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  • जानें कैसे हुई थी कुरुवंश की उतपत्ति और क्यों नही की थी भीष्म ने शादी

    आध्यात्मिक – महाभारत का जब भी जिक्र आता है तो हम कुरुवंश के विषय में सुनते हैं. आज के दौर में यह बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर कुरुवंश की उत्पत्ति हुई कैसे. धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक़ ब्रह्मा जी से अत्री की उत्पत्ति हुई फिर अत्री से जब चन्द्रमा की उत्पत्ति हुई, चन्द्रमा से बुध, बुध से पुरुरवा, पुरुरवा से आयु,आयु से राजा नहुष, नहुष से ययाति, ययाति से पुरु, पुरु से वंश, वंश में भरत, भरत के कुल से कुरु वंश की उत्पत्ति हुई.

    कुरु वंश से शांतनु, शांतुन से गंगा नंदन, गंगा नन्दन से भीष्म उनके दो भाई चिन्त्रा गंद और विचित्रवीर्य की उत्पत्ति हुई यह लोग शांतनु से सत्यवती के गर्भ से जन्मे थे. शांतुनु स्वर्ग चले गए जिसके बाद भीष्म अविवाहित रहे उन्होंने आपने भाई विचित्रवीर्य के राजपाठ की देखरेख की, यदि हम मोटा – मोटा समझें तो भीष्म सर्वशक्तिमान, शांतनु पुत्र महाभारत के प्रमुख पात्र थे. भीष्म आजीवन अविवाहित रहे इसका अमुख कारण इनका अपने पिता को ब्रह्मचर्य का दिया वचन था. भीष्म को कोई भी मृत्यु नहीं दे सकता था क्योंकि इनको इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था.

    जानें क्यों नही की थी भीष्म ने शादी- 

    भीष्म के शादी न करने के पीछे उनके पिता द्वारा लिया गया वचन था. कहते हैं एक बार भीष्म और उनके पिता शांतुन शिकार पर गए. शांतनु शिकार पर आगे निकल गए और भीष्म पीछे रह गए. शांतनु के आगे एक सुन्दर कन्या दिखी वह उसको देखकर मोहित हो गए उस स्त्री का नाम सत्यवती था यह स्वर्ग की अप्सरा थी जिसका प्रथ्वी पर जन्म शाप के कारण हुआ था. शांतनु ने सत्यवती के सम्मुख विवाह का प्रस्ताव रख दिया सत्यवती ने उनसे इस विषय में अपने पिता से बात करने को कहा.

    राजा शांतनु जब सत्यवती के पिता से विवाह के परिपेक्ष्य में मिलने गए तो उन्होंने उनके सामने प्रस्ताव रखा की वह सत्यवती का विवाह उनके साथ तभी करेंगे जब वह यह वचन दें की हस्तिनापुर का सम्राट सत्यवती का पुत्र होगा. राजा शांतनु सत्यवती के पिता की यह शर्त नहीं मानते हैं क्योंकि वह देवब्रत को पहले ही राजा घोषित कर चुके होते हैं. विवाह प्रस्ताव मना हो गया राजा शांतनु दुखी रहने लगे. देवब्रत यानी भीष्म से आपने पिता की यह स्थिति देखी नहीं गई उन्होंने इसके पीछे का कारण जाना और सत्यवती के पिता के पास अपने पिता के विवाह का प्रस्ताव लेकर गए.

    सत्यवती के पिता ने दोबारा अपनी बात दोहरा दी यह सुनकर भीष्म ने उनको वचन दिया मैं राजकुमार रहूँगा लेकिन हस्तिनापुर पर राज सत्यवती का पुत्र करेगा उनके पिता ने कहा यह तुम तक है तुम्हारे विवाह के बाद तुम्हारे पुत्र ही राजकुमार होंगे यह सुनकर भीष्म ने आजीवन कुंवारे रहने की प्रतिज्ञा ली और अपने पिता की ख़ुशी हेतु आजीवन ब्रह्मचर्य को स्वीकार लिया.

  • आचार्य चाणक्य के मुताबिक़ ऐसे लोगों को होता है हर चीज का ज्ञान

    आध्यात्मिक- जीवन में अगर हम उचित- अनुचित का ज्ञान जान लेते हैं हम समझ जाते हैं की जीवन के दो ही पहलू हैं सुख और दुःख तो हम अपने जीवन में सकारात्मक हो जाते हैं और हमारे भीतर प्रत्येक परिस्थिति से उभरने की शक्ति विकसित होती है. वहीं आचार्य चाणक्य ने व्यक्ति के जीवन से जुड़े कई अहम तत्वों पर बात की उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में सुखी रहना चाहता है तो उसे जीवन के सत्य को सदैव स्वीकार करना चाहिए और अपने भीतर निरंतर सीखने की प्रवृति विकसित करनी चाहिए.

