आध्यात्मिक: नागों का हमारे जीवन मे महत्वपूर्ण स्थान है हम उन्हें शिव प्रिय रूप में देखते है और उनकी पूजा भी करते हैं। सावन के महीने में नागपंचमी के दिन नागों को दूध पिलाया जाता है। नागपंचमी का त्योहार हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि यदि आप नागों की पूजा करते हैं तो आपको विशेष फल प्राप्त होगा। नागों को सूर्य व शक्ति का अवतार माना जाता है।
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जाने क्यों हर साल मनाई जाती है नागपंचमी और कब शुरू हुआ यह त्योहार
भारत मे नागपंचमी का त्योहार युगों युगों से मनाया जा रहा है। हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में पंचमी को नाग पंचमी को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन नागों का दर्शन शुभ माना जाता है। वही मान्याता यह भी है कि अगर कोई इस दिन विधि पूर्वक शिव की आराधना करता है और नागों को पूजता है तो उसे शिव का वरदान प्राप्त होता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।कहा जाता है कि एक गांव में एक लीलाधर नाम का किसान रहता था। किसान के तीन पुत्र व एक पुत्री थी। वह काफी मेहनती था। रोज सुबह हलं लेकर अपना खेत जोतने जाता था। एक दिन जब वह हल से अपना खेत जोत रहा था तो उसके हल से नाग के बच्चो की मौत हो गई। नागों की मौत ने नागिन को बहुत क्रोध आया वह अपने बच्चो की मौत का बदला लेने किसान के घर पहुंच गई।रात को जब किसान अपने बच्चो व अपनी पत्नी के साथ सो रहा था तो नागिन ने उसे व उसकी पत्नी व तीनो बेटों को डस लिया। उन सबकी मौत हो गई लेकिन किसान की बेटी को नागिन ने नही काटा। जब दूसरे दिन नागिन किसान की बेटी को डसने के लिये उसके घर पहुंची तो उसने नाग माता को प्रसन्न करने के लिये उनके सामने दूध रख दिया और उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़ी हो गई। अपने पिता की भूल के लिये उनसे माफी मांगी और उन सबका जीवन नाग माता से वापस मांगा। नागमात उसके भक्ति भाव से प्रसन्न हुई और उनके परिवार वालो को जीवन दान दिया।नाग माता ने कहा अब से हर साल श्रावण शुक्ल पंचमी को जो महिला सांप की पूजा करेगी उसकी कई पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी। तब से आज तक हर साल नागपंचमी की पूजा होती है और लोग नाग को पूजते है व अपने परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं।नागों को न पिलाये दूध:नागपंचमी की कथा में भले ही किसान की बेटी ने नाग माता को मनाने के लिये उन्हें दूध पिलाया था। लेकिन आप नागपंचमी के दिन नागों को दूध न पिलाये क्योंकि कहा जाता है दूध पीने से नागों की मौत हो जाती है और आपको मृत्यु दोष लगता है। आज के दिन मिट्टी की खुदाई नही की जाती है। इसके अलावा कई जगहों पर तवे का उपयोग नही होता है इसे दोष माना जाता है और कहा जाता है आप अगर तवा चढ़ाते हैं तो इसका मतलब है कि आप नाग का फन आग में झोंक रहे हैं। -
राधा को कृष्ण से था अटुट प्रेम, लेकिन अभिमन्यु से हुआ था विवाह
Hindu dharm: राधा और कृष्ण के प्रेम की कहानी हमे बचपन से सुनाई जाती है। हिन्दू धर्म मे कृष्ण राधा के प्रेम को समर्पण और त्याग का प्रतिरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधा माता लक्ष्मी का रूप थी और भगवान कृष्ण विष्णु अवतार थे। कृष्ण राधा से असीम प्रेम करते थे उनका प्रेम पवित्रता और त्याग की व्याख्या करता है।
