आध्यात्मिक;- आज के समय मे पैसे की चाहत हर किसी को होती है। हर कोई चाहता है कि उसके पास अताह पैसा हो ओर वह अपने पैसे के बलबूते पर अपने सभी सपनो को पूरा कर सके। कई लोग पैसे की चाहत को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं ओर खूब पैसा कमाते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जो हर चीज के लिए अपने भाग्य पर निर्भर रहते हैं। उन लोगो का सीधा रोना रहता है कि यदि हमारे भाग्य में धन योग होगा तो हमे धन जरूर मिलेगा। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे लोगो के नाम जिनके पास कभी पैसे की कमी नहीं रहती है।
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अगर इस अक्षर से शुरू होता है आपका नाम तो कभी कम नही होगा पैसा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे जीवन मे जो भी चीजे होती है उनका कनेक्शन कही न कही हमारे भाग्य से होता है। वही हमारे जीवन को प्रभावित करने में हमारे नाम की अहम भूमिका होती है। हमारा नाम हमारे चरित्र की व्याख्या करता है। हमारा नाम यह तय करता है कि हमारा जीवन सुख में व्यतीत होगा या हमे कष्ट झेलना पड़ेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे नाम के पहले अक्षर से धन का कनेक्शन है। अगर नहीं तो आइए जानते हैं किन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम के लोगो को कभी नहीं होती धन की कमी….अगर आपका नाम A अक्षर से शुरू होता है तो यह आपके लिए काफी अच्छा साबित होगा। A अक्षर के नाम वाले काफी चतुर होते हैं। यह मां लक्ष्मी के प्रिय होते हैं इनका जीवन खुशियों से भरा रहता है ओर इन्हें कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होती है। यह लोग काफी खर्चीले होते हैं इनके पास पैसा आता तो है लेकिन यह बचत नही कर पाते हैं।R नाम के लोग काफी भाग्यशाली होते हैं। इन लोगो के पास धन भी रहता है ओर यह अपने धन को बढ़ाना भी जानते हैं। यह धार्मिक होते हैं ओर दान पुण्य से मां लक्ष्मी को हमेशा खुश रखने का प्रयास करते हैं।जिन जातकों का नाम P अक्षर से शुरू होता है इन्हें पैसे की काफी ललक होती है। यह पैसा अपनी मेहनत से कमाते हैं। इन्हें धन प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होती है। लेकिन जब इनके पास धन आना शुरू होता है तो इनको कभी भी पैसे की कमी नहीं होती है। यह अपने जीवन मे काफी मेहनत करते हैं तो इन्हें सफलता ओर मां लक्ष्मी की कृपा हासिल होती है।जिन जातकों का नाम V अक्षर से शुरू होता है यह पैसे के मामले में काफी लकी होते हैं। इनका मायका व ससुराल पैसे की खान होतो है। यह काफी शौकीन होते हैं ओर अपना प्रत्येक सपना अपने बलबूते पर पूरा करना चाहते हैं। V नाम के जातकों की लाइफ थोड़ी कठिन रहती है। इन्हें शरीरिक समस्या रहती है लेकिन इनके पास धन की कभी कमी नहीं होती। यह जो चाहते हैं वह आसानी से हासिल कर लेते हैं। -
आज है सावन का पहला सोमवार , जाने इसका महत्व
सावन:- आज सावन का पहला सोमवार है। लोग आस्था की टोकरी भरके अपने शिव को पूजने पहुंच गए हैं। वही आज वाराणसी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। भारी मात्रा में श्रद्धालु अपने शिव की पूजा करने पहुँच गए हैं। श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर शिव जयकारों से वाराणसी की शोभा बढ़ा दी है। आज काशी में हर ओर शिव का गुणगान हो रहा है।
जानकारी के लिए बता दें इस समय सावन का महीना चल रहा है। हिन्दू धर्म मे सावन का एक अलग ही महत्व है शिव भक्त सावन के महीने को किसी त्योहार से कम नहीं आकंते। वही धार्मिक ग्रन्थों में कहा गया है कि सावन वह महीना है जिंसमे शिव अपने भक्तों की आस्था से बड़ी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और कोई अगर सावन को सोमवार को शिव की पूजा विधि विधान से करता है तो उसकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है।लोग सावन के सोमवार को काफी महत्वपूर्ण मानते हैं। लोग इस दिन आस्था के साथ व्रत रखते हैं। शिव की पूजा के लिए शिव मंदिर जाते हैं। उनपर बेल पत्र पुष्प व दूध अर्पित कर उनकी आराधना करते हैं। हर ओर शिव का गुणगान होता है ओर शिवालय बम बम बोले की जयकारों से गुजने लगते हैं।