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एक चीज जो है धन से भी अधिक कीमती
ज्ञान– हमें अक्सर यह लगता है कि हम धन के बलबूते पर किसी को जीत सकते हैं। धन से व्यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है। यदि हमारे पास धन नहीं है तो हम व्यर्थ हैं और हमारे जीवन का कोई मोल नहीं है।वास्तव में धन उन सभी भौतिक चीजों की तरह है जिसे हम हासिल कर सकते हैं। लेकिन एक चीज हमारे जीवन मे ऐसी भी है जिसे हम कमा नहीं सकते और अगर उसे हमने व्यय कर दिया तो हमें हमेश पश्चाताप करना होगा।आज हम बात कर रहे हैं समय की। समय व्यक्ति के लिए सबसे कीमती है। समय का कोई मोल नहीं। यदि व्यक्ति अपना समय गवा देता है तो वह उसे धन से भी अर्जित नहीं कर सकता है। धन को व्यक्ति कठिन परिश्रम से कभी भी कमा सकता है और धन के माध्यम से कुछ भी खरीद सकता है। लेकिन वह है जिसे व्यक्ति न धन से खरीद सकता है न संघर्ष से पुनः प्राप्त कर सकता है।क्योंकि समय गतिमान है और इसका खर्च व्यक्ति को सबसे अधिक महंगा पड़ता है। अगर आप अपने समय का सदुपयोग नहीं करते हैं तो आपको जीवन पर्यंत कष्ट झेलना पड़ता है और समस्याओं के चलते आप अपना अधिक समय यही सोचने में व्यतीत कर देते हैं कि आप सुख की प्राप्ति कैसे करें। -
स्त्री के ये तीन गुण खोलते हैं तरक्की के सभी द्वार- आचार्य चाणक्य
धर्म:- कहते हैं स्त्री अगर चाहे तो वह घर को बना भी सकती है और घर को बिगाड़ भी सकती है। घर की तरक्की स्त्री के हाथ मे होती है। वहीं आचार्य चाणक्य ने स्त्री के तीन गुणों के विषय मे कहा है कि यदि कोई महिला इन गुणों से परिपूर्ण रहती है तो उस घर मे सुख समृद्धि का वास होता है।
आचार्य चाणक्य का कहना है कि अगर कोई स्त्री धन का व्यय सुनियोजित ढंग से करना जानती है। अगर स्त्री को धन का महत्व पता है और वह एक-एक पैसे का हिसाब रखती है। तो उस घर पर माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है और घर मे सुख समृद्धि का वास होता है।आचार्य चाणक्य का कहना है कि अगर कोई स्त्री सयम रखना जानती है। उसे यह पता रहता है कि शांत स्वभाव से वह हर परिस्थिति का हल निकाल सकती है। तो ऐसी स्त्री को जीवन मे सुख प्राप्त होता है और यह अपने घर को प्रेम भाव से जोड़कर रखती हैं।आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि स्त्री संतोषजनक है। तो वह घर की तरक्की में सभी द्वार खोल देती है। जिस स्त्री में संतोष का भाव होता है वह घर के लिए लक्ष्मी का रूप होती है और उसके आने से घर मे तरक्की होती है। -
इन तीन आदतों वाले लोगों को जीवन में सदैव समस्याओं से जूझना पड़ता है
ज्ञान- व्यक्ति अपने जीवन में कई गलतियां करता है और उन गलतियों से सीखता भी है। क्योंकि गलतियां ही एक ऐसी हैं जो हमें सबसे अधिक सिखाती हैं। लेकिन इन सबके बाद भी जीवन से जुड़ी कुछ गलतियां ऐसी भी हैं जिन्हें यदि आप करते हैं तो आपको अपने जीवन मे कष्ट झेलना पड़ता है और आप सदैव कंगाल बने रहते हैं।आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन मे फजूल के खर्च करने की गलती करता है। तो उसे सदैव समस्याओं से जूझना पड़ता है और वह कंगाल हो जाता है। वहीं जब उस व्यक्ति का कठिन समय आता है तो उसे उन परिस्थितियों से निपटने को कोई सकारात्मक मार्ग नहीं दिखाई देता है।आचार्य चाणक्य का कहना है कि अगर आप अपने घर की रसोई में जूठे बर्तन रखते हैं। तो आपके घर से माता लक्ष्मी रुष्ठ हो जाती हैं और आपको अपने जीवन मे कभी भी तरक्की नहीं मिल पाती है।आचार्य चाणक्य के मुताबिक वह लोग अपने जीवन में सदैव समस्याओं से जूझते हैं। जो दूसरों की ईर्ष्या करते हैं। ईर्ष्यालु व्यक्ति को कभी तरक्की हासिल नहीं होती है और न ही ऐसे लोग कभी अपने जीवन मे सुखी रह पाते हैं। -
