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  • यशवंत ने सांसदों और विधायकों से की अपील, इस बार संविधान और उसकी अंतरात्मा पर वोट

    राष्ट्रपति चुनाव:- आज राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होने होने को हैं। पक्ष विपक्ष दोनो तैयार है। पक्ष की ओर से जहां राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू मैदान में है। वही विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा मैदान में है। यशवंत सिन्हा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। इन्होंने अपने जीवन का काफी वक्त बीजेपी के साथ गुजारा है लेकिन 2018 में भाजपा छोड़कर यह तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा बने। वही आज राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाले मतदान से पूर्व उन्होंने ट्वीट कर विधायको से अपील की है कि वह संविधान और उसकी अंतरात्मा पर वोट करें।

    यशवंत ने ट्वीट कर कहा कि, इस साल राष्ट्रपति चुनाव दो व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच का चुनाव है। केवल एक पक्ष हमारे संविधान में निहित प्रावधानों और मूल्यों की रक्षा करना चाहता है। मैं सभी सांसदों और विधायकों से इस बार संविधान और उनकी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट करने की अपील करता हूं। यशवंत सिन्हा के ट्वीट पर यूजर्स जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 

     

    एक यूजर यशवंत सिन्हा के पक्ष में कहता है कि आज पहली बार अपने सांसद और विधायक न होने पर खेद हो रहा है की मेरा वोट माननीय यशवंत सिन्हा जी के लिए नही पड़ेगा। द्रौपदी मुर्मू एक रबर स्टांप साबित होंगी। उनके होने या न होने से कोई फर्क नही पड़ेगा। उनको सिर्फ सरकारी अमेंडमेंट पर दस्तखत करने होंगे। वही एक अन्य यूजर कहता है कि तानाशाह के विरुद्ध सभी विधायकों और सांसदों को एक जुट होकर श्री यशवंत सिन्हा जी को अंतरात्मा के आवाज़ पर वोट देना चाहिए। तानाशाह के विरुद्ध मौका भी है और दस्तूर भी है। 
    एक यूजर कहता है कि केवल एक पक्ष हिंदुस्तान की आत्मा को मारना चाहता है और देश को पुनः १९४७ के पहले वाली हालातों में पहुँचाने के लिए ज़िम्मेदार है. सिन्हा साहेब आप उस बिचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस विचारधारा को हराना हर हिंदुस्तानी का कर्तव्य है।

  • हिमाचल में भाजपा की प्रतिष्ठा लगी दाव पर

    राजनीति:- हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने हो है। यह वैसे तो छोटा राज्य है लेकिन भाजपा के लिए यहां अपनी जीत कायम रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का गढ़ माना जाता है। लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस बार हिमाचल को जीतने की कवायद में लगी हुई है। कांग्रेस की रणनीति भाजपा को सत्ता से बाहर कर राजनीति में अपना पुनः वर्चस्व स्थापित करने की है। कांग्रेस अपनी जीत सुनिश्चित करने की कवायद में जुट गई है लेकिन भाजपा भी इस मामले में पीछे नहीं है।

