आध्यात्मिक– आज नवरात्र का 5 वां दिन है। आज के दिन देवी के स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को ममता का स्वरूप कहा जाता है। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार स्कंदमाता प्रेम के वास्तविक स्वरूप का वर्णन करती है और लोभ को त्यागने की प्रेरणा देती है।
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आज होगी स्कंदमाता की पूजा अर्चना , जाने विधि
स्कंदमाता चार भुजाधारी होती है। यह पुष्प पर विराजमान रहती है और इनकी गोद मे कार्तिकेय बैठे हैं। कहते हैं अगर कोई स्त्री पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखती है और स्कंदमाता की विधि पूर्वक पूजा अर्चना करती है तो माता की उसपर कृपा बनी रहती है और उसकी सुनी गोद भर जाती है।धार्मिक ग्रन्थों में बताया गया है कि स्कंदमाता को सफेद रंग से सबसे अधिक प्रेम है। अगर आप माता की पूजा अर्चना करते हैं तो आपको माता को आज सफेद वस्त्र पहनाने चाहिए और उनको सफेद पुष्प अर्पित करते हुए। माता का सच्चे मन से ध्यान करना चाहिए।वही आप माता की पूजा करते समय उन्हें फल, नारियल मिठाई अर्पित करें। पूजा के वक्त याद रहे आपको अपनी साफ सफाई रखनी चाहिए और पीले वस्त्र धारण करके माता की आराधना करनी चाहिए। -
दिल्ली के पास इस गांव में होती है रावण की पूजा, लोग मानते हैं भगवान
डेस्क। चारों दिशाओं में रावण के बाहुबल का डंका बजता था और बड़े-बड़े योद्धा और बड़े-बड़े धनुर्धर इस प्रकांड पण्डित रावण के आगे नतमस्तक थे। रावण की शिव भक्ति पूरी दुनिया में मिसाल के तौर पर देखी जाती थी।
रावण को सृष्टि रचियता ब्रह्मा जी से अमृत्व का वरदान भी मिला हुआ था, लेकिन जब रावण का पाप बढ़ा तो भगवान का अवतार हुआ और भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर दिया। और तभी से हम बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयदशमी के रूप में मनाते आ रहे हैं। इस मौके पर देश के हर कौने में रामलीलाओं के मंचन होते हैं और फिर रावण का दहन किया जाता है।पर क्या आप जानते हैं राजधानी दिल्ली से महज 22 किलोमीटर दूर बागपत के रावण उर्फ बड़ागांव में ना तो रामलीला होती है और ना ही रावण के पुतले का दहन किया जाता है। वहीं रावण को लेकर लोगों के मन में बहुत आस्था है, क्योंकि यहां के लोग रावण को देवता के समान मानते हैं। साथ ही देवता को ना जलाया जाता है और ना ही उसका वध किया जाता है।
क्या आप जानते हैं कि आखिर बड़ागांव के लोग रावण को क्यों पूजते हैं इसके पीछे एक कहानी जुड़ी हुई है मंशा देवी मंदिर से। इस मंदिर के दर पर जिसने भी माथा टेका उसके सभी संकट कट जाते हैं। वहीं उसकी हर इच्छा भी पूरी हो जाती है। मान्यता है कि आस्था की देवी मां मंशा देवी यहां खुद वास करती हैं। वहीं ग्रामीण बताते हैं कि मंशा देवी मां के बागपत के इस बड़ागांव यानी रावण गांव में पहुंचने की कहानी यह है कि रावण ने सैकड़ो वर्षो आदि शक्ति की तपस्या कर उनको खुश किया।
देवी प्रसन्न हुई और रावण से वरदान मांगने को बोली, रावण ने कहा कि मैं आपको लंका में ले जाकर स्थापित करना चाहता हूँ और देवी ने ये कहते हुए तथास्तु कर दिया की मेरे रूप में मेरी इस मूर्ति को तुम जहां रख दोगे ये वहीं स्थापित हो जाएगी साथ ही इसमें मै वास करूंगी। पर एक बार स्थापित होने पर इसे वहां से कोई नहीं हटा पाएगा। इस वरदान के बाद देव लोक में अफरा तफरी मच गई और देवता भगवान विष्णु के पास त्राहि-त्राहि करते हुए पहुँचे गए तब भगवान विष्णु ने ग्वाले का वेशधर लिया और रावण को लघु शंका भी लगा दी।
