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  • समुद्र शास्त्र : भविष्य में होने वाली घटना जान सकते हैं शरीर के अंग फड़कने से, जानिए कैसे

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    समुद्र शास्त्र के मुताबिक जातक का शरीर बेहद संवेदनशील होता है और उसके पास ऐसी शक्ति है जो होने वाली घटना को पहले ही भांप ले। हो सकता है आपको यकीन ना हो मगर समुद्र शास्त्र की सहायता से आप इंसान के फड़कते हुए अंगों को जानकर उसके साथ भविष्य में होने वाली घटना को जान सकते हैं।

    (1) समुद्र शास्त्र के मुताबिक पुरुष के शरीर का यदि बायां भाग फड़कता है तो भविष्य में उसे कोई दुखद घटना झेलनी पड़ सकती है। वहीं अगर उसके शरीर के दाएं भाग में हलचल रहती है तो उसे जल्द ही कोई बड़ी खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। जबकि महिलाओं के मामले में यह उलटा है, मतलब उनके बाएं हिस्से के फड़कने में खुशखबरी और दाएं हिस्से के फड़कने पर बुरी खबर सुनाई दे सकती है।

    (2) किसी व्यक्ति के माथे पर यदि हलचल होती है तो उसे भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है वहीं कनपटी के पास फड़कन पर धन लाभ होता है।

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    (3) यदि इंसान के दोनों गाल एक साथ फड़कते हैं तो इससे धन लाभ की संभावना बढ़ जाती है।

    (4) यदि व्यक्ति की दाईं आंख फड़कती है तो यह इस बात का संकेत है कि उसकी सारी इच्छाएं पूरी होने वाली हैं और अगर उसकी बाईं आंख में हलचल रहती है तो उसे जल्द ही कोई अच्छी खबर मिल सकती है। लेकिन अगर दाईं आंख बहुत देर या दिनों तक फड़कती है तो यह लंबी बीमारी की तरफ इशारा करता है।

    (5) अगर किसी इंसान के होंठ फड़क रहे है तो इसका अर्थ है उसके जीवन में नया दोस्त आने वाला है।

    (6) यदि आपकी हथेली में हलचल होती है तो यह यह इस बात की ओर इशारा करता है कि आप जल्द ही किसी बड़ी समस्या में घिरने वाले हैं और अगर अंगुलियां फड़कती है तो यह इशारा करता है कि किसी पुराने दोस्त से आपकी मुलाकात होने वाली है।

    (7) यदि आपका दाया कन्धा फड़कता है तो यह इस बात का संकेत है कि आपको अत्याधिक धन लाभ होने वाला है। वहीं बाएं कंधे के फड़कने का संबंध जल्द ही मिलने वाली सफलता से है। परंतु अगर आपके दोनों कंधे एक साथ फड़कते हैं तो यह किसी के साथ आपकी बड़ी लड़ाई को दर्शाता है।

    (8) पीठ के फड़कने का अर्थ है कि आपको बहुत बड़ी समस्याओं को झेलना पड़ सकता है।

    (9) यदि आपकी दाई कोहनी फड़कती है तो यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि भविष्य में आपकी किसी से साथ बड़ी लड़ाई होने वाली है। लेकिन यदि बाईं कोहनी में फड़कन होती है तो यह बताता है कि समाज में आपकी प्रतिष्ठा और ओहदा बढ़ने वाला है।

    (10) दाई जांघ फड़कती है तो यह इस बात को दर्शाता है कि आपको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा और बाईं जांघ के फड़कने का संबंध धन लाभ से माना जाता है।

