Category: religious

  • कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए है आज का दिन काफी भारी, देखें अपना राशिफल

    मेष

    आज आपका अधिक समय घर पर ही बीतेगा किंतु अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और सहने की शक्ति रखें क्रोध के कारण कुछ नई समस्याओं को जन्म दे सकते हैं धर्म से संबंधित क्षेत्रों में समय कुछ चुनौतीपूर्ण रह सकता है। 
    वृषभ
    आज परिजनों के साथ रिश्तो में सुधार होगा और उनका सहयोग भी प्राप्त होगा भाई अथवा मित्रों के साथ किसी विशेष प्रयोजन पर चर्चा कर सकते हैं। 
    मिथुन
    गोचर का समय आपके अनुकूल हैं आज आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा भूमि से संबंधित शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है आज आपको आकस्मिक धन लाभ होगा। 
    कर्क
    कार्य क्षेत्र में आज स्थितियां आपके अनुकूल रहेंगे किंतु दुर्घटना के योग प्राप्त हो रहे हैं। घर परिवार में।किसी कारण वश मतभेद पैदा होगा और आप अपने साथी का विश्वास खो देंगे।
     सिंह
    अपनों से धोखा प्राप्त होगा कार्य क्षेत्र में आज स्थितियां आपके अनुकूल रहेंगी किंतु दुर्घटना के योग प्राप्त हो रहे हैं। ऑफिस में आज आपको सम्भल कर रहना होगा किसी अपने से ठगे जा सकते हैं। 
    कन्या
    नई जॉब के अवसर बनेंगे स्वास्थ्य से संबंधित कुछ चिंता रह सकती है कार्यक्षेत्र नौकरी व्यवसाय में आप लोगों के प्रिय रहेंगे और आपकी कार्यशैली और कार्यक्षमता को महत्व दिया जाएगा बॉस भी आपके कार्य से प्रभावित रहेंगे। 
    तुला
    गोचर का समय आपके अनुकूल हैं भूमि से संबंधित शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है आज आपको आकस्मिक धन लाभ होगा। 
    वृश्चिक
    आज आपका अधिक समय घर पर ही बीतेगा किंतु अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और सहने की शक्ति रखें क्रोध के कारण कुछ नई समस्याओं को जन्म दे सकते हैं धर्म से संबंधित क्षेत्रों में कुछ चुनौतीपूर्ण रह सकता है। 
    धनु
    दिखावे से बचें दुर्घटना के संकेत प्राप्त हो रहे हैं अतः वाहन चलाने में सावधानी बरतें माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। 
    मकर
    नई जॉब के अवसर बनेंगे स्वास्थ्य से संबंधित कुछ चिंता रह सकती हो कार्यक्षेत्र नौकरी व्यवसाय में आप लोगों के प्रिय रहेंगे और आपकी कार्यशैली और कार्यक्षमता को महत्व दिया जाएगा बॉस भी आपके कार्य से प्रभावित रहेंगे। 
    कुम्भ
    संतान को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हो सकती है संतान के भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे भूमि से संबंधित विवादों की संभावना बन रही है अतः सावधान रहें। 
    मीन
    आज का समय आपके लिए नई चुनौतियां लेकर आएगा वाणी में संयम रखें जल्दबाजी करने से बचें किसी भी कार्य में जल्दबाजी के कारण कार्य बिगड़ सकते हैं।

  • वट सावित्री की पूजा के दिन महिलाएं भूल से भी न पहनें इस रंग के वस्त्र, जाने वट सावित्री का महत्व

    आध्यात्मिक:- वट सावित्री पूजा का हिन्दू धर्म मे अत्यधिक महत्व है यह पर्व पूरे भारत मे सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। धर्म ग्रन्थों में कहा गया है कि जो महिलाएं वट सावित्री का व्रत करती है उनके पति की उम्र लंबी होती है। वही इस साल वट सावित्री का वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानि 30 मई को पड़ रहा है इस दिन सभी महिलाएं घर मे बरगद बनाती है और बरगद की पूजा करती है व अपने पति की लंबी उम्र की ईश्वर से कामना करती है। 

