Category: socially-viral

  • सभ्यता एवं संस्कृति की विशिष्टता का द्योतक है विश्व आदिवासी दिवस

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    अनिल अनूप

    विश्व आदिवासी दिवस न केवल मानव समाज के एक हिस्से की सभ्यता एवं संस्कृति की विशिष्टता का द्योतक है, बल्कि उसे संरक्षित करने और सम्मान देने के आग्रह का भी सूचक है.

    आदिवासी समुदायों की भाषा, जीवन-शैली, पर्यावरण से निकटता और कलाओं को संरक्षित और संवर्धित करने के प्रण के साथ आज यह भी संकल्प लिया जाए कि अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने में उनके साथ कदम-से-कदम मिला कर चला जाए. इन पहलुओं को रेखांकित करते हुए आज की यह विशेष प्रस्तुति… आदिवासी अस्तित्व का सवाल   दयामनी बरला सामाजिक कार्यकर्ता, झारखंड  आज जब हम धूमधाम से विश्व आदिवासी दिवस मना रहे हैं, तब हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम आदिवासी-मूलवासी लोगों की दशा और दिशा की ईमानदारी से समीक्षा करें. हम यह देखें कि जो संवैधानिक अधिकार भारतीय संविधान ने हमें दिया है, इसे अपने समाज-राज्य और देश-हित में उपयोग कर पा रहे हैं या नहीं. चाहे जल-जंगल-जमीन पर परंपरागत अधिकार हो, पांचवीं अनुसूची में वर्णित प्रावधान हो, ग्रामसभा का अधिकार हो, सीएनटी, एसपीटी एक्ट के प्रावधान हों, वन अधिकार कानून हो या फिर स्थानीय नीति के प्रावधान हों, हम देखें कि धर्मांतरण बिल के प्रावधान व जमीन अधिग्रहण बिल 2017 के प्रावधानों ने हमारा कितना हित किया है?

    विश्व आदिवासी दिवस मनाने के लिए जब हम रंगमंच में विभिन्न लोकगीत, संगीत और नृत्य से लोगों के दिलों में अपनी पहचान और इतिहास को उभारने की कोशिश कर रहे हैं, तब इस गीत को भी नहीं भूलना चाहिए, जो अंग्रेजों के खिलाफ 9 जनवरी, 1900 को डोम्बारी पहाड़ पर बिरसा मुंडा के लोगों के संघर्ष को मुंडा लोकगीत में याद करते हैं- ‘डोम्बारी बुरू चेतन रे ओकोय दुमंग रूतना को सुसुन तना, डोम्बारी बुरू लतर रे कोकोय बिंगुल सड़ीतना को संगिलकदा/ डोम्बरी बुरू चतेतन रे बिरसा मुंडा दुमंग रूतना को सुसुन तना, डोम्बरी बुरू लतर रे सयोब बिंगुल सड़ीतना को संगिलाकदा.’ (डोम्बारी पहाड़ पर कौन मंदर बजा रहा है, लोग नाच रहे है, डोम्बारी पहाड़ के नीचे कौन बिगुल फूंक रहा है जो नाच रहे हैं, डोम्बारी पहाड़ पर बिरसा मुंडा मांदर बजा रहा है- लोग नाच रहे हैं. डोम्बारी पहाड़ के नीचे अंग्रेज कप्तान बिगुल फूंक रहा है- लोग पहाड़ की चोटी की ओर ताक रहे हैं).  समाज के अंदर हो रही घटनाओं पर हमें चिंतन करने की जरूरत है. चाहे अंधविश्वास के कारण हो रही हत्याएं, या उग्रवादी-माओवादी हिंसा के नाम हर साल सैकड़ों लोगों की हत्याएं, अपहरण, बलात्कार, मानव तस्करी जैसे अमानवीय घटनाएं हों. इनसे आदिवासी-मूलवासी समाज को ही नुकसान हो रहा है. परिणामस्वरूप समाज की समरसता, एकता विखंडित होने से जल-जंगल-जमीन लूटनेवालों की शक्ति बढ़ती जा रही है.

