसे दूर की स्टारलाइट को देख रहे हैं, जिसे अब तक नहीं देखा गया था।

    मिल्की वे गैलेक्सी से आकार में छोटी

    ग्लास-जेड13 को टेलीस्कोप के मुख्य इन्फ्रारेड इमेजर से देखा गया पर पिछले हफ्ते रिलीज की गई तस्वीरों में इसको लेकर कोई खास खुलासा नहीं हुआ था। 

    रोहन नायडू ने बताया कि ये गैलेक्सी पृथ्वी की मिल्की वे गैलेक्सी से छोटी है। मिल्की वे गैलेक्सी का आकार 1 लाख प्रकाश वर्ष है और इसके एक छोर से दूसरे छोर पर प्रकाश को पहुंचने में एक लाख साल लग जाएंगे। वहीं ग्लास-जेड13 गैलेक्सी का आकार सिर्फ 1,600 प्रकाश वर्ष का है।

  • चीन ने खोजी दूसरी दुनिया रहस्य जान रह जाएंगे हैरान

    New World Found In China: आज हम तकनीकी के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गए हैं। विज्ञान के माध्यम से हम धरातल से लेकर अंतरिक्ष तक के अनजाने रहस्यों का पर्दे खोल रहे हैं। वैज्ञानिक आय दिन अपने प्रयासों से ऐसे सफल परीक्षण कर रहे हैं जिनकी कल्पना हमने कभी सपने में नही की थी। आज विज्ञान इतना आगे बढ़ गया है कि वह अंतरिक्ष से लेकर धरती के हर रहस्य को उजागर करने में जुटा है। वही अब चीन ने एक ऐसी रहस्यमयी जगह की खोज की है जो इंसानों की सोच से बिल्कुल परे थी।

    चीन ने दावा किया है यह एक दूसरी दुनिया है इस जगह पर सूर्य की रोशनी तक नही पहुंच पाती है लेकिन अभी हाल ही में इस जगह पर एक इंसान ने अपने कदम रखे। कहा जा रहा है यह जगह देंखने में बेहद खूबसूरत है। चीन ने बताया वास्तव में यह एक गड्ढे नुमा संरचना है। चीन के लोगो का कहना है कि इस गड्ढे का कोई अंत नही है यह अंनत तक जाता है चीन के लोग इस गड्ढे को ‘शेनयिंग तिआंकेंग’ कहते हैं। लेकिन अब इस गड्ढे के कई रहस्यों से पर्दा हट गया है।
    इस गड्ढे के परिपेक्ष्य में जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें दावा किया गया है कि 630 फीट के इस विशाल गड्ढे की चौड़ाई 490 फीट है। इस गड्ढे के अंदर जाने के तीन मार्ग है। गड्ढे के अंदर 130 फीट ऊंचे पेड़ हैं जो अंदर जाने वाले रास्ते की तरफ झुके हुए हैं. यही कारण है कि इसके अंदर सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पाती. लेकिन अंदर से ये काफ़ी खूबसूरत नज़र आती है। चीन ने अबतक ऐसे 30 गढ्ढे खोजे है। लेकिन अभी तक इस बात की पुष्टि नही हो पाई है कि इन गड्डो का निर्माण किस प्रकार हुआ है।

  • गुजरात में मिला इतना अजीबोगरीब ब्लड सैंपल की डॉक्टर्स भी रह गए हैरान

    EMM Negative Blood Group। गुजरात के राजकोट में रहने वाला एक 65 वर्षीय व्यक्ति को बीते साल हृदय की सर्जरी के लिए रक्त की आवश्यकता थी, उसका ब्लड टेस्ट हुआ पर डॉक्टर आज तक मरीज के ब्लड ग्रुप का पता नहीं लगा पाए हैं।

    व्यक्ति के इलाज के दौरान, यह पता चला कि मरीज का एक दुर्लभ रक्त प्रकार था – ईएमएम नेगेटिव (EMM Negative)। हो सकता है इसे सुनने के बाद आपको भी हैरानी हुई होगी।