    मान्यता है कि जो महिला वट सावित्री की पूजा विधि विधान से करती है उसके पति की उम्र बढ़ती है और उसके घर मे सुख सम्रद्धि का वास होता है। वट सावित्री की पूजा से पति पत्नी के रिश्ते में प्रेम बढ़ता है। कहा जाता है इस व्रत को सच्चे मन से करने वाली स्त्रियों को ईश्वर से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। 
    धर्मिक ग्रन्थ में कथा वर्णित है कि सावित्री ने अपने पति के लिए वट सावित्री का व्रत रखा था उसी दिन उसके पति की मौत हो गई और जब यमराज उसके पति की आत्मा को लेने आए तो वह यमराज से लड़ गई और उन्होंने उनसे अपने पति के प्राण वापस लिए। सावित्री के इस पति प्रेम के बाद से यह व्रत पूरे विश्व मे प्रचलित हुआ और प्रत्येक विवाहित महिला अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करने लगी और इस व्रत को विधि पूर्वक करती है। 
    धर्म शास्त्र के अनुसार जो भी महिलाएं इस व्रत को करती है उनके पति को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है लेकिन यदि कोई स्त्री इस व्रत में कोई गलती करता है तो महिलाओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं को इस व्रत के दिन सचेत रहना चाहिए और साफ सफाई का ध्यान रखते हुए गलती करने से बचना चाहिए क्योंकि अगर आप इस व्रत के दौरान गलती करती है तो इसका परिणाम आपको ही झेलना पड़ेगा और आपके वैवाहिक जीवन मे संकट आ सकता है।
    मान्यता है इस इस दिन महिलाओं को लाल पीली हरे गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। वही महिलाओं को हमेशा काले, सफेद और नीले रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। महिलाओं को लाल पीली चूड़ियां धारणा कर सोलह श्रृंगार कर पूजा के लिए जाना चाहिए। वही जो सुहागिन पहली बार यह व्रत करने जा रही है उन्हें अपने मायके से यह व्रत करके आना चाहिए। क्योंकि मान्यता है इस व्रत को अगर ससुराल में किया जाए तो वह शुभ नहीं है वही अगर कोई महिला मजबूरी में यह व्रत अपनी ससुराल में करती है तो उसे पूजा की समस्त सामग्री मायके से मंगवानी चाहिए और उसी से पूजा करनी चाहिए। 
    इसके साथ ही यदि किसी महिला को वट सावित्री की पूजा के दिन मासिक धर्म आरम्भ हो गया है तो उसे पूजा नहीं करनी चाहिए और अपनी समस्त पूजा सामग्री अपनी ननद या भाभी से मंदिर पर चढवानी चाहिए और दूर बैठकर भगवान की कथा सुननी चाहिए। वही अगर इस दिन घी का दिया आप जलाती है तो उसे आप दाईं तरफ रखे वही अगर आप इस दिन तेल का दिया जलाती हैं तो उसे बाई और रखे यह शुभ होता है।

  • सपने में दिखें चांदी के बर्तन तो जरा संभल जाएं

    डेस्क । जीवन शैली में बर्तन का बहुत बड़ा महत्व होता है। वैसे तो मेहमानों का सत्कार करने में चमचमाते हुए बर्तन परिवार की समृद्धि का सीधा संकेत देते है। वैसे तो हजार सालों पहले से समृद्धशाली लोगों के रसोई में बहुमूल्य धातुओं के बर्तनों में भोजन करने का प्रचलन रहा है। अगर थोड़ा अध्ययन किया जाए तो हमें तांबे, मिट्टी और चांदी के बर्तनों के इस्तेमाल का अवशेष आसानी से मिल जाएंगा।

