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  • ये Vastu Tips आपको दिलाएंगी आपकी ड्रीम जॉब, इन टोटकों से खत्म होगी बेरोजगारी

    डेस्कHow to get Dream Job । बचपन से जिस क्षेत्र में करियर बनाने का या जो नौकरी पाने का सपना देखा था, वह हकीकत में बदल जाए तो यह किसी चमत्कार से कम तो नहीं होगा। वो बात अलग है कि कुछ भी रातों रात नहीं होगा और आपको इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। पर हां हमारे बताए गए रास्ते से आप अपने लक्ष्य में आने वाली परेशानियों को जरूर दूर कर सकेंगे। आपको आपकी मनपसंद नौकरी मिल जाए इसके लिए वास्‍तु शास्‍त्र में कुछ ऐसे कारगर उपाय बताए गए हैं, जिनको अपनाने से कुछ ही समय में न केवल ड्रीम जॉब का सपना पूरा हो सकता है, बल्कि व्‍यक्ति धनवान भी हो जाता है।

    नौकरी पाने के लिए करिये ये उपाय

    – यदि नौकरी पाने में या नौकरी में तरक्‍की पाने में अड़चनें आ रही हैं, तो अपने बेडरूम में पीले रंग का उपयोग ज्‍यादा से ज्‍यादा करें क्योंकि पाला रंग कुंडली में गुरु ग्रह को मजबूत करता है। इसके उपयोग से किस्‍मत का साथ मिलने लगेगा और जल्‍द ही करियर पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा।

    इससे बेरोजगारी होगी खत्म

    यदि मनपसंद नौकरी न मिल रही हो या बेरोजगारी बनी हों तो घर की उत्तर दिशा की दीवार पर आईना लगा दीजिये। यह इतना बड़ा होना चाहिए, जिसमें आपकी पूरी छवि दिखाई देनी चाहिए। ऐसा करने से आपको जल्‍द ही नौकरी मिल जाएगी।

    इंटरव्यू में मिल रही हो असफलता

    यदि आप नौकरी के इंटरव्यू में बार-बार असफल हो रहे हों तो अगली बार इंटरव्‍यू देने के लिए जाते समय लाल रंग का रुमाल अपने साथ लें जाएं। संभव हो तो लाल या हरे रंग के कपड़े भी पहने। ऐसा करने से सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही घर से निकलने से पहले गणपति जी की पूजा भी करें। और उन्‍हें भोग लगाएं और प्रसाद की सुपारी खाकर ही निकलें।

    कुंडली में हो दोष

    अगर आपकी कुंडली के ग्रह दोष है जो करियर में बार-बार समस्‍या पैदा कर रहे हों, वे एक मुखी, दस मुखी या ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को धारण कर लें। ऐसा करने से करियर की राह में आ रही सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

    न करें ये गलती

    अगर आपके घर के ब्रह्म स्थान यानी कि घर का मध्‍य भाग; भारी सामान-फर्नीचर आदि से भरा है तो यह भी करियर में रुकावटें पैदा करता है। इसीलिए ब्रह्म स्‍थान को खाली और हमेशा साफ रखें।

  • हर तरीके से पैसा कमाना जानते हैं इस मूलांक के जातक

    आध्यात्मिक:- हिन्दू धर्म मे ज्योतिष शास्त्र का अत्यधिक महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अगर आपके ग्रहों की दशा सही रहती है तो आपको न सिर्फ उसका लाभ मिलता है बल्कि यह आपके जीवन को बदल देता है। वही आज हम बताने जा रहे हैं मूलांकों के बारे में की ज्योतिष के मुताबिक किसी व्यक्ति के मूलांक किस प्रकार काम करते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं 3 मूलांक के विषय में। 