लेकिन भगवान कृष्ण और राधा का विवाह नही हुआ था उन्हें प्रेम में वियोग सहना पड़ा और दोनो के बीच अटुट प्रेम होने के बाद भी दोनो का मिलन नही हो पाया। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार कहा जाता है कि यह नियति थी राधा और कृष्ण पहले से यह जानते थे कि उनका प्रेम लोगो को प्रेरणा तो देगा लेकिन वह विवाह के अटुट बन्धन में नही बधं पाएंगे। आज लोग राधा कृष्ण के प्रेम की मिशाल देते हैं और उससे बहुत कुछ सीखते हैं।आज लोग इस बात के रहस्य को जानना चाहते हैं कि राधा का विवाह आखिर किसके साथ हुआ था। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार राधा का विवाह अभिमन्यु से हुआ था। जिसके सबूत नंदगांव से 2 मील की दूरी पर स्थित जावट ग्राम में मिलते हैं । कहा जाता है यह वह गांव है जो द्वापर युग मे मौजूद था। इस गांव में जटिला नाम की एक गोपी रहती थी। उस गोपी का एक पुत्र था जिसका नाम अभिमन्यु था।योगमाया के अनुसार राधा का विवाह अभिमन्यु से हुआ था। राधा के पिता वृषभानु ने उनका विवाह करवाया था। कहा जाता था कि अभिमन्यु राधा के पति थे लेकिन उन्होंने कभी भी राधा को स्पर्श नही कर पाया। राधा में इतना तप था कि अभिमन्यु उनकी परछाई के पास भी नही जा पाए। योग माया से हुए इस विवाह का औचित्य सिर्फ द्वापर युग मे समाज को दिखाने और जीवन चक्र के नियमों को उल्लेखित करने के लिये हुआ था।आज भी जावट गांव में जटिला जी की हवेली है और जटिला, कुटिला और अभिमन्यु का मंदिर भी है। लोग इनका नाम सम्मान के साथ लेते हैं। वही धार्मिक ग्रन्थ प्रेम को समर्पण का प्रतिबिंब मानते हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार सच्चा प्रेम वही है जिंसमे समर्पण और सत्यता है वह त्याग है और जो त्याग नही कर सकता वह प्रेम नही कर सकता। -
जाने आज का राशिफल और कैसा रहेगा आज आपका दिन
मेष राशि:
मेष राशि के जातकों का आज सावधान रहने की आवश्यकता है। आज का दिन इनके ऊपर खर्चे का पहाड़ तोड़ सकते हैं। आज कोशिश करे की बेवजह के खर्ज से आप बच सके। कही बाहर की यात्रा के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। अपनो का सहयोग प्राप्त होगा। लम्बे समय से अटके काम पूरे होंगे।
वृष राशि:
आज आपको अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। काम के बोझ के कारण आज आपको काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। स्वास्थ्य प्रभावित होगा और मन आशंत रहेगा। आज आप दयावान बनेंगे और आपकी मदद से हर किसी का काम पूरा होगा। बेवजह के झगड़ो से बचकर रहे।मिथुन राशि:-
आज का दिन इस राशि के जातकों के लिए बेहतरीन रहने वाला है। आपको आज अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है लेकिन आपको इसका लाभ भी प्राप्त होगा। आज आपके मैत्री सम्बंध अच्छे रहेंगे। धन लाभ के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। पारिवारिक जीवन आज सुखमय व्यतीत होगा।कर्क राशि:-
आज कर्क राशि के जातकों का दिन सकारात्मक रहेगा। अपनो के सहयोग से सभी रुके हुए काम पूरे हो जायेगें। अगर आप सम्पति सम्बंधित काम कर रहे हैं तो इसमे आपको सचेत रहने की आवश्यकता है क्योंकि आज धन हानि के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। अपनो से सावधान रहें आज आपके साथ छल हो सकता है।सिंह राशि:-
आज आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। कही यात्रा की संभावना बन रही है। परिजनों से सहयोग प्राप्त होगा। अटका हुआ धन वापस मिलेगा। पैसे के खर्च से बच कर रहे। आज बिन वजह के खर्च आपके सामने आएंगे और धन खर्च करने के बाद आपको इसका अफसोस होगा।कन्या राशि:-
