मेष
वृषभ
मिथुन
कर्क
सिंह
कन्या
तुला
वृश्चिक
धनु
मकर
कुम्भ
मीन
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आध्यात्मिक:- वट सावित्री पूजा का हिन्दू धर्म मे अत्यधिक महत्व है यह पर्व पूरे भारत मे सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। धर्म ग्रन्थों में कहा गया है कि जो महिलाएं वट सावित्री का व्रत करती है उनके पति की उम्र लंबी होती है। वही इस साल वट सावित्री का वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानि 30 मई को पड़ रहा है इस दिन सभी महिलाएं घर मे बरगद बनाती है और बरगद की पूजा करती है व अपने पति की लंबी उम्र की ईश्वर से कामना करती है।
डेस्क । जीवन शैली में बर्तन का बहुत बड़ा महत्व होता है। वैसे तो मेहमानों का सत्कार करने में चमचमाते हुए बर्तन परिवार की समृद्धि का सीधा संकेत देते है। वैसे तो हजार सालों पहले से समृद्धशाली लोगों के रसोई में बहुमूल्य धातुओं के बर्तनों में भोजन करने का प्रचलन रहा है। अगर थोड़ा अध्ययन किया जाए तो हमें तांबे, मिट्टी और चांदी के बर्तनों के इस्तेमाल का अवशेष आसानी से मिल जाएंगा।
सालों पहले लोग चांदी के विभिन्न बर्तनों का इस्तेमाल करते थे। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि चांदी के बर्तन में खाना खाने से हमारा दिमाग तेज होता है । चांदी के बर्तन से पानी पीने से हमारा मन शांत होता और शीतलता आती है।
चांदी को चंद्रमा की धातु भी कहा जाता है। पुराने लोगों की माने तो चांदी से मन एवं शरीर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
बता दें कि चांदी हमारे मन की कारक मानी जाती है एवं हमारे मन को स्थिर करने में भी काफी मदद करता है। इसी कारण से पुराने जमाने में राजा महाराजा सोने चांदी के बर्तनों में खाना खाने को प्रिफरेंस देते थे।
1.किसी बीमार आदमी के सपने में अगर चांदी का बर्तन दिखाई देता है। तो इसके पीछे का अर्थ है कि उसकी पीड़ा समाप्त होने वाली है।
2.यदि किसी कुंवारे लड़के या कुंवारी लड़की के सपने में चांदी का बरतन दिखता है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। उसको सौभाग्य बढ़ाने वाला बताया गया है।
3.किसी नौकरी पेशा वाले लोगों को सपने में चांदी का बर्तन दिखाई दें तो इसका मतलब है, उनके दोनों हाथों में अब घी के लड्डू आने वाले हैं।
धर्मिक:- हिन्दू धर्म मे दो प्रकार के ग्रन्थ होते हैं श्रुति और स्मृति। श्रुति के अंतर्गत वेद का जिक्र होता है और स्मृति के अंतर्गत पुराणों का जिक्र है। वही अगर हम पुराणों की बात करे तो कुल पुराणों की संख्या 18 होती है। पुराणों को वेदव्यास ने लिखा है। वही अगर हम सबसे ज्यादा प्रचलित पुराणों की बात करे तो वह शिव पुराण और विष्णु पुराण है। सुनने में यह दोनो एक जैसे लगते हैं और इनके नाम से ऐसा प्रतीक होता है यह अलग अलग प्रकार के रहस्यों से भरे पड़े हैं लेकिन इनमें कुछ मूल अंतर भी है जो इस प्रकार है।
Aadyatmik:- हिन्दू धर्म मे गायत्री मंत्र का सर्वश्रेष्ठ महत्व है इसका उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है ऋग्वेद की शुरुआत गायत्री मंत्र से होती है। वही इस 24 अक्षरों के गायत्री मंत्र के प्रत्येक अक्षर का विशेष महत्व है गायत्री मंत्र भारत के बच्चे बच्चे की पहचान है और भारत मे गायत्री मंत्र के बिना कुछ भी नहीं है। यहां कोई भी धार्मिक पूजा हो या कोई भी शुभ अनुष्ठान उसकी शुरुआत गायत्री मंत्र से की जाती है भारत के बच्चे बच्चे को घर मे बचपन से ही गायत्री मंत्र का ज्ञान दिया जाता है। वही जेष्ठ माह के शुक्ल पक्ष को गायत्री जयंती भी मनाई जाती है। तो आईए जानते हैं क्या है गायत्री मंत्र और क्या है इसका विशेष महत्त्व…