  • जरूर करें शादीशुदा महिलाएं ये काम, खूब होगी धनवर्षा मां लक्ष्मी की कृपा से

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    यह बात हम सभी जानते है कि आज के युग में रिश्ते बहुत ही कमजोर हो गए है। छोटी-छोटी बातों पर लोग रिश्तों को बिगाड लेते है। ऐसे में आज के समय में शादियों के टूटने की खबरें सामने आ रही है। अक्सर देखा जाता है शादी के शुरूआती एक-दो साल में पति-पत्नी के रिश्तों में मधुर संबंध होते है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पति-पत्नी में मामूल बात घर में कलह का कारण बन जाती है।

    ऐसे में रिश्तों को लेकर दूरी बना लेते है। यदि आपकी शादीशुदा लाइफ में वो पहले जैसी मिठास नहीं हैं तो ऐसी लाइफ को जीने का मजा भी नहीं आता हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिसे गुरुवार के दिन करने के बाद आपकी शादीशुदा जिन्दगी में कभी कोई परेशानी नहीं आएगी। वो कौनसे उपाय है जिसको करने से आपकी शादीशुदा जिदंगी संवर जाएगी, आइए जानते है।

    पहला काम

    ज्योतिष के अनुसार, गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर ले। अब एक कुमकुम की डिब्बी ले और उसे माता रानी की प्रतिमा के सामने रख दे। इसके बाद माता रानी के सामने घी के दो दीपक जलाए। पहले दीपक को कुमकुम की डिब्बी के पास रख दे जबकि दूसरे दीपक से माता रानी की आरती करे। आरती समाप्त होने के बाद पहली आरती मां दुर्गा को, दूसरी कुमकुम की डिब्बी को और तीसरी खुद को दे।

    अगर आपके पतिदेव वहां मौजूद हैं तो उन्हें भी ये आरती दे। इसके बाद गुरुवार के दिन आप जब भी माथे पर सिंदूर लगाए तो इसी कुमकुम की डिब्बी से लगाए। मगर इस बात का ध्यान रहे कि ये कुमकुम आपको अपने हाथ से नहीं लगाना हैं बल्कि अपने पति के हाथ से लगना हैं। यह उपाय आप हर गुरुवार या कम से कम महीने के एक गुरुवार जरूर करे। इससे आपके और पति के बीच मधुर संबध, रिश्ते बने रहते हैं।

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    दूसरा काम

    लक्ष्मी और विष्णु जी की जोड़ी भी काफी लोकप्रिय हैं। गुरुवार को विष्णु जी का ही दिन होता हैं। विष्णु जी को सत्यनारायण और लक्ष्मीनारायण नामो से भी जाना जाता हैं। ऐसे में अगर आप गुरुवार के दिन घर में सत्यनारायण की कथा रखते हैं तो ये ना सिर्फ आपकी शादीशुदा लाइफ के लिए लाभकारी रहेगा बल्कि पूरे परिवार की शान्ति में भी लाभ होगा।

    सत्यनारायण कथा घर में कराने से मकान की सारी नेगेटिव उर्जा बाहर निकल जाती हैं। साथ ही घर में रह रहे लोगो में पॉजिटिव एनर्जी आती हैं। इससे उनका मन साफ होता हैं और अच्छे विचार बनते हैं। इस तरह घर के लोगो में लड़ाई झगड़ा नहीं होता हैं और सभी शान्ति से रहते हैं। आप इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखे कि जब आप घर में सत्यनारायण कथा करवाए तो वहां आपके साथ आपके पतिदेव भी मौजूद रहे। तभी इसका पूर्ण लाभ आपकी शादीशुदा लाइफ को मिलेगा। आप ये कथा तीन से चार महीने में एक बार जरूर कराए।

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  • हस्तरेखा शास्त्र : जानें, कैसा है जातक का स्वभाव उंगलियों की बनावट से ?

    हस्तरेखा शास्त्र : जानें, कैसा है जातक का स्वभाव उंगलियों की बनावट से ?

