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  • जाने वह कौन सी शक्ति है जिसकी वजह से मनुष्य करता है काम

    रोचक– जीवन मे ऊर्जा का सर्वाधिक महत्व है। बिना ऊर्जा के मनुष्य के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। कहते हैं अगर जीवन मे ऊर्जा नहीं होगी तो व्यक्ति की गतिविधियां स्थिर हो जाएगी। विज्ञान के मुताबिक सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर यह ऊर्जा है क्या? 

    विज्ञान के मुताबिक ऊर्जा-

    विज्ञान के मुताबिक ऊर्जा न तो वस्तु है न कोई पदार्थ। न इसे देखा जा सकता है न इसे स्पर्श किया जा सकता है। लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है। क्योंकि ऊर्जा व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता को है। जिसके उपयोग से व्यक्ति अपनी सभी गतिविधियों को पूरा करता है।
    व्यक्ति के शरीर मे जैसी ऊर्जा होती है। वह उसी प्रकार से गतिविधियों को करता है। वही ऊर्जा समय समय पर घटती व बढ़ती रहती है। 
    वही विज्ञान के मुताबिक व्यक्ति की ऊर्जा उसके कार्य करने के तरीकों से परिवर्तित होती रहती है। जो व्यक्ति जैसा कार्य करता है उसकी ऊर्जा उसी प्रकार से व्यय होती है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति बैठ कर काम करता है तो बल नहीं लगाता तो स्थितिज ऊर्जा व्यय होती है। वहीं अगर कोई व्यक्ति किसी वस्तु को खींचता है तो इससे गतिज ऊर्जा का व्यय होता है। ऊर्जा सामान्य तौर पर 2 प्रकार की होती है- गतिज और स्थितिज।

  • जाने गुजरात के इतिहास से जुड़े प्रमुख पहलू और पहले मुख्यमंत्री का नाम

    आज गुजरात चुनाव के नीतेजे आने वाले हैं। वही इस समय हर किसी की जुबान पर गुजरात का इतिहास है। लोग अब जानना चाहते हैं कि आखिर गुजरात का नाम गुजरात पड़ा कैसे और कौन था गुजरात का पहला मुख्यमंत्री-
    अगर हम गुजरात की टोटल विधानसभा सींटो के बारे में बात करे तो गुजरात मे कुल 182 विधानसभा सींटें हैं। वही गुजरात का सबसे बड़ा जिला कच्छ है। यह 45,674 स्क्वायर किमी में फैला हुआ है। 
    गुजरात का राष्ट्रीय पशु शेर है जो गिरी राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है। वही नर्मदा गुजरात की सबसे लंबी नदी है। गुजरात मे कुल 33 जिले हैं। वही गुजरात मे सबसे अधिक आबादी हिन्दू धर्म की है। दूसरे नम्बर पर गुजरात मे मुस्लिम समाज के लोग रहते हैं।
    गुजरात राज्य का गठन 1 मई 1960 को हुआ था। अहमदाबाद गुजरात की पहली राजधानी थी। वही गुजरात के पहले मुख्यमंत्री जीवराज नारायण मेहता थे।