    सालों पहले लोग चांदी के विभिन्न बर्तनों का इस्तेमाल करते थे। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि चांदी के बर्तन में खाना खाने से हमारा दिमाग तेज होता है । चांदी के बर्तन से पानी पीने से हमारा मन शांत होता और शीतलता आती है।

    चांदी को चंद्रमा की धातु भी कहा जाता है। पुराने लोगों की माने तो चांदी से मन एवं शरीर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। 

    बता दें कि चांदी हमारे मन की कारक मानी जाती है एवं हमारे मन को स्थिर करने में भी काफी मदद करता है। इसी कारण से पुराने जमाने में राजा महाराजा सोने चांदी के बर्तनों में खाना खाने को प्रिफरेंस देते थे। 

    सपने में चांदी के बर्तन दिखने  से क्या होता है

    1.किसी बीमार आदमी के सपने में अगर चांदी का बर्तन दिखाई देता है। तो इसके पीछे का अर्थ है कि उसकी पीड़ा समाप्त होने वाली है।

    2.यदि किसी कुंवारे लड़के या कुंवारी लड़की के सपने में चांदी का बरतन दिखता है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। उसको सौभाग्य बढ़ाने वाला बताया गया है।

    3.किसी नौकरी पेशा वाले लोगों को सपने में चांदी का बर्तन दिखाई दें तो इसका मतलब है, उनके दोनों हाथों में अब घी के लड्डू आने वाले हैं।

  • शिव और विष्णु पुराण में है अनोखा अंतर

    धर्मिक:- हिन्दू धर्म मे दो प्रकार के ग्रन्थ होते हैं श्रुति और स्मृति। श्रुति के अंतर्गत वेद का जिक्र होता है और स्मृति के अंतर्गत पुराणों का जिक्र है। वही अगर हम पुराणों की बात करे तो कुल पुराणों की संख्या 18 होती है। पुराणों को वेदव्यास ने लिखा है। वही अगर हम सबसे ज्यादा प्रचलित पुराणों की बात करे तो वह शिव पुराण और विष्णु पुराण है। सुनने में यह दोनो एक जैसे लगते हैं और इनके नाम से ऐसा प्रतीक होता है यह अलग अलग प्रकार के रहस्यों से भरे पड़े हैं लेकिन इनमें कुछ मूल अंतर भी है जो इस प्रकार है। 

    अगर हम बात शिव पुराण की करे तो यह शिव की महिमा का गुणगान करता है और इसमे शिव के अवतारों का विस्तृत वर्णन किया गया है। वही विष्णु पुराण विष्णु के अवतारों का व्याख्यान करता है और इसमे विष्णु भगवान के विषय मे सम्पूर्ण जानकारी दी गई है। 
    अगर हम विष्णु पुराण की तुलना शिव पुराण से करें तो यह काफी शिव पुराण से काफी छोटा है। शिवपुराण का पाठ शिव अनुयायी करते हैं वही विष्णु पुराण का पाठ विष्णु अनुयायी करते हैं।
    शिव पुराण को महापुराण के नाम से जाना जाता है लेकिन विष्णु पुराण को कोई अन्य उपनाम नहीं प्राप्त है। विष्णु पुराण में मुख्य रूप से एकादशी व्रत के महत्व से लेकिन गंगा स्नान, तुलसी पूजा , गाय पूजा, श्राद्ध कर्म, तीर्थ परिक्रमा, माता पिता की सेवा आदि का वर्णन किया गया है। वही शिव पुराण में शिव की महिमा , शिव के अवतार, शिव के कार्य, शिव का रौद्र रूप उल्लेखित है। 
    विष्णु के विषय मे विख्यात है कि वह पालनहार है जीवन देने वाले हैं इस सृष्टि के संचालक है वही शिव को मृत्यु का देवता कहा गया है यह योगी है वैरागी है और संहारक है। 
    शिवपुराण के मुताबिक विष्णु की उत्पत्ति शिव से हुई है जबकि विष्णुपुराण के मुताबिक शिव की उत्पत्ति विष्णु से हुई है। शिव पुराण मूल रूप से द्वैतवाद का समर्थन करता है जबकी विष्णु पुराण अद्वैतवाद का समर्थन करता है।