    3 मूलांक उन जातको का होता है जिनका जन्मदिन 3, 12, 21 और 30 होता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक 3 मूलांक के लोगो पर बृहस्पति की कृपा रहती है यह स्वभाव से ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं। इस मूलांक के जातक गम्भीर और बोलने में माहिर होते हैं। यह अपनी बोलने की प्रवृत्ति से लोगो को प्रभावित करते हैं। लोग जल्द ही इनकीं ओर आकर्षित हो जाते हैं। ये महत्वाकांक्षी होते हैं और अनुशासन प्रिय होते हैं। ये वैसे तो शांत रहते हैं लेकिन अगर कोई इनसें भिड़ने की कोशिश करता है तो उसे ये आसानी से नहीं जाने देते।
    3 मूलांक के जातकों की आर्थिक स्थिति बेहतरीन रहती है इनमें पैसा कमाने का गुण होता है। यह अपने व्यक्तित्व के बलबूते पर किसी से भी अपना काम निकलवा लेते हैं। वैसे तो यह बेहतर नेतृत्व करते हैं लेकिन कई बार इनका नेतृत्व इनको समस्या में डाल देता है। इस मूलांक के जातक स्पष्टवादी होते हैं। अपनी बातों को साफ-साफ कहने में यकीन करते हैं। ये अपने कार्यों को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं। धार्मिक कार्यों में इनकी विशेष रुचि होती है। ये पारिवारिक होते हैं। धन का संचय करने में भी सफल रहते हैं।

  • Chanakya Niti | इंसान नहीं जानवर की मौत मरोगे अगर जीवन में ये नहीं किया

    Chanakya Niti । आचार्य चाणक्य ने 5 ऐसे गुण बताएं है इनमें से अगर कोई भी गुण व्यक्ति में न हो तो वो पशु के समान होता है। जिस प्रकार से गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। वैसे ही आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में हर कदम पर सही रास्ता दिखाने की कोशिश की है। जब हम परेशानियों से घिर जाते हैं तो चाणक्य की नीतियां हमारा मार्गदर्शन करती हैं।

    अपने नीतिशास्त्र में चाणक्य ने कई ऐसी नीतियां बताई हैं जो मुश्किल समय का सामना करने में इंसान की क्षमता को बढ़ाती है। चाणक्य ने 5 ऐसे गुण भी बताएं है जिसमें से कोई भी गुण अगर व्यक्ति में नहीं है तो वो पशु के समान होता है।

    श्लोक

    येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मं: ।

    ते मत्र्य लोके भुवि भारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ।।

    विद्या

    आचार्य चाणक्य ने अपने श्लोक में कहा है कि जिसके पास विद्या नहीं है वो इंसान पशु के समान होता है। साथ ही विद्या ग्रहण करने का अवसर ईश्वर ने सिर्फ मनुष्य को दिया है पशु को नहीं और अगर इंसान विद्या न ले तो उसे पशु की श्रेणी में ही रखा जाएगा। उनके अनुसार विद्या वो धन है जो व्यक्ति के पास से कभी खत्म नहीं हो सकता। 

    तप

    उनके अनुसार जिन लोगों में धार्मिक भावनाएं नहीं होती उनका मन सदा अशांत रहता है उनको कभी मन की शांति नही मिलती। आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो नास्तिक प्रवृत्ति के लोग होते हैं उन्हें जीवन में कभी भी सुकून नहीं मिलता। साथ ही अच्छे कर्म और प्रभू की आराधना करने वालो के सफलता के मार्ग खुलते हो जाते हैं। इसी कारण उन्होंने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तप को अनिवार्य बताया है।

    दान

    शास्त्रों में दान का भी विशेष महत्व रहा है। जो भी व्यक्ति दान करता है उसकी तमाम समस्याओं का निवारण अपने आप हो जाता है। चाणक्य नीति के अनुसार जरुरतमंदों को किया दान व्यक्ति को धनवान बनाने में कारगर साबित होता है। आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो व्यक्ति सिर्फ खुद के लिए पैसा कमाता है लेकिन दान धर्म नही करता उसका जीवन पशु के समान ही है।

    शील

    आचार्य चाणक्य के अनुसार शील का तात्पर्य संवेदनशीलता से है। अपनी भावनाएं जाहिर करने का सौभाग्य ईश्वर ने मनुष्यों को दिया है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति सुख या दुख में अपनी संवेदनाएं व्यक्त नहीं करता तो उसका जीवन पशु की भांति ही होता है।

    धर्म

    आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति ने अधर्म का मार्ग अपना लिया हो उसका पतन निश्चित है। ऐसे लोग मनुष्य नहीं पशु की भांति संसार में जीवन व्यापन करते हैं और उनको पशुओं की भांति ही मौत भी मिलती है। धर्म का पालन करने वाला इंसान कभी कोई गलत काम नहीं करता और अपने अच्छे कर्म से जीवन को सवार लेता है। 

