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  • Chhath Puja 2022: जानिए चारों दिनों का पूजा मुहूर्त और महत्व

    डेस्क। Chhath Puja 2022: सूर्य की उपासना और आस्था का महापर्व छठ पूजा नहाय-खाय के साथ कल 28 अक्टूबर 2022 से शुरू हो रहा है। वहीं इस पर्व में महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए 36 घंटे का निर्जला उपवास भी रखती हैं।
    छठ पूजा का पहला दिन
    28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ यह व्रत शुरू हो जाएगा वहीं इस दिन एक ही समय भोजन किया जाता है। उसके बाद व्रती गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा हैं।
    छठ पूजा का दूसरा दिन
    छठ व्रत के दूसरे दिन 29 अक्टूबर को खरना के नाम से जाना जाता है। वहीं इस दिन से व्रत शुरू होता है और पूरे दिन व्रती कुछ नहीं खाते और शाम के समय गुड़ की खीर, देसी घी लगी रोटी और फल खाएं जाते है।
    छठ पूजा 2022 का तीसरा दिन
    व्रत के तीसरे दिन 30 अक्टूबर को शाम के समय व्रती सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और तीसरे दिन को संध्या को अर्घ्य भी कहा जाता है। इस दिन बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्ड् फलों को सजाकर व्रती अपने परिवार से साथ सूर्य को संध्या अर्घ्य अर्पित करती हैं।
    छठ पूजा 2022 का चौथा दिन
    छठ पूजा के चौथे दिन 31 अक्टूबर को और अंतिम दिन व्रती नदी घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और फिर इसके बाद व्रत समाप्त होता हैं। वहीं इस दिन को उषा अर्घ्य के नाम से भी जाता है।
    जानिए छठ पूजा 2022 अर्घ्य समय
    संध्या अर्घ्य का समय – शाम 5.37 बजे है। और उषा अर्घ्य का समय – सुबह 6.31 बजे।
    छठ पूजा 2022 का महत्व
    यह एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसमें सूर्य देव की पूजा और उपासना की जाती है। साथ ही उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। वहीं मान्यता के अनुसार सूर्य देव की उपासना का बहुत महत्व है। और वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य देव को पूर्वज, मान-सम्मान, पिता का कारक रूप में माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कार्तिक माह में उगते सूर्य को अर्घ्य देने का बहुत ही महत्व होता है।

  • वास्तु के मुताबिक घर मे लगाए दर्पण मिलेगी सुख समृद्धि

    आध्यात्मिक– हमारे जीवन मे सुख और सम्रद्धि का सर्वाधिक महत्व है। कहते हैं जब यह दोनो चीजे एक साथ प्राप्त होती है तो व्यक्ति प्रसन्न रहता है और उसके घर मे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। वही अगर आप अपने घर की वस्तुओं को वास्तु शास्त्र के मुताबिक रखते हैं तो इसका आपके जीवन में प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है।
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक यदि आप अपने घर के दर्पण को लगाते हैं और उसमें खुद को निहारते है। तो इससे आपका मन शांत रहता है और मन मे नकारात्मक खयाल नही आते हैं। वही घर मे संतुलन बना रहता है। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर मे दर्पण लगाने के कुछ मूल नियम। 

    वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर मे कैसे लगाए दर्पण-

    वास्तु शास्त्र के मुताबिक व्यक्ति को घर मे चौकोर शीशा लगाना चाहिए। अगर आप घर मे तिजोरी के सम्मुख शीशा लगाते है तो इससे धन में बरक्कत होती है और आपको माता लक्ष्मी जी का आशीर्वाद मिलता है। सभी को घर मे गोल दर्पण लगाने से परहेज करना चाहिए।
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को अपने बेडरूम में दर्पण नही लगवाना चाहिए। क्योंकि इससे आपके बेड का प्रतिबिंब शीशे में दिखाई देता है और आपके दाम्पत्य जीवन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
    घर मे दर्पण लगाते समय यह याद रहे हैं इसको उत्तर पूर्व दिशा में रखा जाए। क्योंकि इस दिशा में भगवान कुबेर का वास होतो है। वास्तु अनुसार पश्चिम या दक्षिण दिशा में आईना लगाना अशुभ माना जाता है.
    वही वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अपने घर के शीशे को गंदा नही रखना चाहिए। क्योंकि गंदा दर्पण नकारात्मकता का प्रतीक है। इससे घर की सुख शांति भंग होती है।

