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  • Parliament Session: अंग्रेजों के नहीं अब अपने कानून से चलेगा देश

    Revamp Of Criminal Laws: भारत सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण कानूनों को खत्म कर उसकी जगह तीन नए कानून पेश कर दिए. 11 अगस्त को इन्हें लोकसभा में पेश किया गया. गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में तीनों कानून को पेश करते हुए कहा कि गुलामी की सभी निशानियों को समाप्त करने की दिशा में उठाया गया कदम है. अब तक जो कानून है उसमे दंड दिए जाने की अवधारणा है, जबकि नए कानून में देश के लोगों के लिए न्याय देने का प्रावधान किया गया है. जो अब तक का सबसे प्रभावी कदम है.

    लोकसभा में फिलहाल इसे पेश किया गया और पास करने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा. वहं से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही ये तीनों कानून लागू हो जाएंगे. माना जा रहा है कि नई व्यवस्था में लोगों को समयबद्ध न्याय की व्यवस्था की गई है.

    क्या हैं तीन नए कानून? 
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 लोकसभा में पेश किए. जो अंग्रेजों द्वारा बनाए गए और अंग्रेजी संसद में पारित किए गए इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) 1860, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) 1898, 1973 और इंडियन एवीडेंस एक्ट (आईएए) 1872 कानूनों को रिप्लेस करेंगे. इंडियन पीनल कोड 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 स्थापित होगा. क्रिमिनल प्रोसीजर कोड 1898 की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और इंडियन एवीडेंस एक्ट 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 स्थापित होगा.

    दंड की जगह न्याय देने की अवधारणा
    गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कानून को पेश करते हुए कहा कि खत्म होने वाले ये तीनों कानून अंग्रेज़ी शासन को मज़बूत करने और उसकी रक्षा करने के लिए बनाए गए थे. उनका उद्देश्य दंड देने का था, न की न्याय देने का. संसद में पेश किए गए तीन नए कानून की आत्मा भारतीय नागरिकों को संविधान में दिए गए सभी अधिकारों की रक्षा करना, इनका उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि न्याय देना होगा. भारतीय आत्मा के साथ बनाए गए इन तीन कानूनों से हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा.

    उन्होंने कहा कि शासन की जगह नागरिक को केंद्र में लाने का बहुत बड़ा सैद्धांतिक निर्णय कर ये कानून लाया गया है. प्रधानमंत्री मोदी जी ने 2019 में कहा था, अंग्रेज़ों के समय के बनाए गए जितने भी कानून जिस विभाग में भी हैं, उन पर पर्याप्त चर्चा और विचार कर आज के समय के अनुरूप और भारतीय समाज के हित में बनाना चाहिए.

    लंबी चर्चा और विमर्श के बाद लाया गया कानून
    गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि कानून को लाने से पहले 18 राज्यों, 6 संघशासित प्रदेशों, सुप्रीम कोर्ट, 16 हाई कोर्ट, 5 न्यायिक अकादमी, 22 विधि विश्वविद्यालय, 142 सांसद, लगभग 270 विधायकों और जनता ने इन नए कानूनों पर अपने सुझाव दिए थे. 4 सालों तक इस कानून पर गहन विचार विमर्श हुआ और वे स्वयं इस पर हुई 158 बैठकों में उपस्थित रहे.

    नए कानून में होंगी इतनी धाराएं
    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता जो CrPC को रिप्लेस करेगी, उसमें अब 533 धाराएं रहेंगी. जबकि अब तक इसमें 478 धाराएं थी. 160 धाराओं को बदल दिया गया है. 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं जबकि 9 धाराओं को निरस्त किया गया है.
    इसी तरह भारतीय न्याय संहिता, जो IPC को रिप्लेस करेगी, में पहले की 511 धाराओं के स्थान पर अब 356 धाराएं होंगी. 175 धाराओं में बदलाव किया गया है. 8 नई धाराएं जोड़ी गई हैं और 22 धाराओं को निरस्त किया गया है.

    इसी तरह भारतीय साक्ष्य विधेयक, जो Evidence Act को रिप्लेस करेगा, उसमें पहले की 167 के स्थान पर अब 170 धाराएं होंगी. 23 धाराओं में बदलाव किया गया है. 1 नई धारा जोड़ी गई है और 5 धाराएं निरस्त की गई हैं.

    कानून में क्या है खास 
    एक तरफ राजद्रोह जैसे कानूनों को निरस्त किया गया है, दूसरी ओर धोखा देकर महिला का शोषण करने और मॉब लिंचिग जैसे जघन्य अपराधों के लिए दंड का प्रावधान और संगठित अपराधों और आतंकवाद पर नकेल कसने का काम भी किया है.

