Category: politics

  • MP Assembly Election 2023: कांग्रेस ने दिखाई समाजवादी पार्टी को औकात, जेडीयू की तो ?

    MP Assembly Election 2023: एकता की बड़ी – बड़ी बातें करने वाले विपक्षी गठबंधन इंडिया के तारा मध्यप्रदेश में टूटे नजर आ रहे हैं। गठबंधन में शामिल दोनों में अपने ही साथियों के विरोध में प्रत्याशी उतारा दिए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू और आम आदमी पार्टी सब चुनावी मैदान में एक दूसरे के विरोध में ताल ठोंक रहे हैं। वही बीजेपी इंडिया गठबंधन के दलों पर जमकर कटाक्ष कर रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा इंडिया गठबंधन के लोग एक दूसरे से लड़कर स्वयं को एक दूसरे का साथी बता रहे हैं। 

    जानें क्या बोले शिवराज सिंह:

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शायराना अंदाज में इंडिया गठबंधन पर बरसते हुए कहा- दिल के टुकड़े हजार हुए कोई इधर गिरा कोई उधर गिरा। गठबंधन के लोग स्वयं को एक दूसरे का साथी बताते हैं और एक दूसरे का जमकर विरोध करते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बोले कांग्रेस और सपा का विवाद उजागर है। गठबंधन के लोग केंद्र में एकता दिखाते हैं और राज्य में लड़ते नजर आते हैं। उनकी दशा से स्पष्ट है कि उनके गठबंधन में छेद है। जो लोग आज धोखे की दुकान में मोहब्बत ढूढ़ने पहुँच गए हैं वह आज स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 

    कांग्रेस को लेकर क्या बोले बिहार बीजेपी अध्यक्ष:

    बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा- कांग्रेस अपनी हैसियत जानती है। कांग्रेस को पता है उनका राजनीतिक ताना -बाना कितना मजबूत है। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को एमपी में उनकी असली जगह दिखाई है। एमपी में जेडीयू की कोई हैसियत नहीं है। असल में जेडीयू का तो बिहार में भी खाता नहीं खुलने वाला है। 

  • Ashok Gehlot Press Conference: राजस्थान चुनाव में ताल मिलाने पहुँची ED, गहलोत ने लगाए गंभीर आरोप

    Ashok Gehlot Press Conference: राजस्थान में चुनाव की तरीख नजदीक आ रही है और ईडी (ED) की कार्यवाही कांग्रेस नेताओं को खूब सता रही है। बीते दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को ईडी (ED) का समन दिया गया तो आज राजस्थान कांग्रेस चीफ गोविद डोटासरा के कई ठिकानों पर ईडी (ED) ने छापा डाला। ईडी की कार्यवाही से भड़के राजस्थान (Rajasthan) के सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा देश भर में अब ईडी (ED) के छापों का आतंक मचा हुआ है। बीजेपी सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोग कर राजस्थान में हमारी गारंटियों को रोकना चाहती है। ED, CBI और इनकम टैक्स के आतंक ने देश में तबाही मचा दी है। 

    क्या बोले अशोक गहलोत:

    अशोक गहलोत ने कहा कांग्रेस चीफ गोविद डोटासरा किसान के बेटे हैं। उनके ठिकानों पर अचानक से ईडी (ED) का छापा पड़ता है। छापा तब पड़ता है जब किरोड़ी मीणा वहां धरना दे रहे थे। वह उन लोगों के साथ मिले हुए हैं उनको टिकट नहीं मिला तो वह इतना गिर गए हैं। पीसीसी के यहां जो कार्यवाही हुई चलो एक बार को मान लेते हैं उसके मायने हैं लेकिन कल ही वैभव गहलोत को ईडी (ED) का नोटिस मिलता है और आज उनको 26 को बुला लिया जाए है यह आखिर क्या है। 

