Category: religious

  • इस दिन तुलसी को मत अर्पित करना जल, घर नहीं आएगी लक्ष्मी

    डेस्क। Should Tulsi watered on Sunday- तुलसी विवाह (Tulsi Vivah 2022) अब नजदीक है, इस साल 5 नवंबर को तुलसी विवाह है। वहीं हर घर में पूरे साल सुबह सुबह हर कोई तुलसी के पौधे में पानी भी देता हैं, इससे तुलसी माता बहुत प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद भी देती है। बता दें तुलसी जी को मां लक्ष्मी (Lord Lakshmi) का रूप माना जाता है।
    ऐसी मान्यता भी है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वहां मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की कृपा दृष्टि बनी रहती है पर रविवार का दिन ऐसा है जब पौधे में पानी नहीं देना चाहिए।
    रविवार को तुलसी पर जल न चढ़ाएं (Why Tulsi Not Watered on Sunday) 
    ऐसे माना जाता है कि रविवार के दिन तुलसी भगवान विष्णु के लिए उपवास करती हैं। वहीं इस दिन तुलसी में पानी देने से उनका व्रत टूट जाता है और ऐसा करने से घर में नकारात्मकता भी फैलती है। और आपको जीवन से जुड़ी कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है और देवी लक्ष्मी आपसे नाराज हो जाती हैं।
    ये भी जान लीजिए: ऐसा माना जाता है कि देवी तुलसी का विवाह एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से हुआ था। वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देव उठानी एकादशी पर रीति-रिवाजों के साथ दोनों की शादी भी हुई थी। और देवी लक्ष्मी एकादशी का व्रत भी रखती हैं। वहीं तुलसी जी लक्ष्मी का रूप हैं, ऐसे में इस दिन अगर उनपर जल चढ़ते हैं तो उनका व्रत टूट जाता है और वे नाराज हो जाती हैं और धीरे धीरे पौधा भी सूखने लगता है।
    तुलसी पूजन कैसे करें 
    घर में तुलसी को होना बहुत ही शुभ माना जाता है, साथ ही तुलसी पूजन से बहुत लाभ मिलते भी हैं। नियमित रूप से तुलसी जी को जल अर्पित भी किया जाता है लेकिन धार्मिक ग्रंथों में रविवार और एकादशी के दिन जल अर्पित करने की मनाही भी होती है। 

  • सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए अभी अपनाए आचार्य चाणक्य का यह मंत्र

    आध्यात्मिक– हमारे जीवन के तार हमारे व्यवहार से जुड़े हैं। वही आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक व्यक्ति यदि अपने जीवन को नियमबद्ध तरीके से नही चलाता उसे कभी सूख का अनुभव नही होता है। 
    आचार्य चाणक्य ने व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन से लेकर उसकी सफलता तक के हर नियम का वर्णन चाणक्य नीति में किया है। वही आज हम आपके दाम्पत्य जीवन से जुड़े कुछ ऐसे तत्व बताने जा रहे हैं। जिन्हें यदि आप अपने जीवन मे उतार लेते हैं। तो आपका दामपत्य जीवन सुखी हो जाएगा।
    आचार्य चाणक्य के मुताबिक व्यक्ति को अधिक गुस्सा नही करना चाहिए। अपनी कठिन परिस्थितियों का हल व्यक्ति को सरल और सुलभ तरीके से निकालना चाहिए। क्योंकि जब आप कोई काम शान्त मन से करते हैं तो न सिर्फ आपका जीवन सफल होता है बल्कि आपको अपने दाम्पत्य जीवन मे लड़ाई झगड़ो का सामना नही करना पड़ता है।
    आचार्य चाणक्य कहते हैं पति को कभी भी अपनी पत्नी को अपने से कम नही आंकना चाहिए। जब आप अपनी पत्नी को समानता के भाव से देखते है और उसे सम्मान देते हैं। तो आपके जीवन मे खुशियां स्वतः ही अपना घर बना लेती है।
    आचार्य चाणक्य कहते हैं एक सुखी दाम्पत्य जीवन बिताने के लिए संतुष्टि अत्यधिक आवश्यक है। यदि आप अपनी स्थिति से संतुष्ट रहते हैं और दूसरों को देखकर ईर्ष्या नही करते हैं। तो आपके जीवन मे कोई कष्ट नही आता है और आपको हमेशा सुख मिलता है।