  • 800 खानसामों और माता लक्ष्मी के इस चमत्कार से तैयार होता है भगवान जगन्‍नाथ का महाप्रसाद

     

    डेस्क। ओडिशा के पुरी में हर साल आषाढ़ महीने में भगवान जगन्‍नाथ की  विश्‍वविख्‍यात रथ यात्रा निकलती है। आप सभी यह तो जानते ही होंगे की  जगन्‍नाथ जी, भगवान विष्‍णु के प्रमुख अवतारों में से एक है और भगवान जगन्‍नाथ की यह रथ यात्रा बेहद मशहूर है केवल भारत ही नहीं पूरी दुनिया से लोग यहां आते हैं और भगवान की इस यात्रा में शामिल होते हैं।

     रथ यात्रा की ही तरह पुरी में भगवान को भोग लगने वाला प्रसाद भी बेहद मशहूर है, इसे ‘महाप्रसाद’ भी कहा जाता है। आप सभी को बता दें कि आज 1 जुलाई को जगन्‍नाथ रथ यात्रा शुरू (Rath Yatra 2022) की शुरुआत हो चुकी है और यह 12 जुलाई तक चलने वाली है। 

    जगन्‍नाथ भगवान की इस रथ यात्रा के मौके पर हम आपको बताते हैं आखिर क्‍यों जगन्‍नाथ मंदिर के प्रसाद को महाप्रसाद कहा जाता है और इसे बनाने की प्रक्रिया की क्‍या खासियतें हैं?

    बेहद खास है बाबा का ये प्रसाद

    जगन्नाथ मंदिर की रसोई में बनने वाले प्रसाद को तैयार करने के लिए ना केवल स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है बल्कि इसे बनाने के लिए खास तरह के पानी का इस्‍तेमाल होता है। कहा जाता है भगवान के भोग को किचन के पास बने 2 कुओं के जल से तैयार किया जाता है और इन कुओं के नाम गंगा-यमुना कुआं हैं। 

    काफी बड़ी मात्रा में तैयार किए जाने वाले इस भोग को बनाने में केवल गंगा-यमुना कुओं के पानी का ही इस्‍तेमाल किया जाता है। बता दें कि जगन्‍नाथ मंदिर के किचन को दुनिया का सबसे बड़ा किचन भी कहा जाता है। यहां बहुत बड़ी मात्रा में रोजाना भगवान का भोग (महाप्रसाद) तैयार किया जाता है और इस भोग की मात्रा इतनी ज्‍यादा होती है कि इसे तैयार करने के लिए एक बार में किचन में कम से कम 800 लोगों की जरूरत लगती है।

    इसमें करीब 500 रसोइए होते हैं और 300 लोग इनकी मदद के लिए यहां काम करते हैं। इसके अलावा जगन्नाथ मंदिर में तैयार होने वाले महाप्रसाद को पकाने में केवल मिट्टी के बर्तनों का ही प्रयोग किया जाता है। इसको पकाने की प्रक्रिया बेहद अलग है क्योंकि इसके लिए इन बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है और चौंकाने वाली बात यह है कि सबसे ऊपर रखे बर्तन का खाना सबसे पहले और सबसे नीचे रखे बर्तन का भोजन सबसे बाद में पककर तैयार होता है। 

    ऐसी मान्‍यता है कि जगन्‍नाथ मंदिर के किचन में पूरा भोग माँ लक्ष्‍मी की देख-रेख में तैयार होता है और इस महाप्रसाद की महिमा ऐसी है कि इसे पाने के लिए लोग दूर-दूर से चलकर यहां आते हैं।

  • घर के मंदिर में मत रखना ये तीन महाविनाशक वस्तुएं, जल्दी हटा दो

     

    डेस्क। भारत में वैष्णव भक्तों की संख्या बहुत अधिक है। अपने गृहस्थ जीवन से कुछ समय निकाल कर अगर आप भी भगवान की आराधना करते हैं तो आज की जानकारी आप के लिए हैं। ईश्वर में श्रद्धा रखने वाला जब भी कोई व्यक्ति घर बनाता है तो उसमें मंदिर के लिए अलग से जगह छोड़ी जाती है। गृहस्थ जीवन में कोई भी घर मंदिर के बिना अधूरा माना जाता है। रोज सुबह दंपतियों को ईश्वर की आराधना की विशेष सलाह दी जाती है।

