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  • Ganga Dussehra 2023 Date:जानें क्या है गंगा चालीसा का महत्व

    आध्यात्मिक- आज यानी 31 मई के दिन गंगा सप्तमी है मान्यता है कि आज के दिन माता गंगा धरती पर अवतरित हुईं थी। आज के दिन जो भी माता गंगा की विधि-विधान से पूजा अर्चना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं आज हम आपको बताने जा रहे हैं गंगा चालीसा का महत्व –

    जानें क्या है गंगा चालीसा का महत्व-

    माता गंगा को हिन्दू धर्म में पाप नाशिनी देवी कहा जाता है मान्यता है कि गंगा स्नान करने से व्यक्ति को घोर कलयुग में मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से गंगा माता की आराधना करता है और गंगा चालीसा का पाठ करता है तो उस व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति रोजाना गंगा चालीसा का पाठ करता है उसके सभी कष्ट नष्ट होते हैं, व्यक्ति के घर में सुख समृद्धि आती है, व्यक्ति सकारात्मक मार्ग की ओर प्रशस्त होता है और उसे मृत्यु उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

    पढ़ें सम्पूर्ण गंगा चालीसा :

    ॥ दोहा ॥
    जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग।
    जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग॥

    गंगा चालीसा –

    जय जय जननी हराना अघखानी।आनंद करनी गंगा महारानी॥
    जय भगीरथी सुरसरि माता।कलिमल मूल डालिनी विख्याता॥
    जय जय जहानु सुता अघ हनानी।भीष्म की माता जगा जननी॥
    धवल कमल दल मम तनु सजे।लखी शत शरद चन्द्र छवि लजाई॥
    वहां मकर विमल शुची सोहें।अमिया कलश कर लखी मन मोहें॥
    जदिता रत्ना कंचन आभूषण।हिय मणि हर, हरानितम दूषण॥
    जग पावनी त्रय ताप नासवनी।तरल तरंग तुंग मन भावनी॥
    जो गणपति अति पूज्य प्रधान।इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना॥
    ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी।श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥
    साथी सहस्त्र सागर सुत तरयो।गंगा सागर तीरथ धरयो॥
    अगम तरंग उठ्यो मन भवन।लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन॥
    तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता।धरयो मातु पुनि काशी करवत॥
    धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी।तरनी अमिता पितु पड़ पिरही॥
    भागीरथी ताप कियो उपारा।दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥
    जब जग जननी चल्यो हहराई।शम्भु जाता महं रह्यो समाई॥
    वर्षा पर्यंत गंगा महारानी।रहीं शम्भू के जाता भुलानी॥
    पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो।तब इक बूंद जटा से पायो॥
    ताते मातु भें त्रय धारा।मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा॥
    गईं पाताल प्रभावती नामा।मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥
    मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी।कलिमल हरनी अगम जग पावनि॥
    धनि मइया तब महिमा भारी।धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥
    मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी।धनि सुर सरित सकल भयनासिनी॥
    पन करत निर्मल गंगा जल।पावत मन इच्छित अनंत फल॥
    पुरव जन्म पुण्य जब जागत।तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥
    जई पगु सुरसरी हेतु उठावही।तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥
    महा पतित जिन कहू न तारे।तिन तारे इक नाम तिहारे॥
    शत योजन हूं से जो ध्यावहिं।निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं॥
    नाम भजत अगणित अघ नाशै।विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे॥
    जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना।धर्मं मूल गंगाजल पाना॥
    तब गुन गुणन करत दुख भाजत।गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥
    गंगहि नेम सहित नित ध्यावत।दुर्जनहूं सज्जन पद पावत॥
    उद्दिहिन विद्या बल पावै।रोगी रोग मुक्त हवे जावै॥
    गंगा गंगा जो नर कहहीं।भूखा नंगा कभुहुह न रहहि॥
    निकसत ही मुख गंगा माई।श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥
    महं अघिन अधमन कहं तारे।भए नरका के बंद किवारें॥
    जो नर जपी गंग शत नामा।सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥
    सब सुख भोग परम पद पावहीं।आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥
    धनि मइया सुरसरि सुख दैनि।धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥
    ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा।सुन्दरदास गंगा कर दासा॥
    जो यह पढ़े गंगा चालीसा।मिली भक्ति अविरल वागीसा॥

