Category: religious

  • इस वसंत पचंमी पर कर लो ये उपाय, खत्म हो जाएंगी सभी परेशानियां

    डेस्क। वसंत पचंमी के दिन पीले रंग की मिठाई जैसे बेसन के लड्‌डू या बर्फी में थोड़ा सा केसर डालकर देवी सरस्वती को भोग जरूर लगाएं और फिर इन्हें 7 कन्याओं में बांट भी दें।
    ऐसी मान्यता है इससे ज्ञान की देवी सरस्वती संग लक्ष्मी जी की कृपा भी मिलती है।
    बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो बसंत पंचमी के दिन उसके हाथ से पीले रंग की वस्तु जैसे केला, दाल, पीले फूल, पीले वस्त्र, शिक्षा से जुड़ी चीजों का दान जरूर कराएं। वहीं मान्यता है इससे पढ़ाई में रूचि भी बढ़ेगी।
    देवी सरस्वती का प्रिय रंग पीला होता है बसंत पचंमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनें और दो मुखी दीपक लगाकर विश्वविजय सरस्वती कवच का पाठ करें ऐसा भी कहते हैं इससे स्मरण शक्ति तेज होती है।बता दें इससे समृद्धि में बढ़ोत्तरी भी होती है।
    बसंत पंचमी पर दूध में हल्दी मिलाकर देवी सरस्वती का अभिषेक करने से वैवाहिक जीवन का तनाव दूर होता है और वाणी में भी मिठास आती है।
    जीवन में सुख-शांति की कामना के लिए बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती को मीठे पीले चावल का भोग जरुर लगाएं और इससे वाणी पर नियंत्रण करने की शक्ति भी मिलती है जिससे व्यक्ति का व्यक्तत्वि निखरता भी है।
    शिक्षा में किसी प्रकार की रुकावट आ रही है तो बसंत पंचमी के दिन 108 पीले फूल देवी सरस्वती को अर्पित जरुर करें और ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः मंत्र का एक माला जाप करें बता दें इससे देवी सरस्वती का आशीर्वाद सदा साथ रहेगा।

  • आचार्य चाणक्य से जानिए सुखी जीवन जीने के तरीके

    डेस्क। चाणक्य नीति फॉर लाइफ: सुखी जीवन जीने के लिए व्यक्ति को कुछ बातों पर ध्यान ज़रूर देना चाहिए। वर्ना एक छोटी सी गलती भी बहुत बड़ी साबित हो सकती है। साथ ही आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में कुछ बातों का जिक्र भी किया है, जिनका पालन करने से व्यक्ति का जीवन बहुत ही सुखी रहता है।
    और व्यक्ति बड़ी से बड़ी परेशानी से बचाता है। उनका और उनके परिवार का मान भी बढ़ाया है। आज हम आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई ऐसी बातों के बारे में जानेंगे, जिनका परहेज करने से व्यक्ति को सुखी जीवन मिलता है।
    यस्य स्नेहो भयं तस्य स्नेहो दुखस्य भजनम।
    स्नेहामुलानि दुखानि तनि त्यक्तव वासेत्सुखम्।
    चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि जिस वस्तु या चरित्र से व्यक्ति को सबसे अधिक लगाव होता है वही उसके सबसे बड़े दुख का कारण भी होता है। तो किसी वस्तु या व्यक्ति को इतना आसक्त भी नहीं होना चाहिए।
    -पूरा जीवन दुख में निकलता है
    चाणक्य नीति के अनुसार जब व्यक्ति को किसी वस्तु या व्यक्ति से आवश्यकता से अधिक प्रेम हो जाता है तो वह दुख का मार्ग भी चुन लेता है। यदि किसी वस्तु या व्यक्ति से बहुत अधिक लगाव हो जाता है, तो यह दुख का कारण भी बनता है।
    जब वह व्यक्ति या जीवन चला जाता है या खो जाता है, तो जातक बहुत ही दुखी भी हो जाता है। इस प्रकार वस्तुओं के खो जाने या नष्ट हो जाने पर भी बहुत कष्ट भी होता है। इसलिए किसी भी वस्तु या पशु के प्रति इतना आसक्त या मोहित भी नहीं होना चाहिए कि उससे बिछड़ने पर हम दु:ख से व्याकुल हो जाए या अपने कर्तव्य से विमुख भी हो जाए।
    ऐसी स्थिति उस व्यक्ति के पतन का कारण भी बनती है। अतः उचित यही है कि व्यक्ति मोह के जाल से दूर ही रहे, तभी वह सुखी जीवन व्यतीत भी कर सकता है।