    पर कई बार जानकारी न होने के कारण हम कई ऐसी गलती कर बैठते हैं कि हमको इसका अच्छा फल मिलने के बजाय खामियाजा भुगतना पड़ता है। शास्त्रों में इन गलतियों का वर्णन हमें देखने को मिलता है। इसी कड़ी में आज हम आपको तीन चीज़ों के बारे में बताएंगे कि कौन सी चीज़े आपको नहीं करनी चाहिए।

    1. सनातन धर्म के अनुसार, घर के मंदिर में कभी भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए न ही उसको पूजा जाना चाहिए। इसको ईश्वर का अपमान माना जाता है। मंदिर में खंडित मूर्ति रखना घर में अशुभता को बढ़ता है। घर के मंदिर में अगर खंडित मूर्ति हो तो उसे तुरंत नदी, तालाब या नहर में विसर्जित कर देने की ही सलाह दी जाती है।

    2. मंदिर में कभी भी भगवान के रौद्र रूप की प्रतिमाएं नहीं स्थापित करनी चाहिए। सनातन धर्म के अनुसार, रौद्र रूप वाली मूर्तियां रखने का अर्थ होता है कि देवी-देवता स्वयं उस घर पर अपना क्रोध व्यक्त कर रहे हैं। इसी कारण से देवी-देवताओं की हमेशा शांत, प्रसन्न मुद्रा और आशीर्वाद देने वाली प्रतिमा ही घर में रखनी चाहिए।

    3. घर के मंदिर में एक से अधिक देवी-देवताओं की तस्वीर नहीं रखनी चाहिए। क्योंकि मान्यता है कि मंदिर में एक से अधिक तस्वीरों या मूर्तियों के रखने से घर का वातावरण खराब होने लग जाता है। इसी कारण से घर की सुख-समृद्धि के लिए केवल एक ही प्रतिमा रखने की सलाह दी जाती है।

  • Astro। सोने का अंडा देने वाली मुर्गी होती है बिल्ली, लक्ष्मी को घसीट लेती है बिल्ली की गर्भनाल

     

    डेस्क। ज्योतिष शास्त्र में मां लक्ष्मी की कृपा पाने के कई उपायों के बारे में बताया गया है। अगर इन उपायों में से किसी एक को भी सही से कर लिया जाए तो व्यक्ति के दिन बदलने में देर नहीं लगती और आपकी किसमत के सभी दरवाजे खुले जाते हैं। आपको कभी पैसे की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ता।

    ज्योतिष शास्त्र की माने तो बिल्ली को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है। जैसे बिल्ली का रोना अशुभ होता है वैसे ही बिल्ली का दिखना और बिल्ली का आना शुभ बताया गया है। पर क्या आप जनाते हैं, अगर घर में बिल्ली की ये एक चीज रख ली जाए, तो आपकी किस्मत बदलने से कोई रोक नहीं सकता। ये चीज़ है बिल्ली की गर्भनाल। आपको यह सुनकर आश्चर्य जरूर हुआ होगा पर यह सच है।

    ज्योतिष शास्त्र में माता लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने और प्रसन्न करने के कई उपायों के बारे में बात की गई है। इन्हीं में से एक बिल्ली की गर्भनाल को अगर संभालकर रखा जाए तो आपकी किस्मत रातोंरात चमक उठेगी। यह मान्यता है कि बिल्ली की गर्भनाल लक्ष्मी यंत्र का काम करती है। इससे व्यक्ति के करीब कंगाली नहीं आती और लक्ष्मी हमेशा उससे चिपकी रहती है।

    लाभ पाने के लिए कैसे रखें

    व्यक्ति को धन की प्राप्ति किस्मत और सौभाग्य से मिलती है। ऐसे में किस्मत और सौौभाग्य बढ़ाने के लिए इसे शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिल्ली की गर्भनाल बहुत ही मुश्किल और किस्मत से किसी को प्राप्त होती है।

    लेकिन अगर ये किसी के हाथ लग जाती है, तो उसकी किस्मत को बदलने से कोई रोक नहीं सकता। अगर आप बिल्ली की गर्भनाल प्राप्त करने में सफल हो पाते हैं, तो उस पर हल्दी के पाउडर का लेप लगा लगाकर उसे रख ले। ऐसा करने से ये एक प्रकार से लक्ष्मी यंत्र बन जाता है, जो कि धन आगमन के सभी रास्तों को खोल देता है।

