Category: religious

  • धनवान हो जायेंगे इस मंत्र को जपते ही, धन दौलत और मिलेगी शोहरत

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    हिंदू मान्यता के अनुसार  शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी का दिन होता है और इस दिन उनकी पूजा पाठ करने से वह प्रसन्न हो जाती हैं और घर में धन की वर्षा कर देती हैं. ऐसे में जो लोग आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं उन्हें शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए और उनके लिए इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए क्योंकि तभी उन्हें धन लाभ हो सकता है.
    आइए जानते हैं वह मंत्र और जाप की विधि.
    सबसे पहले ध्यान रहे कि इस मंत्र का जाप केवल शुक्रवार के दिन करें वह भी सुबह. सुबह के समय स्नान करें और फिर  मंत्र का जाप पूजा स्थल पर बैठकर करें.
    मंत्र- ॐ श्रीं श्रीये नम:  ध्यान रहे कि इस मंत्र का जाप 108 बार करना है. वहीं जब आपकी पूजा खत्म हो जाए तो 7 साल से छोटी कन्याओं को भोजन करवा दें और उस भोजन में खीर जरूर शामिल करें. कहा जाता है हर शुक्रवार ऐसा करने से माँ लक्ष्मी खूब प्रसन्न होती हैं और इस मंत्र का जाप हर दिन करते रहने से माँ लक्ष्मी की कृपा अवश्य होती है और धन ही धन घर में आता है. वहीं अगर आप इस शुक्रवार को इस मंत्र का जाप करने से चूक गए हों तो कोई बात नहीं है आप अगले शुक्रवार की सुबह से इस मंत्र का जाप कर सकते हैं और खुद को जल्द अमीर बना सकते हैं.

  • भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के चार महीने बाद इसी दिन अपनी निंद्रा तोड़कर जागते हैं

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    रिपोर्टर राकेश कुमार केसरवानी 
    बता दू की कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है.
    भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के चार महीने बाद इसी दिन अपनी निंद्रा तोड़कर जागते हैं.
    इस बार देवउठनी एकादशी 19 नवंबर दिन सोमवार को मनाई जा रही है. इस दिन शालीग्राम के साथ तुलसी विवाह भी कराया जाता है.मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और अटूटता आती है.तुलसी विवाह के दौरान इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए.
    देवउठनी एकादशी पर होती है तुलसी-शालिग्राम की पूजा.


    1. विवाह के समय तुलसी के पौधे को आंगन, छत या पूजास्थल के बीचोंबीच रखें.

    2. तुलसी का मंडप सजाने के लिए गन्ने का प्रयोग करें.
    3. विवाह के रिवाज शुरू करने से पहले तुलसी के पौधे पर चुनरी जरूर चढ़ाएं.
    4. गमले में शालिग्राम रखकर चावल की जगह तिल चढ़ाएं.
    5. तुलसी और शालिग्राम पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं.
    6. अगर विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक आपको आता है तो वह अवश्य बोलें.
    7. विवाह के दौरान 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें.
    8. प्रसाद को मुख्य आहार के साथ ग्रहण करें और उसका वितरण करें.
    9. पूजा खत्म होने पर घर के सभी सदस्य चारों तरफ से पटिए को उठा कर भगवान विष्णु से जागने का आह्वान करें- उठो देव सांवरा, भाजी, बोर आंवला, गन्ना की झोपड़ी में, शंकर जी की यात्रा.
    10. इस लोक आह्वान का भावार्थ है – हे सांवले सलोने देव, भाजी, बोर, आंवला चढ़ाने के साथ हम चाहते हैं कि आप जाग्रत हों, सृष्टि का कार्यभार संभालें और शंकर जी को पुन: अपनी यात्रा की अनुमति दें.

