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  • आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो लोग करते हैं यह काम जीवन भर आर्थिक संकट से रहते हैं परेशान

    आध्यत्मिक– चाणक्य नीति में बताए गए मार्ग पर यदि कोई व्यक्ति चलता है। तो उसका जीवन न सिर्फ सफल होता है। अपितु उसके जीवन से सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं। 
    आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर व्यक्ति अपने व्यवहार में कुछ विशेष बाते ले आता है। तो उसे अपने जीवन मे कभी भी आर्थिक तंगी से नही जूझना पड़ता है और उसका जीवन बेहतर व्यतीत होता है।

    तुलना-

    आचार्य चाणक्य कहते हैं किसी भी व्यक्ति को अपनी आर्थिक स्थिति की तुलना किसी अन्य से नही करनी चाहिए। अगर आप अपने धन की तुलना किसी अन्य से करते हैं तो आपके धन में बरक्कत नही होती है और आप आगे नही बढ़ पाते हैं।

    दिखावा-

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को बनावटी नही होना चाहिए। उसे दिखावा करने से बचना चाहिए। क्योंकि जब आप किसी अन्य व्यक्ति की बराबरी करने के लिए दिखावा करते हैं। तो आपकी तरक्की रुक जाती है और आप पूरी जिंदगी आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं।

    बचत-

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक अगर आप अपने धन की बचत नही करते हैं। जितना भी कमाते हैं सब उड़ा देते हैं। तो आपकी आर्थिक स्थिति कभी भी बेहतर है नही हो सकती है। आप अगर थोडा थोडा धन बचाते हैं तो एक समय ऐसा आता है कि आपकी बचत आपके लिए बड़ी सहायता बनकर खड़ी होती है।

  • कपूर के इस्तेमाल से आपको मिलेगा इन परेशानियों से निजाद

    डेस्क। Kapoor : पूजा पाठ में इस्तेमाल होने वाले कपूर के बहुत से फायदे होते है। कपूर की खुशबू से पूरा घर महक भी उठता है। वहीं घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना ही रहता है। घर के माहौल में इसकी सुगंध से घर के सदस्यों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
    ऐसे में लोगों को इन प्रभावों के बारे में पता होना भी जरूरी है। जेब में कपूर रखा जाए तो इससे अनेको फायदे होते हैं। तो आइये जानते है इसके बारे में-
    1.यदि आप किसी त्वचा के रोग से पीड़ित हैं या अपने लुक्स को लेकर परेशान भी  हैं तो इसका मतलब यह है कि आपकी कुंडली में शुक्र कमजोर हो सकता है इसलिए कपूर का इस्तेमाल करके आप अपनी समस्या को दूर कर सकते है।
    2.अगर आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर है या आपकी कुंडली में सर्प दोष या राहु केतु का दोष है तो ऐसे में आप अपने पास कपूर को रखें। इसके लिए आप एक रुमाल में कपूर को बांधकर आराम से रख सकते हैं। ऐसा करने से सभी दोषों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही आर्थिक संकट से भी आपको छुटकारा मिल सकता है।

  • इन चार आदतो वाले लोगो को समाज कभी नही करता है स्वीकार

    आध्यत्मिक– कुछ लोग कहते हैं कि हम कितना भी प्रयास कर ले हमे जीवन मे कुछ हासिल नही हो पाता है। लोग हमारे साथ जुड़कर नही रहते हैं और हमे वह सम्मान की नजर से नही देखते है। हम किसी का अच्छा भी करते हैं तो बुरा हो जाता है।
    अगर आपके आसपास भी ऐसे लोग हैं तो आप उन्हें उनके आचरण में परिवर्तन लाने की सलाह दे सकते हैं। क्योंकि चाणक्य नीति के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के आचरण में यह चार चीजे होती है तो वह कितना भी प्रयास कर ले उसे लोगो के बीच जुड़ाव और सम्मान नही प्राप्त होता है।

    क्रोध; 

    चाणक्य नीति के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आता है। वह दूसरों की सुनने से पूर्व ही गुस्सा हो जाता है। उसे सिर्फ अपना लाभ दिखाई देता है। लोग ऐसे व्यक्ति को कभी नही पसन्द करते और न ही उसका सम्मान करते हैं।

    दया का भाव-

    कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दयालु नही होते। मानो उनके मन से मानवता का भाव मिट गया हो। उन्हें इस बात से फर्क नही पड़ता है कि उनके आसपास कोई कष्ट में है। वह व्यक्ति की तकलीफ में उनका सहारा नही बनना चाहते हैं। ऐसे लोगो को समाज कभी नही स्वीकारता और इनसे दूर रहना ही पसन्द करता है।

