Category: religious

  • सती के एक पिंड में इतनी शक्ति है पर इस मंदिर में तो माता के पूरे 51 शक्तिपीठों का अंश मौजूद हैं

    डेस्क। आपने माता के शक्ति पीठो की अलग-अलग कहानियां सुनी होगी और उनसे जुड़ी महिमा का भी बखान सुना ही होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में एक ऐसी जगह भी है जहां पर यह शक्तिपीठ पूरे होते हैं यानी विश्व में एक ऐसी जगह है जहां पर इन सभी शक्तिपीठों का अंश एक साथ देखने को मिलता है। 

    किसने किया था इस मंदिर का निर्माण

    मंदिर की वर्तमान अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने हमें बताया कि 1998 में उनके पिता स्वर्गीय रघुराज दीक्षित जी ने इस मंदिर का शिलान्यास किया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने अपने बेटे की स्मृति में इस मंदिर को बनवाया था। जब रघुराज दीक्षित जी अपने बेटे की अस्थियां लेकर हरिद्वार उन्हें विसर्जित करने गए तो उन्होंने मां से कहा कि आपने मेरा जीवन निराधार कर दिया है…अब मुझे भी नहीं जीना मुझे भी अपनी शरण में ले लो। जिसके बाद उन्हें किसी दैवीय शक्ति ने संकेत दिया कि अभी उनका जीवन ख़त्म नहीं हुआ। अभी उन्हें माता का एक बहुत ही विशेष कार्य पूरा करना है। उनको संकेत दिया गया कि उन्हें माता के 51 शक्तिपीठों में जाकर वहां से पवित्र मिट्टी लाकर एक जगह पर स्थापित करना है।

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    मंदिर अध्यक्ष तृप्ति तिवारी के साथ जनसंदेश रिपोर्टर प्रियांशी सिंह

     

    यह संकेत मिलते ही स्वर्गीय रघुराज दीक्षित जी ने अपनी गृह संपत्ति सब कुछ बेचकर माता के मंदिर के लिए जमीन खरीदी और 51 शक्तिपीठों पर जाकर वहां की पवित्र मिट्टी लेकर आए। तृप्ति तिवारी जी आगे बताती है कि इस मंदिर के शिलान्यास करते ही उन्हें कुछ करना ही नहीं पड़ा बस माता की कृपा होती गई और मंदिर की भव्यता एवं प्रसिद्धि कब बढ़ गई पता ही नहीं चला।

    इस मंदिर में क्या है खास

    सर्वप्रथम इस मंदिर में माता के 51 शक्ति पीठो का अंश मौजूद है साथ ही इस मंदिर में दुनिया का दूसरा स्फटिक का शिवलिंग और माता सती के दसों तांत्रिक विद्या रूप भी विराजमान है। 

    क्या है माता के शक्तिपीठों की कहानी

    51 शक्ति पीठ बनने के पीछे की जो पौराणिक कथा है उसके अनुसार महादेव की पहली पत्नी सती के पिता दक्ष प्रजापति ने कनखल (वर्तमान में हरिद्वार के नाम से जाना जाता) में ‘बृहस्पति सर्व’ नाम का एक महा यज्ञ करवाया। इस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया था। पितु मोह में पड़कर भगवान शिव की पत्नी जो कि दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं वह बिना आमंत्रित और महादेव के रोकने के बावजूद चली गईं। 
    यज्ञ-स्थल पर पहुँचकर सती ने अपने पिता से उनके दामाद और देव आदि देव महादेव को आमंत्रित न करने की वजह पूछी इस पर दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव को अपशब्द कहे। जिसपर क्रोधित होकर माता सती ने स्व तेज से स्वयं के शरीर को भस्म कर दिया।
    भगवान शिव को जैसे ही इसका अभास हुआ तो क्रोध की वजह से उनका तीसरा नेत्र खुल गया और तांडव करने लगे। भगवन शिव ने यज्ञ-स्थल पर पहुंच कर यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाला और कंधे पर उठा लिया। 
    तब चारो ओर हाहाकार मच गया था सभी जीव जंतुओं नदियों पहाड़ और धरती पर विचरण करने वाले अन्य जीवों का विनाश होने लगा। ऐसा लगा था कि मानो पृथ्वी का अंत हो जाएगा। महादेव को देखकर सभी देव गण घबराकर भगवान विष्णु के पास गए तब विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल करके माता के शरीर को खंडित कर दिया उनका कहना था कि जब तक माता का शरीर भगवान शिव के पास रहेगा उनका क्रोध शांत नहीं होगा। उसके बाद माता का शरीर अलग-अलग स्थानों पर गिरा और हर अंग से माता के एक नए रूप का जन्म हुआ जो आज 51 शक्तिपीठो के नाम से जाना जाता है।