जिसके बाद जंगल मे ग्वाले को देखकर रावण ने आदि शक्ति की मूर्ति ग्वाले को थमा दी और गवाले के रूप में भगवान विष्णु ने इस मूर्ति को जमीन पर रख दिया और जब रावण ने मूर्ति को उठाया तो वो वहां से नहीं हिल सकी और बड़ागांव उर्फ रावण गांव में मां की मूर्ति स्थापित हो गई। -
घर मे अगर लगाई हनुमान जी की यह तस्वीर तो बरसेगी कृपा
आध्यात्मिक– राम भक्त हनुमान को संकट हारण कहा जाता है। जो भी भक्त श्रद्धा भाव से हनुमान जी की पूजा करता है और नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करता है। उसके सभी संकट राम भक्त हनुमान हर लेते हैं और उसका मन भय मुक्त हो जाता है।
धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक हनुमान जी अजर अमर है। राम भक्त हनुमान हर युग मे असुरों का नाश करने के लिए इस संसार मे विचरण करते रहते हैं। वही कलयुग में माया और नाकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी का नाम काफी है।राम भक्त हनुमान की पूजा मंगलवार को की जाती है। अगर आप हनुमान जी की पूजा करते हैं तो आपके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शनि दोष, पितृ दोष और नकारात्मक ऊर्जा से प्रभाव से मुक्ति मिलती है। लेकिन अगर आप अपने घर मे हनुमान जी की तस्वीर को लगाते हैं तो आपको वास्तु शास्त्र के कुछ विशेष नियमो को ध्यान में रखना चाहिए। क्योंकि अगर आप इन नियमो के मुताबिक हनुमान जी की तस्वीर अपने घर मे नहीं लगाते है तो इससे आपपर दुष्प्रभाव पड़ता है।वास्तु शास्त्र के अनुसार उनकी तस्वीर दक्षिण दिशा की तरफ मुख की हुई तस्वीर लगा सकते हैं। अगर आप हनुमान जी की लाल रंग की तस्वीर इस दिशा में लगाते हैं तो इससे घर मे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नही रहता है और घर मे सुख सम्रद्धि बनी रहती है।वही आपको कभी भी हनुमान जी की तस्वीर अपने बेड रूम में नही लगानी चाहिए। क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी है और अगर आप उनकी तस्वीर बेड रूम में लगाते हैं तो इससे आपके घर पर बुरा प्रभाव पड़ता है।वही अगर आपको घर मे सुख समृद्धि चाहिए तो आप हनुमान जी की ऐसी तस्वीर अपने घर मे लगाए जिसमे हनुमान जी प्रभु श्री राम और सीता माता के चरणों मे बैठे हो। इस तरह की तस्वीर घर मे लगाने से हनुमान जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहती है। -
आज है नवरात्र का आठवां दिन जाने कब तक है अष्टमी
आध्यात्मिक– आज नवरात्र का 8 वां दिन है। आज के दिन महागौरी की पूजा अर्चना करने का विधान है। मान्यता है आज के दिन जो भी माता गौरी की पूजा विधि विधान से करता है उसकी सभी मनोकनाओ की पूर्ति होती है और उसके घर मे सुख समृद्धि बनी रहती है।
कहते हैं अगर आप माता गौरी की पूजा करते हैं तो आपको सुख, सम्रद्धि, सौंदर्य, धन , विद्या की प्राप्ति होती है और मन मे द्वेष का भाव नही आता है। तो आइए जानते हैं आज कब तक होगी माता गौरी की पूजा और क्या है पूजा का शुभ महूर्त…पंचांग के अनुसार, आज अष्टमी तिथि शाम 4 बजकर 37 मिनट तक है।संधि पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 4 बजकर 13 मिनट से 5 बजकर 01 मिनट तक है।ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 4 बजकर 43 मिनट से है.अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक है।अमृत काल का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 25 मिनट तक है।वही ज्योतिष शास्त्र के मुताबित ये सभी मुहूर्त मां महागौरी की पूजा के लिए उत्तम हैं। अगर आप इन मुहूर्त में माता गौरी की पूजा करते हैं तो आपको मनवांछित फल की प्राप्ति होगी और आपका मन शान्त रहेगा। बता दें आज के दिन माता रानी के कन्या पूजन का विधान है। -