    अगर हम हिमाचल प्रदेश में होने वाले चुनाव की बात करे तो दोनो पार्टी अपना अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए जनता को साधने लगी है ओर जनता से जुड़कर राजनीति कर रही है। हिमाचल में इस समय भाजपा की सत्ता है। वही इस बार का चुनाव भाजपा के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि साल 2017 में हिमाचल में भाजपा ने चुनाव प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में लड़ा था। लेकिन विधानसभा चुनाव में उन्हें हार मिली जिसके बाद हिमाचल प्रदेश की बागडोर को भाजपा ने जयराम ठाकुर को सौंपी। 
    जब जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उनके बाद जेपी नड्डा को भाजपा अध्यक्ष का पद मिला। वही अब इस बार के चुनाव में हिमाचल विजय का सारा बोझ इन दोनों के कंधे पर है। हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य को समझे तो यहां ज्यादा आबादी सवर्ण जाति की है यह राजपूत बाहुल्य राज्य है। वही राजपूत के बाद यहां दलित समाज की बहुलता है। हिमाचल में 32 फीसदीं राजपूत और 25 फीसदीं दलित समाज है। इसके अलावा यहां 18 फीसदी ब्राह्मण ओर 14 फीसदीं पिछड़ा वर्ग है। हिमाचल की राजनीति में राजपूत समाज की अहम भूमिका है यह काफी सक्रियता से राजनीति में भागीदारी करते हैं।
    हिमाचल प्रदेश की 48 सींटो में से 33 विधायक है जो राजपूत समाज से है। इनमें भाजपा के 18, कांग्रेस के 12, दो निर्दलीय और एक माकपा विधायक शामिल । अब आकड़ो को देखकर स्पष्ट है कि हिमाचल में भाजपा ओर कांग्रेस दोनो राजपूत समाज को आकर्षित करने की रणनीति तैयार कर रही है ओर इन्ही पर वह अपना दाव खेलगे। जानकारी के लिए बता दें कांग्रेस ने हाल में भाजपा के पूर्व मंत्री खीमी राम शर्मा को अपने पाले में कर लिया। वही सूत्रों का कहना है कि अभी भाजपा के कई अन्य नेता कांग्रेस परिवार का हिस्सा बनेंगे। अब अगर वास्तव में ऐसा होता है तो हिमाचल में भाजपा को अपनी विजय का बगुल फूंकना आसान नहीं होगा।

  • मरते दम तक शिवसेना का साथ देने का वादा तोड़ क्यों बदले विधायक ने अपने तेवर

    Maharashtra: महाराष्ट्र में मचे सियासी संग्राम के बाद जहां उद्धव ठाकरे के हाथों से सत्ता चली गई है। वही शिवसेना की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही है। शिवसेना नेता लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। वही अब खबर आ रही है कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष और मंत्री रहे रामदास कदम ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। रामदास के इस्तीफे से पहले उनके बेटे विधायक योगेश कदम ने शिंदे के दल को ज्वाइन कर लिया।

     
    रत्नागिरी में खेड़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राम कदम शिवसेना के उन कई बागी नेताओं में शामिल हैं जिन्हें शिंदे का पक्ष लेते देखा गया है। जानकारी के लिए बता दें  रामदास कदम का पिछले महीने परिवहन मंत्री अनिल परब के साथ अनबन हो गई थी और उन्होंने शिवसेना में दरकिनार किए जाने की शिकायत की थी। वही अब खबर है कि परब के साथ विवाद के बाद कदम शिवसेना छोड़ देंगे।
    सूत्रों का कहना है कि कदम ने पार्टी सांसद और प्रवक्ता संजय राउत से मिलने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद यह अटकलें तेज है कि अब कदम शिवसेना से अलग हो जायेगे। बता दें जब उद्धव ठाकरे और शिवसेना के मध्य घमासान छिड़ा था तब कदम ने एक बयान दिया था कि वह मरते दम तक शिवसेना का साथ नही छोड़ेंगे। मैं उद्धव ठाकरे का समर्थन करता रहूंगा। यह सच है कि मेरे बेटे को पार्टी के नेतृत्व से शिकायतें है लेकिन मैं शिवसेना का साथ नही छोडूंगा।

  • टीवी डिबेट में संबित पात्रा बोले : बच्चा-बच्चा जनता है गला काटने वालो को, AIMIM और कांग्रेस नेताओं से हुई बहस

    डेस्क। बिहार के फुलवारी शरीफ से पुलिस ने आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में अब तक तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मोहम्मद जलालुद्दीन, अतहर परवेज और अरमान मलिक के तौर पर की गई है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से इसके संबंध बताए जा रहें हैं। इस विषय पर आज तक समाचार चैनल पर डिबेट के दौरान बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत में तीखी बयानबाजी हुई।

    आज तक न्यूज़ चैनल के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘दंगल’ में हो रही इस डिबेट के दौरान संबित पात्रा ने AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान पर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘ किस के तार आतंकवादियों से जुड़े हुए हैं और कौन सिर काटना जानता है, यह बात यहां पर बच्चा-बच्चा जानता है।’ 