    माता सती की हर पिंडी में अपार शक्ति है। और इस मंदिर (51 शक्तिपीठ मंदिर) में जहां माता के सभी रूप एकसाथ मौजूद है यहां एक विशेष तेज एवं ऊर्जा की अनुभूति होती है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है। कहते हैं जो भी भक्त यहां आता है माता कभी उन्हें खाली हाथ नहीं भेजतीं।

  • यदि आप भी हैं हिन्दू तो जान ले हिन्दू का एक होना क्यों है आवश्यक

    इतिहास l जब हम हिन्दू धर्म की बात करते हैं तो हमारे मन मे इसको लेकर कई सवाल उत्पन्न होते हैं। लोग हिन्दू धर्म को लेकर अपनी अलग अलग प्रकार की परिभाषा देते हैं। वही यदि हम इतिहास की बात करें तो हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जो सबसे पुराना धर्म है जिसे वैदिक धर्म के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा धर्म है जो एकता अखण्डता और समरूपता का प्रतीक है। इस धर्म की कोई जाति नहीं थी। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया लोगों ने इस धर्म की दुर्गति करना आरंभ कर दिया और हिन्दू धर्म जातियों और उपजातियों में विभक्त हो गया। कुछ राजनीतिक व्यक्तियों ने अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु हिंदुओ की एकता को तोड़ने हेतु उसे इस जातियों में विभक्त किया और उनके मध्य मतभेद पैदा कर दिया।

     

    जाने आज हिन्दू क्यों हो रहा है अलग:-

    सबसे पुराना धर्म हिन्दू धर्म जो की एकता अखण्डता और समरूपता का प्रतीक है। कई लोग आज उसको तहस नहस करने में लगे हुए हैं। आज उस धर्म को कई भागों में विभक्त कर दिया गया है। लोगों ने एकता को जातियों के नाम पर बांट दिया है और अपनी स्वार्थ सिद्ध के लिए वह वेद के ज्ञान को भ्रामक बता रहे हैं और सनातन से ऊपर जातीय धर्म को रख रहे हैं। कई लोग हिन्दू धर्म के संस्थापक को लेकर भी हिंदुओं के बीच मतभेद पैदा करने की योजना बनाते हैं। हिन्दू धर्म वह धर्म है जिसका कोई संस्थापक नहीं है क्योंकि इसकी स्थापना स्वयं ब्रह्मा विष्णु और महेश में की है।

    ब्रह्म पुराण में लिखा है कि जब इस सृष्टि का निर्माण हुआ था उससे कई वर्ष पूर्व ही हिन्दू धर्म की स्थापना की गई थी। विष्णु से ब्रह्मा, ब्रह्मा से 11 रुद्र, 11 प्रजापतियों और स्वायंभुव मनु के माध्यम से इस धर्म की स्थापना हुई। इस धर्म की स्थापना के बाद सृष्टि का निर्माण हुआ क्योंकि यह धर्म एकता का प्रतीक था जो लोगो को एकजुट होकर रहना सिखाता था। लेकिन व्यापार के ठेकेदारो ने अपनी स्वार्थ सिद्धि हेतु इसपर सवाल खड़े किए और हिन्दू को जातियों में विभक्त किया जातियों को राजनीति स्वार्थ के लिए उपयोग कर यह सभी हिंदुओं को अलग थलग करने में कामयाब हुए और आज हिन्दू जातिय धर्म की बेड़ियों में जकड़ गया है।

     

    अब हिन्दू को क्यों देना चाहिए एकता का परिचय:-

    पूरे विश्व का 90 फीसदी हिन्दू भारत मे निवास करता है भारत हिन्दू बाहुल्य देश है। लेकिन विश्व तक इस बात का प्रचलन है की भारत मे जो हिन्दू है उसमें एकता की कमी है उन्हें तोड़ना आसान है। क्योंकि भारतीय हिन्दू सनातन या धर्म से नहीं अपितु एक नए धर्म जातिय धर्म की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है। जो एकता का नहीं अपितु संघर्ष का प्रतीक है। वही भारत में हिंदुओं के बीच पड़ी इस फुट का फायदा कई बार भारत के दुश्मन देशो को भी प्राप्त होता है।

    उदाहरण के तौर पर यदि हम पाकिस्तान का जिक्र करें तो पाकिस्तान जो की मुस्लिम बाहुल्य देश है। लेकिन उसमें मुस्लिमों के मध्य एकता है। यदि पाकिस्तान पर कोई संकट आता है तो सभी मुस्लिम बिना किसी द्वेष के एकजुट होकर उस समस्या से लड़ने के लिए खड़े हो जाते है।

