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  • Devshayani Ekadashi 2023: आज है देवशयनी एकादशी, जानें कब तक के लिए बंद हैं मांगलिक काम

    Devshayani Ekadashi 2023:  हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। लेकिन आज यानी 29 जून को देवशयनी एकादशी पड़ रही है। यह इसबार बेहद खास है क्योंकि आज गुरुवार का दिन है और यह दोनों ही भगवान विष्णु को अतिप्रिय हैं। 

    देवशयनी एकादशी के दिन से देवताओं का शयनकाल शुरू हो जाता है। जो भी व्यक्ति देवशयनी एकादशी का व्रत करता है उसके सभी कष्ट मिट जाते हैं और उसके द्वारा अनजाने में किये गए पाप नष्ट होते हैं। आज से हिन्दू धर्म में होने वाले सभी शुभ काम बंद हो जाएंगे। 

    देवशयनी एकादशी का विशेष मंत्र :

    सुप्ते त्वति जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम
    विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम

    विष्णु जी से क्षमा याचना के लिए मंत्र –

    भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:।
    कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।

    जानें कब से कब तक बंद रहेंगे शुभ काम:

    29 जून से 23 नवंबर 2023 तक शादियां, मुंडन और दूसरे सभी मांगलिक काम बंद रहेंगे क्योंकि आज से सभी देवी -देवता निद्रा पर जा रहे हैं।

  • Chanakya Niti: जीवन में जरूर करने चाहिए यह तीन काम

    आध्यात्मिक: व्यक्ति अपने जीवन को सफल और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहता है। कई बार अथक परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती है तो कई बार सफलता स्वयं चलकर उसके पास चली आती है। यदि हम आध्यात्म के मुताबिक सोचें- तो व्यक्ति को इस संसार में जो भी प्राप्त होता है वह सब उसके कर्म के आधार पर मिलता है। लेकिन आचार्य चाणक्य का कहना था कि व्यक्ति को सुखी रहने के लिए बहुत अधिक संघर्ष करने की जरूरत नहीं है क्योंकि सुख आपके जीवन जीने के तरीके में निहित है। उनके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी जीवन जीने के तरीके को नियमों से बांध लेता है तो वह सुखी हो जाता है। वहीं व्यक्ति को अपनी  आदतों में यह कुछ विशेष चीजें जरूर रखनी चाहिए। 

    गुस्सा :

    आचार्य चाणक्य का कहना है व्यक्ति का गुस्सा उसका सबसे बड़ा शत्रु है यदि कोई व्यक्ति अपने गुस्से पर काबू पा लेता है तो वह सुखी हो जाता है। क्योंकि गुस्सा आपकी भाषा, आपके व्यवहार और जीवन शैली को प्रभावित करता है व आप नकारात्मक विचारों से घिर जाते हैं। 

    धन का सदुपयोग:

    आचार्य चाणक्य का कहना है कि धन जीवन के लिए आवश्यक है, बिना धन के सुख की कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन अगर कोई व्यक्ति धन कमाता है और उसका सदुपयोग नहीं करता है तो उसे जीवन में दुखों का सामना करना पड़ता है। इस संसार में यदि किसी को सुखी रहना है तो उसे धन को बचाना चाहिए। 

    धार्मिक जीवन:

    आचार्य चाणक्य का कहना है कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो उसे अपने धर्म से विमुख नहीं होना चाहिए। जो व्यक्ति अपने व्यस्त जीवन से धर्म हेतु समय निकलता है, पूजा-पाठ करता है। अपने इष्ट का ध्यान करता है लोगों के प्रति करुणा का भाव रखता है वह जीवन में सदैव सुखी रहता है।

  • जानें कब है गुरु पूर्णिमा

    देश: आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 3 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु के पूजन का विशेष महत्व है। कहते हैं यदि आप गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरुजन से मिलते हैं उनका आशीर्वाद लेते हैं तो आपको ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    यदि गुरु पूर्णिमा के दिन आप अपने गुरुजन के साथ नहीं हैं तो आपको उनकी छवि या उनके द्वारा दी गई किसी वस्तु को स्पर्श करते हुए उनकी पूजा अवश्य करनी चाहिए। वहीं यदि गुरु पूर्णिमा के दिन आप अपने गुरु को कोई भेंट देते हैं और इन पांच मंत्रो का जाप करें तो आपका सौभाग्य चमकता है और आपके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। 

