बिजनेस– आज समय काफी बदल गया है अब हर कोई अपना बिजनेस शुरू करना चाहता है और खूब पैसे कमाकर अपने सपनो को पूरा करना चाहता है। जहां कई लोगो का यह सपना होता है कि वह अपना बिजनेस शुरू करेंगे वही कई लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों को देखकर अपना बिजनेस शुरू कर देते हैं और फिर उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
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अगर शुरू करना है व्यापार तो जान ले चाणक्य का मूल मंत्र
वही आज का यह आर्टिकल उन लोगो के लिये काफी मतलब का साबित हो सकता है जो अपना व्यापार शुरू करना चाहते हैं। क्योंकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं चाणक्य के वह मूल मंत्र जो उन्हें व्यापार शुरू करने के परिपेक्ष्य में बताए हैं।अगर आप अपना व्यापार शुरु कर रहे हैं तो आपको सबसे पहले उस क्षेत्र के बारे में आकलन कर लेना चाहिए जहां आप अपना व्यापार स्थापित कर रहे हैं। इसके बाद आप फायदे और नुकसान को भाप लें नहीं तो आपको काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।आप जिस भी चीज का व्यापार शुरू करने जा रहे हो आपको उसकी अच्छी समझ होनी चाहिए। वही आप कभी भी अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए दूसरों पर निर्भर न हो। क्योंकि दूसरा व्यक्ति कभी किसी की तरक्की नही देख सकता। यदि वह आपकी मदद करेगा और उसे लगेगा यह काम आपसे बेहतर वह कर रहा है तो एक समय में ऐसा आएगा जब वह आपका प्रतिद्वंद्वी बन जायेगा।।व्यापार शुरू करते समय उन लोगो को इग्नोर करदे जो आपके स्पोर्ट में नही होते हैं और आपके व्यापार को लेकर नकारात्मक बात करते हैं। क्योंकि वह आपकी तरक्की से अधिक इस बात पर फ़ोकस करेंगे की इस बिजनेस में आपको लाभ होगा या नही।इसके अलावा एक बात का हमेशा ध्यान रखे की आपको अपनी रणनीति किसी को नही बतानी है। यदि आप बिना सोचे समझे अपनी रणनीति किसी को बता देते हैं तो वह आपकी नकल करके आपकी रणनीति को फेल करने का षड्यंत्र रचता है और आप तरक्की नही कर पाते हैं। -
अगर अपने अपनी यह आदत छोड़ दी तो माता लक्ष्मी हो जाएगी आपसे प्रसन्न
आध्यत्मिक– आज के समय में ऐसा कोई न है जो पैसा नही कमान चाहता है। हर किसी की यह इच्छा रहती है की वह खूब धड़ाके से पैसा कमाए और अपने सभी शौक पूरे करे। लोग पैसा कमाने की चाहत में अपना पूरा जोर लगा देते हैं।वही कई लोग ऐसे होते हैं जो पैसा कमाने को लेकर खूब विचार करते हैं संघर्ष करते हैं लेकिन माता लक्ष्मी की करवा उनपर नहीं होती है और वह अपने भाग्य को दोष देते रहते हैं।
वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं चाणक्य नीति का वह मूल ज्ञान जिसको अगर आपने अपने जीवन मे उतार लिया तो आपके जीवन से पैसे की समस्या दूर हो जाएगी और आपका जीवन सुखमय व्यतीत होगा। चाणक्य नीति के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति गलत तरीके से पैसा कमाता है और मेहनत करने से दूर भागता है तो उसके ऊपर माता लक्ष्मी की कृपा नही होती है और अथक प्रयास के बाद भी उसे पैसों की किल्लत से जूझना पड़ता है।चाणक्य नीति के अनुसार अगर आप किसी व्यक्ति के साथ छल कपट करते हैं। उसे धोखा देते हैं और धनवान बनते हैं तो आपको कभी भी सुख नही मिलता। आपके पास पैसा आता है लेकिन वह आपके कष्ट का कारण बनता है और सब कुछ होने के बाद भी आप तकलीफ में ही रहते है। चाणक्य कहते हैं की किसी भी व्यक्ति को अगर अपने जीवन मे सफल बनना है तो उसे धोखे की नीति से अलग रहना चाहिए। -
दुसरे नवरात्र के दिन माता को ऐसे करें प्रसन्न
डेस्क। नवरात्रि के दूसरे दिन की जानती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, सिद्धि और विजय देने वाली देवी ब्रह्मचारिणी को आज इस आरती से करे प्रसन्न।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता, ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
