Category: religious

  • इन राशियों में आरम्भ हुआ वक्री प्रभाव

    आध्यात्मिक:- आज मंगलवार के दिन शाम शवा 5 बजे वृषभ राशि से बुध की वक्री चाह आरम्भ हो गई है। बुध व्यापार और अर्थव्यवस्था के गुरु माने गए हैं यह व्यक्ति के जीवन मे धन की वर्षा करते हैं और सुख सम्रद्धि को बनाए रखते हैं। लेकिन अगर राशि मे बुध की वक्री चाल का प्रभाव रहता है तो व्यक्ति पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

    वही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज से तीन राशियों के ऊपर वक्री का प्रभाव पड़ने वाला है जो लोगो को काफी प्रभावित करेगा और इस राशि के जातकों को पूरा एक माह सम्भल कर चलना पड़ेगा। मिथुन, कन्या, और धनु ऐसी राशि है जिनपर बुध का वक्री प्रभाव पड़ेगा। 
    मिथुन:- अगर हम मिथुन राशि के जातकों की बात करें तो आज इनकी राशि मे वक्री का प्रवेश हुआ है। इसके प्रभाव से इस राशि के जातको की राशि मे बुध का प्रभाव उल्टा होगा और लोगों का खर्चा बढ़ सकता है। इस राशि के जातक अगर सचेत नहीं रहे तो उन्हें इस माह काफी खर्चा झेलना पड़ सकता है और उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
    कन्या:- इस राशि के जातकों के नौवें भाव मे वक्री का प्रभाव होगा। जिससे इन्हें इनकीं मेहनत के अनुरूप सफलता नहीं प्राप्त होगी। वही व्यापारिक वर्ग के लिए संकेत प्राप्त हो रहे हैं कि उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
    धनु:- इस राशि के जातकों की राशि मे वक्री का प्रभाव छठे भाव मे है। यह रोग दोष और दुश्मन का भाव माना जाता है। इसमें कोई भी जातक खुश नहीं रहता। इस राशि के जातको की राशि में बुध का प्रभाव बढ़ गया है जिससे इनका मन अशांत रहेगा।

  • वानप्रस्थी या सन्यास से नहीं है मोक्ष का कोई ताल्लुक बस साधना होगा एक चीज को

    आज के समय मे हर कोई यह जानने की अभिलाषा रखता है कि आखिर मोक्ष की व्यवस्था में एक गृहस्थ का भविष्य क्या है और क्या मोक्ष की प्राप्ति हेतु सन्यासी होना आवश्यक है। आज हम इस लेख में आपके इस सवाल का जवाब लेके आए हैं और हम आपको बताएंगे कि आप मोक्ष को कैसे पा सकते हैं।

    हमारे धार्मिक ग्रन्थ में कहा गया है कि यदि आप अपने मन को साध लेते हैं तो आप चाहे कोई भी जीवन व्यतीत करें आपको मोक्ष की प्राप्ति हो सकती हैं। कहा जाता है आप वानप्रस्थी हैं या संन्यासी, आपको मोक्ष मिल जाएगा। लेकिन वास्तव में यह सिर्फ एक मनोस्थिति है। क्योंकि यह आवश्यक नहीं की मोक्ष के लिए आप सन्यासी हो।

    अगर आप सोचते हैं कि मैं गृहस्थ हूं और वो संन्यासी है। वास्तव में यह एक विचार है जो आपका पीछा करता है। यदि आप गृहस्थ धर्म त्याग कर संन्यासी बन जाएं और जंगल में चले भी जाएं तो भी यदि आपने मन को नहीं साधा है तो यह जंगल में भी आपको गृहस्थ बनाए रखेगा।

    आपका मन आपके अहंकार का स्रोत है। वही तय करता है कि आप बाहर से भले कुछ हों, अंदर कैसे विचार रखेंगे! ऐसे में मनुष्य का प्रयत्न होना चाहिए कि वह मन को साध ले। कोई मनुष्य भले ही संसार का त्याग कर संन्यासी बन जाए, फिर भी यदि विचार नहीं बदला तो जंगल भी घर हो जाएगा, जबकि यदि विचार बदल गया तो घर में रहकर भी संन्यास की साधना की जा सकती है।

    वास्तव में सच्चाई यह है कि वातावरण के परिवर्तन से क्षणिक सहयोग मिल सकता है, लेकिन यदि आपके मन में चलने वाले विचार नहीं बदले, मन का अवरोध नहीं टूटा तो चाहें घर पर हों या जंगल में, कभी भी सच्ची साधना नहीं हो सकती।