    आगे उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक राष्ट्र पर जब वारिस पठान से सवाल किए गए तो वह ड्रग के विषय पर मुझसे सवाल कर रहे थे।

    संबित पात्रा ने कहा कि 15 मिनट पुलिस हटा दो फिर देखो हिंदुओं का क्या हाल होगा? इस तरह का बयान देने वाले लोग दूसरों को क्या सिखाएंगे। 

    इस बीच वारिस पठान और सुरेंद्र राजपूत बोलने लगे तो संबित पात्रा ने तंज कसते हुए कहा कि इन दोनों मौसेरे भाइयों को कुछ देर के लिए चुप करवा दीजिये। आगे उन्होंने कहा कि जब ड्रग के ऊपर बहस होगी तो उस पर कर लेंगे लेकिन अभी आतंकवाद पर चर्चा हो रही है इनको शांत करवाइए।

    संबित पात्रा ने याकूब मेमन की फांसी पर भी सवाल उठाने वाले लोगों पर हमला बोला और कहा कि इस देश में इस तरह के भी कुछ लोग रहते हैं। जब हैदराबाद में 9 आतंकवादी पकड़े जाते हैं तो वारिस पठान की पार्टी के लोग उनको बचाने के लिए आ जाते हैं। 

    इसके बाद सुरेंद्र राजपूत ने संबित पात्रा पर पलटवार करते हुए कहा कि इनको अपने भारत पर नहीं बल्कि पाकिस्तान के ISIS और याकूब मेमन पर भरोसा है। 

    संबित पात्रा ने इस पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि आपके पार्टी के नेता ही पाकिस्तान में जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने की बात करते है या नहीं? इस दौरान दोनों ही पार्टी के नेताओं के बीच तीखी बहस होने लगी।

     

  • कांग्रेस के हाथ से गुजरात की इस सींट को छीनने की कोशिश में जुटी भाजपा

    गुजरात चुनाव: गुजरात में इस साल के अंत मे होने वाले विधानसभा की तैयारी उफान पर चल रही है। बड़े नेताओं का गुजरात दौर कई महीनों पहले ही आरंभ हो गया था। गुजरात मे जहां मुख्य दल के रूप मे भाजपा और कांग्रेस आमने सामने खड़ी है। वही आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम भी गुजरात मे अपनी धाक जमाने की कोशिश में लगी हुई है। आप कांग्रेस की धमक कम कर स्वयं को कांग्रेस के रूप में गुजरात मे स्थापित करना चाहती है। लेकिन आप के लिए यह आसान काम नहीं होगा क्योंकि गुजरात की जनता की नजर में गुजरात मे केवल दो दी दल मुख्य है भाजपा और कांग्रेस।

    भाजपा बीते 30 साल से गुजरात मे राज कर रही है। वही भाजपा से पहले कांग्रेस का गुजरात में आधिपत्य रहा है। आज भले ही कांग्रेस गुजरात की सत्ता से बाहर है लेकिन गुजरात की बहुत बड़ी जनसंख्या आज भी कांग्रेस के पक्ष में खड़ी है जिसे तोड़ना आसान नहीं है। वही अगर हम गुजरात विधानसभा की दसाडा सीट की बात करे तो यह काफी महत्वपूर्ण सींट है। यह सींट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। गुजरात की इस सींट पर जनता के वोट बैंक को समझना मुश्किल है कोई यह अनुमान नही लगा सकता है इस विधानसभा सींट पर किस पार्टी के समर्थन में जनता के।
    इस सींट पर 1990 से 7 बार विधानसभा चुनाव हुआ है। इस सींट पर भाजपा को 5 बार तो कांग्रेस को 2 बार जीत हासिल हुई है। साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में इस सींट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। भाजपा को साल 2017 में 4000 से कम मत से कांग्रेस से हार झेलनी पड़ी थी। वही इस बार भाजपा अपनी पिछले बार की कमियों को खत्म कर इस कोशिश में लगी हुई है कि वह इस सींट पर अपनी जीत का ध्वज कैसे लहराए ओर कांग्रेस के हाथ से यह सींट छीन ले। बता दें साल 2017 में 10 साल बाद कांग्रेस ने इस सींट पर अपनी जीत दर्ज की थी। इससे पहले इस सींट पर भाजपा का दबदबा था। कांग्रेस प्रत्याशी नौशाद जी सोलंकी ने भाजपा प्रत्याशी रमण लाल ईश्वरलाल बोरा को 3728 मत से हराया था।
    जानकारी के लिए बता दें यह सबसे ज्यादा दलित वोट बैंक वाली विधानसभा सींट है। इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या ढाई लाख के करीब मानी जाती है. इस विधानसभा पर कांग्रेस और भाजपा दोनो की उम्दा पकड़ है यहां की जनता अपने मुड़ ओर प्रत्याशी के बलबूते पर मतदान करती है। अब देखना यह है कि इस साल इस सींट पर किसी जीत हासिल होती है ओर कौन इस सींट के दलितों को लुभा पाएगा।।