    ॥ दोहा 
    नित नए सुख सम्पति लहैं,धरें गंगा का ध्यान।
    अंत समाई सुर पुर बसल,सदर बैठी विमान॥
    संवत भुत नभ्दिशी।,राम जन्म दिन चैत्र।
    पूरण चालीसा किया,हरी भक्तन हित नेत्र॥

  • आज है गंगा दशहरा, जरूर करें यह काम

    आध्यात्मिक- भारत संस्कृति, आस्था और परम्परा का देश हैं। आध्यात्म भारत के लोगों का ह्रदय है सनातन का मार्ग लोगों को सकारात्मक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता हैं वहीं भारत में नदियों को देवी का स्थान प्राप्त है। नदियों में सबसे पवित्र नदी के रूप में गंगा नदी जानिए जाती है हमारे देश में गंगा नदी को गंगा माता कहकर सम्बोधित किया जाता है और मान्यता है कि जो व्यक्ति गंगा स्नान करता है उसके सभी पाप मिट जाते हैं। 

    वहीं आज पूरा देश गंगा दशहरा का पर्व मना रहा है।  गंगा दशहरा जेष्ठ माह की दशमी को होती है मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन माता गंगा का जन्म हुआ था या वह धरती पर आईं थीं। आध्यात्म के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करता है, दरिद्र को भोजन करवाता है, दान देता है और मंदिर में पूजा और ध्यान करता है उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

    आध्यात्म में बताया गया है कि आज आप जब माता गंगा की पूजा- अर्चना करें  उसमें जिस भी सामग्री का उपयोग करें वह दस रहनी चाहिए। जैसे दस पुष्प, दस दीपक, दस ब्राह्मण को भोज आदि। गंगा पूजा के बाद व्यक्ति को शिव मंदिर जाना चाहिए और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए।  यदि आप गंगा दशहरा  करते हैं तो प्रभु की कृपा से आपके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। 

    गंगा दशहरा के दिन जरूर करें यह काम –

    गंगा स्नान को जाएं। यदि संभव नहीं है तो घर में जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। 
    माता गंगा का ध्यान करें। 
    शिव मंदिर में जाकर शिव चालीसा का पाठ करें। 
    नदियों में गंदगी न फैलाने का संकल्प लें। 
    ब्राह्मण को घर में भोजन करवाएं। 
    जरूरत मंद की सहायता करें। 
    दरिद्र को दान दें। 
    गाय की सेवा करें।

  • Nirjala Ekadashi 2023: जानें भीम सेन/निर्जला एकादशी व्रत करने का पुण्य

    भीम सेन एकादशी, हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है जो शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे विशेष भक्ति और उपासना के साथ मनाया जाता है। भीम सेन एकादशी का नाम पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। इसकी कथा के अनुसार, महाभारत काल में भीम, पांडवों के पुत्र, एकादशी तिथि को उठ गए और उन्हें यदि व्रत नहीं रखा जाएगा तो उनकी जीवनसाथी द्रौपदी की मृत्यु हो जाएगी। इस परिस्थिति में भीम ने भगवान विष्णु की अराधना की और भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया जिससे द्रौपदी की मृत्यु रोकी गई। इस प्रकार भीम सेन एकादशी व्रत का आयोजन किया जाता है। भीम सेन एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त इस दिन उठते ही स्नान करके व्रत का पालन करते हैं और विष्णु जी की आराधना करते हैं। इस वर्ष भीम सेन एकादशी आज यानी 31 मई को मनाई जा रही है ….

    जानें भीम सेन/निर्जला एकादशी का मुहूर्त –

    निर्जला एकादशी व्रत: बुधवार, 31 मई 2023
    ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष एकादशी प्रारंभ: मंगलवार 30 मई दोपहर 01 बजकर 07 मिनट से
    ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष एकादशी समाप्त: बुधवार 31 मई 2023 दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर
    निर्जला एकादशी व्रत का पारण मुहूर्त: गुरुवार 01 जून 2023 सुबह 05 बजकर 24 मिनट से 08 बजकर 10 मिनट तक

    जानें भीम सेन/निर्जला एकादशी व्रत के नियम –

    भीम सेन एकादशी व्रत, जिसे निर्जला एकादशी भी कहा जाता है, एक सख्त व्रत है जिसके दौरान उपासकों को अपने खाने-पीने को सम्पूर्ण रूप से त्यागना पड़ता है। इस व्रत के नियम निम्नलिखित होते हैं:

    1. नियमित उठाना: व्रत की प्रारंभिक तिथि दिन सूर्योदय के पहले ही होती है। उपासकों को उठकर स्नान करना और विष्णु भगवान की पूजा का आयोजन करना चाहिए।

