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  • वास्तुशास्त्र : लड़के नहीं करें भूलकर भी शादी की उम्र में ये गलतियां

    वास्तुशास्त्र : लड़के नहीं करें भूलकर भी शादी की उम्र में ये गलतियां

    वास्तुशास्त्र के अनुसार विज्ञान दिशा और आसपास में मौजूद वस्तुओं से उत्पन्न उर्जा के प्रभाव के बारे में बताता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार सकारात्मक उर्जा प्रगती होती है जबकी नकारात्मक उर्जा से जीवन में कई प्रकार की परेशानीयां आती है।

    बता दें कि वास्तुशास्त्र का जीवन के हर में लागू होता है, इसका विवाह से भी संबंध है और वास्तुशास्त्र वैवाहिक जीवन में अपना प्रभाव दिखाता है। यदि जातक अपने जीवन में सकारात्मक प्रभाव चाहता है तो इन चीजों को करना छोडना पड़ेगा।

    इन दिशाओं में मुंह करके नहीं सोना चाहिए

    वास्तु के अनुसार, जिन कुंवारे लड़कों और लड़कियाें की शादी नहीं हो रही है, उन्हें दक्षिण और दक्षिण पश्चिम दिशा में मुंह करने नहीं सोना चाहिए। इससे जातक के विवाह में कई बाधाए आती है।

    विवाह योग्य लड़कों को अंधेरे कमरे में न सोएं

    वास्तुशास्त्र के अनुसार विवाह योग्य लड़कों को उन कमरों में सोना चाहिए, जिस कमरे में एक से अधिक दरबाजे हों। जिन कमरों में हवा और रोशनी का प्रवेश कम हो उन कमरों में नहीं सोना चाहिए। वास्तु के अनुसार ऐसे कमरे में सोने से जातक के विवाह में कई प्रकार की परेशानीयां आती है।

    काले रंग के कपड़ो को परहेज करें

    काले रंग के कपड़े और दूसरी चीजों का इस्तेमाल कम करना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार आप काले रंग से जितना दूर रहेंगे उतना बेहतर होगा।

  • जल्द होगा आपका विवाह भगवान शालिग्राम की इस तरह पूजा करने से

    जल्द होगा आपका विवाह भगवान शालिग्राम की इस तरह पूजा करने से

    आज देव उठनी एकादशी है। माना जाता है कि इस दिन से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को चार माह सोने के बाद आज जागते हैं। इन चार महीनो में देव शयन के कारण मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। भगवान विष्णु जागते हैं तभी कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो पाता है। देव जागरण या उत्थान होने के कारण इसको देवोत्थान एकादशी भी कहते हैं।

    इस दिन होता है शालिग्राम और तुलसी का विवाह…

    हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को तुलसी से शादी करने के लिए शालिग्राम का रूप लेना पड़ा था। इसलिए शालिग्राम के रूप में ही श्री हरि का विवाह भगवान विष्णु के साथ कराया जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी सर्वाधिक प्रिय हैै।

    मात्र तुलसी दल अर्पित करने से भगवान को खुश किया जा सकता है। इसके पीछे प्रकृति को संरक्षण और वैवाहिक सुख की भी महत्व है। जो लोग इसको सम्पन्न कराते हैं उनको वैवाहिक सुख प्राप्त होता है।

    इस प्रकार पूजा करने से होगा आपका शीघ्र विवाह ….

    – लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण कर लेना चाहिए।

    – शालिग्राम को स्नान कराके उनको चन्दन भी लगाएं।

    – उनको पीले रंग के आसन पर बिठाएं।

    – फिर तुलसी को अपने हाथों से उनको समर्पित करना चाहिए।

    -इसके बाद भगवान से प्रार्थना करें कि आपका विवाह शीघ्र हो जाए। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, इसके बाद आपका विवाह शीघ्र हो जाएगा।

