Category: religious

  • Akshaya Tritiya 2023: आज कर लें यह काम तो साल भर में होगा आपका विवाह

    Akshaya Tritiya 2023: आज पूरा भारत अक्षय तृतीया का पावन पर्व मना रहा है। सुबह से आज बाजार रंगीन हैं लोग आज-सोने के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आज का दिन उन लोगों के लिए भी बेहद खास है जो लोग अपनी शादी को लेकर परेशान हैं। अगर आज अक्षय तृतीया के दिन आप यह एक काम करते हैं तो निश्चित तौर पर आपकी शादी में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और आपकी शादी जल्द ही हो जाएगी। 

    धर्म ग्रन्थ के मुताबिक़ अगर कोई व्यक्ति आज के दिन हाथ में नारियल लेकर अपने गोत्र का नाम लेता है और सात बार पीपल के परिक्रमा करके नारियल पीपल को अर्पित करता है तो उस व्यक्ति के विवाह में आने वाली सभी रुकावटें दूर होती हैं और मान्यता है कि साल भीतर व्यक्ति का विवाह हो जाता है। 

    इसके आलावा अगर किसी का विवाहिक जीवन कष्टों से घिरा है तो आज के दिन अगर दाम्पत्य मिट्टी का कलश दान करते हैं और रुद्राभिषेक करवाते हैं तो उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है और दाम्पत्य जीवन सुखी हो जाता है। 

    धर्म ग्रंथो में बताया गया है कि यदि कोई आज के दिन  ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः मंत्र का 108 बार जाप करता है तो उसके जीवन से जुडी सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस मन्त्र का जाप विशेष रूप से उन लोगों को अवश्य करना चाहिए जो लोग विवाह न होने की समस्या से परेशान हैं और लम्बे समय से उनके विवाह में बाधाएं आ रही हैं। 

  • आज है गंगा सप्तमी वैवाहिक जोड़ा जरूर करे यह काम

    आध्यात्म- हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। कहते हैं अगर कोई विधि-विधान से पूजा -पाठ करता है तो उस व्यक्ति का जीवन सदैव सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ता है। वहीं कोई भी पूजा ऐसी नहीं होती जो बिना गंगा जल के पूरी हो जाए। कलयुग में गंगा जल को अमृत के समान माना गया है। धर्म ग्रंथो के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से गंगाजल का सेवन करता है तो उसको मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    वहीं आज यानी 27 अप्रैल को गंगा सप्तमी है। गंगा सप्तमी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। कहते हैं अगर इस दिन कोई गंगाजल के विशेष उपाय करता है तो उसके सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक़ आज गंगा सप्तमी के दिन यदि कोई शिव का जलाभिषेक करता है और उनपर चढ़ा गंगा जल अपने पूरे घर में छिड़क देता है तो व्यक्ति का जीवन सुखी रहता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं होता। वहीं अगर आप शनि के प्रभाव से परेशान हैं तो आज के दिन आप गंगाजल में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ को अर्पित करते हैं तो इससेशनि का प्रभाव खत्म होता है। 

    वहीं कई लोगों से हमने सुना होगा की लड़कियों का विवाह नहीं हो रहा है। बनी – बनाई बात बिगड़ जा रही है तो ऐसे में लड़कियों या लड़कों को गंगाजल से बने पानी में हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए। अगर आप ऐसा 21 या 51 दिन करते हैं तो आपके विवाह में आने वाली अड़चनें दूर हो जाएंगी और आपका जीवन सुखी रहेगा। इसके अलावा यदि किसी के दाम्पत्य जीवन में समस्याएं आ रही हैं तो वह व्यक्ति रोजाना 108 बार  ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः.मंत्र का जाप करे। इससे आपके दाम्पत्य जीवन में आने वाली परेशानियां खत्म होंगी। 

  • वैशाख पूर्णिमा व्रत कब?

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    वैशाख पूर्णिमा व्रत कब?