    2. अन्न-पान का त्याग: निर्जला एकादशी में उपासकों को पूरे दिन भोजन का त्याग करना पड़ता है। इसका अर्थ है कि उपासक को पानी और आहार का संपूर्ण त्याग करना होगा।

    3. निर्जला व्रत: इस व्रत में उपासकों को निर्जला व्रत आयोजित करना पड़ता है, जिसका अर्थ है कि व्रती एक बार भी पानी नहीं पी सकता है। यह व्रत अत्यधिक सख्त होता है और सभी खाद्य पदार्थों, जल, नींद, आदि का संपूर्ण त्याग किया जाना चाहिए।

    4. पूजा और ध्यान: उपासक को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए

    जानें भीम सेन/निर्जला एकादशी व्रत करने का पुण्य-

    भीम सेन या निर्जला एकादशी व्रत को करने का मान्यतापूर्ण पुण्य होता है। इस व्रत के माध्यम से उपासक अपनी भक्ति, त्याग, और संकल्प को प्रदर्शित करते हैं और अपने प्रार्थनार्थी समस्त कर्मों के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति का साधन है और व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक शुद्धि की प्राप्ति में मदद करता है।

    निर्जला एकादशी व्रत के माध्यम से जब व्यक्ति अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करता है और खाने-पीने के साथ अन्नदान, दान, और आराधना जैसे धर्मिक कार्यों में अधिक महत्व देता है, तो उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत उपासक को अन्तरंग शांति, स्वास्थ्य, और मनोवैज्ञानिक स्थिरता प्रदान करता है। इसके अलावा, इस व्रत का पुण्य मान्यतापूर्ण भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक, और धार्मिक परंपराओं में भी बहुत महत्व है। हालांकि, पुण्य की माप व्यक्ति के निर्धारित संकल्प, निष्ठा, और साधना पर निर्भर करता है .

  • रविवार को जरूर पढ़ें सूर्य कवच

    हिन्दू धर्म में आज का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। वैसे तो हिन्दू धर्म में स्नान के बाद रोजाना सूर्य को जल अर्पित करने की परम्परा है लेकिन अगर कोई रविवार के दिन सूर्य देवता का व्रत करता है उनको जल अर्पित करता है और सुबह उठकर विधि – विधान से सूर्य कवच का पाठ करता है उसका किस्मत सूर्य की भांति चमक उठती है। 

    मान्यता है कि रोजाना सूर्य कवच का पाठ करने से व्यक्ति का मन शांत रहता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, रोग दोष दूर होते हैं और व्यक्ति को धन लाभ होता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक़ यदि आपका सूर्य कमजोर है तो आपको जल में रोली मिलाकर सूर्य नमस्कार करना चाहिए और सूर्य कवच का पाठ करते हुए भगवान की आराधना करनी चाहिए. इसके आलावा यदि आप रविवार के दिन दरिद्र को दान देते हैं तो सूर्य भगवान की कृपा सदैव आपपर बनी रहती है। 

