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  • जिन महिलाओं के शरीर पर होते हैं यह निशान उन्हें प्राप्त है सौभाग्य

    Aadyatmik:- भारत एक ऐसा देश है जहां के लोग सबसे बड़े धर्म हिन्दू धर्म मे विश्वास रखते हैं और वह धार्मिक शास्त्रों व ज्योतिष पर विश्वास ही नहीं करते बल्कि उसमे बताई गई बातों को अपने जीवन मे भी उतारते हैं। ज्योतिष शास्त्र का एक शास्त्र है सामुद्रिक शास्त्र जो की मनुष्य के शरीर पर मौजूद निशानों और उसके शरीरिक आकर के साथ साथ उसकी भाषा और उसके व्यवहार के विषय मे लोगो को जानकारी देती है। यह एक ऐसा शास्त्र है जो की मनुष्य के जीवन से जुड़े बड़े बड़े रहस्यों का खुलासा करता है और इसके द्वारा बताए गए उपायों से लोग अपनी किस्मत पलट सकते हैं। 

    सामुद्रिक शास्त्र में बताया कहा है कि महिलाओं के बाएं और पुरुषों के दाएं हिस्से में शुभ निशान होते हैं इन निशानों वाले स्त्री और पुरुषों को सौभाग्य प्राप्त होता है और जो पुरुष स्त्री यह गुण रखते हैं वह अपने लिए ही नहीं अपितु अपने परिजनों के लिए भी भाग्यशाली होते हैं। तो आइए जानते हैं महिलाओं के शरीर पर कौन से निशान होते हैं जो उनके सौभाग्य को बनाते हैं। 
    सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक यदि महिला के बाएं हाँथ की हथेली में बीचों बीच तिल, मछली, वीणा, चक्र और कमल जैसी आकृति बनती है तो वह महिला अत्यधिक भाग्यशाली होती है और उसके पास कभी भी धन की कमी नहीं होती।
    इसके अलावा अगर महिला के बाएं पैर में भवन, सिंघासन, शंक, जैसी आकृति होती है तो महिलाओं को भूमि का सुख प्राप्त होता है और उनके पास अपार सम्पत्ति रहती है। 
    जिन महिलाओं की भौहों के मध्य शंख की आकृति होती है वह सौभाग्यशाली होती है और उनपर लक्ष्मी की दया दृष्टि बनी रहती है। 
    ज्योतिष के मुताबिक जिन महिलाओं की नाभी गड्ढे में होती है उनको सौंदर्य प्राप्त होता है और वह रोमांटिक और मिलनसार होती है। वही जिन महिलाओं की नाभि वक्री और लंबी होती है वह स्वाभिमानी मिलनसार और आत्मनिर्भर होती है उन्हें किसी के समर्थन की आवश्यकता नहीं पड़ती वह अपने बलबूते पर अपनी पहचान बनाती है।
    जिन महिलाओं के दाई आंख या गर्दन के बीच में तिल मौजूद होता है वह अपना वैवाहिक जीवन सुख के साथ व्यतीत करती है और उन्हें उनके पति से प्यार मिलता है।
    जिन महिलाओं की नाभि के आस पास या ठीक नीचे तिल होता है वह अपने परिवार के लिए भाग्यशाली होती है और उनका जीवन सुख व संम्पन्नता के साथ व्यतीत होता है। 
    यदि महिलाओं का अंगूठा चौडा व गोल होता है वह धनवान होती है। वही अगर महिलाओं के दाई तरफ चेहरे पर तिल होता है तो वह धनवान होती है और अपने परिवार को सुख देती है।

  • पैरों में काला धागा आपसे छीन सकता है वैभव-लक्ष्मी, सुख और समृद्धि

    कई लोग आज के समय में पैरों-हाथों में काला धागा बांधते है। कई लोग इसको फ़ैशन भी मानते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि काले धागे का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व रहा है। कई बार इसको पहनना आपके लिए हानिकारक भी हो सकता है। कई लोग इसको अपने पैरों या हाथों के अलावा अपने गले और कमर में भी पहनते हैं।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि काला धागा बुरी नजर और जादू-टोने से बचने के लिए पहना जाता है।

    बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार काला रंग व्यक्ति की सभी बुरी शक्तियों से रक्षा करता है। अक्सर हम अपने घरों में सुनते हैं कि कोई नहीं देख सकता इसलिए हमने काला धागा पहना है। ऐसी मान्यता है कि काला धागा आंख का ध्यान भटकाता है और इसके बुरे प्रभावों से भी बचाता है।

    क्या आप जानते हैं कि सभी को काला धागा नहीं पहनना चाहिए। काला धागा भी कुछ लोगों के लिए अपशकुन लेकर आता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित दो राशियों के लोगों को कभी भी गलती से काला धागा नहीं पहनना चाहिए, यह उनके लिए बहुत ही अबशगुन लेकर आता है। 

    मेष और वृषभ

    ज्योतिष शास्त्र के मताबिक, मेष और वृष राशि वालों को भूलकर भी काला धागा नहीं पहनना चाहिए। क्योंकि मंगल मेष राशि का स्वामी है और मंगल को काला रंग बिल्कुल भी पसंद नहीं होता है। वहीं वृष राशि का स्वामी भी मंगल ही है। इसलिए इस राशि के लोगों को काला धागा नहीं धारण करना चाहिए। 

    इस राशि वाले क्या करें

    अगर इस राशि के जातक काला धागा पहनते हैं तो उनके जीवन में कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं। जीवन में काफी उथल-पुथल भी हो सकती है। ऐसा करने से लोगों के जीवन में बेचैनी, दुख, गरीबी और असफलता भी आ सकती है। इन दो राशियों के लोगो को काले रंग की जगह लाल रंग का धागा पहनना चाहिए यह उसके लिए सब कुछ मंगलमय कर देगा।

  • चांदी का छल्ला बरसायेगा धन, बस इन बातों को ध्यान में रखकर करें धारण

    Adhyatmik;- मनुष्य का जीवन काफी उतार चढ़ाव भरा हुआ है। कोई अपने जीवन मे थोड़ी सी मेहनत करता है और सफल हो जाता है तो कई अपनी पूरी जान लगाने के बाद भी सफल नहीं हो पाता और उसे अथक प्रयास के बाद भी अपने जीवन मे निराशा के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होता है। ऐसे लोगो का भाग्य नहीं काम करता है और उन्हें अपने जीवन मे काफी उतार चढ़ाव को झेलना पड़ता है। 

    वही अगर हम भाग्य के विषय मे लाल किताब का सहारा ले तो लाल किताब में चांदी के छल्ले का महत्व बताया गया है और कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति चांदी का छल्ला पहनता है तो उसका भाग्य खुल जाता है। लेकिन सभी को चांदी का छल्ला ठीक आंगुली में पहनना चाहिए और इसका फायदा आपको कैसे प्राप्त होगा यह आपको जानना अति आवश्यक है।

    तो आइए जानते हैं चांदी का छल्ला पहनने से व्यक्ति को क्या होगा लाभ:-

    जब कोई व्यक्ति चांदी का छल्ला अपने हाँथ के अंगूठे में पहनता है तो यह बगैर जोड़े के रहता है और समर्थन न मिलने के कारण यह भाग्य नहीं जगा पाता है। लोगो को चांदी का छल्ला अंगूठे में पहनने से बचना चाहिए।
    अगर महिला चांदी का छल्ला पहनती हैं तो उसे यह अपने बाए हाँथ मे व पुरुषों को चांदी का छल्ला अपने दाएं हाँथ में पहनना चाहिए।
    चांदी का छल्ला चन्द्र कारक माना जाता है जब चन्द्र शुक्र की स्थिति ठीक होती है तो बुध भी सही हो जाता है अर्थात जिन मनुष्य का बुध और शुक्र सही नहीं चल रहा हो वह चांदी का छल्ला अवश्य पहने।
    यदि आपकी कुंडली मे शनि शुक्र बुध का दोष है तो आपको ज्योतिष की सलाह से चांदी का छल्ला धारण करना चाहिए और इससे आपका यह दोष खत्म हो जाता है। 
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप चांदी का छल्ला धारण करते हैं तो यह आपके सूर्य व शनि को मजबूत करता है और आपका भाग्य खुल जाता है। 
    जो मनुष्य चांदी का छल्ला धारण करता है उनका मन शान्त रहता है और उनकी कुंडली से राहू का दोष समाप्त होता है।
    हमारे हाँथ का अंगूठा शुक्र का कारक माना जाता है जबकी चांदी चन्द्र का कारक अगर हमारे शुक्र की दिशा ठीक नहीं होती है तो हम अपने हाँथ में चांदी का छल्ला धारण करते हैं।