  • कामयाबी की चाहत और संघर्ष

    कामयाबी की चाहत और संघर्ष

    वशिष्ठ चौबे

    कामयाबी की चाहत तो सभी करते हैं, किन्तु कामयाबी को पाने के लिए संघर्ष हर कोई नही करना चाहता। संघर्ष से भागते हैं, डरते हैं, कतराते हैं। सफलता सबको आकर्षित तो सभी को करती है, लेकिन उस सफलता की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले संघर्ष को कोई नहीं देखता, न ही उसकी और आकर्षित होता है। जबकि सफलता तक पहुँचने की वास्तविक कड़ी है, तो वह संघर्ष ही है। क्योंकि जीवन में अगर संघर्ष न हों, चुनौतियाँ न हों तो मनुष्य के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता। प्रखर और प्रतिभाशाली बनने के लिए संघर्ष और चुनौतियों को हर कदम पर स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना ही पड़ता है।

    पिछले लेख में भी चर्चा कर चुके हैं कि जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है। आर्थत संघर्ष ही जीवन है। इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं। जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ। किन्तु जो संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता। जिसने संघर्ष करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया।

    संघर्ष जीवन को निखारते हैं, संवारते व तराशते हैं और गढ़कर कोयले को भी हीरा बना देते हैं। संघर्ष हमें जीवन का वास्तविक अनुभव कराते हैं। सतत सक्रिय बनाते हैं। हमें जीना सिखाते हैं। जीवन को निखारते हैं। संघर्ष का दामन थामकर न केवल हम आगे बढ़ते हैं, बल्कि जीवन जीने के सही अंदाज़ को – आनंद को अनुभव कर पाते हैं। जिस जीवन में संघर्ष नहीं, वहाँ प्रसन्नता व आनंद भी नहीं टिक पाता। वहां सफलता कभी अपने कदम भी नही रखती। जिस तरह नदी के प्रवाह के सतत संपर्क में रहने से पत्थर के आकार में धीरे-धीरे परिवर्तन हो जाता है, और वह कभी इतनी सुंदर आकृति प्राप्त कर लेता है, कि पूजनीय हो जाता है।

    इसी तरह हमारा जीवन भी संघर्ष की तपिश से निखरता है, ऊँचा उठता है, मनोवांछित लक्ष्य को प्राप्त करता है। संघर्ष की लगन ही व्यक्ति की गति को थमने नहीं देती। सफलता की इमारत संघर्ष की नींव पर ही खड़ी होती है। संघर्ष आशा की किरण को टूटने नहीं देता, बल्कि उत्साह, उमंग को निरंतर बनाये रखता है। संघर्ष के बल पर ही अभावों के अंधेरों के बीच, सफलता की रोशन राहें निकलती हैं। इसलिए कभी भी संघर्ष से डरे नहीं। संघर्ष से भागें नहीं। संघर्ष से कतराएं नहीं। बल्कि डटकर संघर्ष करें। भिड़कर संघर्ष करें और पूरी ऊर्जा के साथ संघर्ष करें।

  • आज बंद हो जाएंगे शीतकालीन सत्र के लिए बद्रीनाथ धाम के कपाट

    आज बंद हो जाएंगे शीतकालीन सत्र के लिए बद्रीनाथ धाम के कपाट

    बद्रीनाथ धाम के कपाट आज यानि रविवार को शाम 5:13 बजे शीतकाल के लिए 6 माह की अवधि के लिए बंद हो जायेंगे। कपाट खुलने और बंद होने की पूर्व अवधि तक जहां मानवों द्वारा भगवान की पूजा अर्चना और दर्शन होते हैं। मान्यता है कि कपाट बंद होने पर शीतकाल में जब बद्रीनाथ में चारों ओर बर्फ ही बर्फ होती है । तो स्वर्ग से उतर पर देवता भगवान बदरी विशाल की पूजा अर्चना और दर्शन करेंगे ।

    भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद की तैयारियां भी अनुष्ठान की तरह होती है। रविवार को भगवान के कपाट बंद होने से पूर्व शनिवार को भगवान का मंदिर और सिंहद्वार हजारों फूलों से सजाया जा रहा है। रविवार को भगवान के कपाट बंद होने से पूर्व भगवान का पुष्प श्रृंगार होगा। बद्रीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी पंडित भुवन चंद्र उनियाल ने बताया भगवान बदरी विशाल का पुष्प श्रृंगार अदभुत होता है। कपाट बंद होने से पूर्व शनिवार को भगवान को भोग लगाने के बाद रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी जी ने भगवती लक्ष्मी को भगवान के सानिध्य में विराजने का न्यौता दिया। रविवार को कपाट बंद होने से पूर्व भगवती लक्ष्मी भगवान के सानिध्य में विराजेंगी।