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रावणका महीना शुरू होते ही शिव भक्त कावड़िए हरिद्वार, ऋषिकेश, गौमुख से गंगाजल भरकर नंगे पैर दौड़ते और बम-बम भोले का उद्घोष करते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करने का विधान है। पूजा के दौरान गंगाजल से शिवजी का अभिषेक सबसे बढ़िया माना जाता है।धर्म ग्रन्थों के अनुसार सावन का व्रत ब्रह्म मुहूर्त से किया जाता है यह तीन प्रहर का व्रत होता है। सावन के सोमवार को लोग बड़ी आस्था के साथ शिव की पूजा करते हैं। कई लोग शिव की कृपा पाने के लिए अपने घरों में रुद्राभिषेक भी करवाते हैं। कहा जाता है जिन कन्याओं का विवाह नही हो रहा होता है ओर उन्हें एक ऐसे जीवन साथी की तलाश होती है जो शिव की तरह अपनी अर्धांगिनी से प्रेम करे। वह बड़े श्रद्धा भाव से सावन के सोमवार का व्रत रखती है। इससे उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है। -
चातुर्मास में कर लेना इन नियमों का पालन, मिलेगा विशेष फल
Chaturmas 2022 Benefit and Niyam: इस साल चातुर्मास 10 जुलाई से शुरू हो गए हैं। पंचांग की माने तो चातुर्मास का प्रारंभ आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से होता है। साथ ही इसका समापन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होगा। चातुर्मास धार्मिक कार्यों के लिए सबसे उत्तम मास माना जाता है वहीं इस दौरान किसी भी मांगलिक कार्य पर पाबंदी होती है। चातुर्मास के दैरान कई तरह के नियमों का पालन किया जाए तो इसके अनगिनत फायदे मिलते हैं।
जानिए चातुर्मास के नियम ( Chaturmas 2022 Niyam)
चातुर्मास के दौरान व्रत करना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान जमीन पर सोना चाहिए और बेड चारपाई आदि पर नहीं।
इस दौरान सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।
इन दिनों में अच्छी तरह से स्नान दान करना चाहिए।
चातुर्मास के 4 महीनों में जितना संभव हो पाए अधिकतर समय मौन रहना चाहिए।
दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए और रात्रि के समय में केवल फलाहार रखना उत्तम माना गया है।
इन 4 महीनों में ब्रहमचर्य का पालन करना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सत्संग और सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
चातुर्मास में प्रतिदिन सुबह-शाम को भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
चातुर्मास में 5 तरह के दान करने का नियम है- ये 5 प्रकार के दान हैं- अन्नदान, वस्त्र दान, दीपदान , श्रमदान और छायादान।
चातुर्मास के फायदे ( Chaturmas 2022 Benefit)
चातुर्मास के नियमों को पालन करने के कुछ प्रमुख फायदे होते हैं।
स्वस्थ जीवन रोगों से छुटकारा मिलेगा।
मानसिक संताप मिटेगा और किसी प्रकार का भय या चिंता नहीं होगी।
सभी प्रकार की मनोकामना पूरी हो जाएंगी जीवन की सारी इच्छाएं भी पूर्ण होगी।
सभी तरह के पापों का नाश होगा और जाने अनजाने में हुए पापों से मुक्ति भी मिलेगी।
सभी प्रकार के मानसिक विकार बस नियमों के पालन से स्वतः ही ख़त्म हो जायेंगे।
पितृ दोष से भी मुक्ति मिलेगी और पितरों का आशीर्वाद बना रहेगा।
भगवान विष्णु और शिव की कृपा दृष्टि बनी रहेगी।
सुख समृद्धि और शांति की भी प्राप्ति होगी। घर परिवार में धन का आगमन बना रहेगा।
भाई-बंधु का प्यार सहयोग की प्राप्ति होगी।
जीवन में आत्म संयम, त्याग, विशवास और समर्पण का विकास होगा।
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सावन विशेष:- धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक शिव की थी 9 संताने
सावन:- सावन का महीना चल रहा है। यह हिन्दू धर्म मे काफी महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। सावन के महीने में हर कोई शिव भक्ति में लीन रहता है। लोग शिव को प्रसन्न करने के लिए हर सम्भव प्रयास करते हैं। कहा जाता है कि सावन महीने में जो भी सच्चे मन से शिव की आराधना करता है शिव उनपर अपनी दया दृष्टि हमेशा बनाए रखते हैं। वही धार्मिक ग्रन्थों की बात करे तो उनमें शिव से जुड़ी कई कथाएं छुपी हुई है धार्मिक ग्रंथ न सिर्फ शिव की महिमा का गुणगान करते हैं बल्कि शिव के कई रहस्यों से पर्दा भी उठाते है ओर शिव के हर रुप का वर्णन बड़ी निपुणता के साथ करते हैं।
वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं शिव की संतानों के बारे में हमने आज तक यही सुना है कि शिव के दो पुत्र थे गणेश और कार्तिकेय लेकिन धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार शिव के दो नही 9 संताने थी । धार्मिक ग्रंथों में कहा गया शिव की 9 संतानों में 1 पुत्री व 8 पुत्र थे। बताया जाता है इन संतानों में कुछ संताने शिव ने गोद ली थी तो कुछ को अपने चमत्कारों से उत्पन्न किया था।अशोक सुन्दरी:-
धार्मिक ग्रन्थों में कहा गया है कि पार्वती जी के दो पुत्र व एक पुत्री थी। पुत्रो के बारे में हम सबने खूब सुना है लेकिन पुत्री को हम नही जानते। असल मे माता पार्वती काफी अकेलापन महसूस करती थी। उनके इस अकेलेपन को दूर करने के लिए भगवान शिव ने अशोक सुंदरी यानी अपनी पुत्री का निर्माण किया था।कार्तिकेय:-
इसके अलावा कार्तिकेय का नाम सभी जानते हैं कि यह शिव के पुत्र थे ओर इनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था।गणेश:-
गणेश जो शिव पार्वती की सबसे प्रिय संतानों में से एक थे इनका जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। यह कार्तिकेय से छोटे थे ओर इनकीं उत्पत्ति पार्वती जी ने चंदन के उबटन से की थी कहा जाता है यह शिव पार्वती को बहुत प्रिय थे।सुकेश;-
गणेश के बाद धार्मिक ग्रन्थों में सुकेश का नाम उल्लेखित है। अगर हम अशोक सुन्दरी को छोड़ दे तो यह शिव का तीसरा पुत्र था। धार्मिक कथाओं के अनुसार अनुसार दो राक्षस भाई थे- ‘हेति’ और ‘प्रहेति’। प्रहेति धर्मात्मा हो गया और हेति ने राजपाट संभालकर अपने साम्राज्य विस्तार के लिए ‘काल’ की पुत्री ‘भया’ से विवाह किया। भया से उसके विद्युत्केश नामक एक पुत्र का जन्म हुआ। विद्युत्केश का विवाह संध्या की पुत्री ‘सालकटंकटा’ से हुआ। इस पुत्र को उन्होंने अकेला छोड़ दिया जिसके बाद इसको शिव अपने साथ ले आए इसका नाम शिव पार्वती ने सुकेश रखा ओर इसी से राक्षसों का वंश चला।जलन्धर:-
जलन्धर का जन्म समुद्र से हुआ। इसमे अपार शक्ति थी। मगर इसकी शक्ति का कारण उसकी पत्नी वृंदा थी जिसके पतिव्रत धर्म के कारण ही देवी-देवता मिलकर भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे।अयप्पा:-
मान्यता है भगवान अयप्पा भगवान शिव और मोहिनी के पुत्र है। कहा जाता है कि श्री हरि का का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था। उनके वीर्य को पारद कहा गया और उनके वीर्य से ही बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा कहा गया।भूमा:-
इनका जन्म शिव के पसीने की तीन बूंदों से हुआ है। कहा जाता है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव समाधि में ध्यान लगाए बैठे थे, उस समय उनके ललाट से तीन पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। इन बूंदों से पृथ्वी ने एक सुंदर बालक का जन्म हुआ जिसका नाम भूमा पड़ा। भूमा के अलावा अंधक और खुजा भी शिव के पुत्र थे। -
जाने किस चीज के रुद्राभिषेक से मिलता है क्या लाभ
सावन: सावन का महीना चल रहा है हर कोई शिव की पूजा आराधना कर उन्हें प्रसन्न करना चाह रहा है। लोग सावन के सोमवार का व्रत रख रहे हैं। शिव पर दूध और गंगाजल का अभिषेक कर रहे हैं। वही अगर हम बार रुद्राभिषेक की करे तो सावन के महीने मे इसका अत्यधिक महत्व है। लोग अपने कष्टों को काटने के लिए ओर अपने घर परिवार पर महाकाल की कृपा पाने के लिए रुद्राभिषेक करवाते हैं। लेकिन धार्मिक ग्रंथों में रुद्राभिषेक के कई फायदे बताए गए हैं। तो आइए जानते हैं रुद्राभिषेक से होने वाले फायदो के बारे में…