    वैसे तो सामान्य तौर पर चार प्रकार के रक्त समूह होते हैं- ए, बी,ओ,या एबी, जिसमें भी 42 प्रकार के सिस्टम होते हैं,जैसे ए,बी,ओ,आरएच और डफी। इसके अलावा इसमें 375 प्रकार के एंटीजन भी होते हैं, जिनमें EMM अधिक होता है।

    डॉक्टर यह जानकर हैरान रह गए कि उनका ब्लड ग्रुप एक अनोखा है और उन्हें तुरंत अहमदाबाद रेफर कर दिया गया था। लेकिन वहां भी,डॉक्टरों को उसके रक्त समूह से मेल खाने वाला कोई भी व्यक्ति नहीं मिला। यह बताया गया है कि पुरी दुनिया में वह 10वां व्यक्ति था जिसका ईएमएम नेगेटिव ब्लड ग्रुप पाया गया है।

    ऐसे लोगों के शरीर में हाई-फ्रिक्वेंसी एंटीजन की कमी होती है और इस ब्लड ग्रुप के लोग न खून दान कर सकते हैं और न किसी से खून ले सकते हैं। 

    सूरत स्थित समर्पण ब्लड डोनेशन सेंटर के फिजिशियन डॉक्टर सन्मुख जोशनी इसको लेकर कहा कि इस व्यक्ति को खून की जरूरत है ताकि दिल की सर्जरी हो सके क्योंकि उन्हें हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था। पर अनोखा ब्लड होने के कारण सर्जरी के लिए खून नहीं मिल पा रहा है।

    इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) ने इस रक्त समूह का नाम ईएमएम निगेटिव इसलिए रखा है, क्योंकि इसमें EMM प्रेजेंट ही नहीं होता। क्या आप जानते हैं कि इस अनोखे ब्लड ग्रुप के अलावा भी दुनिया में गोल्डेन ब्लड (Golden Blood) के नाम से एक ऐसा ब्लड ग्रुप पाया गया है जो सिर्फ दुनिया के 43 लोगों में पाया गया हैं। 

  • इस समुदाय में दुल्हन के प्राइवेट पार्ट पर थूक कर दिया जाता है आशीर्वाद

    डेस्क : जब दूल्हा-दुल्हन की शादी होती है तो बड़े बुजुर्ग लोग यूके सर पर हाथ फेर कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं, ताकि उनकी आगे की जिंदगी खुशहाल और सौभाग्य भारी हो। शादी जैसे मांगलिक कार्य में बड़े-बुजुर्गों की उपस्थिति का विशेष महत्व भी होता है। पर क्या आप जानते हैं कि केन्या में एक जनजाति ऐसी भी है, जो विवाह में दुल्हन को आशीर्वाद देने के लिए उसके ऊपर थूकती है।

    वैसे तो यह परंपरा सुनने में अजीब जरूर लग सकती है। पर आपको बता दें कि यहां लड़की की विदाई के समय पिता अपनी बेटी के शरीर पर थूक कर उसे अपना आशीर्वाद देते हैं। इस अजीबोगरीब परंपरा के बारे में जिसने भी सुना वो सोच में पड़ गया।

    बता दें कि केन्या और तंजानिया की एक आदिवासी जनजाति मसाई है। इस जनजाति में जब लड़की की शादी होती है तो विदाई के वक्त दुल्हन का पिता बेटी के सिर और ब्रेस्ट पर थूक कर उसको अपना आशीर्वाद देता है। इस जगह सदियों से यह परंपरा निभाई जा रही है और यहां के लोग इसे प्यार जताने का तरीका बताते हैं। बतादें की यहां बेटियां भी पिता द्वारा थूकने पर इसे आशीर्वाद ही समझती है।