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    5 मई 2023 को होगी वैशाख पूर्णिमा

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    वैशाख पूर्णिमा पर लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण

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    पूर्णिमा पर गंगा, नर्मदा में स्नान से धुलते हैं पाप

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    पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्रदेव माने गए हैं.

  • साल गायत्री जयंती 31 मई 2023 को मनाई जाएगी

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    साल गायत्री जयंती 31 मई 2023 को मनाई जाएगी

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    ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष को मनाई जाएगी गायत्री जयंती

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    माता गायत्री को परब्रह्मस्वरूपिणी कहा जाता है

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    माता गायत्री की पूजा से ज्ञान में वृद्धि होती है

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    ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्. मंत्र

  • केदारनाथ मंदिर के कपाट मंगलवार सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर खुले

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    केदारनाथ मंदिर के कपाट मंगलवार सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर खुले

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    .इस दौरान हजारों श्रद्धालु वहां पर मौजूद रहे

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    इस दौरान मंदिर परिसर को 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया

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    श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई

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    केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी जगद्गुरु रावल ‘भीम शंकर लिंग शिवाचार्य’ ने कपाट खोले

  • Guru Pushya Yog 2023: इस दिन कर लें यह काम, दूर होंगी विवाह में आने वाली अड़चन

    Guru Pushya Yog 2023: 27 अप्रैल 2023 को गुरु पुष्य योग है। अगर कोई व्यक्ति इस दिन ज्योतिष के बताए हुए उपाय का पालन करता है तो उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि गुरु पुष्य योग कलह को खत्म करने के लिए सबसे अधिक प्रभावी है। 

    गुरु पुष्य योग वाले दिन अगर आप थोड़ी सावधानी के साथ अपने जीवन को सही दिशा देने के लिए प्रयास करते हैं तो इससे न सिर्फ आपको आपकी समस्याओं से निजात मिलता है अपितु आपके विवाह में आने वाली अड़चनें भी दूर होती हैं। 

    आध्यात्म के मुताबिक़ अगर किसी लड़के या लड़की का विवाह नहीं हो रहा है, बार-बार बनी बात बिगड़ जा रही है, रिश्ते तो आते हैं लेकिन कोई न कोई कमी निकाल कर शादी के लिए मनाही हो जाती है तो गुरु पुष्य योग के दिन लड़की और लड़के को स्नान करने वाले पानी में हल्दी मिलाकर स्नान करना चाहिए। 

    इसके साथ ही इस दिन सूखे नारियल के गोटे में शक्कर, तिल, तेल और आटे का मिश्रण लेकर उस नारियल के गोटे में छेद करके उसमें डाल दें तथा उसे घर के मंदिर में रखकर भगवान विष्णु और ईष्टदेव-कुलदेव का ध्यान करके शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें। इसके बाद नारियल को मिट्टी में रख दें चीटियां उसको अपना आहार बना लेंगी और आपकी समस्याओं को धीरे-धीरे अंत हो जाएगा। 

  • जानें गौतम बुद्ध का के बारे में महत्वपूर्ण बातें

    गौतम बुद्ध एक धर्मगुरु थे जिन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। वे नेपाल और भारत के बौद्ध धर्म के महापुरुष माने जाते हैं। उन्होंने 6वीं या 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में जन्म लिया था। उनके जन्म स्थान के बारे में कुछ विवाद है, लेकिन आमतौर पर उन्हें नेपाल के लुम्बिनी नगर में जन्मा माना जाता है। उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश समय ध्यान और तत्त्वज्ञान की खोज में व्यतीत किया और अपने उपदेशों के माध्यम से लोगों को दुःख से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया।