    ॐ गुरुभ्यों नम:।
     ॐ गुं गुरुभ्यो नम:।
    ॐ परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:।
    ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।
    गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:।
    गुरुर्साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।

  • savan start date 2023: इस सावन जरूर करें यह काम

    आध्यात्मिक: भगवान शिव का प्रिय महीना सावन कल से प्रारम्भ हो रहा है। सावन के महीने में शिव भक्त कावड़ यात्रा पर जाते हैं, कई लोग अपने घरों में शिव की पूजा करते हैं तो कई लोग सावन के सोमवार का व्रत करते हैं। वहीं आज हम आपको कुछ ऐसी विशेष बातें बताने जा रहे हैं जिनको अगर आप सावन के महीने में करते हैं तो आपका जीवन न सिर्फ खुशहाल होता है अपितु आपके घर में सुख-समृद्धि आती है और आपको भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

    जानें सावन में क्या करना होता है विशेष फलदायी:

    यदि आप सावन के महीने में नित्य भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं तो आपको एक बात का विशेष ध्यान देना चाहिए। भगवान शिव भाव के भूखें हैं उनको भौतिक चीजों से खुश करने की जगह आपको भक्ति भाव से प्रसन्न करना चाहिए। रोजाना शिव का जलाभिषेक करने ओम नमः शिवाय का जाप करना चाहिए। 

    सावन में जो लोग सोमवार का व्रत करते हैं उनको हरे कपड़े पहनकर शिव के पूजा स्थल को अच्छे से सजाना चाहिए और मन लगाकर शिव चालीसा के पाठ के साथ शिव की पूजा-अराधना करनी चाहिए। यदि आप प्रत्येक सोमवार को यह करते हैं तो आपकी मनोकामना पूर्ण होती है व आपको शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

    अगर आपके जीवन में क्लेश है और आप चाहते हैं कि आपके जीवन से सभी दुःख मिट जाएं तो आपको सावन में शिव को शहद अर्पित करना चाहिए। इससे शिव आपसे प्रसन्न होते हैं आपका कष्ट हर लेते हैं। 

    अगर आपका कोई काम वर्षों से रुका हुआ है तो आपको इस सावन में पूरे माह भगवान शिव को सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा सदैव आप-पर बनी रहती है और आपके वर्षों से रुके काम पूर्ण हो जाते हैं। 

  • अपने गुरु को दें यह तीन भेंट मजबूत होगा आपका रिश्ता

    जीवन शैली: गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 3 जुलाई को मनाया जाएगा। यह दिन गुरुजनों को समर्पित है गुरु पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति अपने गुरुजनों के साथ  वक्त बिताता है, उसको सम्मान देता है उनके प्रति स्वयं को समर्पित करता है उसका जीवन सुखमय हो जाता है। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी वस्तु के विषय में जो आपको अपने गुरु को भेंट करनी चाहिए। कहते हैं यदि आप यह चीजें अपने गुरु को भेंट करते हैं तो आपका उनसे रिश्ता मजबूत होता है। 

    सेवा:

    गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरु-जनों को महंगे-महंगे गिफ्ट भेंट में देते हैं। लेकिन यदि आप अपने गुरु से सच में प्रेम करते हैं और उनके प्रति स्वयं को समर्पित करना चाहते हैं तो आपको अपने गुरुजन को सेवा और सम्मान भेंट करना चाहिए। उनके सामने यह संकल्प लेना चाहिए की आप हर कठिन समय में आपने गुरु के प्रति सच्ची निष्ठां के साथ समर्पित रहेंगे और उनकी सेवा में आप कभी स्वयं का स्वार्थ नहीं देखते। 

    सत्य:

    गुरु पूर्णिमा के दिन आपको अपने गुरु को अपना सत्य भेंट करना चाहिए। उनके सम्मुख यह संकल्प लेना चाहिए कि आप उनसे कभी झूठ नहीं बोलेंगे और विकट परिस्थिति में भी आप उनके साथ सत्य के साथ खड़े होंगे। आप अपने समर्पण को सत्य से पिरोहेंगे और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। 

    समर्पण: 

    गुरु पूर्णिमा के दिन आपको अपने गुरु को यह वचन भेंट देना चाहिए कि आप सदैव उनके प्रति समर्पित रहेंगे आपके सुख से पूर्व आप अपने गुरुजन का सुख देखेंगे। आप कितनी भी कठिन स्थिति में क्यों न हों आप अपने गुरु की खुशी के लिए स्वयं का दुःख भूल जाएंगे और उनके प्रति सदैव समर्पित होंगे।