  • जाने गायत्री मंत्र का अर्थ, जाप का सही समय और रोज जाप से होने वाले फायदे

    Aadyatmik:- हिन्दू धर्म मे गायत्री मंत्र का सर्वश्रेष्ठ महत्व है इसका उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है ऋग्वेद की शुरुआत गायत्री मंत्र से होती है। वही इस 24 अक्षरों के गायत्री मंत्र के प्रत्येक अक्षर का विशेष महत्व है गायत्री मंत्र भारत के बच्चे बच्चे की पहचान है और भारत मे गायत्री मंत्र के बिना कुछ भी नहीं है। यहां कोई भी धार्मिक पूजा हो या कोई भी शुभ अनुष्ठान उसकी शुरुआत गायत्री मंत्र से की जाती है भारत के बच्चे बच्चे को घर मे बचपन से ही गायत्री मंत्र का ज्ञान दिया जाता है। वही जेष्ठ माह के शुक्ल पक्ष को गायत्री जयंती भी मनाई जाती है। तो आईए जानते हैं क्या है गायत्री मंत्र और क्या है इसका विशेष महत्त्व…

    जाने क्या है गायत्री मंत्र:- 

    ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

    जाने क्या है गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों का महत्व:-

    गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में देवी देवताओं का आह्वान होता है इसका प्रत्येक अक्षय किसी न किसी देव या देवी से जुड़ा हुआ है। गायत्री मंत्री 24 शक्तियों का योग है। इस मंत्र का जाप करने से मन शान्त रहता है और एक साथ 24 देवो की आराधना का फल प्राप्त होता है। 

    जाने गायत्री मंत्र का अर्थ:-

    गायत्री मंत्र परमात्मा के तेज का प्रतीक है यह हमारे मन को शान्त रखने का स्तम्भ है और जब हम गायत्री मंत्र का जाप करते हैं तो यह हमें सकारात्मकता से जोड़ता है और हमारा मन शान्त रहता है। गायत्री मंत्र का अर्थ है प्रेरणा मार्गदर्शन और नकारात्मक ऊर्जा का नाश।

    जाने गायत्री मंत्र के जाप का उचित समय:- 

    गायत्री मंत्र का जाप प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए इसके जाप का उचित समय सुबह सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय के बाद का है। इसके अलावा शाम को इस मंत्र का जाप या तो सूर्यास्त से पहले या सूर्यास्त के बाद करना चाहिए।

    गायत्री मंत्र के जाप से होने वाले फायदे:-

    गायत्री मंत्र का नित्य जाप करने से घर का वातावरण अच्छा रहता है।
    इसके जाप से मन नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से बचता है। एकाग्र6आती है और चेहरे को चमक प्राप्त होती है।
    शिव गायत्री मंत्र का जाप करने से पितृदोष, कालसर्प दोष, राहु-केतु तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.
    नारियल का बुरा और घी का हवन गायत्री मंत्र के सा थ करने से शत्रुओं का नाश होता है।
    जो व्यक्ति दिन में एकाग्रता के साथ 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करता है उसकी स्मरण शक्ति बढ़ती है और उसे चीजे लम्बे समय तक याद रहती है।

  • Samudrik Shastra : इस जगह तिल या निशान है तो निश्चिन्त हो जाइये माता लक्ष्मी खुद करेंगी आपकी तलाश

    डेस्क। ज्योतिष शास्त्र (jyotish shastra) की तरह सामुद्रिक शास्त्र (samudrik shastra) से भी लोगों के आने वाले भविष्य को ज्ञात किया जा सकता है। सामुद्रिक शास्त्र भूत, भविष्य, वर्तमान आपके अच्छे बुरे कर्म और आपके आचरण के बारे में बताता है। 