    पढ़ें सम्पूर्ण सूर्य कवच

    श्रीसूर्यध्यानम्

    रक्तांबुजासनमशेषगुणैकसिन्धुं

    भानुं समस्तजगतामधिपं भजामि।

    पद्मद्वयाभयवरान् दधतं कराब्जैः

    माणिक्यमौलिमरुणाङ्गरुचिं त्रिनेत्रम्॥

    श्री सूर्यप्रणामः

    जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।

    ध्वान्तारिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् 

    । याज्ञवल्क्य उवाच ।

    श्रुणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम् ।

    शरीरारोग्यदं दिव्यं सर्व सौभाग्यदायकम् ॥ १॥

    दैदिप्यमानं मुकुटं स्फ़ुरन्मकरकुण्डलम् ।

    ध्यात्वा सहस्रकिरणं स्तोत्रमेतदुदीरयेत्॥२ ॥

    शिरो मे भास्करः पातु ललाटे मेSमितद्दुतिः ।

    नेत्रे दिनमणिः पातु श्रवणे वासरेश्वरः ॥३ ॥

    घ्राणं धर्म धृणिः पातु वदनं वेदवाहनः ।

    जिह्वां मे मानदः पातु कंठं मे सुरवंदितः ॥ ४ ॥

    स्कंधौ प्रभाकरं पातु वक्षः पातु जनप्रियः ।

    पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वागं सकलेश्वरः ॥५ ॥

    सूर्यरक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्जपत्रके ।

    दधाति यः करे तस्य वशगाः सर्वसिद्धयः ॥६ ॥

    सुस्नातो यो जपेत्सम्यक् योSधीते स्वस्थ मानसः ।

    स रोगमुक्तो दीर्घायुः सुखं पुष्टिं च विंदति ॥ ७ ॥

    ॥ इति श्री माद्याज्ञवल्क्यमुनिविरचितं सूर्यकवचस्तोत्रं संपूर्णं ॥

  • Chanakya Niti: पति अपनी पत्नी से छुपाकर रखें यह राज

    ज्ञान: आचार्य चाणक्य महा विद्वान थे। उनके बताए मार्ग पर चलकर चन्द्रगुप्त मौर्य ने साम्राज्य हासिल किया। वहीं जीवन को सकारात्मक दिशा मिल सके इसके लिए आचार्य चाणक्य ने कौटिल्य शास्त्र में कई बाते बताई हैं। कहते हैं यदि कोई व्यक्ति कौटिल्य शास्त्र में बताए गए ज्ञान को मान लेता है और उस मार्ग पर चलता है तो उसका जीवन सफल हो जाता है। वही आचार्य चाणक्य के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को यह बातें नहीं बताता है तो उसका जीवन सफल रहता है और  दाम्पत्य जीवन में खुशियां बनी रहती हैं। 

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक पत्नी को नहीं बतानी चाहिए यह बातें –

    घर के राज –

    आचार्य चाणक्य का कहना है कि आपकी पत्नी आपके प्रति कितना भी समर्पित क्यों न हो आपको उसे कभी भी अपने घर के राज नहीं बताने चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो यह आपके दुःख का कारण बनता है क्योंकि पत्नी आपके घर की मूल सदस्य नहीं होती है वह आपके राज अपने मायके तक स्थानांतरित कर सकती है  और भविष्य में इसको लेकर आपके साथ बहस भी कर सकती है। 

    अपने द्वारा किए सकारात्मक कार्य के विषय में –

    पत्नी का स्वाभाव आकर्षण का होता है। वह चाहती है कि उसका पति जो भी काम करे वह उसकी इच्छा के मुताबिक करे यदि कोई ऐसा नहीं करता है तो उसकी पत्नी अपने पति से रुष्ठ हो जाती है। चाणक्य के मुताबिक यदि पति दान-पुण्य के काम करता है, किसी की मदद करता है तो उसके विषय में पत्नी को कभी भी नहीं बताना चाहिए इससे वह न सिर्फ आपके कर्म का फल बाँट लेती है अपितु आपके दुखों का कारण भी बनती है। 

    कमजोरी –

    इस संसार में कोई भी व्यक्ति पूर्णतः मजबूत नहीं होता है। हर किसी की कोई न कोई कमजोरी होती है। हमें वैसे तो अपनी कमजोरी को हमेशा छुपा कर रखना चाहिए। लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को अपनी कमजोरी बताता है तो उससे उस व्यक्ति को सामजिक हानि होती है। उसकी पत्नी हर बार उसकी कमजोरी को इंगित करते हुए उससे बहस करती है। आचार्य चाणक्य का कहना है कि व्यक्ति को अपनी पत्नी को किसी भी स्थिति में अपनी कमजोरी से वाकिफ नहीं होने देना चाहिए। यदि आप ऐसा करने में असफल होते हैं तो आपको सदैव पत्नी के सम्मुख झुक कर रहना पड़ता है और आप जीवन में दुःख का अधिक अनुभव करते हैं। 

  • मनुस्मृति कहती है ब्राह्मण कर सकता है मांस का सेवन

    धर्म: सनातन धर्म में सात्विक, शुद्ध शाकाहारी भोजन करने की परम्पर है। धर्म ग्रंथो के मुताबिक यदि हिन्दू धर्म में कोई व्यक्ति मांसाहारी भोजन करता है तो उसके घर में नकारात्मक उर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। वही ब्राह्मणों का हिन्दू धर्म में अत्यधिक सम्मान किया जाता है, ब्राह्मण को पूज्यनीय बताया गया है लेकिन अगर कोई ब्राह्मण मांसाहारी है तो उसे नास्तिक कहा जाता है। 

    लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मनुस्मृति में ब्राह्मण मांस खा सकते हैं या नहीं इसको लेकर क्या कहा गया है। यदि हम हिन्दू विद्वानों की मानें तो मनुस्मृति एक पवित्र धर्मिक ग्रन्थ है मनुस्मृति के श्लोक 30, अध्याय 5 में लिखा गया है। मनुस्मृति के मुताबिक ब्राह्मण खाने योग्य जानवरों का मांस खा सकता है। लेकिन इसकी कुछ स्थिति होती हैं। 