  • बदली ग्रहों की दशा जाने कैसा रहेगा राशि के मुताबिक आज का दिन

    राशिफल:- आज ग्रहों की दशा बदल रही है। जिसके चलते कई राशियों का भाग्य भी परिवर्तित होगा। लोगो के लम्बे समय से रुके काम आसानी से होंगे, कई राशि के जातकों को धन लाभ होगा और उनके परिवार में आपसी तालमेल के साथ आज निर्णय लिए जाएंगे। जहां कई राशि के जातकों को आज शुभ समाचार मिलेंगे वही कई राशि के जातक ऐसे होंगे जिन्हें बदलती ग्रहों की स्थिति के कारण कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। तो आइए जानते हैं आज का राशिफल…

    मेष;- 

    आज का दिन मेष राशि के जातकों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा। क्योंकि इनके ग्रहों की स्थिति आज सकारात्मक है यह आज अपना प्रत्येक काम ईमानदारी के साथ करेंगे और उसमें इन्हें सफलता भी हासिल होगी। नौकरी में आज इन्हें कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बेवजह के विवाद से सतर्क रहने की आवश्यकता है। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। लेकिन सतर्क रहें कोई हितैषी आपके पीठ पीछे वार करेगा।

    वृष- 

    इस राशि के जातकों का दिन आज खुशियों से भरा रहेगा। इनकीं आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ऑफिस में बॉस की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है लेकिन यह आज अपनी सूझ बूझ से परिस्थितियों को काबू में रखेंगे। आज इस राशि के जातकों का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और यह अपने किसी खास को अपने दिल की बात बता सकते हैं। तरक्की के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। आज आप अपना धन कहीं भी इन्वेस्टमेंट करते हैं तो आपको लाभ प्राप्त होगा। 

    मिथुन:-

    इस राशि के जातकों का आज का दिन मदद करने में गुजरेगा। आज यह किसी बड़े धार्मिक अनुष्ठान में जा सकते हैं। दान पुण्य कर मन को शान्त करने का प्रयास करेंगे। जीवन साथी और बच्चों से शुभ संदेश प्राप्त होंगे। साथियों से सहयोग प्राप्त होगा। मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। युवाओं को नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए. हेल्थ को लेकर भोजन हल्का और सुपाच्य ही करें, बाहर भोजन का मूड हो तो आज इससे बचें।

    कर्क:- 

    आज विद्यार्थियों को बौद्धिक क्षमता में विकास के लिए कुछ देर योग करना लाभकारी रहेगा. युवाओं के लिए दिन सामान्य रहेगा. हल्के-फुल्की बीमारियों को देखकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. भाई-बहनों के सहयोगी बनें, उनकी सुरक्षा के लिए भी सजग रहने की जरूरत है। आज यह किसी बड़े धार्मिक अनुष्ठान में जा सकते हैं। दान पुण्य कर मन को शान्त करने का प्रयास करेंगे।
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    सिंह:- 

    आज का दिन आपके लिए काफी टेंशन भरा रहेगा। आप आज छोटी छोटी बातों से परेशान हो जायेगे। आपके साथी से आज आपको उतना सहयोग प्राप्त नहीं होगा जितने की आप उससे अपेक्षा करेंगे। 
    कन्या:-
    आज पढाई में मन लगेगा और परिजनों को बच्चों से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। सावधान रहने की आवश्यकता से कोई आज आपके रहस्य को उजागर करने की योजना बना रहा है। कार्यस्थल पर अधीनस्थों और सहयोगियों का सहयोग आपको लाभ देगा. काम का भार जरूर रहेगा, लेकिन इसे पूरा करने में दिक्कतें नहीं आएगी. कॉस्मेटिक्स के कारोबारियों को अच्छा मुनाफा होने की संभावना है. 
    तुला- आज यह किसी बड़े धार्मिक अनुष्ठान में जा सकते हैं। दान पुण्य कर मन को शान्त करने का प्रयास करेंगे। जीवन साथी और बच्चों से शुभ संदेश प्राप्त होंगे। साथियों से सहयोग प्राप्त होगा।आज आपको किसी ऐसे व्यक्ति से धोखा मिलेगा जिसकी अपने कल्पना नहीं की होगी।

    वृश्चिक:-

    इस राशि के जातकों को आज के दिन बहुत सम्भल कर रहना है। आज हर कदम पर इनके लिए समस्या है। यह अगर कुछ ठीक भी करेंगे तो इन्हें उसका उल्टा मिलेगा। सावधान रहने की आवश्यकता है और आज धन को इन्वेस्ट करने से बचे।