    उन्होंने आगे कहा – मुझे समझ नहीं आता जहां चुनाव होता है वहां ईडी (ED) की दस्तक क्यों होती है। राजस्थान में बीजेपी का दम निकल गया है। केंद्र सरकार हमारी सरकार गिराने में विफल रही। उनको इसका दर्द है हम समझ सकते हैं। लेकिन वह सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोग कर रहे हैं। वह चाहें जितनी कोशिश करलें उनको सफलता नहीं मिलेगी। जनता का समर्थन हमारे साथ अबकी राजस्थान में बीजेपी का सूपड़ा साफ़ होगा। 

    क्यों बुलाए गए वैभव गहलोत:

    ईडी (ED) ने जस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को फेमा मामले में पूछताछ के लिए जयपुर में बुलाया है। बताया जा रहा है कि वैभव का संबंध ‘ट्राइटन होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘वर्धा एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड’ और इसके डायरेक्टर्स व प्रमोटर शिव शंकर शर्मा, रतन कांत शर्मा और अन्य के खिलाफ ईडी की रेड से है। 

  • Rahul Gandhi’s Chhattisgarh Rally: Unveiling the Jatigat Janaganana Controversy

    Rahul Gandhi’s recent rally in Chhattisgarh has brought the Jatigat Janaganana (caste-based census) controversy into the spotlight. In a passionate speech, the Congress MP questioned the Central Government’s reluctance to conduct a caste-based census, a topic that has been a subject of debate in the country.

    “Why do you shy away from releasing the caste-based census data if you claim to work for the oppressed?” Gandhi asked, addressing the government. He emphasized the need for transparency and called upon the government to release the statistics that were gathered during a previous census conducted by the Congress-led government.

    The Prime Minister, Narendra Modi, often uses the term “OBC” (Other Backward Classes) in his speeches, making it a point of discussion. However, Gandhi questioned why the government hesitates to conduct a caste-based census if they are genuinely working for the OBCs.

    Gandhi also criticized the government’s treatment of laborers and the policies they have implemented. He highlighted that while the government’s actions seem to favor industrialists like Adani, the Congress party is focused on policies that benefit farmers, tribals, Dalits, and marginalized communities. He pointed to the success of the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) as an example of their commitment to the welfare of the underprivileged.

    He further raised concerns about the bureaucracy in India, stating that only a small number of people, specifically those from the marginalized sections, hold significant positions in the government. He highlighted that a mere 3 out of 90 officers in control belong to the backward classes.

    Gandhi also called attention to the country’s budget, which stands at a staggering 45 lakh crore rupees. He argued that the government can take two approaches to governance: either focus on the welfare of the wealthiest or prioritize the needs of the poorest, laborers, and the unemployed. He claimed that the Congress party is dedicated to helping the latter.

    In the recent Lok Sabha session, Rahul Gandhi reiterated the need for a more accurate representation of OBCs in India’s population data. He claimed that the OBC population is likely closer to 50-55% in India, a significantly higher figure than the 5% figure that has been mentioned in official records. He emphasized the importance of the OBC community knowing their actual representation for better policy formulation.

    Gandhi concluded his speech by highlighting the promises made by the Congress party in the previous elections, which included fair compensation for farmers, loan waivers, and subsidized electricity bills. He stated that his party has fulfilled these commitments, disproving the skepticism of the opposition.

    Rahul Gandhi’s rally in Chhattisgarh revolved around the controversial issue of caste-based census and the government’s policies concerning marginalized communities. The event shed light on the debate and garnered significant attention from the public and media.

  • MP Assembly Election 2023: कांग्रेस ने दिखाई समाजवादी पार्टी को औकात, जेडीयू की तो ?