    सामुद्रिक शास्त्र में आंकलन लोगों के शरीर के अंगों की बनावट, आकार मौजूद चिन्हों के आधार पर किया जाता है। आपके शरीर पर मौजूद रेखाओं की तरह ही एक एक चिन्ह का अपना एक अलग महत्व होता है। 

    इन चिन्हों से लोगों के व्यक्तित्व के बारे में पता चलता है। आज हम आपको कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताएंगे जो एक धनवान पुरुष की पहचान माने जाते हैं। 

    यहाँ पर तिल का होना

    सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक, जिस व्यक्ति के हाथ में मंदिर, ध्वज, मकर के चिन्ह जैसी रेखाएं मौजूद होती है। वह लोग काफी धनी होते है। वहीं जिस पुरुष की हथेली के बिल्कुल बीच में अगर तिल मौजूद है तो उस आदमी को समाज में खूब मान-सम्मान की प्राप्त (special sign and mole) होती है।

    स्पष्ट रेखाएं

    सामुद्रिक शास्त्र में, जिस पुरुष की हाथों की लकीरें गहरी और साफ साफ बनी होती हैं। उसके साथ ही जिनकी उंगलियां भी भरी हुई होती हैं, उन पुरुषों को जीवन में खूब धन प्राप्त होता है। इन लोगों को कभी धन की तलाश नही करनी पड़ती। माता लक्ष्मी खुद ऐसे लोगो के घर का दरवाजा खटखटाती हैं। 

     

    हाथ मे विशेष निशान

    हाथ में चक्र, धनुष, तलवार या भाले जैसी रेखाएं मौजूद तो समझ लीजिए आप वो हैं जिनके साथ में हमेशा देवी देवताओं का वास रहता है। इस शास्त्र में पुरुषों के बारे में माना जाता है कि ऐसे लोगों को आर्मी, पुलिस जैसे क्षेत्रों में उच्च पद पाने का मौका मिलता है।

  • ब्रह्मांड की आकृति है शिवलिंग जाने इसके अर्थ का रहस्य

    Aadhyatmik:- हिन्दू धर्म मे शिवलिंग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है इसे शिव का प्रतीक मानकर पूजा जाता है हिन्दू बड़े ही श्रद्धा भाव से शिवलिंग की पूजा करते हैं और इसका सम्मान करते हैं। लेकिन कई लोग शिवलिंग को लेकर तरह तरह के सवाल करते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर शिवलिंग का अर्थ क्या है। वह तर्क देते हैं की पुरुष लिंग का प्रतीक है पुरुष स्त्रीलिंग का प्रतीक है स्त्री नपुंसक लिंग का प्रतीक है नपुंसक तो शिवलिंग का प्रतीक क्या है। तो आइए जानते हैं शिवलिंग का क्या अर्थ है और इसके पीछे क्या कहानी है।