    मनुस्मृति के मुताबिक – ब्राह्मण किसी विकट परिस्थिति में फसा है तो वह मांस खा सकता है। यदि किसी के जीवन पर मांस का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति मांस खा सकता है। मनुस्मृति के मुताबिक – मछली,हिरण, मृग, मुर्गी, बकरी, भेड़ और खरगोश के मांस को बलि के भोजन के रूप में मंजूरी है।

  • मंदिर से आने के बाद क्यों नहीं करना चाहिए स्नान, क्या कहता है शास्त्र

    डेस्क। हिंदू धर्म में पूजा और मंदिरों में प्रवेश के लिए कई तरह के दिशा-निर्देश बनाए गए हैं। ये नियम धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारणों पर आधारित भी हैं। इनमें से एक नियम में कहा गया है कि स्नान के बाद ही मंदिर में प्रवेश भी करना चाहिए।
    स्नान के बाद हमेशा मंदिर जाना भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तन और मन दोनों को शुद्ध कर देता है। साथ ही रात में सोने के दौरान नकारात्मक ऊर्जाएं शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। 
    ऐसे में सुबह स्नान करने के बाद मंदिर जाने से इन नकारात्मक शक्तियों को खत्म करने में मदद भी मिलती है और हमारे भीतर चेतना को बढ़ावा मिलता है। वहीं मंदिर में बैठकर पूजा और ध्यान में लीन रहने से हमारे शरीर, आत्मा और मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश भी होता है। यह भी माना जाता है कि मंदिर से लौटने के तुरंत बाद स्नान भी नहीं करना चाहिए।
    मंदिर से आने के तुरंत बाद स्नान न करें
    ज्योतिष शास्र के अनुसार माना जाता है कि मंदिर एक पवित्र स्थान होता है और वहां से निकलने के तुरंत बाद स्नान करने से वहां उपस्थित होने और पूजा करने से प्राप्त ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है। मान्यता यह है कि मंदिर में प्रवेश करने से शरीर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा भी भर जाती है। मंदिर में दर्शन के तुरंत बाद स्नान करने से सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है और नकारात्मक भाव उत्पन्न हो जाती है। इसके अतिरिक्त, मंदिर दर्शन का अनुभव करने का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं हो पाता है।
    स्नान से बरकत का असर खत्म हो जाता है
    माना जाता है कि मंदिर में दर्शन करने के तुरंत बाद स्नान करने से मंदिर से प्राप्त आशीर्वाद तुरंत ही समाप्त हो जाता है। यह मंदिर में मूर्तियों से प्राप्त शक्तियों को भी कम कर सकता है और आंतरिक भावनाओं की हानि का कारण भी बन सकता है। मंदिर में पूजा करने से सभी देवता प्रसन्न होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति भी होती हैं, जो मंदिर से आ कर स्नान करने से नष्ट भी हो जाते हैं।

  • Morning Mantra: सुबह इन मंत्रो के जाप से मिलता है हर समस्या से छुटकारा

    डेस्क | Morning Mantra: सनातन धर्म में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। धर्म शास्त्रों में मंत्र जाप के जरिए ईश्वर प्राप्ति का विधान होता है। अतः साधक प्रतिदिन पूजा और आरती के समय मंत्र जाप कर अपने आराध्य को प्रसन्न भी करते हैं।
    कई लोग मंत्र जाप कर भगवान की तपस्या करते हैं। दैवीय काल में ऋषि-मुनि मंत्र जाप कर त्रिदेव और आदिशक्ति की कठिन तपस्या भी करते थे। उनकी कठिन भक्ति से प्रसन्न कर त्रिदेव उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण भी करते थे। धार्मिक मान्यता है कि मंत्र जाप से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साथ ही साधक को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। मंत्र जाप से ईश्वर प्रसन्न भी होते हैं। 
    उनकी कृपा से सभी जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं और सााधक को मानसिक तनाव से भी छुटकारा भी मिलता है। अगर आप भी अपने जीवन में सफल इंसान बनना चाहते हैं, तो दिन की शुरुआत इन शक्तिशाली मंत्रों से करें और इन मंत्रों के जाप से करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। इसके साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली भी आती है। आइए इन मंत्रो का जाप करें-
    1.
    कराग्रे वसति लक्ष्मीः कर मध्ये सरस्वती।
    करमूले तू ब्राह्म, प्रभाते कर दर्शनम्‌।।
    2.
    त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
    त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वम् मम देवदेवं।।
    3.
    ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी,भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
    गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः,कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥
    4.
    आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
    दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते ॥
    5.
    समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।
    विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे ॥
    6.
    ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
    भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
    7.
    ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
    उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!
    8.
    मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।
    9.
    शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
    विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।
    लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
    वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
    10.
    शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
    प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