शिव पुराण में कहा गया है कि रुद्राभिषेक वैसे तो प्रत्येक कष्ट को हर लेता है और इसको करवाने से आपके जीवन में सुख आता है। लेकिन रुद्राभिषेक करवाते समय द्रव का विशेष ध्यान रखना चाहिए शिव पुराण के अनुसार आप जिस भी उद्देश्य से रुद्राभिषेक करवा रहे हैं आपको उसी द्रव के साथ रुद्राभिषेक करवाना चाहिए। वही हर एक चीज के अभिषेक का अलग महत्व है।शिव पुराण कहता है कि यदि आप जल से रुद्राभिषेक करते हैं तो इससे वृष्टि होती है। अगर आप कुशा जल से रुद्राभिषेक करते हैं तो यह रोग, दुःख से मुक्ति दिलाता है। दही से अभिषेक करने पर पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर धन वृद्धि होती है। तीर्थ जल से अभिषेकक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है ।दूध से रुद्राभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति, प्रेम रोग की शान्ति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती है। गंगाजल से अभिषेक करने से ज्वर ठीक हो जाता है। दूध शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से सद्बुद्धि प्राप्ति होती है। घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होता है। सरसों के तेल से अभिषेक करने पर रोग तथा शत्रु का नाश होता है। शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने पर पाप दूर होते हैं ओर जीवन मे खुशियां बनी रहती है। -
फिर बंद की गई अमरनाथ यात्रा जानिए बड़ा कारण
डेस्क। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम की वजह से शनिवार को वार्षिक अमरनाथ यात्रा को जम्मू से एक और व्यवधान का सामना करना पड़ा, बता दें रामबन जिले में 270 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई भूस्खलन हुए।
अमरनाथ तीर्थयात्रियों के दो अलग-अलग काफिले जम्मू में यात्री निवास आधार शिविर से रवाना हुए। हालांकि, बालटाल मार्ग को पसंद करने वाले 2,504 तीर्थयात्रियों के जत्थे को रामबन जिले के यात्री निवास आधार शिविर तक पहुंचने की अनुमति दी गई थी, लेकिन 4,549 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था, जिन्होंने पहलगाम मार्ग को प्राथमिकता दी, को भूस्खलन के बाद उधमपुर के टिकरी क्षेत्र से जम्मू आधार शिविर लौटना पड़ा।
रात भर की बारिश के साथ-साथ रामबन जिले के पंथियाल, कैफेटेरिया मोड़ और मेहर में ताजा भूस्खलन, कीचड़ और पत्थर गिरने से राजमार्ग बंद हो गया।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के कर्मचारी और मशीनरी मलबा हटाने के काम में लगे हैं। हालांकि राजमार्ग पर कोई फंसे हुए वाहन नहीं हैं, लेकिन कुछ जगहों पर ताजा स्लाइडों ने इसे अवरुद्ध कर दिया है और इसे साफ करने में कुछ समय लगेगा।
अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रियों के किसी भी नए जत्थे को खराब मौसम और रामबन में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खराब स्थिति के कारण दक्षिण कश्मीर हिमालय में पवित्र गुफा में जाने की अनुमति नहीं दी गई।
हालांकि, जम्मू के लगभग 5,000 यात्रियों, जो रामबन में यात्री निवास में रात भर रुके थे, को शुक्रवार की सुबह कश्मीर में पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।
इससे पहले, यात्रा 10 जुलाई को खराब मौसम के कारण यात्रा जम्मू से स्थगित कर दी गई थी और 11 जुलाई को फिर से शुरू हुई थी।
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Aaj ka rashifal: आज कर्क कन्या और मिथुन राशि के जातक होंगे मालामाल, जाने अपनी राशि का हाल
Rashifal: राशिफल हमारे जीवन की दशा को बदल देता है। यदि हम ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखते हुये सतर्कता बरतते है व अपने जीवन के अनुकूल काम करते हैं तो निश्चित रूप से हमे सुख प्राप्त होता है। आपका राशिफल आपको पहले से यह बता देता है कि आज आपका दिन कैसा रहने वाला है ओर अगर आज आप सावधान नही रहे तो यह आपके लिये समस्या का कारण बन जाता है। कई लोग समाज मे ऐसे होते हैं जो राशिफल पर विश्वास नही करते लेकिन धर्म और ईश्वर आस्था का प्रतीक है यदि आप आस्था रखते हैं तो ईश्वर और धर्म है अन्यथा नही है। वैसे ही राशिफल में बनने वाले योग आपके विश्वास पर टिके है जो विश्वास रखता है उन्हें इसका फल मिलता है। तो आइये जानते हैं आज का राशिफल क्या कहता है आपके बारे में….