    भगवान के कपाट बंद होने से पूर्व बद्रीनाथ मंदिर और सिंहद्वार की फूलों की सजावट देखते ही बन रही है। बद्रीनाथ केदार नाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी स्वयं मंदिर और सिंहद्वार के पुष्प श्रृंगार की प्रकृया की देख रेख कर रहे हैं। शनिवार को जैसे ही प्रात: मंदिर पुष्प श्रृंगार शुरू हुआ। आकाश से भी बर्फ की हल्की पुष्प वर्षा हुई।

    बद्रीनाथ में कपाट बंद होने की प्रक्रियाओं में अदभुत और ऐसी लोक मान्यताऐं हैं। जो हिन्दू मान्यता व धर्म के साथ साथ लोक जीवन से भी जुड़ी हैं। भगवान के कपाट बंद होने से पहले भगवती लक्ष्मी को भगवान के सानिध्य में बैठाने के लिए बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी रावल जी बद्रीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व महालक्ष्मी जी को लक्ष्मी मंदिर से आमंत्रित करने के लिए स्त्री वेश धारण पहुंचेंगे और सखी रूप में आकर लक्ष्मी जी के विग्रह को अपने साथ लाकर भगवान के सानिध्य में विराजेंगे।

    बद्रीनाथ में धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ लोक मान्यताओं का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। कपाट खुलने और कपाट बंद होने के पूर्व की अवधि तक उद्धव जी का विग्रह भगवान के साथ रखा जाता है। उद्धव कृष्ण के बाल सखा हैं। पर उम्र में वे बड़े है। इस लिए विष्णु स्वरूप भगवान बदरीविशाल की पत्नी लक्ष्मी जी के उद्धव जी जेठ हुए। इस लिए हिंदू मान्यता के अनुसार जेठ के सामने छोटे भाई की बहू पति के साथ नहीं बैठ सकती। इस लोक मान्यता का सम्मान करते हुए कपाट बंद होने से पूर्व उद्धव जी का विगृह भगवान के निकट से बाहर ला कर डोली में जाता है। और उसके बाद लक्ष्मी जी को भगवान के सानिध्य में बैठाया जाता है। बद्रीनाथ में तप करने वाले संत दंडी स्वामी राघवानंद कहते हैं कि लोक मान्यता का निर्वहन अनादि काल से हो रहा है।

    भगवान बदरीविशाल के कपाट बंद होने पर एक और अदभुत परम्परा है। कपाट बंद होने के दिन  भगवान के श्रृंगार के बाद भगवान को घृत कंबल पहनाया जाता है। भारत के अंतिम गांव माणा की कन्या एक दिन में इस उनी कंबल को बुनती हैं। और उस पर घी का लेपन कर भगवान को ओढ़ाया  जाता है। बद्रीनाथ के निवासी बदरी लाल कहते है कि अपने भगवान से आत्मीय संबंध की यह नजीर है। जिसमें भक्त सोचता है कि छह माह तक मेरे भगवान शीतकाल में ठंड में न रहें। इस लिए आत्मीयता उन्हें कंबल उडाकर भक्त अपना स्नेह और आत्मीयता प्रकट करता है। यही धर्म और लोक मान्यता, परम्परा है।

     

  • सफलता और असफलता के राज छुपे हैं आपकी ही किचन में, जाने कैसे?

    सफलता और असफलता के राज छुपे हैं आपकी  ही किचन में, जाने कैसे?