    गौतम बुद्ध का जीवन परिचय-

    गौतम बुद्ध ने जन्म 6 वीं या 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में नेपाल के लुम्बिनी नगर में लिया था। उनके पिता शुद्धोधन नाम का राजा था जो कपिलवस्तु नगर के राजा थे। उनकी माता का नाम माया था। गौतम बुद्ध के जन्म के बाद, वे एक शाक्य क्षत्रिय परिवार में पले। उन्होंने बचपन से ही दुःख और मृत्यु के अनुभव किये थे जो उन्हें अधिक ध्यान की ओर खींचते गए।

    गौतम बुद्ध ने 29 साल की उम्र में अपने घर से भागकर संन्यास ले लिया। वे दुनियाभर में धर्मगुरुओं और आध्यात्मिक शिक्षकों के पास गए और विभिन्न तत्त्वों को अध्ययन करने लगे। उन्हें अधिकतर आध्यात्मिक शिक्षाओं का पूर्णतः निराकरण कर दिया गया था।

    फिर उन्होंने सत्य और मौन का मार्ग अपनाया और महाबोधि वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान का अभ्यास करते हुए अपने अंतिम निर्वाण प्राप्त किया। इससे पहले, उन्होंने दुनियाभर में अपने उपदेशों का प्रचार किया।

    गौतम बुद्ध का जीवन संघर्ष-

    गौतम बुद्ध का जीवन संघर्ष उनकी तपस्या, अनुभव, और उनके दिए गए उपदेशों में दिखता है। उन्हें अपने जीवन के दौरान कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। गौतम बुद्ध का पहला संघर्ष उनके अनुभवों के अभाव में था। उन्हें अपने दुःखों के साथ सामना करना पड़ा और उन्हें समझने की कोशिश की गई।दूसरा संघर्ष उनके त्याग के साथ था। उन्होंने अपने राजकुमार के स्थान से संन्यास ले लिया था और अपनी सम्पत्ति, स्त्रियों और वैभव से विचलित हुए।तीसरा संघर्ष उनके उपदेशों को स्थापित करने के लिए था। गौतम बुद्ध को शिक्षाओं को संभालने के लिए अपने अनुभवों का उपयोग करना पड़ा। उन्होंने अपने शिष्यों को अपनी संदेश का प्रचार करने के लिए प्रेरित किया। चौथा संघर्ष उनके शिष्यों की सुरक्षा थी। उन्होंने उन्हें स्वस्थ रहने के लिए समझाया और उन्हें धर्म के मार्ग पर बने रहने के लिए प्रेरित किया।

    गौतम बुद्ध उपदेश-

    1. चतुर आर्य सत्यानुव्रत:

      चतुर आर्य सत्यानुव्रत जैन धर्म के मूल अंगों में से एक है। इस अवधि में, जैन श्रवकों को चार आर्य सत्यों का अनुगमन करना चाहिए। ये चार आर्य सत्य हैं:  अहिंसा परमो धर्मः (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है): यह मानव जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सत्य है। जैन धर्म में, अहिंसा का अर्थ होता है किसी भी प्राणी के प्रति क्रूरता या हिंसा से बचना। जैन श्रवकों को इस सत्य का अनुसरण करना चाहिए और किसी भी प्राणी के प्रति अत्यंत सदभाव व्यक्त करना चाहिए। अनेकान्तवाद परमो धर्मः (अनेकान्तवाद सबसे बड़ा धर्म है): यह सत्य वस्तु के विवेक के लिए होता है। यह मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हम दूसरों के विचारों को समझते हैं और उनसे सहयोग करते हुए समस्याओं का समाधान करते हैं। अनिर्वेदी परमो धर्मः (अनिर्वेदी सबसे बड़ा धर्म है): यह सत्य साधक के लिए होता है जो ध्यान करता है। यह मानव जीवन के लिए महत्वप