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति शास्त्रों का अभ्यास करता है, आध्यात्म की विरासत को सम्भाल कर रखता है, अपने विचारों को तार्किक रखता है वह सत्य वैभव और सुख के सिद्धांत को समझ जाता है. आचार्य चाणक्य का कहना है कि धर्म का ज्ञान रखने वाले व्यक्ति अपने लिए उचित और अनुचित का बोध करने में निपुण होते हैं इन लोगों को भला और बुरा समझ आता है ऐसे लोग सर्वोत्तम को समझ चुके होते हैं और इनके जीवन का लक्ष्य सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ना होता है,

    आचार्य चाणक्य का यह भी मानना था जिस व्यक्ति को धर्म और शास्त्रों को उचित ज्ञान हो जाता है उसके जीवन में सुख बना रहता है यह लोग परिस्थितियों से घबराते नही हैं और जीवन के सत्य को स्वीकार करते हुए अपना जीवन यापन करते हैं. उनके मानना था कि यदि कोई अपने जीवन में सफल बनना चाहता है तो उस व्यक्ति को अपने जीवन को आध्यात्म से जोडकर रखना चाहिए और निरंतर शास्त्रों से सीखते रहना चाहिए. 

  • जानें सूर्योदय देता है क्या संकेत

    सूर्योदय आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। सूर्य का उदय अनन्तता और नए शुरुआतों की संभावना को दर्शाता है। सूर्य के उदय के समय, सृष्टि की नई शुरुआत होती है और यह एक नया दिन शुरू होता है।धार्मिक दृष्टिकोण से भी, सूर्य उदय एक महत्वपूर्ण उत्सव होता है जो भगवान सूर्य को समर्पित है। सूर्य उदय ध्यान और मेधा को बढ़ाता है जो एक आध्यात्मिक जीवन जीने में मदद करता है। सूर्य के उदय के समय, व्यक्ति ध्यान को संकलित कर सकता है और उनकी आत्मा की ऊर्जा को बढ़ा सकता है। इसलिए, सूर्य उदय एक महत्वपूर्ण समय है जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण है।

    सूर्य उदय का समय एक आध्यात्मिक महत्वपूर्ण समय है जो हमारे जीवन में उत्सुकता और ऊर्जा का विस्तार करता है। सूर्य को हम जीवन का स्रोत मानते हैं जिससे हमारी प्राण शक्ति लेती है। सूर्य उदय का समय एक शुभ समय होता है, जो हमें ऊर्जा और उत्साह के साथ दिन की शुरुआत करने की प्रेरणा देता है।

    वैदिक संस्कृति में, सूर्य को एक भगवान के रूप में माना जाता है और सूर्य उदय का समय धार्मिक आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण समय होता है। सूर्य उदय पर श्रद्धा और पूजा की जाती है जो सूर्य देवता के प्रति श्रद्धा और आभार का अभिव्यक्ति होता है। यह पूजा अंधकार को दूर करने, मन को शांत करने और आध्यात्मिक उन्नति को प्रोत्साहित करने के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए, सूर्य उदय पर पूजा करना एक आध्यात्मिक और धार्मिक क्रिया होती है जो हमें शांति, ऊर्जा, और शुभकामनाएं देती है।

    सूर्योदय में उठने के फायदे-

    सूर्य उदय में उठने के कई फायदे होते हैं। यह हमारे शरीर, मन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। नीचे कुछ फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया है:

    1. शांति और स्थिरता: सूर्य उदय के समय वातावरण शांत और स्थिर होता है, जो हमारे मन को भी शांति देता है। यह हमें स्वस्थ और स्थिर मन वाले रहने में मदद करता है।

    2. ऊर्जा और उत्साह: सूर्य उदय के समय धूप की गर्मी और ऊर्जा हमें उत्साह देती है। यह हमारी ऊर्जा लेवल को बढ़ाता है और हमें पूरे दिन के लिए तैयार रखता है।

    3. दैनिक दिनचर्या का समय बदलना: सूर्य उदय के समय उठकर हमारी दैनिक दिनचर्या का समय भी बदल जाता है। हमारा शरीर अपने समय टेबल को समझ जाता है और हमें दिन भर में अधिक उत्साह और ऊर्जा देता है।

    4. आध्यात्मिक उन्नति: सूर्य उदय का समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह हमें ऊर्जा प्रदान करता है और हमारा मन शांत रहता है.

  • जानें क्यों रखते हैं पूजा के स्थान पर जल और क्या है इसका महत्व

    आध्यात्मिक- वास्तु शास्त्र के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति अपने घर को व्यवस्थित रखता है तो उसके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आध्यात्म के मुताबिक़ वास्तु सकारात्मक और नकारात्मक होता है यदि आपके घर में चीजें वास्तु के मुताबिक़ नहीं व्यवस्थित हैं तो आपको कई प्रकार के दुःखों को झेलना पड़ता है. वहीं अगर हम वास्तु की माने तो पूजा के स्थान पर जल रखना अत्यधिक आवश्यक है यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो यह काफी नुकसानदेह साबित तो सकता है। तो आइये जानते हैं वास्तु के मुताबिक़ पूजा के स्थान पर जल रखने का महत्व- 

    पूजा के स्थान पर जल रखना हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे कि:

    शुद्धता: पूजा के स्थान पर जल रखना एक शुद्धता का संकेत होता है। जल के अवशेषों से लोगों को प्रभु के प्रति उपस्थित होने का अनुभव होता है जो शुद्धता के लिए आवश्यक होता है।

    समर्पण: जल पूजा में समर्पण का अर्थ होता है। इससे भक्त अपनी भावनाओं का अभिव्यक्ति करते हैं और प्रभु के चरणों में अपने आप को समर्पित करते हैं।