डेस्क। ज्योतिष शास्त्र (jyotish shastra) की तरह सामुद्रिक शास्त्र (samudrik shastra) से भी लोगों के आने वाले भविष्य को ज्ञात किया जा सकता है। सामुद्रिक शास्त्र भूत, भविष्य, वर्तमान आपके अच्छे बुरे कर्म और आपके आचरण के बारे में बताता है।
सामुद्रिक शास्त्र में आंकलन लोगों के शरीर के अंगों की बनावट, आकार मौजूद चिन्हों के आधार पर किया जाता है। आपके शरीर पर मौजूद रेखाओं की तरह ही एक एक चिन्ह का अपना एक अलग महत्व होता है।
इन चिन्हों से लोगों के व्यक्तित्व के बारे में पता चलता है। आज हम आपको कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताएंगे जो एक धनवान पुरुष की पहचान माने जाते हैं।
सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक, जिस व्यक्ति के हाथ में मंदिर, ध्वज, मकर के चिन्ह जैसी रेखाएं मौजूद होती है। वह लोग काफी धनी होते है। वहीं जिस पुरुष की हथेली के बिल्कुल बीच में अगर तिल मौजूद है तो उस आदमी को समाज में खूब मान-सम्मान की प्राप्त (special sign and mole) होती है।
सामुद्रिक शास्त्र में, जिस पुरुष की हाथों की लकीरें गहरी और साफ साफ बनी होती हैं। उसके साथ ही जिनकी उंगलियां भी भरी हुई होती हैं, उन पुरुषों को जीवन में खूब धन प्राप्त होता है। इन लोगों को कभी धन की तलाश नही करनी पड़ती। माता लक्ष्मी खुद ऐसे लोगो के घर का दरवाजा खटखटाती हैं।
हाथ में चक्र, धनुष, तलवार या भाले जैसी रेखाएं मौजूद तो समझ लीजिए आप वो हैं जिनके साथ में हमेशा देवी देवताओं का वास रहता है। इस शास्त्र में पुरुषों के बारे में माना जाता है कि ऐसे लोगों को आर्मी, पुलिस जैसे क्षेत्रों में उच्च पद पाने का मौका मिलता है।
Aadhyatmik:- हिन्दू धर्म मे शिवलिंग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है इसे शिव का प्रतीक मानकर पूजा जाता है हिन्दू बड़े ही श्रद्धा भाव से शिवलिंग की पूजा करते हैं और इसका सम्मान करते हैं। लेकिन कई लोग शिवलिंग को लेकर तरह तरह के सवाल करते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर शिवलिंग का अर्थ क्या है। वह तर्क देते हैं की पुरुष लिंग का प्रतीक है पुरुष स्त्रीलिंग का प्रतीक है स्त्री नपुंसक लिंग का प्रतीक है नपुंसक तो शिवलिंग का प्रतीक क्या है। तो आइए जानते हैं शिवलिंग का क्या अर्थ है और इसके पीछे क्या कहानी है।
Aadhyatmik:- हिन्दू धर्म मे शिवलिंग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है इसे शिव का प्रतीक मानकर पूजा जाता है हिन्दू बड़े ही श्रद्धा भाव से शिवलिंग की पूजा करते हैं और इसका सम्मान करते हैं। लेकिन कई लोग शिवलिंग को लेकर तरह तरह के सवाल करते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर शिवलिंग का अर्थ क्या है। वह तर्क देते हैं की पुरुष लिंग का प्रतीक है पुरुष स्त्रीलिंग का प्रतीक है स्त्री नपुंसक लिंग का प्रतीक है नपुंसक तो शिवलिंग का प्रतीक क्या है। तो आइए जानते हैं शिवलिंग का क्या अर्थ है और इसके पीछे क्या कहानी है।
डेस्क। वास्तु शास्त्र का चलन अब देश में घटता ही जा रहा है। एक समय था जब हमारे पूर्वज इंटीरियर डेकोरेशन की जगह घर के वास्तु पर ध्यान देते थे। पर समय के साथ ही वास्तु शास्त्र और इसको मानने वाले कम होते जा रहें है। पर क्या आप जानते है आपके घर में सुख, समृद्धि, शांति, वैभव आदि सभी चीज़ों के लिए वास्तु का सही होना बेहद जरूरी है। आज हम वास्तु से संबंधित एक ऐसे ही चमत्कार के बारे में बात करेंगे।
वास्तु का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषियों की माने तो वस्तु के आधार पर 2 पौधे घर में रखने से कई प्रकार के दुखों का निवारण होता है।
इनमें पहला अशोक का पेड़ है। जिसे घर में रखने से घर का दुख दूर होता है। आपके घर अशोक का पेड़ अवश्य होना चाहिए, यह सुंदर दिखने के साथ ही आपके घर से उदासी और नकारात्मकता को भी दूर रखता है।