  • महाशिवरात्रि पर इन 10 तरह के शिवाभिषेक से पूरी होती है 10 तरह की मनोकामनाएं

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    महाशिवरात्रि का पर्व हिन्दू धर्म में बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा अर्चाना की जाती है।मान्यता है कि इस दिन शिव जी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर शिव जी के भक्त निर्जला व्रत रखते हैं। क्योंकि इसका बहुत विशेष महत्व बताया गया है।

    माता पार्वती और शिव जी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। साथ ही सभी संकट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि अगर शिव की आराधना किसी भी रुप में हो कल्याणकारी होती है।

    इस पर्व के मौके पर अगर आप अपनी राशि के अनुसार शिव जी का पूजन करेंगे तो आपको विशेष लाभ होगा साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी।

    शिव की आराधना में शिवाभिषेक का विशेष महत्व है। और अवसर महाशिवरात्रि का हो, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अलग-अलग फलों की प्राप्ति के लिए भगवान शिव का अभिषेक जल और दूध के अतिरिक्त कई तरल पदार्थों से किया जाता है।

    आइए जानते हैं किस धारा के अभिषेक से क्या फल मिलता है  :

    भगवान शिव को दूध की धारा से अभिषेक करने से मुर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है, घर की कलह शांत होती है।

    जल की धारा से अभिषेक करने से विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    घृत यानी घी की धारा से अभिषेक करने से वंश का विस्तार, रोगों का नाश तथा नपुंसकता दूर होती है।

    इत्र की धारा चढ़ाने से काम सुख व भोग की वृद्धि होती है।

    शहद के अभिषेक से टीबी रोग का नाश होता है।

    गन्ने के रस से आनंद की प्राप्ति होती है।

    गंगाजल से सर्वसुख व मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • होली पर करें यह 7 काम, आपको बचाएंगें हर संकट से

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    हमारे देश में हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। होली के दिन हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है। आइए जानते हैं होली पर किए गए वह 7 अनोखे काम, जो आपको हर संकट से बचाएंगें-

    कब है होली
    होली 2019 तिथि की बात करें तो, इस बार होली 21 मार्च 2019 को है और 20 मार्च 2019 को होलिका दहन है। होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त का समय 20 मार्च की सुबह 10.44 से शुरू होकर 21 मार्च की शाम 07.12 तक है।

    होली पर पढ़ें यह शुभ मंत्र
    आज हम आपको एक मंत्र के बारे में बताने जा रहें हैं, इस होली इस शुभ मंत्र को पढ़ लिया, तो सुख, समृद्धि और सफलता के दरवाजे खुल जाएंगे। सुख और समृद्धि के लिए पढ़ें होली का यह शुभ मंत्र-

    अहकूटा भयत्रस्तैरूकृता त्वं होलि बालिशैः अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिः

    इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या के रूप में करना चाहिए।

    करें यह 7 काम
    होली और दिवाली तंत्र, मंत्र और यंत्र के लिए जानी जाती है, लेकिन होली पर अगर आप कोई कठिन तंत्र-मंत्र नहीं करना चाहते हैं, तो आप यह बहुत सरल से उपाय भी कर सकतें हैं।

    होलिका का पूजन कर पान, फल, मिष्ठान्न चढ़ाएं और दूसरे दिन कुछ चुटकी भस्म लेकर धारण करें और पूजन करें, तांत्रिक प्रयोगों से रक्षा होगी।

    होली के दिन जो लोग भगवान विष्णु के दर्शन करते हैं, वे बैकुंठगामी होते हैं। अगर उनकी प्रतिमा हिंडोले (झूला) में झूलते हुए है, तो वर्ष भर यह दर्शन शुभता लाते हैं।

    नमक, मिर्च, राई लेकर अपने ऊपर से उतारकर होली में डाल दें। किसी व्यक्ति से बचाव के लिए उस व्यक्ति का नाम लेकर डालें।

    इस दिन आम मंजरी और चंदन को मिलाकर खाने की बड़ी महत्ता है।

    अशुभ ग्रहों के निवारण के लिए होली की भस्म शरीर पर लगाकर स्नान करें।

    होलिका दहन के बाद जो राख निकलती है, उस राख को शरीर पर लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जली हुई होली की गर्म राख घर में समृद्धि लाती है। साथ ही परिवार में शांति और आपसी प्रेम बढ़ता है।