  • चाणक्य के मुताबिक अगर आप भी रुकते हैं इन जगहों पर तो जीवन हो जाएगा तहस नहस

    आध्यात्मिक– हमारा चलना, उठाना बैठना और हमारी संगति हमारे जीवन की दिशा का निर्धारण करती है। चाणक्य नीति के मुताबिक हम जैसे लोगो के साथ रहते हैं जैसा व्यवहार करते हैं। हम अपने जीवन को उसी तरह का बना लेते है।
    वही चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि अगर कोई व्यक्ति कुछ विशेष जगहों पर ठहरता है। तो उससे उसका भविष्य निर्धारित होता है। लोगो को ऐसे स्थान पर ठहरने से बचना चाहिए।
    आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान विकास का जरिया है। इस संसार मे सफल वही हो सकता है जिसके पास ज्ञान है। व्यक्ति को कभी भी उस स्थान पर नही ठहरना चाहिए। जहां शिक्षा के।संसाधन कम हो और उसके आसपास के वातावरण में जो लोग रहते हो वह उसे कुछ सीखा न पाए। अगर आप ऐसे लोगो की संगति में रहते हैं जिनके पास ज्ञान नही है तो वह आपके ज्ञान और सीखने की प्रवर्त्ति को खत्म कर देते हैं और आप असफलता के नजदीक जाते हैं।
    आचार्य चाणक्य के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को अपने रिश्तेदारों के साथ रहने से बचना चाहिए। इनके साथ रहना आसान होता है। लेकिन यह आपके लिए हित नही चाहते। जब आपको इनकी आवश्यकता होगी तब यह आपका साथ छोड़ देंगे।
    आचार्य चाणक्य कहते हैं कि पैसा जीवन को नई दिशा और तुम्हे समाज मे पहचान दिलाता है। व्यक्ति को कभी भी अपना बसेरा ऐसे स्थान पर नही करना चाहिए। जिस स्थान पर रोजगार की कमी हो और आपको पैसे की किल्लत से जूझना पड़े।
    वही आचार्य चाणक्य ने सबसे अमुख बात बताते हुए कहा, व्यक्ति को अपने आत्मसम्मान से कभी समझौता नही करना चाहिए। उसे उस स्थान पर कभी नही रुकना चाहिए जहां उसका सम्मान न हो। क्योंकि जहां सम्मान नही होता वहां रुकने से कभी कुछ हासिल नही होता है।

  • इस मंत्र के जाप से बनेगा धन योग और बरसेगी कृपा

    आध्यात्मिक– आज के युग मे प्रत्येक व्यक्ति अपना जीवन सुख और समृद्धि के साथ व्यतीत करना चाहता है। हर कोई धन प्राप्ति के लिए संघर्ष करता है। कुछ लोगो के भाग्य में धन योग होता है और उन्हें आसानी से अपने जीवन मे हर चीज हासिल हो जाती है। 
    लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं। जिन्हें अपने जीवन मे काफी संघर्ष के बाद भी धन की प्राप्ति नही होती। वैसे तो सफलता आपके संघर्ष और ज्ञान पर निर्भर करती है। लेकिन कई बार हमारे जीवन के योग इसे प्रभावित करते हैं। वही आज हम आपको एक ऐसे मंत्र के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नित्य जाप करने से आपका भाग्य बदल सकता है और आपकी कुंडली मे धन योग बन सकता है।
    धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सिद्धिदायक शाबर मंत्र का जाप करता है तो आपके हर तरह के उद्देश्य की पूर्ति होती है। कहते हैं इन मंत्रों की रचना महान ऋषि मुनियों ने की है। यह सभी मंत्र उनकी वर्षों की तपस्या का फल है। वही अगर आप सिद्धिदायक शाबर मंत्र के जापो को विधि से करते हैं तो आपकी प्रत्येक मनोकामना पूरी हो जाती है।
    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माता लक्ष्मी धन की देवी है। यदि आपपर इनकीं कृपा हुई तो आपको हर काम मे आसानी से सफलता हासिल हो सकती है। वही अगर आप धन को लेकर परेशान रहते हैं तो नित्य आपको इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ऊँ नमः विष्णुप्रियाय, ऊँ नमः शिवप्रियाय, ऊँ नमः कामाक्षाय ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं फट् स्वाहा।
    कहते हैं यह मंत्र धन प्राप्ति के योग का निर्माण करता है और आपके जीवन के सभी क्लेश को दूर कर आपके जीवन को खुशियों से भर देता है।