वृष राशिः आज इस राशि के जातकों का दिन अच्छा रहने वाला है। मन मे कई प्रकार की उलझन रहेंगी लेकिन आप अपनी सूझ बूझ से इन सभी का हल खोज लेंगे। आज आपके द्वारा कोई शुभ काम हों सकता है। यात्रा के योग बन रहे है। कार्य क्षेत्र में लाभ के संकेत प्राप्त हों रहे हैं। आज आपके द्वारा कोई बड़ी डील हो सकती है। माता पिता का सहयोग मिलेगा। घर का वातावरण सुखमय रहेगा।मिथुन राशि :
इस राशि के जातक वैसे तो काफी बुद्धि वाले होते हैं। इनका अपना व्यापार करने में अधिक मन लगता है। यह किसी के नीचे या दब के काम करना नही पसन्द करते। आज यह अपने व्यापार में बड़ा लाभ कमा सकते हैं। सम्पति खरीद के योग बन रहे हैं। पार्टनर से आज थोड़ी अनबन हो सकती है लेकिन आज मिथुन राशि के जातकों को अपार धन लाभ होगा।कर्क राशि:
कर्क राशि के लिये विवाह की दृष्टि से आज का दिन महत्वपूर्ण है। आज इस राशि के जातकों का विवाह पक्का हो सकता है और इनके जीवन मे किसी नए सदस्य का आगमन होगा। पूरे दिन घर मे खुशी का वातावरण बना रहेगा। किसी मेहमान के आने की संभावना है। लम्बे समय से फसा धन आज वापस मिलेगा।सिंह राशि:
आज कई लोग आपके बनते काम मे बाधा डालने की कोशिश करेंगे। आप को आज किसी अपने हितैषी से धोखा मिलेगा। परिवार में कलह बनी रहेगी। आज आपको पूरे दिन सावधान रहने की आवश्यकता है धन हानि के योग बन रहे हैं। शाम के समय आज आपको किसी तीर्थ स्थल जाने को मिल सकता है।कन्या राशि:
इस राशि के जातकों का आज का दिन काफी फलदायक है। आज इन्हें हर ओर से धन लाभ होगा। जॉब में पदोउन्नति की संभावना है। अटका हुआ पैसा आज बिना मांगे ही मिल जाएगा। दोस्तो के साथ कही बाहर घूमने जाना हो सकता है। प्रेमी आज आपपर खूब प्यार बरसायेगा। आज आप अपने जीवन से जुड़ा कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं जिंसमे आपको अपने परिजनों का सहयोग प्राप्त होगा।तुला राशिः
आज आप विवादों से घिरे रह सकते हैं। आकस्मिक आपको फ़ालतू के खर्च करने पड़ सकते हैं। कर्ज लेने से बच के रहे अन्यथा यह आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। घर मे बच्चों की ओर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। धर्मपत्नी का साथ मिलेगा। आज आपकी रुचि अच्छे भोजन को खाने की होती रहेगी।वृश्चिक राशिः
अगर आप लम्बे समय से रोजगार की तलाश कर रहे हैं तो आज आपकी इस तालाश पर ब्रेक लग जाएगा और आपको रोजगार मिलेगा। आज आप जिससे भी बात करेंगे वह आपके तरीके से इम्प्रेस होगा। कही बाहर घूमने का प्लान बन सकता है। घर में कोई मांगलिक कार्यक्रम होगा। पारिवारिक कलह आज खत्म हो सकती है।धनु राशिः
इस राशि के जातकों का आज पूरा दिन धर्म के काम मे गुजर जाएगा। किसी के साथ मतभेद हो सकता है। स्वास्थ्य का ख्याल रखना आवश्यक है। पार्टनर से आज लडाई के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। बाहर के खाने से आज परहेज करें यह आपके लिये काल बन सकता है।मकर राशिः
आज का दिन आपके लिये सामान्य रहेगा। कोई विशेष लाभ नही होगा। लेकिन हानि होने के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। किसी भी व्यक्ति पर विश्वास करने से पूर्व विचार करे। आज आप किसी अपने से ठगी का शिकार हो सकते हैं। आंख बंद करके विश्वास करना घातक सिद्द होगा। रोजगार में सावधानी बरतें बॉस से मतभेद हो सकता है।कुंभ राशिः