    नई दिल्ली। वास्तु के अनुसार चीजों व्यवस्थित न हो तो यह अपशगुन का कारण बनती हैं। ऐसे में घर की रसोई का विशेष ख्याल रखना चाहिए। किचन की दिशा के साथ ही साथ रसोई घर में काम आने वाले तमाम बर्तन भी शुभता और अशुभता का कारण हो सकते हैं।

    यदि उनका ठीक प्रकार से प्रयोग न किया जाए या फिर उसे उचित स्थान पर सही तरीके से न रखा जाए तो उसके परिणाम नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। किचन के बर्तनों का सही तरह से प्रयोग न करने पर वे दरिद्रता का भी कारण बन सकती हैं।

    वास्तु के अनुसार किचन में सबसे अधिक प्रयोग आने वाले बर्तनों में तवे का बहुत ज्यादा महत्व होता है। वास्तु के अनुसार तवा और कढ़ाई राहु का प्रतिनिधित्व करने वाले होते हैं। ऐसे में इनका प्रयोग करते समय विशेष ख्याल रखे जाने की जरूरत होती है।

    मसलन, तवे या कढ़ाई को कभी भी जूठा न करें ना ही उस पर जूठी सामग्री रखें। हालांकि किचन में जूठे हाथ से किसी भी बर्तन को नहीं छूना चाहिए और न ही वहां पर जूठीं सामग्री रखना चाहिए। किचन में पवित्रता का पूरा ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है। घर के इस कोने में स्वच्छता का जितना ख्याल रखा जाएगा धन आगमन के रास्ते उतने ही आसान होंगे।

    किचन में वास्तु से जुड़े नियम

    रात को खाना बनाने के बाद तवे को हमेशा धो कर रखें। जब तवे का उपयोग न करना हो तो उसे ऐसी जगह पर रखें जहां से वह आम नजरों में न आ पाए। कहने का तात्पर्य उसे खुले में रखने की बजाए किसी आलमारी या दराज में रखें।

    -तवे या कढ़ाई को कभी भी उल्टा नहीं रखना चाहिए क्योकि तवा को उल्टा रखने से घर में राहु की नकारत्मक उर्जा का संचार होता है।

    -तवा और कढ़ाई को जहां पर खाना बनाते हों, उसकी दाईं ओर रखें क्योकि किचन के दाई ओर मां अन्नपूर्णा का स्थान होता है।

    -कभी भी भूलकर गर्म तवे पर पानी न डालें। वास्तु के अनुसार ऐसा करने पर घर में मुसीबतें आती हैं।

  • भूलकर भी ना करें भगवान गणेश की पूजा करते समय ये गलतियां

    भूलकर भी ना करें भगवान गणेश की पूजा करते समय ये गलतियां

    यह बात हम सभी जानते है कि बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन जातक गणेश जी के मंदिर जाकर उनकीी उपासना करते है। हिन्दू धर्म में गणेश की पूजा बेहद शुभ मानी जाती है। कोई भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा करके ही की जाती है।

    भगवान गणेश की पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे चमत्कारी उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हें भगवान गणेश की पूजा के वक्त आपको ध्यान रखना आवश्यक है।

    भगवान गणेश की पूजा करते वक्त ना करें ये गलतियां
    (1) घर के मंदिर में एक ही भगवान गणेश की मूर्ति होनी चाहिए। अगर आप गणपति की नयी प्रतिमा लाएं भी तो पुरानी वाली प्रतिमा का विसर्जन जरूर कर दें।

    (2) भगवान गणेश को मंदिर में रखते हुए इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उनका पीठ आपको कहीं से भी ना दिखे। क्योंकि गणेश जी की पीठ देखने से जातक के घर में गरीबी आती है।

    (3) अक्सर भगवान गणेश जी की पूजा में लोग भोग के साथ तुलसी को चढ़ा देते हैं। लेकिन ध्यान दें गणपति की पूजा में कभी भी तुलसी का पत्ता या तुलसी के दल का प्रयोग नहीं करें। गणपति को हमेशा दूब चढ़ाया जाता है।

    (4) गणेश जी की पूजा में विशेषत लाल रंग का इस्तेमाल जरूर करें। ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है। भूलकर भी गणेश जी पूजा के दौरान काले रंग का प्रयोग ना करें। ना काले कपड़े धारण करें।

    (5) कोशिश करें कि गणेश जी प्रतिमा घर पर रखें जिसमें उनकी सूंढ बायीं ओर हो। ऐसी गणेश की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। साथ ही मान्यता यह भी है कि ऐसे गणपति जल्दी प्रसन्न होकर फल प्रदान करते हैं।

  • हिंदू कैलेंडर के अनुसार शुरू हो रहा है खरमास, इन दिनों नहीं होंगे मांगलिक कार्य