    आदिवासी-मूलवासी किसान, दलित-मेहनतकश समाज की सामाजिक, आर्थिक, संस्कृतिक और राजनीतिक संगठित शक्ति कमजोर होती जा रही है. आज जनविरोधी नीतियों की आलोचना करने पर देशद्रोह के मुकदमे का सामना करना होगा. पथलगड़ी के नाम पर सैकड़ों मुंडा आदिवासियों पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया है. हजारों बेकसूर आदिवासी युवक जेल में हैं. जल-जंगल-जमीन की लूट तेजी से बढ़ रही है, जिससे हमारी पहचान- सरना व  ससनदीरी पर भी हमला बढ़ रहा है. आज विश्व आदिवासी दिवस के इस अवसर पर झारखंड राज्य में शहादत देनेवाले हुलउलगुलान के क्रांति नायकों-सिदो-कान्हू, फूलो-झानो, सिंदराय-बिंदराय, तेलेंगा खड़िया, तिलका मांझी, गया मुंडा, डोंका मुंडा, वीर बुधु भगत, जतरा टाना भगत जैसे नायकों के संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए संकल्प लेने की जरूरत है.  तभी आज के वैश्विक पूंजीवादी व्यवस्था से उत्पन्न चुनौतियों का सामना आदिवासी-मूलवासी, दलित, किसान समाज कर पायेगा. झारखंड में जल संकट गहराता जा रहा है, प्रदूषण पर्यावरण को निगलता जा रहा है. आज सिर्फ दो ही रास्ते हैं- या तो चुनौतियों से समझौता कर लें, या घायल शेर की तरह अपने को बचायें. यही रास्ता आदिवासी-शहीदों का इतिहास है. जब तक जल-जंगल-जमीन, नदी-पहाड़, झील-झरना बचा रहेगा, तब तक आदिवासी समाज की भाषा-संस्कृति, सरना-ससनदीरी, अस्तित्व और पहचान बची रहेगी. आदिवासियों के लिए शिक्षा जरूरी बीनालक्ष्मी नेपराम सहसंस्थापक, डोरस्टेप स्कूल, मुंबई   भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से देखा जाये, तो पूर्वोत्तर के राज्यों में विकास अभी अपने मानक तक नहीं पहुंचा है. पूर्वाेत्तर में सबसे ज्यादा जरूरत इस वक्त शिक्षा को लेकर काम करने की है. आदिवासियाें में शिक्षा का बहुत अभाव है और शैक्षणिक संस्थाओं की कमी है.  जब तक आदिवासी समुदायों में शिक्षा नहीं बढ़ेगी, पूर्वोत्तर में शिक्षण संस्थाओं का विकास नहीं होगा, तब तक उनका विकास संभव नहीं है. वे लड़के-लड़कियां जिनके पास थोड़े पैसे हैं, वे दिल्ली, मुंबई या बाकी शहरों में जाकर उच्च शिक्षा हासिल तो कर लेते हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय की ज्यादातर आबादी उच्च शिक्षा से वंचित है. शिक्षा की कमी की वजह से ही पूर्वोत्तर अपने संसाधनों के दोहन को पूंजीपतियों के हाथ से बचा नहीं पाता है. हालांकि, कानून से संसाधनों की लूट रोकी जा सकती है, लेकिन उनका पालन नहीं हो पाता.  शक्तियां मुट्ठी भर लोगों के हाथ में है और अभाव से पूरा पूर्वोत्तर ग्रस्त है. इसलिए जरूरी है कि वहां शिक्षा का प्रसार हो और शैक्षणिक संस्थाओं का विस्तार हो, ताकि लोग अपने कानूनी अधिकार को समझ सकें. आदिवासी समुदायों के साथ शोषण भी बहुत होता है, क्योंकि वे गरीब और मजदूर वर्ग के लोग हैं.

    आदिवासी समुदाय के पास शक्तियों का अभाव है, इसलिए ताकतवर लोग उनका शोषण करते हैं.  यह एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसे शिक्षा के जरिये ही दूर किया जा सकता है. वहां कानून ऐसे बनाने चाहिए, ताकि आदिवासी समुदायों के हाथ में भी शक्तियां हों और वे अपने अधिकार को समझ सकें, हासिल कर सकें. आदिवासी समुदायों को ताकत मिलेगी, तो वे खुद अपने समुदायों के बीच काम करेंगे और मुझे उम्मीद है कि वे बेहतर काम करेंगे.