  • अगर सपने में देखते है मरी हुई छिपकली तो जान लें इसका सच

    आध्यात्मिक:- स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपना मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग माना गया है। ऐसा माना जाता है कि मनुष्य जो कुछ भी सपने में देखता है वह भवष्य की धटनाओं की ओर इशारा करता है।

    साथ ही कुछ स्वप्न ऐसे होते हैं जो भविष्य में घटित होने वाले शुभ संकेतों को दर्शाते हैं। इसके अलावे कुछ सपने ऐसे होते हैं जो कि भविष्य में होने वाली अशुभ संकेतों की ओर इशारा करते हैं।
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी ऐसे सपनों को अत्यधिक महत्व दिया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसी मान्यता है कि सपने मनुष्य के जीवन में आने वाली घटनाओं को दर्शाने का दैवीय तरीका है।

    सपने में छिपकली मारते देखना :

    स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में छिपकली को मारते हुए देखना व्यक्ति की मानसिक स्थिति को दर्शाता है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि आपके जीवन में मानसिक रूप से संघर्ष चलता रहेगा। सपने में खुद से छिपकली मारते हुए देखना व्यक्ति इस बात की भी पूर्व सुचना देता है कि व्यक्ति के आतंरिक मन में किसी के प्रति संघर्ष चल रहा है।
    इसके आलावे यदि आप सपने में छिपकली को पकड़ते हुए देखते हैं तो यह शुभ संकेत है। ऐसा माना जाता है कि सपने यदि कोई व्यक्ति छिपकली पकड़ता है तो उसका यह अर्थ होता है कि व्यक्ति अपनी डर पर काबू पाने वाला है। इतना नहीं सपने में छिपकली पकड़ना इस बात का भी पूर्व संकेत देता है कि व्यक्ति को आने वाले समय में धन से संबंधित सभी समस्यों का शीघ्र ही समाधान होने वाला है।