लम्बे समय से बन्द पड़े काम शुरू हो सकते हैं। धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं। अगर आपको नौकरी की तलाश है तो आज आपको सफलता प्राप्त होगा। अपनो का सहयोग मिलेगा। घर मे खुशी का माहौल रहेगा। आज आप किसी मंदिर पूजा के उद्देश्य से जा सकते हैं। मन मे नकारात्मक ख्याल नही आएंगे।तुला राशि:
इस राशि के जातकों के लिये आज का दिन खुशियां लेकर आया है। आज आपको हर ओर से तरीफे मिलेगी। आपको अच्छा व्यवहार आपको सम्मान दिलाएगा। जीवन साथी के सहयोग से आज आप अपना हर काम पूरा करेंगे और आपको उसमे सफलता प्राप्त होगा। आज आपका कोई अपना आपको धोखा दे सकता है।वॄश्चिक राशि:-
इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन विवाह के दृष्टिकोण से अच्छा माना जा रहा है। आज आपका विवाह पक्का हो सकता है। घर मे कोई नया मेहमान आएगा उसके आगमन से घर का माहौल थोड़ा तनाव से भरा रहेगा। आज आपको कही बाहर की यात्रा करनी पड़ सकती है।धनु राशि:
इस राशि के जातकों के लिये आज का दिन अच्छा साबित होगा। बच्चों की तरफ से कोई शुभ समाचार सुनने को मिल सकता है। अपनो का सहयोग मिलेगा। दाम्पत्य जीवन सुखमय गुजरेगा। आज धन लाभ के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। अगर आप कोर्ट कचहरी से जुड़े हुए हैं तो आज आपको इससे निजात मिल सकता है।मकर राशि:
आज आपका विवाह पक्का हो सकता है। घर मे कोई नया मेहमान आएगा।अपनो का सहयोग मिलेगा। दाम्पत्य जीवन सुखमय गुजरेगा।आज आपको हर ओर से तरीफे मिलेगी। आपको अच्छा व्यवहार आपको सम्मान दिलाएगा।कुम्भ राशि:
इस राशि के जातकों को आज काफी सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि इनके जीवन में आज कोई बड़ा बदलाव होने वाला है। किसी को कर्ज देने पड़ सकता है। बच्चो का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। आज आपको कई बार बेवजह गुस्सा आएगा जिससे आपके रिश्ते में फूट पड़ सकती है।मीन राशि:
आज का दिन इस राशि के जातकों के लिए बेहतरीन रहने वाला है। आपको आज अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। बच्चों की तरफ से कोई शुभ समाचार सुनने को मिल सकता है। अपनो का सहयोग मिलेगा। दाम्पत्य जीवन सुखमय गुजरेगा। आज आपका कोई अपना आपको धोखा दे सकता है। -
हाथ पर हैं ये निशान तो निश्चिन्त हो जाओ क्योंकि आप पर है भोलेनाथ की विशेष कृपा
डेस्क। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ में कुछ खास निशान होते हैं जिससे जातक पर भोलेनाथ की विशेष कृपा होने का पता चलता है। इन निशानों का होना यह बताता है कि इनके जीवन में महादेव की कृपा के कारण अपार धन और वैभव आता है।
इन खास निशानों को विशेष सौभाग्य का प्रतीक माना जाता हैं। वहीं जिन लोगों के हाथ में ये निशान हों उनके जीवन में शिव जी की कृपा हमेशा से ही बनी रहती है। साथ ही उनके जीवन में हमेशा खुशियां भी आती हैं।
महादेव की कृपा होने के कारण ऐसे लोग अपने जीवन में किसी से भी डरकर हार नहीं मानते और ना ही अपने लक्ष्य का पीछा छोड़ते हैं। इसी कारण ये लोग अपने जीवन में खूब सफलता भी प्राप्त करते हैं और इतना ही नहीं ऐसे लोग जीवन में खूब प्रेम और मान-सम्मान भी पाते हैं।
ये निशान होते हैं भोलेनाथ की कृपा की सूचक
हाथों के निशानों का जीवन के हर एक पहलू पर खासा प्रभाव पड़ता है। आपके हाथों के ये निशान आपको करियर, सुख, प्रेम और मान-सम्मान, सफलता आदि देते हैं।
इतना ही नहीं हस्तरेखा शास्त्र में इनको बहुत ही शुभ बताया गया है।
जिन लोगों की हथेली में ध्वज का निशान होता है उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा मानी जाती है। ऐसे जातकों को अपने जीवन में सारे सुख और खूब ख्याति प्राप्त होती है। ये लोग मन से बहुत ही मजबूत किस्म के बताए जाते हैं। और किसी भी स्थिति में ये लोग कभी घबराते नहीं हैं।