    त्याग: जल को पूजा स्थल पर रखना भी त्याग का एक प्रतीक होता है। यह दर्शाता है कि भक्त अपने अधिकारों और सुखों को छोड़कर ईश्वर को समर्पित हो रहा है।

    प्रार्थना: जल पूजा में प्रार्थना की भावना भी होती है। भक्त जल के अवशेषों के साथ अपनी मनोकामनाएं दर्ज करता है जो प्रभु तक पहुंचती हैं।

    शुभकामना: जल को पूजा स्थल पर रखना शुभकामनाओं का एक संकेत भी होता है। 

    वास्तु  शास्त्र के मुताबिक पूजा के स्थान पर जल क्यों रखें –

    वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूजा के स्थान पर जल रखने का महत्व होता है। वास्तु शास्त्र एक ऐसी विज्ञान है जो घर या किसी भी निर्माण के लिए उपयुक्त और सही दिशा तय करने में मदद करता है।

    पूजा के स्थान पर जल रखने से प्रभु की कृपा बढ़ती है और पूजन की प्रभावशाली शक्ति को बढ़ाया जाता है। जल पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है और इससे जब प्रभु की अनुग्रह मिलती है तो इससे पूजन का अर्थ बढ़ जाता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थल को उत्तम ऊर्जा से भरने के लिए पानी का उपयोग करना उचित होता है। जल एक ऊर्जा का स्रोत होता है और इससे पूजन के स्थान की ऊर्जा को सकारात्मक बनाया जा सकता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, जल का उपयोग सुबह और शाम को पूजा के समय ही करना चाहिए। इससे पूजा स्थल की ऊर्जा बढ़ती है और इससे भक्त के मन में शांति की भावना उत्पन्न होती है।
     

  • इस तरह से प्रसन्न करें भगवान विष्णु को

    विष्णु जी हिन्दू धर्म के मुख्य देवता माने जाते हैं। वे हिन्दू त्रिमूर्ति (Brahma, Vishnu, Mahesh) में से एक हैं और सृष्टि के रक्षक एवं पालक माने जाते हैं। विष्णु जी को जगन्नाथ (Jagannath), वामन (Vamana), राम (Rama), कृष्ण (Krishna) और केशव (Keshava) जैसे नामों से भी पुकारा जाता है।

    विष्णु जी की पौराणिक कथाओं में उनके दस अवतारों का वर्णन किया गया है। इनमें से कुछ मुख्य अवतार हैं: मत्स्य (Matsya) अवतार (मत्स्यावतार), कूर्म (Kurma) अवतार (कूर्मावतार), वराह (Varaha) अवतार (वराहावतार), नरसिंह (Narasimha) अवतार (नरसिंहावतार), वामन (Vamana) अवतार (वामनावतार), परशुराम (Parashurama) अवतार (परशुरामावतार), राम (Rama) अवतार (रामावतार), कृष्ण (Krishna) अवतार (कृष्णावतार), बुद्ध (Buddha) अवतार (बुद्धावतार) और कल्कि (Kalki) अवतार (कल्किअवतार)।

    विष्णु जी की पूजा की विधि

    विष्णु जी की पूजा करने की विधि विभिन्न स्थानों और परंपराओं के अनुसार थोड़ी-बहुत अलग हो सकती है। यहां कुछ आम चरणों की विधि दी गई है जो आपको विष्णु जी की पूजा करने में मदद कर सकती है:

    1. स्नान और पवित्रता: पूजा के लिए पहले अपने शरीर को स्नान करें और पवित्र हों जाएं।

    2. पूजा स्थल: एक साफ और शुद्ध स्थान का चयन करें जहां आप पूजा कर सकें। इस पर आप पूजा मंदिर या पूजा कक्ष के रूप में किसी विशेष स्थान का चयन कर सकते हैं।

    3. पूजा सामग्री: पूजा के लिए आपको विष्णु जी की मूर्ति या चित्र, पूजा थाली, दीपक, धूप, अक्षत, पुष्प, तुलसी पत्र, जल आदि की आवश्यकता होगी। इन सामग्रियों को पूजा स्थल पर तैयार रखें।

    4. पूजा का आरम्भ: पूजा को अपने ईश्वर की प्रार्थना और आदेश के साथ आरम्भ करें। इसके बाद, विष्णु जी की मूर्ति के सामने बैठें और मन्त्रों के साथ ध्यान केंद्रित करें।

    विष्णु जी की शादी किससे हुई है-

    हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, विष्णु जी की शादी श्रीमती लक्ष्मीजी (Lakshmi) से हुई है। विष्णु जी को लक्ष्मीजी के साथ विवाहित माना जाता है, जो सौभाग्य, समृद्धि और सम्पत्ति की देवी हैं। इस विवाह की कथा भगवत पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है। कथानुसार, जब देवताओं और असुरों के मध्य समुद्र मंथन (Samudra Manthan) का समय आया, तो विष्णु जी ने तुलसी (Tulsi) के रूप में अपनी पत्नी लक्ष्मीजी को चुना। इसके पश्चात विष्णु जी और लक्ष्मीजी का विवाह सम्पन्न हुआ और वे संयुक्त रूप से समुद्र मंथन कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में सहायता करते हैं इसलिए, विष्णु जी की शादी लक्ष्मीजी के साथ हुई है और वे पौराणिक कथाओं में समृद्धि, सौभाग्य, और आनंद के प्रतीक के रूप में पूजे जाते हैं।