    हिन्दू धर्म में हस्तरेखा शास्त्र को बड़ा महत्व दिया गया है। ज्योतिष के अनुसार हस्तरेखा शास्त्र का हमारे जीवन में बड़ा योगदान है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जितना महत्व हमारे हाथों की रेखाओं का है। उतना ही महत्व हाथ की सभी उंगलियों के लम्बाई का है। उंगलियों की बनावट बताती है कि मनुष्य का स्वभाव क्या है।

    (1) छोटी और पतली उंगली वाले व्यक्तियों का स्वभाव

    ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के शरीर के अंगों के जरिए से उसकी प्रकृति अथवा स्वभाव के बारे में पता चलता है। इसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र में भी हमारे हाथ की उंगलियों की बनावट के बारे में बताया गया है कि जातक के स्वभाव के बारे में बताती हैं। जिस जातक की हाथ की उंगलियों की स्थिति पूर्ण रूप से व्यस्थित होती है। ऐसे जातक जीवन में बहुत सफल होते हैं। लंबी एवं पतली उंगलियों वाले व्यक्ति भावुक होते हैं। जबकि मोटी उंगलियों वाले जातक मेहनती होते हैं।

    (2) नुकीली उंगली वाले लोगों का स्वभाव

    नुकीली उंगली वाले जातक अपनी प्रेरणाशक्ति के कारण ही स्वयं को निर्देश देते हैं। ऐसे व्यक्ति भावक होते है उनकी कल्पनाशक्ति उड़ान ऐसी होती है कि वे कल्पनाशीलता और आदर्शवाद की अनोखी दुनिया में पहुंच जाते है। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर कवि या कलाकार होते है। ऐसे लोग पूजा-पाठ आदि से अधिक लगाव रखते हैं। इसके अलावा ये स्वभाव से बेहद कोमल होते हैं।

    (3) गांठदार उंगली वाले जातकों का स्वभाव

    जिन जातकों की उंगलियां सीधी होती हैं। ऐसे व्यक्ति ईमानदार, मेहनती एवं न्यायसंगत होते हैं। इसके अलावा जीवन में अच्छी तरक्की करते हैं। जिन जातकों की उंगलियां गांठदार होती हैं वे बहुत व्यावहारिक एवं अच्छे नियोजक होते हैं। वे किसी को भी सीधी बात कहते हैं। लंबी उंगलियों वाले व्यक्ति शिक्षा में रुचि रखते हैं।

  • MAHA SHIVRATRI 2020 : इस साल बन रहा है महाशिवरात्रि पर अद्भुत संयोग, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    MAHA SHIVRATRI 2020 : इस साल बन रहा है महाशिवरात्रि पर अद्भुत संयोग, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। बता दें कि इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 21 फरवरी ( शुक्रवार) को देशभर में मनाया जा रहा है।

    इस साल महा​शिवरात्रि के दिन अद्भुत संयोग बन रहा है, ​जो भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना के लिए बहुत ही खास है। आइए हम आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते है कि महाशिवरात्रि के दिन पूजा का मुहूर्त क्या है।

    महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
    फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 21 फरवरी दिन शुक्रवार को शाम 05 बजकर 20 मिनट से हो रहा है, जो 22 फरवरी दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।

    ज्योतिषों के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत अर्धरात्रिव्यापिनी चतुर्दशी तिथि में ही करना चाहिए, इसलिए इस वर्ष महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाई जाएगी। आप सभी को व्रत 21 को ही रखना चाहिए।

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि

    शिव रात्रि के दिन भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करा कराएं। केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं, पूरी रात्रि का दीपक जलाएं, चंदन का तिलक लगाएं।

    तीन बेलपत्र, जायफल, कमल गट्टे, फल, भांग धतूर, तुलसी, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर बच्चों को प्रसाद बांटें।

    पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।

    इस महाशिवरात्रि पर बन रहा है दुर्लभ संयोग

    इस बार महाशिवरात्रि पर अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का सबसे उत्तम दिन होता है। इस महाशिवरात्री पर एक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना हुआ है। सर्वार्थ सिद्धि योग 21 फरवरी को सुबह 09 बजकर 14 मिनट से बन रहा है, जो 22 फरवरी को सुबह 06 बजकर 54 मिनट तक है। वहीं, ज्योतिष के अनुसार, इस बार शिवरात्रि पर शुक्र अपनी उच्च रा​शि मीन में होगा और शनि मकर में। यह एक दुर्लभ योग है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना उत्तम मानी गई है।

  • डरावने सपने करते हैं अगर आपको परेशान तो …

    डरावने सपने करते हैं अगर आपको परेशान तो …

    गंगाजल की महिमा का गुणगान किसी से छिपा नहीं है। हिन्दू धर्म ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी धर्मो में माता गंगा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। गंगा की महिमा युगों युगों से चली आ रही है। इसके जल को अमृत की संज्ञा दी गई। आज भी हरिद्वार के गंगाजल को लेने के लिए देश दुनिया से श्रद्धालु पहुँचते है। सर्वमान्य तथ्य है कि युगों पहले भागीरथ जी गंगा की धारा को पृथ्वी पर लाये थे, भागीरथ जी गंगा की धरा को हिमालय के जिस मार्ग से लेकर मैदान में आए वह मार्ग जीवनदायनी दिव्य औषधियों व वनस्पतियों से भरा हुआ है। इस कारण भी गंगा जल को अमृततुल्य माना जाता है। इसके कुछ टोटकों के जरिए धन सहित अन्य कई समस्‍याओं से निजात पाई जा सकती है।

    भगवान सदा शिव को गंगाजल चढ़ाने से वे अति प्रसन्न होते हैं । इससे इंसान को मोक्ष और शुभ लाभ दोनों ही मिलते हैं।

    पुराना धन प्राप्ति के साथ अच्छा व्यवसाय और बेहतरीन नौकरी के लिए भगवान शिव को बिल्वपत्र कमल और गंगाजल चढ़ाएं। आपके पौ बारह पच्चीस यानी हर तरह की सम्पन्नता आने लगेगी।

    यदि आपके ऊपर कर्ज अधिक हो गया है या घर में परेशानियां ही परेशानियां हो तो आप गंगाजल को पीतल की बोतल में भरें और उसे अपने घर के कमरे में उत्तर पूर्व दिशा में रख दें। इससे आपकी समस्या हल हो जाएगी।

    पुराणों के अनुसार गंगाजल को हमेशा घर पर रखने से सुख और संपदा बनी रहती है। इसलिए एक पात्र में हमेशा गंगाजल भरकर रखें।

    यदि रात को डरवाने सपने आते हों तो हमेशा सोने से पहले बिस्तर पर गंगाजल का छिड़काव कर दें। ऐसा करने से डरवाने सपने इंसान को परेशान नहीं करते हैं।

    घर पर यदि वास्तुदोष है और आप उससे परेशान रहते हों तो अपने घर में नियमित गंगाजल का छिड़काव करें। ऐसा नियमित करने से वास्तु दोष का प्रभाव खत्म हो जाता है और घर पर सकारात्मक ऊर्जा आती है।

    तरक्की और सफलता पाने के लिए गंगाजल को हमेशा अपने पूजा स्थल और किचन में रखें।

  • वृंदावन में आयोजित अन्तराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन

    वृंदावन में आयोजित अन्तराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन

    विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित एच आर शास्त्री जी दिनांक 29 फरवरी एवं 1 जनवरी 2020 को श्री वेद वेदांग्ड़ सेवा संस्थान (रजि•) ग्रेटर नोएडा (दिल्ली) के तत्वाधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन श्री राधा रानी की नगरी श्री वृंदावन धाम आचार्य जयराम आश्रम नए रंगनाथ मंदिर के सामने बुर्जा रोड वृंदावन मथुरा उत्तर प्रदेश में मुख्य अतिथि के रूप में पधार रहे हैं ।