    वही जब हम भारत की बात करे  तो यह हिन्दू बाहुल्य देश होकर एक ही देवी देवताओं की पूजा करके, एक ही धार्मिक ग्रन्थ पढ़कर अपने धर्म का विरोध महज इस लिए करता है क्योंकि वह जातिय धर्म की बेड़ियों में विभक्त है। यहां यदि ब्राह्मण पर कोई आंच आती है तो उसके लिए संघर्ष करने हेतु हिन्दू नहीं बल्कि जातिय हिन्दू आगे आता है और अपने जातिय धर्म का रक्षण करता है। वही यदि दलित पर आक्रमण होता है तो उसकी रक्षा उसकी जाति का हिन्दू करता है न कि उनके समर्थन के लिए सम्पूर्ण हिन्दू खड़ा होता है।

    इसलिए यदि हम आज के परिदृश्य की बात करे तो आज हिन्दू का एकजुट होना सुरक्षा के संदर्भ से भी अत्यधिक आवश्यक है। पूरे विश्व मे हम देख रहे हैं लोग कोई मौका नहीं छोड़ते दूसरे देश पर आक्रमण करने का। अभी हाल ही में युक्रेन और रूस के मध्य जारी युद्ध इसका उदाहरण है कि भारत मे हिंदुओं का एकजुट होना क्यों आवश्यक है। क्योंकि भारत हिन्दू बाहुल्य देश है वही यदि भारत का हिन्दू एकजुट हो गया तो किसी भी दुश्मन गद्दार की हिम्मत नहीं होगी की वह भारत की ओर आंख उठाकर देखे और भारत की एकता पर सवाल उठाए। क्योंकि जब लकड़ियों का गठ्ठर एकजुट होता है तो उसे कोई नहीं तोड़ सकता वही जब वह अलग अलग होता है तो उसे तोड़ना सरल होता है।

    इसलिए हिन्दू जब जातिय धर्म को त्याग कर सनातन संस्कृति परंपरा को स्वीकार कर पुनः हिन्दू धर्म मे एकता आखण्डता और समरूपता का परिचय देगा। तो सम्पूर्ण विश्व मे भारत सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में खड़ा होगा और हर और भारत की संस्कृति का ध्वज लहराएगा। भारत मे जातिय समीकरण का नाश होगा और पुनः भारत भगवामय होगा।

  • हनुमान जी की पूजा में कभी न करना यह गलती , नहीं तो झेलना पड़ेगा बड़ा संकट

    आध्यात्मिक| चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हर वर्ष हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस साल हनुमान जयंती आज यानी 16 अप्रैल को मनाई जा रही है। हनुमान जयंती की पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है आज के जो भी विधि विधान से हनुमान जी की पूजा अर्चना करता है उसके समस्त संकट नष्ट हो जाते हैं। वह रोग दोष से मुक्ति पता है और उसके ऊपर धन की असीम वर्षा होती है।

    धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक हनुमान जी अत्यंत सरल स्वभाव के है। इन्हें जितनी जल्दी गुस्सा आता है यह उतनी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। वही जो लोग सच्चे मन से इनकी पूजा करते हैं उनपर इनकी कृपा बनी रहती है और यह उनके सभी व्याधि को हर लेते हैं। लेकिन कई बार इनकी पूजा में हुई छोटी छोटी गलती इन्हें नाराज कर देती है और फिर इनका प्रकोप झेलना पड़ता है। 
    तो आज हम हनुमान जयंती के दिन आपको बताने जा रहे हैं किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए हनुमान जी की पूजा के वक़्त जिससे इनके प्रकोप का आपको कभी सामना न करना पड़े। 

    चरणामृत:-

    वैसे तो हिन्दू धर्म मे चरणामृत का बहुत अधिक महत्व है हर देवी देवता की पूजा में चरणामृत बनाया जाता है। लेकिन हनुमान जी की पूजा में कभी भी चरणामृत का उपयोग नहीं होता। कहा जाता है कि यदि हनुमान जी की पूजा में कोई चरणामृत का उपयोग करता है तो इसे इनके गुस्से का सामना करना पड़ता है।

    सूतक काल:-

    वैसे तो सूतक काल मे हिन्दू धर्म मे किसी भी देवी देवता की पूजा नहीं की जाती। लेकिन हनुमान जी को लेकर ग्रन्थों में लिखा है कि सूतक काल मे गलती से भी किसी को इन्हें स्पर्श नहीं करना चाहिए नहीं तो यह रुष्ट हो जाते हैं। सूतक काल 13 दिन का होता है।