  • हिन्दू धर्म के आगे विज्ञान ने टेके घुटने , जाने रहस्य

    आध्यात्मिक:- हिन्दू धर्म को सबसे पुराने धर्म के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि यह वह धर्म है जिसकी उपत्ति युंगो पूर्व हुई है और इस धर्म का कोई संस्थापक नहीं है क्योंकि यह धर्म स्वतः ही उत्पन्न हुआ और इसका अनुसरण ईश्वर करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में विख्यात है कि जीवन को एक सही तरीके से जीने और कुछ नियमो के अनुरूप अपने जीवन का यापन करने के उद्देश्य से हिन्दू धर्म की उत्पत्ति हुई थी। 

    वही हिन्दू धर्म के कारण ही भारत विश्वगुरु बना था। आज के समय मे हिन्दू धर्म और इससे जुड़ी हुई परंपरागत इतनीं परिपक्व है कि विज्ञान भी उनके सामने नतमस्तक है और उनको मानती है। क्योंकि हिन्दू धर्म से जुड़ी कुछ परंपराएं जनकल्याण कारी है और इनसे सभी का कल्याण होता है 
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    तो आइए जानते हैं हिन्दू धर्म की वह परम्पराएं जिनके सामने विज्ञान भी नतमस्तक है।

    बडो सम्मान और हाँथ जोड़कर प्रणाम:-

    हिन्दू धर्म मे बड़ो का सम्मान करना बच्चो को बचपन से सिखाया जाता है वही किसी से भी मिलने पर हिन्दू धर्म मे लोग नमस्कार करते हैं। वही हाँथ जोड़कर नमस्कार करने के सन्दर्भ में विज्ञान का कहना है कि जब हम दोनों हाँथो को साथ लाते हैं तो इसका दबाव हाथ पर दबाव पडता है। जिसका सीधा प्रभाव हमारी आंख और मस्तिष्क पर पडता है और यह बुद्धि के विकास में सहायक होता है।

    जनेऊ:-

    हिन्दू धर्म मे जनेऊ का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है। कहा जाता है जो हिन्दू धर्म का उपासक है उसे जनेऊ अवश्य पहनना चाहिए क्योंकि जनेऊ आत्मिक शक्ति को बढाने वाला होता है और इसे धारण करने के बाद ही हम पूजा पाठ करने के काबिल बनते हैं। वही जब हम जनेऊ धारण करते हैं और पेशाब जाते हैं तो हमे जनेऊ को अपने कान पर लपेटना पड़ता है ऐसा करने के पीछे एक विज्ञान का रहस्य छुपा हुआ है। हमारे कान के पीछे दो नशे होती हैं जिनका सीधा सम्बंध हमारे मस्तिष्क और पेट से है। इन नशों पर दबाव से हमे मल-मूत्र त्यागने में आसानी होती है एवं कब्ज,गैस, एसीडीटी, मूत्र रोग आदि नही होते।

    शंख बजाना:- 

    हिन्दू धर्म मे पूजा के बाद शंख बजाने की परंपरा है इसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है वही शंख के संदर्भ में वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे जो ध्वनि निकलती है वह सकारात्मकता का प्रतीक है उसके प्रभाव से विकिरण और किटाणु नष्ट हो जाते हैं। इसके जल का प्रयोग गले व हृदय के अनेक दोषों को दूर करता है।

    सूर्य नमस्कार:-

    हिन्दू धर्म मे सूर्य नमस्कार को आस्था से जोड़ा गया है लेकिन वास्तव में सूर्य नमस्कार से कसरत होती है और व्यक्ति का आलास खत्म हो जाता है।

    तुलसी की पूजा:-

    हिन्दू धर्म मे तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है हर कोई तुलसी पूजा करता है और कहता है कि तुलसी पूजा से घर मे सुख बना रहता है। वही इसके पीछे के वैज्ञानिक तर्क को समझे तो तुलसी की गंध से अनेक किटाणुओं से बचाव होता है और घर का वातावरण सुरक्षित रहता है।