  • चुनावी वादे पूरे नहीं किए तो औरतों की लिबास में घुमाया

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    नई दिल्ली : अपनी तरह का यह अनोखा और पहला मामला सामने आया है, जिसमें लोगों ने चुनावी वादे पूरे न करने वाले नेता को कभी ना भूलने वाला सबक सिखाया है। लोगों ने नेताजी को महिलाओं के कपड़े पहनाकर पूरे शहर में घुमाया। नेता की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। घटना मैक्सिको की है।

    एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें लोग हाथों में पोस्टर लिए चल रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वादे पूरे न कर पाने के कारण लोग मेयर को इस तरह घुमा रहे हैं। जो पोस्टर लेकर लोग चल रहे हैं, उस पर लिखा है- ‘ये अपने वादे पूरे नहीं कर पाए।’

    एक मेक्सिकन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार- मेयर जेवियर जिमेनेज ने चुनाव से पहले लोगों से वादा किया था कि वो शहर में पानी की व्यवस्था सुधारने के लिए तीन मिलियन पेसो यानी करीब एक करोड़ आठ लाख रुपए आवंटित करेंगे। किंतु ऐसा करने में वे नाकाम रहे।  लोग आरोप लगा रहे हैं कि मेयर ने पानी की व्यवस्था सुधारने के लिए दिए जाने वो पैसों में घोटाला किया है। रिपोर्ट के अनुसार- लोगों ने उन्हें चार दिन तक बंधक भी बनाकर रखा। साथ ही ये धमकी दी कि अगर अगली बार भी वे वादा पूरा नहीं कर पाए, तो उनका सिर मुंडवा दिया जाएगा

  • बंदरिया बाबा  जो पेड़ पर ही सोता है, वहीं खाता है खाना

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    बहराइच । उत्तर प्रदेश में पेड़ के ऊपर रहने वाले बंदरिया बाबा  को देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग उमड़ रहे हैं। 60 की उम्र पार कर चुके इस बाबा के पास सिमियन (नरवानर) जैसी क्षमताएं हैं। बहराइच के सुजौली में यह शख्स पेड़ पर ही खाता और सोता है। भगवा वस्त्र पहने एक साधु की वेशभूषा को धारण करने वाले इस शख्स को बंदरिया बाबा के नाम से जाना जाता है। इनका कहना है कि वह भगवान हनुमान का परम भक्त है और उन्हें कई खास गुण प्रदान किए गए हैं। बंदरिया बाबा ने कहा, मेरे ऊपर भगवान हनुमान का विशेष आशीर्वाद है।

    मुझे पेड़ पर चढऩे की क्षमता प्रदान की है। मैं पेड़ पर रहता हूं और पूजा व हवन करता हूं। मैं यही सोता भी हूं। मैं पेड़ के किसी एक शाख पर बैठकर ध्यान भी करता हूं। इस व्यक्ति को पीलीभीत जिले का मूल निवासी बताया जाता है और उसने हरिद्वार में कई साल बिताए हैं, लेकिन कोई उसका वास्तविक नाम नहीं जानता है। वह लगभग चार महीने पहले बहराइच पहुंचा, लेकिन पुलिस ने उसे यह कहकर भगा दिया कि वह कानून व्यवस्था के लिए बड़ी मुसीबत पैदा कर रहा है, लेकिन वह दोबारा वापस आ गया और अब उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो रहे हैं। बहराइच पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस ने इलाके में भारी तैनाती की है। जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा, उसे देखने के लिए हजारों की तादात में लोग आ रहे हैं। आपको नहीं पता कि कब, क्या हो जाए। हम चांस नहीे ले सकते।

    यह आदमी पेड़ की सबसे ऊंची चोटी पर रहता है, लेकिन मोबाइल पर बात करने से नहीं हिचकिचाता है। पुलिस ने कई बार उसे नीचे लाने की कोशिश की, लेकिन उसने पेड़ पर से कूंदने की धमकी दी।

  • मर्सिडीज बेंज जी 350डी हुई भारत में लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स