  • सरकार पर बरसे वरुण कहा, क्या हम किसी बड़ी घटना के इंतजार में हैं?

    देश: सत्ताधारी दल भाजपा के पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी आय दिन आपके बयान को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। यह अक्सर देश के ज्वलंत मुद्दों पर ट्वीट कर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहते हैं। वही अब वरुण गांधी ने फ्लाइट्स में हो रही तकनीकी खराबी के चलते आपात लैंडिंग के मुद्दे पर सवाल उठाया है। 

    वरुण गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्वीटर पर कहा है कि जब घरेलू फ्लाइट्स की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं तब तकनीकी खराबी की वजह से देशभर में लगातार विमानों की आपातकाल लैंडिंग के समाचार मिल रहे हैं। गत 2 महीनों में ही 17 उड़ानें प्रभावित हुई जो बेहद चिंताजनक है। DGCA को सख्ती दिखानी होगी…क्या हम किसी बड़ी घटना के इंतजार में हैं?

     

    वरुण के ट्वीट पर यूजर्स की प्रतिक्रिया: 

    एक यूजर कहता है उड्डयन विभाग की लापरवाही और लाल फ़ीताशाही साफ़ देखी जा रही है, क्या परिवर्तिति युवा नेतृत्व जिन्हें इस विभाग की ज़िम्मेदारी दी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया , क्या वो इस विषय को गम्भीरता से नहीं ले रहे ? क्या वो Forescasting एवं audit जैसे नए जमाने के विषय लागू नहीं कर पा रहे हैं। वही दूसरा यूजर कहता है कि हवाई चप्पल वालों को सपना बेचने वाले अब शांत हैं। अब 80 करोड़ के पास तो हवाई चप्पल ही नहीं रही और ऊपर से देश के अंदर किराए दुगने हो गए उस पर रोज़ किसी न किसी फ्लाइट में पन्गा। क्या यात्रा सुरक्षित है??

  • अनुपम खेर ने लिखा मैं द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति घोषित करता हूं छिड़ गया विवाद

    डेस्क। राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हो चुका है इसके साथ ही सियासी खींचतान और बयानबाजी की राजनीति चरम पर पहुँच चुकी है। 21 जुलाई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। वहीं 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह होगा। हालांकि इसी बीच अब अभिनेता अनुपम खेर ने एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लेकर ट्वीट भी किया है और उन्हें राष्ट्रपति भी घोषित कर दिया है।

    अनुपम खेर ने ट्वीट कर लिखा कि ‘पिछले कुछ दिनों से एक वाक्य मेरे मन में बार-बार गूंज रहा है! आज सोचा की लिख ही दूं! “मैं भारत का नागरिक विनम्रता पूर्वक द्रौपदी मुर्मू जी को भारत का राष्ट्रपति घोषित करता हूँ” जय हिंद!’ अनुपम खेर के इस ट्वीट पर अब लोग अपनी राय लिख रहे हैं। कुछ लोगों ने तो उनके इस ट्वीट के लिए उनको लताड़ा भी है।

    एक यूजर ने लिखा कि ‘महोदय राष्ट्रपति का चुनाव होता है कोई आप जिल्ले इलाही नहीं हैं जो किसी को ऐसे ही राष्ट्रपति घोषित कर दें। या तो आप अनपढ़ हैं या लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते?’ 