    कानून में दस्तावेज़ों की परिभाषा का विस्तार कर इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड्स, ई-मेल, सर्वर लॉग्स, कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन, लैपटॉप्स, एसएमएस, वेबसाइट, लोकेशनल साक्ष्य, डिवाइस पर उपलब्ध मेल, मैसेजेस को कानूनी वैधता दी गई है. FIR से केस डायरी, केस डायरी से चार्जशीट और चार्जशीट से जजमेंट तक की सारी प्रक्रिया को डिजिटलाइज़ करने का प्रावधान इस कानून में किया गया है. सर्च और ज़ब्ती के वक़्त वीडियोग्राफी को कंपल्सरी कर दिया गया है जो केस का हिस्सा होगी और इससे निर्दोष नागरिकों को फंसाया नहीं जा सकेगा, पुलिस द्वारा ऐसी रिकॉर्डिंग के बिना कोई भी चार्जशीट वैध नहीं होगी.

    • 7 साल या इससे ज्यादा सजा वाले अपराधों के क्राइम सीन पर फॉरेंसिक टीम की विज़िट को कंपल्सरी किया जा रहा है. इसके माध्यम से पुलिस के पास एक वैज्ञानिक साक्ष्य होगा जिसके बाद कोर्ट में दोषियों के बरी होने की संभावना बहुत कम हो जाएगी. मोदी सरकार नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आज़ादी के 75 सालों के बाद पहली बार ज़ीरो एफआईआर को शुरू करने जा रही है, अपराध कहीं भी हुआ हो उसे अपने थाना क्षेत्र के बाहर भी रजिस्टर किया जा सकेगा. पहली बार ई-FIR का प्रावधान जोड़ा जा रहा है, हर जिले और पुलिस थाने में एक ऐसा पुलिस अधिकारी नामित किया जाएगा जो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के परिवार को उसकी गिरफ्तारी के बारे में ऑनलाइन और व्यक्तिगत रूप से सूचना करेगा.
    • यौन हिंसा के मामले में पीड़ित का बयान कंपल्सरी कर दिया गया है और यौन उत्पीड़न के मामले में बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अब कंपल्सरी कर दी गई है. पुलिस को 90 दिनों में शिकायत का स्टेटस और उसके बाद हर 15 दिनों में फरियादी को स्टेटस देना कंपल्सरी होगा. पीड़ित को सुने बिना कोई भी सरकार 7 साल या उससे अधिक के कारावास का केस वापस नहीं ले सकेगी, इससे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होगी.
    • छोटे मामलों में समरी ट्रायल का दायरा भी बढ़ा दिया गया है. अब 3 साल तक की सज़ा वाले अपराध समरी ट्रायल में शामिल हो जाएंगे. इस अकेले प्रावधान से ही सेशन्स कोर्ट्स में 40 प्रतिशत से अधिक केस समाप्त हो जाएंगे. आरोप पत्र दाखिल करने के लिए 90 दिनों की समयसीमा तय कर दी गई है और परिस्थिति देखकर अदालत आगे 90 दिनों की परमीशन और दे सकेंगी. इस तरह 180 दिनों के अंदर जांच समाप्त कर ट्रायल के लिए भेज देना होगा.
    • कोर्ट अब आरोपित व्यक्ति को आरोप तय करने का नोटिस 60 दिनों में देने के लिए बाध्य होंगे, बहस पूरी होने के 30 दिनों के अंदर माननीय न्यायाधीश को फैसला देना होगा. इससे सालों तक निर्णय पेंडिंग नहीं रहेगा और फैसला 7 दिनों के अंदर ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा.
    • सिविल सर्वेंट या पुलिस अधिकारी के विरूद्ध ट्रायल के लिए सरकार को 120 दिनों के अंदर अनुमति पर फैसला करना होगा वरना इसे डीम्ड परमीशन माना जाएगा और ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा. 
    • घोषित अपराधियों की संपत्ति की कुर्की का भी प्रावधान लेकर आए हैं, अंतरराज्यीय गिरोह और संगठित अपराधो के विरूद्ध अलग प्रकार की कठोर सज़ा का नया प्रावधान भी इस कानून में जोड़ा जा रहा है.
    • शादी, रोजगार और पदोन्नति के झूठे वादे और गलत पहचान के आधार पर यौन संबंध बनाने को पहली बार अपराध की श्रेणी में लाया गया है, गैंग रेप के सभी मामलों में 20 साल की सज़ा या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है.
    • 18 साल से कम आयु की बच्चियों के साथ अपराध के मामले में मृत्यु दंड का भी प्रावधान रखा गया है, मॉब लिंचिग के लिए 7 साल, आजीवन कारावास और मृत्यु दंड के तीनों प्रावधान रखे गए हैं.
    • मोबाइल फोन या महिलाओं की चेन की स्नेचिंग के लिए कोई प्रावधान नहीं था, लेकिन अब इसके लिए भी प्रावधान रखा गया है.
    • हमेशा के लिए अपंगता आने या ब्रेन डेड होने की स्थिति में 10 साल या आजीवन कारावास की सज़ा का प्रावधान किया गया है.
    • बच्चों के साथ अपराध करने वाले व्यक्ति के लिए सज़ा को 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है. अनेक अपराधों में जुर्माने की राशि को भी बढ़ाने का प्रावधान किया गया है.
    • सजा माफी को राजनीतिक फायदे के लिए उपयोग करने के कई मामले देखे जाते थे, अब मृत्यु दंड को आजीवन कारावास, आजीवन कारावास को कम से कम 7 साल की सज़ा और 7 साल के कारावास को कम से कम 3 साल तक की सज़ा में ही बदला जा सकेगा और किसी भी गुनहगार को छोड़ा नहीं जाएगा.
    • मोदी सरकार राजद्रोह को पूरी तरह से समाप्त करने जा रही है क्योंकि भारत में लोकतंत्र है और सबको बोलने का अधिकार है.
    • पहले आतंकवाद की कोई व्याख्या नहीं थी, अब सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियां, अलगाववाद, भारत की एकता, संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने जैसे अपराधों की पहली बार इस कानून में व्याख्या की गई है.
    • अनुपस्थिति में ट्रायल के बारे में एक ऐतिहासिक फैसला किया है, सेशन्स कोर्ट के जज द्वारा भगोड़ा घोषित किए गए व्यक्ति की अनुपस्थिति में ट्रायल होगा और उसे सज़ा भी सुनाई जाएगी, चाहे वो दुनिया में कहीं भी छिपा हो, उसे सज़ा के खिलाफ अपील करने के लिए भारतीय कानून और अदालत की शरण में आना होगा.
    • कानून में कुल 313 बदलाव किए गए हैं जो हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में एक आमूलचूल परिवर्तन लाएंगे और किसी को भी अधिकतम 3 वर्षों में न्याय मिल सकेगा.
    • इस कानून में महिलाओं और बच्चो का विशेष ध्यान रखा गया है, अपराधियों को सज़ा मिले ये सुनिश्चित किया गया है और पुलिस अपने अधिकारों का दुरुपयोग न कर सके, ऐसे प्रावधान भी किए गए हैं.