माता सीता ने काली रूप में किया था असुरो का विनाश
डेस्क। रावण के मर्दन के बाद भगवान श्रीराम जब वापस सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे तो उसके कुछ ही समय बाद उन्हें रावण के पराक्रमी भाई सहस्रानन से भी युद्ध करना पड़ा था। उस युद्ध में सहस्रानन ने राम समेत उनकी सेना को छिन्न-भिन्न करके रख दिया था।
इस प्रसंग का वर्णन अदभुत रामायण में मिलता है। ये संस्कृत भाषा में रचित 27 सर्गों का एक काव्य है। इस ग्रन्थ के प्रणेता ‘वाल्मीकि’ जी थे। लेकिन ग्रन्थ की भाषा और रचना से ऐसा लगता है कि बाद में ‘अद्भुत रामायण’ की रचना की गई है।
दरअसल राज्याभिषेक होने के उपरांत जब मुनिगण राम के शौर्य की प्रशंसा कर रहे थे तो सीता जी मुस्कुरा उठीं वहीं इस मुस्कुराहट में एक रहस्य छुपा था। जब राम ने सीता जी से हँसने का कारण पूछने पर उन्होंने जो जवाब दिया, उससे श्रीराम को एक और युद्ध की तैयारी करनी पड़ गई।
रावण की मृत्यु के बाद जब राम का राज्याभिषेक हो रहा था और खुशी का माहौल था तब सीता ने राम से कहा कि केवल रावण के मरने से युद्ध का अंत नहीं हुआ है बल्कि उसके एक प्रलंयकर भाई से भी युद्ध की तैयारी कर लीजिए।
सीता ने राम के पूछने पर बताया कि आपने केवल ‘दशानन’ (रावण) का वध किया है, पर उसी का भाई सहस्रानन अभी भी जीवित है। उसकी हार के बाद ही आपकी जीत और शौर्य गाथा का औचित्य सिद्ध हो पाएगा। ये सुनने के बाद श्रीराम ने अपनी चतुरंग सेना सजाई और विभीषण, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान जी को विशेष मोर्चे संभालने को दिए।
उस सेना के साथ उन्होंने समुद्र पार करके सहस्रस्कंध पर चढ़ाई भी शुरू कर दी जहां सहस्रानन का शासन था। रामायण के अनुसार सीता भी इस सेना के साथ थीं। वहीं युद्ध स्थल में सहस्रानन ने मात्र एक बाण से ही श्रीराम की समस्त सेना एवं वीरों को अयोध्या में वापस फेंक दिया।
बता दें सहस्त्रानन का उल्लेख या शाब्दिक अर्थ हजारों फनों वाले नाग के लिए भी होता है। भारतीय मान्यताओं के अनुसार शेषनाथ के हजार फन हैं और उन्होंने ही पृथ्वी को अपने फन पर उठा रखा है।
सीता ने जब युद्ध क्षेत्र में अपने पति राम को अचेत देखा तो वह बहुत कुपित हो उठीं और उन्होंने भयंकर महाकाली सा विकट रूप धारण किया और एक झटके में सहस्त्रमुख का अंत भी कर दिया।
अद्भुत रामायण की माने तो रणभूमि में केवल श्रीराम और सीता रह गए थे वहीं राम अचेत थे। तब सीता जी ने ‘असिता’ अर्थात् काली का रूप धारण किया और सहस्रमुख का वध कर दिया।
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जाने दशहरा का शुभ मुहूर्त