    शिवलिंग का अर्थ:- 

    शिवलिंग को शिव का प्रतीक माना जाता है। शून्य आकाश ब्रह्मांड पाताल निराकार शिव का प्रतीक चिन्ह होने के कारण शिवलिंग हिन्दू धर्म मे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। शिवलिंग के संदर्भ में स्कंद पुराण में कहा गया है कि शिवलिंग घूमती धरती की तथा सारे ब्रह्मांड की घुरी का लिंग है। यह भगवान शिव का निराकार स्वरूप है।
    शिवलिंग का कई लोग गलत अर्थ निकालते हैं इसके पीछे अमुख कारण यह है कि वास्तविक धर्मिक ग्रन्थों को कुछ धर्म विरोधियों द्वारा नष्ट कर दिया गया है जिसके चलते लोगो को निराकार शिवलिंग का वास्तविक मूल नहीं पता है और वह इसका गलत अर्थ निकालकर लोगो को अधूरी जानकारी देते हैं। 
    अगर हम शिवलिंग के संदर्भ में लिंग का अर्थ समझें तो इसका अर्थ है चिन्ह, संकेत , गुण, निशानी , व्यवहार या प्रतीक। धरती शिवलिंग का पीठ या आधार कहा जाता है यह शून्य अनन्त लय का प्रतीक है जिस कारण इसे लिंग कहा जाता है। शिवलिंग को अन्य कई नाम जैसे अग्नि स्तम्भ, ब्रह्मांडीय स्तम्भ या स्तम्भ लिंग के नाम से जाना जाता है। 
    सम्पूर्ण ब्रह्मांड में विख्यात है कि मनुष्य का शरीर ऊर्जा और पदार्थ से निर्मित है यही मनुष्य के शरीर को गति प्रदान करता है उसी प्रकार शिव पदार्थ और ऊर्जा का केंद्र है जो इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड को बनाए हैं और शिवलिंग इस ब्रह्मांड की आकृति है। शिवलिंग स्त्री और पुरुष का सम्मिलित रूप है यह इस बात का व्याख्यान करता है कि इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड में किसी एक का वर्चस्व नहीं है यहां स्त्री और पुरुष दोनों का सम्मान सम्मान होना चाहिए और प्रकृति निर्माण में दोनो की बराबर की हिस्सदारी है। 

    पौराणिक कथाओं में क्या है शिवलिंग की मान्यता:-

    पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार शिव और विष्णु के मध्य श्रेष्ठता को लेकर विवाद छिड़ गया इनके बीच के विवाद ने देवलोक में उथल पुथल मचा दी जब विवाद को शान्त करने के लिए कोई मार्ग नहीं दिखा तो एक दिव्य लिंग प्रकट किया गया। इस ज्योतिर्लिंग को ढूंढते वक्त ब्रह्मा और विष्णु को शिव के दिव्य अलौकिक परमब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हुआ और शिवलिंग को शालीग्राम के रूप में पूजा जाने लगा।

  • ब्रह्मांड की आकृति है शिवलिंग जाने इसके अर्थ का रहस्य

    Aadhyatmik:- हिन्दू धर्म मे शिवलिंग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है इसे शिव का प्रतीक मानकर पूजा जाता है हिन्दू बड़े ही श्रद्धा भाव से शिवलिंग की पूजा करते हैं और इसका सम्मान करते हैं। लेकिन कई लोग शिवलिंग को लेकर तरह तरह के सवाल करते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर शिवलिंग का अर्थ क्या है। वह तर्क देते हैं की पुरुष लिंग का प्रतीक है पुरुष स्त्रीलिंग का प्रतीक है स्त्री नपुंसक लिंग का प्रतीक है नपुंसक तो शिवलिंग का प्रतीक क्या है। तो आइए जानते हैं शिवलिंग का क्या अर्थ है और इसके पीछे क्या कहानी है।