    चमड़े से परहेज:-

    यदि आप हनुमान जी की पूजा करते हैं तो आपको चमड़े से परहेज करना चाहिए। जो व्यक्ति हनुमान मंदिर में चमड़े की बैल्ट लगाकर जाता है उसे कभी पुण्य प्राप्त नहीं होता।

    रंगों का रखे ध्यान:-

    हनुमान जी का नारंगी रंग जहां सबसे प्रिय रंग है वही सफेद और काले रंग को यह बिल्कुल नहीं पसन्द करते। जो व्यक्ति इन दो रंगों के वस्त्र धारण कर हनुमान जी की पूजा करता है उस पर हनुमान जी की दया दृष्टि कभी नहीं पड़ती।

  • जाने हनुमान जी का क्या है मंगलवार से कनेक्शन क्यों होती है इस दिन विशेष पूजा

    आध्यात्मिक: पवन पुत्र संकटमोचन हनुमान जी को लेकर धार्मिक ग्रन्थों में कहा गया है कि यह अपने भक्तों के साथ हमेशा रहते हैं। जो भी सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं यह उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। लेकिन हनुमान जी की पूजा को लेकर कहा जाता है कि यदि मंगलवार के दिन इनकी पूजा की जाए तो विशेष फल प्राप्त होता है। क्योंकि यह दिन पवनपुत्र हनुमान जी का दिन बताया गया है जो भी नियमित रूप से मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करता है यह उसके सभी विध्न हर लेते हैं और उसे मनोइच्छा का वरदान प्रदान करते हैं। 

    लेकिन कई बार हमारे दिमाग मे ऐसा ख्याल आता है कि संकटमोचन प्रभु हनुमान जी के लिए मंगलवार का दिन इतना विशेष क्यों है आखिर क्यों हनुमान जी की पूजा मंगलवार के दिन ही की जाती है आखिर क्या कनेक्शन है हनुमान जी का मंगलवार से। तो आइए जानते हैं क्यों मंगलवार को पूजे जाते हैं हनुमान जी।

    जाने हनुमान जी का मंगलवार से क्या है कनेक्शन:- 

    धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण के मुताबिक हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था। इसलिए यह दिन इन्हें समर्पित कर दिया गया। कहा जाता है जो कठोर तप के साथ नियमित हनुमान जी की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं यह पूरी करते हैं। इन्हें मंगल ग्रह का नियंत्रक भी कहा जाता है। इनकी पूजा में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का विशेष महत्व है। हुनमान जी की पूजा में ऊॅं श्री हनुमंते नम: का जाप करना चाहिए और भोग के तौर पर लड्डू चढ़ाने चाहिए। नारंगी रंग हनुमान जी का प्रिय रंग है इस रंग का आप हनुमान जी की पूजा ने जितना अधिक उपयोग करते हैं इनकी कृपा उतनी आप पर बनी रहती है।
    नोट:- इस लेख में दी गई जानकारी सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं।

  • हिन्दू धर्म में राम के बताए गए हैं 108 नाम

    आध्यात्मिक: भारत मे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को जगत पिता के नाम जाना जाता है। जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को नहीं पूजता वह हिन्दू धर्म मे नास्तिक के रूप में देखा जाता है। क्योंकि भारत मे राम के नाम से सिर्फ आस्था नहीं जुड़ी है बल्कि राम भारत के हर व्यक्ति की भावना है। हर घर मे राम पूजनीय है वही प्रभु श्री राम के 108 ऐसे नाम है जिनका जाप करने से किसी के भी कष्टों का नाश हो जाता है और उसे इस संसार मे सुख का आगमन होता है। भगवान के 108 नाम का जाप करना यदि सम्भव नहीं हो तो आप 11 या 21 नामों का भी जाप कर सकते हैं। 