    दुल्हन का मुंडवा देते हैं सर

    इसके साथ ही यह जनजाति बेटी की शादी होते है और लड़के के घर वालों को दहेज देने के बाद दुल्हन का सिर भी मुंडवाया देती है। सर मुंडवाने के बाद दुल्हन अपने पिता के सामने घुटने टेकती है और घर के सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेती है। इस दौरान घर के बुजुर्ग दुल्हन के सिर पर और ब्रेस्ट पर थूक कर उसे आशीर्वाद देते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करना दुल्हन के लिए शुभ होता है। और यह रिवाज सिर्फ नई नवेली दुल्हन नहीं बल्कि नवजात बच्चों के साथ भी मनाया जाता है।

    मसाई समुदाय के लोग थूकना एक सम्मान की बात मानते है। बता दें कि उन्होंने बताया कि जब कोई मेहमान उनके यहां आता है तो भी वह इसी तरह से उनकी हथेली पर थूक कर उनका स्वागत करते हैं। इतना ही नहीं इस समुदाय में एक और मान्यता है कि शादी के दौरान लड़की के सिर और ब्रेस्ट पर थूकने के बाद जब लड़की ससुराल के लिए रवाना होती है तो लड़की को पीछे मुड़कर नहीं देखना होता वर्ना दुल्हन पत्थर में तब्दील हो जाती है।

  • 100 साल की ऐसी परंपरा जिसने महामारी का किया खात्मा, पूजा के साथ पिलाई जाती है सिगरेट

    गुजरात: गुजरात के नवसारी में एक समय हैजा का तांडव मचा हुआ था। हजारों लोगों की हैजा से मौत हो रही थी। लोग काफी परेशान थे हर कोई इस बीमारी का रामबाण इलाज चाहता था। वही पारसी समाज के एक बड़े उद्योगपति ने समाज के लोगो को एक बड़ा पुतला पूजा करने के लिये दिया था। पारसी उद्योगपति ने दावा किया था कि इस पुतले की पूजा से हैजा का तांडव कम हो जाएगा। आज हैजा का प्रकोप तो खत्म हो गया है लेकिन पुतले की पूजा करने की परंपरा नहीं।

    स्थानीय लोग इस पुतले की आज भी पूजा करते हैं आज के समय मे यह पुतला ढिंगला बापा के नाम से पूजा जाता है। लोग पहले इस पुतले को पूरा तैयार करते हैं फिर उसे सिगरेट पिलाते है। पहले लोग इसे बीड़ी पिलाया करते थे। लोगो की मान्यता है कि गुजरात मे ढिंगला बापा की पूजा करने से हैजा की बीमारी खत्म हुई थी और लाखों लोगो की जान बच गई थी।
    गुजरात मे हर साल हर साल आषाढ़ मास की अमावस्या के दिन बड़ा पुतला बनाकर उसकी पूजा की परंपरा नवसारी के आदिवासी परिवार निभाते हैं. ढिंगला बापा में कई लोगों की आस्था बनी हुई लोग इन्हें कष्टनिवारक भी कहते हैं। आदिवासी समाज इसे बड़े उत्सव के रूप में मनाते हैं। आदिवासी समाज के लोग घास का पुतला बनाते है उसको मिट्टी के मुख के साथ तैयार करते हैं। लोग इस पुतले की पूजा करते हैं और मनोकामना मांगते हैं। लोगो की आस्था है कि इस पुतले की पूजा करने से उनके दुख खत्म हो जाते हैं।

  • जल्द नासा पृथ्वी पर लाएगा मंगल ग्रह के नमूने

    NASA: नासा आय दिन अपने शोध से लोगो को चौंका देता है। वही अब खबर है कि नासा ने मंगल के नमूने पृथ्वी पर लाने की समय सीमा को तय कर दिया है। बताया जा रहा है कि 2023 में नासा मंगल ग्रह के नमूने पृथ्वी पर ले आएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नासा ने इस मिशन को पूरा करने के लिये अपने ‘मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम’ (Mars Sample Return Program) को पूरा कर लिया है वही अब नासा इसके लिये Conceptual Design Phase पूरा करने वाला है।