  • पोस्टमार्टम के दौरान बॉडी से निकला जिंदा सांप

    डेस्क। पोस्टमार्टम हाउस को लेकर लोगों के मन में एक अजीब सा डर का भाव रहता है। वहीं ऐसी जगहों से लोग दूर ही रहना भी पसंद करते हैं। खबरों के अनुसार ऐसी जगहों पर काम करने वाले लोगों को कई बार डरावने अनुभव भी हुए हैं।
    एक ऐसा ही मामला अमरीका के मैरीलैंड से भी सामने आया है। जहां एक महिला तकनीशियन डेड बॉडी का ऑटोप्सी कर रही होती थी। वहीं इसी दौरान उसके साथ कुछ ऐसा हुआ कि उसके होश ही उड़ गए और वह वहां से चिल्लाकर भाग खड़ी हो गई और महिला को डेड बॉडी के अंदर से जिंदा सांप मिला जिसे देखने के बाद वह दहशत में आ गई।
    शव के अंदर से निकला जिंदा सांप
    इस ऑटोप्सी तकनीशियन महिला का नाम जेसिका लोगन है और 31 वर्षीय जेसिका ने अपने इस डरावने अनुभव के बारे में लोगो को बताया कि जब वह एक डेड बॉडी का पोस्टमार्टम कर रही थीं तो उन्हें उस डेड बॉडी की जांघ में एक जीवित सांप मिला था।
    साथ ही जेसिका लोगन का कहना है कि वह अपनी नौकरी से बहुत ही प्यार करती हैं और ऑटोप्सी तकनीशियन के रूप में नौ साल से काम भी कर रही हैं।
    इसके अलावा जेसिका लोगन ने यह भी बताया कि डेड बॉडी के अंदर से अचानक सांप मिलने के बाद वह चिल्लाते हुए पूरे कमरे में भाग रही थी। और वह उस कमरे में तबतक नहीं लौटी जब तक कि उस सांप को पकड़ नहीं लिया गया था। इसके अलावा जेसिका ने यह भी बताया कि व्यक्ति की मौत के बाद सांप उसके शरीर में घुस गया था। और मृतक की बॉडी बेहद ही बुरी अवस्था में थी वहीं इस शव एक नाले में पाया गया था।
    ऑटोप्सी तकनीशियन जेसिका ने यह बताया कि अगर शव सूखा और ठंडा है तो आमतौर पर उसमें बहुत अधिक कीड़े नहीं होते हैं। लेकिन अगर यह गर्म और नम है तो शरीर में बहुत सारे कीड़े मौजूद होते हैं। साथ ही उसका यह भी कहना है कि जिन शवों के कीड़े पाए जाते हैं, उनसे छुटकारा पाने का कोई तरीका नहीं होता है। साथ ही ऐसी स्थितियों में कर्मचारियों को काम करने के लिए मजबूर भी होना पड़ता है। 

  • Why Do Trains Run Faster at Night: रात होते ही क्यों बढ़ जाती है ट्रेन की स्पीड, वजह आपको कर देगी हैरान

    डेस्क। Why Do Trains Run Faster at Night: हम सभी यह जानते हैं कि भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। भारतीय रेलवे के जरिए ही रोजाना लाखों लोग एक जगह से दूसरी जगह पर सफर भी करते हैं।
    वहीं आपने भी कभी ना कभी ट्रेन में सफर जरूर किया होगा पर क्या आपने ट्रेन में रात के समय सफर किया है? अगर हां तो आपने एक बात पर जरूर गौर किया होगा कि ट्रेन दिन के मुकाबले रात में ज्यादा स्पीड से चलती है। वहीं ऐसी क्या वजह है, जिस कारण से ट्रेन की स्पीड दिन के मुबाबले रात में ज्यादा तेज होती है? साथ ही अगर आप इसका जवाब नहीं जानते तो आइये आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बात करते हैं।
    बता दें किस कारण से रात के समय तेज चलती है ट्रेन तो रात के समय ट्रेन की स्पीड कई कारणों से तेज भी हो जाती है। वहीं इसमें सबसे पहली वजह यह है कि दिन के मुकाबले रात के समय इंसानों और जानवरों की रेलवे ट्रैक पर आवाजाही कम भी हो जाती है। इसके साथ ही रात के समय रेलवे ट्रैक पर किसी भी तरह का कोई मेंटेनेंस वर्क नहीं होता वहीं जिस कारण ट्रेन रात के समय ज्यादा स्पीड से भी चलती है।
    वहीं इसके अलावा एक कारण यह भी है कि रात के समय ट्रेन के ड्राइवर यानी “लोटो पायलट” को दूर से ही सिग्नल भी दिख जाता है, जिस कारण लोटो पायलट को अक्सर ट्रेन को धीमा करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है और इसलिए भी ट्रेन रात के समय ज्यादा तेजी से चलने लग जाती है।