    विष्णु जी के मंत्रों में कई प्रमुख मंत्र हैं, जिन्हें उच्चारण करके भक्ति और ध्यान किया जाता है। ये मंत्र उनकी पूजा, जाप और ध्यान के लिए उपयोगी होते हैं। नीचे कुछ प्रमुख विष्णु मंत्रों का उल्लेख किया गया है:

    1. “ॐ नमो नारायणाय” (Om Namo Narayanaya): यह मंत्र विष्णु जी की उच्चारण के लिए बहुत प्रसिद्ध है। इस मंत्र का जाप करने से विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि का आभास होता है।

    2. “ॐ विष्णवे नमः” (Om Vishnave Namah): यह मंत्र विष्णु जी की स्तुति के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका जाप करने से भक्ति और आत्मिक संयम में सुधार होता है।

    3. “ॐ शान्ताकारं भुजगशयनं” (Om Shantakaram Bhujagashayanam): यह सुंदर मंत्र विष्णु जी की ध्यान और आराधना के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके जाप से मानसिक शांति प्राप्त होती है और आत्मिकता विकसित होती है।

  • जानें गणेश जी की पूजा का सच

    गणेश जी हिंदू धर्म में देवताओं में से एक माने जाते हैं। वे विद्या, विजय, शुभकार्य, संपत्ति, ज्ञान और विवेक के देवता माने जाते हैं। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि वे हर तरह के विघ्नों और बाधाओं से रक्षा करते हैं। गणेश जी के शरीर का आकार भालू जैसा होता है और उनकी खूबियों में हाथी, मूषक और उद्धट भी शामिल होते हैं। उन्हें मुख्यतः दो छोटीं लम्बीं चढ़ीयां होती हैं और उनके हाथ एक विशिष्ट रूप से मोड़े रहते हैं।

    गणेश जी को हिंदू धर्म में सबसे पहले पूजा किया जाता है, और उनकी पूजा के लिए अधिकतर धर्मी उपयोग करते हैं। उनके नाम के कई मंत्र भी होते हैं जो उनकी पूजा के दौरान उपयोग किए जाते हैं। गणेश चतुर्थी भारत में एक बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है, जो गणेश जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

    गणेश जी के जन्म का सच-

    हिंदू धर्म में, गणेश जी का जन्म कथा बहुत प्रसिद्ध है। इसके अनुसार, माता पार्वती ने एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसे प्राण दिए जिससे गणेश जी का जन्म हुआ। पार्वती ने अपने पुत्र के रूप में उन्हें आराधना करने के लिए बनाया था। एक बार गणेश जी को शिवजी ने रोका क्योंकि उन्हें अन्य देवताओं को आने की अनुमति नहीं थी। इससे गणेश जी ने शिवजी की सेवा से इनकार कर दिया जिससे शिवजी नाराज हो गए। इसके बाद, शिवजी के अनुयायी ने गणेश जी को उसकी पथिकता से रोका जिससे गणेश जी ने उसे मार डाला। शिवजी को इस घटना से बहुत दुःख हुआ तथा उन्होंने गणेश जी को फिर से जीवित कर दिया। यहीं से गणेश चतुर्थी का त्योहार उत्पन्न हुआ जो हर साल गणेश जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

    गणेश पूजा विधि-

    गणेश चतुर्थी के दौरान और अन्य अवसरों पर गणेश जी की पूजा का विधान निम्नलिखित है:

    1. शुभ मुहूर्त चुनें: पूजा के लिए शुभ मुहूर्त चुनें। गणेश जी की पूजा विधि के लिए प्रत्येक वर्ष अलग-अलग मुहूर्त होते हैं।

    2. पूजा स्थल की सजावट: गणेश जी की मूर्ति को शुभ समय में सजाएं और उसके आसपास पूजा स्थल को सजाएं।

    3. अगरबत्ती और दीपक: पूजा से पहले घर में अगरबत्ती जलाएं और दीपक जलाकर वातावरण को शुद्ध करें।

    4. पूजा सामग्री: पूजा के लिए सामग्री जैसे फूल, पुष्प, धूप, दीपक, पान, सुपारी, नारियल और मिठाई इत्यादि की तैयारी करें।

    5. पूजा आरंभ करें: गणेश जी की मूर्ति के सामने बैठें और अपने मन में शुद्धता का भाव रखें। फिर गणपति आवाहन करें और मंत्रों का जाप करें।

    6. पूजा के दौरान ध्यान रखें: पूजा के दौरान ध्यान रखें कि आपका मन शुद्ध होता रहे और मंत्रों के जाप को विघ्न न हो।

    गणेश जी के मंत्र-

    गणेश जी के कुछ प्रसिद्ध मंत्र हैं जो उनकी पूजा के दौरान जप किए जाते हैं। ये मंत्र हैं:

    1. ॐ गं गणपतये नमः (Om Gan Ganapataye Namah)
    2. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येषु सर्वदा॥ (Vakratunda Mahakaya)
    3. ॐ गणेशाय नमः (Om Ganeshaya Namah)
    4. ॐ श्री गणेशाय नमः (Om Shri Ganeshaya Namah)
    5. ॐ गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजंबूफलसारभक्षितम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम्॥ (Gajananam Bhutaganadisevitam)