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    जर्मन लक्जरी कार मैनुफैक्चरर मर्सिडीज बेंज ने भात में जी 350डी लॉन्च कर दी है। इसकी पूरे देश में एक्स शोरूम कीमत 1.5 करोड़ रुपए है। जी-क्लास के मोर अफोर्डेबल वर्जन के रूप में इंट्रोड्यूस की गई है। जी 350डी को एक डीजल इंजन पावर देता है और एएमजी डिटेलिंग पर मिस आउट करती है। अंडर द हूड मर्सिडीज बेंज जी 350डी में एक ओएम 656 3.0 लीटर इन लाइन सिक्स सिलेंडर इंजन है, जो 248 बीएचपी पावर और 600 एनएम टॉर्क जनरेट करता है।

    इंजन एक नाइन स्पीड ऑटोमैटिक टॉर्क कनवर्टर से मैटेड है। यह माना जाता है कि एसयूवी 199 केएमपीएच की टॉप स्पीड देती है और यह 7.4 सैकंड में ही 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। न्यू एंट्री लेवल जी क्लास इन इंडिया में जी63 की तुलना में एक सिंपलर ग्रिल और सबटल व्हील आर्चेज हैं।

    इंटीरियर की बात करें तो इसमें आर्टिको लैदर उपहोलस्ट्री, क्विलटेड स्टिचिंग और ओपन पोर वुड है। एसयूवी में एक डुअल टोन बीच और ब्लैक फिनिश है, जो इंसट्र्स के लिए ट्रिम ऑश्न की वेराइटी ऑफर करती है।

    एडिशनली विकल में एक वाइडस्क्रीन कॉकपिट विद टू स्क्रीन्स रहेंगी। एक स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और एक इंस्ट्रुमेंट्स के लिए है। एसयूवी में एक ऑल व्हील ड्राइव सिस्टम विद लॉक्स फोर द फ्रंट और रियर एक्सल अलोंग विद सेंट्रल डिफरेंशियल है। अफोर्डेबल जी-क्लास में एएमएजी वेरिएंट की तुलना में कुछ फीचर्स नहीं हैं, लेकिन फिर भी स्टीयर ऑफ रोड इक्विपमेंट के साथ पोटेंट ऑफ रोडर होने से यह स्ट्रॉन्ग स्टैंड करती है।

  • दुनिया के शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ ब्रांडों में फेसबुक ने खो दिया अपना स्थान

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    सैन फ्रांसिस्को। फेसबुक ने वैश्विक ब्रांड कंसल्टेंसी इंटरब्रांड की सर्वश्रेष्ठ शीर्ष 100 ब्रांडों की वार्षिक रैंकिंग में दुनिया के 10 सबसे मूल्यवान ब्रांडों के बीच अपना स्थान खो दिया है। गोपनीयता घोटालों और साल-दर-साल की जांच से प्रभावित होने के चलते ऐसा हुआ है।

    फेसबुक गिरकर 14वें पायदान पर आ गई है। दो साल पहले तक सोशल नेटवर्किं ग की दिग्गज कंपनी इस सूची में 8वें स्थान पर थी, जिसे ‘तेजी से सरहाया’ जा रहा था।

    100 सर्वश्रेष्ठ ब्रांडों की सूची में पहला स्थान एप्पल का है, जिसके बाद गूगल और अमेजन शामिल हैं। माइक्रोसॉफ्ट चौथे, कोका कोला पांचवें और सैमसंग सूची में छठे स्थान पर रही।

    सातवें स्थान पर टोयोटा, मर्सिडीज आठवें, मैकडॉनल्ड्स नौवें और डिज्नी 10वें स्थान पर रही।

    फेसबुक को तोड़ने की वकालत करते हुए अमेरिकी सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनी सेल्सफोर्स के सीईओ मार्क बेनिओफ ने सोशल नेटवर्किं ग प्लेटफॉर्म को ‘नई सिगरेट’ बताया है, जो बच्चों को नशे का आदी बना रही है। बेनिओफ ने कहा कि अब कंपनी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    कमला हैरिस और एलिजाबेथ वारेन जैसे कई अमेरिकी सीनेटर्स ने भी फेसबुक को तोड़ने की वकालत की है।

    अमेरिका में लगभग 40 राज्य अटॉर्नी जनरल ने फेसबुक के खिलाफ जांच में शामिल होने का फैसला किया है।