    धनु:-

    अगर आप नौकरी की तलाश में है और कही इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो आज का दिन आपके लिए लकी साबित होगा और आपको यह नौकरी मिल जाएगी। घर मे आपको आपसी मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है। आज आपको किसी ऐसे व्यक्ति से धोखा मिलेगा जिसकी अपने कल्पना नहीं की होगी।
    मकर:-
    इस राशि के जातको को आज किसी धार्मिक स्थल की यात्रा करनी पड़ सकती है। आज का पूरा दिन इनका धार्मिक कार्य से जुड़कर गुजरने वाला है। सहयोगियों से समर्थन प्राप्त होगा। सकारात्मक ऊर्जा का वाश होगा। आज मन प्रफुल्लित रहेगा और नौकरी में पदोन्नति की संभावना है।

    कुम्भ:-

    कुंभ राशि के जातकों को लिए आज का दिन काफी अच्छा साबित हो सकता है। आज इनके भाग्य में धन योग है इन्हें आज कही से धन प्राप्ति हो सकती है। बच्चों का आज पढाई में मन लगेगा और परिजनों को बच्चों से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। सावधान रहने की आवश्यकता से कोई आज आपके रहस्य को उजागर करने की योजना बना रहा है।
    मीन:-
    आज का दिन आपके लिए काफी टेंशन भरा रहेगा। आप आज छोटी छोटी बातों से परेशान हो जायेगे। आपके साथी से आज आपको उतना सहयोग प्राप्त नहीं होगा जितने की आप उससे अपेक्षा करेंगे। व्यापार में लाभ के संकेत प्राप्त हो रहे हैं लेकिन सावधान रहने की आवश्यकता है। आज आपको अचानक से कही की यात्रा करनी पड़ सकती है।

  • चार महीने नहीं होगा कोई भी मांगलिक कार्य, योग निद्रा में रहेंगे पालनहार

     

    डेस्क। हिन्दू धर्म में चातुर्मास को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। सनातन मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इस दौरान चार महीने की अवधि के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, तिलक, यज्ञोपवीत, या मुंडन जैसे मांगलिक कार्यक्रम वर्जित बताए गए है। साल 2022 में चातुर्मास 10 जुलाई से शुरू हो रहा है।

    देवशयनी एकादशी 2022 का मुहूर्त जानिए

    एकादशी तिथि 09 जुलाई, 2022 को 04:39 से शुरू होगी। साथ ही एकादशी तिथि 10 जुलाई, 2022 को 02:13 को समाप्त होगी। एकादशी पारण (उपवास तोड़ने का समय)- 11 जुलाई, प्रातः 05:30 बजे से 08:16 बजे तक होगा। साथ ही बता दें कि पारण तिथि पर द्वादशी का समापन समय: सुबह 11:13 बजे से होगा।

    चातुर्मास क्या होता है?

    आषाढ़, श्रवण, भादो और कार्तिक चार महीने हैं जो चातुर्मास काल को बनाते हैं। बता दें इस दौरान भगवान विष्णु शिव सागर में सोते हैं। ‘चतुर मासा’ का अर्थ होता है 4 महीने। इन चार महीनों के दौरान कोई भी पवित्र या शुभ कार्य करना हिंदू धर्म में वर्जित बताया गया है। इस चातुर्मास की अवधि के दौरान सभी ग्रह और गोचर लगातार अपनी दृष्टि बदलते रहते हैं इस कारण भी कोई शुभ मुहर्त नहीं बनता।

    चातुर्मास के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    यह चातुर्मास, 10 जुलाई को आषाढ़ महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी के साथ शुरू होकर, चतुर्मास देवउठनी एकादशी तक चलेगा, जो कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर समाप्त होगा। 

    इस चातुर्मास के दौरान जब भगवान विष्णु सोते हैं, तो सभी महत्वपूर्ण धार्मिक और शुभ कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाते हैं। इस समय के दौरान सगाई, शादी, घर में प्रवेश आदि जैसे कार्यों को वर्जित बताया जाता है।

    साथ ही बता दें कि चातुर्मास के इन चार महीनों के दौरान धार्मिक संत अपनी सभी यात्राएं बंद कर देते हैं और किसी मंदिर या अपने गृहनगर में जाकर वो भी साधना में लीन हो जाते हैं और उपवास भी करते हैं।