Dussehra 2022– आज दशहरा का त्योहार है। दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। आज के दिन जगह जगह रावण दहन किया जाता है। धार्मिक ग्रन्थों का मुताबिक अगर कोई व्यक्ति आज शस्त्रों की पूजा और विधि पूर्वक मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन करता है तो उसके घर मे सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं दशहरा और दुर्गा विसर्जन के मुँहूर्त के बारे मेंज्योतिष शास्त्र के मुताबिक आज दशहरा सुबह 11 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ हो गई थी और इस तिथि का समापन आज 05 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर हो रहा है. उदयातिथि के अनुसार दशहरा का त्योहार आज मनाया जा रहा है।वही आज दुर्गा विसर्जन के लिए शुभ समय प्रात:काल सूर्योदय के बाद से सुबह 11 बजकर 09 मिनट तक है. आप सभी लोग विधि पूर्वक माता की प्रतिमा को विसर्जित कर सकते है। वही रावण दहन का सही समय सूर्यास्त से लेकर रात 08 बजकर 30 मिनट तक होता है. -
ये होगी दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा, लिफ्ट से मिलेगी सैर की सुविधा
World’s tallest Shiva statue : भारत बहुत ही जल्द एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाला देश बनने जा रहा है। बता दें कि सरदार पटेल की प्रतिमा के बाद भारत ही नहीं विश्व की दूसरी प्रतिमा का लोकार्पण भी बहुत ही जल्द होने जा रहा है।आपको बता दें कि यह प्रतिमा राजस्थान के शुमार नाथद्वारा शहर में बनाई गई है। वहीं बहुत ही जल्द यह शहर विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा के लिए भी जाना जाएगा। इसके साथ ही अब वह समय आने वाला है जब भारत का डंका एक बार फिर पूर विश्व में बजेगा। यह 351 फीट ऊंची शिव प्रतिमा अब लोकार्पण के लिए पूरी तरह से तैयार है। जिसका अनावरण देश की प्रमुख रामकथा वाचक संत मोरारी बापू के हाथों के द्वारा होगा। वहीं संत मोरारी बापू ने ही दस साल पहले इस प्रतिमा की नींव भी रखी थी।वहीं जानकारी के अनुसार संत मोरारी बापू अगले महीने छह नवंबर को इस प्रतिमा का लोकार्पण भी करेंगे, पर अभी इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस कार्यक्रम में देश के ख्यातनाम अतिथियों और राजनेताओं को आमंत्रित भी किया जाएगा। वहीं राजसमन्द जिले के नाथद्वारा शहर की एक छोटी पहाड़ी पर बनी शिव प्रतिमा का उद्घाटन संत मोरारी बापू नाथद्वारा में आयोजित होने जा रही रामकथा के दौरान करेंगे।यह शिवप्रतिमा बीस किलोमीटर से दिखती है वहीं इसमें कंधे तक लिफ्ट के जरिए जाया भी जा सकेगा। साथ ही विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा बीस किलोमीटर पहले से ही दिखाई देने भी लगती है। साथ ही बैठे हुए अवस्था में बनी यह शिव प्रतिमा बेहद ही खास है। आपको बता दें कि इसके कंधे तक लिफ्ट के जरिए जाया भी जा सकेगा। यानी 280 फीट ऊंचाई तक जाकर शिव प्रतिमा के कंधे पर लगी खिड़कियों के जरिए आप अरावली की पहाड़ियों को आराम से निहार सकेगें।वहीं इस प्रतिमा का निर्माण नाथद्वारा के बिजनेसमैन मिराज समूह के सीएमडी एवं मालिक मदन पालीवाल ने तैयार करवाया है। जिसके निर्माण में लगभग दस साल लग गए थे। यह शिवजी की एकमात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसमें लिफ्ट, सीढ़ियां, लोगों के बैठने के लिए हॉल भी बनाया गया है। वहीं शुरूआत में इस प्रतिमा की ऊंचाई 251 रखी जानी थी लेकिन बाद में 351 फीट तक इसे करने का निर्णय लिया गया। वहीं इसके अंदर दो लिफ्ट है, जिनमें हर लिफ्ट में एक बार में 29-29 श्रद्धालु 110 फीट तक ऊपर जा पाएंगे, उसके बाद 280 फीट तक 13-13 श्रद्धालु एक साथ जा सकते हैं। इसके अलावा इसमें तीन सीढ़ियां भी बनी हुई हैं। -
आज प्रदोष व्रत में करे शिव की यह आरती