  • Kartik purnima 2022: कार्तिक पूर्णिमा को क्यों कहते हैं देव दिपावली

    डेस्क। हिंदू पंचांग की माने तो प्रत्येक महीने की अंतिम तिथि पूर्णिमा की होती है। इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में भी दिखाई देता है। इस तरह साल में कुल 12 पूर्णिमा तिथि होती है।
    इनमें से कार्तिक मास की पूर्णिमा (Kartik Purnima 2022) बहुत ही खास मानी गई है। इस दिन देव दीपावली का पर्व भी मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 8 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगा। वहीं इस दिन कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का संयोग भी बन रहा है। बता दें यह शाम 6.20 तक रहने वाला है। वहीं इसके बाद कार्तिक पूर्णिमा से संबंधित शुभ कार्य भी किए जा सकेंगे। 
    जानिए क्या है देव दीपावली का महत्व (Significance of Dev Deepawali)
    धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता  हैं। वहीं मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध भी किया था। साथ ही प्रसन्न होकर देवताओं ने उत्सव भी मनाया था। वहीं साथ ही इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर सृष्टि को बचाया भी था। इस वजह से इस तिथि को देव दीपावली भी कहते हैं।
    पूर्णिमा पर दीपदान का होता है विशेष महत्व
    पुराणों में कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष महत्व बताया जाता है। वैसे तो इस पूरे महीने में ही दीपदान का महत्व होता है लेकिन जो लोग ऐसा न कर पाएं, वे सिर्फ कार्तिक पूर्णिमा पर भी दीपदान करें तो भी पूरे महीने दीपदान करने का पुण्य उन्हें प्राप्त होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
    तुलसी के सामने जरूर लगाएं शुद्ध घी का दीपक
    कार्तिक मास में तुलसी पूजा करने से हर तरह की परेशानी से भी बचा जा सकता है। शाम को तुलसी के पौधे के सामने गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और तुलसी नामाष्टक का पाठ भी करें। बता दें इससे भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहेगी। ऐसा करने से सभी व्रत का पुण्य फल भी प्राप्त किया जा सकता है और अपने पितरों को आप आसानी से प्रसन्न भीं कर सकते हैं।
    पवित्र नदी में करें स्नान
    वैसे तो कार्तिक पूर्णिमा पर पूरे दिन नदी में स्नान करने की परंपरा है पर इस बार चंद्र ग्रहण के चलते ऐसा नहीं हो पाएगा। वहीं चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद ही यानी शाम को 6.20 के बाद किसी नदी में स्नान करें। और ऐसा न कर पाएं तो घर में ही स्नान कर मंत्र बोलते हुए नहा लें। इससे भी आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी।  
    दान करने से मिलता है शुभ फल
    कार्तिक पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व है। शाम को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद जरूरतमंदों को कपड़े, अनाज और भोजन का दान जरूर करें। इससे कार्तिक पूर्णिमा से संबंधित शुभ फल तो मिलेंगे ही, साथ ही ग्रहण का अशुभ प्रभाव भी कम हो जाएगा।