    जानकारी के लिये बता दें इस चरण के दौरान, प्रोग्राम टीम ने वैज्ञानिक रूप से चयनित नमूनों को वापस लाने के लिए आर्किटेक्चर का मूल्यांकन और परिष्करण (Evaluated and Refined) किया, जो वर्तमान में लाल ग्रह (Red Planet) के जेजेरो क्रेटर में नासा के पर्सेवरेंस रोवर द्वारा संग्रह प्रक्रिया में हैं। इस अभियान में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) का योगदान शामिल है, जिससे भविष्य में मिशन की जटिलता कम होने और सफलता की संभावना बढ़ने की उम्मीद है।
    नासा के सहयोगी प्रशासक थॉमस ज़ुर्बुचेन ने कहा कि यह डिजाइन तब तक पूरा नही होगा जब तक मिशन के सभी पहलुओं की जांच न हो जाए। मंगल ग्रह के नमूनों को पृथ्वी पर लाने के लिये कुछ परिवर्तन किये जा रहे हैं। इसका सम्पूर्ण श्रेय जेजेरो में पर्सवेरेंस रोवर की हालिया सफलताओं और हमारे मंगल हेलीकॉप्टर के अद्भुत प्रदर्शन को दिया जा सकता है। बताते चले मंगल ग्रह से नमूना प्राप्त करके लाने वाले लैंडर में दो सैंपल रिकवरी हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। जो इनजेनिटी हेलीकॉप्टर (Ingenuity helicopter) की तकनीक पर आधारित होंगे।
    इनजेनिटी एक छोटा रोबोट कोएक्सियल रोटर हेलीकॉप्टर है, जो नासा के हिस्से के रूप में मंगल ग्रह पर काम कर रहा है। इस हेलीकॉप्टर ने अबतक मंगल ग्रह पर 29 उड़ानें भरी हैं और अपने निर्धारित जीवनकाल से एक वर्ष से अधिक समय तक काम करता रहा। ये हेलीकॉप्टर मंगल की सतह पर संचित नमूनों को पुनः प्राप्त करने के लिए एक द्वितीयक क्षमता प्रदान करेंगे।

  • Mystery: मछुआरों ने देखा विशालकाय जानवर जिसका आधा शरीर इंसान का

    दुनिया में कई तरह के जीव-जंतु रहते निवास करते हैं जिनसे हम आज तक अनजान हैं। वहीं अगर इंसानों की बात करें तो जगह और रहन सहन के हिसाब से लोगों का लुक भी बदल जाता है। जैसे कहीं पर गोरे पाए जाते हैं तो कहीं लोगों का रंग काला होता है।

    किसी इलाके में रहने वाले लोगों की आँखें छोटी होती हैं तो कई बार आंखें नॉर्मल से बड़ी होती हैं। 

    इंसानों की तरह ही जानवरों के साथ भी ऐसी ही स्थिति देखी जा सकती है पर क्या आप जानते हैं कि ऐसे भी कुछ जीव हैं जो सिर्फ कहानियों में सिमट कर रह गए हैं। जिनकी कल्पना करना भी बहुत कठिन है।

    बता दें कि सालों से एक्सपर्ट्स बिगफुट की तलाश में हैं। बिगफुट यानी की वो मानव जो इंसानों से काफी अलग दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पर इनकी कई तस्वीरें और वीडियो कड़ियां मौजूद हैं। पर अभी तक असल में इन्हें कोई ढूंढ न सका है। कई लोग इनको बस कहानियों का ही हिस्सा ही मानते हैं। 

    वहीं हाल ही में टेक्सास में कुछ मछुआरों ने बेहद अजीब से जीव को देखने का दावा भी किया है। उन्होंने इस जीव को बिगफुट से भी अलग बताया है। मछुआरों द्वारा दिए डिस्क्रिप्शन के अनुसार इसका आधा शरीर इंसान का और आधा कुत्ते जैसा दिख रहा था।