  • सूर्य का जाप देगा नेत्र रोग से निजात

    सूर्य भगवान का मनन करते हुए किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष रविवार को सूर्योदय के आसपास आरम्भ करके रोज इस 5 स्तोत्र का पाठ करने से नेत्र रोग से निजात मिलता है। इसका आरम्भ करने से पहले सूर्य नारायण का ध्यान करके दाहिने हाथ में जल, अक्षत, लाल पुष्प लेकर विनियोग मंत्र पढ़िए, जो इस प्रकार है-
    विनियोग मंत्र :
    ॐ अस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बुधन्य ऋषिः गायत्री छन्दः सूर्यो देवता चक्षुरोगनिवृत्तये विनियोगः।
    अब इस चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र का पाठ आरम्भ करें –
    ॐ चक्षुः चक्षुः चक्षुः तेजः स्थिरो भव। मां पाहि पाहि।
    त्वरितम् चक्षुरोगान शमय शमय।
    मम जातरूपम् तेजो दर्शय दर्शय।
    यथाहम अन्धो न स्यां तथा कल्पय कल्पय।
    कल्याणम कुरु कुरु।
    यानि मम पूर्वजन्मोपार्जितानी चक्षुः प्रतिरोधकदुष्क्रतानि सर्वाणि निर्मूलय निर्मूलय।
    ॐ नमः चक्षुस्तेजोदात्रे दिव्याय भास्कराय। ॐ नमः कल्याणकरायामृताय। ॐ नमः सूर्याय।
    ॐ नमो भगवते सूर्यायाक्षितेजसे नमः।
    खेचराय नमः। महते नमः। रजसे नमः।
    तमसे नमः।
    असतो मां सदगमय।
    तमसो मां ज्योतिर्गमय।
    मृत्योर्मा अमृतं गमय।
    उष्णो भगवाञ्छुचिरूपः।
    हंसो भगवान शुचिरप्रतिरूपः।
    य इमां चक्षुष्मतिविद्यां ब्राह्मणो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति।
    न तस्य कुले अन्धो भवति। अष्टौ ब्राह्मणान ग्राहयित्वा विद्यासिद्धिर्भवति।
    हिंदी भावार्थ :
    विनियोग: ‘ॐ इस चाक्षुषी विद्या के ऋषि अहिर्बुध्न्य हैं, गायत्री छन्द है, सूर्यनारायण देवता हैं तथा नेत्ररोग शमन हेतु इसका जाप होता है।
    हे परमेश्वर, हे चक्षु के अभिमानी सूर्यदेव। आप मेरे चक्षुओं में चक्षु के तेजरूप से स्थिर हो जाएँ। मेरी रक्षा करें। रक्षा करें।
    मेरी आँखों का रोग समाप्त करें। समाप्त करें।
    मुझे आप अपना सुवर्णमयी तेज दिखलायें।
    जिससे में अँधा न होऊं। कृपया वैसे ही उपाय करें, उपाय करें।
    आप मेरा कल्याण करें, कल्याण करें।
    मेरे जितने भी पीछे जन्मों के पाप हैं जिनकी वजह से मुझे नेत्र रोग हुआ है उन पापों को जड़ से उखाड़ दे, दें।
    हे सच्चिदानन्दस्वरूप नेत्रों को तेज प्रदान करने वाले दिव्यस्वरूपी भगवान भास्कर आपको नमस्कार है।
    ॐ सूर्य भगवान को नमस्कार है।
    ॐ नेत्रों के प्रकाश भगवान सूर्यदेव आपको नमस्कार है।
    ॐ आकाशविहारी आपको नमस्कार है। परमश्रेष्ठ स्वरुप आपको नमस्कार है।
    ॐ रजोगुण रुपी भगवान सूर्यदेव आपको नमस्कार है। तमोगुण के आश्रयभूत भगवान सूर्यदेव आपको नमस्कार है।
    हे भगवान आप मुझे असत से सत की और जाईये। अन्धकार से प्रकाश की और ले जाइये।
    मृत्यु से अमृत की और ले चलिये। हे सूर्यदेव आप उष्णस्वरूप हैं, शुचिरूप हैं। हंसस्वरूप भगवान सूर्य, शुचि तथा अप्रतिरूप रूप हैं। उनके तेजोमयी स्वरुप की समानता करने वाला कोई भी नहीं है।
    जो इस चक्षुष्मतिविद्या का नित्य पाठ करता है उसे कभी नेत्र सम्बन्धी रोग नहीं होता. उसके कुल में कोई अँधा नहीं होता.
    यह चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र इतना अधिक प्रभावकारी है कि यदि आपको आँखों से सम्बंधित कोई बीमारी है तो आपको बस यह करना है कि एक ताम्बे के लोटे में जल भरकर, पूजा स्थान में रखकर उसके सामने नियमित इस स्तोत्र का 21 बार पाठ करना है, फिर उस जल से दिन में 3-4 बार आँखों को छींटे मारना है. कुछ ही दिनों में आँखों से सम्बंधित सारे रोगों से आपको मुक्ति मिल जाएगी।

  • रानी अहिल्या ने इस कारण से दिया था वाराणसी के महादेव मंदिर को श्राप

    डेस्क। दुनिया में कई इमारतें ऐसी हैं जो अपनी नक्काशी से आपको अचंभे में डाल दें। पर भारत की कई इमारतें वास्तुकला और अपने अनोखेपन के लिए जानी जाती है। कई भरतीय इमारतों से जुड़ी लोक कथाएं भी आज विश्व प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको भारत में स्थित एक ऐसा मंदिर (रत्नेश्वर महादेव, वाराणसी) की कहानी बताने जा रहें है जो अपनी वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इस मंदिर को भारत में उतनी प्रसिद्ध नहीं मिली है पर दुनिया में यह मंदिर बहुत ही विख्याती पा रहा है।

    इस मंदिर की हैरान करने वाली बात यह है कि सैकड़ों वषों से गंगा किनारे पर स्थित यह मंदिर एक तरफ 9 डिग्री तक झुका हुआ है। बता दें कि यह मंदिर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर बना हुआ है। 

    इस मंदिर का नाम रत्नेश्वर महादेव है। इस मंदिर का एक तरफ का झुका होना ही लोगों को बहुत आकर्षित करता है। कई धार्मिक लोग इसे पीसा की झुकी मीनार से भी बेहतर बताते हुए दुनिया के अजूबो में गिनते हैं।

    सैकड़ों वर्षों से इस मंदिर के एक तरफ झुके होने का दावा किया जाता है। 

    कुछ लोग इस मंदिर की वास्तुकला को भगवान शंकर का चमत्कार बताते हैं। आपको बता दें कि वाराणसी के गंगा घाटो पर जहां एक तरफ सभी मंदिर ऊपर की ओर बने हैं वहीं दूसरी तरफ मणिकर्णिका घाट के नीचे इस मंदिर का निर्माण किया गया था। 