  • Surya Mahadasha Effect: ये उपाय नहीं किए तो 6 साल तक रहोगे परेशान

    Surya Mahadasha Effect: ज्योतिषियों के अनुसार नवग्रहों की दशाओं का प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। साथ ही व्यक्ति को दशा में शुभ फल प्राप्त होगा या अशुभ मिलेगा, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यक्ति की जन्मकुंडली में उस ग्रह की स्थिति कैसी रही है। वहीं अगर वह ग्रह शुभ मतलब उच्च का स्थित है तो उसकी महादशा में व्यक्ति को अच्छा फल भी प्राप्त होगा। वहीं अगर वह ग्रह अशुभ स्थित है तो व्यक्ति को इसके नकारात्मक फल भी प्राप्त होगा।
    यहां हम बात करने जा रहे हैं ग्रहों के राजा सूर्य देव के बारे में, जिनकी महादशा 6 साल की होती है और सेवा क्षेत्र में सूर्य उच्च व प्रशासनिक पद तथा समाज में मान-सम्मान के कारक भी माने जाते हैं। यह उनके लीडर (नेतृत्व करने वाला) का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही सूर्य देव सिंह राशि के स्वामी होते है और यह मेष राशि में उच्च के माने जाते हैं वहीं यह तुला राशि में नीच के होते हैं।
    सूर्य देव अगर जन्मकुंडली में शुभ स्थित हों तो व्यक्ति को मनवांछित फल की प्राप्ति होती हैं। वहीं अगर उसका आत्मविश्वास अच्छा होता है। ज्योतिष में सूर्य ग्रह अपनी मित्र राशियों में उच्च होता है तो जिसके प्रभाव से जातकों को अच्छे फल प्राप्त भी होते हैं। वहीं इस दौरान व्यक्ति के बिगड़े कार्य बनते हैं। और व्यक्ति के पिता के साथ संबंध अच्छे रहते हैं और वह प्रशासनिक पद को भी प्राप्त करता है। वहीं उनके सरकारी काम आसानी से बन भी जाते हैं।
    इसके विपरित अगर सूर्य देव किसी व्यक्ति की कुंडली में अशुभ स्थित में हो तो व्यक्ति अंहकारी और क्रोधी होता है। इसके साथ ही व्यक्ति के पिता के साथ संबंध भी खराब हो जाते हैं। वहीं अगर व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य किसी ग्रह से पीड़ित हो तो यह हृदय और आंख से संबंधित रोगों को भी जन्म देता है। वहीं गुरु से पीड़ित होने पर जातक को उच्च ब्लड प्रेशर की शिकायत भी होती है।
    क्या करें उपाय
    1- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को तांबा और गेहूं का दान करना चाहिए। 
    2- प्रतिदिन आदित्यह्रदय स्त्रोत का पाठ करें।
    3- रोज सूर्य देव के बीज मंत्र ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: का जाप करें।
    4- रविवार के दिन भगवान सूर्य के ढ़ल जाने के बाद पीपल के पेड़ के नीचे चार मुंह वाला दीया जरूर जलाएं।  

  • अगर अपने धारण किया है रुद्राक्ष तो जान ले इसके नियम नही तो होगा उल्टा प्रभाव

    आध्यात्मिक– कलयुग में शिव को प्राप्त करने के महज दो तरीके हैं। एक ओम नमः शिवाय का जाप और दूसरा रुद्राक्ष। रुद्राक्ष भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय है। इसे शिव का अंश भी माना जाता है। कहते हैं अगर आप रुद्राक्ष धारण करते हैं तो आपका मन शांत रहता है और आपको नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
    ज्योतिष के मुताबिक रुद्राक्ष व्यक्ति को अपनी कुंडली मे मौजूद ग्रहों की स्थिति के मुताबिक धारण करना चाहिए। वही धर्म ग्रंथ में रुद्राक्ष धारण करने के कुछ नियम बताए गए हैं। कहा जाता है रुद्राक्ष वैसे तो काफी फायदेमंद है लेकिन अगर आप इसे गलत तरीके से धारण कर लेते हैं तो यह आपपर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

    जाने रुद्राक्ष धारण करने के नियम-

    अगर आप मांसाहारी भोजन करते हैं। तो आपको रुद्राक्ष कभी नही धारण करना चाहिए। इससे भगवान शिव नाराज होते हैं और आपको उनका प्रकोप झेलना पड़ेगा। घर मे लोग परेशान रहेंगे। क्योंकि ऐसे लोग जब रुद्राक्ष धारण करते हैं तो वह अशुद्ध हो जाता है।
    व्यक्ति को रात में सोते वक्त रुद्राक्ष निकाल देना चाहिए और उसे अपने तकिए के नीचे रख लेना चाहिए। इससे आपको बुरे सपने नही आते हैं और मन शांत रहता है। वही अगर आप रुद्राक्ष पहकर सोते है। तो इससे आपको नींद नही आती है।
    अगर आप किसी के अंतिम क्रियाक्रम में जाते हैं। तो आपको ऐसी जगहों पर रुद्राक्ष पहनकर नही जाना चाहिए। क्योंकि इन जगहों पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है। यह आपको प्रभावित कर सकता है और आपको परेशानियों से जूझना पड़ सकता है।