    चातुर्मास के दौरान पालक और अन्य पत्तेदार सब्जियां खाने से बचने की सलाह भी दी जाती है। इसके साथ ही बता दें कि अगले महीने भाद्रपद है, जिस दौरान दही का सेवन भी वर्जित होता है। उसके बाद आएगा अश्विन का महीना, जिसमें दूध पर प्रतिबंध है और अंत में कार्तिक का महीना आता है जिसमें लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।

    विशेष रूप से चार महीनों के लिए राजसिक भोजन पर प्रबंधन बताया जाता है। इस अवधि में सात्विक भोजन के सेवन पर भी ध्यान दिया जाता है। 

    इसके अलावा बताया जाता है कि चातुर्मास के दौरान शहद, मूली, बैगन और परवल का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

    चातुर्मास के दौरान केवल एक ही बार भोजन करें क्योंकि यह वर्ष का वह समय होता है जब हमारा पाचन तंत्र सबसे ज्यादा कमजोर हो जाता है। अगर ऐसे में आप भोजन का अधिक सेवन करते हैं, तो हमारा शरीर इसे पचा नहीं पाएगा और हमें कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ेगा। 

  • शिव पुराण में लिखी है भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप की बिल्कुल अलग कथा

     

    डेस्क। शिव ऐसे देव है जिनकी निराकार और साकार, गृहस्त और सन्यासी, क्रोधिक और भोले इन सभी रूपों में पूजा की जाती है। शिव के भक्त उनको हर जगह ढूंढ ही लेते हैं। भगवान शिव एक ऐसे देव हैं जिनकी सच्चे मन से पूजा-आराधना एवं मंत्र उच्चारण से ही शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण कर देते हैं। भगवान शिव इतने भोले है कि खुश होने पर भक्तों का कल्याण करते हैं। 

    कहा जाता है कि शिव की साधना बहुत ही सरल है उन्हें एक लोटा जल से भी प्रसन्न किया जा सकता है। और कुछ न हो तो बस उनका नाम भज कर भी उनकी कृपा पाई जा सकती है।

    शिव मंत्र का जाप करते हुए सिर्फ एक बेलपत्र या शमी चढ़ाने भर से भी महादेव की कृपा बरसने लगती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की अराधना के लिए सोमवार का दिन उत्तम माना गया है। विशेष रूप से सोमवार के ही महादेव की उपासना करने से मनुष्य के सभी सनताप दूर हो जाते हैं। 

    भक्त भोलेनाथ को पूरे 108 रूपों में पुंजते हैं जैसे गंगाधर, नीलकंठ, नागेश्वर, अर्धनारीश्वर आदि। अर्धनारीश्वर भगवान शिव का एक निर्मल स्वरूप माना गया है, इस रूप में भगवान के साथ माता शक्ति भी हैं। अर्धनारीश्वर स्वरूप का अर्थ होता है आधी स्त्री और आधा पुरुष। भगवान शिव के इस अर्धनारीश्वर स्वरूप के आधे हिस्से में पुरुष रूपी महादेव का वास है तो आधे हिस्से में स्त्री रूपी शिवा यानि शक्ति (माता पार्वती) का वास है। आइए जानते हैं कि भगवान अर्धनारीश्वर की पावन कथा।

    शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार ब्रह्माजी को सृष्टि के निर्माण का कार्य सौंपा गया था,तब तक भगवान शिव ने सिर्फ विष्णुजी और ब्रह्मा जी को ही अवतरित किया था और किसी भी नारी की उत्पति इस धरती पर नहीं हुई थी। जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि के निर्माण का काम शुरू किया,तब उनको ज्ञात हुआ की उनकी ये सारी रचनाएं तो जीवनोपरांत नष्ट हो जाएंगी और हर बार उन्हें नए सिरे से इनका सृजन करना होगा। उनके सामने बहुत ही बड़ी दुविधा आकर खड़ी हो गई थी कि इस तरह से सृष्टि की वृद्धि कैसे होगी। तभी एक आकाशवाणी हुई कि- ‘वे मैथुनी यानी प्रजनन सृष्टि का निर्माण करें,ताकि सृष्टि को बेहतर तरीके से निरंतर संचालित किया जा सके’।