  • यह है सफलता का मंत्र रोजाना करें जाप

    आध्यात्मिक: हिन्दू धर्म में पूजा – पाठ का विशेष महत्व है कहते हैं जिस घर के लोग सुबह उठकर विधि-विधान से पूजा करते हैं, मंत्रो का उच्चारण करते हैं उनके घर में सुख समृद्धि का वास होता है और नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकल जाती है। लेकिन कई बार हम देखते हैं कुछ लोग अथक प्रयास करते हैं, अपने जीवन में सफल होने के लिए दिन-रात मेहनत में लगे रहते हैं लेकिन सफलता उनके हाथ नहीं लगती है। वहीं आज हम आपको कुछ ऐसे मंत्रो के विषय में बताने जा रहे हैं जिनका नित्य जाप करने से आपके जीवन का लक्ष्य आपको आसानी से प्राप्त होता है और ईश्वर की कृपा सदैव आपपर बनी रहती है। 

    जानें सफलता के मंत्र :

    1. कराग्रे वसति लक्ष्मीः कर मध्ये सरस्वती।
    करमूले तू ब्राह्म, प्रभाते कर दर्शनम्‌‌।।

    2.त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
    त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वम् मम देवदेवं।।

    3.ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी,भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
    गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः,कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥

    4.आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर
    दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते ॥

    5.समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले 
    विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे ॥

    6. ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
    भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

    7. ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
    उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

    8. मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

    9. शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
    विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।

    10. लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
    वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

    11. शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
    प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

  • पथप्रदर्शक है प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा : विदेश सचिव

    विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा को अभूतपूर्व और पथप्रदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहयोग भारत और अमेरिका के बीच चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में से एक था। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की अमेरिका की यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक बताया। उन्होंने गुरुवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) मीडिया ब्रीफिंग के दौरान संवाददाताओं से कहा, रक्षा से लेकर अंतरिक्ष और ऊर्जा तक सभी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से उन्नत तकनीक सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक है।

    उन्होंनेबताया कि मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच द्विपक्षीय चर्चा के दौरान पारिस्थितिकी तंत्र में तकनीकी सहयोग पर प्रमुखता से चर्चा की गई। विदेश सचिव ने बताया,इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सेवाएं और अन्य क्षेत्रों में अनुसंधान में एक साथ काम करना शामिल है। क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान असाधारण गर्मजोशी और आतिथ्य की भावना दिखी, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रथम महिला जिल बाइडेन ने उन्हें प्रदान किया।

    विदेश सचिव ने कहा कि यह यात्रा बेहद सफल और समृद्ध रही है। उन्होंने यात्रा को पथ-प्रदर्शक बताया। भारत और अमेरिका ने सार्वजनिक-निजी संयुक्त कार्यबल भी लॉन्च किए, इनमें से एक खुले रेडियो एक्सेस नेटवर्क (आरएएन) के विकास और तैनाती पर है, जो मोबाइल नेटवर्क बनाने के लिए एक नया दृष्टिकोण है, जो स्मार्टफोन और उपकरणों को इंटरनेट और अन्य उपयोगकर्ताओं से जोड़ने के लिए आवश्यक है।

    भारत का भारत 6जी और यूएस नेक्स्ट जी एलायंस इस सार्वजनिक-निजी शोध का सह-नेतृत्व करेंगे।क्वात्रा ने बताया कि क्रिटिकल एंड इमजिर्ंग टेक्नोलॉजी (आईसीईटी) पर यूएस-इंडिया इनिशिएटिव का समर्थन करने के लिए, यूएस-इंडिया कमर्शियल डायलॉग प्रत्येक देश के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को जोड़ने के लिए एक नया इनोवेशन हैंडशेक लॉन्च करेगा।

    उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका दोनों इस बात पर सहमत हुए हैं कि अमेरिका भारत में अहमदाबाद और बेंगलुरु में दो नए वाणिज्य दूतावास खोलने की औपचारिकताएं शुरू करेगा।