अगर इन चार चीज़ों का किया लेन देन तो आ जाएगी दरिद्रता
ज्ञान– हमने अक्सर देखा है कि लोग एक दूसरे से सामान मांग कर अपना काम चलाते हैं। वहीं कुछ लोगों की आदत उधार सामान मांगने की है। लेकिन आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति कुछ विशेष चीजों को उधार लेता है। तो यह दरिद्रता का प्रतीक है। ऐसी चीज़ें व्यक्ति को दरिद्र बनाती हैं और उसकी तरक्की रुक जाती है।जानें किन चीजों को कभी नहीं लेना चाहिए उधार-
नमक-
नमक घर के भोजन में उपयोग होने वाली सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है। नमक के बिना भोजन में स्वाद नहीं आता है। लेकिन वास्तु शास्त्र के मुताबिक यदि आप किसी व्यक्ति को नमक उधार देते हैं या किसी से नमक लेते हैं। तो आपके घर मे दरिद्रता का वास हो जाता है। वहीं आचार्य चाणक्य का कहना है कि नमक उधार लेने और देने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है और घर की सुख-समृद्धि नष्ट हो जाती है।कंघा-
आचार्य चाणक्य का कहना है कि व्यक्ति की प्रत्येक उपयोग की गई वस्तु का कनेक्शन उसकी किस्मत से है। अगर आप किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा उपयोग किया गया कंघा इस्तेमाल करते हैं तो आपको समस्याओं से जूझना पड़ सकता है और आपका स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है।पुस्तक और पढाई की सामग्री-
आचार्य चाणक्य का कहना है कि व्यक्ति का ज्ञान उसकी सफलता का मार्ग निर्धारित करता है। जो व्यक्ति अपने ज्ञान को बढ़ाता है। उसे जीवन मे कभी भी समस्याओं से नहीं जूझना पड़ता। लेकिन अगर कोई पढाई की सामग्री उधार लेकर पढाई करता है और दूसरों पर ही निर्भर रहता है। तो उसके ज्ञान अर्जित करने में बाधाएं उत्पन्न होती हैं और उसका यह उधार प्रत्यक्ष रूप से उसकी सफलता को प्रभावित करता है।आभूषण-
आचार्य चाणक्य का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरों से आभूषण उधार लेता है। तो उस व्यक्ति को समस्याओं से जूझना पड़ता है। घर मे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। वहीं व्यक्ति को दूसरों की ऊर्जा प्रभावित करने लगती है। जिससे व्यक्ति का भाग्य उसका साथ नहीं देता है। -
जानें कैसे बनें सबसे अधिक शक्तिशाली
ज्ञान– आज के समय मे हर कोई शक्तिशाली बनना चाहता है। हर किसी की यही अभिलाषा है कि वह अन्य व्यक्ति से अधिक सर्वश्रेष्ठ बने। लेकिन यह कोई नहीं समझ पाता है कि कोई व्यक्ति शक्तिशाली कैसे बन सकता है।
ज्ञानात्माओं का कहना है कि लोगों को लगता है कि वह धन से शक्तिशाली बन सकते हैं। वहीं कुछ लोगों को यह लगता है कि वह अपने बल के बलबूते पर कुछ भी हासिल कर सकते हैं।लेकिन कोई भी व्यक्ति यह नहीं जनता की वास्तव में इस संसार में सबसे अधिक शक्तिशाली है क्या और कोई व्यक्ति कैसे शक्तिशाली बन सकता है।जानें कैसे बनते हैं शक्तिशाली-