    हैरान करने वाली बात यह है कि गंगा नदी के किनारे पर स्थित यह मंदिर हर साल छह महीने से ज्यादा पानी में डूबा हुआ रहता है। मंदिर में सिर्फ दो-तीन महीने ही पूजा की जाती है। 

    मंदिर के टेढ़ेपन के पीछे क्या है कारण

    भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना ​​है कि किसी ने अपनी मां के कर्ज से मुक्ति पाने के लिए रत्नेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया था। पर वह टेढ़ेपन के कारण अपनी मां के कर्ज से मुक्ति नहीं पा सके। तो कुछ लोगों का मानना है कि रानी अहिल्याबाई होल्कर की दासी रत्ना बाई ने काशी में मणिकर्णिका घाट के सामने भगवान शंकर का मंदिर बनाने की इच्छा रखी। इसके लिए नौकरानी ने अहिल्या बाई होल्कर से कुछ पैसे उधार मांगे। इस मंदिर को देखकर अहिल्या बाई होल्कर बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने नौकरानी से कहा कि वो इस मंदिर को अपना नाम ना दें। पर नौकरानी ने अहिल्या की एक न सुनीं। इस कथा के अनुसार उस नौकरानी ने अपने नाम पर मंदिर का नाम ‘रत्नेश्वर महादेव मंदिर’ रखा। इससे क्रोधित होकर अहिल्या बाई होल्कर ने श्राप दिया कि इस मंदिर में बहुत कम ही पूजा हो सकेगी। लोग बताते है की रानी के इस श्राप के कारण ही यह मंदिर ज्यादातर समय तक पानी में डूबा हुआ रहता है।

  • हिंदू धर्म से जुड़ी इन बातों को जानना हिन्दू के लिए है अत्यधिक आवश्यक

    आध्यात्मिक:- धर्म एक ऐसा शब्द है जो लोगो के जीवन का आधार होता है और उन्हें जीवन जीने का सुचारू तरीका सिखाता है। यह वैसे तो स्वतंत्रता का प्रतीक है लेकिन इसके कुछ नियम है जो व्यक्ति को सही और गलत का बोध कराते हैं वही जब बात हिन्दू धर्म की हो तो यह वास्तव ने अपने भीतर बहुत कुछ समेटे हुए हैं और जो भी व्यक्ति हिन्दू धर्म का व्यवस्थित तरीके से अनुसरण करता है उसे जीवन मे कष्टों को नहीं सहना पड़ता और वह स्वयं को सत्य से जोड़कर संस्कृति के अनुरूप ढलता है और उसका अनुसरण कर इस संसार मे सुख भोगता है। 

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    हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसकी अपनी एक आस्था पर महत्व है इसे शांति का प्रतीक माना जाता है और यह विकृतियों को दूर करने वाला धर्म है। वही हिन्दू धर्म से जुड़ी कुछ ऐसी बाते है जिन्हें शायद ही कोई जनता हो और समझता हो क्योंकि यह इतना विस्तृत स्वरूप धारण किये हुए हैं कि इसे समझना हर किसी के वश की बात नहीं है लेकिन धर्म शास्त्र कहते हैं कि यदि आप इसे थोड़ा सा भी समझ लेते हैं तो यह आपके जीवन से नकारात्मकता को नष्ट कर देता है और आपको सुख की अनुभूति होती है। 

    तो आइए जानते हैं हिन्दू धर्म से जुड़ी कुछ ऐसी बाते जिसे जानना हर हिन्दू का धर्म…….

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    क्यों 108 रुद्राक्ष की माला से करते हैं हिन्दू ध्यान:-

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    हिन्दू धर्म मे रुद्राक्ष के जाप का अधिक महत्व है रुद्राक्ष के 108 मोतियों का हिन्दू धर्म मे जाप किया जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों हिन्दू धर्म मे सिर्फ 108 रुद्राक्ष की माला वाले मोतियों का जाप होता है। असल मे हिन्दू धर्म मे 108 संख्या बेहद शुभ मानी जाती है। अर्थशास्त्र में कहा गया है कि मनुष्य को विकृतियों से बचाने और उसे सकारात्मक मार्ग पर ले जाने में 108 रुद्राक्ष माला के साथ जाप की महत्वपूर्ण भूमिका है। वही अगर हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझे तो इसे शुभ इसलिए भी माना जाता है क्योंकि 108 संख्या सूर्य और चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी का अनुपात है।