     

    एक यूजर ने व्यंग करते हुए लिखा कि ‘एक दिन पहले ये घोषणा कर देते तो कम से कम चुनाव ही ना कराना पड़ता और हमारे पैसे भी बच जाते।’ 

    पुष्पेन्द्र सिंह चौहान नाम के एक यूजर ने लिखा कि ‘तुम कौन होते हो राष्ट्रपति घोषित करने वाले?’ 

    एक यूजर ने यहां तक लिख दिया कि ‘अंकल, आपको यह पहले ही बता देना चाहिए था, जरूरी नहीं कि चुनाव ही हो। इससे 5000 (सांसदों और विधायकों) का समय और पैसा सब बच जाता। अगली बार कृपया इस तरह के विचारों को थोड़ा पहले से हमारे साथ साझा करें।’

    मीडिया रिपोर्ट्स में भी एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया था लेकिन द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने के लिए कई विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा से बाय बोल दिया। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में द्रौपदी मुर्मू को 60 फीसदी से अधिक वोटों से राष्ट्रपति बनने का दावा भी पेश किया है।

  • बेहाल हुआ बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे अखिलेश बोले भाजपा का भ्रष्टाचार देखिये

    उत्तरप्रदेश: अभी हाल ही में बुंदेलखंड एक्सप्रेस का भव्य उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया ओर कहा कि यह एक्सप्रेस वे बुंदेलखंड के लिये खुशियां लेकर आया है। इसके बनने से बुंदेलखंड विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा ओर बुंदेलखंड में रोजगार बढेगा। वही अब इस विकास के मॉडल की एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है ओर कहा यह भाजपा का भ्रष्टाचार है।

    अखिलेश ने ट्वीट कर कहा है कि ये हैं भाजपा के तथाकथित नवीनतम विकास के नवीनतम खंडहर! बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की ये जो दरार है दरअसल ये भाजपा का भ्रष्टाचार है। जनता को नफ़रत की राजनीति में झोंक कर विकास के नाम पर आटे तक पर वसूले जा रहे पैसों से क्या ऐसा ही विकास होगा। कारवाँ ठहर गया… वो सरकारें तोड़ते रहे… 

     

    देखे अखिलेश के ट्वीट पर यूजर्स की प्रतिक्रिया:-

    एक यूजर कहता है कि 5 दिन पहले उद्घाटन किया गया बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का हाल देखिये.इसको बनाने में कितना भ्रष्टाचार हुआ होगा, सोचिये। ठेकेदारों और नेताओं को लोगों की जान की भी फिक्र नहीं। एक यूजर कहता है कि पूरे देश को एक सुनियोजित तरीके से लूटा जा रहा है चंद्र पूंजीपति रोज कमाई के नए नए रिकॉर्ड बना रहे हैं अदानी अंबानी की गुलामी सरकार ने जनता को खून के आंसू रो लाए हैं। 
    एक यूजर मोदी के पुराने वादों को इंगित करते हुए कहता है कि कहा था विकाश की गंगा बहा देंगें वही किया है. विकाश को गंगा में बहा दिया है। क्या करें जब हम सभी देशवासियों के समझ में नहीं आता है। एक बार में विकाश कर दें गे तो फिर आगे क्या करेंगे। वही एक अन्य यूजर कहता है कि मंत्री जी बता रहे है कि प्रधानमंत्री जी के उद्घाटन के बाद सड़क का तकनीकी परीक्षण करा रहे है। डबल इंजन भाजपा सरकार ने सड़क निर्माण की नई नीति व डिज़ाइन तैयार किया है जिसका परीक्षण जनता पर होगा।