इस राशि के जातक वैसे तो काफी बुद्धि वाले होते हैं। इनका अपना व्यापार करने में अधिक मन लगता है। यह किसी के नीचे या दब के काम करना नही पसन्द करते। प्रेमी आज आपपर खूब प्यार बरसायेगा। आज आप अपने जीवन से जुड़ा कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं जिंसमे आपको अपने परिजनों का सहयोग प्राप्त होगा।मीन राशिः
कर्ज लेने से बच के रहे अन्यथा यह आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। घर मे बच्चों की ओर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। पार्टनर से आज लडाई के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। बाहर के खाने से आज परहेज करें यह आपके लिये काल बन सकता है। आज आपकी रुचि अच्छे भोजन को खाने की होती रहेगी। -
धन, नौकरी, गृहस्थ जीवन और उच्च शिक्षा के कारक हैं भगवान बृहस्पति, ऐसे करें पूजा
डेस्क। आज गुरुवार (Thursday) यानी कि बृहस्पतिवार का दिन हैं जो कि हिंदू धर्म में बृहस्पति ग्रह के साथ ही भगवान विष्णु को समर्पित हैं। इस दिन की गई पूजा-अर्चना कार्य में तरक्की, यश एवं कीर्ति में वृद्धि करते हुए जीवन में आ रही आर्थिक, सामाजिक या वैवाविक परेशानियों को समाप्त करने के लिए की जाती हैं।
गुरु ग्रह को मनुष्य के जीवन में धन, नौकरी, गृहस्थ जीवन और उच्च शिक्षा के कारक के रूप में माना जाता है।
इतना ही नहीं बृहस्पति (Thursday) को सभी नौ ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह भी माना जाता है जिसकी मजबूत स्थिति से कार्यों की सफलता एवं शुभता सिद्ध की जाती हैं। आज इस कड़ी में हम आपको गुरुवार के दिन किए जाने वाले ऐसे उपायों के बारे में बताएंगे जो आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ ही आपकी उन्नति में कारगर होंगे।
स्नान के पानी में हल्दी का विशेष महत्व
गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठें और रोजमर्रा के कार्यों से निवृत होकर स्नान करने जाएं पर इस विशेष दिन आपको स्नान के पानी में चुटकी भर हल्दी डाल लेनी है।
स्नान के बाद बृहस्पति देव की पूजा करें। साथ ही बृहस्पति देव की कथा का पाठ जरूर करें। इस बात का ध्यान रखें कि किताब पढ़ने से पहले उसपर पीले रंग के फूल चढ़ाएं और धूपबत्ती दिखा दें। इसके बाद पूरी श्रद्धा से ‘ऊं बृं बृहस्पतये नम:’ मंत्र का 11 या 21 बार जप भी करें।
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जाने शिव के तीसरे नेत्र का रहस्य और इसका क्या है पार्वती से सम्बंध
आध्यात्मिक: सावन का महीना चल रहा है। हर ओर शिव के जयकारे लगाए जा रहे हैं। घरों में सभी लोग शिव की विधि विधान से पूजा कर रहे हैं। वही धर्म ग्रन्थों के मुताबिक शिव इस संसार के पालन कर्ता है शिव की महिमा से इस संसार के सभी कष्ट मिट जाते हैं। जिस भी व्यक्ति पर शिव की कृपा होती है वह हमेशा खुश रहता है। कहा जाता है शिव अपने भक्तों से जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं इन्हें प्रसन्न करने के लिए शिव भक्तों को ज्यादा जप तप नही करना पड़ता लेकिन अगर आप शिव की पूजा विधि से नही करते तो इससे शिव रुष्ट भी हो जाते हैं।