  • वो अपने घर को खुद को बेच कर चलाती हैं

    वो अपने घर को खुद को बेच कर चलाती हैं

    अनिल अनूप

    भारत में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या ऐसे भी कम है। जिसमें कुछ जगहें तो ऐसी हैं जहाँ कि शादी के लिए भी लड़कियां नहीं मिलतीं। घर में एक लड़की आ गई तो उससे कई का विवाह कर दिया जाता है, लेकिन इसी देश में एक जगह ऐसी है जहाँ पर लड़कियों की संख्या ज्यादा ही नहीं बल्कि वो अपने घर को खुद को बेच कर चलाती हैं। यहाँ की लड़कियों का व्यापार कुछ और नहीं बल्कि देह व्यापार है। यहाँ की लड़कियां १० -१२ की होते ही देह व्यापर के ज़रिये अपने घर का खर्च चलाती हैं।

    सबसे बड़ी बात ये है कि इस धंधे में उनके माता-पिता खुद उन्हें भेजते हैं। घर की बड़ी लड़की की ये ज़िम्मेदारी होती है कि वो घर को आरेथिक रूप से मदद करें। ये कहानी है मध्य प्रदेश के कुछ गाँव की। एक दो नहीं बल्कि कई गाँव हैं जो इस व्यापार में लिप्त हैं। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का नाम सिर्फ अफीम की खेती के कारण ही नहीं लिया जाता बल्कि इससे कहीं ज्यादा नाम उसके इस काम से है। मंदसौर जिले के कई गाँव में बांछड़ा समाज के लोग फैले हुए हैं। उनका मुख्य पेशा अब देह व्यापार ही है।
    सिर्फ मंदसौर ही नहीं बल्कि नीमच, रतलाम जिले के लगभग ७५ गाँव में ये जाति रहती है। इनकी आबादी २३ हज़ार के आसपास है। इनमें से अधिक महिलाएं इसमें शामिल हैं। इस जाति में महिलाओं की बड़ी इज्ज़त होती है। ख़ास बात ये है कि जब भी किसी के घर लड़की होती है तो उनके घर ढोल बाजे और आने होते हैं।
    इस समाज की बड़ी लड़की को देह व्यापार में बड़े शौक से भेजा जाता है। इस लड़की को कमाई के लिए उत्साहित किया जाता है। वो जो भी कमाती है उससे घर का खर्च चलता है। परिवार के अन्य सदस्य बड़ी उत्सुकता से लड़की के बड़े होएं का सपना देखते हैं। लड़कियां भी बचपन से यही सपना देखती हैं कि बड़ी होकर उन्हें अपनी बड़ी बहन की ही तरह देह व्यापर में जाना होगा। उसनके दिमाग में पढ़ाई, शादी जैसे कोई सपना नहीं हटा। वो तो बस, यही सोचती रहती हैं की वो ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की कोशिश करेंगी।
    ये भारत की विडंबना ही है कि जहाँ डिजिटल होने की बता की जा रही है वहीँ कुछ ऐसे गाँव हैं जहाँ लड़कियों की दशा ऐसी है। भला इन लड़कियों को प्रधानमंत्री से क्या उम्मीद होगी। वो तो ये भी नहीं जानती होंगी कि इस तरह का कोई आदमी भी है जो देश को चलाता है।

  • कुत्ते ने मासूम बच्ची को पानी में डूबने से बचाया, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा Video

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    पानी में चली गई थी बच्ची की बॉल

    दरअसल वीडियो में देखा जा सकता है कि नदी किनारे खेल रही एक छोटी बच्ची की बॉल खेलते-खेलते नदी में चली जाती है और बच्ची बॉल को निकालने के लिए नदी में जाने लगी लगती है। तभी पास में बैठा हुआ कुत्ता सतर्क हो जाता है और बच्ची की फ्रॉक को खींच लेता है और बच्ची नीचे जमीन पर गिर जाती है। उसके बाद कुत्ता खुद पानी में जाकर बच्ची की बॉल निकालकर लाता है।