  • गिरफ्तारी पर बोले राहुल पुलिस और एजेंसियों का दुरूपयोग कर हमें गिरफ़्तार, चुप नहीं करा पाओगे, तानाशाही

    Rahul Gandhi: राहुल गांधी को विजय चौक से पुलिस ने हिरासत में लिया है। राहुल विजय चौक पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस हिरासत के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने ट्वीट कर कहा, तानाशाही देखिए, शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं कर सकते, महंगाई और बेरोज़गारी पर चर्चा नहीं कर सकते। पुलिस और एजेंसियों का दुरूपयोग करके, हमें गिरफ़्तार करके भी, कभी चुप नहीं करा पाओगे। ‘सत्य’ ही इस तानाशाही का अंत करेगा। 

     

    राहुल गांधी के ट्वीट पर यूजर्स जमकर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। राहुल गांधी का शांतिपूर्ण आंदोलन सभी लोगो ने देखा है , पत्थर मारना , पुलिस को गालियां देना , यह शांति पूर्ण आंदोलन है । राहुल गांधी का , सरकारी प्रॉपर्टी को नुकसान पोहचाना ।। वही दूसरा यूजर कहता है कि जिस समय भाजपा कारगिल शहीदों के ताबूत में घोटाला कर रही थी, उस वक़्त सोनिया गांधी जी घायल सैनिकों के लिए अपना रक्तदान कर रहीं थी। 
    एक यूजर कहता है कि करके राहुल गांधी को गिरफ्तार, हौसले तोड़ नहीं पाएगी सरकार। संसद के जिस आंगन से तानाशाही हुकूमत ने राहुल गांधी को गिरफ्तार किया है, भाजपा को वहां भी मुँह तोड़ जवाब मिलेगा। एक यूजर हेराल्ड केस का जिक्र करते हुए कहता है हेराल्ड कैसे पुराना है। उस समय कांग्रेस की सरकार थी तब दुरुपयोग करके ईडी और पुलिस का पूछताछ से बचती रही कांग्रेस। जब पूछताछ हो रही तो फड़फड़ाना देखो जब समन भेजा, ईडी ने भी बुला लिया पूछताछ भी हो ही रहा तो फिर ये प्रदर्शन के नाम पर तमाशा क्यों? खैर इकलौता यही काम जो बचा है।

  • हवा-हवाई राजनीति करते हैं ओम प्रकाश राजभर : स्वामी प्रसाद मौर्य

    डेस्क। सपा-सुभासपा का गठबंधन खत्म होने के बाद से ही तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं। इस कड़ी में अब पूर्व कैबिनेट मंत्री और सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर भी तंज कसा है। उन्होंने यह भी कहा कि ओमप्रकाश राजभर हवा-हवाई राजनीति करते हैं और वो अपने दम पर एक विधायक को भी नहीं जिता सकते।

    स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में कहा कि ओम प्रकाश राजभर का गठबंधन समाजवादी पार्टी में मेरे आने से पहले ही हो गया था, इसलिए मुझ पर उनकी खीज मिटाना बहुत ही हास्यास्पद है।

     मौर्य ने यह भी कहा कि राजनीति या तो विचारों की होती है या फिर हिस्सेदारी की। हिस्सेदारी की जहां तक बात है तो पिछले 20 साल पहले राजभर ने पार्टी बनाई थी।

    पूर्व कैबिनेट मंत्री ने यह भी कहा कि राजभर अपने बलबूते पर कभी एक भी विधायक नहीं जिता पाएं। जब भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन में गए चार विधायक जीते। समाजवादी पार्टी के गठबंधन में आए तो छह विधायक जीते। यहां उन्हें टिकट भी ज्यादा मिले और सीट भी ज्यादा जीतीं।

    मीडिया में आए दिन राजभर के बयानों को लेकर स्वामी प्रसाद ने शिकंजा कसते हुए कहा कि राजभर केवल हवा-हवाई राजनीति करते हैं। वो बयान बहादुर बनकर के दिन में 10 तरह के बयान ही देते रहते हैं।