    शास्त्री जी द्वारा समय-समय पर जो भी भविष्यवाणी की गई है वह 100% सत्य प्रमाणित हुई है गृहों एवं नक्षत्रों के बारे में विचार किया जाएगा किस प्रकार से ग्रह एवं नक्षत्र नुकसानदायक एवं फलदायक होते हैं कृपया ज्यादा से ज्यादा संख्या में कार्य स्थल पर पहुंच कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं और शास्त्री जी से मिलने के लिए संपर्क करें:- 9312386630, 9711292269

  • Coronavirus : ज्योतिष में कोरोना रोग का ग्रहों से सीधा सम्बन्ध क्या है ?

    ज्योतिष में द्वितीय भाव एवं मिथुन राशि मुँह, कान, नाक, गले, श्वास, फेफड़े, खाँसी को प्रदर्शित करती है । वर्तमान समय में मिथुन राशि में राहू, शनि मकर राशि में एवं बृहस्पति धनु राशि में केतु के साथ गोचर कर रहे है । राहू किसी चीज को फैलाता है एवं बृहस्पति किसी चीज़ को बढ़ाता है । मंगल साहस, पराक्रम, प्रतिरोधक क्षमता का भी कारक है ।
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    कोरोना का ग्रहीय कारण ( Demo pic)

    22 मार्च को मंगल अपनी उच्च राशि में प्रवेश करने जा रहे है, 30 मार्च को प्रातः बृहस्पति मकर में होंगे एवं 14 अप्रैल को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होंगे ।
    अतः 30 मार्च को बृहस्पति के राशि बदलने के बाद कोरोना का भय कम होने की संभावना है । सूर्य को प्राण तत्व कहा जाता है । 14 अप्रैल के बाद सूर्य मज़बूत होते ही कोरोना पर नियंत्रण की भी संभावनाएं बन सकती है । ध्यान देने वाली बात यह है कि राहू सितंबर तक मिथुन राशि मे ही रहेंगे । जब तक राहू मिथुन राशि मे रहेंगे तब तक हमे सावधानी बरतनी चाहिए ।
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    safe from coronavirus

    सावधानी ही बचाव है ।
    ज्योतिषाचार्य सुमित तिवारी

  • VIDEO : मनोज तिवारी की सुरीली आवाज चैत्र नवरात्रि में देवी मां की वंदना

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    Manoj Tiwari bhojpuri bhajan: चैत्र नवरात्रि आने वाली है। त्योहार के अनुसार उन पर बने भोजपुरी गाने भी आने लगते हैं। गायक से सांसद बने मनोज तिवारी भी इस मौके पर अपना भजन संग्रह लेकर आए हैं। मनोज तिवारी की सुरीली आवाज में देवी मां की वंदना सुनकर भक्तजनों का मन प्रसन्न हो जाएगा। भजन संग्रह में कौवने योग्यता पर, बाड़ी शेर पर सवार, सभी के असरा तौहार और पूरा होई आस जैसे भजनों को खूब सुना जा रहा है। यूपी के पूर्वांचल और बिहार के उन इलाकों में जहां भोजपुरी भाषी लोग बड़ी तादाद में वहां ये भजन संग्रह धूम मचा रहा है।

  • शीतला माता की पूजा से होता है भयानक रोंगो, महामारियों का नाश

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    देवी महापुराण के अनुसार महादेव परमेश्वर शिव की आदिशक्तिपरमेश्वरी जगदंबे के साँतवे स्वरूप माँ कालरात्री हैं, इन्ही का रौद्र स्वरूप अत्यंत विकराल भयंकर और रौद्र है इनका वर्ण घोर अंधकार युक्त काला है केश घुंगराले और चमकते हुए काले रंग के हैं मस्तक पर तीसरा नेत्र शुशोभित है और दो नेत्र चहरे पर हैं ,जोकि बहुत ही विशाल कांति वाले और रक्त वर्ण वाले है ।