  • क्यों चीन में शादी के दिन दुल्हन को पीटा जाता है

    रोचक- शादी सात जन्मों का बंधन है। शादी विवाह के दौरान कई रस्मे होती हैं। वहीं प्रत्येक देश मे शादी को लेकर अपनी अलग अलग परंपरा हैं। इसी कड़ी में यदि हम शादी के दौरान चीन में होने वाली परंपरा की बात करें तो इसे सुनकर आप चौंक जाएंगे।
    असल मे चीन में शादी के दौरान दुल्हन को पीटा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यहां दुल्हन का रोना अतिआवश्यक है। चीन में रहने वाली जनजाति तूजिया में यह परंपरा है कि यदि दुल्हन शादी के दौरान स्वयं न रोए तो उसे मार मारकर रुलाया जाता है। वहीं यह परंपरा हजारों साल से चीन में प्रचलित है।
    चीन में इस परंपरा की शुरुआत 475 ईसापूर्व से 221 ईसापूर्व के बीच हुई थी. इस दौरान ज़ाओ स्‍टेट की राजकुमारी की शादी यैन स्‍टेट में हुई. जब वो विदा हो रही थीं तो बेटी के दूर जाने के ग़म में उसकी मां फूट-फूट कर रोने लगीं और बेटी को वापस आने के लिए कहा. तभी से इस परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।

  • कुँवारे लड़को के पेशाब से बनाई जाती है अंडे की यह डिश

    विदेश– कोरोना से पूरा विश्व परेशान हैं। ज्यादातर देश इसके प्रकोप से बाहर निकल चुके हैं। लेकिन कोरोना का पिता कहा जाने वाला चीन आज भी कोरोना की मार झेल रहा है। लोगों की मौत का आकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। लोगो सोशल मीडिया पर चीन को इस बीमारी के लिए जम्मेदार ठहरा रहे हैं। 
    वहीं कई लोगों का कहना है कि चीन का खान पान इतना गंदा है कि हर खराब और खतरनाक वायरस की उत्पत्ति यहीं से होती है। विशेषज्ञ का कहना है कि चीन के लोग कीड़े मकोड़े को खाते हैं। लोग यह नहीं देखते ही यह खाने की वस्तु है या नहीं। बस अपना पेट भरने के उद्देश्य से किसी को भी मारकर खा लेते हैं। 
    वहीं कुछ ऐसी अजीबो गरीब चीजे चीन के लोग खाते हैं जिन्हें आप अपनी थाली तक मे रखवाना नहीं पसन्द करेंगे। इन्हीं अजीबोगरीब डिश में एक डिश ऐसी भी है जिसका नाम है वर्जिन बॉय एग। इस एग को बनाने के लिये कुंवारे लड़को के यूरीन का उपयोग किया जाएगा। चीन के ‘जेजियांग प्रांत’ के डोंगयांग में बच्चों के पेशाब में अंडों को उबाल कर खाया जाता है। चीन में यह डिश काफी फेमस है। 
    इस डिश को बनाने के लिए मुर्गी के अंडों को यूरिन में डुबोकर रखा जाता है. पहले मुर्गी के अंडों को छिलके सहित कुंवारे लड़कों की यूरिन में उबाला जाता है. फिर अंडों को छीलकर उन्‍हें फिर से उबलती हुई यूरिन में डाल दिया जाता है. इस तरह अंडों में यूरिन का फ्लेवर भी आ जाता है और इसी तरह से यह डिश तैयार होती है।