    होलिका दहन के दौरान गेहूं की बाली सेंककर घर में रखने से धनधान्य में वृद्धि होती है।

    होली की आग, भस्म और धूल, बुरी आत्माओं को रखती हैं दूर
    ऐसा माना जाता है कि होली की बची हुई अग्नि और भस्म को अगले दिन प्रातः घर में लाने से घर को अशुभ शक्तियों से बचाने में सहयोग मिलता है। इस भस्म का शरीर पर लेपन भी किया जाता है। भस्म का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है-

    वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च। अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।

    होली की पूजा कैसे करें
    लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।

    इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।

  • जानिये रामायण के बाद हनुमान जी का क्या हुआ और आज वह कहां है ?

    जानिये रामायण के बाद हनुमान जी का क्या हुआ और आज वह कहां है ?

    आज भी जब हिंदू बातों में सबसे शक्तिशाली योद्धाओं का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले हनुमान का नाम लिया जाता है उनकी अपार शक्ति की कोई सीमा नहीं थी। रामायण में भी हनुमान जी की शक्ति और भक्ति का बखान किया जाता है, हनुमान भगवान शिव का रूद्र अवतार थे और रामायण में भी उन्होंने अपनी शक्ति को अपने उच्चतम स्तर तक पहुंचाया ही नहीं. नहीं तो उस स्थिति में और लंका का विनाश कर देते हनुमान जी को अमरत्व का वरदान प्राप्त था और ओर कलयुग के अंत तक इस दुनिया में विराजमान रहेंगे ।

    लेकिन हमारे मन में एक प्रश्न उठता है कि रामायण के बाद हनुमान जी का क्या हुआ और आज वह कहां है। दरअसल रामायण के बाद महाभारत में ही 2 बार हनुमान जी के होने की बात की गई है, पहली बार जब भीम जंगल में थे तो रास्ते में उन्हें एक बुजुर्ग वानर मिला. भीम ने उसे अपने रास्ते से हटने को कहा लेकिन उस वानर ने कहा कि तुम हटा दो मुझ पर इतनी शक्ति नहीं रही तब भीम ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी पर उस वानर को हिला तक नहीं सके तभी भीम समझ गए कि यह कोई साधारण वानर नहीं है फिर भीम की मांग पर उस वानर ने अपना असली रूप दिखाया वह हनुमान जी थे और ओ भीम की शक्ति का घमंड तोड़ने का सबक देने आए थे।

    इसके बाद हनुमान जी अर्जुन के रथ पर उनका ध्वज बनकर पूरे महाभारत के युद्ध में उनकी रक्षा करते रहे जब अंत में हनुमान जी अपने असली रुप में आए और वहां से चले गए उसके बाद कुछ क्षणों में अर्जुन का रथ युद्ध में राख बन गया तब श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि वह हनुमान जी थे जिनकी वजह से रक्त युद्ध में नष्ट नहीं हुआ क्योंकि इतनी विध्वंसक अस्त्र किसी भी चीज को नष्ट कर सकते थे।

    इसके बाद दुनिया के कई हिस्सों में हनुमान जी को देखे जाने की बातें आपको सुनने में मिलेगी चीन, इंडोनेशिया,कंबोडिया में भी हनुमान जी की अलग-अलग नामों से हनुमान जी की कहानियां सुनाई जाती है।अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक शक्तिशाली वानर होने की की बातें की जाती है । चैदवी सदी में ऋषि माधवाचार्य ने भी हनुमान जी के साक्षात भेंट होने की बात की थी। सतहरवी सदी में तुलसीदास ने भी माना था हनुमानजी ने ही उन्हें उन्हें रामायण का हिंदी अनुवाद करने को कहा इसके बाद और लोगों ने भी हनुमान जी को देखने और उनके होने का दावा किया।

    हर किसी का यही कहना था कि हनुमान जी आज भी वहां पर आते हैं जहां पर सच्चे मन से श्री राम नाम लिया जाता है। श्रीलंका में उनके पैरों के निशानों को आज भी उनका स्वरूप माना जाता है. हनुमान जी ने वरदान से अमृतवा को हासिल किया था और वह कलयुग के अंत तक इस दुनिया में विराजमान रहेंगे जब भगवान श्री हरि विष्णु का कल्कि अवतार बुराई का अंत करेंगे और फिर से सतयुग प्रारंभ करेंगे तब हनुमान जी भी उस महाशक्ति में लिंग हो जाएंगे ।