    2. अहिंसा:  अहिंसा एक मूलभूत तत्त्व है, जो बहुत से धर्मों और दर्शनों के मूल में होता है। इस शब्द का अर्थ होता है “हिंसा से बचना” या “किसी भी प्राणी के प्रति क्रूरता या हिंसा न करना”। अहिंसा के मूल उद्देश्य है सभी प्राणियों के प्रति सदभाव और समझदारी का विकास करना। इससे हम अपनी स्वभाविक भावनाओं में से बुराई को दूर करते हुए शांति और सुख की अनुभूति कर सकते हैं। अहिंसा के मूल उपदेशों को संक्षेप में निम्नलिखित रूप में व्यक्त किया जा सकता है:  दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना। किसी भी प्राणी के प्रति क्रूरता या हिंसा से बचना। अहिंसा का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत उच्च माना जाता है और यह हिंसा के खिलाफ लड़ाई में अपनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण है। अहिंसा धर्म के मूल तत्त्वों में से एक है और बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिंदू धर्म के मूल उपदेशों में से एक है। सभी प्राणियों के प्रति समझदारी व्यक्त करना।

    3. मध्यम मार्ग:  

      मध्यम मार्ग बौद्ध धर्म के तीन मुख्य मार्गों में से एक है। इसे संसार से मुक्ति प्राप्त करने का सरल तथा मध्यम मार्ग माना जाता है। मध्यम मार्ग अर्थात् “मध्य रास्ता” बुद्ध के उपदेशों का मूल भाव था, जिसमें संसार के दुःखों से मुक्त होने के लिए उच्चतम सुख और निर्वाण की तलाश नहीं की जाती थी।

      इस मार्ग के अनुयायी अपने जीवन को उच्चतम सुख और निर्वाण की तलाश में खत्म नहीं करते, बल्कि संसार के सभी मुद्दों का उचित समझने तथा इसे समझने की कोशिश करते हैं। इसके अनुयायी अन्य दो मार्गों के अनुयायियों से अलग होते हैं जो उच्चतम सुख या निर्वाण की खोज में लगे रहते हैं।

      मध्यम मार्ग के अनुयायी चार आदर्शों का पालन करते हैं – सहानुभूति, मौन, शील और ध्यान। सहानुभूति का अर्थ होता है सभी जीवों के प्रति दया और करुणा रखना, मौन का अर्थ होता है वचनों की कमी और अनुचित बोलचाल से बचना, शील का अर्थ होता है

      अनिच्छा:  

      अनिच्छा एक धार्मिक अवधारणा है जो बौद्ध धर्म के मूल तत्वों में से एक है। इस अवधारणा के अनुसार, सभी संसारी सत्ताएं अनित्य होती हैं, यानि उनका जन्म, मृत्यु और संसार में अस्थायी रूप से रहना एक निश्चित समय तक होता है। इस अवधारणा के अनुसार, संसार में कुछ भी स्थायी नहीं होता है, इसलिए इसमें आसक्ति रखना उचित नहीं होता है।

      बौद्ध धर्म में, सभी दुखों की मूल वजह आसक्ति होती है, जो इच्छाओं और अभिलाषाओं के साथ जुड़ी होती है। इसलिए, अनिच्छा का अनुसरण करने के द्वारा, एक व्यक्ति दुःखों से मुक्त हो सकता है। यह मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जीवन के दुखों को कम करने में मदद करता है और शांति और सुख का अनुभव करने में मदद करता है।

    4. अनात्मवाद:

      अनात्मवाद गौतम बुद्ध के उपदेशों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अनुसार, आत्मा नहीं होती है। बुद्ध ने कहा कि आत्मा एक कल्पना है जो हमारी मन की एक अवधारणा है। इससे हम अपने आप को दुख से मुक्त नहीं कर सकते हैं।

      बुद्ध ने यह भी बताया कि हमारे संज्ञान और अनुभवों की एक श्रृंखला होती है, जिसमें कोई अंतर्निहित आत्मा नहीं होती है। वे आत्मा की अवधारणा के विरोध में, अनित्यता, दुःख और अज्ञानता के कारणों को बताते हुए उसे अस्तित्वहीन मानते थे।