  • Vastu Tips For Money: ये फूल लबालब भर देगा आपके भंडारे, धन की होगी वर्षा

    डेस्क। Vastu Tips For Money: हिंदू धर्म में पेड़-पौधे और फूलों का विशेष महत्त्व रहा है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत बिना फूलों के नहीं हो सकती है। वैसे तो हिंदू धर्म में सभी फूलों का अच्छा एवं बुरा खास महत्त्व होता है।
    पर आज हम बात करेंगे अपराजिता के फूल के बारे में। अपराजिता के फूल को हिंदू धर्म में बहुत ही खास माना जाता है। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बगीचों और घरों की शोभा बढ़ाने के लिए लगाया जाने वाला अपराजिता को आयुर्वेद में विष्णुक्रांता, गोकर्णी आदि नामों से भी जाना जाता है।
    देखने में अपराजिता का फूल मोर के पंख जैसा दिखाई देता है। शास्त्रों के अनुसार अपराजिता का फूल भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय है। इसके अलावा नीले रंग का यह फूल शनि देव को भी प्रसन्न करने में भी काफी मददगार साबित होता है। अपराजिता के फूल को धर्म के अलावा ज्योतिष में भी बहुत विशेष माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में अपराजिता के फूलों के लिए ऐसे कारगर उपाय बताए गए हैं जो तेजी से असर भी दिखाते हैं। शास्त्रों की माने तो अपराजिता के फूल धन को और समृद्धि को अपनी और आकर्षित भी करते हैं। बात चाहे धन प्राप्ति की हो या नौकरी-व्यवसाय में सफलता पाने की, अपराजिता फूल का यह उपाय इन सभी के लिए बहुत कारगर साबित होता है। तो चलिए हम आपको इसके कुछ खास उपाय के बारे में बताते हैं।
    जैसा की हमने बताया अपराजिता का फूल धन को अपनी ओर काफी आकर्षित करता है। धन की कमी को दूर करने के लिए और बहुत धन प्राप्त करने के लिए सोमवार या शनिवार को अपराजिता के 3 फूल बहते पानी में प्रवाहित करें।  
    पूरी होगी सभी मनोकामना
    हमारी कई तरह की मनोकामना होती है जो पूरी ही नहीं हो पाती। वहीं अगर आपकी कोई मनोकामना लंबे समय तक अधूरी रह जाती है तो अपराजिता के फूलों की माला मां दुर्गा, भगवान शिव और भगवान विष्णु को जरुर अर्पित करें। ईश्वर शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूरी कर देंगे।  
    कब लगाएं पौधा
    अपराजिता का पौधा गुरुवार और शुक्रवार को घर में लगाना चाहिए। बता दें गुरुवार भगवान विष्णु को समर्पित है और शुक्रवार भगवान लक्ष्मी को समर्पित है। इन दोनों दिनों में अपराजिता का पौधा लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे आपके घर में मां लक्ष्मी जी का आगमन होगा। इसके साथ ही आपकी सभी मनोकामना भी पूर्ण करने के लिए ये बेहद लाभकारी साबित होता है।

  • भगवान पर पुष्पर्पित करने से पहले जान ले यह बातें नही तो पड़ जाएगा पछताना

    आध्यात्मिक– भगवान की पूजा करते वक्त हम पूजा की थाली सजाते हैं और उन्हें खुश करने के लिए थाली में सुगंधित पुष्प रखते हैं और पूजा के दौरान धूप दीप लगाकर अपने इष्ट देव को पुष्पर्पित करते हैं।
    धर्म ग्रंथो के अनुसार पुष्प का उपयोग ईश्वर को प्रसन्न करने और उसकी उपासना करने हेतु किया जाता है। कहते हैं अगर आपके पास ईश्वर की पूजा अर्चना के लिए सामग्री नही है तो आप सिर्फ उन्हें पुष्पर्पित करके उनकी कृपा प्राप्त कर कसते है। क्योंकि देवी देवताओं को सोने चांदी से अधिक पुष्प पसन्द है।
    लेकिन धार्मिक ग्रन्थों में भगवान को पुष्पर्पित करने के कुछ विषय नियम बताए गए हैं। वही अगर आप इन नियमो का पालन नही करते हैं तो इससे आपको पूजा का फल प्राप्त नही होता है और आपके इष्ट देव या देवी आपसे रुष्ट हो जाते हैं। इसलिए भगवान को पुष्प अर्पित करते समय व्यक्ति को कुछ विशेष बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