    मतलबी-

    कुछ लोग ऐसे होते हैं। जो सामान्य तौर पर आपसे कभी बात नही करते हैं। लेकिन जब उन्हें आपसे काम पड़ता है तो वह आपके आगे पीछे घूमते है और आपके सबसे हितैषी बन जाते हैं। वही जब आप इन लोगो की मदद कर देते हैं तो यह पुनः आपको भूल जाते हैं। ऐसे लोगो से समाज मे लोग दूरी बनाकर रखते हैं और इन लोगो को ओछी नजर से देखते हैं।

    नास्तिक-

    जो लोग दान पुण्य नही करते। ईश्वर को नही मानते हैं और ईश्वर की आलोचना करते रहते हैं। समाज उनका न तो सम्मान करता है और न ही ईश्वर उनपर अपनी कृपा बनाये रखता है। ऐसे लोग अपने जीवन मे काफी परेशान रहते हैं।

  • रात में पेड़ों को छुने पर है पाबंदी, न मानने की मिलेगी कठोर सजा

    डेस्क | वास्तु शास्त्र में सुगम जीवन जीने के लिए कई उपाय बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी उपाय हैं जिनके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण बताएं जा रहे हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इन उपायों का पालन करने से व्यक्ति को लंबे समय तक लाभ मिलता है, इसके साथ ही उसे सुख समृद्धि की प्राप्ति भी होती है।

    इसके साथ वास्तु शास्त्र में कुछ नियम ऐसे भी बताए गए हैं। जिनका पालन निश्चित रूप से व्यक्ति को ज़रूर करना चाहिए। इन्हीं में से एक नियम यह भी है कि व्यक्ति को रात के समय पेड़-पौधों को नहीं छूना चाहिए। वहीं ऐसा करना पाप की श्रेणी में आता है। तो आइए जानते हैं कि क्या है नियम के पीछे छिपा धार्मिक व वैज्ञानिक कारण।
    क्या आप जानते हैं वेद पुराणों में पेड़-पौधों को मनुष्य की भांति ही एक जीवित प्राणी के रूप में भी बताया गया है। वह सूर्योदय के समय जागते हैं और सूर्यास्त के बाद आराम से सोया करते हैं। इसलिए रात के समय उन्हें छूना अशुभ बताया गया है। वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि किसी व्यक्ति को सोते हुए तंग करना पाप होता है। इसलिए सूर्यास्त के बाद घर के बड़े बुजुर्गों भी पेड़-पौधों को छूने और उनकी पत्तियां तोड़ने से बच्चों को रोकने को कहते हैं।
    इसके साथ पेड़-पौधे पर विभिन्न प्रकार के पक्षी और कीट-पतंगों का बसेरा भी होता है। वह भी सूर्यास्त के बाद अपने घर लौटते हैं और वहां विश्राम करने लगते हैं। इसलिए इस दौरान पेड़ों को छूने या उनकी पत्तियों को तोड़ने से उनकी नींद में खलल पड़ जाती है वहीं वह परेशान हो सकते हैं। यही कारण है कि सूर्यास्त के बाद पेड़-पौधों को छूना नहीं चाहिए।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पेड़-पौध सूर्यास्त के बाद ऑक्सीजन की बजाय कार्बन-डाइऑक्साइड का रिसाव करने लगते हैं। इसलिए यदि व्यक्ति रात के समय पेड़ के नीचे जाता है तो उसे ऑक्सीजन की कमी भी महसूस हो सकती है। यही कारण है कि रात के समय पेड़ के नीचे सोने की मनाही है क्योंकि यह सेहत के लिए अच्छा नहीं बताया जाता।