    जाने प्रभु श्री राम के 108 नाम:-
    1) ऊँ श्री राजीव लोचनाय नम:
    2) ऊँ श्री रामाया नम:
    3) ऊँ श्री रामभद्राय नम:
    4) ऊँ श्री राजेन्द्राय नम:
    5) ऊँ श्री जानकी पतये नम:
    6) ऊँ श्री परमेश्वराय नम:
    7) ऊँ श्री जनार्दनाय नम:
    8) ऊँ श्री शत्रुजिते नम:
    9) ऊँ श्री सर्वज्ञाय नम:
    10) ऊँ श्री बालिमर्दनाय नम:
    11) ऊँ श्री आत्मवते नम:
    12) ऊँ श्री विश्वरुपाय नम:
    13) ऊँ श्री कौसलेशाय नम:
    14) ऊँ श्री विश्वकृते नम:
    15) ऊँ श्री सत्यव्रताय नम:
    16) ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:
    17) ऊँ श्री लोकात्मने नम:
    18) ऊँ श्री अनादये नम:
    19) ऊँ श्री दयाकराय नम:
    20) ऊँ श्री ब्रह्मण्याय नम:
    21) ऊँ श्री हरये नम:
    22) ऊँ श्री पुरातनाय नम:
    23) ऊँ श्री हंसाय नम:
    24) ऊँ श्री सुग्रीववरदाय नम:
    25) ऊँ श्री चतुर्वाहवे नम:
    26) ऊँ श्री स्मृति मते नम:
    27) ऊँ श्री धीराय नम:
    28) ऊँ श्री श्यामाय नम:
    29) ऊँ श्री लक्ष्मणाग्रजाय नम:
    30) ऊँ श्री शूराय नम:
    31) ऊँ श्री आनन्दाय नम:
    32) ऊँ श्री धनुर्वेदाय नम:
    33) ऊँ श्री गुण श्रेष्ठाय नम:
    34) ऊँ श्री दुर्ज्ञेयाय नम:
    35) ऊँ श्री पूर्णाय नम:
    36) ऊँ श्री अनन्त दृष्ट्ये नम:
    37) ऊँ श्री धनुर्धराय नम:
    38) ऊँ श्री गुणश्रेष्टाय नम:
    39) ऊँ श्री महाकायाय नम:
    40) ऊँ श्री विनीतात्मने नम:
    41) ऊँ श्री तपस्वीशाय नम:
    42) ऊँ श्री जनेश्वराय नम:
    43) ऊँ श्री कल्पाय नम:
    44) ऊँ श्री सर्वकामदाय नम:
    45) ऊँ श्री पुरुषाय नम:
    46) ऊँ श्री केशवाय नम:
    47) ऊँ श्री हनुमतप्रभवे नम:
    48) ऊँ श्री सत्यवादिने नम:
    49) ऊँ श्री सुखदाय नम:
    50) ऊँ श्री संसारोत्तमाय नम:
    51) ऊँ श्री सीताशोक विनाशकृते नम:
    52) ऊँ श्री पुण्डरीकाक्षाय नम:
    53) ऊँ श्री मारीच मथनाय नम:
    54) ऊँ श्री किरीटिने नम:
    55) ऊँ श्री जन्मरहिताय नम:
    56) ऊँ श्री सर्वगोचराय नम:
    57) ऊँ श्री अनुत्तमाय नम:
    58) ऊँ श्री गुणसागराय नम:
    59) ऊँ श्री सदगतये नम:
    60) ऊँ श्री उउपेन्द्राय नम:
    61) ऊँ श्री गोविन्दाय नम:
    62) ऊँ श्री रत्नगर्भाय नम:
    63) ऊँ श्री वाचस्पतये नम:
    64) ऊँ श्री जानकी बल्लभाय नम:
    65) ऊँ श्री प्रीति वर्धनाय नम:
    66) ऊँ श्री निरंजनाय नम:
    67) ऊँ श्री जगन्नाथाय नम:
    68) ऊँ श्री वसुदाय नम:
    69) ऊँ श्री सिद्धिदाय नम:
    70) ऊँ श्री शक्ति मते नम:
    71) ऊँ श्री कमला पतये नम:
    72) ऊँ श्री मत्स्य रुपाय नम:
    73) ऊँ श्री नर नारायणाय नम:
    74) ऊँ श्री व्यासाय नम:
    75) ऊँ श्री पृत्थु नम:
    76) ऊँ श्री दत्तात्रेयरुपाय नम:
    77) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:
    78) ऊँ श्री मोहनी रुपाय नम:
    79) ऊँ श्री पर्जन्याय नम:
    80) ऊँ श्री राक्षसान्त कृते नम:
    81) ऊँ श्री दिव्ययुधधराय नम:
    82) ऊँ श्री जनकप्रिय कृते नम:
    83) ऊँ श्री सूक्ष्माय नम:
    84) ऊँ श्री अच्युताय नम:
    85) ऊँ श्री निर्लेपाय नम:
    86) ऊँ श्री सर्वव्यापिने नम:
    87) ऊँ श्री वर्णश्रेष्ठाय नम:
    88) ऊँ श्री सुखप्रदाय नम:
    89) ऊँ श्री देवाधिदेवाय नम:
    90) ऊँ श्री शांगपाणये नम:
    91) ऊँ श्री पितृभक्ताय नम:
    92) ऊँ श्री मुनिसेविताय नम:
    93) ऊँ श्री कलानिधये नम:
    94) ऊँ श्री भवभंज्जनाय नम:
    95) ऊँ श्री सहस्त्रपदे नम:
    96) ऊँ श्री अधर्म शत्रुवे नम:
    97) ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:
    98) ऊँ श्री शिवपूजारलाय नम:
    99) ऊँ श्री भवानी प्रियकृते नम:
    100) ऊँ श्री नीललोहिताय नम:
    101) ऊँ श्री कलाधराय नम:
    102) ऊँ श्री सुलभाय नम:
    103) ऊँ श्री पापनाशकृते नम:
    104) ऊँ श्री चतुर्वर्गफलाय नम:
    105) ऊँ श्री परमार्थ गुरवे नम:
    106) ऊँ श्री मधूसूदनाय नम:
    107) ऊँ श्री भूवनेश्वराय नम:
    108) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:

  • मेष , बृषभ और मिथुन राशि के जातकों में बन रहा है शुभ योग, यह होगा लाभ

    Rashifal: मनुष्य के जीवन मे कई उतार चढ़ाव आते हैं। लेकिन उसकी राशियां में हुए छोटे छोटे परिवर्तन मनुष्य के जीवन को बदल देते हैं। कई बार यह हमारे लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं तो कई बार इन परिवर्तनों के चलते हमारे जीवन में नकारात्मकता का प्रवेश होता है। लेकिन इन सभी समस्याओं का तोड़ उपलब्ध है जैसे बीमारियों का उपचार दवाइयों से होता है। वैसे ही ग्रहों की स्थिति में होने वाले परिवर्तन का उपचार ज्योतिष के उपायों से होता है। लेकिन आज हम बताइयेगा आपको आपका राशिफल और उसमें होने वाला परिवर्तन…

    मेष:-

    मेष राशि के जातकों के लिए आज धन प्राप्ति का योग बन रहा है। इनपर आज लक्ष्मी की दया दृष्टि बनी रहेगी। लम्बे समय से रुका काम पूरा होगा। परिजनों के सहयोग से बिगड़े काम बनेंगे। वही जीवनसाथी के साथ लम्बे समय से चली आ रही नोक झोंक खत्म होगी।
    इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग हरा है।

    बृषभ:-

    इस राशि के जातकों को आज पैसे का लेन देन निसंकोच करना चाहिए। किसी प्रकार की हानि की सम्भावना नहीं है। लम्बे समय से अटका धन वापस मिलेगा। सुख में वृद्घि होगी। काम काज में उच्च अधिकारियों के साथ बेहतर सम्बंध स्थापित होंगे। किसी बड़े प्रयोजन को लेकर जीवन साथी से बातचीत कर सकते हैं। इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग पीला है।

    मिथुन:-

    इस राशि के जातक आज सुख दुख दोनो को एक साथ महसूस करेंगे। इन्हें एक पल में सुख की अनुभूति होगी तो एक झटके में कोई दुःखद समाचार प्राप्त होगा। आज यह सावधान रहें। कोई भी निर्णय जल्दबाजी में न ले। किसी विश्वास के व्यक्ति से धोखा मिल सकता है। सचेत रहे और अपने भविष्य की योजनाओं को गुप्त रखे। इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग है लाल।

    कर्क:-

    इस राशि के जातक आज काफी व्यथित रहेंगे मन मे धन को लेकर उथल पुथल मची रहेगी। कई ऐसे काम हो जाएंगे जिसपर बाद में अफसोस होगा। दफ्तर में किसी महत्वपूर्ण काम के बिगड़ने से उच्च अधिकारियों के सामने जिल्लत सहनी पड़ सकती है। अपनी बुद्धिमत्ता का उपयोग करे किसी भी काम को बिना विचार के नाम करे। इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग हल्का पीला है।

    सिंह:-

    इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन बेहतरीन साबित होगा। धन लाभ के योग बन रहे हैं कही से आकस्मिक धन प्राप्त होगा। कारोबार में बढ़ोत्तरी होगी और व्यापार के नए आयाम स्थापित होंगे। आज आप कोई भी व्यावसायिक फैसला लेंगे उसमे आपको सफलता प्राप्त होगी। लेकिन हितैषियों से सावधान रहें यह आपकी पीठ में छुरा खोप सकते हैं। इस राशि के जातको के लिए शुभ रंग नीला है।

    कन्या:-

    इस राशि के जातकों के दिन की शुरुआत बेहतरीन होगी। यह आज खुशनुमा महसूस करेंगे। जीवनसाथी का इन्हें भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। काम में मन लगेगा जिससे ऑफिस में प्रतिष्ठित बढ़ेगी। आज आपको कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसे की स्थिति ठीक बनी रहेगी। इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग है गुलाबी।