बता दें जिन लोगों के हाथ में अर्धचंद्र होता है उन लोगों पर भी भोलेनाथ की विशेष कृपा होती है। क्योंकि भोलेनाथ अपने सिर पर भी चंद्रमा धारण करते हैं इसी कारण से यह उनकी कृपा का चिन्ह है। चंद्रमा मन और शीतलता का कारक साथ ही यह जीवन में खूब प्रेम भी लाता है। ऐसे लोग मन से भी काफी हिम्मती होते हैं।
हाथ में त्रिशूल का चिन्ह भी बेहद शुभ माना जाता है। यदि हथेली में मस्तिष्क या भाग्य रेखा पर त्रिशूल का निशान होता है तो ऐसे लोगों को जीवन में भर-भर कर सफलता की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग जीवन मे कोई ऊंचा पद हासिल करते हैं। इन लोगों को जीवन में खूब धन-दौलत और हर तरह के सुखों की प्राप्ति भी होती है। अक्सर ऐसे लोग कोई बड़े नेता या प्रभावशाली हस्ती बनकर उभरते हैं। इन लोगों पर पूरी जिंदगी भोलेनाथ की कृपा बरसती ही रहती है।
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जाने जगतपिता शिव के त्रिशूल का रहस्य
Aadhyatmik: भगवान शिव हमारे आराध्य है। उन्हें इस संसार का पालनकर्ता कहा जाता है। इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण शिव से हुआ है। महाकाल सभी के कष्टों को हरने की शक्ति रखते हैं। शिव को तीनों लोकों का स्वामी कहा जाता है और जो भी सच्चे मन से शिव की आराधना करता है व ओम नमः शिवाय का जाप करता है उसके सभी कष्ट मिट जाते हैं और उसे कलयुग में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
शिव के सामने सभी दैत्य व देवता शीश झुकाते है। शिव की भक्ति जो सच्चे मन से करता है उसे शिव वरदान देते हैं। शिव दौत्य देवता सभी को समानांतर देखते है उसके लिए इस सृष्टि का प्रत्येक जीव समान है। वही शिव वह शक्ति है जिसे कभी किसी अस्त्र शस्त्र की जरूरत नही होती है। उनका सबसे प्रमुख शस्त्र उनकी तीसरी आंख है।शिव की तीसरी आंख प्रतापी है। उसकी लौ को कोई नही सह सकता है। वही शिव के गले मे सर्प, हाथ मे डमरू व त्रिशूल, माथे पर चंद्रमा और जटाओं में गंगा समाहित है। इन सबमें बहुत प्रताप होता है। वही अगर हम शिव त्रिशूल की बात करे तो यह किसी भी बुरी शक्ति को मिटा सकता है। शिव का त्रिशूल अनेको रहस्यों को खुद में छुपाए हुए हैं। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं शिव के त्रिशूल के 7 ऐसे रहस्य जिन्हें सुनकर आप दंग रह जाएंगे और आज से पहले शायद ही आपने कभी सुना हो…जाने शिव के त्रिशूल के 7 रहस्य:-
शिव का त्रिशूल कष्ट निवारक है। शिव के त्रिशूल को घर मे रखने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर का वातावरण अच्छा रहता है।शिव के त्रिशूल के तीन शूल इस बात जा प्रतीक है की इस संसार की सबसे बड़ी शक्ति सत, रज और तम है।शिव के त्रिशूल के तीन शूल , उदय संरक्षण और लयीभूत होने का प्रतिनिधित्व करते भी हैं।शिव के त्रिशूल के तीन शूल पशुपति, पशु एवं पाश का प्रतीक है।धर्म ग्रन्थों के अनुसार शिव के त्रिशूल के तीन शूल भूतकाल, भविष्यकाल और वर्तमान का प्रतिरूप है।शिव के त्रिशूल में स्वपिंड, ब्रह्मांड और शक्ति मौजूद हैं।यह वाम भाग में स्थिर इड़ा, दक्षिण भाग में स्थित पिंगला तथा मध्य देश में स्थित सुषुम्ना नाड़ियों का भी प्रतीक है। -
भगवान कृष्णा को बहुत प्रिय हैं ये चीजें, जन्माष्टर्मी पर जरूर करें अर्पित
डेस्क। जन्माष्टमी 19 अगस्त 2022 को है और इस दिन भगवान की पूजा और कीर्तन का विशेष महत्व है। इस दिन पूजा में उनकी पसंदीदा चीजों को शामिल किया जाता है जिससे आपको बहुत ही पुण्यफल प्राप्त होंगे।