  • Dev Diwali 2022: आज मनाया जाएगा देव दीपावली का त्योहार, जानिए महत्व

    डेस्क। Dev Diwali 2022: देव दीपावली का पावन त्योहार कल है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली का पावन त्योहार मनाया जाता है। वहीं इस साल चंद्र ग्रहण के चलते देव दीपावली सोमवार के दिन होने के कारण और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
    बता दें हिंदू धर्म में सोमवार का दिन शिव जी को समर्पित है।
    वहीं मान्यता के मुताबिक देव दिवाली के दिन सारे भगवान एकसाथ दीपावाली का त्योहार मनाते हैं। इस दिन भोलेशंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध भी किया था, जिसके उपलक्ष्य में देवताओं ने दिवाली मनाई थी और तब से इस दिन को देव दिवाली के रूप में इसे मान्यता मिली।
    दीपदान का हैं विशेष महत्त्व 
    देव दिवाली के दिन दीपदान का खास महत्व होता है। वहीं मान्यता के मुताबिक देव दिवाली के दिन गंगा-यमुना समेत पवित्र नदी या सरोवर में स्नान और दीपदान करने से जातक को उसके पापों से मुक्ति भी मिलती है। इससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वहीं भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है और खुशहाली बढ़ती है।
    देव दिवाली पर दीपदान का शुभ मुहूर्त
    दीपदान का मुहूर्त- शाम 5.14-रात 07.49
    कार्तिक पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 7 नवंबर, शाम 04 बजकर 15 मिनट से
    कार्तिक पूर्णिमा तिथि समापन- 8 नवंबर, शाम 04 बजकर 31 मिनट पर
    मान्यता के अनुसार, देव दिवाली के दिन देवतागण स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आते हैं। इसलिए लोग उनके स्वागत में दीपक जलाते हैं। इस दिन मंदिरों और नदी के घाटों पर दीये जलाने की भी मान्यता रही है। देव दिवाली के दिन वाराणसी में गंगा घाट समेत देश भर के सभी प्रमुख नदियों के घाटों पर लोग दीप जला कर इस त्योहार को मानते हैं।
    बता दें हिंदू धर्म शास्त्र के मुताबिक इस महीने में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्वो को प्रमाणित किया गया है। वहीं इस महीन किए हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल भी मिलता है।
    मान्यता के अनुसार देव दिवाली के दिन विशेष पूजन और उपायों से व्यक्ति का भाग्य चमक जाता है। साथ ही उसके सभी संकट समाप्त हो जाते हैं और जातक के जीवन में खुशियां आती है।

  • Chandra Grahan 2022: ग्रहण के बाद ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत

    Chandra Grahan 2022: वर्ष 2022 का अंतिम चंद्र ग्रहण शुरू होने में अब महज चंद घंटों का ही वक्त बचा हुआ है। 8 नवंबर मंगलवार को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और हिंदू धर्म के मुताबिक ग्रहण कोई भी हो, उसे अच्छा नहीं माना जाता है।
    ऐसी मान्यता है कि, इस दौरान सूर्य चंद्रमा दोनों देवता कष्ट में रहते हैं और लिहाजा इन दोनों ही देवताओं को मानने वालों के लिए ग्रहण किसी भी लिहाज से अच्छा नहीं हो सकता है। इतना ही नहीं इसके अलावा चंद्र ग्रहण के दौरान राशियों पर भी इसका असर देखने को मिलता  है।
    जहां कुछ राशि वालों के लिए ये ग्रहण काफी बुरा प्रभाव लेकर आता है तो आपको भी इस चंद्र ग्रहण के बाद अगर अशुभ असर दिखे तो घबराएं नहीं, क्योंकि हम अपने इस लेख में आपको यह बताएंगे कि ग्रहण के बाद दिखने वाले अशुभ असर को कम करने या खत्म करने के लिए आपको क्या करने की जरूरत हैं। 
    कितना महत्त्वपूर्ण  है चंद्र ग्रहण
    चंद्र ग्रहण राशि मेष नक्षत्र भरणी में लगने जा रहा है। वहीं वैसे देखा जाए तो ये ग्रहण दोपहर समय 1:32 मिनट से शुरू हो जाएगा, और भारत में चंद्र ग्रहण का असर 5 बजकर 20 मिनट से दिखने लगेगा 6 बजकर 20 पर यह समाप्त हो जाएगा। वहीं इसका सूतक काल 9 घंटे पहले से ही यानी 8 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा।
    चंद्र ग्रहण के बाद जरुर करें ये उपाय
    हमारे हिंदू धर्म में किसी भी ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है, पर अगर इसका अशुभ असर आपके घर-परिवार में दिख रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है बस कुछ उपायों के जरिए आप इस असर को काफी हद तक कम या खत्म भी कर सकते हैं।
    – उपायों की बात करें तो ग्रहण खत्म होने के बाद आप शिवस्त्रोत्म का 111 बार जाप जरुर करें।
    – ग्रहण के बाद सफेद वस्तु का दान दे।
    – मुमकिन हो तो हवन भी करें, हवन कराने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है।
    – ग्रहण के बाद चंद्रमा मंत्र का जाप करना भी बेहद शुभ बताया गया है।
    – चंद्र ग्रहण के अगले दिन 5 ब्राह्मणों को भोजना करवाए।