    तुला:-

    इस राशि के जातकों को सावधान रहने की आवश्यकता है खास तौर पर सरकारी नौकरी वाले जातकों को। इन्हें आज उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है लेकिन इनका साथी इनके बनते काम मे बाधा बनेगा। अपनी बातों को किसी से साझा न करें। सभी के सामने खुलकर अपने राज न बताए आज कही भी जाने से पूर्व गणेश की आराधना करें। इस राशि के जातकों का शुभ रग पीला है।

    वृश्चिक:-

    इस राशि के जातकों का दिन आप रोमांस से भरा रहेगा। सुबह सुबह इन्हें अपने साथी से भरपूर प्यार मिलेगा। लेकिन धन को व्यर्थ खर्च करने से बचें आज कई ऐसे योग बन रहे हैं जिससे आपकी जेब खाली हो सकती है और आपको आर्थिक संकट से जूझना पड़ेगा। इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग सफेद है।

    धनु:-

    काम काज की दृष्टि से इस राशि के जातकों का दिन बहुत अच्छा रहेगा। आज इन्हें ऑफिस में सभी का सहयोग प्राप्त होगा। आय में बढ़ोत्तरी के योग है। जीवन साथी के साथ कही यात्रा पर जा सकते हैं। बच्चो की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा। इस राशि के जातकों का शुभ रंग धानी है।

    मकर:-

    इस राशि के जातकों के दिन की शुरुआत बेहतरीन होगी। यह आज खुशनुमा महसूस करेंगे। आज आप कोई भी व्यावसायिक फैसला लेंगे उसमे आपको सफलता प्राप्त होगी। लेकिन हितैषियों से सावधान रहें यह आपकी पीठ में छुरा खोप सकते हैं। इस राशि के जातकों का शुभ रंग गेहुआ है।

    कुम्भ:-

    इस राशि के जातकों को सावधान रहने की आवश्यकता है खास तौर पर सरकारी नौकरी वाले जातकों को। इन्हें आज उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है लेकिन इनका साथी इनके बनते काम मे बाधा बनेगा।धन को व्यर्थ खर्च करने से बचें आज कई ऐसे योग बन रहे हैं जिससे आपकी जेब खाली हो सकती है और आपको आर्थिक संकट से जूझना पड़ेगा। इस राशि के जातकों का शुभ रंग गुलाबी है।

    मीन:-

    इस राशि के जातक आज काफी व्यथित रहेंगे मन मे धन को लेकर उथल पुथल मची रहेगी। आज आपको कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। जीवनसाथी के साथ लम्बे समय से चली आ रही नोक झोंक खत्म होगी।
    इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग हरा है।

  • अप्रैल में होगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, सूतक काल से रहें सावधान

    आध्यात्मिक: साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण होने को है। यह सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल को लगेगा। सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल होता है। हिन्दू पंचांग के मुताबिक 30 अप्रैल को शनिवार के दिन अमावस्या योग बन रहा है जिसमे।सूर्य ग्रहण होगा। 

    साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर आरम्भ होगा और शाम 4 बजकर 7 मिनट तक जारी रहेगा। 

    जाने कहाँ प्रभावी रूप से दिखेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण:-

    2022 का पहला सूर्य ग्रहण भारत मे नही दिखाई देगा। इसका प्रभाव प्रशांत महासागर से लेकर दक्षिण अमेरिका में रहेगा। भारत मे सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा जिसके चलते भारत मे सूतक काल मान्य नहीं होगा। जानकारी के लिए बता दें जब सूर्य ग्रहण पड़ता है तो सूतक काल लगता है सूतक काल के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है।

  • बस एक श्लोल शान्त करता है ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को

    Astro: हमने कई बार देखा है कि कुछ जातक ऐसे होते हैं जिनकी कुंडली मे ग्रहों की स्थिति ठीक नहीं होती। उनके ग्रहों में बिगडी हुई ग्रह स्थिति उनके जीवन मे काफी उथल पुथल मचाए रहती है। वही ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति पर ग्रहों की स्थिति का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है तो उसे कुछ उपायों के माध्यम से शान्त किया जा सकता है। वही वेद व्यास ने इन ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए एक श्लोक की रचना की है जो भी व्यक्ति नो ग्रह श्लोक का जाप करता है उसके ग्रहों की दशा ठीक रहती है और उसे नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। तो आइए जानते हैं नो ग्रह श्लोल जिसके जाप मात्र से सुधरती है ग्रहों की स्थिति…..