    आईएफएस सुशांत नंदा ने शेयर किया वीडियो

    इस वीडियो पर आईएफएस अधिकारी सुशांत नंदा ने ट्विटर पर शेयर किया है और वीडियो को अभी तक 20 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। इसके अलावा 600 लोग इस वीडियो को अभी तक री-ट्वीट कर चुके हैं और 3200 लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है। वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

    आईएफएस सुशांत नंदा अक्सर अपने ट्विटर हैंडल पर ऐसे अद्भुत वीडियो शेयर करते रहते हैं । हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह वीडियो कहां का है और कब का है। लेकिन वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कुत्ते की समझदारी और सतर्कता की काफी तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि कुत्ता अगर समझदारी नहीं दिखाता तो बच्ची के साथ अनहोनी हो सकती है। साथ ही कुछ यूजर्स ने लिखा कि जानवर भी प्यार की भाषा को अच्छी तरह से समझते हैं।

  • महिलाओं का मजाक उड़ाना इतना आसान, आखिर क्यों?

    आजकल के ट्विटर ट्रेंड्स में ‘फैमिली मैन 2’ सीरीज का बहुत बोलबाला है और अगर आपने इस सीरीज को देखा है तो यकीनन पहली तस्वीर देखकर आप समझ ही गए होंगे कि मैं किस बारे में बात कर रही हूं। ये सीरीज एक आदमी श्रीकांत की कहानी पर आधारित है जो नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेज में एक जासूस होता है, देश की रक्षा करता है और साथ ही साथ अपने परिवार के लिए समय भी निकालता है। ‘फैमिली मैन’ सीरीज को श्रीकांत के हिसाब से बनाया गया है और उसमें परिवार की महिलाओं के झगड़े पर फोकस किया गया है। पर क्या ये सही है?

    श्रीकांत की बेटी और पत्नी दोनों को ही लेकर बहुत सारे मीम्स बन रहे हैं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। शो में सुची यानि श्रीकांत की पत्नी और सुची का दोस्त करीब आ जाते हैं क्योंकि सुची की शादी में कभी श्रीकांत था ही नहीं। इसके बाद सुची गिल्ट में अपना करियर छोड़कर घर पर ध्यान देने लगती है। अब इसे लेकर भी मीम्स बने हैं और न जाने कितने लोगों ने इसे गलत माना है। पर एक सवाल जो हम सबको पूछना चाहिए वो ये कि ‘क्या कोई पुरुष अगर ऐसी ही स्थिति में होता तो लोगों का रिएक्शन ऐसा ही होता?’।

    यहां बात सिर्फ एक फैमिली मैन सीरीज की नहीं है बल्कि एक आम धारणा की है। धारणा ये कि जिस भी चीज़ के लिए पुरुषों को असहजता महसूस होती है उस चीज़ के लिए महिलाओं का मज़ाक बना दिया जाता है। सीरियल में इस बात पर फोकस कम है कि 16 साल तक सुची अकेले घर संभालती रही, वो अपनी डिलिवरी के समय भी अकेले अस्पताल गई, उसने अपने करियर के बारे में कम और परिवार के बारे में ज्यादा सोचा, बल्कि इस बात पर फोकस ज्यादा है कि श्रीकांत के साथ वो कैसा व्यवहार करती है और अपनी गलती क्यों नहीं मानती।

    टीनएज लड़कियों पर भी बनते हैं मीम्स-

    शो में श्रीकांत की बेटी घृति टीनएज है और उसे हर उस बात को करते दिखाया जा रहा है जो टीनएज बच्चों में नॉर्मल है। ये सब शायद हमने खुद भी झेला है, लेकिन घृति को इसके लिए विलेन बना दिया गया। क्या एक बेटी जिसने 16 साल से अपने पिता को मां से लड़ते देखा है, पिता को घर से दूर देखा है उसके लिए विद्रोह करना नॉर्मल नहीं है?