  • इस गांव का नाम बताने में लोगों को आती थी शर्म, अब हुआ नया नामकरण

    डेस्क।Jharkhand Village Story: झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड की बंका पंचायत के एक गांव का नाम पहले ऐसा था कि लोग उसका नाम लेने से भी शर्माते थे। वहीं स्कूल व कॉलेज में बच्चों को अपने गांव का नाम बताने में भी काफी शर्म आती थी। साथ ही इस कारण छात्र-छात्राएं स्कूल-कॉलेज या दोस्तों को अपने गांव का नाम भी नहीं बता पाते थे। और गांव का नाम ऐसा था कि बताने पर लोग उनका काफी मजाक उड़ाया करते थे। आखिरकार नयी पीढ़ी ने गांव के नये नामकरण का फैसला कर लिया है और ग्राम सभा की बैठक में गांव का नया नामकरण भी किया गया है। अब गर्व से लोग अपने गांव का नाम भी लेते हैं। 
    गांव के नामकरण को लेकर ग्राम सभा की बैठक
    देवघर के इस गांव का नाम जाति, आवासीय एवं आय प्रमाण पत्रों में देखकर लोग हंसने लगते थे और वर्षों से चलती आ रही इन परेशानियों को नयी पीढ़ी के युवाओं ने बदलने का मन बना लिया। इसके लिए पंचायत का सहारा लिया गया। बंका पंचायत के तत्कालीन ग्राम पंचायत प्रधान रंजीत कुमार यादव ने गांव के सारे सरकारी दस्तावेजों में नया नामकरण करने के लिए ग्राम सभा की बैठक बुलायी है। इस बैठक में सर्वसम्मति से गांव का पुराना नाम बदलकर नया नाम मसूरिया रखने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। सभी सरकारी कार्यालय समेत दस्तावेजों में विशेष तौर पर मसूरिया के नाम से गांव की इंट्री भी करायी गई है। वहीं अब राजस्व विभाग की वेबसाइट में भी मसूरिया गांव का नाम दर्ज किया गया है।
    गांव का नाम बताने में नहीं आती शर्म
    बता दें अब इस गांव के नये नाम से लोग अपनी जमीन का लगान भी जमा करते हैं। वहीं अंचल कार्यालय के राजस्व ग्राम समेत थाना व प्रखंड कार्यालय के राजस्व ग्रामों की सूची में मसूरिया का नाम भी दर्ज कराया गया है। और अब प्रखंड कार्यालय से संचालित विकास योजना भी मसूरिया के नाम से ही हो रहा है। इसी कड़ी में छात्रों को स्कूल व कॉलेज में जमा करने के लिए जाति, आवासीय व आय प्रमाण पत्र भी मसूरिया के नाम से ही जारी हो रहा है साथ ही बच्चों को अपने गांव का नाम बताने में अब दिक्कत भी नहीं होती है।
    ग्राम प्रधान ने की पहल
    बंका पंचायत के तत्कालीन प्रधान रंजीत कुमार यादव यह कहते हैं कि पुराने पर्चे में गांव का नाम आपत्तिजनक दर्ज था। आज इंटरनेट के दौर में छात्रों को अपने गांव का पुराना नाम लिखने पर काफी परेशानी भी हो रही थी।
    विशेषकर लड़कियों को स्कूल व कॉलेज में गांव का नाम बताने में शर्म आती थी और ग्राम सभा के माध्यम से सभी सरकारी दस्तावेजों में अब गांव का नया नाम मसूरिया कर दिया गया है और पीएम आवास योजना भी अब मसूरिया के नाम से ही आवंटित होता है और सभी प्रमाण पत्र भी मसूरिया के नाम से जारी किए जा रहे है।

  • जाने कोहरा और स्मोग में अंतर

    देश- इस समय उत्तर भारत मे कोहरा का कोहराम मचा हुआ है। ठिठुरन से लोग कांप रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है आगमी 2 से 4 दिन तक अभी कोहरा बना रहेगा। वहीं अब सवाल यह भी उठाता है कि आखिर यह कोहरा बनाता कैसे है। 
    अगर हम यह समझे की कोहरा बनता कैसे है तो यह पानी की छोटी छोटी बूंदों से निर्मित होता है।हमारे चारों तरफ जलवाष्‍प होती है, जिसे आम भाषा में नमी कहा जाता है. सर्दियों के मौसम में जब जलवाष्प ऊपर उठती है और ठंडी हवा से टकराती है तो कंडेंशन की प्रक्रिया शुरू होती है और ये यह भारी होकर नन्‍हीं-नन्‍हीं बूंदों के रूप में जमने लगती हैं।
    जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है, इनका स्‍वरूप धुएं में बदलने लगता है।यह घना होता चला रहा है. इसे ही कोहरा कहते हैं।कई बार आपने फॉग और स्‍मॉग दोनों शब्‍दों सुना होगा. अब इन्‍हें भी समझ लेते हैं. स्‍मॉग दो शब्‍दों से मिलकर बना है. स्‍मोक और फॉग. आसान भाषा में समझें तो जब कार और फैक्‍ट्री से निकलने वाला धुआं कोहरे के साथ मिल जाता है तो उसे स्‍मॉग कहते हैं।