मोरपंख- भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट पर विराजमान मोर पंख उन्हें बहुत ही प्रिय है। कृष्ण वास्तु में भी मोरपंख सकारात्मक ऊर्जा और आकर्षण पैदा करने वाला माना जाता है। इस जन्माष्टमी के दिन इसे खरीद कर लाएं और पूजा में चढ़ाकर इसे अपने घर में सजा दें इससे गृहक्लेश और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
बांसुरी- श्रीकृष्ण का बंशीधर नाम इसलिए था क्योंकि उन्हें बांसुरी बहुत ही प्यारी है। बांसुरी के बिना कृष्ण की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ये प्रेम का प्रतीक बताया गया है। इसलिए जन्माष्टमी के दिन बांसुरी को जरूर खरीदें। जन्माष्टर्मी की पूजा में श्रीकृष्ण को यह जरुर चढ़ाएं और इसके बाद बांसुरी बेडरूम में रखें या फिर तिजोरी में रख दें। यह आपके दांपत्य जीवन को सुखमय करेंगी और धन की कमी कभी नहीं होगी।
गाय और बछड़ा- गाय और बछड़ा भगवान श्रीकृष्ण के सखा की तरह माने जातें है। जन्माष्टमी के दिन गाय और बछड़े की छोटी-सी प्रतिमा खरीदनी चाहिए और इसे पूजा में शामिल करने के बाद अपने घर के मंदिर में ही रखें और रोज इनकी पूजा करें।
वैजयंती माला- भगवान श्रीकृष्ण के गले में वैजयंती माला रहती है है और इसे जन्माष्टमी पर घर लाने से आर्थिक स्थिति भी अच्छी होती है। इसे माला में देवी लक्ष्मी का वास बताया जाता है।
चंदन- श्रीकृष्ण भगवान को चंदन बहुत पंसद है। इस दिन चंदन घर लाएं और पूजा के बाद सबके माथे पर इसका तिलक भी लगाएं। इससे घर में स्वास्थ्य और शांति का माहौल बना रहेगा।
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जाने कब है कृष्ण जन्माष्टमी और क्यों दो दिन मनाया जाता है कृष्ण जन्मोत्सव
कृष्ण जन्माष्टमी: श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव पूरे भारत में बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जाता है। लोग इस दिन प्रेम पूर्वक कृष्ण भगवान की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है जो भी कृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण का विधि विधान से पूजन करता है उसके सम्पूर्ण दुख दूर हो जाते हैं और घर मे सुख सम्रद्धि का वास होता है। कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हर साल मनाई जाती है।
वही इस साल पंचांग के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त को पड़ रही है। इस दिन लोग लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार इस दिन माधव का जन्म हुआ था। रात के 12 बजे सभी लोग श्री कृष्ण की पूजा करते हैं। अपने घर को सजाते हैं और कृष्ण का ध्यान करते हैं।कृष्ण जन्माष्टमी एक ऐसा पर्व है जिस दिन हर कोई कृष्ण भक्ति में लीन रहता है। प्रत्येक वर्ण के लोग कृष्ण का गुणगान करते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। साधू संत, सभी इस दिन व्रत रखते हैं और कृष्ण महिमा का गुणगान करते हैं।कृष्ण जन्माष्टमी कुछ विशेष योग देखकर मनाई जाती है। इन योगों के कारण दो दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। योग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि, चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी और रात में रोहिणी नक्षत्र का संयोग देखकर जन्माष्टमी मनाते हैं।स्मार्त अष्टमी या इन संयोगों के आधार पर सप्तमी को जन्माष्टमी मनाते हैं। वैष्णव भी इस उत्सव को मनाने के लिए कुछ योग देखते हैं। जैसे भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि हो, उदयकाल में अष्टमी तिथि हो और अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा हो। इसलिए ये जन्माष्टमी अष्टमी तिथि को मनाते हैं। -