    दोनो नेत्रो से अग्नि निकल रही है नासिका उठी हुई हैं और इनके नथुनों से धुंआ निकल रहा है । चहरे पर अभय प्रदान करने वाली मुस्कान हैं इनके ओष्ठ बिम्बा फल के समान सुन्दर व गहरे लाल रंग के हैं। और उनकी प्रथम दाहिनी भुजा क्रमशः अभय मुद्रा और दूसरी भुजा वरद मुद्रा मे हैं। बायीं प्रथम भुजा में आयुध- खड्ग एवं द्वितीय भुजा मे लौह कीलों से युक्त पाश हैं जो की गले मे विद्युत की माला धारण किये हैं । शरीर पर वस्त्रों के स्थान पर चर्म धारण किये हुए हैं ।

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    शीतला माता की पूजा से होता है भयानक रोंगो, महामारियों नाश

    और गदर्भ (गधे) पर आरूणी महादेवी का स्वरूप अत्यंत भयभीत करने वाला हैं काल अर्थात म्रत्यु भी इनके भय से काँप जाती हो, फिर दैत्यों और राक्षस की क्या बिसात ये केवल इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं । परन्तु देवी समस्त मनुष्यो और देवताओ साधु , संत स्वभाव वालो एवं प्रक्रति के समस्त जीवों को काल और म्रत्यु के भय से अभय प्रदान करने वाली है।

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    शीतला माता की पूजा से होता है भयानक रोंगो, महामारियों नाश

    समस्त प्रकार की महामारी भयंकर रोगों और दुःख को हारने वाली है । कतिपय ये संदेह नही है की जिस प्रकार परमेश्वरशिव का स्वरूप शांत अवस्था मे शिव है ,और संहारक रौद्र रूप शंकर अथवा महाकाल कहलाता उसी प्रकार शिव की रौद्र शक्ति देवी कालरात्रि हैं । उनकी सौम्य शक्ति देवी कालान्तर कथाओं स्कन्द पुराण मे माँ शीतला कहलाती है ।

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    शीतला माता की पूजा से होता है भयानक रोंगो, महामारियों नाश

    उनका स्वरूप लक्षण कालरात्रि से भिन्न नही मालूम पड़ता अपितु बस सौम्य हो कर शीतल हो जाता है, देवी गदर्भ पर आरुण हैं देवी का स्वरूप निर्मल श्वेत हो जाता है ,त्रिनेत्री देवी के उनके दो नेत्र खुले हुए हैं जिनसे म्मत्रत्व करूणा प्रेम का संमस्त अनंत ब्रह्माण्ड रूपी दर्शन अनायाश हो रहा हो , मुख पर अनन्त आदित्यों का तेज़ शोभायमान प्रतीत हो रहा है । देवी चौसठ प्रकार के अत्यंत भयानक रोंगो, महामारियों , और रक्त, मज्जा ,द्रव, एवं त्वचा, सम्बन्धित रोंगो को नाश करके , अरोगी काया प्रदान करने के साथ साथ मन को शीतल और पवित्र करने वाली हैं।

    प्रक्रति को शुद्ध करते हुए अत्यंत भयानक सूक्ष्म जीवो को नष्ट करके जातको को अभय प्रदान करने वाली हैं । और साथ ही साथ समस्त प्रकार के अभ्युदय को प्रदान करने वाली हैं। विश्व मंगलम्। समस्त प्रणियों का कल्याण हो । परमेश्वरी आपको सहस्त्र कोटि प्रणाम।

  • Chaitra Navratri 2020 Festival : घटस्थापना और मां दुर्गा के नौ रूप, 9 दिन- 9 मंत्र- 9 रंग- 9 भोग