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मां दुर्गा का अगर इन मंत्रों से करते हैं जाप तो मिलेगा पुण्य
Navratri special -आज से लेकर आगामी 5 अक्टूबर तक का हर दिन हिंदुओं के लिए काफी खास है। क्योंकि नवरात्र शुरू हो गए हैं और हिन्दू धर्म में नवरात्र का खास महत्व है। आज के दिन लोग श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं और घर मे कलश स्थापित करके माता रानी का अपने घर मे स्वागत करते हैं।
सभी लोग बड़े प्रेम से माता दुर्गा की पूजा करते हैं और उनको प्रसन्न करले के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं और उनको पुष्प अर्पित कर उनकी बड़े प्रेम के साथ आरती करते हैं। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे मंत्रों को बारे में जिनके जाप मात्र से माता रानी कृपा बरसती है और आपके घर के सुख सम्रद्धि का वास होता है।जाने वह मंत्र जो मां दुर्गा को हैं बेहद प्रिय-
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।।या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता: ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी ।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते ।।या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।। -
जानिए किस देवी देवता को नहीं चढ़ते कौन से फूल
डेस्क। हिन्दू धर्म में देवी देवताओं की पूजा करने के अलग-अलग तरीके बताए गए हैं। वहीं हिंदू धर्म में पूजा से जुड़े कुछ ऐसे नियम भीं हैं जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। वहीं पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज देवताओं को फूल अर्पित करना बताया जाता है।वहीं फूल चढ़ाने के कुछ नियम भी हैं, कि किस देवता को कौन सा फूल चढ़ाया जा सकता है। गलत फूल चढ़ाने से आपको अशुभ फल मिल सकते हैं। ऐसे में आपको फूल चढ़ाते समय विशेष ध्यान रखने की जरूरत भी है।भगवान विष्णुऐसा भी माना जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा के दौरान अगस्त्य के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा माधवी और लोध के फूलों के इस्तेमाल से भी बचें।भगवान रामधार्मिक शास्त्रों की माने तो भगवान राम की पूजा में कनेर के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान श्रीरामक्रोधित हो जाते हैं। वहीं आप मां दुर्गा को कनेर के फूल चढ़ा सकते हैं।पार्वतीमदार और धतूरे के फूल भगवान शिव को प्रिय हैं, पर माता पार्वती यानि आदिशक्ति को मदार के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। इससे माता क्रोधित हो जाती हैं और भक्तों पर से अपनी कृपा भी छीन लेती हैं।भगवान शिवऐसा माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ की पूजा के दौरान गलती से भी केतकी या केवड़ा के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए वर्ना भोलेनाथ नाराज हो जातें हैं।देवी दुर्गाज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिखरी हुई पंखुड़ियों वाले फूल या तेज गंध वाले फूल और जमीन पर गिरे हुए फूल आदि देवी दुर्गा को नहीं चढ़ाना चाहिए। -
नवरात्र में भूल कर भी न करना यह काम नही तो जीवन हो जाएगा तहस नहस
आध्यत्मिक– 26 सितंबर से हिंदूओ का प्रमुख त्योहार नवरात्रि शुरू हो गया है। लोग नवरात्र में अपने घरों में बड़े ही श्राद्ध भाव से माता रानी की पूजा अर्चना करते हैं। नवरात्र में माता के 9 रूपों की आराधना की जाती है। वही जो व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा भाव से माता रानी की पूजा करता है उसके घर मे शक्षात माता रानी आती है।