  • बच्चों को धन सौंपने से पूर्व करें यह विचार- आचार्य चाणक्य

    आध्यात्मिक- आचार्य चाणक्य ने जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा की है। वहीं उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धन किसी को सौंपना चाहता है तो उसे इन मूल नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।
    आचार्य चाणक्य कहते हैं कि इस संसार मे धन प्रेम और समर्पण का दुश्मन है। व्यक्ति धन के लोभ में अपनों को भूल जाता है। वहीं जब माता पिता अपनी संतान को अपना सम्पूर्ण धन सौंप देते हैं। तो वही संतान अपने माता पिता का सम्मान करना छोड़ देती है।
    चाणक्य का कहना था कि यदि आप अपनी सन्तान को अपनी संपत्ति सौंपने के विचार कर रहे हैं। तो कई बार सोचें क्योंकि धन आपके बच्चों का आपकी तरफ लगाव खत्म कर देगा। संतान को धन देने से पहले विचार करें और यह सोच समझ कर निर्णय लें कि आपकी संतान आपकी सम्पति से प्रेम करती है या आपसे। 
    वहीं कभी भी अपनी संतान को अपने जीवित रहते हुए पूर्ण धन का मालिक न बनाएं। क्योंकि ऐसा करना आपको समस्याओं में डाल सकता है और आपको अपने बच्चों से दुर्व्यवहार झेलना पड़ सकता।

  • वसंत पचंमी पर जरुर करे ये उपाय दूर हो जाएंगी सभी समस्याएं

    डेस्क। वसंत पचंमी के दिन पीले रंग की मिठाई जैसे बेसन के लड्‌डू या बर्फी में थोड़ा सा केसर डालकर देवी सरस्वती को भोग जरूर लगाएं और फिर इन्हें 7 कन्याओं में बांट भी दें।
    ऐसी मान्यता है इससे ज्ञान की देवी सरस्वती संग लक्ष्मी जी की कृपा भी मिलती है।
    बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो बसंत पंचमी के दिन उसके हाथ से पीले रंग की वस्तु जैसे केला, दाल, पीले फूल, पीले वस्त्र, शिक्षा से जुड़ी चीजों का दान जरूर कराएं। वहीं मान्यता है इससे पढ़ाई में रूचि भी बढ़ेगी।
    देवी सरस्वती का प्रिय रंग पीला होता है बसंत पचंमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनें और दो मुखी दीपक लगाकर विश्वविजय सरस्वती कवच का पाठ करें ऐसा भी कहते हैं इससे स्मरण शक्ति तेज होती है।बता दें इससे समृद्धि में बढ़ोत्तरी भी होती है।
    बसंत पंचमी पर दूध में हल्दी मिलाकर देवी सरस्वती का अभिषेक करने से वैवाहिक जीवन का तनाव दूर होता है और वाणी में भी मिठास आती है।
    जीवन में सुख-शांति की कामना के लिए बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती को मीठे पीले चावल का भोग जरुर लगाएं और इससे वाणी पर नियंत्रण करने की शक्ति भी मिलती है जिससे व्यक्ति का व्यक्तत्वि निखरता भी है।
    शिक्षा में किसी प्रकार की रुकावट आ रही है तो बसंत पंचमी के दिन 108 पीले फूल देवी सरस्वती को अर्पित जरुर करें और ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः मंत्र का एक माला जाप करें बता दें इससे देवी सरस्वती का आशीर्वाद सदा साथ रहेगा।

