डेस्क। देश में बढ़ती कट्टरता और धार्मिक असहिष्णुता के कारण इसको लेकर राजनीति भी बहुत तेज हो गई है। इसको लेकर कई तरह की बयानबाजी जारी है। नफरत की इस राजनीति में पिसने वाली सिर्फ जनता है। सोशल मीडिया पर भी इसके खिलाफ आवाजें उठाईं जा रही हैं। इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का यह कहना है कि देश में कट्टरता और हिंसा फैलाना गलत है, लेकिन कुछ गलतियां देश के बंटवारे के समय ही हुई थीं।
एक टीवी न्यूज से बात करते हुए स्वामी ने कहा, “हिंदुओं की भी गलती है। 1947 में यह साफ कर देनी चाहिए थी कि जो मुसलमान दारुल इस्लाम चाहते हैं, वो हिंदुस्तान में नहीं रह सकते हैं। ऐसा नहीं हो सकता है कि दारुल इस्लाम भी हो, हिंदुत्व भी होगा और इसमें क्रिश्चियन के जो रास्ते हैं, वह भी रहे।
उन्होंने आगे कहा हम किसी को रोकेंगे नहीं, लेकिन आप इसमें हमसे टक्कर मत लीजिए। हमारे भगवान की बुराई मत करिए। हम भी आपके पैगंबर की बुराई नहीं करेंगे।”
उन्होंने कहा, “किसी के ऊपर आक्रमण और यहां हिंसा करें यह तो पूरी तरह से गैरकानूनी है। नुपूर शर्मा को पसंद करना या न करना यह तो लोकतंत्र में कोई बड़ी बात नहीं है।
उन्होंने आगे दावा पेश किया कि यह तो सबका अधिकार हैं, बस भाषा सभ्य होनी चाहिए। आलोचना करना लोकतंत्र का एक हिस्सा है। धमकी देना कि हम तुम्हारा गला काट देंगे पर यह नहीं मान सकते और हम इस देश में इसको सहन भी नहीं कर सकते हैं।”