    माथे पर टीका लगाना:-

    हिन्दू धर्म मे स्त्री व पुरुष दोनों ही माथे पर टीका लगाते है। कहते हैं बिना टीका लगाए धार्मिक कार्यो के फल की प्राप्ति नहीं होती है। वही इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क है कि मस्तिष्क के इस हिस्से में “सेराटोनिन” एवं “ बीटाएंडोरफिन” नाम के दो रसायनों का स्त्राव होता है, तिलक के प्रयोग से इन दोनों रसायनो का स्राव संतुलित हो जाता है। जिससे मस्तिष्क शांत होकर अधिक से अधिक कार्य करता है।

  • सूर्य को जल अर्पित करने से होते है चमत्कारिक फायदे पर कभी मत करना ये गलती

    डेस्क। सुबह की शुरुआत ही आपका दिन बनाती हैं। कहते हैं कि अगर सुबह की शुरुआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा ही जाता है।और अगर सुबह कुछ गलत हो जाए तो पूरे दी। बस अपशगुन ही हुआ करते हैं।

    हर व्यक्ति यही चाहता है कि सुबह की शुरुआत अच्छी हो और पूरा दिन अच्छा बीते। शास्त्रों में कई ऐसी बातें भी बताई गई हैं, जिन्हें ध्यान में रखा जाए तो सुबह अच्छी ही होती है और पूरा दिन भी अच्छा गुजरता है। इसके साथ ही आपके जीवन की कई परेशानियां भी दूर होती हैं। आपको जीवन में तरक्की और धन-समृद्धि की भी प्राप्त होती है।

    शास्त्रों में कई ऐसे उपायों को भी बताया गया है जिसके उपयोग से आपका दिन अच्छा हो ही जाता है। इसी में से एक है सूर्य को जल देना। हिंदू धर्म में सूर्य को देवता मानकर पूजा जाता है। ज्यादातर लोग सुबह उठकर पूजा पाठ करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अवश्य देते हैं। ऐसा माना जाता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से भाग्योदय होता है और मान सम्मान में भी वृद्धि होती है। ऐसा भी माना जाता है की अगर विवाह में देर हो रही है तो नियमित रूप से सूर्य को जल देने से शीघ्र ही अच्छे रिश्ते आते हैं। 

    सूर्य को कैसे अर्पित करें जल 

    धार्मिक मान्यताओं की माने तो, सूर्य देवता को हमेशा तांबे के पात्र से जल अर्पित करना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि सूर्य को जल प्रातः काल ही चढ़ाएं। सुबह के समय जल अर्पित करने फायदेमंद माना जाता है।

    सूर्य को जल देते समय इस मंत्र का करें उचारण

    शास्त्रों के अनुसार सूर्य देवता को जलार्पित करते समय ”ऊं आदित्य नम: या ऊं घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना उचित होता है। ध्यान इस बात का ध्यान रखना है कि सूर्य को जल अर्पित करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जल में रोली या फिर लाल चंदन डालकर अर्पित करना और भी फायदे मंद होता हैं। साथ ही सूरज को लाल फूल अर्पित करना भी बेहद फायदेमंद बताया जाता है।

    सूर्य को जल चढ़ाने के साथ ”ऊँ नमो भगवते श्री सूर्याय क्षी तेजसे नम: ऊँ खेचराय नम:” मंत्र का जाप करने से बल, बुद्धि, विद्या और दिव्यता की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही रोजाना सूर्य को जल चढ़ाने से सूर्य देव का प्रभाव शरीर में भी बढ़ता है। और आप में ऊर्जा की भी वृर्द्धि होती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रतिदिन सूर्य को जल देने से आत्म शुद्धि और बल की प्राप्ति होती है। साथ ही समाज में मान सम्मान भी बढ़ता है।

  • शंख का ऐसे करें उपयोग, बुरी शक्तियों के साथ ही दूर होंगी ये बीमारियां

    हिन्दू धर्म में अलग-अलग पूजा पाठ में अलग प्रचलन मान्यताएं और प्रावधान हैं। इसी कड़ी में आज हम बात करें पूजा में विशेष महत्व रखने वाले शंख की। हिंदू धर्म में शंख का विशेष महत्व माना जाता है। हर शुभ कार्य में शंख नाद करना अनिवार्य है। कई लोग रोज सुबह सूरज निकलने ने पहले शंख बजाकर घर के वातावरण को शुद्ध करते हैं। औए सभी सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित भी करते हैं। शास्त्रों की माने तो शंख बजाने से सुख-समृद्धि समेत कई अन्य लाभ होते हैं।