इस सूची में दूसरा पौधा है, आंवला। वैसे तो हिंदू धर्म में आंवला के पेड़ की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस पौधे की जड़ में भगवान विष्णु का वास है। यह पौधे बहुत ही पवित्र और शुभ माने जाते हैं। अगर आप इन पौधों को घर में लगाते हैं तो घर में भगवान विष्णु का वास प्रकृति रूप में रहता है। घर में इस पौधे के लगाने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। साथ ही इन पौधों के बढ़ने के साथ ही घर में समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की कृपा आप पर हमेशा के लिए बनी रहती है। कहा जाता है कि इस पौधे की नियमित सेवा से आपको कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होते हैं।
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिस स्थान पर आप इन दोनों पौधों को रखते हैं वह जगह गंदी नहीं होनी चाहिए। इनको कभी भी बाथरूम के आस पास न रखें। इन दोनों पौधों के स्थानों को मंदिर के स्थान की तरह एकदम स्वच्छ रखें। इन पौधों को लगाते समय यह भी ध्यान में रखें कि इनको पर्याप्त धूप और स्वच्छ वायु मिले।
डेस्क। हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का काफी महत्व है। और पूजा पाठ में दीप जलाने का भी विशेष प्रावधान है। मान्यता है कि पूजा में देवी-देवताओं के समक्ष दीप जलाने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और सारी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पूजा पाठ में अलग-अलग तरह के दीप जलाने के नियम हैं। पर क्या आ जानते हैं कि अलग-अलग दीपक एक विशेष कारण से जलाएं जाते हैं। आटे का दीपक, मिट्टी के दीये, पीतल का दीये, चांदी का दीये ऐसे कई तरह के धातुओं से बने दीपक का प्रयोग पूजा में किया जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि मनोकामना पूर्ति के लिए देवी-देवता की पूजा में कौन से दीपक का प्रयोग करना चाहिए।
इच्छा पूर्ति के लिए सोना, चांदी, कांसा, तांबा जैसे धातुओं के दीपक जलाए जाते हैं। अगर आप पूजा में भगवान का आशीर्वाद चाहते हैं तो यह जान लीजिए कि कौन से दीपक का प्रयोग किस पूजा में किया जाता है।
साधना और सिद्धि के समय आटे का दीपक जलाया जाता है; जैसे कर्ज मुक्ति, विवाह में हो रही देरी, नौकरी व्यापार के लिए, संतान की प्राप्ति के लिए, गृह कलह को खत्म करने के लिए, पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार लाने के लिए और आर्थिक संकट से मुक्ति पाने के लिए आटे का दीपक जलाया जाता है। यह दीप पूजा के लिए काफी उत्तम माना जाता है।
मिट्टी का दीपक किसी भी पूजा पाठ के लिए सबसे पवित्र दीपक के रूप में प्रयोग किया जाता है। मिट्टी के दीपक के इस्तेमाल से शनि और मंगल ग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एक बार जलाने के बाद इस दीपक का फिर से प्रयोग ना किया जाएं। मिट्टी के दिए को जलाने के बाद किसी बहते जल में प्रवाहित करना देना चाहिए।
सोना का संबंध सूर्य से है और सोने के दीपक में सूर्य और गुरु दोनों का वास होता है। सोने के दीपक को जलाने से जीवन में उन्नति की प्राप्ति होती है।
चांदी का दीपक चंद्रमा और शुक्र के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इन धातु के दीपक को जलाने से घर में धन-संपदा की कभी कमी नहीं होती और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
तांबे से बने दिए में मंगल का वास होता है। इसे जलाने से मनोबल में भी वृद्धि होती है। कहते है कि तांबे के दीपक में तिल का तेल डालकर जलाना चाहिए।
कांसे के धातु से दीपक में बुध ग्रह का वास माना जाता है। धन की स्थिरता और पर्याप्त धन के लिए कांसे के दीपक में तिल का तेल डालकर जलाया जाता है।
लोहा के धातु से निर्मित दीपक में शनि देव का वास होता है। शनिवार और मंगलवार के दिन लोहे के दीपक में सरसों का तेल डालकर उड़द की दाल का आसन चारों तरफ देकर दीपक जलाया जाता है।