    सबसे बड़ा धर्म:- 

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    वैसे तो हमने सुना है कि हिन्दू धर्म सबसे बड़ा और सबसे पुराना धर्म है। इसमे कोई शक नहीं की हिन्दू धर्म सबसे पुराना धर्म है। लेकिन अगर हम पूरे विश्व स्तर से देखे तो हिन्दू धर्म तीसरा सबसे बड़ा धर्म है जिसके अनुयायी पूरी दुनिया मे है। पहले और दूसरे स्थान पर ईसाई और इस्लाम धर्म के अनुयायी है। वही अगर हम भारत की बात करें तो यह हिंदुओ का गढ़ कहा जाता है पूरी दुनिया के 90 फीसदी लोग जो हिन्दू धर्म का अनुसरण करते हैं और उसके आधार पर अपने जीवन को काटते हैं वह यही रहते हैं। इसके अलावा अगर हम 10 फीसदी हिंदुओं की बात करें तो वह पूरी दुनिया मे फैले हुए हैं। बता दें भारत मे हिन्दू धर्म को मस्तक पर धारण किया जाता है और इसके सम्मान के लिए भारत वासी हर तरह से खड़े रहते हैं।

    हिन्दू धर्म के लोगो का है चक्रीय अवधारणा में अटूट विश्वास:-

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    हिन्दू धर्म चक्रीय अवधारणा में विश्वास करता है यह विज्ञान की खाद्य श्रृंखला की तरह ही काम करता है जैसे खाद्य श्रृंखला में जीवन जीने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की एक दूसरे पर निर्भरता दिखाई गई है। ठीक उसी प्रकार हिन्दू धर्म मे चार युगों का वर्णन है जो कि धर्म और कर्म के आधार पर विभाजित है इस चक्रीय श्रृंखला में सत्य-युग, त्रेता-युग, द्वापर-युग और कलियुग शामिल। कहा जाता है कलयुग अंतिम युग है जब कलयुग का अंत होगा तो सम्पूर्ण संसार जलमग्न हो जाएगा और पुनः धर्म युग की स्थापना की जाएगी। हिन्दू धर्म मे ईश्वर को समय की तरह बताया गया है और कहा गया है कि यह एक ऐसी अनुभूति है जो कभी नहीं मरती। 

    कोई नहीं है संस्थापक:-

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    अगर हम भारत के सबसे बड़े और दुनिया के तीसरे सबसे बड़े धर्म हिन्दू धर्म की बात करें तो इसका कोई संस्थापक नहीं है। यह एक ऐसा धर्म है जो तब से है जब से मनुष्य है। बाकी हम किसी भी धर्म की बात करें उसकी स्थापना किसी व्यक्ति विशेष ने की है। लेकिन हिन्दू धर्म मे ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दुनिया के प्रमुख धर्म जिनकी चर्चा खूब होती है जैसे ईसाई धर्म के लिए यीशु, इस्लाम के लिए मुहम्मद या बौद्ध धर्म के लिए बुद्ध जाने जाते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म के लिए कहा जाता है कि इसका कोई संस्थापक नहीं यह एक ऐसा धर्म है जिसे सन्तो ने मिलकर जीवन जीने का सही तरीका सिखाने के लिए बनाया था जो अब पूरी दुनिया को विज्ञान और धार्मिक ज्ञान से जोड़ रहा है।

    चार मंत्रों का जाप हिन्दू धर्म का मूल:-

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    जो भी व्यक्ति हिन्दू धर्म को मानता है वह अपना जीवन महज चार मूल मंत्रों के इर्द गिर्द गुजारता है। हिन्दू धर्म का अनुसरण करने वाले व्यक्ति धर्म (धार्मिकता), अर्थ (धन का साधन), काम (सही इच्छा) और मोक्ष को अपना लक्ष्य मानते हैं और उन्हीं के आधार पर अपना जीवन यापन करते हैं।

  • वर्षभ और मिथुन राशि मे बना है धन योग जाने अपनी राशि का हाल

    मेष

    भूमि से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण फैसला आपके द्वारा लिया जाएगा खर्चों की अधिकता के कारण आज आप परेशान हो सकते हैं.

    वृषभ

    आज आप अपनी बातों को घुमा फिरा कर कहने से बचे यदि आज आप स्पष्ट रूप से अपनी बातों को लोगों के सामने रखते हैं तो आपकी समस्या का हल शीघ्र ही मिल जाएगा और उसका अंत होगा

    मिथुन

    संतान के द्वारा कुछ सराहनीय कार्य किया जाएगा जिससे आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी जीवनसाथी का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा और उनके साथ भविष्य से संबंधित किसी विशेष मुद्दों पर बातचीत होगी.