  • कालभैरव अष्टमी: इस चालीसा के पाठ से दूर होगा भय, मिट जाएंगे सभी संकट

    डेस्क। उज्जैन। वैसे तो भगवान कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के मंत्रों और स्तुतियों की रचना हुई है पर इन सभी में कालभैरव चालीसा (Kaal Bhairav Chalisa) का विशेष महत्व बताया जाता है।
    वहीं कुछ खास मौकों पर अगर कालभैरव चालीसा का पाठ किया जाए तो हर तरह के दुख और भय का नाश होता है। इस बार 16 नवंबर, बुधवार को कालभैरव अष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami 2022) का पर्व मनाया जा रहा है। ये भी कालभैरव चालीसा का पाठ करने के लिए बहुत ही शुभ दिन बताया गया है। इस दिन कालभैरव चालीसा का पाठ विधि पूर्वक करने से आपकी हर मनोकामना पूरी होगी। पढ़िए कालभैरव चालीसा :
    दोहा
    श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ।
    चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ॥
    श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल।
    श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल॥
    कालभैरव चालीसा
    जय जय श्री काली के लाला।
    जयति जयति काशी-कुतवाला॥
    जयति बटुक-भैरव भय हारी।
    जयति काल-भैरव बलकारी॥
    जयति नाथ-भैरव विख्याता।
    जयति सर्व-भैरव सुखदाता॥
    भैरव रूप कियो शिव धारण।
    भव के भार उतारण कारण॥
    भैरव रव सुनि हवै भय दूरी।
    बटुक नाथ हो काल गंभीरा। श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा॥
    करत नीनहूं रूप प्रकाशा। भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा॥
    रत्न जड़ित कंचन सिंहासन। व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन॥
    तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं। विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं॥
    जय प्रभु संहारक सुनन्द जय। जय उन्नत हर उमा नन्द जय॥
    भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय। वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥
    महा भीम भीषण शरीर जय। रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय॥
    अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय। स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय॥
    निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय। गहत अनाथन नाथ हाथ जय॥
    त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय। क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय॥
    श्री वामन नकुलेश चण्ड जय। कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय॥
    रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर। चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर॥
    करि मद पान शम्भु गुणगावत। चौंसठ योगिन संग नचावत॥
    करत कृपा जन पर बहु ढंगा। काशी कोतवाल अड़बंगा॥
    देयं काल भैरव जब सोटा। नसै पाप मोटा से मोटा॥
    जनकर निर्मल होय शरीरा। मिटै सकल संकट भव पीरा॥
    श्री भैरव भूतों के राजा। बाधा हरत करत शुभ काजा॥
    ऐलादी के दुख निवारयो। सदा कृपाकरि काज सम्हारयो॥
    सुन्दर दास सहित अनुरागा। श्री दुर्वासा निकट प्रयागा॥
    श्री भैरव जी की जय लेख्यो। सकल कामना पूरण देख्यो॥

  • कर्ज पीछा नहीं छोड़ रहा, जानिए कर्ज मुक्ति के ये उपाय

    डेस्क। Karj Mukti Ke Upay : कर्ज या आधुनिक दौर में कहें तो लगातार बढ़ता लोन या ईएमआई आज एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर हर कोई परेशान होने लग जाता है। कई बार तो कर्ज के चलते लोग इतने परेशान हो जाते हैं कि दुनिया ही छोड़ देते हैं।
    वहीं कई बार ऐसे स्थिति आ जाती है जब हमें ना चाहते हुए भी कर्ज लेना पड़ जाता है। वहीं घर खरीदना हो या फिर शादी या फिर कोई काम, मौजूद दौर में तो हर काम ही ईएमआई के जरिए ही हो रहा है। वहीं इस कड़ी में क्रेडिट कार्ड कर्ज बढ़ाने में बड़ी भूमिका भी निभा रहे हैं। अक्सर नतीजा लोग शौक में कर्ज ले तो लेते है, लेकिन इसे समय पर चुका नहीं पाते फिर उनकी मुश्किलें बढ़ जाती है। अगर आप भी ऐसे ही कर्ज से परेशान हैं जिसे चुकाने में आपको बड़ी परेशानी हो रही है तो घबराएं नहीं क्योंकि अपने इस लेख के जरिए हम आपको कुछ ऐसे ही उपाय बताएंगे जिससे ना सिर्फ आप कर्ज लेने से बचेंगे बल्कि आपके ऊपर जो कर्ज है वो भी खत्म हो जाएगा।
    ज्योतिषी भाव से देखे तो हमारे ग्रह-नक्षत्र की चाल बदलती ही रहती है जिससे हमारी आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है और अंत में हम कर्ज के बोझ में दबने लग जाते हैं फिर लोग तनावग्रस्त होने लगते हैं वहीं ऐसे में हम आपको बताएंगे कि कर्ज मुक्त होने के लिए आपको कौन से उपाय करने चाहिए।
    कर्ज मुक्ति के लिए कौन से उपाय करें
    – शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की प्रतीमा स्थापित कर, उनकी विधि के अनुसार पूजा करें इसके बाद ‘ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम:’ मंत्र का जाप करें और इसके साथ ही घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी बेहद प्रसन्न होती हैं।
    – गुरुवार के दिन आटे में गुड़ मिलाकर उसकी रोटी बनाएं वो रोटी गौ माता को खिला दीजिए ऐसा करने से आपको कर्ज से छुटकारा मिल जाएगा।
    – वहीं शनिवार के दिन रोटी में सरसो तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलाएं इससे राहू, केतु का दोष आपको नहीं लगता।
    – अगर आपको कर्ज किसी कारणवश लेना है तो आपको बुधवार के दिन इसे लेना चाहिए क्योंकि अगर आप इस दिन अगर कर्ज लेंगे तो आप आसानी से कर्ज मुक्त हो जाएंगे।