  • पृथ्वी पर यहां है सबसे ज्यादा गुरुत्वाकर्षण, अध्यात्म से भी जुड़ी है जगह

    डेस्क। पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर हर जगह समान नहीं है। वहीं अगर आप ऐसा सोचते हैं तो एक बार फिर से सोच लें क्योंकि दुनिया में तीन ऐसी जगहें हैं जो जबरदस्त चुंबकीय शक्ति का केंद्र भी मानी जाती हैं। वहीं इन्हीं में से एक जगह भारत के उत्तराखंड में भी है। जब नासा ने उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में कसार पर्वत पर शोध किया तो यह पता चला कि कसार देवी मंदिर (उत्तराखंड, कसार देवी मंदिर) के आसपास का पूरा क्षेत्र वान एलन बेल्ट है। वहीं इस जगह की जबरदस्त ऊर्जा देखकर नासा भी हैरान रह गया।
    NASA ने GPS-8 को चिह्नित किया और लिखा कि 
    कसार देवी मंदिर को कभी भी वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व नहीं दिया गया था। पर अब नासा ने इस क्षेत्र में भू-चुंबकीय प्रभाव को मान्यता दे दी है। कसार देवी मंदिर परिसर में जीपीएस 8 (KASAR DEVI GPS 8) वह बिंदु है जिसके बारे में नासा ने गुरुत्वाकर्षण बिंदु के बारे में भी बताया है। नासा ने मंदिर के मुख्य द्वार के बायीं ओर इस स्थान को चिह्नित करते हुए जीपीएस-8 भी लिखा है। वहीं बता दें कि कसार देवी मंदिर दूसरी शताब्दी का है। और यहां हर साल नवंबर से दिसंबर के बीच कसार देवी का मेला भी लगता है। 
    साथ ही वर्तमान मंदिर का निर्माण बिड़ला परिवार ने 1948 में करवाया था। और यहां एक शिव मंदिर भी है जो 1950 के दशक में बनवाया गया था।
    वहीं स्वामी विवेकानंद 1890 में यहां आए थे और उन्होंने यहां पहाड़ी की एकांत गुफा में बहुत गहन साधना भी की थी। उनके अलावा पश्चिमी देशों से भी कई साधक यहां आ भी चुके हैं। यह क्षेत्र क्रैंक रिज के लिए बेहद ही प्रसिद्ध है। 1980-70 के दशक के हिप्पी आंदोलन में यह क्षेत्र काफी प्रसिद्ध हुआ। और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, तिब्बती बौद्ध गुरु लामा अनागारिका गोविंदा, पश्चिमी बौद्ध शिक्षक रॉबर्ट थुरुमन भी कसार देवी मंदिर में आ चुके हैं। इनके अलावा डीएस लॉरेंस, कैट स्टीवंस, बॉब डायलन, जॉर्ज हैरिस, डेनमार्क के अल्फ्रेड सोरेंसन जैसे पश्चिम की कई हस्तियां भी यहां आई हैं।
    जानकारी के लिए आपको बता दें कसार देवी मंदिर वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत ही रोचक है। यह पृथ्वी के ठीक बाहर मौजूद मैग्नेटोस्फीयर या मैग्नेटोस्फीयर से संबंध रखता है। पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर के कारण बड़ी संख्या में ऊर्जा से भरे आवेशित कणों का निर्माण भी हुआ है। इसे वैन एलन रेडिएशन बेल्ट भी बोला जाता है। 

  • जाने कितने फीसदी बिके सपनों के घर

    देश- जब कोई घर बनाता है तो उस घर से उसकी भावनाओं का जुड़ाव होता है। लोग अपनी एक एक पूंजी लगाकर अपना घर बनाते हैं। घर व्यक्ति की जीवन भर की कमाई का परिणाम होता है। वहीं जब आपका अपना घर आपसे छीना जाता है या उसमें कोई परेशानी होती है तो सबसे अधिक तकलीफ आपको ही होती है।
    वहीं अब घरों के परिपेक्ष्य में CREDAI यानी कन्‍फेडरेशन ऑफ रियल इस्‍टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश मे बीते कुछ सालों में सबसे अधिक मकान बिके हैं।
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2021 में 2.36 लाख की तुलना में 2022 में करीब 3.65 लाख मकान बिके हैं। इस आंकड़े को यदि हम प्रतिशत में समझे तो घरों की बिक्री में 54 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं साल 2014 में 3.43 लाख मकानों की बिक्री हुई थी। मुंबई में 2021 में 76,396 मकान बिके थे, जबकि 2022 में 44 फीसदी ग्रोथ के साथ 1,09,733 मकान बिके हैं।