    इन मंत्रों को गणेश चतुर्थी के अवसर पर जप किया जाता है और इसके अलावा भी अन्य अवसरों पर गणेश जी की पूजा के समय इन मंत्रों का उच्चारण किया जा सकता है।

  • शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका

    शनि देव, हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे नवग्रहों (नौ ग्रहों) में से एक हैं और ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शनि देव को सबसे अधिक शुभ और आदर्श देवता माना जाता है जब वे अद्यतन और क्षमा व्यक्त करते हैं, लेकिन उन्हें क्रूर और न्यायप्रिय देवता के रूप में भी जाना जाता है जब वे विनाश और शास्त्रीय न्याय का प्रतीक होते हैं।

    शनि देव को ज्योतिष शास्त्र में कर्मफल का प्रतीक माना जाता है। उनके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में संकट, परिश्रम, परीक्षा और संघर्ष के समय आ सकते हैं, लेकिन उनकी कृपा और आशीर्वाद से उन्हें संघर्षों से बाहर निकालकर सफलता और स्थिरता की प्राप्ति हो सकती है। व्यक्ति के जीवन में शनि देव की उपासना, व्रत और शनि ग्रह के दोषों को निवारण करने के उपाय भी किए जाते हैं।

    शनि देव को प्रसन्न करने का तरीका-

    शनि देव को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित तरीके अनुसरण किए जा सकते हैं:

    1. शनि देव की पूजा: शनि देव की नियमित पूजा करना उनके प्रसन्नता में महत्वपूर्ण होता है। आप उनकी मूर्ति, प्रतिमा या यंत्र को एक स्थान पर स्थापित करके पूजा कर सकते हैं। आप पूजा के लिए शनि देव के विशेष मंत्र जैसे “ॐ शं शनैश्चराय नमः” या “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” का जाप कर सकते हैं।

    2. शनिवार के व्रत: शनिवार को शनि देव को समर्पित व्रत रखना शनि की प्रसन्नता के लिए प्रभावी होता है। इस व्रत में आप शनि देव की पूजा करते हैं, उनके व्रत कथा सुनते हैं और उनके चरणों में अर्घ्य देते हैं।

    3. दान: शनि देव को प्रसन्न करने का एक अच्छा तरीका दान करना है। आप काले कपड़े, तिल, तेल, उड़द दाल, लौंग, राई आदि को शनि देव के नाम पर दान कर सकते हैं। इससे आप शनि देव के आशीर्वाद को प्राप्त कर सकते हैं।

    4. ग्रह शांति यज्ञ: शनि दोष के निवारण के लिए ग्रह शांति यज्ञ करवाएं। इसके लिए पंडित से संपर्क करें।

    शनि देव की पूजा में नहीं करना चाहिए क्या काम-

    शनि देव की पूजा करते समय निम्नलिखित कार्यों को नहीं करना चाहिए:

    1. अपवित्र भोजन: शनि देव की पूजा के दौरान अपवित्र भोजन खाना नहीं चाहिए। अपवित्र भोजन में गोमांस, अंडे, धूल, शराब, मांसाहारी खाद्य पदार्थ, निम्बू, अमरूद, तिल, उड़द दाल, अदरक, प्याज आदि शामिल हो सकते हैं।

    2. बालकों की देखभाल: शनि देव की पूजा करते समय बालकों की देखभाल करने चाहिए। यह शनि देव के द्वारा उनके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।

    3. कपड़े धोना: शनि देव की पूजा करते समय कपड़े धोना नहीं चाहिए। यह धोबी धोखा देगा और शनि देव को नाराज कर सकता है।

    4. शनिवार को ट्रिमिंग करना: शनि देव की पूजा के दिन अपने शरीर की ट्रिमिंग या बालों को काटने के लिए जाना नहीं चाहिए।

    5. मित्रों के साथ अनीति से व्यवहार: शनि देव की पूजा के दिन अनीति से व्यवहार नहीं करना चाहिए। शनि देव की उपासना में अनुशासन और न्याय का महत्व है।

  • जानें कब होगी वट सावित्री पूजा, पूजा महत्व और कहानी

    वट सावित्री पूजा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह पूजा हिंदू महिलाओं द्वारा की जाती है और इसे विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व होता है। यह पूजा व्रत, पूजा, और मंत्र-जाप के माध्यम से मान्यता और भक्ति के साथ मनाई जाती है वट सावित्री पूजा का आयोजन ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है, जो मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर) और ज्येष्ठ (मई-जून) महीनों के बीच में पड़ता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष के नीचे बैठकर उसे पूजती हैं और अपने पतियों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। वह अपने पति के लिए व्रत रखती हैं और उनकी सुरक्षा और सुख की कामना करती हैं। वट सावित्री पूजा का उद्देश्य महिलाओं को शक्ति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए ब्रह्मचर्य, पतिव्रता, और उनके पतियों के लंबे जीवन की कामना करना है।

    जानें कब मनाई जाएगी वट सावित्री-

    सावित्री पूजा 2023 19 मई, शुक्रवार को ज्येष्ठ अमावस्या के दौरान मनाई जा रही है। यह पर्व शुक्ल और कृष्ण  दोनों ही पक्ष में  मनाया जाता है। कुछ लोग कृष्ण पक्ष  को वट सावित्री पूजा मनाते हैं  और कुछ शुक्ल पक्ष में पूजा मनाने में विश्वास करते हैं, और व्रत सावित्री पूर्णिमा व्रत के रूप में जाना जाता है।