18 या 19 किस दिन मनाई जाएगी जन्माष्टर्मी, यहां देखें शुभ मुहूर्त के साथ पूजा विधि
Janmashtami 2022 Date: कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद मास (भादो) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है पर इस साल तिथि को लेकर काफी कंफ्यूजन है। लोगों का मानना है इस साल यह तिथि 18 अगस्त, गुरुवार को है तो कई लोग इसे 19 अगस्त को मना रहें हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कंस की जेल में भादो महीने के कृष्ण पक्ष के रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि को हुआ था। बता दें कि कृष्ण भक्त भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को जन्माष्टमी के रूप में बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मानाते हैं।
वहीं इस दिन भगवान कृष्ण (Lord Krishna) के बाल गोपाल (Bal Gopal) रूप की पूजा होती है। साथ ही धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में 12 बजे हुआ था इसलिए जन्माष्टमी पूजा (Janmashtami Puja) भी मध्यरात्रि में करने की ही परंपरा है।
जानें इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 2022 कब है? और पूजा का शुभ मुहूर्त (Janmashtami Shubh Muhurat)
गृहस्थों की कृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त को
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अगस्त 2022 गुरुवार की रात 09:21 से शुरू होगी। जो अष्टमी तिथि की समाप्ति 19 अगस्त 2022 शुक्रवार की रात 10.50 पर होगी। वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था इस कारण ज्यादातर लोग जन्माष्टमी 18 अगस्त को मनाने वाले हैं। वहीं ज्योतिष के अनुसार उदयातिथि को मानते हुए 19 अगस्त को भी जन्माष्टमी मनाना उत्तम बताया जा रहा है। आपको यह भी बता दें कि ज्यादा साल ऐसा होता है जब कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाती है। इस बार भी ऐसा ही है क्योंकि इस साल गृहस्थ जीवन जीने वाले 18 अगस्त को कृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे वहीं बांके बिहारी मंदिर और द्वारिकाधीश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव 19 अगस्त को बड़ी धूम के साथ मनाया जाएगा।
जानिए कृष्णा जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त (Krishna Janmashtami 2022 Shubh Muhurat)
श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त-18 अगस्त रात्रि 12:20 से 01:05 तक का रहेगा
पूजा अवधि- 45 मिनट की है।
व्रत पारण समय- 19 अगस्त, रात्रि 10 बजकर 59 मिनट के बाद से है।
क्या है जन्माष्टमी पूजा विधि (Krishna Janmashtami 2022 Puja Vidhi)
सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
घर के मंदिर में साफ- सफाई कर लें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर दीजिए।
सभी देवी- देवताओं का जलाभिषेक कर नए वस्त्र पहना दीजिए।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा करने का प्रावधान है।
साथ ही लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं।
रात्रि में भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा- अर्चना कर जाती है।
इस दिन लड्डू गोपाल को मिश्री, मेवा का भोग भी लगाया जाता है।
अंत में लड्डू गोपाल की आरती करें।
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कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा के समय इन चीजो का करें उपयोग मिलेगा उत्त्तम फल