    कर्क

    व्यापारिक गतिविधियों में सतर्कता बहुत ही आवश्यक है व्यापार के क्षेत्र में वाद-विवाद करने से बचें आज के दिन किया गया विवाद आप के लिए समस्या का कारण बन सकता है.

    सिंह

    जॉब के नए ऑफर प्राप्त होंगे कार्य क्षेत्र से जुड़ी हुई यात्राओं के लिए तैयार रहें आज के दिन की हुई यात्राओं से आपको लाभ प्राप्त होगा जिससे आपको सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे

    कन्या

    गोचर में समय आपके अनुकूल है किसी शुभ समाचार के साथ दिन की शुरुआत होगी आय और व्यय में संतुलन बनाकर रखें अन्यथा आय से अधिक खर्च के कारण आप परेशान हो सकते हैं हो सकते हैं.

     तुला

    समय आपके अनुकूल है उत्साह से भरपूर रहेंगे व्यापारिक गतिविधियों में सुधार होगा प्रेम संबंधों में सफलता प्राप्त हो सकती है आज आपका अधिक समय घर पर व्यतीत हो सकता है .

    वृश्चिक

    आज आपका अधिक समय घर पर ही व्यतीत होगा घर पर किसी चीज की खरीदारी हो सकती है मित्रों अथवा परिजनों से मुलाकात होगी और उनके साथ समय व्यतीत होगा.

    धनु

    आज का दिन आपके लिए कुछ कठिनाइयां और चुनौतियां को लेकर आएगा किंतु परिजनों के सहयोग से आप हर प्रकार के हालातों से निकलने में सफल रहेंगे घर से बाहर जाने में सावधानी बरतें यदि आवश्यकता ना हो तो घर से बाहर जाने से परहेज करें.

    मकर

    आज का समय आपके लिए मध्यम फलकारी है आपकी जमा पूंजी से धन खर्च होगा बच्चों की जिद और व्यर्थ के खर्च के कारण आप परेशान हो सकते हैं.

    कुंभ

    अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें ऐसी बातों को कहने से बचें जिससे लोगो को आघात पहुंचे नौकरी में पदोन्नति की संभावना है आर्थिक गतिविधियों में आज का दिन आपके लिए बेहतर परिणाम लेकर आने वाला है.

    मीन

    आज आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है अतः स्वयं का ध्यान रखें रुका हुआ धन मिलने के योग हैं हैं प्रेम संबंधों में समय अनुकूल रहेगा.

  • योगिनी तंत्र साधना में नहीं बर्ती सावधानी तो जा सकती है जान

    डेस्क। अगर आप देवी पूजा में विश्वास रखते हैं तो आपने मां कालिका के अष्ट या चौंसठ योगिनी रूपों के बारे में अवश्य सुना होगा। कई लोग इन योगिनियों से परिचित भी होंगे। योगिनियो को ही तंत्र विद्या की देवी भी कहां जाता है। हर योगिनी किसी विशेष शक्ति की प्रतिमूर्ति होती है। वैसे तो योगिनियों को किसी भी रूप में पाया जा सकता है पर अगर कोई व्यक्ति इनको पत्नी रूप में पाने की कोशिश करता है तो उसका अनिष्ट होना निश्चित है। तंत्र विद्याओं में योगिनी साधना को ही सबसे कठिन साधना माना जाता है। इसको सफलता पूर्वक करने वाला मनुष्य कुछ भी पा सकता। लेकिन इस साधना को अगर हल्की सी भी त्रुटि के साथ किया जाए तो योगिनी बिना आपकी जान लिए वापस नहीं जातीं।

    क्यों सबसे कठिन होती है ये साधना

    योगिनी साधना अप्सरा साधना या अन्य देवी-देवताओं की साधना से काफी भिन्य है।। क्योंकि यहां आप किसी एक देवी की नहीं स्वम् महा शक्ति का आवाहन कर रहे होते हैं।  सभी योगिनियां आदिशक्ति मां काली का अवतार है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने ये अवतार लिए थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। 

    इन चौंसठ देवियों में, दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती है। इनको शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश कहा जता हैं। 

    कुछ साधकों की माने तो समस्त योगिनियों का संबंध मुख्यतः काली कुल से ही हैं और ये सभी तंत्र तथा योग विद्या से घनिष्ठ सम्बन्ध रखती हैं। 

    इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, स्तंभन इत्यादि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा सफल होते है। प्रमुख रूप से आठ योगिनियां हैं जिनको:- 1.सुर-सुंदरी योगिनी, 2.मनोहरा योगिनी, 3. कनकवती योगिनी, 4.कामेश्वरी योगिनी, 5. रति सुंदरी योगिनी, 6. पद्मिनी योगिनी, 7. नतिनी योगिनी और 8. मधुमती योगिनी के नाम से जाना जाता है।

    जानिए चौंसठ योगिनियों के नाम

    1.बहुरूप, 

    2.तारा, 

    3.नर्मदा, 

    4.यमुना, 

    5.शांति, 

    6.वारुणी 

    7.क्षेमंकरी, 

    8.ऐन्द्री, 

    9.वाराही, 

    10.रणवीरा, 

    11.वानर-मुखी, 

    12.वैष्णवी, 

    13.कालरात्रि, 

    14.वैद्यरूपा, 

    15.चर्चिका, 

    16.बेतली, 

    17.छिन्नमस्तिका, 

    18.वृषवाहन, 

    19.ज्वाला कामिनी, 

    20.घटवार, 

    21.कराकाली, 

    22.सरस्वती, 

    23.बिरूपा, 

    24.कौवेरी, 

    25.भलुका, 

    26.नारसिंही, 

    27.बिरजा, 

    28.विकतांना, 

    29.महालक्ष्मी, 

    30.कौमारी, 

    31.महामाया, 

    32.रति, 

    33.करकरी, 

    34.सर्पश्या, 

    35.यक्षिणी, 

    36.विनायकी, 

    37.विंध्यवासिनी, 

    38. वीर कुमारी, 

    39. माहेश्वरी, 

    40.अम्बिका, 

    41.कामिनी, 

    42.घटाबरी, 

    43.स्तुती, 

    44.काली, 

    45.उमा, 

    46.नारायणी, 

    47.समुद्र, 

    48.ब्रह्मिनी, 

    49.ज्वाला मुखी, 

    50.आग्नेयी, 

    51.अदिति, 

    51.चन्द्रकान्ति, 

    53.वायुवेगा, 

    54.चामुण्डा, 

    55.मूरति, 

    56.गंगा, 

    57.धूमावती, 

    58.गांधार, 

    59.सर्व मंगला, 

    60.अजिता, 

    61.सूर्यपुत्री 

    62.वायु वीणा, 

    63.अघोर और 

    64. भद्रकाली।

    मान्यताओं के अनुसार इनकी साधना अत्यंत ही गोपनीय रखी जाती है। विधिवत संपूर्ण माह साधना करने के बाद प्रसन्न होने पर प्रतिदिन साधक को स्वर्ण मुद्राएं प्रदान करती हैं। इनकी साधना बहुत ही कठिन होती है। साधना के दौरान कई तरह की सावधानी भी रखनी होगी है। नदी स्नान कर चंदन का मंडल बनाकर मध्य में देवी का मंत्र लिखकर ध्यान मंत्र जपा करें। याद रहे कि देवी आपकी परीक्षा लेने के लिए कुछ भी कर सकतीं हैं। इसलिए साधना में सावधानी जरूर बरतें।

  • भगवत गीता में खट्टे, नमकीन, गरम, चटपटे, शुष्क भोजन करने वालो के लिए इन शब्दों का उल्लेख है

    Bhagwat Geeta:- आज के समय मे भोजन तो हर कोई करता है लेकिन आजकल की भीड़ भाड़ और जल्दबाजी की दुनिया मे सभी के भोजन करने के नियम खूब बदल गए हैं अब कोई भी सुचारू तरीके से भोजन नहीं करता है और न भोजन करने के विशेष नियमो को जानता है। वास्तव में भोजन हमेशा शास्त्रों में दिए गए नियमो के मुताबिक करना चाहिए और अगर आप इस प्रकार से भोजन नहीं करते हैं तो आपको उससे कई प्रकार की हानि होती। हिंदुओ के सर्वश्रेष्ठ धार्मिक ग्रन्थ भगवत गीता में भोजन करने के विशेष नियम बताए गए हैं। 