    यहां ये समझने की जरूरत है कि टीनएजर्स वैसे भी बहुत नाजुक होते हैं और ऐसे में अगर वो इस तरह की स्थिति को देखेंगे जहां माता-पिता हर वक्त लड़ते रहें और बात तलाक तक आ पहुंचे तो उनके मन में क्या फीलिंग आएगी? फिर भी उन्हें लेकर मीम्स बनते हैं।

    यहां अफेयर को या टीनएजर्स के गलत व्यवहार को जस्टिफाई नहीं किया जा रहा है बस सवाल किया जा रहा है कि क्या ये सही नहीं था जो रिएक्शन उन लोगों ने दिया। पत्नी की मेंटल स्टेट को न समझते हुए पति पत्नी से सिर्फ इसलिए झगड़ा करे कि पत्नी उसे समझ नहीं रही है और उसके काम को महत्व नहीं दे रही तो ये भेदभाव है और इसपर जोक बनाना तो और भी गलत है।

    कितना आसान हो सकता है एक पुरुष के लिए ऐसी स्थिति में फंसना और फिर भी उसे स्टड कहा जा सकता है, उसे जस्टिफाई किया जा सकता है कि इतनी परेशानियों के बाद उसने अपनी खुशी बाहर ढूंढ ली तो महिलाओं को जोक का मटेरियल क्यों बनाया जाता है।

    महिलाओं का मज़ाक उड़ाना इतना आसान क्यों?

    यहां सिर्फ एक सीरियल या वेबसीरीज की बात नहीं है। अगर आप गौर करें तो महिलाओं पर जोक करना लोगों के लिए बहुत आसान होता है। एक तरह से उन्हें टाइपकास्ट कर दिया गया है कि वो अपनी बात एक निश्चित तरीके से रखती हैं और साथ ही साथ उन्हें उनकी बात रखने पर भी जोक के तौर पर देखा जाता है। किसी पुरुष का बाहर फ्लर्ट करना सही है और महिला का उसी गलती पर उसे टोक देना भी गलत।

    आखिर क्यों इतना आसान हो जाता है पुरुषों के लिए महिलाओं को लेकर ऐसे मज़ाक करना। महिलाओं को ये समझना कि वो अगर अपना मन भी बदलती हैं तो वो भी गलत होता है। ये कहां तक सही है कि महिलाओं को सिर्फ हंसी का पात्र बना दिया जाता है। आजकल मीम्स बहुत आसानी से वायरल हो जाते हैं, लेकिन अगर टीवी सीरियल की बात करें तो मीम्स की शक्ल भी पुरुषों और महिलाओं को लेकर बदल जाती है।

    पुरुष बॉस को मारे तो सही और महिला अगर बॉस की बुराई भी करे तो उसे चुगली का नाम दे दिया जाता है। ये स्टड बनाम सबला की लड़ाई में आखिर महिलाओं पर जोक करना कितना सही है? अगर ये आप खुद से पूछेंगे तो पाएंगे कि ये सिर्फ और सिर्फ पुरुषों के ईगो को शांत करने का एक तरीका मात्र है।

    एक बात सोचने वाली है कि आखिर हर बार इस तरह का जोक महिलाओं पर बनाना क्या सिर्फ एक ट्रेंड है या फिर कुछ और।

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  • Free Fire Kalahari Map : टॉप 5 landing spots, जो बढ़ा देंगे मैच जीतने का चांस

    Free Fire इस वक्त इंडिया में सबसे पॉप्युलर बैटल रोयाल गेम्स में से एक है। इस फास्ट पेस्ड गेम में एक छोटे से आइलैंड पर 50 प्लेयर्स उतरते हैं और आखिर तक सर्वाइव करने वाला विजेता बनता है। फ्री फायर में मैच जीतने के लिए स्किल के साथ-साथ landing spots भी काफी अहमियत रखते हैं। सही लोकेशन का चुनाव गेम को इधर से उधर कर सकता है।

    आपकी लोकेशन पर जितनी अच्छी लूट होगी, सक्सेस का चांस उतना ही अच्छा होगा। इसके अलावा आपको लोकेशन का चुनाव अपने गेम-प्ले स्टाइल के हिसाब से करना चाहिए। Free Fire में तीन मैप हैं— Bermuda, Purgotary और Kalahari। हम बरमूडा मैप में आपको रैंक पुश और अग्रेसिव गेम-प्ले वाले एरिया बता चुके हैं। इस बार हम आपको Free Fire के Kalahari मैप में 5 बढ़िया landing spots के बारे में बता रहे हैं।