    MP Assembly Election 2023: एकता की बड़ी – बड़ी बातें करने वाले विपक्षी गठबंधन इंडिया के तारा मध्यप्रदेश में टूटे नजर आ रहे हैं। गठबंधन में शामिल दोनों में अपने ही साथियों के विरोध में प्रत्याशी उतारा दिए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू और आम आदमी पार्टी सब चुनावी मैदान में एक दूसरे के विरोध में ताल ठोंक रहे हैं। वही बीजेपी इंडिया गठबंधन के दलों पर जमकर कटाक्ष कर रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा इंडिया गठबंधन के लोग एक दूसरे से लड़कर स्वयं को एक दूसरे का साथी बता रहे हैं। 

    जानें क्या बोले शिवराज सिंह:

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शायराना अंदाज में इंडिया गठबंधन पर बरसते हुए कहा- दिल के टुकड़े हजार हुए कोई इधर गिरा कोई उधर गिरा। गठबंधन के लोग स्वयं को एक दूसरे का साथी बताते हैं और एक दूसरे का जमकर विरोध करते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बोले कांग्रेस और सपा का विवाद उजागर है। गठबंधन के लोग केंद्र में एकता दिखाते हैं और राज्य में लड़ते नजर आते हैं। उनकी दशा से स्पष्ट है कि उनके गठबंधन में छेद है। जो लोग आज धोखे की दुकान में मोहब्बत ढूढ़ने पहुँच गए हैं वह आज स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 

    कांग्रेस को लेकर क्या बोले बिहार बीजेपी अध्यक्ष:

    बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा- कांग्रेस अपनी हैसियत जानती है। कांग्रेस को पता है उनका राजनीतिक ताना -बाना कितना मजबूत है। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को एमपी में उनकी असली जगह दिखाई है। एमपी में जेडीयू की कोई हैसियत नहीं है। असल में जेडीयू का तो बिहार में भी खाता नहीं खुलने वाला है। 

  • Ashok Gehlot Press Conference: राजस्थान चुनाव में ताल मिलाने पहुँची ED, गहलोत ने लगाए गंभीर आरोप

    Ashok Gehlot Press Conference: राजस्थान में चुनाव की तरीख नजदीक आ रही है और ईडी (ED) की कार्यवाही कांग्रेस नेताओं को खूब सता रही है। बीते दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को ईडी (ED) का समन दिया गया तो आज राजस्थान कांग्रेस चीफ गोविद डोटासरा के कई ठिकानों पर ईडी (ED) ने छापा डाला। ईडी की कार्यवाही से भड़के राजस्थान (Rajasthan) के सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा देश भर में अब ईडी (ED) के छापों का आतंक मचा हुआ है। बीजेपी सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोग कर राजस्थान में हमारी गारंटियों को रोकना चाहती है। ED, CBI और इनकम टैक्स के आतंक ने देश में तबाही मचा दी है। 

    क्या बोले अशोक गहलोत:

    अशोक गहलोत ने कहा कांग्रेस चीफ गोविद डोटासरा किसान के बेटे हैं। उनके ठिकानों पर अचानक से ईडी (ED) का छापा पड़ता है। छापा तब पड़ता है जब किरोड़ी मीणा वहां धरना दे रहे थे। वह उन लोगों के साथ मिले हुए हैं उनको टिकट नहीं मिला तो वह इतना गिर गए हैं। पीसीसी के यहां जो कार्यवाही हुई चलो एक बार को मान लेते हैं उसके मायने हैं लेकिन कल ही वैभव गहलोत को ईडी (ED) का नोटिस मिलता है और आज उनको 26 को बुला लिया जाए है यह आखिर क्या है। 

    उन्होंने आगे कहा – मुझे समझ नहीं आता जहां चुनाव होता है वहां ईडी (ED) की दस्तक क्यों होती है। राजस्थान में बीजेपी का दम निकल गया है। केंद्र सरकार हमारी सरकार गिराने में विफल रही। उनको इसका दर्द है हम समझ सकते हैं। लेकिन वह सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोग कर रहे हैं। वह चाहें जितनी कोशिश करलें उनको सफलता नहीं मिलेगी। जनता का समर्थन हमारे साथ अबकी राजस्थान में बीजेपी का सूपड़ा साफ़ होगा। 

    क्यों बुलाए गए वैभव गहलोत:

    ईडी (ED) ने जस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को फेमा मामले में पूछताछ के लिए जयपुर में बुलाया है। बताया जा रहा है कि वैभव का संबंध ‘ट्राइटन होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘वर्धा एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड’ और इसके डायरेक्टर्स व प्रमोटर शिव शंकर शर्मा, रतन कांत शर्मा और अन्य के खिलाफ ईडी की रेड से है। 

  • LOKSABHA ELECTION 2024: अमेठी हारने के लिए राहुल ने लिए थे पैसे

    LOKSABHA ELECTION 2024: चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है। नेताओं की ज़ुबानी जंग जारी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी कांग्रेस में जान फूंकने के लिए जनता से लगातार प्रत्यक्ष रूप से जुड़ रहे हैं। वही AIMIM प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने राहुल पर अमेठी चुनाव हारने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल किया क्या आपने अमेठी हारने के लिए पैसे लिए थे ? ओवैसी ने यह सवाल राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए किया। 

    राहुल गांधी ने कहा था कि जिन जगहों पर कांग्रेस – बीजेपी के विरोध में अपने प्रत्याशी उतारती है। AIMIM प्रमुख असुद्दीन ओवैसी पैसा लेकर उन जगहों पर कांग्रेस के विरोध में अपने प्रत्याशी उतार देते हैं। 

    ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए कहा- साल 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु सौदे और अन्य मुद्दों पर उस समय की अमेरिकी सरकार का समर्थन करने के लिए उन्होंने कितने पैसे लिए थे। इसके अलावा राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव मुखर्जी का समर्थन करने और जगमोहन रेड्डी को मनाने के लिए उन्होंने कितने पैसे लिए। इसके अलावा मैं जानना चाहता हूँ कि आप अमेठी हारे थे या हारने के लिए आपने पैसे लिए हैं। वैसे साल 2014 से आप हारे ही हैं क्या आपकी हार के लिए मैं जिम्मेदार हूँ। 

  • LOKSABHA ELECTION 2024: अमेठी हारने के लिए राहुल ने लिए थे पैसे

    LOKSABHA ELECTION 2024: चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है। नेताओं की ज़ुबानी जंग जारी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी कांग्रेस में जान फूंकने के लिए जनता से लगातार प्रत्यक्ष रूप से जुड़ रहे हैं। वही AIMIM प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने राहुल पर अमेठी चुनाव हारने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल किया क्या आपने अमेठी हारने के लिए पैसे लिए थे ? ओवैसी ने यह सवाल राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए किया। 

    राहुल गांधी ने कहा था कि जिन जगहों पर कांग्रेस – बीजेपी के विरोध में अपने प्रत्याशी उतारती है। AIMIM प्रमुख असुद्दीन ओवैसी पैसा लेकर उन जगहों पर कांग्रेस के विरोध में अपने प्रत्याशी उतार देते हैं। 

    ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए कहा- साल 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु सौदे और अन्य मुद्दों पर उस समय की अमेरिकी सरकार का समर्थन करने के लिए उन्होंने कितने पैसे लिए थे। इसके अलावा राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव मुखर्जी का समर्थन करने और जगमोहन रेड्डी को मनाने के लिए उन्होंने कितने पैसे लिए। इसके अलावा मैं जानना चाहता हूँ कि आप अमेठी हारे थे या हारने के लिए आपने पैसे लिए हैं। वैसे साल 2014 से आप हारे ही हैं क्या आपकी हार के लिए मैं जिम्मेदार हूँ। 