      इसके साथ ही बुद्ध के अनात्मवाद का महत्वपूर्ण अर्थ है कि हम संघर्षों, संदेहों और दुखों से मुक्त हो सकते हैं क्योंकि हमारे संज्ञान और अनुभवों की श्रृंखला को हम अस्तित्वहीन मानते हुए उससे से जुड़े सब कुछ अस्थायी और अनित्य होते हुए उससे मुक्त हो सकते हैं।

  • जाने कब शुरू होगा जेष्ठ माह और इस माह में कौन से काम करना है जरूरी

    देश – 6 मई २०२३ से जेष्ठ का महीना शुरू हो रहा है. यह महीना तेज गर्मी आम के सीजन के लिए जाना जाता है.वहीं ज्योतिष के मुताबिक़ यदि आप जेष्ठ माह में कुछ विशेष उपाय करते हैं तो आपके भाग्य का उदय होता है और कुंडली से मंगल दोष दूर हो जाता है. कहते हैं इस महीने में जो व्यक्ति माता लक्ष्मी की अराधना करता है उसके घर में सुख-समृधि का वास होता है और व्यक्ति धन से सम्पन्न होता है. 

    आध्यात्म के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति जेष्ठ महीने में एक समय भोजन करता है तो उसको आरोग्य जीवन मिलता है और वह जीवन पर्यंत सुखी रहता है. महाभारत के अनुसार जेष्ठ माह में व्यक्ति को ‘ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।। का जाप करना चाहिए इसके साथ ही अगर आपकी कुंडली में अकाल म्रत्यु का दोष है या आपके मन में नकारात्मक विचार अधिक आते हैं तो आपको जेष्ठ माह में सफेद या काले तिल का दान करना चाहिए और भूखे व्यक्ति को भोजन करवाना चाहिए. 

    इसके आलावा जेष्ठ माह में सूर्य का ताप अधिक होता है प्रत्येक व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठाना चाहिए और सूर्य को अर्घ देना चाहिए इससे व्यक्ति की मान सम्मान प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होती है और अगर व्यक्ति तांबे के बर्तन में भोजन ग्रहण करता है तो उसका स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इसके साथ ही जेष्ठ माह में तपन बहुत होती है निर्जीव जानवर के लिए यह महीना काफी कष्टदायक साबित होता है आपको अपने घर की छत पर पानी और उनके लिए दाना अवश्य रखना चाहिए. अगर आप जेष्ठ माह में यह सभी काम करते हैं तो इससे आपका कल्याण होता है और आपके जीवन में सुख-सम्रद्धि बनी रहती है.

  • Chandra Grahan 2023 Live: आज है साल का पहला चन्द्र ग्रहण, जानें प्रमुख बातें

    Lunar Eclipse आज साल का पहला चन्द्र ग्रहण लगने जा रहा है यह ग्रहण रात में 8 बजकर 46 मिनट से शुरू होगा और मध्यरात्रि के बाद 1 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगा. जानकारों  के मुताबिक़ साल का पहला चन्द्र ग्रहण भारत में नही दिखाई देगा यह एशिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्वी यूरोप के कुछ भागों में दिखाई देगा. 

    जानें क्यों होता है चन्द्र ग्रहण- 

    चंद्र ग्रहण(Lunar eclipse) एक उपग्रह के पृथ्वी के और चंद्रमा के बीच में आने वाली एक घटना है, जिसमें पृथ्वी चंद्रमा के बीच से गुजरती है और इस प्रकार चंद्रमा के सीधे समानांतर वर्तमान स्थान से गुजरती है। चन्द्र ग्रहण जब तकनीकी शब्दों में कहें तो, यह एक उपग्रह जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरता है, जब चंद्रमा धरती की तलहटी से गुजरता है तो इस प्रकार से हो जाता है।