    भगवत गीता के 13 वें अध्याय के 8 , 9 व 10 वें श्लोक में भोजन करने के विशेष नियमो का उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि एक व्यक्ति को भोजन करते वक़्त इन सभी नियमों की विधि को ध्यान में रखना चाहिए और उसी के आधार पर भोजन करना चाहिए जब आप ऐसा करते हैं तो यह आपके जीवन को एक दिशा देता है और आपका शरीर स्वस्थ रहता है।

    भोजन को लेकर गीता के दिए गए श्लोक:-

    आयुः,सत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः।

    रस्याः स्निग्धाःस्थिरा हृद्याआहाराः सात्त्विकप्रियाः।।8।।

    इस श्लोक में बताया गया है जो भोजन सात्त्विक व्यक्तियों को प्रिय होता है, वह आयु बढ़ाने वाला, जीवन को शुद्ध करने वाला तथा बल स्वास्थ्य,सुख तथा तृप्ति प्रदान करने वाला होता है। ऐसा भोजन रसमय,स्निग्ध,स्वास्थ्यप्रद तथा हृदय को भाने वाला होता है।

    कट्वम्लवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः।

    आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः।। 9।।

    इस श्लोक के मुताबिक अत्यधिक तिक्त, खट्टे, नमकीन, गरम, चटपटे, शुष्क तथा जलन उत्पन्न करने वाले भोजन रजो गुणी व्यक्तियों को प्रिय होते हैं। ऐसे भोजन दुःख, शोक तथा रोग उत्पन्न करने वाले हैं।

    यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत्।

    उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम्।। 10।।

    इस श्लोक के अनुसार खाने से तीन घण्टे पूर्व पकाया गया, स्वादहीन, वियोजित एवं सड़ा, जूठा तथा अस्पृस्य वस्तुओं से युक्त भोजन उन लोगों को प्रिय होता है, जो तामसी होते हैं।

  • रहस्मयी खुलासा , कैलाश पर है शिव:- वैज्ञानिक

    आध्यात्मिक:- ऋषि मुनियों से लेकर देवी देवताओं की जन्म भूमि भारत अपने भीतर कई रहस्यों को छुपाए हुए है। कहा जाता है यदि इस सम्पूर्ण विश्व मे कही धर्म है तो वह सिर्फ भारत में है भारत धर्म को अपना मूल मानता है और इसी के नियमो से बंधा हुआ है। लेकिन आज के समय मे भारत मे कई ऐसे लोग हैं जो धर्म के नाम पर लोगो को भ्रमित कर रहे हैं और उन्हें वास्तविक इतिहास से दूर कर भ्रामक इतिहास से जोड़ रहे हैं। 

    लेकिन भारत मे कुछ मंदिर ऐसे हैं जिनका इतिहास कोई नहीं जानता लेकिन वह धर्म की स्थापना करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उन मंदिरों का इतिहास ऐसा है कि वह भारत को परिभाषित करते हैं और इसे स्वर्ग से जोड़ते हैं।
    इन्ही रहस्मयी मन्दिरों में एक नाम है कैलाश का। कैलाश पर्वत जो की नीलकंठ शिव का सबसे प्रिय स्थान था और शिव अपनी अर्धांगिनी के साथ यही रहते थे। यह दुनिया का सबसे बड़ा पर्वत माना जाता है। धर्मशास्त्र के मुताबिक यह अप्राकृतिक शक्तियों का केंद्र है यहां सिर्फ वही आत्माएं निवास कर सकती है जिनका मन साफ हो और वह किसी के विषय मे गलत विचार न रखती हों।
    कैलाश पर्वत के संदर्भ में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पिरामिड नुमा आकृति का है इसे विश्व का केंद्र कहा जा सकता है। यह एक्सिस मुंडी है जिसका अर्थ होता है नाभी। कैलाश पर्वत आकाश और पाताल का मध्यस्थ बिंदु है जहां 10 दिशाएं मिलती है। कहा जाता है एक्सिस मुंडी पर अलौकिक शक्तियों का प्रवाह होता है और इनसे सकारात्मक ऊर्जा निकलती है। 
    कैलाश पर्वत के आसपास आज भी तपस्वियों का तप है यह आज भी लोगो का मार्गदर्शन करते हैं और यहां जो भी जाता है वह सुकून की अनुभूति करता है। वैज्ञानिकों का कहना है की रात के समय कैलाश पर्वत से डमरू की ध्वनि निकलती है जो शिव के होने का साक्ष्य है वही आज तक इस पर्वत पर कोई गलत उद्देश्य से नहीं जा पाया है यहां जो भी गया है वह किसी सकारात्मक उद्देश्य के साथ गया है।