    सूर्य;-

     
    जपाकुसुम सङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम् |
    तमोऽरिं सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरम् ‖ 

    चन्द्रः 

    दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम् । 
    नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ॥

    मंगल :-

    धरणी गर्भ सम्भूतं विद्युत्कान्ति समप्रभम् | 
    कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गळं प्रणमाम्यहम् ‖

    बुधः

    प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम् । 
    सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ॥

    गुरु:

    देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् |
    बुद्धिमन्तं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ‖

    शुक्रः

    हिमकुन्द मृणाळाभं दैत्यानं परमं गुरुम् | 
    सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ‖

    शनिः 

    नीलाञ्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् | 
    छाया मार्ताण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ‖

    राहू:-

    अर्धकायं महावीरं चन्द्रादित्य विमर्धनम् |
     सिंहिका गर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ‖

    केतु:-

     
    फलाश पुष्प सङ्काशं तारकाग्रहमस्तकम् | 
    रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ‖

  • परशुराम जयंती पर इस मंत्र का करें उच्चारण साथ ही जानिए शुभ मुहूर्त

    परशुराम जयंती पूजा विधि-

    तृतीया तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों को भूलकर सबसे पहले स्नान कर लें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर मंदिर जाकर या घर की साफ-सुथरी जगह पर एक चौकी पर आसन (कपड़ा) बिछाकर भगवान परशुराम की तस्वीर या फिर मूर्ति को स्थापित करें।

    अब जल, चंदन, अक्षत, गुलाल, फूल आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान परशुराम को तुलसी दल भी अर्पित करें। भोग में मिठाई, फल आदि भी चढ़ाएं। विधिवत तरीके से पूजा करने के बाद घी का दीपक और धूप जलाकर आरती करें। इस दिन जातक व्रत रखें इस व्रत में अनाज खाएं बिना दिनभर व्रत रहें।

    पूजा का शुभ मुहूर्त 

    तृतीया तिथि का प्रारंभ- 3 मई,मंगलवार सुबह 5: 20 पर होगा, तृतीया तिथि की समाप्ति- 4 मई 2022, बुधवार सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर होगी।

    पूजा के समय इस महामंत्र का करें उच्चारण-

    ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्।।

    ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्।।

    ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म धरती से अन्याय को खत्म करने के लिए हुआ था। भगवान उनके पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। भगवान परशुराम को भगवान शिव का एकमात्र परम शिष्य माना जाता है। कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम ने कठोर तपस्या करके महादेव को प्रसन्न किया। उन्हें कलयुग में चिरंजीवी माना जाता है।

  • अगर आप भी देखते है सपने में इन खास चीजों को तो जान लें इसका सच

    आज के समय मे सपना देखना प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुका है और हर व्यक्ति रात में या दिन में सोते समय सपना देखता ही है . कई व्यक्ति ऐसे भी होते हैं, जो ये कहते हैं कि हम सपने नहीं देखते. परंतु ये कुछ हद तक गलत कथन है, क्योंकि सपना हर कोई देखता है. लेकिन कुछ लोगों को रात में देखे गए सपने याद नहीं रहते और उन्हें ऐसा लगता है कि वे सपना देखते ही नहीं. कई बार ऐसा भी होता है की हम रात में देखे गए सपनों से डर जाते हैं और इसके चलते हमारे मन में बुरे ख्याल आते हैं. यह बातें वेदों और पुराणों में कही गई हैं. आइये जानते हैं कुछ सपनों के बारे में-

    अध्यापक को सपने में देखना:

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    अगर आप अपने किसी अध्यापक को सपने में देखते है तो यह आपको जीवन में सफलता के संकेत देता है.

    सपने में भगवान शंकर को देखना :

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    सपने में भगवान शंकर को देखना : Demo pic

    यदि आप अपने सपने में देवों के देव महादेव को देखते हैं तो यह आपके लिए सुखो में वृद्धि के संकेत होते हैं.

    मुंडन करवाते हुए देखना:

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    मुंडन करवाते हुए देखना: Demo pic

    कहा जाता है सपने में खुद को या किसी अन्य को मुंडन करवाते हुए देखना काफी अशुभ होता है. दरअसल यह सपना परिवार में किसी की मृत्यु का अंदेशा है

    कौआ को सपने में देखना :

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    कौआ को सपने में देखना : Demo pic

    कहा जाता है अगर सपने में कौआ नजर आए तो यह काफी अशुभ होता है. दरअसल सपने में कौआ दिखना किसी अशुभ घटना को दर्शाता है.

    यात्रा करते हुये स्वयं को देखना :

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    यात्रा करते हुये स्वयं को देखना : Demo pic

    कहा जाता है सपने में खुद को यात्रा करते हुए देखना काफी अशुभ माना जाता है. इसके अलावा ध्यान रखें कि जब कभी आप खुद को सपने में यात्रा करते हुए देखते हैं तो उसके अगले दिन भूल से भी यात्रा ना करें.