    हिंदू कैलेंडर के अनुसार शुरू हो रहा है खरमास, इन दिनों नहीं होंगे मांगलिक कार्य

    हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक कोई भी काम करने से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए सभी काम सफल होते हैं। हिंदू कैलेंडर के हिसाब से कुछ महीने ऐसे होते हैं जिनमें आप कोई भी सुभ काम कर सकते हैं लेकिन कुछ एक महीने ऐसे भी होते हैं जिनमें कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए। ऐसे महीने को खरमास या मालमास बोला जाता है। इस साल लगने वाले खरमास की बात की जाए तो यह 13 दिसंबर 2019 से शुरू हो रहा है जो कि अगले साल यानी 2020 के 14 जनवरी तक रहेगा।

    इस एक महीने के दौरान, शादी, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, जैसे मंगल कार्यों को नहीं किया जाता। मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान कोई भी मंगल काम करने से उसका अच्छा फल नहीं प्राप्त होता। 15 जनवरी यानी मकर संक्राति के दिन से ही देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं। 15 जनवरी को सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।

    यदि आप सोच रहे हैं कि खरमास में कोई भी शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते तो आपको बता दें कि सूर्य के धनु राशि में होने के कारण सूर्य की स्थिति कमजोर मानी जाती है। सभी मंगल कार्यों के लिए सूर्य का मजबूत स्थिति में रहना काफी जरूरी होता है। शुभ मुहूर्त देखते हुए सूर्य की स्थिति काफी जरूरी मानी जाती है। तो यदि आप भी कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो या तो उन्हें खरमास शुरू होने से पहले करें या खरमास खत्म होने के बाद। खरमास शुरू होने से पहले 30 नवंबर, 5 दिसंबर, 6 दिसंबर ,11 दिसंबर, 12 दिसंबर के दिन काफी शुभ है।

  • वास्तु शास्त्र :झाड़ू का भूलकर भी नहीं करें अपमान, वरना धन संबंधी होगी हानि

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    ज्योतिष शास्त्रों में बताया गया है जहां झाड़ू का अपमान होता है, वहां पर धन संबंधी हानि होती है। क्योंकि झाड़ू को लक्ष्मी यानी धन का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि झाड़ू पर पैर लगने से मां लक्ष्मी का अनादर होता है।

    यदि ऐसा आप के जाए तो उसी वक्त मां लक्ष्मी से क्षमा-प्रार्थना कर लेनी चाहिए।आइए आज हम आपको उन बातों के बारे में बताने जा रहे है जिनसे आपके घर में लक्ष्मी का वास होगा।

    (1) घर में कभी भी झाड़ू को उल्टा न रखें, इसे अपशकुन माना जाता है। ध्यान रखें की झाड़ू धन के समान होती है जिसे हमेशा छुपाकर रखना चाहिए क्यूंकि झाड़ू स्वयं लक्ष्मी का रूप होती है।

    (2) घर में जब भी पोछा लगाएं तो पानी में नमक जरूर डालें इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और व्यक्ति के प्रमोशन के रास्तें खुलते है।

    (3) वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सूर्यास्त के बाद यानी शाम के समय झाड़ू नहीं लगानी चाहिए इससे आर्थिक परेशानी आती है। मान्यता है कि झाड़ू को कभी भी घर के बाहर या फिर छत पर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से चोरी की वारदात होने का भय रहता है। झाड़ू को हमेशा लेटाकर रखना चाहिए। झाड़ू को खड़ा करके रखने से घर में कलह होना माना जाता है।

    (4) घर में नियमित रूप से पोछा लगाने पर लक्ष्मी का वास होने लगता है।

    (5) कोशिश करें घर की झाड़ू उजाला होने से पहले ही लगा लें , इससे तरक्की के दरवाजे खुलते है।

  • चमत्कार! इस मंदिर में मां लक्ष्मी की प्रतिमा बदलती है रंग

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    मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक अनाेखा मंदिर है जहां पर लोग मां लक्ष्मी के चमत्कार देखने के लिए दूर-दूर से आते है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां पर स्थापित मां लक्ष्मी की प्राचीन प्रतिमा है, जिसके बारे में कई प्रचलित कथाएं है।