    धार्मिक महत्व के साथ ही इसको विज्ञान ने भी लाभदायक बताया है। वैज्ञानिकों के अनुसार शंख बजाने से कई रोग दूर हो जाते हैं। शंख सेहत और खूबसूरती के लिए भी बेहद जरूरी है।

    घर में शंख में जल भरकर छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा की उन्नति होती है।

    शंख नाद की ध्वनि आसपास के वातावरण को शुद्ध कर पॉजिटिव एनर्जी से भर देती है। ऐसी मान्यता है कि शंख की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा यहां तक जाता है कि शंख बजाने से दुष्टात्माएं पास नहीं आतीं। बता दें कि माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के पास शंख रखने से घर में सुख, समृद्धि और वैभव की कभी कमी नहीं होती। 

    वैज्ञानिकों के मुताबिक शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई प्रकार के हार्मफुल बैक्टीरिया और कीटाणु मर जाते हैं। शंख बजाने से गैस की समस्या भी खत्म होती है। इससे शरीर के अंदर मौजूद कई अंगों का व्यायाम हो जाता है।

    अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत है तो नियमित रूप से शंख बजाने से सांस के रोग से भी मुक्ति मिलती है। शंख बजाने से मस्तिष्क में रक्त संचार भी बढ़ता है और तनाव भी कम होता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख को घर की कमजोर दिशा में रखने से यश, कीर्ति और उन्नति का आगमन होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से शिक्षा में भी सफलता की प्राप्ति होती है। शंख में रखकर पानी पीने से हड्डियां मजबूत रहती हैं और दांत भी स्वस्थ होते हैं।

    किस दिशा में रखें शंख

    शंख घर में कहीं भी नहीं रखना चाहिए। शंख को लिविंग रूम में दक्षिण दिशा में रखने से, आपका नाम हर जगह फैलता है।

    अगर आपका रोज घर में झगड़ा होता है तो शंख को दक्षिण-पश्चिम दिशा में लिविंग रूम में रखें क्योंकि ऐसा करने से रिश्ता मधुर हो जाने की मान्यता है।

    शंख बजाने से आपका सौंदर्य भी बढ़ता है क्योंकि जब आप शंख बजाते हैं तो चेहरे की मांसपेशियां खिंचती हैं और महीन रेखाएं दूर हो जातीं हैं।

  • बुरी नज़र से बचने के कुछ आसान उपाय

     

    डेस्क। भारत मे रहकर आपने कभी नजर दोष के बारे में न सुना हो ऐसा हो नहीं सकता। साथ ही ऐसा माना जाता है कि नजर दोष का प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है। लोगों का मानना है कि नजर दोष व्यक्ति के जीवन को बहुत ही  बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। नज़र दोष के कारण से अच्छा खासा चलता-फिरता बिजनेस और रोजगार भी बैठ जाता है साथ ही कई बार अचानक तबियत भी खराब हो जाती है। 

    जानिए क्या हैं नजर दोष के लक्षण (Nazar Dosh Ke Lakshan)

    किसी भी व्यक्ति की बुरी नजर व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं को अचानक ही खड़ा कर देती है। मकान, वाहन, दुकान, कपड़े और खाने-पीने की चीजें, सभी बुरी नजर से एक बार में ही प्रभावित हो जाती हैं। 

    आइये जानते हैं नजर दोष को दूर करने के उपायों के बारे में-

    बुरी नजर (Evil eye)

    बच्चे की बुरी नजर उतारने का आसान उपाय 

    आपको लग रहा है कि आपके बच्चे पर किसी व्यक्ति की बुरी नजर लगी है, तो आप तुरंत ही उनका हाथ अपने बच्चे के सिर पर फिरवा लें। ऐसा माना जाता है कि ये करने से नजर दोष उतर जाता है। 