  • क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय

    दुनिया में दो प्रकार की ऊर्जा होती है एक सकारात्मक और नकारात्मक ( पॉजिटिव और नेगेटिव ) । जब व्यक्ति के अंदर नकारात्मक ऊर्जा प्रभावी हो जाती है तब कार्य में रुकावटें आ जाती है। जिस व्यक्ति का बृहस्पति और शुक्र ग्रह दोनों या दोनों मे से कोई एक मजबूत हो या अच्छी अवस्था में हो ऐसे व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    कैसे पहचाने किसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है

    वहीं चंद्रमा मंगल बुद्ध मजबूत हो ऐसे व्यक्ति में दोनों प्रकार की ऊर्जा रहती है सकारात्मक और नकारात्मक। जो व्यक्ति शनि ,राहु ,केतु से प्रभावित होते है उनमें नकरात्मक ऊर्जा पायी जाती है। जिन लोगों के ऊपर राहु का मुख्य प्रभाव रहता है ऐसे लोगों की नजर जल्दी लगती है एवं चंद्र बुद्ध के कमजोर होने पर लोग नजर दोष के शिकार हो जाते है ।

    कैसे पहचाने किसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है

    1 – आपकी सेहत अचानक बार बार खराब होने लगे।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    आपकी सेहत अचानक बार बार खराब होने लगे।

    2 – किसी काम को करने में मन न लगना ।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    किसी काम को करने में मन न लगना

    3 –  तुलसी पौधा बार बार सुखना।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    तुलसी पौधा बार बार सुखना

    4 – कार्य में रुकावट आना।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    कार्य में रुकावट आना

    कैसे दूर करे नकारात्मक ऊर्जा

    1 – घर को साफ सुथरा रखे ।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    घर को साफ सुथरा रखे

    2 – पूजा स्थान पर दीपक अवश्य प्रज्वालित करे l

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    पूजा स्थान पर दीपक अवश्य प्रज्वालित करे

    3 – एक चुटकी नमक अपने सर से तीन बार घुमा कर बहते पानी में डाल दें।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    एक चुटकी नमक अपने सर से तीन बार घुमा कर बहते पानी में डाल दें

    4 – चंदन की सुगंध का प्रयोग करें ।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    चंदन की सुगंध का प्रयोग करें

    5 – घर पर धार्मिक आयोजन करते रहे।

    क्या आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा है ,जिसके चलते आपके काम नही बन पाते जानिए लक्षण और उपाय
    घर पर धार्मिक आयोजन करते रहे

     

  • सावन के पवित्र महीने में ये काम बिल्कुल न करें !

    सावन के पवित्र महीने में ये काम बिल्कुल न करें !

    सावन का महीना हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्‍यताओ के अनुसार इस माह का संबंध शिव से जोड़ा गया है,इसलिए इसका महत्‍व और अधिक बढ़ जाता है। सावन के पूरे महीने आने वाले सभी सोमवार का विशेष महत्‍व बताया जाता है। इस माह शिव की आराधना करने से जातक के कष्ट दूर होते हैं। इस बार सावन 17 जुलाई से शुरू हो रहे हैं। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिव जी पर जल चढ़ाने से लेकर रुद्राभिषेक आदि करने से लाभ होते हैं। मगर शास्त्रों के अनुसार हमें इस दौरान कुछ कामों को करने से बचना चाहिए, वरना जातक को मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। तो कौन-से हैं वो काम आइए जानते हैं………..