    मछुआरों के दावे के अनुसार ये विशाल सा जीव नदी के किनारे घास में छिपा हुआ था। इसका एक वीडियो भी बनाया गया, जिसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है और ये बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा जीव बेहद अजीब सा नजर आ रहा है। जहां मछुआरे के डिस्क्रिप्शन के अनुसार ये आधा जानवर और आधा इंसान था।

    वहीं एक्सपर्ट्स की माने तो ये सिर्फ एक बड़ा सा बन्दर रहा होगा। 

    वायरल वीडियो : इन घटना के दौरान मछुआरे अपनी नाव में थे जबकि ये जीव नदी के किनारे पानी पी रहा था। उन्होंने उसे चार पैरों पर पानी पीते हुए देखा और जैसे ही लोगों की नजर उसपर पड़ी, एक शख्स को बोलते सुना गया कि आखिर ये क्या है? 

    इसे देखते ही नाव पर मौजूद एक मछुआरा इसे शूट करने लगा और जब जीव ने देखा कि लोग उसे देख रहे हैं, तो वो वापस बड़ी बड़ी घास में छिप गया। कुछ इसे डॉगमैन भी बता रहे हैं।

  • एक शहर ऐसा जहाँ सब कुछ है अंडरग्राउंड, मकान से लेकर चर्च तक है जमीन के अंदर

    रोचक: आज तक हमने बड़े बड़े शहरों के नाम सुने है और उन शहरों में बड़ी बड़ी इमारतें देखी है। इन ऊंची ऊंची इमारतों को देखकर कई बार हमारी आंखे फटी की फटी रह जाती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ लोग बड़ी बड़ी इमारतों में रहना नही पसन्द करते हैं बल्कि वहां के लोग अंडरग्राउंड रहते हैं। हां ठीक सुना आपने हम आज आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ लोग अपना मकान जमीन के अंदर बनाते हैं। वहाँ हर तरफ लोग जमीन के अंदर मकान बनाकर रहते हैं।

    हम बात कर रहे हैं साउथ ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाके में बसे एक शहर की। इस शहर में लोग जमीन के अंदर घर बनाकर रहते हैं। यह रेगिस्तान का इलाका है। इसे धरती का पाताललोक भी कहा जाता है। कहा जाता है कि साउथ ऑस्ट्रेलिया के इस इलाके में -बहुमूल्य रत्न Opal gemstones के लिये खदान की खुदाई होती रही इस खुदाई से यहां बड़े बड़े खदान बन गए। वही जब लोग गर्मी से परेशान हो गए तो उन्होंने इन खदानों में अपना मकान बना लिया और यहाँ अपना डेरा डाल लिया।
    इस शहर में 1500 ऐसे खदान है जिनमें लोगो ने अपना घर बना रखा है और वह उन घरों में रहते हैं। खदानों में बने घरों में सभी सुविधाएं लोगो ने अपनी सुविधा के अनुकूल व्यवस्थित कर रखी है। खदानों में घर लोगो ने अपनी इच्छा अनुकूल डिजाइन कर रखे है। इस शहर में 3500 लोग रहते हैं जिंसमे से आधे से अधिक लोग ऐसे हैं जो अंडरग्राउंड रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया का यह शहर 100 साल पहले बना था यह एक युवक ने Opal gemstones की खोज की थी। इसे दुनिया का ओपल कैपिटल कहा जाता है।

  • तेज रफ्तार से घूम रही है धरती, वैज्ञानिकों ने कही बड़ी बात

    रोचक: विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है वैज्ञानिक रोज अपनी खोज से लोगो को चकित कर दे रहे हैं। आय दिन विज्ञान एक ऐसा दावा कर रहा है जो हमे हैरान कर देता है। वही अब वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर पहले से अधिक रफ्तार से घूम रही है। इसकी रफ्तार अब इतनीं तेज को गई है कि जो चक्कर वह पहले 24 घण्टे में पूरा करती थी वह अब उससे काफी जल्दी पूरा हो जा रहा है।