  • Mauni Amavaysa 2023: अगर नहीं कर पाए हैं गंगा स्नान तो करें यह काम

    Mauni Amavaysa 2023: आज हिंदूओ का प्रमुख पर्व मौनी अमावस्या है। कहते हैं अगर आज के दिन आप गंगा स्नान करते हैं तो आपको पुण्य मिलता है और आपके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आज के दिन गंगा स्नान कर जो व्यक्ति पितरों को दान करता है। उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है और माता गंगा की कृपा से उस व्यक्ति के सभी कष्ट नष्ट हो जाते हैं।
    लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जो आज के दिन गंगा स्नान करने नहीं पहुंच पाते हैं। अगर आप भी उनमें से है कि आप आज के दिन गंगा स्नान करने नहीं पहुंच पाए हैं। तो आपको इन विशेष नियमों को याद करके आज की मौनी अमावस्या का फल प्राप्त करना होगा।
    आज के दिन जब आप गंगा स्नान नहीं करते हैं। तो आपको अपने घर पर ही स्नान करना चाहिए और इस मंत्र 
    गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।। का जाप करना चाहिए।
    वहीं स्नान करने के बाद विधि पूर्वक घर मे पूजा करनी चाहिए और ब्राह्मण को दान पुण्य करनी चाहिए। कहते हैं ब्राह्मण के दान से आपके कष्ट दूर होते हैं और आपकी तरक्की के सभी द्वार खुल जाते हैं।

  • क्यों व्यक्ति सब छोड़ देता है लेकिन ईर्ष्या नहीं

    ज्ञान- आज समाज मे सब कुछ बदल गया है। अब लोग किताबो से अधिक तकनीकी में दिमाग लगाते है। अपना अधिक से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। 
    वैसे तो आज के दौर में लोगों को समाज, दुनिया या किसी के व्यक्तिगत जीवन से कोई मतलब नही रहता है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति सफल हो रहा है। तो लोगों को उस व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या अवश्य रहती है।
    समाज में लोगों का जहां हर चीज से मुह मोड़ चुके हैं। वहीं यह लोग ईर्ष्या से मुह नही मोड़ पा रहे हैं। लोगों की ईर्ष्या उनका कष्ट बन रही है। लेकिन इसके बाद भी लोग ईर्ष्या करना नही छोड़ते। लोग इतने ईर्ष्यालु हैं कि जिस व्यक्ति का उनसे कोई संबंध नहीं है। वह उसे जानते तक नहीं तब भी उससे ईर्ष्या करते रहते हैं।
    वहीं यह ईर्ष्या लोगों की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती है। समय के साथ लोगों की सफलता में बाधा बनती है और लोग स्वयं पर ध्यान केंद्रित करने की जगह दूसरों से ईर्ष्या की करते रहते हैं। ईर्ष्या इतनीं प्रभावशाली होती है कि आप नकारात्मक सोच से घिर जाते हैं और आपको व्यक्ति की अच्छाई नही दिखाई देती।
    वहीं आप इसके वशीभूत ऐसे हो जाते हैं कि आपको संसार मे दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करनें के अलावा कुछ नही दिखाई देता है। लोग परिवर्तित होते हैं और आप ईर्ष्या के कारण वहीं रह जाते हैं और धीरे धीरे यह ईर्ष्या आपकी सफलता के सभी द्वार बन्द कर देती है।

  • Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी के दिन जरूर करें यह काम, चमकेगी किस्मत