    • सावन के महीने में भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन न करें। क्योंकि इन्हें तामसिक प्रवृति का माना जाता है। इससे व्रत का लाभ नहीं मिलेगा।
    • सावन के महीने में बैंगनी या नीले रंग के कपड़े ना पहनें। ये रंग नकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं। साथ ही ये उग्र ग्रह को दर्शाते हैं।
    •  सावन के महीने में गन्ने का जूस और काली मिर्च खाने से भी बचें। क्योंकि शिव जी को ये चीजें पसंद नहीं है। इसके सेवन से कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
    •  शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में सरसों का तेल नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि ये शनि देव को चढ़ता है। इससे उग्र भावनाएं विकसित होती हैं। जबकि भोलेनाथ शांत प्रवृति के हैं।
    •  शिव जी पर भूलकर भी हल्दी ना लगाएं। क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। इससे मुसीबतें आ सकती हैं।
    •  सावन के माह में दाढ़ी न बनवाएं और न ही बाल या नाखून काटें। ये सभी कार्य नकारात्मकता को दर्शाते हैं।
    •  सावन में दिन में सोना नहीं चाहिए। क्योंकि माना जाता है कि सावन के पूरे माह भोलेनाथ धरती पर विचरण करते रहते हैं। ऐसे में दिन में   सोने से उनका अपमान होता है।
    •   सावन के महीने में गलती से भी कांवर यात्रियों का अपमान न करें। ऐसा करने से व्यक्ति को पाप लग सकता है। इससे उनके सारे काम     बिगड़ सकते हैं।
    •  सावन के महीने में भूलकर भी गुस्सा न करें। ऐसा करने से भोलेनाथ अप्रसन्न हो सकते हैं। इससे व्रत का प्रभाव भी खत्म हो सकता है।     बाधाएं आ सकती हैं।

  • आज रात 149 साल बाद लगेगा खास चंद्र ग्रहण, क्यों खास है इस बार का चंद्र ग्रहण, जानें !

    आज रात 149 साल बाद लगेगा खास चंद्र ग्रहण, क्यों खास है इस बार का चंद्र ग्रहण, जानें !

    नई दिल्ली । 16 और 17 जुलाई को आंशिक चंद्रग्रहण होगा जिसे अरु णाचल प्रदेश के दुर्गम उत्तर पूर्वी हिस्सों को छोड़कर देश भर में देखा जा सकेगा। यह रात एक बजकर 31 मिनट से शुरू होकर चार बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसा 149 साल बाद होने जा रहा है जब गुरु पूर्णिमा के दिन ही चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा।

    यह रात को तीन बजकर एक मिनट पर पूरे चरम पर होगा जब धरती की छाया चंद्रमा के आधे से ज्यादा हिस्से को ढक लेगी।  हालांकि, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में भी लोग चंद्र ग्रहण देख पाएंगे। भारत में आज आषाढ़ पूर्णिमा का दिन है। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस लिहाज से चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व है। आइए, जानते हैं इससे जुड़ीं कुछ और खास

    इस बार के चंद्र ग्रहण की दो खास बातें हैं। पहली यह कि 149 साल बाद गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। गुरु पूर्णिमा के दिन हिंदू और बौद्ध मतावलंबी अपने आध्यात्मिक गुरुओं एवं शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करते हैं।दूसरी, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा द्वारा अपोलो 11 मिशन की लॉन्चिंग की 50वीं सालगिरह है।

    इसी मिशन में चांद पर इंसान का पहला कदम रखे जाने में सफलता हासिल हुई। पिछली बार 12 जुलाई, 1870 को गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक साथ पड़े थे। हिंदू पंचांग की मानें तो इस ग्रहण को खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है।हम जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान धरती और चांद एक सीध में आ जाते हैं। इस वजह से पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है और चांद का रौशन हिस्सा ढक जाता है।

    पृथ्वी की छाया के दो हिस्से होते हैं- केंद्रीय हिस्सा जिसे अंब्र (umbra) कहते हैं और दूसरा, बाह्य हिस्सा जिसे पेनंब्र (penumbra) कहा जाता है। जब पूरा चांद पृथ्वी की केंद्रीय छाया से गुजरता है या जब सूर्य, पृथ्वी और चांद, तीनों एक सीध में आ जाते हैं तो पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। लेकिन, जब चांद का कुछ हिस्सा केंद्रीय अथवा बाह्य छाया से होकर गुजरता है हमें आंशिक चंद्र ग्रहण देखने को मिलता है। जब चांद पर पृथ्वी की केंद्रीय छाया तनिक भी नहीं पड़ती है और वह बाह्य छाया से ही ढका रहता है तो उसे बाह्य चंद्र ग्रहण कहते हैं।याद रहे कि आंशिक चंद्र ग्रहण हमेशा पृथ्वी की बाह्य छाया के अधीन आने से ही शुरू होता है।