देवो के देव महादेव स्वयं में कई रहस्य छुपाए हुए हैं। यह अन्य देवो की तरह देव लोक में नही रहते। क्योंकि इन्हें कैलाश पर्वत पर रहना पसंद है। वही अगर हम शिव की तीसरे नेत्र की बात करे तो यह सर्वशक्तिमान है शिव इसका प्रयोग तब ही करते हैं जब उन्हें किसी का विनाश करना होता है। शिव के इस नेत्र का तेज इतना अधिक होता है कि इसके तेज से कोई भी भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि शिव त्रिनेत्रधारी बन गए।धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार एक बार जब नारद मुनि माता पार्वती और शिव के बीच हुई बातों को बताते हैं तो इन बातों के बीच ही शिव की तीसरी आंख का रहस्य छुपा है। कहा जाता है कि एक बार हिमालय पर एक सभा चल रही थी उस सभा मे सभी देवी, देवता, ज्ञानी मौजूद थे। तभी वहां माता पार्वती का आगमन हुआ। उन्होंने भगवान शिव के साथ ठिठोली करने के उद्देश्य से अपने हाँथो से उनके दोनो नेत्रों को ढक दिया।माता पार्वती द्वारा ऐसा करने से सम्पूर्ण संसार अंधकार में हो गया। सूर्य देव का अस्तिव डगमग गया जीव जंतुओं में खलबली मच गई। लोग अंधेरे से घबराकर बिलखने लगे। कहा जाता है शिव से लोगो की यह दशा देखी नहीं गई। उन्होंने अपने माथे पर एक ज्योतिपुंज प्रकट किया और सम्पूर्ण संसार को उजियारा दिया। यह ज्योतिपुंज शिव के तीसरे नेत्र के रूप में जाना जाता है। -
जाने कैसे रुका था नागदाह अर्थ और क्या होता था इस यज्ञ में
नागपंचमी: आज पूरे भारत मे नागपंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। नागपंचमी के दिन लोग नाग देवता की पूजा करते हैं। कहते हैं जो भी सच्चे मन से नाग देवता को पूजता है नागदेवता उसकी सभी मनोकनाओं को पूरा करते हैं और उसे मन चाह वरदान देते हैं। वही पुराणों में नागदाह यज्ञ का जिक्र किया गया है। तो आइए जानते हैं क्या है नागदाह यज्ञ और क्या है इसकी कहानी।
जाने क्या है नागदाह यज्ञ:
नागदाह यज्ञ एक ऐसा यज्ञ है जिसमे बड़े बड़े साँपो की आहुति दी जाती थी। महाभारत की कथा के मुताबिक राजा जनमेजय ने अपने पिता राजा परीक्षित की मौत का बदला लेने नागदाह यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ में दुनिया के बड़े बड़े संपो की आहुति दे दी गई थी। उनके इस यज्ञ से दुनिया के सभी सांप खत्म हो गए थे। सभी लोग चिंता में थे की अगर यह यज्ञ चलता रहा तो इस संसार स साँपो की प्रजाति खत्म हो जाएगीकहा जाता है जनमेजय के पिता परीक्षित की मौत तक्षक नाग के काटने से हुई थी। जिसके कारण उन्होंने नागदाह यज्ञ करवाया। मौत के डर से तक्षक इंद्र लोक में जाकर छुप गए थे। जब इस बात की सूचना आस्तिक ऋषि को मिली तो उन्होंने यज्ञ देवता की स्तुति शुरू कर दी। जनमेजय ने उन्हें बुलाया तब उन्होंने उससे नागदाह यज्ञ को बन्द करने को कहा, पहले जनमेजय ने ऋषि के आग्रह को न कह दिया लेकिन बाद में वह उसे मान गए।इस यज्ञ को रुकवाने के बाद जब आस्तिक मुनि अपने मामा वासुकी के घर पहुंचे तो वहां नाग नागिन सभी उनका गुणगाण करने लगे। यह सब देखकर वासुकी काफी प्रसन्न हुए उन्होंने आस्तिक मुनि से कहा वत्स वरदान मांग लो । तब आस्तिक ऋषि ने उनसे वरदान मांगा की जो भी व्यक्ति मेरा नाम ले उसे कभी भी कोई सांप न काटे ओर उसके मन से सांप का भय खत्म हो जाये। वासुकी ने उन्हें यह वरदान दे दिया।