  • Guru Nanak Dev Jayanti 2022: प्रकाश पर्व के रूप में मानने की हैं परंपरा जानिए महत्त्व

    डेस्क। Guru Nanak Dev Jayanti 2022: हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास होता है।
    पर हिंदू धर्म के साथ ही सिख धर्म के लिए भी यह दिन बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी का जन्म भी हुआ था। वहीं इसलिए इस दिन को गुरुनानक देव जी की जयंती और प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है साथ ही इस साल मंगलवार 08 नवंबर 2022 को धूमधाम से गुरुनानक जयंती मनाई जाएगी साथ ही इस मौके पर आइए जानते हैं गुरुनानक देव जी और प्रकाश पर्व से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें।
    आपको बता दें गुरुनानक देव जी का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। वहीं उनके पिता का नाम कालू बेदी और माता का नाम तृप्ता देवी बताया जाता हैं। बचपन से ही गुरुनानक जी की रुचि आध्यात्म में  रही थी। इसलिए वे सांसारिक कामों में उदासीन रहा करते थे। बचपन में ही उनके साथ ऐसी कई चमत्कारिक घटनाएं भी घटी जिसे देख गांव वालों ने उन्हें दिव्य माना और लोग उन्हें संत कहने लगे। वहीं बाद में लोगों द्वारा उनके जन्म दिवस यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाना शुरु हो गया।
    कौन थे गुरुनानक?
    सिख धर्म के गुरु गुरुनानक देव जी एक महान दार्शनिक, योगी और समाज सुधारक भी थे। इनका जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 में हुआ था और इन्होंने जीवन की सारी सुख-सुविधाओं का त्याग कर जगह-जगह जाकर लोगों के बीच धर्म से जुड़ी जानकारी दी थी। गुरुनानक जी ने खुद को ध्यान में विलीन कर लिया और लोग गुरुनानक जी को संत, धर्म गुरु और गुरुनानक देव जी जैसे नामों से बुलाते हैं।
     1507 में गुरुनानक देव जी अपने कुछ साथियों के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े और लगभग 14 सालों तक उन्होंने भारत समेत अफगानिस्तान, फारस और अरब जैसे कई देशों में भ्रमण किया और मानवता की ज्योत वहां जलाई। अपने जीवन का अंतिम समय इन्होंने करतारपुर (पाकिस्तान) में बिताया और यहीं से लंगर की परंपरा की भी शुरुआत मानी जाती है।
     
    जयंती का महत्व
    गुरुनानक जयंती या प्रकाश पर्व के दिन गुरुद्वारों में विशेष आयोजन होता  हैं। वहीं लोग अरदास और पूजा के लिए गुरुद्वारे भी जाते हैं। गुरुद्वारे में खूब सजावट और रोशनी की जाती है। वहीं एक दिन पहले से ही गुरुद्वारों में रौनक देखने को मिलती है और अखंड पाठ भी किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा यानी गुरुनानक जयंती के दिन निहंग हथियार के साथ जुलूस निकालकर हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं और इस दिन बड़े पैमाने पर लंगर का आयोजन भी किया जाता है साथ ही गरीब-जरूरमंदों को दान भी दिया जाता हैं।