वही नवरात्र के 9 दिनों में जो लोग पूजा करते हैं या जो लोग माता रानी का उपवास करते हैं। उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि अगर आप नियमों के विरुद्ध जाते हैं और नवरात्र में उन चीजों को करते हैं जिन्हें माता रानी बिल्कुल नही पसन्द करती। तो आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। वही आज हम आपको इस लेख में बताने जा रहे हैं कि नवरात्र में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं।अगर आप नवरात्र का व्रत करते हैं और माता रानी की कृपा चाहते हैं। तो आपको सबसे पहले घर की साफ सफाई रखनी चाहिए। अगर आप घर को साफ नही रखते हैं और सिर्फ उस स्थान को साफ करते हैं जहां माता की चौकी रखी हो। तो माता रानी अपने रुष्ट हो जाती है और आपको काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।अगर आप नवरात्र में माता रानी की पूजा करते हैं। तो आपको समय का भी ध्यान रखना चाहिए। सुबह जल्दी उठकर माता की पूजा करनी चाहिए और माता का पाठ करना चाहिए। वही शाम को सूर्यास्त के बाद माता रानी की आरती करनी चाहिए। कोशिश करे आरती देर रात में न क्योंकि सूर्यास्त के बाद देवी देवता विश्राम करने लगते हैं।नवरात्र में सभी लोगो को दुर्गा चालीसा जरूर पढ़नी चाहिए। जो लोग दुर्गा देवी का पाठ नही करते उन्हें इससे लाभ मिलता है। वही दुर्गा चालीसा के पाठ से घर मे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।जो लोग नवरात्र का व्रत करते हैं उन्हें चारपाई से दूर रहना चाहिए। न तो उन्हें चारपाई पर बैठना चाहिए और न ही चारपाई पर बैठकर भोजन ग्रहण करना चाहिए। इसके साथ ही मन को तरह तरह के व्यंजन के विचारों से मुक्त रखना चाहिए। अगर आपके मन मे लहसुन प्याज के सेवन का बार बार विचार आता है तो इससे माता रानी आपसे रुष्ट हो जाती है और आपको उनका गुस्सा झेलना पड़ सकता है। -
आज करे इस मंत्र के साथ माता चंद्रघंटा की पूजा मिलेगा विशेष फल
आध्यत्मिक– आज नवरात्र का तीसरा दिन से आज के दिन सभी लोग माता चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। के अनुसार आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। जो बहुत ही शुभ योग बना रही है।
धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक माता चंद्रघंटा दाम्पत्य जीवन को सुखी करती है और इनकी पूजा मात्र से घर मे सुख सम्रद्धि का वास होता है। वही आज जो भी दामपत्य माता चंद्रघंटा की पूजा एक साथ विधि पूर्वक करेंगे उनका दामपत्य जीवन सुखमय रहेगा और उनके कष्ट दूर हो जायेगे।माता का चंद्रघंटा स्वरूप माता पार्वती का ही रौद्र रूप हैं। उन्होंने इस संसार को राक्षसों के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए यह रूप धारण किया था। माता चंद्रघंटा जितनी रौद्र है उतनी ही यह दयालु है। माता रानी की अगर आप विधि विधान से पूजा करते हैं तो यह आपसे जल्द ही प्रसन्न हो जाती है।आज के दिन आप माता चंद्रघंटा को केला , सेब या दूध से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं। क्योंकि यह चीजे माता चंद्रघंटा को हद से ज्यादा प्रिय है। माता चंद्रघंटा पर पीले पुष्पार्पित करने चाहिए। वही पूजा के दौरानपिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥याॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥का जाप करना चाहिए। इससे माता चंद्रघंटा प्रसन्न होती है और आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। -
आज है नवरात्रि का 6 वां दिन, माता कात्यायनी की पूजा से पूरे होंगे मनोरथ , जाने मंत्र
आध्यात्मिक– आज नवरात्र का 6 वां दिन है आज देवी के कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है। कहते हैं कि माता कात्यायनी बड़ी दयालु है। यह अपने भक्तों के श्रद्धा भाव से बड़ी जल्दी प्रसन्न हो जाती है और उनकी सभी मनोकनाओं को पूरा करती है।
धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति माता कात्यायनी की पूजा विधि पूर्वक करता है। तो उसका यश बढ़ता है और वह अपनी इंद्रियों पर काबू पा लेता है। कात्यायनी देवी का वाहन शेर है। माता ने यह रूप असुरों के वध के लिए धारण किया था।कहते हैं जिस घर मे माता के कात्यायनी रूप की पूजा होती है। उस घर में बुरी शक्ति नही रहती है और परिवार के सभी लोग प्रेम के साथ रहते हैं। लोगो का मन सकारात्मक रहता है।माता कात्यायनी कन्या के रूप में थी इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ गया। माता कात्यायनी की पूजा करते समय वातावरण को शुद्ध रखे। उनका अच्छे से श्रृंगार करे और माता को पुष्पार्पित करके …चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥मंत्र का जाप करने से आपके सभी मनोरथों पूर्ण होते हैं और आप पर माता का आशीर्वाद बना रहता है। -
व्यापारियों को चाणक्य का यह मंत्र रट लेना चाहिए नही तो झेलना पड़ेगा बड़ा नुकसान
आध्यत्मिक– अगर आप अपना कारोबार शुरू करने का विचार कर रहे हैं या आपका कारोबार बढिया चल रहा है और आपको उससे खूब लाभ प्राप्त हो रहा है। तो आपको अपने व्यवहार में आचार्य चाणक्य का दिया हुआ यह ज्ञान उतार लेना चाहिए।
क्योंकि आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में व्यापारियों को लेकर कुछ नियम बनाए हैं और कहा है कि अगर व्यापार करने वाला व्यक्ति इन नीति निर्देशो के अनुरूप काम करता है। तो उसे कभी भी अपने व्यापार में नुकसान नही उठाना पड़ता है।आचार्य चाणक्य के मुताबिक एक व्यापारी व्यक्ति को कभी भी किसी से अपना लाभ साझा नही करना चाहिए। अगर आपको व्यापार में लाभ प्राप्त हो रहा है तो आपको उसे गुप्त रखना चाहिए और अपने लाभ से ज्यादा लाभ कमाने की योजना बनानी चाहिए न की उसका गुणगान करना चाहिए।वही आपको कोशिश करनी चाहिए की आप व्यापार से अपना व्यवहार दूर रखे। क्योंकि जब आप व्यापार में व्यवहार चलाते है तो यह आपके बिजनेस को प्रभावित करता है और कई बार स्थिति यह आ जाती है। की आपको अपना व्यापार बन्द करना पड़ता है और आप कर्ज के बोझ तले दबे जाते हैं।आचार्य चाणक्य के अनुसार एक व्यापारी को।कभी भी किसी से अपनी कमजोरियों का जिक्र नही करना चाहिए। उसे कभी भी यह बात जग जाहिर नही करनी चाहिए कि वह किन रणनीतियों के साथ अपना व्यापार मार्केट में स्थापित करना चाहता है। -
आज है नवरात्र का चौथा दिन , हर वस्त्र हरी मिठाई माता कुष्मांडा को है सबसे प्रिय, जाने पूजा विधि
आध्यत्मिक– आज नवरात्र का चौथा दिन है। यह दिन माता कूष्मांडा को समर्पित है। हिन्दू धर्म के मुताबिक माता कूष्मांडा अपने भक्तों की भक्ति से जल्द ही प्रसन्न हो जाती है। यह पूरे ब्रह्मांड में जीवन शक्ति का संचार करती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव से माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना करता है उसे दुख से छुड़ाकर मिलता है।माता कुष्मांडा को रोग दोष दुख हारी कहा जाता है।
जाने कैसे करे पूजा-
अगर आप माता कुष्मांडा को प्रसन्न करना चाहते हैं। तो आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और माता कुष्मांडा की प्रतिमा को चौकी पर रखकर सजाना चाहिए।माता कुष्मांडा को हरे वस्त्र अत्यधिक प्रिय है उन्हें सबसे पहले हरे वस्त्र पहनाने चाहिये। इत्र लगाना चाहिए। माता को पुष्पार्पित करने चाहिए और दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए।धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार माता कुष्मांडा को हरे रंग से बहुत प्यार है। पूजा के समय भक्तों को माता को हरे फल चढ़ाने चाहिए। वही अगर आप माता को पेठे की मिठाई चढ़ाते हैं तो माता रानी आपसे जल्द प्रसन्न होकर आपको आशीर्वाद प्रदान करती है।।पूजा के दौरान नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा से मनचाहा आशीर्वाद पाने के लिए ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै नम:’मन्त्र का जप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करें।