    शिवलिंग का अर्थ:- 

    शिवलिंग को शिव का प्रतीक माना जाता है। शून्य आकाश ब्रह्मांड पाताल निराकार शिव का प्रतीक चिन्ह होने के कारण शिवलिंग हिन्दू धर्म मे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। शिवलिंग के संदर्भ में स्कंद पुराण में कहा गया है कि शिवलिंग घूमती धरती की तथा सारे ब्रह्मांड की घुरी का लिंग है। यह भगवान शिव का निराकार स्वरूप है।
    शिवलिंग का कई लोग गलत अर्थ निकालते हैं इसके पीछे अमुख कारण यह है कि वास्तविक धर्मिक ग्रन्थों को कुछ धर्म विरोधियों द्वारा नष्ट कर दिया गया है जिसके चलते लोगो को निराकार शिवलिंग का वास्तविक मूल नहीं पता है और वह इसका गलत अर्थ निकालकर लोगो को अधूरी जानकारी देते हैं। 
    अगर हम शिवलिंग के संदर्भ में लिंग का अर्थ समझें तो इसका अर्थ है चिन्ह, संकेत , गुण, निशानी , व्यवहार या प्रतीक। धरती शिवलिंग का पीठ या आधार कहा जाता है यह शून्य अनन्त लय का प्रतीक है जिस कारण इसे लिंग कहा जाता है। शिवलिंग को अन्य कई नाम जैसे अग्नि स्तम्भ, ब्रह्मांडीय स्तम्भ या स्तम्भ लिंग के नाम से जाना जाता है। 
    सम्पूर्ण ब्रह्मांड में विख्यात है कि मनुष्य का शरीर ऊर्जा और पदार्थ से निर्मित है यही मनुष्य के शरीर को गति प्रदान करता है उसी प्रकार शिव पदार्थ और ऊर्जा का केंद्र है जो इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड को बनाए हैं और शिवलिंग इस ब्रह्मांड की आकृति है। शिवलिंग स्त्री और पुरुष का सम्मिलित रूप है यह इस बात का व्याख्यान करता है कि इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड में किसी एक का वर्चस्व नहीं है यहां स्त्री और पुरुष दोनों का सम्मान सम्मान होना चाहिए और प्रकृति निर्माण में दोनो की बराबर की हिस्सदारी है। 

    पौराणिक कथाओं में क्या है शिवलिंग की मान्यता:-

    पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार शिव और विष्णु के मध्य श्रेष्ठता को लेकर विवाद छिड़ गया इनके बीच के विवाद ने देवलोक में उथल पुथल मचा दी जब विवाद को शान्त करने के लिए कोई मार्ग नहीं दिखा तो एक दिव्य लिंग प्रकट किया गया। इस ज्योतिर्लिंग को ढूंढते वक्त ब्रह्मा और विष्णु को शिव के दिव्य अलौकिक परमब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हुआ और शिवलिंग को शालीग्राम के रूप में पूजा जाने लगा।

  • वास्तु शास्त्र : सही जगह और सही समय पर लगाएं ये दो पौधें वर्ना हो जाएगा अनर्थ

    डेस्क। वास्तु शास्त्र का चलन अब देश में घटता ही जा रहा है। एक समय था जब हमारे पूर्वज इंटीरियर डेकोरेशन की जगह घर के वास्तु पर ध्यान देते थे। पर समय के साथ ही वास्तु शास्त्र और इसको मानने वाले कम होते जा रहें है। पर क्या आप जानते है आपके घर में सुख, समृद्धि, शांति, वैभव आदि सभी चीज़ों के लिए वास्तु का सही होना बेहद जरूरी है। आज हम वास्तु से संबंधित एक ऐसे ही चमत्कार के बारे में बात करेंगे। 

    वास्तु का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषियों की माने तो वस्तु के आधार पर 2 पौधे घर में रखने से कई प्रकार के दुखों का निवारण होता है।

    इनमें पहला अशोक का पेड़ है। जिसे घर में रखने से घर का दुख दूर होता है। आपके घर अशोक का पेड़ अवश्य होना चाहिए, यह सुंदर दिखने के साथ ही आपके घर से उदासी और नकारात्मकता को भी दूर रखता है। 

    इस सूची में दूसरा पौधा है, आंवला। वैसे तो हिंदू धर्म में आंवला के पेड़ की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस पौधे की जड़ में भगवान विष्णु का वास है। यह पौधे बहुत ही पवित्र और शुभ माने जाते हैं। अगर आप इन पौधों को घर में लगाते हैं तो घर में भगवान विष्णु का वास प्रकृति रूप में रहता है। घर में इस पौधे के लगाने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। साथ ही इन पौधों के बढ़ने के साथ ही घर में समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की कृपा आप पर हमेशा के लिए बनी रहती है। कहा जाता है कि इस पौधे की नियमित सेवा से आपको कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होते हैं। 