शक्तिशाली बनने के लिए किसी व्यक्ति को धन या बल की आवश्यकता नहीं होती है। क्योंकि इस संसार में यदि कोई शक्तिशाली है तो वह अपन ज्ञान से है। व्यक्ति का ज्ञान उसे सर्वश्रेष्ठ बनाता है। ज्ञानी व्यक्ति के सम्मुख धन और बल दोनों ही नतमस्तक होते हैं।यदि आप ज्ञान के महारथी हैं और आपके पास सभी सुविधाएं हैं। तो आपको जीवन मे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। वहीं आप अपने ज्ञान के बलबूते हर ओर तारीफ के पात्र होते हैं व प्रत्येक व्यक्ति आपके ज्ञान की सराहना करता है। -
जिसके पास हैं यह तीन चीजें वह जीत सकता है विश्व
ज्ञान- व्यक्ति का वक्त अच्छा हो तो वह अपने उन सभी साथियों को भूल जाता है। जो बुरे वक्त में उसका सहारा बनते हैं। वहीं यदि व्यक्ति का वक्त बुरा हो तो व्यक्ति धीरे-धीरे स्वयं को भूलने लगता है। लेकिन आज हम आपको आचार्य चाणक्य के उन तीन सिद्धांतों के विषय में बताना चाहते हैं जो उन्होंने बुरे वक्त के परिपेक्ष्य में दिए हैं।
आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि व्यक्ति बुरे वक्त में धैर्य, सकारात्मक, क्रोध इन तीन मूल्यों को याद रखता है तो उसके जीवन मे दुख आते हैं लेकिन वह उसका निष्पादन करने में सक्षम रहता है।आचार्य चाणक्य के मुताबिक- यदि आप बुरेवक्त में धैर्य रखना जानते हैं। तो आपको समस्याओं से लड़ने में सहायता मिलती है और आप मन से मजबूत रहते हैं। आप अपनी कोशिशओं के बलबूते पर परिस्थितियों से निकलने का स्मार्थ्य रखते हैं और जीवन में आगे बढ़ने की ललक उनको सफल बनाती है।आचार्य चाणक्य का कहना है कि जो व्यक्ति अपने जीवन मे सकारात्मक रहता है और प्रत्येक परिस्थिति में पॉजिटिव एनर्जी के साथ पेश आता है। वह जीवन में सुखी रहता है और अपने लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं होता है।आचार्य चाणक्य का कहना है कि अगर व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। तो वह क्रोध पर विजय प्राप्त कर लेता है और हर परिस्थिति ने निपटने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करता है। -
जानें किसी की सहायता के लिये कितना आवश्यक है धन
अनमोल वजन- आज समय नहीं बदला है बल्कि समय के साथ लोगों का व्यवहार बदल गया है। अब लोग किसी के विषय मे बेहतर विचार नहीं रखते। किसी का हित करने से पूर्व यह सोच लेते हैं कि वह व्यक्ति हमारे लिए कितना फायदेमंद साबित होगा।
वहीं कई लोग ऐसे भी हैं। जिन्हें यह लगता है कि जब हम किसी का हित करने के लिए आगे बढ़ते हैं। तो उसके लिए हमारे पास अपार धन का होना आवश्यक है। अगर हमारे पास धन नहीं है तो हम किसी भी व्यक्ति की मदद नहीं कर सकते हैं।लेकिन ज्ञानात्माओं का कहना है कि जब व्यक्ति किसी की मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता है। तो उसे अपार धन की नहीं अपितु अच्छे मन की आवश्यकता होती है। आप धन से व्यक्ति को सिर्फ आर्थिक सहायता दे सकते हैं। लेकिन उसकी मदद नहीं कर सकते हैं। लेकिन यदि आपका मन अच्छा है तो आप उसकी प्रत्येक परिस्थिति में मदद कर सकते हैं और उसके लिए ईश्वर का वरदान साबित हो सकते हैं।इस संसार मे अगर आपको किसी की मदद करने का मन है। तो आप उसके लिए मन से कर्म कीजिए। क्योंकि जब आप मन से कर्म करते हैं तो आपको जीवन मे सुख और लोगों का विश्वास प्राप्त होता है। वहीं यदि आप कर्म धन से किसी स्वार्थ को मन मे रखते हुए करते हैं तो जीवन में आपको समस्याओं से जूझना पड़ता है। -
जाने शिवरात्रि पर क्या करने से दूर होगें कष्ट