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    चैत्र माह से ही भारतीय नववर्ष का प्रारंभ भी होता है। यह माह कैलेंडर का पहला माह है। चैत्र नवरात्रि पर पहले दिन मां दुर्गा की चौकी की स्थापना , कलश स्थापना और कलश के ऊपर नारियल स्थापित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार कलश के ऊपर स्थापित नारियल को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और कलश में तैंतीस कोटी देवी देवताओं का वास माना जाता है।

    माना जाता है कि कलश के ऊपर नारियल स्थापित करने से मां लक्ष्मी का वास सदैव घर में होता है। इसलिए जब भी कहीं पर कलश की स्थापना की जाती है तो उस पर नारियल अवश्य स्थापित किया जाता है। जिससे सभी देवताओ का वास घर में हो सके और किसी भी शुभ कार्य में किसी भी प्रकार का कोई विघ्न उत्पन्न न हो। इसी कारण से नारियल को अत्यंत शुभ माना जाता है।

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    Chaitra Navratri 2020 Festival : घटस्थापना और मां दुर्गा के नौ रूप, 9 दिन- 9 मंत्र- 9 रंग- 9 भोग

    यदि आप कलश स्थापना करते हैं और उस पर नारियल स्थापित नहीं करते हैं तो आपका कलश स्थापन अधूरा माना जाता है। शास्त्रों में तो यह भी कहा जाता है कि यदि कलश पर स्थापना में नारियल को कलश पर यदि न रखा जाए तो वह शुभ काम कभी भी पूरा नहीं होता और कई प्रकार के विघ्न उस शुभ और मांगलिक कार्यों में आते हैं। इसके साथ ही नवरात्रि पूजा में नारियल का विशेष महत्व बताया गया है। क्योंकि नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा की पूजा के बाद कन्या पूजन में नारियल का प्रसाद दिया जाता है और तब ही नवरात्रि के व्रत सफल होते हैं।

    यदि इस दिन नारियल का प्रसाद कन्या पूजन में न रखा जाए तो न तो नवरात्रि के व्रत सफल होते हैं और न हीं मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन कुछ लोग नवरात्रि पर कलश के ऊपर स्थापित नारियल को तोड़ देते हैं। जो शास्त्रों में बिल्कुल ही गलत बताया गया है।शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित माना गया है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके घर में कई प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो सकती है। माना जाता है कि कलश पर स्थापित नारियल को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है और जब आप उस नारियल को तोड़ देते हैं तो मां लक्ष्मी आपसे नाराज हो जाती है और आपसे रूठ कर आपसे दूर चली जाती है। जिसके बाद आपको दरिद्रता का भी सामना करना पड़ सकता है।

    विद्वानों के अनुसार कलश पर स्थापित नारियल को कभी भी तोड़ना नहीं चाहिए। बल्कि इसके कई उपयोग बताएं गए हैं जो आपको आपकी सभी समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है। यदि आप पैसों की समस्या से परेशान हैं तो आपको नवरात्रि के अंतिम दिन पूजा करने के बाद उस नारियल को अपने पैसे रखने वाले स्थान पर रख देना चाहिए। ऐसा करने से आप पर सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी। वहीं यदि किसी स्त्री को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो पा रही है तो उसे अपने ऊपर से इस नारियल को सात बार उतारकर अपने घर के मंदिर में स्थापित करना चाहिए । इसके साथ ही यदि आप शत्रु बाधा से परेशान हैं तो आपको इस नारियल को सात बार अपने ऊपर से घूमाकर किसी बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। इससे आपकी शत्रु बाधा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी और आपके शत्रु आपको कभी भी परेशान नहीं करें ।

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    Chaitra Navratri 2020 Festival : घटस्थापना और मां दुर्गा के नौ रूप, 9 दिन- 9 मंत्र- 9 रंग- 9 भोग