    वट सावित्री पूजा विधि-

    वट सावित्री पूजा को मान्यता और भक्ति के साथ अपनाने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन किया जाता है:

    1. तिथि और समय: वट सावित्री पूजा ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। पूजा का समय सूर्योदय के पश्चात् सूर्यास्त के बीच चुना जाता है।

    2. सामग्री: पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की तैयारी करें:

      • वट वृक्ष की पेड़ी का एक छोटा सा टुकड़ा या पत्ता
      • पूजा के लिए सामान जैसे कि कलश, दीपक, अगरबत्ती, पूजा थाली, अच्छे, रोली, अबीर, गंध, फूल, पान पत्र, फल, नारियल, पुष्पमाला आदि।
      • पूजा के लिए वस्त्र और श्रृंगार सामग्री
    3. पूजा विधि:

      • स्नान आदि के बाद शुद्ध रूप से विश्रामित हों और वट वृक्ष के नीचे बैठें।
      • पूजा की थाली पर पूजा सामग्री को अभिषेक करें।
      • पहले वट वृक्ष की पेड़ी का पूजन करें। पत्ते या छोटे टुकड़ों को अभिषेक करें और उन्हें ध्यान से स्थान पर रखें।

    वट सावित्री पूजा का महत्व-

    वट सावित्री पूजा का महत्व हिंदू धर्म में बहुत उच्च मान्यता रखता है। इस पूजा का महत्व मुख्य रूप से पतिव्रता, पति-पत्नी के सामरिक संबंधों के उत्कृष्टता और पतियों के लंबे जीवन की कामना में समाहित होता है। यह पूजा विवाहित महिलाओं द्वारा व्रत के रूप में रखी जाती है और उनके पतियों के लंबे जीवन और सुख की प्राप्ति की कामना करती है।

    वट सावित्री पूजा का महत्व इस प्रमुख कथा से जुड़ा हुआ है – महाभारत काल में सत्यवान और सावित्री नामक दंपति थे। सावित्री की पतिव्रता, प्रेम और त्याग की कथा इस पूजा के पीछे महत्वपूर्ण कारक हैं। सावित्री ने यमराज से अपने पति के लिए उनकी जीवन की व्रत कथा के माध्यम से प्राण प्रदान करने की विनती की थी। उनकी अद्भुत पतिव्रता के कारण, यमराज ने उन्हें एक वरदान दिया और उनके पति की जीवन आयु को वापस ले लिया।

    वट सावित्री पूजा की कहानी-

    वट सावित्री पूजा की कहानी महाभारत में सावित्री और सत्यवान के बारे में है। इस कथा के अनुसार, सावित्री एक बहुत ही सुंदर, प्रेमी और चतुर राजकुमारी थी जो अपने पति सत्यवान से बहुत प्रेम करती थी। उन्होंने उसे अपने जीवन का साथी चुना था और सब कुछ उसी के साथ बिताने का वचन दिया था। एक दिन, सावित्री और सत्यवान घने जंगल में घूम रहे थे, जहां वामन यमराज (काल) उनके पास आये। यमराज ने सत्यवान को उनकी आयु की समाप्ति के बारे में बताया और उसे जीवन संभालने के लिए ले जाने की विनती की। सावित्री ने देखा कि सत्यवान की जीवन की मध्यम आयु का समय खत्म हो गया है और उसे यमराज के साथ जाना होगा। सावित्री ने यमराज के पास गयी और उससे अपने पति के लिए उनकी आयु की वृद्धि की विनती की। यमराज ने सावित्री को कई बार रोकने की कोशिश की, लेकिन सावित्री दृढ़ आस्था और समर्पण के साथ यमराज के सामर्थ्य की परीक्षा करती रही।

  • कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल

    इस सप्ताह मेष राशि के जातकों को शुरुआत में कुछ मानसिक तनाव तथा धन से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। हफ्ते के मध्य से स्थितियां आपके पक्ष में बनेंगी। कामकाज को लेकर इस हफ्ते स्थिति सामान्य रूप से चलती रहेगी। कार्यस्थल पर किसी के साथ बहसबाजी में न उलझें। भाई का सहयोग इस हफ्ते आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। छात्र वर्ग के लिए हफ्ता सकारात्मक बना रहेगा। हफ्ते का अंतिम भाग धन लाभ दे सकता है।

    वृषभ लग्नराशि : इस सप्ताह वृषभ राशि के जातकों के धन में वृद्धि के योग रहेंगे। सेहत को लेकर हफ्ते का शुरुआती भाग कुछ नरम बना रह सकता है। कामकाज को लेकर इस हफ्ते तनाव से बचे उचित रहेगा। इस हफ्ते घर में लोगों का आगमन प्रसन्नत्ता देगा। नौकरी से जुड़े जातकों को अधिकारी वर्ग द्वारा अच्छे लाभ प्राप्त हो सकते हैं। संतान के साथ आपका तालमेल अच्छा रहेगा। प्रॉपर्टी से संबंधित कोई लाभ आपको मिल सकता है।