    चन्द्र ग्रहण देखने में बहुत रोमांचक होता है और इसे आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि, चन्द्र ग्रहण का ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व भी होता है। अधिकांश लोग इसे स्पष्टिकरण के लिए एक अच्छा समय मानते हैं जब वे नए काम शुरू करने जा रहे होते हैं। इसके अलावा, धार्मिक रूप से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जहाँ लोग इस घटना को पूजनीय मानते हैं और इस अवसर पर भक्ति व साधना करते हैं।

    चन्द्र ग्रहण के दौरान इन कामों से करें परहेज –

    चन्द्र ग्रहण के दौरान धर्म और ज्योतिष के अनुसार कुछ निषेधात्मक निर्देश होते हैं। इनमें से कुछ निर्देश निम्नलिखित हैं:

    1. कुछ लोग चन्द्र ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करते हैं। इसे अमावस्या व्रत के समान माना जाता है और लोग इस अवसर पर उपवास करते हैं।

    2. धार्मिक रूप से, इस समय पर कुछ लोग यज्ञ करते हैं या पूजा और मंत्र जप करते हैं।

    3. चन्द्र ग्रहण के दौरान कुछ लोग बाहर नहीं जाते हैं। इसे शुभ मुहूर्त माना जाता है जिसे कुछ लोग घर पर ही बिताते हैं।

    4. चन्द्र ग्रहण के दौरान कुछ लोग नहा नहीं सकते हैं। यह एक धार्मिक निषेध है।

    5. इस समय कुछ लोग चंद्रमा को देखने के लिए दूरबीन का उपयोग करते हैं। धार्मिक निषेध के अलावा, इसे सुनिश्चित करना चाहिए कि आप सुरक्षित तरीके से देखते हैं जिससे आपकी आंखों में कोई क्षति न हो।

  • Buddha Purnima 2023: बुद्ध पूर्णिमा पर पढ़ें गौतम बुद्ध के सुविचार

    Buddha Purnima 2023: बुद्ध की जयंती और बुद्ध पूर्णिमा दोनों ही बुद्धिस्त धर्म के अनुयायियों द्वारा मनाया जाने वाला एक उत्सव है। ये दोनों ही तिथियाँ बुद्ध के जीवन और संदेश को याद करने के उद्देश्य से मनाई जाती हैं। बुद्ध की जयंती उत्तर भारत में अप्रैल-मई महीने में मनाई जाती है, जबकि बुद्ध पूर्णिमा पूरे भारत में मनाई जाती है और यह चैत्र माह की पूर्णिमा को कहते हैं। इस वर्ष 5 मई 2023, शुक्रवार यानी आज के दिन बुद्ध की जयंती या बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है. आज हम बुद्ध की जयंती पर आपको बुद्ध के कुछ सुविचार बताने जा रहे हैं .

    जाने बुद्ध के सुविचार – 

    गौतम बुद्ध के सुविचारों में अनेक महत्वपूर्ण सन्देश हैं जो आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शन के रूप में काम आते हैं। नीचे कुछ ऐसे ही उनके प्रसिद्द सुविचार दिए गए हैं:

    1. तृष्णा ही दुःख का कारण है।
    2. जो कुछ हम सोचते हैं, उससे हम बन जाते हैं।
    3. शांति से जुड़े रहो क्योंकि शांति सबसे बड़ी संपत्ति है।
    4. तुम अपने सोच से जो तुम बनते हो, तुम्हारी सोच तुम्हें वहीं ले जाती है।
    5. न जीत में ज्यादा नाज़ हो, न हार में हिम्मत हार जाओ।
    6. दूसरों की बुराई करने से पहले अपने अंदर की बुराई को हटा दो।
    7. एक शिक्षक सभी शिक्षाओं का शिक्षक होता है।
    8. सबको प्यार करो, सबका भला चाहो, सबकी मदद करो।
    9. कोई भी दुःख नहीं दे सकता अगर तुम उससे सहमत नहीं होते।
    10. निर्भीक हो क्योंकि सभी कुछ अस्थायी है।