    जगह का होता है विशेष महत्व

    इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिस स्थान पर आप इन दोनों पौधों को रखते हैं वह जगह गंदी नहीं होनी चाहिए। इनको कभी भी बाथरूम के आस पास न रखें। इन दोनों पौधों के स्थानों को मंदिर के स्थान की तरह एकदम स्वच्छ रखें। इन पौधों को लगाते समय यह भी ध्यान में रखें कि इनको पर्याप्त धूप और स्वच्छ वायु मिले। 

  • सोना, चांदी, तांबा या मिट्टी किस धातु के दीपक से करें पूजा

    डेस्क। हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का काफी महत्व है। और पूजा पाठ में दीप जलाने का भी विशेष प्रावधान है। मान्यता है कि पूजा में देवी-देवताओं के समक्ष दीप जलाने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और सारी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पूजा पाठ में अलग-अलग तरह के दीप जलाने के नियम हैं। पर क्या आ जानते हैं कि अलग-अलग दीपक एक विशेष कारण से जलाएं जाते हैं। आटे का दीपक, मिट्टी के दीये, पीतल का दीये, चांदी का दीये ऐसे कई तरह के धातुओं से बने दीपक का प्रयोग पूजा में किया जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि मनोकामना पूर्ति के लिए देवी-देवता की पूजा में कौन से दीपक का प्रयोग करना चाहिए।

    इच्छा पूर्ति के लिए सोना, चांदी, कांसा, तांबा जैसे धातुओं के दीपक जलाए जाते हैं। अगर आप पूजा में भगवान का आशीर्वाद चाहते हैं तो यह जान लीजिए कि कौन से दीपक का प्रयोग किस पूजा में किया जाता है।

    आटे का दीपक

    साधना और सिद्धि के समय आटे का दीपक जलाया जाता है; जैसे कर्ज मुक्ति, विवाह में हो रही देरी, नौकरी व्यापार के लिए, संतान की प्राप्ति के लिए, गृह कलह को खत्म करने के लिए, पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार लाने के लिए और आर्थिक संकट से मुक्ति पाने के लिए आटे का दीपक जलाया जाता है। यह दीप पूजा के लिए काफी उत्तम माना जाता है।

    मिट्टी का दीपक

    मिट्टी का दीपक किसी भी पूजा पाठ के लिए सबसे पवित्र दीपक के रूप में प्रयोग किया जाता है। मिट्टी के दीपक के इस्तेमाल से शनि और मंगल ग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एक बार जलाने के बाद इस दीपक का फिर से प्रयोग ना किया जाएं। मिट्टी के दिए को जलाने के बाद किसी बहते जल में प्रवाहित करना देना चाहिए। 

    सोने का दीपक

    सोना का संबंध सूर्य से है और सोने के दीपक में सूर्य और गुरु दोनों का वास होता है। सोने के दीपक को जलाने से जीवन में उन्नति की प्राप्ति होती है।

    चांदी का दीपक

    चांदी का दीपक चंद्रमा और शुक्र के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इन धातु के दीपक को जलाने से घर में धन-संपदा की कभी कमी नहीं होती और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

    तांबा का दीपक

    तांबे से बने दिए में मंगल का वास होता है। इसे जलाने से मनोबल में भी वृद्धि होती है। कहते है कि तांबे के दीपक में तिल का तेल डालकर जलाना चाहिए।

    कांसा का दीपक

    कांसे के धातु से दीपक में बुध ग्रह का वास माना जाता है। धन की स्थिरता और पर्याप्त धन के लिए कांसे के दीपक में तिल का तेल डालकर जलाया जाता है।

    लोहा का दीपक

    लोहा के धातु से निर्मित दीपक में शनि देव का वास होता है। शनिवार और मंगलवार के दिन लोहे के दीपक में सरसों का तेल डालकर उड़द की दाल का आसन चारों तरफ देकर दीपक जलाया जाता है।