    जाने पुष्पर्पित करते समय ध्यान रखने योग्य बातें-

    अगर आप भगवान को पुष्पर्पित करने के लिए पुष्प लेकर आए हैं तो देख ले वह कटे न हो और उनमें कांटे न लगे हों।
    भगवान को बासी पुष्प नही चढ़ाने चाहिए। उन्हें ताजे फूलों से प्रसन्न किया जा सकता है।
    भगवान को चंपा का फूल छोड़कर किसी अन्य फूल की एक कली नही चढ़ानी चाहिए। इसे दोष माना जाता है।
    कमल और कुमुदिनी के पुष्प को 11 दिन तक ताजा माना जाता है। 11 दिन के बाद इन पुष्पों को भगवान पर नही चढ़ाना चाहिए।

  • छठ व्रत में रखे इन 2 बातों का विषय ध्यान व्रत होगा सफल

    आध्यात्मिक– महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। लोग तैयारी में जुट गए हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में मनाया जाता है। इस त्योहार में लोग माता छठ और सूर्य देव की उपासना करते हैं और श्रद्धा भाव से उनकी पूजा करते हैं।
    छठ पूजा में महिलाओं को 36 घण्टे तक बिना कुछ खाए पीए रहना होता है। इस व्रत को लोग काफी कठिन मानते हैं। लेकिन जो महिलाएं छठ का व्रत करती है उनका कहना है कि माता छठ की कृपा से उन्हें किसी प्रकार का कोई कष्ट नही होता है और वह बड़े अच्छे से छठ का व्रत कर लेती है।
    वही अगर आप भी छठ का व्रत रखती है। तो आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जो आपके व्रत को सफल बनाने में आपकी मदद करेंगे।

    बात करने से परहेज-

    कहते हैं जब हम ज्यादा बोलते हैं। तो इससे हमारी एनर्जी डाउन होती है और हमारा गला सूखता है। अगर आप छठ का व्रत रखती है तो आपको बात करने से अधिक समय ध्यान और पूजा में लगाना चाहिए। इससे आपका मन शान्त रहेगा और आपको भूख या प्यास का अनुभव नही होगा।

    गर्मी से रहे दूर-

    छठ माता का व्रत काफी कठिन होता है। लेकिन इसे करने से कहते हैं सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। वही अगर आप छठ माता का व्रत कर रहे हैं तो आपको अपना अधिक समय ठंडे स्थान पर बिताना चाहिए। क्योंकि जब आप गर्मी में रहते हैं तो यह आपके लिए कष्टदायक होता है और इससे आपका गला सूखता है और आपको प्यास भी लगती है।

  • Tulsi Vivah 2022: कैसे करवाए तुलसी विवाह, जानिए प्रमुख पूजन सामग्री

    Tulsi Vivah 2022 Pujan Samagri List: हिंदू धर्म में कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह के रूप में भी मनाया जाता है। इस बार तुलसी जी का विवाह 5 नवंबर को मनाया जाएगा है।
    इस दिन देवी तुलसी के साथ ही भगवान विष्णु के विग्रह स्वरूप शालिग्राम जी का विवाह पूरे विधि-विधान से की जाती  है। इसी दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा के बाद जाग्रत भी होते हैं। इसलिए इस दिन को देवउठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं इसी दिन से विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। 
    आज हम आपको बताएंगे की तुलसी विवाह और पूजन करने के लिए पूजा सामग्री में किन चीजो को जरूर शामिल करना चाहिए।
     तुलसी विवाह के लिए पूजन सामग्री: 
     
    तुलसी का पौधा
    भगवान विष्णु की एक प्रतिमा
    चौकी
    गन्ना
    मूली
    आंवला
    बेर
    शकरकंद
    सिंघाड़ा
    सीताफल
    अमरूद सहित अन्य मौसमी फल
    धूप
    दीपक
    वस्त्र
    फूल और माला
    साथ ही सुहाग का सामान
    सुहाग का प्रतीक
    लाल चुनरी
    साड़ी
    हल्दी
    तुलसी विवाह की पूजा विधि(Tusli Vivah Vidhi)
    तुलसी विवाह वाले दिन लकड़ी की एक साफ चौकी पर आसन को बिछाएं।
    जिस गमले में तुलसी का पौधा लगा हो उसे गेरू से रंगे और चौकी के ऊपर तुलसी जी को स्थापित करें।
    दूसरी चौकी पर भी आसन बिछाएं और उस पर शालिग्राम जी को स्थापित करें।
    दोनों चौकियों के ऊपर गन्ने से मंडप को सजाएं।
    अब एक कलश में जल भरकर रखें और उसमें पांच या फिर सात आम के पत्ते लगाकर पूजा स्थल पर स्थापित कर दीजिए।
    शालिग्राम और तुलसी जी के समक्ष घी के दीपक को जलाएं और रोली या कुमकुम से तिलक करें।
    तुलसी पर लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं, चूड़ी,बिंदी आदि चीजों से तुलसी का श्रृंगार भी करें।
    तत्पश्चात सावधानी से चौकी समेत शालीग्राम को हाथों में लेकर तुलसी का सात परिक्रमा करवा दें।
    पूजन पूर्ण होने के बाद देवी तुलसी व शालिग्राम की आरती करें और उनसे सुख सौभाग्य की कामना भी करें।
    पूजा संपन्न होने के पश्चात लोगों में प्रसाद वितरित भी करें।