    इस बार चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 57 मिनट 56 सेकंड की होगी। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगा। चंद्रमा 16-17 जुलाई की मध्य रात्रि को 12:13 बजे को पृथ्वी की बाहरी छाया और 1:31 बजे केंद्रीय छाया के अधीन आ जाएगा। रात के तीन बजे चंद्र ग्रहण का सबसे ज्यादा असर दिखेगा जब चांद के सबसे बड़े हिस्से पर पृथ्वी की छाया पड़ेगी और वह काला दिखने लगेगा।देश के पश्चिमी हिस्से और केंद्रीय इलाकों में चंद्र ग्रहण की पूरी घटना देखी जा सकेगी। देश के पूर्वी इलाके के लोगों को अहले सुबह करीब-करीब उस समय दिखेगा जब चंद्र अस्त होने लगता है।

    चंद्रमा बिहार, असम, बंगाल और ओडिशा में ग्रहण की अवधि में ही अस्त हो जाएगा। इस बार का चंद्र ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका समेत यूरोप के कई हिस्सों में दिखाई देगा। एशिया में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, सिंगापुर, फिलिपींस, मलयेशिया और इंडोनेशिया के साथ ईरान, इराक, तुर्की और सऊदी अरब में भी यह नजारा दिखाई देगा।

    नंगी आंखों से चंद्र ग्रहण को देखा जा सकता है। यानी, चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी खास प्रकार के चश्मे की दरकार नहीं है। आप अपने घर से चंद्र ग्रहण देख सकते हैं, बशर्ते रात में आसमान साफ रहे। वैज्ञानिक चंद्र ग्रहण को लेकर तरह-तरह के अंधविश्वासों को खारिज करते रहे हैं।यह 2019 का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। इस वर्ष अब न आंशिक और न ही पूर्ण चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। याद रहे कि इस वर्ष जनवरी महीने में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगा था।

    अब अगले वर्ष ही चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। 2020 में कुल चार चंद्र ग्रहण लगेंगे। 10 जनवरी 2020 को पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। वह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। उसके अलावा, 26 मई 2021 को भी पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा जबकि 19 नवंबर 2021 को आंशिक चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा।वैज्ञानिकों को इस आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलेगी। बड़ी बात यह है कि इस दौरान चांद पृथ्वी के नजदीक और आकार में अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देगा।गुरु पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्र ग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा।

    शास्त्रों के नियम के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले आरंभ हो जाता है। भारतीय समय के अनुसार 16 जुलाई की शाम 4 बजकर 31 मिनट से ग्रहण का सूतक आरंभ हो जाएगा। सूतक से पहले ही गुरु पूर्णिमा की पूजा के बाद सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। चंद्र ग्रहण का राशि के अनुसार क्या प्रभाव होगा, यहां पढ़ें।

  • Nag Panchami 2019: इस उत्तम योग में करें कालसर्प दोष की शान्ति के लिए पूजा, जानें क्या है शुभ मुहूर्त

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    श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व सोमवार 05 अगस्त को दिन उत्तराफाल्गुनी तदुपरि हस्त नक्षत्र के दुर्लभ योग में पड़ रहा है। इस योग में कालसर्प-योग की शान्ति हेतु पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है। नागों को अपने जटाजूट तथा गले में धारण करने के कारण ही भगवान शिव को काल का देवता कहा गया है।