    मिथुन लग्नराशि : इस सप्ताह मिथुन राशि के जातकों को शुरुआती दिनों में सेहत से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। इस हफ्ते आपका धन अधिक खर्च हो सकता है। कामकाज को लेकर भागदौड़ रहेगी, किंतु आपको लाभ मिलेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों का पूर्ण सहयोग आपको मिलता नजर आ रहा है। दाम्पत्य जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। धन का लाभ मिलने से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिजनों का सहयोग मिलेगा।

    कर्क लग्नराशि : इस सप्ताह कर्क राशि के जातकों को धन को लेकर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस हफ्ते आप जहां से लाभ की उम्मीद कर रहे थे, वहां कुछ अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं। यह हफ्ता आपके लिए भाग-दौड़ वाला बना रह सकता है। इस हफ्ते आपकी यात्रा का योग बन सकता है। जीवनसाथी के साथ प्रेमभाव बनाए रखें। हफ्ते के अंतिम भाग में धन लाभ हो सकता है। छात्रों को अपनी मेहनत का उचित लाभ मिलेगा।

    सिंह लग्नराशि : इस सप्ताह सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ कुछ समस्या हो सकती है। अधिकारी वर्ग का सहयोग आपको लाभ दे सकता है। आपका पारिवारिक जीवन इस हफ्ते अच्छा बना रहेगा। माता से स्नेह मिलेगा। धन संबंधी मामलों के लिहाज से हफ्ता आपको लाभ देने वाला रहेगा। छात्रों के लिए भी हफ्ता अच्छे परिणाम देने वाला रहेगा। यात्रा का योग रहेगा। सेहत का ध्यान रखें, शारीरिक थकावट हो सकती है।

    कन्या लग्नराशि : इस सप्ताह कन्या राशि के जातकों को शुरुआत में कोई तनाव परेशान कर सकता है। कार्यक्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी रहेगी। जीवनसाथी का सहयोग आपको लाभ देगा। कार्यक्षेत्र में रुके हुए कार्य इस हफ्ते गति पकड़ेंगे। धन लाभ को लेकर यह हफ्ता आपको अचानक सफलता दे सकता है। संतान को लेकर कोई समस्या हो सकती है। छात्र वर्ग इस हफ्ते अधिक मेहनत करेंगे। इस हफ्ते अचानक किसी यात्रा का प्रोग्राम बन सकता है।

    तुला लग्नराशि : इस सप्ताह तुला राशि के जातकों को शुरुआती भाग में शारीरिक समस्या तथा खर्च से जूझना पड़ सकता है। हफ्ते के मध्य भाग से भाग्य का सहयोग आपको सफलता दिलाने वाला रहेगा। नौकरी से संबंधित कोई शुभ समाचार इस हफ्ते आपको मिल सकता है। जीवनसाथी के साथ आपका तालमेल अच्छा बना रहेगा। यात्रा के योग बन सकते हैं तथा खर्च भी होगा। हफ्ते का अंतिम भाग आपकी धन संबंधी समस्या कम कर सकता है।

    वृश्चिक लग्नराशि : इस सप्ताह वृश्चिक राशि के जातकों को अपने व्यापार तथा वैवाहिक जीवन में कुछ समस्या देखने को मिल सकती है। इस हफ्ते व्यापार से संबंधित जरूरी निर्णय लेने से बचें। हफ्ते के मध्य में सेहत संबंधी दिक्कतें आपको परेशान कर सकती हैं। नौकरी से जुड़े लोगों के लिए यह हफ्ता अच्छे फल देने वाला रहेगा। अधिकारी वर्ग के साथ आपके संबंध आपको लाभ दे सकते हैं। अपने क्रोध तथा खर्च पर नियंत्रण रखें।

    धनु लग्नराशि : यह सप्ताह धनु राशि के जातकों का मन कुछ खिन्न-सा बना रह सकता है। माता-पिता की सेहत को लेकर आप परेशान हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपके कार्य सुचारु रूप से चलते रहेंगे। इस हफ्ते आपके व्यापार में वृद्धि के योग रहेंगे। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को यह हफ्ता सफलता दे सकता है। यात्रा का योग बनेगा। इस हफ्ते धन का खर्च आपको परेशान कर सकता है। सेहत का ध्यान रखें तथा अपनी वाणी पर संयम बनाए रखें। धर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी।

    मकर लग्नराशि : इस सप्ताह मकर राशि के जातकों को धन संबंधी चिंता सता सकती है। कामकाज को लेकर इस हफ्ते स्थिति सामान्य बनी रहेगी। व्यापार से संबंधित कोई समाचार इस हफ्ते आपको प्रसन्नता दे सकता है। जीवनसाथी के साथ आपका तालमेल इस हफ्ते अच्छा बना रहेगा। छात्र वर्ग को इस हफ्ते अधिक परिश्रम करना पड़ेगा। सेहत को लेकर इस हफ्ते छोटी-मोटी समस्याएं बनी रह सकती हैं। धन का खर्च सोच-समझ कर करें।