  • November month festival list:- जाने कब है तुलसी पूजा और चन्द्र ग्रहण

    आध्यात्मिक– नवंबर का महिला हिन्दू धर्म के लिए काफी खास माना जाता है। क्योंकि इस महीने में तुलसी विवाह होता है। भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं। माता तुलसी का शालीग्राम जी से विवाह होता है। तुलसी विवाह के बाद से सभी शुभ काम शुरू हो जाते हैं। 
    लेकिन इस बार शुक्र तारा अस्त है। जिसके कारण तुलसी विवाह के दिन से कोई शुभ काम शुरू नही होगा। लेकिन जैसे ही शुक्र उदय होगा सभी शुभ काम शुरू हो जाएंगे। वही आज हम इस लेख में जानेंगे की नवम्बर महीने में कौन कौन से त्योहार है और कब है चन्द्र ग्रहण..

    4 नवंबर 2022 देवत्थान एकादशी या देव उठनी एकादशी। 

    5 नवंबर 2022 तुलसी विवाह।
    5 नवंबर 2022- प्रदोष व्रत
    7 नवंबर 2022 – देव दिवाली
    8 नवंबर 2022 – चंद्र ग्रहण
    8 नवंबर 2022 -गुरू नानक जयंती
    8 नवंबर 2022 – कार्तिक पूर्णिमा या त्रिपुरारी पूर्णिमा 
    16 नवंबर 2022 – कालाष्टमी
    16 नवंबर 2022 – – वृश्चिक संक्रांति
    20 नवंबर 2022 — उत्पन्ना एकादशी
    21 नवंबर 2022 – प्रदोष व्रत 
    23 नवंबर 2022 – मार्गशीर्ष अमावस्या
    27 नवंबर 2022 – विनायक चतुर्थी
    30 नवंबर 2022 – मासिक दुर्गाष्टमी

  • तंत्र साधना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है काल भैरवाष्टमी, जानिए तिथि

    डेस्क। ज्योतिष के दृष्टिकोण से नवंबर का महीना बेहद ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। वहीं नवंबर महीने की शुरुआत ही गोपाष्टमी के साथ होगी इसके बाद अक्षय कूष्माण्ड नवमी, देव प्रबोधिनी एकादशी, बैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा आदि त्योहार भी इसी माह में पड़ेंगे।
    जानिए त्योहारों की लिस्ट
    गोपाष्टमी
    अक्षय कूष्माण्ड नवमी 
    तुलसी विवाह, देव प्रबोधनी एकादशी
    बैकुंठ चतुर्दशी
    कार्तिक पूर्णिमा
    बालदिवस
    भैरवाष्टमी
    बालाजी जयंती
    बालाजी जयंती
    स्कंद षष्ठी
    वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। वहीं इस दिन गाय की पूजा अर्चना भी की जाती है। मान्यता है इस दिन जो भी व्यक्ति सायं काल में गायों का पंचोपचार विधि से पूजन करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
    वहीं कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय कूष्माण्ड नवमी भी मनाई जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। साथ ही इस दिन श्रीहरि विष्णु की भी उपासना होती है।
    इसके बाद देवउठनी के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराने का विधान भी है। इसके साथ ही इसे देव प्रबोधिनी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से ही शादी विवाह भी शुरू हो जाते हैं। 
    बता दें शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं इस दिन दीपदान का भी विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस दिन गंगा सहित कई पवित्र नदियों में स्नान आदि का विधान है। वहीं पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले फल और पीली मिठाई का भोग भी लगाना चाहिए।
    16 नवंबर (श्री काल भैरवाष्टमी)- 
    भैरव अष्टमी तंत्र साधना करने के लिए अति विशेष मानी जाती है। साथ ही काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को शत्रुओं का भय भी नहीं रहता। शास्त्रों के अनुसार काल भैरव भगवान शिव का ही एक रूप बताएं गए है।