    Free Fire best landing spots in Kalahari

    Refinery

    यहां पर ड्रॉप बहुत बढ़िया होती है मगर आपको एनेमी का बहुत ध्यान रखना होता है। यह स्पॉट Kalahari मैप के बीच में पड़ता है इसलिए यह एक अग्रेसिव एरिया है, मतलब कि यहां पर बहुत सारे प्लेयर उतरते हैं और उतरते ही लड़ाई शुरू हो जाती है।

    Bayfront

    यह स्पॉट Refinery के पड़ोस में पड़ता है। यह काफी दूर तक फैला हुआ है और यहां पर लूट भी अच्छी मिलती है। स्क्वॉड के साथ उतरने के लिए यह एरिया बढ़िया है और Refinery के मुकाबले यह थोड़ा सेफ भी है।

    Confinement

    यह स्पॉट सेफ गेम-प्ले के लिए अच्छा है। यह बिलकुल किनारे की तरफ पड़ता है जहां बहुत कम लोग उतरते हैं मगर यहां पर लूट बहुत अच्छी मिलती है। बस आपको प्लेयिंग जोन का ध्यान रखना पड़ेगा।

    Stone Ridge

    यह स्पॉट भी Confinement की तरह सेफ एरिया है। यह Command Post के पास में पड़ता है। इसकी लूट इतनी अच्छी तो नहीं है मगर आपके काम की चीजें जरूर मिल जाएंगी।

    The Maze

    यह स्पॉट अग्रेसिव और सेफ प्ले के बीच में पड़ता है। यहां पर लूट बहुत अच्छी होती है मगर यह आपकी किस्मत पर निर्भर करेगा कि यहां पर कम लोग उतरते हैं या ज्यादा लोग।

  • अनोखा मामला : एक बकरा जिसकी एक तरफ ओम तो दूसरी तरफ मोहम्मद लिखा हुआ

    यूपी के अमरोहा से एक अनोखा मामला सामने आया है. एक बकरा  जिसकी एक तरफ ओम तो दूसरी तरफ मोहम्मद लिखा हुआ  है.  जैसे ही इस बात की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई वैसे ही आसपास के जिलों के साथ दिल्‍ली के लोग बकरे की खरीददारी के लिए गांव पहुंचने लगे.

    लेकिन, एक तरफ ओम, तो दूसरी तरफ मोहम्मद लिखे होने की वजह से बकरा खास बन गया है और अब तक इसकी 11 लाख रुपये कीमत लग चुकी है. पर बकरे का मालिक  इसे बेचने को तैयार नहीं है. वैसे बकरीद का त्योहार नजदीक है, इसलिए इन दिनों बकरों की  खरीदारी जोरो से चल रही . जिसके कारण बकरे की कीमत अभी और बढ़नी तय है.

    बकरे के मालिक  ने ज्यादा  कीमत के लिए सोशल मीडिया पर अपना मोबाइल नंबर भी दिया है, ताकि उसके यहां पहुंचने में किसी को कोई परेशानी  न हो. यही नहीं, बकरे पर एक तरफ ओम और दूसरी तरफ मोहम्‍मद लिखे होने की कारण से उसके मालिक को उम्‍मीद है कि उसे अब वह 11 लाख रुपये से कम कीमत पर तो बिलकुल नहीं बेचेगा.

    बता दें कि इससे पहले यूपी के फिरोजाबाद के थाना फरिहा के गांव रखाबली के सुरेंद्र सिंह के एक बकरे के ऊपर शरीर पर अल्लाह लिखा होने की जानकारी लोगों को हुई तो वो न सिर्फ बकरे को देखने के लिए दूर-दूर से आने लगे बल्कि बकरे की कीमत धीरे-धीरे बढ़कर 5 लाख रुपये तक जा पहुंची है. यही नहीं, सुरेंद्र सिंह का परिवार अब बकरे की कीमत से अपनी किस्मत बदलने की उम्मीद कर रहा है. अब वह अपने बकरे को 10 लाख की कीमत पर बेचने की बात कर रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि कहा क‍ि इस पर अल्‍लाह ल‍िखा है और यह कुर्बानी का बच्‍चा है. इसल‍िए बकरे की कीमत 10 लाख रुपये रखी गई है और अभी तक 5 लाख रुपये तक कीमत लगाई जा चुकी है.