    कुंभ लग्नराशि : इस सप्ताह कुंभ राशि के जातकों को शुरुआत में कामकाज को लेकर कुछ दिक्कतें बनी रह सकती हैं। कामकाज को लेकर किसी के साथ बहसबाजी में न उलझें। हफ्ते के मध्य भाग में आपको धन की प्राप्ति हो सकती है। इस हफ्ते आपको कोई उपहार मिल सकता है। आपका वैवाहिक जीवन अच्छा बना रहेगा, जीवनसाथी के क्रोध में वृद्धि संभव है। छात्र वर्ग को लाभ के योग रहेंगे। यात्रा हो सकती है। भाई-बहनों से मुलाकात हो सकती है।

    मीन लग्नराशि : इस सप्ताह मीन राशि के जातकों को व्यापार में लाभ तथा उन्नति मिलने के योग रहेंगे। इस हफ्ते आलस्य तथा अहंकार के चलते आपको कोई हानि मिल सकती है। इस हफ्ते भाई तथा मित्र के साथ मनमुटाव न हो इसका ध्यान रखें। आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि के योग बन सकते हैं। धन को लेकर किसी प्रकार का वार्तालाप आपको लाभ दे सकता है। आपको लाभ के नए मार्ग मिल सकते हैं। अपनी तथा माता की सेहत का ध्यान रखें तथा गलत खानपान से बचें।

    (ज्योतिषी विशाल वाष्र्णेय कलाशांति ज्योतिष के संस्थापक हैं। यह साप्ताहिक राशिफल आपकी लग्नराशि के आधार पर आधारित है। ये समस्त राशिफल सामान्य हैं। किसी भी निश्चित परिणाम पर पहुंचने के लिए ज्योतिषी से दशा-अंतर्दशा और जन्मपत्री का पूर्ण रूप से अध्ययन कराना उचित रहता है।)

  • Aaj Ka Rashifal 26 May 2023: पढ़िए आज का राशिफल

    Aries Horoscope(मेष )- इस राशि के जातकों का आज का दिन शुभ रहेगा घर में मांगलिक कार्य होने की संभावना है। साथी के साथ विवाद हो सकता है सावधान रहें आज आपका कोई हितैषी आपके साथ छल करेगा। 

    वृषभ(Taurus Horoscope)- इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुशमिजाज रहेगा।  दोस्तों के साथ कहीं बाहर जाना पड़ सकता है बैंक से जुड़े कार्य पूरे होंगे। व्यपार में लाभ के संकेत हैं। 

    मिथुन (Gemini Horoscope)- इस राशि के जातकों को आज सावधान रहने कीआवश्यकता है। किसी अन्य की वजह से आपका रोजगार भी जा सकता है। घर से निकलते वक्त किसी से न उलझें यह आपको पुलिस थाने के चक्कर लगवा सकता है। बच्चों की ओर से कोई शुभ संकेत मिलेगा। 

    कर्क (Cancer Horoscope)- कर्क राशि के जातकों का दिन आज जीवन साथी के साथ व्यतीत होगा। लम्बे समय से चला आ रहा विवाद खत्म होगा प्रेम विवाह के योग बन रहे हैं। आज यदि आप कोई शुभ काम करते हैं तो उसमे आपको सफलता मिलेगी। 

    सिंह (Leo Horoscope)- इस राशि के जातकों को सचेत रहने की आवश्यकता है अपने भेद किसी के सामने उजागर न करें। हितैसी से ठगे जाने की संभावना है। परिवार में जमीन विवाद हो सकता है। 

    कन्या (Virgo Horoscope Today)- इस राशि के जातकों का दिन आज शुभ रहेगा। प्रेमी का सहयोग मिलेगा घर में विवाह की बात होगी। माता -पिता से प्रेम विवाह को लेकर विवाद हो सकता है जीवन में सुख और समृद्धि आने के संकेत मिल रहे हैं। 

    तुला (Libra Horoscope Today)- इस राशि के जातकों को धन हानि की संभावना है। पुत्र पक्ष से असंतुष्ट रहेंगे कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। जीवन साथ का सहयोग मिलेगा। 

    वृश्चिक (Scorpio Horoscope Today)- इस राशि के जातकों को आज धन हानि हो सकती है घर में ख़ुशी का माहौल रहेगा जीवन साथी का सहयोग मिलेगा कोर्ट कचहरी के कार्यों से छुटकारा मिल सकता है 

    धनु ( Sagittarius Horoscope Today)- इस राशि के जातकों को प्रेमी का सहयोग मिलेगा घर में विवाह की बात होगी। पारिवारिक मामलों में विवाद हो सकता है। 

    मकर (Capricorn Horoscope Today)-इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुशमिजाज रहेगा।  दोस्तों के साथ कहीं बाहर जाना पड़ सकता है बैंक से जुड़े कार्य पूरे होंगे। व्यपार में लाभ के संकेत हैं। 

    कुंभ (Aquarius Horoscope Today)-इस राशि के जातकों का दिन आज शुभ रहेगा। प्रेमी का सहयोग मिलेगा घर में विवाह की बात होगी। माता -पिता से प्रेम विवाह को लेकर विवाद हो सकता है जीवन में सुख और समृद्धि आने के संकेत मिल रहे हैं। 

    मीन (Pisces Horoscope Today)- इस राशि के जातकों को आज सावधान रहने कीआवश्यकता है। किसी अन्य की वजह से आपका रोजगार भी जा सकता है। घर से निकलते वक्त किसी से न उलझें यह आपको पुलिस थाने के चक्कर लगवा सकता है।