  • सावन में शिव स्तुति का जरूर करें पाठ

    शिव स्तुति मंत्र 
     
    पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
    जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।1।
     
    महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
    विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।2।
     
    गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
    भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।3।
     
    शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्।
    त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप: प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप।4।
     
    परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
    यतो जायते पाल्यते येन विश्वं तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्।5।
     
    न भूमिर्नं चापो न वह्निर्न वायुर्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा।
    न गृष्मो न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीड।6।
     
    अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम्।
    तुरीयं तम:पारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम।7।
     
    नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते।
    नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्।8।
     
    प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ महादेव शंभो महेश त्रिनेत्।
    शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्य:।9।
     
    शंभो महेश करुणामय शूलपाणे गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्।
    काशीपते करुणया जगदेतदेक-स्त्वंहंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि।10।
     
    त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ।
    त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन।11।

     

  • सम्पूर्ण शिव चालीसा

    शिव चालीसा पाठ  

    ।।दोहा।।

    श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।

    कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

    जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

    भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

    अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥

    वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

    मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

    कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

    नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

    कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

    देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

    किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

    तुरत षडानन आप पठायउ। लव निमेष महँ मारि गिरायउ॥

    आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

    त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

    किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥

    दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

    वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

    प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥

    कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

    पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

    सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

    एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥

    कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

    जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥

    दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

    त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

    लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

    मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

    स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

    धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥

    अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

    शंकर हो संकट के नाशन। विघ्न विनाशन मंगल कारण ॥

    योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

    नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

    जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥

    ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥

    पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

    पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

    त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

    धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

    जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तधाम शिवपुर में पावे॥

    कहत अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

    ॥दोहा॥
     

    नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीस।

    तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

    मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।

    अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥ 

  • Sawan Festivals: आज से शुरू सावन, जानें व्रत की लिस्ट

    Sawan Festivals: आज से देवों के देव महादेव का पावन महीना सवान शुरू हो गया है। सावन का महीना हिन्दुओं के लिए काफी खास महीना होता है, इस माह में लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं, सोमवार को व्रत रखते हैं और कई लोग अपने घरों में रद्राभिषेक करवाते हैं। वैसे तो हर वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ते थे लेकिन इस साल अधिकमास है और दो महीने का सावन पड़ रहा है जिसके चलते  8 सोमवार पड़ेंगे। 

    अधिकमास के चलते इस बार सावन 58 दिनों का होगा।  यह 4 जुलाई, 2023 से 31 अगस्त, 2023 तक रहेगा। सावन के महीने में शिव भक्त बड़ी आस्था के साथ शिव को जलाभिषेक करेंगे, मंदिरों में जाकर शिव का ध्यान करेंगे और कावड़ यात्रा पर जाएंगे। सावन का महीना हिन्दू धर्म में एक बड़े पर्व की तरह मनाया जाता है। 

    जानें सावन में पड़ने वाले व्रत की लिस्ट – 

     6 जुलाई –    संकष्टी चतुर्थी
    13 जुलाई – कामिका एकादशी
    14 जुलाई – प्रदोष व्रत 
    15 जुलाई – मासिक शिवरात्रि
    16 जुलाई – कर्क संक्रांति
    17 जुलाई – श्रावण अमावस्या
    29 जुलाई – पद्मिनी एकादशी
    30 जुलाई – प्रदोष व्रत 
    1 अगस्त – पूर्णिमा व्रत 
    4 अगस्त – संकष्टी चतुर्थी
    12 अगस्त – परम एकादशी
    13 अगस्त – प्रदोष व्रत
    14 अगस्त – मासिक शिवरात्रि
    16 अगस्त – अमावस्या
    17 अगस्त – सिंह संक्रांति
    19 अगस्त – हरियाली तीज
    21 अगस्त – नाग पंचमी
    27 अगस्त – श्रावण पुत्रदा एकादशी
    28 अगस्त – प्रदोष व्रत
    29 अगस्त, मंगलवार    ओणम/थिरुवोणम
    30 अगस्त – रक्षा बंधन
    31 अगस्त – श्रावण पूर्णिमा