  • विवाह करते समय ध्यान रखे यह बातें नही तो झेलना पड़ेगा कष्ट

    आध्यत्मिक– हिन्दू धर्म मे विवाह को महत्वपूर्ण बताया गया है। कहते हैं यह एक संस्कार है जो इस संसार को एक सूची में बांधे हुए हैं। विवाह के माध्यम से लोगो का एक दूसरे से जुड़ाव होता है और आपसी संबंधों में मधुरता आती है।
    कुछ लोगो के लिए जहां विवाह खुशियां लेकर आता है। वही कई लोगो का जीवन विवाह के बाद बेहद दुखदाई होता है। लेकिन क्या आपको पता है की आपका वैवाहिक जीवन सुख से व्यतीत हो इसके लिए पहले से ही ज्योतिष शास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं। अगर आप कुंडली मिलान के साथ साथ इन विशेष नियमो का पालन करते हैं तो आपका जीवन खुशियों से भर जाता है।

    जाने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए ध्यान रखने योग्य बातें….

    अगर लड़का या लड़की गर्भोत्पन्न है। तो उसके वैवाहिक जीवन को उसके जन्म के दिन या उस नक्षत्र में नही करना चाहिए।
    अगर घर मे किसी का विवाह हुआ है। तो उसके 6 माह बाद तक घर मे दूसरा विवाह नही करना चाहिए। इसे अशुभ माना जाता है।
    अगर आप अपने पुत्र का विवाह कर चुके हैं और आपकी पुत्री का विवाह तय है। तो आपको 6 माह तक पुत्री का विवाह नही करना चाहिए।
    बड़े पुत्र या पुत्री का विवाह जेष्ठ माह में नहीं करना चाहिए।
    विवाह लग्न के मुताबिक ही करना चाहिए। 
    विवाह करते समय कुंडली जरूर मिलवाये। अगर कुंडली नही मिल रही हो तो विवाह के बाद घर मे पूजा पाठ अवश्य करवाना चाहिए।

  • जाने क्या है चरण स्पर्श करने के लाभ

    आध्यत्मिक– हिन्दू धर्म मे बनाए गए प्रत्येक नियम के कुछ विशेष लाभ होते हैं। वही जो भी व्यक्ति अपनी परम्पराओ को निभाते हुए हिन्दू धर्म मे बनाए गए नियमो का पालन करता है। उसे जीवन मे किसी भी प्रकार का कष्ट नही झेलना पड़ता।
    वही आप सभी ने सामान्य तौर पर यह देखा होगा। कि हिन्दू धर्म मे लोग अपने से बड़ो को सम्मान देने हेतु उनके पैर छूते हैं। लेकिन क्या आपने कभी पैर छूने से होने वाले फायदे पर विचार किया है। अगर नही तो यह खबर आपके लिए काफी मतलब की साबित होगी।
    क्योंकि एक व्यक्ति जब किसी के चरण स्पर्श करता है। तो उसे सिर्फ आशीर्वाद नही मिलता बल्कि इसके कई लाभ भी है। तो आइये जानते हैं पैर छूने से होने वाले लाभ के विषय में…

    सकारात्मकता- 

    जानकारो का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी के पैर छूता है। तो उसके मन से नकारात्मक भाव का नाश होता है। व्यक्ति के चरित्र में निखार आता है और उसका मन व्याकुल नही रहता है।

    रक्त संचार-

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अपने से बड़ो के चरण स्पर्श पूर्ण रूप से झुककर करता है। तो उसके पीछे के हिस्से में रक्त संचार बेहतर होता है और व्यक्ति का जीवन बीमारियों से बच जाता है।

    दोष-

    ज्योतिष के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के जीवन मे नवग्रहों का दोष है। तो अपने बुजुर्गों के चरण स्पर्श करने से यह दोष दूर हो जाता है। आपको सकारात्मकता मिलती है और जीवन बेहतर रहता है।