  • Vastu Tips: घर की छत पर मत रखना ये चीजे, परिवार में होती रहेंगी लड़ाईयां

    डेस्क। वस्तु शास्त्र के अनुसार घर की छत पर रखे फालतू सामान या कबाड़ का घर-परिवार में खुशी और तरक्की का एक बहुत बड़ा कारण वास्तु से भी जुड़ा हुआ होता है। जिन घरों में वास्तु के नियमों को दरकिनार कर काम किया जाता है वहां इसके दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं
    और उन घरों में आए दिन कोई न कोई परेशानी होती रहती है। ऐसे में क्या हमें घर की छत पर फालतू सामान रखना चाहिए या नहीं तो चलिए आपको इस बारे में बताते हैं। 
    घर में होती है कलह
    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की छत पर कोई भी फालतू सामान या कबाड़ नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के मन और मस्तिष्क पर नकारात्मक असर दिखाई देता है और पितृ दोष भी लग जाता है। पूरे घर का माहौल खराब होने लगता है। साथ ही यह आपके घर में कलह का कारण भी बन जाता है। तो आपके घर में यदि बिना उपयोग का फालतू सामान बहुत समय से पड़ा है तो उसे घर के बाहर कर दें।
    लेकिन अगर आपके घर में ऐसा कोई सामान है जो उपयोगी तो है पर अभी उसका कोई काम नहीं है तो ऐसी चीजों को ऐसे ही कहीं भी न पटके, उन्हें व्यवस्थित ढंग से एक जगह बना कर वहां पर रख दें। इससे ये नकारात्मकता से बचा रहता है।

  • Vastu Tips: छिपकली का गिरना लेकर आता है ये संकेत, हो जाओगे मालामाल

    डेस्क। Vastu Tips: आम तौर पर हम घरों में छिपकली को देखते ही उसे भगा देते हैं कई लोग उसे मार देते हैं। वैसे ज्योतिष की बात करें तो ज्योतिष में छिपकली को बहुत ही शुभ बताया गया है। घर की अलग-अलग जगहों पर छिपकली का दिखना अलग-अलग खुशखबरियां भी लेकर आता है। तो आज जानिए शकुन शास्त्र से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातों के बारे में
    अगर घर में सुबह छिपकली दिखे  (Lizard Vastu Tips in Hindi)
    ज्योतिष के विद्वानों की मानें तो घर में छिपकली का होना एक शुभ लक्षण है। पर जहां एक ओर छिपकली मक्खी-मच्छर और दूसरे कीड़े-मकौड़े खा कर घर की गंदगी दूर करती हैं, वहीं दूसरी ओर उसका दिखना पैसे के आने का संकेत भी देता है।
    अगर  सुबह उठते ही घर में छिपकली दिखाई दे तो यह किसी बड़े आर्थिक लाभ की भविष्यवाणी करता है। यदि छिपकली सुबह के समय घर के फर्श पर चलती हुई दिखे तो निश्चित रूप से आय के नए स्रोत बनते हैं और इनकम भी बढ़ जाती है।
    घर के पूजा स्थान पर छिपकली (Lizard in Temple)
    घर में पूजास्थान या पूजा के कक्ष में छिपकली का होना लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक बताया जाता है। आपने भी यह नोट किया होगा कि छिपकली घर के चाहे जिस कोने में दिख जाएं, पूजा स्थान पर जल्दी नहीं दिखती। जहां पूजा कक्ष में छिपकली रहती है, वहां अखंड लक्ष्मी का वास भी होता है और कुबेर के भंडार भी उस घर के लिए हमेशा खुले रहते हैं। इसलिए वहां से भूल कर भी छिपकली को न भगाएं।
    दिवाली की रात में छिपकली का दिखना
    यूं तो दिवाली की रात को छिपकली जल्दी दिखाई नहीं देती है लेकिन यदि उस दिन जिस भी व्यक्ति को छिपकली दिख जाए, उसका भाग्य हमेशा के लिए खुल जाता है। आने वाला समय उस व्यक्ति के लिए कई तरह की खुशखबरियां और आर्थिक विकास लेकर आता है।
    शरीर पर छिपकली के गिरने का अर्थ
    लोग जिस छिपकली को देखते ही डर जाते हैं, वही छिपकली यदि व्यक्ति पर गिर जाए तो इसके पीछे का क्या अर्थ होगा? शकुन शास्त्र में बताया गया है कि यदि व्यक्ति के सिर पर छिपकली गिरे तो व्यक्ति के भाग्य में राजयोग बनता है। वहीं वह जिस भी कार्य में हाथ डालता है, उसमें सफलता ही प्राप्त होती है।