    जानकारी के लिए बता दें कि यह प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रंग बदती है। दर्शनार्थियों के मुताबिक, सुबह में प्रतिमा का रंग सफेद, दोपहर में पीली और शाम को नीली हो जाती है। कहा जाता है कि पचमठा मंदिर का र्निमाण गोंडवाना शासन में रानी दुर्गावती के खास सेवापति रहे दीवान अधार सिंह के नाम से बने अधारताल तालाब में करवाया गया था।

    पचमठा मंदिर में अमावस की रात भक्तों का तांता लगा रहता है। पचमठा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर एक जमाने में पूरे देश के तांत्रिकों के लिए साधना का विशेष केन्द्र हुआ करता था।

    सूर्य की पहली किरण पचमठा मंदिर के पैरों पर आती है
    पचमठा मंदिर का निर्माण लगभग 11 सौ साल पूर्व कराया गया था। इसके अंदरूनी भाग में श्रीयंत्र की अनूठी संरचना की गई है। खासतौर बात यह है कि सूर्य की पहली किरण मां लक्ष्मी की प्रतिमा के चरणों पर पड़ती है।

    शुकवार को माता के मंदिर में उमड़ती है भीड़
    यह बात हम सभी जानते है कि शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। यही वजह है कि माता लक्ष्मी के इस मंदिर में हर शुक्रवार विशेष भीड़ रहती है। कहा जाता है कि शुकवार के दिन यहां मां लक्ष्मी के दर्शन कर लिए जाएं तो तो जातक की हर मानोकामना पूरी हो जाती है।

  • नहीं होगी पूरे सालपैसों की तंगी अपने पर्स में रखें 2020 शुरू होते ही इन 7 चीजों में से एक चीज

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    नए साल पर एक आम धारणा है कि पहला दिन अगर शुभ जाए, तो पूरा साल शुभ फलदायक होता है। ज्यादातर लोगों को आर्थिक परेशानी से जूझना पड़ता है। वो सारी परेशानियां तो झेल लेते हैं, लेकिन पैसों की तंगी नहीं झेल पाते ऐसे में वास्तु के अनुसार ऐसे कई उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी आर्थिक तंगी दूर कर सकते हैं-

    पर्स में रखें लक्ष्मी जी की फोटो
    ज्योतिष के मुताबिक आपको अपने पर्स में लक्ष्मी जी की बैठी हुई मुद्रा की तस्वीर पर्स में रखनी चाहिए। ऐसा करने से आपके पर्स में पैसे की कभी भी किल्लत नहीं होगी।

     

    पीपल का पत्ता
    पीपल के पत्ते को अभिमंत्रित करने के बाद आप शुभ मुहूर्त देखकर उसे अपने पर्स में रखें। ऐसा करने से आपको कभी भी कंगाली की सामना नहीं करना होगा।

     

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    माता लक्ष्मी का होगा वास
    लाल रंग के कागज पर अपनी इच्छा लिखकर लाल रेशमी धागे से गांठ बांध कर पर्स में रखें। ऐसा करने से आपकी इच्छा जल्द पूरी होगी।

     

    पर्स में रखें चावल के दाने
    चावल के दानों का हिंदू धर्म में खास महत्व हैं। कहा जाता है कि अगर आप पर्स में चुटकी भर चावल रखेंगे तो आपके पर्स से बेवजह पैसे खर्च नहीं होंगे।

     

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    माता-पिता का दिया हुआ नोट या सिक्का
    ज्योतिष के मुताबिक अगर आपको मां-पिता से या किसी बुजुर्ग से आशीर्वाद में नोट मिले हैं, तो आपको उस नोट पर केसर और हल्दी का तिलक लगाकर इसे हमेशा अपने पर्स में रखना चाहिए। इससे आपके पैसों में वृद्धि होती है।

     

    पर्स में रखें छोटा चाकू 
    ज्योतिष के मुताबिक आपको अपने पर्स में हमेशा एक छोटा-सा चाकू रखना चाहिए।

     

    दान करें 
    भगवान श्रीगणेश के मंदिर जाकर जरुमंद को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने से भाग्य का उदय होता है और पुराने पापों का असर खत्म होता है।