  • Elaichi Ke Totke: ये टोटके आपको बना देंगे करोड़पति

    Elaichi Ke Totke: छोटी इलाचयी जहां खाने के स्वाद को बढ़ाने का काम करती है वहीं इसका सेवन करने से सेहत पर भी काफी अच्छा असर पड़ता है। इसके अलावा इलाचयी के सेवन से कई तरह की शारीरिक परेशानियां भी दूर होती हैं।
    ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में छोटी इलायची के कई उपाय भी बताए गए हैं। इन उपायों को करने से जहां धन लाभ मिलता है वहीं आर्थिक तंगी भी दूर होती है। वहीं इसके अलावा नौकरी पाने में भी मदद मिलती है। तो आज हम आपको इलायची के कुछ आसान उपायों के बारे में बताएंगे, जिनको करने से आपका जीवन आसान हो जाएगा।
    नौकरी: नौकरी के लिए प्रयासरत और कड़ी मेहनत के बावजूद इसमें सफलता नहीं मिल रही है तो रोज रात को सोने से पहले तकिए के नीचे छोटी इलायची जरूर रखें। वहीं अगले दिन इस इलायची को किसी गरीब को दक्षिणा में दान करें। ऐसा करने से मनचाही नौकरी की प्राप्ति भी होगी।
    आर्थिक तंगी: पीले कपड़े में पांच छोटी इलायची बांधकर मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें। ऐसा करने से धन लाभ होता है और आर्थिक तंगी भी दूर होती है। यह प्रक्रिया गुरुवार के दिन करें और पीले कपड़े में छोटी इलायची रखकर इसे दक्षिणा के साथ गरीब को दान कर दें। इससे सुंदर पत्नी भी मिलती है।
    महत्वपूर्ण कार्य: किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए जा रहे हैं तो घर से छोटी इलायची खाकर जरुर निकलें। ऐसा करने से आपके सभी कार्य सिद्ध भी होंगे। वहीं शुक्रवार को पांच छोटी इलायची मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित भी करें। इसे फिर तिजोरी या पर्स में रख दीजिए वहीं इससे पैसों की तंगी भी दूर होती है।

  • Chanakya Niti: सीधे स्वभाव को मूर्खता बताते हैं आचार्य चाणक्य

    Chanakya Niti: चाणक्य कहते हैं चाहे कितना ही बुरा वक्त क्यों न आ जाए किसी भी हालात में मनुष्यों को कैसा  स्वभाव नहीं अपनाना चाहिए वरना आपके अपने भी इसका फायदा उठाने लगते हैं।
    Chanakya Niti: चाणक्य के बताए रास्तों पर चलने से लोगों के कठिन से कठिन काम भी आसानी से निपटने लग जाते हैं। इसी कड़ी में चाणक्य यह भी कहते हैं कि व्यक्ति के व्यवहार से ही उसके व्यक्त्तिव की पहचान भी होती है। मनुष्य चाहे जैसा व्यवहार करता हो वैसे परिणाम भी भोगता है। इसी के साथ चाणक्य ने बताया है कि जीवन में किन लोगों को हर मोड़ पर अत्याचार झेलने पड़ते हैं। चाणक्य यह भी कहते हैं चाहे कितना ही बुरा वक्त क्यों न आ जाए ऐसे हालातों में भी मनुष्यों को किस तरह का स्वभाव नहीं अपनाना चाहिए क्योंकि इससे आपके अपने भी आपका फायदा उठाने लग जाते हैं।
    नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
    छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः ॥
    चाणक्य ने इस श्लोक में बताया है कि जो स्वभाव से बहुत ज्यादा सीधा-साधा, सरल और सहज होता है उन्हें समाज में कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। वहीं चाणक्य ने मनुष्य के अधिक सीधेपन की तुलना जंगल के उस वृक्ष से की है जिसे काटना सबसे आसान होता है। यानी कि जो पेड़ सीधे होते हैं उन्हें सबसे पहले काट दिया जाता है क्योंकि उसमें मेहनत बहुत ही कम लगती है।
    वहीं जो पेड़ टेढ़े मेढ़े होते हैं वह अंत तक टिके हुए रहते हैं। इससे वो ये कहना चाहते हैं कि जरूरत से ज्यादा सीधापन भी हानिकारक होता है। परिस्थिति के अनुरूप मनुष्य को चालाक और चतुराई दिखाना भी अति आवश्यक है नहीं तो पराए तो क्या अपने भी इसका फायदा उठाने लग जाते हैं।
    वहीं हद से ज्यादा भोले व्यक्ति को कमजोर भी माना जाता है। 
    बता दें चाणक्य ने ज्यादा सीधे स्वभाव को मूर्खता की श्रेणी  माना है और वह कहते हैं कि बुरे वक्त में अगर मनुष्य अपना ये स्वभाव नहीं त्यागता है तो उसे हर समय कष्ट से भी गुजरना पड़ता है। यही वजह है जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने और इस स्वार्थी संसार में खुद को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्ति को थोड़ा चतुर और चालक भी बनना चाहिए।