    अगर बच्चे को नज़र लगी है तो वो लगातार रोता रहेगा और स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाएगा। ऐसे में आप तांबे के लोट में ताजे फूल डालकर बच्चे के सिर से 11 बार उतार दें। ऐसा करने से भी नजर दोष दूर हो जाता है।

    घर के किसी सदस्य को नजर लग गई हो या फिर घर पर नजर लग गई हो तो नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करने से यह दूर हो जाती है। घर में धूपबत्ती और धुनि जलाने से भी बुरी नज़र का प्रभाव खत्म हो जाता है। ऐसा करने से घर में मौजूद बाकी नकारात्मक शक्तियां भी दूर हो जाती है।

    अगर चलते-फिरते कारोबार को किसी की नजर लग गई है, तो कारोबार के स्थान/दुकान पर लाल रंग के हनुमान जी की तस्वीर लगा लें। संकट मोचन सभी संकटों को हर लेते है। बस तस्वीर स्थापित करके आप नियमित रूप से उन्हें लाल रंग के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही, कारोबार के स्थान पर शंख में जल भरकर रोज प्रातः छिड़काव करें। और आपका रुकता कारोबार फिर से रेस में लौट जाएगा।

  • आज है 24 एकादशी का फल देने वाली भीमसेन एकादशी, जाने दान का महत्व

    आध्यात्मिक:- आज यानी 10 जून को पूरा भारत निर्जला एकादशी व्रत कर रहा है। साल भर की सभी एकादशी में निर्जला एकादशी का सर्वश्रेष्ठ महत्व है कहा जाता है जो भी इस एकादशी का व्रत करता है उंसे पूरे साल पड़ने वाली सभी एकादशी के व्रत का फल मिलता है। वही यह एक ऐसा व्रत है जो काफी कठिन माना जाता है इस दिन न तो कुछ खाया जाता है और न कुछ पिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो लोग पूरे साल की 24 एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं उन्हें इस निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह आपको पूरी 24 एकादशी का लाभ देता है।

    आज 10 जून को निर्जला एकादशी का व्रत लोग रख रहे हैं इसदिन दान पुण्य का बहुत अधिक महत्व होता है कहते हैं जो भी आज के दिन अनाज , कपड़े और घी दूध का दान करता है उसे खूब पुण्य मिलता है। अनाज में चावल का दान वर्जित है। वही आज के दिन महिलाओं और पुरुष को पीले वस्त्र के साथ सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए पील जहाँ विष्णु का प्रिय रंग है वही सफेद शान्ति का प्रतीक है। धार्मिक ग्रन्थों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस प्रकार के वस्त्र धारण कर आज के दिन पूजा अर्चना करता है उसे विशेष लाभ प्राप्त होता है। 
    निर्जला एकादशी व्रत के दिन सभी को तीन बार स्नान करना चाहिए। सुबह सूर्य नमस्कार के साथ अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए और फिर शाम को विष्णु की पूजा करके ध्यान करना चाहिए। वही दूसरे दिन सुबह जब आप अपना व्रत खोले तो आपको सबसे पहले सूर्य नमस्कार करना चाहिए और बाद में विष्णु की पूजा कर परायण करना चाहिए और व्रत तोड़ना चाहिए।

  • बनने वाला है महालक्ष्मी योग, इन लोगों पर होगी धन की वर्षा

    डेस्क। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब कोई ग्रह गोचर या किसी अन्य ग्रह के साथ युति बनाता है, तो इसका प्रभाव मानव जीवन उसके व्यवसाय, सुख दुख आदि पर पड़ता है। जानकारी के अनुसार बता दें कि शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृष में गोचर करने जा रहे हैं, जहां पर पहले से ही बुध देव स्थित हैं।

    शुक्र को धन, वैभव, रोमांस और ऐश्वर्य को देने वाला माना जाता है। वहीं बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, संवाद, संचार और चतुरता का देंन दाता कहा जाता है। आने वाली 18 जून की तारीख को वृष राशि में इन दोनों ग्रहों की युति बनने जा रही है। जिससे महालक्ष्मी योग का निर्माण होने वाला है।

    ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से इस योग को बेहद अहम बताया गया है। कहा जा रहा है बेहद प्रभावशाली होने के कारण इस योग का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। परंतु 3 राशियां ऐसीं हैं, जिनको यह योग लाभकारी साबित होने वाला है।