  • Mahua Moitra Row: मेरे वस्त्र हरण पर मौन नहीं बीजेपी सांसद को धन्यवाद

    Mahua Moitra Row: महुआ मोइत्रा घुस लेने के मामले में सवालों के घेरे में हैं। उनपर आरोप है कि उन्होंने सदन में सवाल पूछने के लिए घुस ली है। लगातार इस संदर्भ में महुआ मोइत्रा से सवाल किये जा रहे हैं। बीते दिन लोकसभा की एथिक्स कमेटी में महुआ मोइत्रा की पेशी हुई। लगभग एक घंटे तक उनसे सवाल पूछे गए और उसके बाद उन्होंने कमेटी का बहिष्कार कर दिया। महुआ का दावा है कि कमेटी में उनसे बेहद निजी और आपत्तिजनक सवाल किये गए। महुआ मोइत्रा को कमेटी में मौजूद विपक्ष के सांसदों का समर्थन भी मिला। 

    क्या बोली महुआ मोइत्रा:

    तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा- उनके साथ एथिक्स कमेटी का व्यवहार अशोभनीय था। आपत्तिजनक सवालों की सीमा लांघी गई। कमेटी के सवालों की तुलना महुआ ने द्रौपदी के चीर हरण से करते हुए कहा- इतने भद्दे सवालों पर भी कमेटी में मौजूद बीजेपी की महिला सांसद मौन रहीं। उन्होंने कहा- एथिक्स कमेटी ने सवालों के जरिए मेरा वस्त्र हरण किया। मैं बीजेपी की उन महिला सांसदों को धन्यवाद देना चाहती हूँ जो एथिक्स कमेटी में मौजूद थीं और इस प्रकार के आपत्तिजनक सवालों पर मौन रहीं। मैं उनकी आभारी हूँ कि उन्होंने इस अनैतिक व्यवहार का मौन होकर समर्थन किया। 

    बता दें एथिक्स कमेटी में बीजेपी की महिला सांसद अपराजिता सारंगी और सुनीता दुग्गल शामिल थीं। सवाल-जवाब समाप्त होने के तुरंत बाद, भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा, महुआ का व्यवहार अशोभनीय था। उन्होंने सदन में असभ्य भाषा का प्रयोग किया। हीरानंदानी के हलफनामे पर सवाल हुए तो वह उग्र हो गई। 

  • Delhi Liquor Policy Case: क्या अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की होगी गिरफ्तारी

    Delhi Liquor Policy Case: आम आदमी पार्टी के नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। दिल्ली के शराब नीति केस (Delhi Liquor Policy) में आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और AAP सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) पुलिस हिरासत में हैं। वही अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली के शराब नीति केस (Delhi Liquor Policy) में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की गिरफ्तारी जल्द ही होगी। 

    क्यों अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की जताई गई आशंका:

     दिल्ली के शराब नीति केस (Delhi Liquor Policy) में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। इससे पहले इस मामले में सीबीआई दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई ने तकरीबन 9 घंटे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से पूंछताछ की थी। 

    वही अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के द्वारा भेजे गए नोटिस पर राजनीति शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष का दावा है कि घोटाले बाजों पर कार्यवाही हो रही है तो आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है यह सब पहले से प्लांड है जो हो रहा है वह राजनीतिक लाभ की सिद्धि के लिए हो रहा है। 

    आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के नेता सौरभ भारद्वाज ( Saurabh Bhardwaj) ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को मिले प्रवर्तन निदेशालय के नोटिस को पोलिटिकल स्क्रिप्टेड बताया है। उन्होंने कहा- मनोज तिवारी ने एनआई से बातचीत के दौरान पहले ही कहा था कि अगला नम्बर अरविंद केजरीवाल का है। मुझे नहीं समझ आता उनको पहले से कैसे पता था कि केजरीवाल को ईडी का नोटिस मिलने वाला है यह सब राजनीतिक ताना बाना है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) आम आदमी पार्टी के नेता हैं हम सब आगे भी उनके अधीन काम करते रहेंगे। 

    जानकारी के लिए बता दें पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। AAP नेता सिसोदिया पर दिल्ली शराब नीति में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। उन्हें 26 फरवरी को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। 

  • Mahua Moitra Cash For Query Case: किसी के इशारे पर हो रहा काम, महुआ से हुए आपत्तिजनक सवाल