धर्म- हिंदूओ का प्रमुख पर्व महाशिवरात्रि आने वाला है। यह पर्व शिव के उपासकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं तो व्यक्ति के सभी संकट नष्ट हो जाते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। धर्म ग्रंथो को अनुसार इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था।धर्म शास्त्रों का कहना है कि- अगर कोई व्यक्ति शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करता है और उन्हें दूध, बेलपत्र, गन्ने के गट्टे, बेर, धतूरा और भांग अर्पित करता है। शिव की आरती करता है और शिव चालीसा का पाठ करता है। तो व्यक्ति के सभी कष्ट नष्ट हो जाते हैं और घर में सुख समृद्धि का वास होता है। -
जिस व्यक्ति में होते हैं यह दो गुण वह रहता है सम्पूर्ण जीवन सुखी- आचार्य चाणक्य
धर्म– हिन्दू धर्म मे दान पुण्य का विशेष महत्व है। अगर आप दान पुण्य करते हैं और किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करते हैं। तो वह व्यक्ति अपने जीवन मे काफी खुश रहता है और उसके घर मे सुख समृद्धि का वास होता है।
वहीं आचार्य चाणक्य के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन मे सम्मान प्राप्त करना चाहता है। तो उसे यह काम जरूर करने चाहिए। उनके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति दान पुण्य करता है तो उसे काफी सम्मान मिलता है और हर ओर उस व्यक्ति की सराहना होती है।आचार्य चाणक्य के मुताबिक वह व्यक्ति समाज मे सदैव सम्मान का पात्र होता है। जो लोगों से मीठी वाणी में बात करता है और किसी का भी तिरस्कार नहीं करता है। वहीं अपनी कमाई में सन्तुष्ट रहता है और लोगों को धन का घमंड नहीं दिखाता है। -
Kedarnath Yatra 2023: Kedarnath Yatra 25 April से शुरू
आज महाशिवरात्रि पर Kedarnath धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हुई। 25 अप्रैल को प्रातः 6 बजकर 20 मिनट पर बाबा Kedarnath के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह चार बजे से महाभिषेक पूजा शुरू हो हुई। मंदिर के पुजारी शिव शंकर लिंग, बागेश लिंग, गंगाधर लिंग और शिव लिंग द्वारा गर्भगृह में धार्मिक परंपराओं के तहत सभी पूजा-अर्चना की गई। उखीमठ में वेदपाठी आचार्यों की उपस्थिति में इस तिथि का एलान किया गया है कि 25 अप्रैल की सुबह बाबा केदारनाथ के कपाट खुलेंगे.
मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को मेघ लग्न में सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर खुलेंगे. 21 अप्रैल को बाबा की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से Kedarnath के लिए होगी रवाना. इसके बाद 24 अप्रैल को बाबा Kedarnath की डोली पैदल यात्रा करते हुए Kedarnath धाम तक पहुंचेगी. इस तिथि की घोषणा होते ही पूरे मंदिर परिसर में बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगने लगे. 25 अप्रैल को धार्मिक अनुष्ठान के बाद सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर Kedarnath धाम के कपाट खुल जाएंगे. इसके बाद श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए यहां आ सकेंगे.
बदरीनाथ धाम
बता दें कि पिछले वर्ष में 17 लाख 60 हजार 646 श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं, रिकॉर्ड संख्या में गंगोत्री धाम में 624451 तीर्थ यात्री पहुंचे जबकि यमुनोत्री धाम में 485635 तीर्थ यात्रों दर्शनों के लिए पहुंचे। Kedarnath यात्रा में रिकॉर्ड 15 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। जबकि यात्रा से 211 करोड़ का कारोबार हुआ था।