    आध्यत्मिक:- हिंदूओ का प्रमुख पर्व बसंत पंचमी 26 जनवरी को मनाया जा रहा है। इससे कई लोग सरस्वती पूजा के नाम से भी जानते हैं। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति विधि विधान से इस दिन माता सरस्वती की पूजा अर्चना करता है। तो उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और माता के आशीर्वाद से घर मे सुख समृद्धि का वास होता है।
    वहीं कई लोगों के दिमाग मे यह सवाल रहता है कि आखिर हम माता सरस्वती की पूजा किस विशेष विधि के साथ करें कि हमारे सारे कष्ट नष्ट हो जाएं। तो आइए जानते हैं माता की पूजा की विधि…
    आध्यात्मिक ज्ञान के मुताबिक यदि आप बसंत पंचमी की पूजा करने जा रहे हैं। तो आपको सबसे पहले माता रानी कीपूजा थाल तैयार करनी चाहिए। पूजा की थाली में सबसे पहले पीला वस्त्र, पीला भोग और पीलेअक्षत और पुष्प रखें और माता रानी की पूजा आरम्भ करें। 
    पूजा करते वक्त माता की चौकी सजाएं चौकी पर पीला वस्त्र डालें। फिर सरस्वती माता की तस्वीर रखकर। पूजा शुरू करें। मंत्रों का जाप करें और दीप धूप से माता की पूजा कर आराधना करें।।

  • Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी के दिन सजाएं इन चीजों से पूजा की थाल, मिलेगा सरस्वती देवी का आशीर्वाद

    Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी का पावन पर्व आने को है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का बहुत अधिक महत्व है। क्योंकि इस दिन माता सरस्वती की पूजा अर्चना का विधान है और लोग बड़े श्रद्धा भाव से माता की पूजा करते हैं।
    बसंत पंचमी को कई लोग सरस्वती पूजा के नाम से जानते हैं। इस साल बसंत पंचमी का पावन पर्व 26 जनवरी को पढ़ रहा है। वहीं बसंत पंचमी के दिन जिन भक्तों को माता सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है उनकी बुद्धि, बल, विद्या, कला और प्रतिभा में निरंतर वृद्धि होती है और उनके सामने हर कोई नतमस्तक हो जाता है।
    वहीं आज हम आपको बसंत पंचमी की पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं। जिनका अगर आप पूजा के दौरान ध्यान रखते हैं तो आपको उसका लाभ मिलेगा। 
    जब आप बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा की तैयारी करें तो आपको माता की स्थापना चौकी पर।पीला वस्त्र डालकर करनी चाहिए। माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने के बाद सभी वहां सुपारी अवश्य रखें।
    कोशिश करें की स्वयं पीले वस्त्र धारण करें और पीले अक्षत, कुमकुम, पीले पुष्प और पीले भोग के साथ माता की पूजा थाल सजाएं। कलम, पुस्तक, वाद्य यंत्र, केला, सिंदूर, सिक्का के उपयोग करें और विधि विधान से माता की पूजा अर्चना करें।

  • वसंत पंचमी पर बच्चों के रखें ये नाम, बरसेगी माता सरस्वती की विशेष कृपा

    Saraswati Names for Baby Boy & Girls: मां सरस्वती को ज्ञान की देवी भी कहा जाता है। वहीं मान्यता है कि जिस व्यक्ति को मां सरस्वती की कृपा प्राप्त हो जाए, उसे दुनिया में गुणवान और समृद्ध होने से कोई नहीं रोक सकता है।
    हर साल बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की आराधना भी की जाती है। साथ ही इस बार बसंत पंचमी 26 जनवरी यानी गुरुवार को पड़ रही है वहीं ज्योतिषविदों के मुताबिक जिन बच्चों का जन्म इस साल जनवरी में हुआ है, उनका नाम अगर मां सरस्वती से जुड़े नामों पर किया जाए तो उन्हें गुणी, बुद्धिमान और ज्ञानी बनने से भी कोई रोक नहीं सकेगा। साथ ही आज हम आपको मां सरस्वती से जुड़े ऐसे 30 नामों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके आधार पर आप अपने नवजात पुत्र या पुत्री का नामकरण भी कर सकते हैं।
    मां सरस्वती से जुड़े बच्चों के नाम (Maa Saraswati Related Babies Names)
    माही
    मालिनी
    मंजुश्री
    मेधा
    मेधस्विनी
    मेधावी
    पद्माक्षी
    परायणी
    पावकी
    प्रदन्या
    प्रज्ञा
    गायत्री
    हंसिनी
    इला
    इरा
    कलाधारिणी
    महालक्ष्मी
    महासरस्वती
    महाश्वेता
    महाविद्या
    ब्राह्मी
    चंद्रिका
    चित्रगंधा
    देवी
    धारा
    कादम्बरी
    बानी
    भारती
    ज्ञान
    अक्षर
    हंस
    कलाधारक