    Mahua Moitra Cash For Query Case: तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा बीते कई दिनों से सुर्खियों में बनी हुई हैं। ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में उनसे लगातार पूछताछ हो रही है। 2 नवम्बर को महुआ मोइत्रा इस मामले में लोकसभा की एथिक्स कमेटी के सम्मुख पेश हुईं। महुला मोइत्रा से बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी को अपनी संसद लॉगिन आईडी देने और उसके बदले पैसा लेने के संदर्भ में कई बड़े सवाल पूछे गए। महुआ मोइत्रा का दावा है कि लोकसभा एथिक्स कमेटी में उनसे कई आपत्तिजनक सवाल किये गए उनसे पूछा गया वह रात में किससे बात करती हैं। एथिक्स कमेटी के आपत्तिजनक सवालों से परेशान होकर विपक्षी सांसदों ने सदन से वर्कआउट किया। हालांकि विपक्षी सांसदों की इस गतिविधि पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्षी सांसदों का वॉकआउट करना महुआ के मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश है। 

    कब हुई एथिक्स कमेटी के सम्मुख पेशी:

    महुआ मोइत्रा की कल 11 बजे एथिक्स कमेटी के सामने पेशी हुई थी। एथिक्स कमेटी की अध्यक्षता बीजेपी सांसद विनोद कुमार सोनकर के पास थी। कमेटी में पांच सांसद विपक्ष के थे। महुआ मोइत्रा एथिक्स कमेटी के सामने पूरी तैयारी के साथ पेश हुई थीं। उनके हाथ में तीन बैग थे। महुआ मोइत्रा से तकरीबन एक घंटे तक एथिक्स कमेटी ने सवाल किये। लेकिन उसके बाद उन्होंने एथिक्स कमेटी का बहिष्कार किया और वहां से बाहर निकल गई। उनका कहना है कि कमेटी ने उनसे आपत्तिजनक सवाल किये। महुआ को विपक्ष के सांसदों का समर्थन मिला। समिति के सदस्य एन उत्तम कुमार रेड्डी और बसपा के दानिश अली सहित पांचों विपक्षी सांसदों ने महुआ के साथ कमेटी से वॉकआउट कर दिया। 

    क्या बोले विपक्ष के सदस्य:

    कांग्रेस के एन उत्तम कुमार रेड्डी, बसपा के दानिश अली और जद (यू) के गिरधारी यादव सहित विपक्षी सदस्यों ने कमेटी के अध्यक्ष सोनकर के व्यवहार पर सवाल उठाए। सभी ने मिलकर कहा- महिला के जीवन से जुड़े निजी सवाल पूछे गए। कमेटी अध्यक्ष किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। जिस तरह के सवाल एक महिला से किये जा रहे वह बेहद बेहूदे और अशोभनीय थे। 

    हालांकि अपना पक्ष रखते हुए सोनकर ने कहा- विपक्षी सांसद मुझपर इस तरह के आरोप इसलिए लगा रहे हैं ताकि वह महुआ मोइत्रा को बचा सकें। उन्होंने कहा कि महुआ से बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी को लेकर ही सवाल किए गया। कमेटी की सदस्य अपराजिता सारंगी ने कहा कि जब मोइत्रा से हीरानंदानी के हलफनामे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ‘क्रोधित, दंभ भरा और अहंकारी’ व्यवहार किया। 

    क्या बोले निशिकांत दुबे :

    एथिक्स कमेटी महुआ मोइत्रा से पूछताछ करना चाहती है। लेकिन विपक्ष को इससे समस्या है। वह कमेटी के कार्य में बाधा डालने और कमेटी की छवि बिगाड़ने के लिए ऐसा कर रहे हैं। जो सबूत महुआ मोइत्रा के खिलाफ दिए गए हैं उनके बाद अब उनको कोई अन्य ताकत बचा नहीं सकती। कमेटी के अध्यक्ष ओबीसी समाज से आते हैं विपक्ष को यह बात हजम नहीं हो रही है।