    अब ब्रम्हा एक और बड़ी दुविधा में पड़ गए कि आखिर वो मैथुनी सृष्टि का निर्माण करे तो कैसे। काफी सोच-विचार करने के बाद वे भगवान शिव के पास पहुंचे और शिव को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्मा जी ने कठोर तप किया और तब भगवान शिव प्रसन्न हुए। इस कथा के अनुसार ब्रह्मा जी के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर स्वरूप में दर्शन दिया। भगवान ने इस स्वरूप में दर्शन दिया तब उनके शरीर के आधे भाग में साक्षात शिव नजर आए और आधे भाग में स्त्री रूपी शिवा यानि शक्ति। ऐसा कहा जाता है कि अपने इस स्वरुप के दर्शन से भगवान शिव ने ब्रह्मा को प्रजननशील प्राणी के सृजन की प्रेरणा दी जिसके बाद ही इस सृष्टि का सृजन संभव हो सका।  उन्होंने ब्रह्मा जी से कहा कि मेरे इस अर्धनारीश्वर स्वरूप के जिस आधे हिस्से में शिव हैं वो पुरुष है और बाकी के आधे हिस्से में जो शक्ति यानी कि स्त्री है।

    पुराण के अनुसार आगे उन्होंने कहा कि, आपको स्त्री और पुरुष दोनों की मैथुनी सृष्टि की रचना करनी है,जो प्रजनन के ज़रिए सृष्टि को आगे बढ़ा सके। 

  • राजयोग की तरह बलवान है गजकेसरी योग, जाने इसके लाभ

    ज्योतिष: ज्योतिष शास्त्र में कई प्रकार के योग का उल्लेख किया गया है। यह योग हमारे जीवन की दिशा को निर्धारित करते हैं ओर बताते हैं कि आगामी समय मे हमारा जीवन किन सुखों को भोगेगा ओर हमे किन संकटों का सामना करना पड़ेगा। वही। अगर हम राजयोग की बात करे तो इसे हर कोई लाभकारी मानता है लोगो का कहना है कि यह योग जिसकी कुंडली मे होता है यह उनका जीवन बदल देता है। जो लोग राजयोग का लाभ प्राप्त करते हैं उन्हें अपने जीवन मे कभी भी समस्याओं को नही झेलना पड़ता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगो की कुंडली मे राज योग होता है वह बड़े बड़े संकट को पार कर ले जाते हैं। उन्हें कभी अपने जीवन मे निराश होने की आवश्यकता नही होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजयोग के अलावा एक योग ओर है जिसका उल्लेख ज्योतिष शास्त्र में किया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राजयोग के अलावा गजकेसरी एक ऐसा योग है जो अपने जीवन को बदलने में अहम भूमिका निभाता है। वही जिन जातको की कुंडली मे गजकेसरी होता है वह काफी भाग्यशाली होते हैं। उन्हें अपने जीवन मे कभी धन की कमी नहीं होती है। 

    तो आइये जानते हैं क्या है गजकेसरीयोग:-

    गजकेसरी योग ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सबसे भाग्यशाली योग माना जाता है। यह धन लाभ के सभी योगों में सबसे प्रबल माना जाता है। कहां जाता है जिन जातकों की कुंडली मे गजकेसरी योग बनता है उनके पास पैसे की कभी कमी नहीं होती है ओर माता लक्ष्मी उनपर अपनी कृपा बरसाए रहती है। गजकेसरी योग गुरु ओर चंद्रमा से बनता है। कुंडली में गुरु और चंद्र दोनों ही बेहद शुभ ग्रह होते है और जब गुरु और चंद्र पूर्ण बलवान हो तो यह योग बनता है। बता दें जिस व्यक्ति के भाग्य में गजकेसरी योग होता है उसकी शक्ति गज के समान होती है और उसके पास अपार धन दौलत रहती है।
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली मे गजकेसरी योग होता है वह अभिमान मुक्त होता है। उसके पास सब कुछ होता है लेकिन वह शान्त रहता है। वही अगर हम बात करे कि व्यक्ति की कुंडली मे गज केसरी योग बनता कैसे है तो यह चन्द्र ओर गुरु के सहयोग से बनता है। अगर केंद्र स्थान यानी लग्न,चौथे और दसवें भाव में गुरु-चंद्र साथ हो और बलवान हो तो यह योग बनता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली मे बनता है उसका भाग्य बदल देता है।