आध्यत्मिक– आज शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत है। प्रदोष व्रत एकादशी के दिन पड़ता है। प्रदोष व्रत में भगवान शंकर की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। कहते हैं जो भी व्यक्ति भगवान शिव की प्रदोष व्रत के दिन विधि पूर्वक पूजा करता है। शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत के दिन शिव की पूजा करने से सभी क्लेश दूर होते हैं। घर मे सुख समृद्धि का वास होता है। सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। वही अगर कोई स्त्री पुत्र प्राप्ति की इच्छा के साथ प्रदोष व्रत रखती है तो शिव उसको गुणकारी पुत्र देते हैं।वही अगर आप भी प्रदोष व्रत करते हैं। तो आपको शिव की विधि पूर्वक पूजा करने के बाद उनकी आरती जरूर करनी चाहिए। वैसे तो भगवान शंकर की कई आरतियां है लेकिन अगर आप प्रदोष व्रत में शिव की नीचे बताई गई आरती करते हैं तो भगवान शंकर की आपपर कृपा बरसेगी।जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा।।ॐ जय शिव..॥एकानन चतुरानन पंचानन राजेहंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे।।ॐ जय शिव..दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव..॥अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव..॥श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव..॥कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव..॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव..॥काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव..॥ -
आज मुस्लिम समाज मना रहा है पैगम्बर मोहम्मद का जन्मदिन
आध्यात्मिक– ईद मिलाद उन नबी का मुस्लिम समाज मे काफी महत्व है। यह इस्लाम का प्रमुख त्योहार है। इस दिन को लोग पैगम्बर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। लोग काफी अच्छे से तैयार होते हैं नमाज़ अदा करते हैं अपने दीन को याद करते हैं और एक दूसरे को इस त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं। इसे कई लोग ईद ए मिलाद के नाम से भी जानते हैं।वही इस साल आज यानी 8 अक्टूबर को ईद ए मिलाद का त्योहार मनाया जा रहा है। आज के दिन मुस्लिम समाज मे जगह जगह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जुलूस निकाले जायेगे।अगर हम इस्लाम धर्म की बात करे तो उसके अनुसार मोहम्मद पैगम्बर का जन्म 571 ईसा पूर्व हुआ था। जब पैगम्बर मोहम्मद 6 साल के थे तो इनकी अम्मी का निधन हो गया था। अम्मी के निधन के बाद पैगम्बर मोहम्मद की परवरिश इनके चाचा ने की थी।मुस्लिम समाज के लोगो का कहना है कि पैगम्बर मोहम्मद अल्लाह के दूत थे। उनके अल्लाह के आशीर्वाद के रूप में कुरान मिली थी और उन्होंने अल्लाह के आशीर्वाद से कुरान का संदेश पूरे देश मे दिया।आज के दिन मुस्लिम समाज के लोग पूरी रात प्रार्थना करते हैं। वही सुबह लोग अपने घरों को , मस्जिद को सजाते हैं। नमाज अदा की जाती है। लोगो के लिए हितकारी काम किये जाते हैं। लोग दान करते हैं और जरूरत मन्दों की मदद करते हैं। -
करवा चौथ के जरूर सुने इस कथा को मिलेगा सौभाग्यवती रहने का वरदान