    विशेषज्ञयों ने कहा है कि 29 जून 2022 को जब पृथ्वी ने आपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा किया तो उसे यह चक्कर लगाने में 24 घण्टे से कम समय लगा था। पृथ्वी ने अपना यह चक्कर महज 1.59 मिलीसेकंड में पूरा कर लिया जो एक सामान्य रफ्तार से काफी तेज है और पृथ्वी पर रफ्तार से पहले कभी नही घूमती थी। इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट ने दावा किया है कि पृथ्वी अपनी नियमित रफ्तार से तेज अपनी धुरी पर घूम रही है। जून में उसकी रफ्तार काफी तेज रही जिसके चलते जून में दिन काफी छोटे हुए।
    यह स्थिति साल 2022 से पहले 1960 के दशक में देखी गई। 19 जुलाई 2022 का सबसे छोटा दिन था। क्योंकि इस दिन पृथ्वी की रफ्तार 1.47 मिलीसेकंड थी जो अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक थी। सामान्य तौर पर पृथ्वी अपनी धुरी पर इस समय 1.59 मिलीसेकंड की रफ्तार से घूम रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इनर और आउटर लेयर, महासागरों, टाइड या फिर जलवायु में लगातार हो रहे परिवर्तन हो रहा है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यदि पृथ्वी इसी रफ्तार से घूमती रही तो यह नेगेटिव लीप सेंकेड की शुरुआत कर सकती है। जो आईटी सिस्टम के लिये समस्या पैदा करेगा।

  • अगर आपके पास है 5 रुपये का यह वाला नोट तो आप बन जाएंगे लखपती

    रोचक: आज के समय मे हर कोई लखपती बनने का सपना देखता है। कई लोग जहां अपनी मेहनत के बलबूते पर पैसा कमा कर अमीर बनने का सपना देखते है। वही कई लोग ऐसे हैं जो यह सोचते हैं कि कोई चमत्कार हो जाये और बिना मेहनत के ही आप लखपती बन जाए। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे नोट के बारे मे जो अगर अपने पास है तो आपको वह लाख रुपये दिलवा सकता है।

    असल मे हम बात कर रहे हैं पांच रुपये के नोट की। जिसे बेचकर आप आसानी से पैसा कमा सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि पांच का नोट तो सभी के पास होता है वह हमें पैसा कैसे देगा। तो अगर आपके पास वह पांच का नोट है जिसपर 786 नम्बर लिखा है और ट्रैकर का निशान बना है। तो आप उसे बेचकर लाखो रुपये कमा सकते हैं। इस नोट से आपको 2 लाख से अधिक की इनकम हो सकती है।
    जानकारी के लिये बता दें इस समय कई ऐसी वेबसाइट है जो पुराने नोट व सिक्को को खरीद रही है। अगर आप भी अपनी पुरानी पांच की नोट बेचना चाहते हैं तो आपको इसके लिये वेबसाइट www.ebay.com पर जाना होगा। इसके बाद होम पेज पर, आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा।
    फिर आपको यहां Seller के रूप में रजिस्ट्रेशन करना होगा। अपने मेमो की एक साफ तस्वीर लेनी हेगी और इसे वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। eBay तब आपका विज्ञापन उन लोगों को दिखाया जाएगा जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर पुराने बैंक नोट और सिक्के खरीदने में रुचि रखते हैं। जो लोग आपके द्वारा लिस्ट किए गए नोट को खरीदना चाहेंगे वो आपसे कॉन्टैक्ट करेंगे। कॉन्टैक्ट होने के बाद आप नोट को लेकर आगे बात कर सकते हैं और सही और संभव कीमत पर इसे बेच सकते हैं।