    जानकारों के मुताबिक इन तीन राशियों के लिए महालक्ष्मी योग का निर्माण किसी वरदान से कम नहीं होगा। क्योंकि इस समय आपको आकस्मिक धन की प्राप्ति हो सकती है। मतलब शेयर बाजार और सट्टा लॉटरी में लाभ हो मिलने की आंशका बन रही है। साथ ही व्यापार में भी अच्छा धनलाभ मिलने की आशंका है। इसी कड़ी में बता दें कि अगर आपका पैसा कही फंंसा हुआ है तो वो इस दौरान आपको यह वापस प्राप्त हो सकता है। इसलिए प्रयास करते रहें और हिम्मत न हारें। इस महायोग के समय में आप लोग एक पन्ना रत्न भी धारण कर सकते हैं। जो आपके लिए शुभ संदेश ही लेकर आएगा।

    इस दौरान आपकी इनकम में बड़ी बढ़ोतरी होने के प्रबल योग हैं। साथ ही आय के नए माध्यम भी इस दौरान बनेंगे। व्यापार में अच्छा धनलाभ होने की आशंका है और कारोबार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। मां लक्ष्मी इन दिनों आप पर मेहरबान होने वालीं हैं। 

    साथ ही आप लोगों के लिए महालक्ष्मी योग के बनने से सुख-समृद्धि का भी आगमन होगा। यह आपके लिए कार्यक्षेत्र और नौकरी के रास्ते भी खोलेगा। इस दौरान आपको करियर में सुनहरी सफलता मिलने की आशंका है।

  • Vastu Shastra : घर का दरवाजा आती लक्ष्मी को कर सकता हैं रूष्ट, जानिए उपाय

     

    आखिर पैसा किसको प्यारा नहीं होता। कई बार तो उन्नति का मतलब ही पैसा होता है। जितना अथाह धन होता है लोग आपको उतना ही उन्नत मानते हैं। आज के समय में पैसा के बिना कोई जीवन व्यापन नहीं कर सकता है। पैसा इंसान की आज की सबसे बड़ी जरूरत है। बिना पैसे के वो कुछ नहीं कर सकता और पैसा होने के बाद इंसान क्या नहीं कर सकता। पर अगर पैसों की तंगी के शिकार हैं तो शास्त्रों में इसके कई उपाय दिए गए हैं। वैसे तो शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि व्यक्ति की आर्थिक अवस्था उसके अपने कर्म होते हैं। पर कई ऐसे उपायों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता जिनके करने से आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

    आर्थिक स्तिथि बदलने के लिए क्या करें-

    – घर की चौखट के ऊपर गणपति के 2 ऐसे चित्र या टाइल्‍स लगाएं जिसमे से एक घर के अंदर और एक घर के बाहर हो। साथ ही उनकी पीठ आपस में जुड़ी हुई हों। ऐसा करने से घर में कभी गरीबी नहीं आती और हमेशा बरकत बनी रहती है।

    – सूर्य देव को सबसे ऊर्जावान देवों में गिना जाता है, इनको ऊर्जा देनेवाला भी माना जाता हैं। साथ ही वह सफलता, सेहत, समृद्धि भी प्रदान करते हैं। घर के मुख्‍य द्वार पर सूर्य देव की तांबे से बनी प्रतिमा को लगाएं। इससे घर में हमेशा सकारात्‍मकता बनी रहती है। और वास्‍तु दोष भी दूर होते हैं।

    – शनि देव की कृपा व्‍यक्ति को रंक से राज गद्दी पर पहुंचा देती है। शमी के पौधे को शनि देव का प्रतिनिधित्‍व करने वाला कहा जाता है। इसलिए घर के मुख्‍य द्वार के दोनों ओर शमी के पौधे रखें। आपके जीवन का बुरा वक्‍त हमेशा के लिए टल जाएगा और आप तेजी से तरक्‍की करेंगे। रोज शमी के पौधे को पानी अर्पित करें और उसकी निरंतर पूजा भी करें।

    – मुख्‍य द्वार पर रोज शाम को गाय के घी का दीपक जलाएं। इससे मां लक्ष्‍मी का घर में आगमन होता है। मां लक्ष्‍मी की घर को धन-धान्‍य से भर देती है।