    क्यों मनाते हैं नाग पंचमी
    एक पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि शापित महाराज परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने नाग जाति को समाप्त करने के संकल्प से नाग-यज्ञ किया, जिससे सभी जाति-प्रजाति के नाग भस्म होने लगे; किन्तु अत्यन्त अनुनय-विनय के कारण पद्म एवं तक्षक नामक नाग देवों को ऋषि अगस्त से अभयदान प्राप्त हो गया।
    अभयदान प्राप्त दोनों नागों से ऋषि ने यह वचन लिया कि श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को जो भू-लोकवासी नाग का पूजन करेंगे, हे पद्म-तक्षक! तुम्हारे वंश में उत्पन्न कोई भी नाग उन्हें आघात नहीं करेगा। तब से इस पर्व की परम्परा प्रारम्भ हुई, जो वर्तमान तक अनवरत चले आ रहे इस पर्व को नाग पंचमी के नाम से ख्याति मिली।

    पूजन-मंत्र
    अगस्तश्च् पुलसतश्च् सर्वनागमेव च मम कुले रक्षाय नाग देवाय नमो नम:।।

    पूजा का शुभ मुहूर्त
    सुबह 06:22 से 10:49 पूर्वाह्न तक। सर्वार्थ योग।

    नांग पंचमी पूजा विधि
    नागों को अपने जटाजूट तथा गले में धारण करने के कारण ही भगवान शिव को काल का देवता कहा गया है। इस दिन गृह-द्वार के दोनों तरफ गाय के गोबर से सर्पाकृति बनाकर अथवा सर्प का चित्र लगाकर उन्हें घी, दूध, जल अर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात दही, दूर्वा, धूप, दीप एवं नीलकंठी, बेलपत्र और मदार-धतूरा के पुष्प से विधिवत पूजन करें। फिर नागदेव को धान का लावा, गेहूँ और दूध का भोग लगाना चाहिए।

    पूजा का महत्व
    नाग-पूजन से पद्म-तक्षक जैसे नागगण संतुष्ट होते हैं तथा पूजन कर्ता को सात कुल (वंश) तक नाग-भय नहीं होता। नाग पूजा से सांसारिक दुःखों से मुक्ति तथा विद्या, बुद्धि, बल एवं चातुर्य की प्राप्ति होती है। सर्प-दंश का भय तो समाप्त होता ही है, साथ ही जन्म-कुंडली में स्थित ‘कालसर्प योग’ की शान्ति भी होती है।

     

  • चांदी का त्रिशूल लाएं घर में, आपदाओं से होगी रक्षा

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    सावन माह भगवान शिव को अति प्रिय है। इस पवित्र माह में वास्तु के कुछ आसान से उपायों का पालन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। सावन माह में इन उपायों को आजमाने से सकारात्मक ऊर्जा में अप्रत्याशित वृद्धि होती है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।

    सावन माह में नंदी पर सवार भगवान शिव का चित्र घर के मंदिर में स्थापित करें। भगवान शिव को नीले रंग के पुष्प अर्पित करें। अच्‍छे स्वास्थ्य और सौभाग्‍य के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करें। सावन माह में एक समय ही भोजन करना चाहिए। भगवान शिव का त्रिशूल तीनों लोक का प्रतीक है। सावन मास में चांदी का त्रिशूल घर में लाने से आपदाओं से रक्षा होती है। डमरू भगवान शिव का पवित्र वाद्य यंत्र है। इसकी ध्वनि से समस्त नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। आरोग्य के लिए भी डमरू की ध्वनि असरकारक मानी गई है। सावन माह में डमरू को घर में लाएं या किसी बच्चे को इसे उपहार में दें। भगवान शिव अपने पैरों में चांदी का कड़ा धारण करते हैं। सावन मास में चांदी का कड़ा घर में लाने से तीर्थ यात्रा के योग बनते हैं। घर में आरती करते समय दो दीपक जलाएं। आरती संपन्न होने के बाद एक दीपक भगवान शिव के समक्ष रहने दें, दूसरे दीपक को घर के आंगन में रख दें। ऐसा करने से घर से नकारात्मक शक्ति दूर हो जाती हैं। सावन माह में घर में भगवान शिव के अर्द्धनारीश्‍वर स्‍वरूप की प्रतिमा स्‍थापित करें। सावन माह में रुद्राक्ष धारण करने से मन को शांति प्राप्त होती है।