    उपवास : नवरात्रियों में कठिन उपवास और व्रत रखने का महत्व है। उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई हो जाती है। उपवास रखकर ही साधना की जा सकती है। यथासम्भव नमक और मीठा (चीनी मिष्ठानादि) छोड़ दें। उपवास में रहकर इन नौ दिनों में की गई हर तरह की साधनाएं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

    नियम संयम से रहें- इन नौ दिनों में भोजन, मद्यमान, मांस-भक्षण और स्‍त्रिसंग शयन वर्जित माना गया है। लेकिन जो व्यक्ति इन नौ दिनों में पवित्र नहीं रहता है उसका बुरा वक्त कभी खत्म नहीं होता है। यदि आपने 9 दिनों तक साधना का संकल्प ले लिया है तो उसे बीच में तोड़ा नहीं जा सकता। मन और विचार से पवित्रता बनाकर रखें। छल, कपट प्रपंच और अपशब्दों का प्रयोग ना करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें, गलत लोगों की संगति ना करें।
    इसके अतिरिक्त, पूरा या नियमित समय तक मौन, भूमि-शयन, चमड़े की बनी वस्तु का त्याग, पशुओं की सवारी का त्याग, अपनी शारीरिक सेवाएं स्वयं करना तय करें। अपनी सुख-सुविधाओं को यथासम्भव त्याग कर उपासना में लीन होना ही तप है। पूजा या साधना का स्थान और समय भी नियुक्त होना चाहिए।

    साधारण साधना : नवदुर्गा में गृहस्थ मनुष्य को साधारण साधना ही करना चाहिए। इस दौरान उसे घट स्थापना करके, माता की ज्योत जलाकर चंडीपाठ, देवी महात्म्य परायण या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। यदि यह नहीं कर सकते हैं तो इन नौ दिनों के दौरान प्रतिदिन एक माला माता के मंत्र का जाप करना चाहिए। साधना में किसी भी प्रकार की गलती माता को क्रोधित कर सकती है। यदि आप इस दौरान बीमार पड़ जाते हैं, आपको अचानक ही कहीं यात्रा में जाना है या घर पर किसी भी प्रकार का संकट आ जाता है तो इस दौरान उपवास तोड़ना या साधना छोड़ना क्षम्य है।
    सामान्यजन माता के बीज मंत्र या शाबर मंत्रों का जाप कर सकते हैं या अष्टमी की रात्रि में दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक मंत्र को विधिवत सिद्ध किया जाता है। सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ का 108 बार अष्टमी की रात्रि में पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में कम से कम दोनों काल (प्रातः एवं सायं) में तीन घंटा समय निकाल कर 26 माला प्रति दिन नियमित समय पर जपना चाहिए। शौच स्नान से निवृत्त होकर शुद्धतापूर्वक प्रातःकालीन उपासना पूर्व मुख और संध्याकाल की उपासना पश्चिम मुख होकर करनी चाहिए। जप के समय घी का दीपक जलाकर रखें और जल का एक पात्र निकट में रखें।

    कन्या भोज व दान : सप्तमी, अष्टमी और नौवमी के दिन कन्या पूजन करके उन्हें अच्‍छे से भोजन ग्रहण कराना चाहिए। यदि आप कन्या भोज नहीं कर रहे हैं तो आप गरीब कन्याओं को दान दक्षिणा भी दे सकते हैं। खासकर उन्हें हरे वस्त्र या चुनरी भेंट करें। आप यह कार्य किसी मंदिर में जाकर भी कर सकते हैं। वहां आप माता को खीर का भोग लगाकर कन्याओं को दान दें।

     हवन : अंतिम दिन विधिवत रूप से साधना और पूजा का समापन करके हवन करना चाहिए। हवन करते वक्त हवन के नियमों का पालन करना चाहिए। उसके बाद में निर्माल्य का विसर्जन करना चाहिए। उपरोक्त पांच कार्य यदि आप नियम से और श्रद्धापूर्वक करेंगे तो आपकी जो भी मनोकामना होगी वह पूर्ण होगी।

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