  • NAG PANCHAMI 2023: जानें कब है नागपंचमी, कैसे करें नागों की पूजा

    आध्यात्मिक: सावल का पावन महीना शुरू हो गया है। इस माह में लोग बड़े श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा याचना करते हैं। वही आध्यात्म के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति सावन माह में पड़ने वाली नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करता है तो शिव का उसे आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। धर्म ग्रंथो के मुताबिक नाग शिव का आभूषण है शिव नाग को अपने गले में लपेटे रहते हैं जो भी व्यक्ति नागों का अपमान करता है उन्हें शिव का क्रोध झेलना पड़ता है। लोग नागपंचमी पर अपने-अपने भाव के मुताबिक नागों की पूजा करते हैं कोई नागों को दूध पिलाता है तो कोई नाग देवता के मंदिर जाकर ध्यान करता है। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस साल नाग पंचमी किस दिन पड़ेगी। 

    जानें कब है नाग पंचमी –

    सावन का महीना शुरू हो गया। अधिकमास होने के कारण इस वर्ष सावन दो माह यानी 58 दिन का है। शुक्ल पंचमी तिथि 21 अगस्त 2023 को है और नाग पंचमी भी सोमवार के दिन 21 अगस्त 2023 को मनाई जाएगी। मान्यता है कि यदि कोई नाग पंचमी के दिन नागों को दूध अर्पित करता है या शिव का ध्यान कर उनका जलाभिषेक करता है तो उस व्यक्ति के पाप मिट जाते हैं। 

    पूजा विधि:

    अगर आप हिन्दू धर्म को मानते हैं तो आपको पता होगा कि हिन्दू देवी-देवता व्यक्ति का भाव देखकर उससे प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन फिर भी पूजा -पाठ करने की कुछ विशेष विधि हैं जो इस प्रकार हैं। अगर आप नाग पंचमी पर पूजा करना चाहते हैं तो आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए, स्नान के बाद आपको अपनी पूजा की थाल हल्दी,सिंदूर,पुष्प, फल,मिठाई, आरती व दूध से सजानी चाहिए। सम्पूर्ण समाग्री लेकर आपको शिव मंदिर जाना चाहिए और नागदेवता को अपनी पूजा विधि-विधान से समर्पित कर देनी चाहिए। 

  • सावन की बारिश के हैं बड़ी चमत्कारी

    आध्यात्मिक- सावन का पवित्र महीना चल रहा है। शिव भक्त बाबा भोलेनाथ की भक्ति में मग्न हैं। कावड़ियों ने कावड़ यात्रा शुरू कर दी है। वही सावन में बरसात होना आम बात है। कई लोग सावन की बारिश से परेशान हैं लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि सावन की बारिश कितनी फायदेमंद साबित होगी। क्योंकि सावन की बारिश के कई चमत्कारी फायदे हैं।  तो आइये जानते हैं सावन की बारिश के चमत्कारी फायदे। 

    जानें सावन की बारिश के चमत्कारी फायदे –

    कारोबार में लाभ के लिए: ज्योतिष के अनुसार, अगर कारोबार में लगातार घाटा हो रहा है तो इसके लिए सावन में हुई बारिश के पानी को आप किसी पीतल के बर्तन में इकट्ठा कर लें. इसके बाद सावन में पड़ने वाली एकादशी के दिन इस पानी से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का अभिषेक करें. इस उपाय को करने से कारोबार में लाभ होने लगेगा और आप खूब तरक्की करेंगे.

    कर्ज मुक्ति के लिए: लबे समय से कर्ज से परेशान हैं या कर्ज का बोझ उतर नहीं रहा है तो बारिश के पानी को किसी बर्तन में भर लें. इस पानी में थोड़ा दूध मिलाकर भगवान का स्मरण करते हुए स्नान करें. इस उपाय को करने से कर्ज का बोझ धीरे-धीरे उतरने लगेगा.

    नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए: अगर आपको अपने घर में नकारात्मक ऊर्जाओं का आभास होता है तो इसके लिए बारिश के पानी को किसी बर्तन में इकट्ठा कर लें और भगवान के समक्ष रख दें. इसी पानी से आप पूरे सावन हर रोज अपने घर पर छिड़काव करें. इस उपाय को करने से नकारात्मक ऊजा दूर चली जाएगी और घर पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगेगा.

    रोग मुक्ति के लिए: अगर आप या परिवार का कोई सदस्य लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रस्त है तो इसके लिए सावन में हुई बारिश के पानी को किसी बर्तन में भर लें और इस पानी से भगवान शिव का अभिषेक करें. इस उपाय को करने से पुराने रोग भी ठीक होने लगते हैं.