आध्यत्मिक – हिन्दू धर्म मेंपरम्पराओ और त्योहार का एक अलग ही महत्व है। हिन्दुओ का प्रत्येक त्योहर कोई न कोई संदेश देता है। जहां अभी हाल की में बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहर दशहरा मनाया गया। वही अब महिलाओ का प्रमुख त्योहार करवा चौथ आने वाला है। इस साल करवा चौथ का त्योहार 13 अक्टूबर को पद रहा है। करवा चौथ के दिन महिलाएं करवा महारानी से अपने पति की लम्बी आयु की कामना करती है और उनके लिए निर्जला व्रत रखती है।सभी महिलाये करवा चौथ के दिन शाम को सोलह श्रृंगार करती है विधि पूर्वक करवा महारानी की पूजा अर्चना करती है और शाम को चाँद को अर्घ्य दकर और पूजा संम्पन्न करने के बाद अपने पति का मुख देखने के साथ उसे हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती है। धार्मिक ग्रंथो में कहा गया है जो महिला विधि विधान से करवा चौथ का व्रत रखती है और अपने पति की लम्बी आयु के लिए कामना करती है। करवा महारानी उस महिला पर अपनी कृपा बरसाती है और उसे उसके पति का साथ सात जन्मो के लिए मिलता है।करवा चौथ की कथा –
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की बेटी करवा थी और उसके 7 बेटे थे. सभी भाई अपनी बहन करवा से बहुत प्रेम करते थे. एक दिन उनकी बहन मायके आई और उसने व्रत रखा था. उस शाम उसके भाई अपने काम से लौटकर घर आए तो देखा कि उसकी बहन कुछ परेशान है. उन्होंने बहन से कारण जानना चाहा तो उसने बताया कि आज वह निर्जला व्रत है और चंद्रमा को जल अर्पित करे बिना पारण नहीं कर सकती है. चद्रमा के उदय न होने से वह भूख प्यास से व्याकुल थी.सभी भाई करवा की व्याकुलता से परेशान हो गए. उन से नहीं रहा गया. तक छोटे भाई ने एक उपाय सोचा और घर से दूर पीपल के पेड़ पर छलनी की ओट में एक दीपक ऐसे छिपा देता है, जैसे कि चंद्रोदय हो रहा हो. इसके बाद वह करवा को जाकर बताता है कि चंद्रोदय हो गया है. यह सुनकर करवा खुश हो जाती है और उसे चांद समझकर जल अर्पित करके पारण करने बैठ जाती है.जैसे ही पहला निवाला डालती है तो उसे छीक आती है, दूसरा निवाला उठाती है तो उसमें बाल निकल आता है. जैसे ही वह तीसरा निवाला मुंह में डालती है तो उसे अपने पति के निधन की खबर सुनाई पड़ती है. यह सुनकर के वह बिलख पड़ती है. तभी उसकी भाभी उसे बताती है कि उसके छोटे भाई ने व्रत का पारण कराने के लिए क्या किया था. यह जानने के बाद करवा प्रण करती है कि वह अपने पति को फिर जीवित कराकर ही रहेगी.वह पूरे सालभर तक पति के शव के पास ही रहती है और उसके शव के पास सूई जैसी उगने वाली घासों को एकत्र करती रहती है. जब करवा चौथ का व्रत आता है तो उसकी सभी भाभियां व्रत रखती हैं और उसके पास आशीर्वाद लेने आती हैं तो अपनी हर भाभी से कहती है कि यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपने जैसे सुहागन बना दो. हर भाभी उसे दूसरी भाभी से यह निवेदन करने को कहती है.जब वह छठवीं भाभी से कहती है तो वह उसे बताती है कि सबसे छोटे भाई के कारण ही तुम्हारा व्रत टूटा था, इसलिए तुम उसकी पत्नी से कहो, वह अपनी शक्ति से तुम्हारे पति को जीवित कर देगी. जब तक वह जीवित न करे, तब तक उसे छोड़ना मत. इतना कहकर वह चली जाती है. तब अंत में छोटी भाभी आती है. करवा उससे भी अपने पति को जीवित करने और उसे सुहागन बनाने को कहती है. छोटी भाभी उसकी बात नहीं मानती है, वह टालमटोल करती है. करवा उसे कसकर पकड़ लेती है और निवेदन करती रहती है.उसकी जिद और कठोर तप को देखकर छोटी भाभी करवा के पति को जीवित करने के लिए मान जाती है. वह अपने हाथ की छोटी अंगुली को चारकर अमृत निकालती है और उसके पति के मुख में डाल देती है. उसके प्रभाव से उसका पति श्रीगणेश का नाम लेते हुए उठ जाता है. इस तरह से करवा का पति जीवित हो जाता है. इस प्रकार से सभी पर माता पार्वती की कृपा हो और सभी को करवा की तरह अखंड सौभाग्य का वरदान मिले.