  • शव यात्रा के दौरान क्यों बोलते हैं राम नाम सत्य

    डेस्क। हिंदू धर्म में कई परंपराओं का पालन भी किया जाता है। वहीं इनमें से कई परंपराएं तो सदियों से चली भी आ रही है, लेकिन बहुत कम लोग इसके बारे में जानते भी हैं। वहीं परंपरा कभी भी निर्मूल नहीं होता यानी बिना हर परंपरा के पीछे कोई खास कारण नहीं होता है।
    जन्म से लेकर मृत्यु तक हर परंपरा के पीछे कोई न कोई धार्मिक, वैज्ञानिक या मनोवैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ होता है। तो आज हम आपको मृत्यु के बाद शवयात्रा के दौरान की जाने वाली एक ऐसी ही परंपरा के बारे में बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार है।
    हिंदू धर्म के अंतर्गत जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसकी शवयात्रा के दौरान अनेक बातों का ध्यान रखा जाता है और साथ ही साथ शवयात्रा के दौरान ‘राम नाम सत्य है’ जरूर बोला जाता है। बता दें ये परंपरा कैसे शुरू हुई, इसके बारे में कोई नहीं जानता और न ही किसी धर्म ग्रंथ में इसके बारे में कही वर्णन भी मिलता है। लेकिन इस परंपरा के पीछे कई कारण छिपे हुए हैं। और इसलिए शवयात्रा में बोलते हैं ‘राम नाम सत्य है’
    1. शवयात्रा के दौरान ‘राम नाम सत्य है’ बोलने के पीछे कई कारण होते हैं। पहला कारण ये है कि लोगों को ये पता चले कि आखिर में हमारे द्वारा किए गए अच्छे काम ही संसार में रह जाएंगे जैसे भगवान श्रीराम का नाम अमर होता है। वहीं हमारा ये शरीर तो एक दिन अग्नि में जलकर नष्ट हो जाएगा। इसलिए जीवित रहते हुए अधिक से अधिक लोगों की मदद करो और भगवान के द्वारा बताए गए सत्मार्ग पर भी चलो।
    2. शवयात्रा के दौरान ‘राम नाम सत्य है’ बोलने के पीछे एक कारण ये भी है कि अंतिम समय में मृतक के कान में राम नाम रूपी अमृत जाए जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सके। ऐसा कहा बोला जाता है कि मरने के कुछ समय बाद तक हमारे कुछ अंग काम करते हैं, उनमें से काम भी एक हैं। इसलिए दाह संस्कार के पहले राम नाम सुनने से मृतक की आत्मा को शांति भी मिलती है।
    3. शवयात्रा के दौरान ‘राम नाम सत्य है’ बोलने के पीछे एक कारण और भी है, वो ये कि इससे लोगों का ध्यान आकर्षित हो और वे शवयात्रा के लिए मार्ग को छोड़ दें क्योंकि शवयात्रा कहीं भी नहीं रुकती है, लगातार चलती रहती है। ‘राम नाम सत्य है’ बोलने से लोगों का ध्यानाकर्षण होता है वे शवयात्रा के लिए मार्ग को छोड़ देते हैं।