Krishna Janmashtami 2022: श्री कृष्ण जन्माष्टमी आने वाली है। हिन्दू धर्म का यह बहुत बड़ा फेस्टिवल होता है। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त को पढ़ रही है। सभी घरों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी जोर शोर से हो रही है।
अगर हम धार्मिक ग्रन्थों की माने तो श्री कृष्ण 64 कलाओं से युक्त है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सभी कृष्ण का व्रत रखते हैं और रात में विधि विधान से कृष्ण भगवान की पूजा करते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है और उन्हें उनका लक्ष्य आसानी से प्राप्त होता है। वही अगर आप कुछ विशेष वस्तुओं का इस्तेमाल करके कृष्ण भगवान की पूजा करते हैं तो इससे आपको विशेष फल की प्राप्ति होती है।जाने किन वस्तुओं का पूजा के समय करें इस्तेमाल:-
मोर पंख:-
मोर पंख कृष्ण भगवान को बेहद पसन्द है। इसे वह अपने मुकुट पर धारण करते हैं। जो व्यक्ति जन्माष्टमी की पूजा में मोर के पंख का इस्तेमाल करता है कृष्ण उसकी सभी मनोकनाओं को पूरा करते हैं और उसपर अपनी दयादृष्टि बनाये रखते हैं।मुरली:-
मुरली जो कन्हैया के हाथ की शोभा बढ़ाती है। इसकी धुन कृष्ण भगवान को खूब पसन्द है। कृष्ण भगवान की पूजा जो व्यक्ति मुरली अर्पित करके करता है उसे धन की प्राप्ति होती है।शंख:
शंख को शुभता का प्रतीक माना जाता है। सभी को कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कृष्ण भगवान को शंख से गंगा जल और दूध से स्नान करवाना चाहिए।तुलसी:
तुलसी भगवान कृष्ण को बहुत पसंद है। इसके बिना कोई भी पूजा अधूरी है। अगर आप कृष्ण का भोग बनाते है और उसमें तुलसी का उपयोग करते हैं तो इससे आपको उम्दा लाभ प्राप्त होता है। -
जाने कैसे मिला शिव को त्रिशूल और घर में कैसे रखें त्रिशूल
आध्यात्मिक: शिव हमारे आराध्य है। शिव को तीनों लोकों का स्वामी कहा जाता है। बिना शिव की अनुमति के इस संसार मे पत्ता भी नही हिलाता। देवो के देव महादेव इन तीनो लोको के कर्ताधर्ता है। भगवान शिव को वैसे तो किसी अस्त्र शस्त्र की आवश्यकता नही होती है क्योंकि इनका सबसे बड़ा हथियार इनकीं तीसरी आंख है। लेकिन इसके बाबजूद शिव के पास त्रिशूल है जो शिव के प्रमुख अस्त्र के रूप में जाना जाता है।
कहा जाता है शिव का त्रिशूल बहुत प्रतापी है। यह बड़े से बड़े कष्ट को हर लेता है वही जो भी व्यक्ति शिव के त्रिशूल को अपने घर मे रखता है उसके घर मे नकारात्मक ऊर्जा का वास नही होता है और घर मे सुख शान्ति बनी रहती है। लेकिन सबके मन में शिव के त्रिशूल को लेकर तरह तरह के सवाल रहते हैं और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर शिव को त्रिशूल मिला कहां से है और इसका क्या महत्व है।जाने कैसे मिला शिव को त्रिशूल:
धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक शिव को ब्रह्मनाद से उत्पन्न हुए। तब पृथ्वी के तीन गुण प्रकट हुए। इन तीनो गुणों का फिर मिलन हुआ और इस मिलन से शिव शस्त्र त्रिशूल का निर्माण हुआ। इसके अलावा त्रिशूल को लेकर विष्णु पुराण में उल्लिखित है कि विश्वमकर्मा ने सूर्य के अंश से त्रिशूल का निर्माण किया था, जिसको उन्होंने भगवान शिव को अर्पित किया था।धार्मिक ग्रथों का कहना है कि शिव का त्रिशूल रज, तज और सम गुण से मिलकर बना है। शिव को त्रिशूल काफी प्यारा है। शिव की प्रतिमा त्रिशूल के बिना अधूरी मानी जाती है। शिव के त्रिशूल को लेकर मान्यता है कि जो भी इसके तीसरे शूल पर ओम को बनाकर अपने घर मे रखता है उसके घर के सभी दुख खत्म हो जाते हैं।