  • Manipur Violence: राहुल गांधी ने खोली मोदी की पोल

    Manipur Violence: मणिपुर हिंसा को लेकर विपक्ष लगातार सदन में हंगमा कर रहा था। विपक्ष की ओर से इस संदर्भ में बीजेपी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। कल अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी ने 2 घंटे 13 मिनट चर्चा की। हालाकि इस चर्चा में पीएम ने विपक्ष को घेरा, बीजेपी की उपलब्धियां बताईं और अंत में मणिपुर का जिक्र किया। 

    पीएम के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा- कल पीएम ने सदन में 2 घंटे 13 मिनट बात की। 2 मिनट के लिए वह मणिपुर पर भी बोले, मणिपुर जल रहा है, अभद्रता की हदें लांघी जा रही हैं। रेप की घटनाएं हो रही हैं लेकिन पीएम मोदी सदन में चुटकुले सुना रहे हैं, वह मुस्कुरा रहे हैं, ठहाके लगा रहे हैं यह उनके ऊपर शोभा नहीं देता है। 

    मैंने जो आज के दौर में देखा ऐसा अपने 19 वर्ष के दौर में नहीं देखा। मैंने कहा एक राज्य की हत्या कर दी गई। इसके पीछे कारण है। मणिपुर अब दो भागों में बंट गया है। पीएम को ऐसा नहीं करना चाहिए था। वहां बात मेरी या कांग्रेस की नहीं हो रही थी। वहां बात मणिपुर की हो रही थी, गंभीर विषय था उनका इस तरह हंसना शोभनीय नहीं था। 

    राहुल गांधी ने आगे कहा- जब हम मणिपुर में पीड़ितों से मिलने गए तो हमने अलग दृश्य देखा। कुकी और मैतई समाज के लोग नफरत में जल रहे हैं। दोनों का मत था कि अगर कोई कुकी या मैतई आपके संरक्षण में है और यहाँ आया तो हम उसे मार देंगे। यह वास्तव में चिंता का विषय है। पीएम ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया वह चाहते तो मणिपुर की समस्या को बेहतर तरीके से सुलझा सकते थे। लेकिन वह चुप रहे। 

  • Madhya Pradesh Election 2023: क्यों दिग्विजय ने जताई कमलनाथ के बयान पर आपत्ति

    Madhya Pradesh Election 2023: मध्य्प्रदेश में चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है। कांग्रेस सत्ता में आने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बीते दिन सपा-कांग्रेस के मध्य सियासी बयानों ने हलचल मचा दी। वही अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अखिलेश यादव को लेकर बड़ा बयाना दिया और उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पता नहीं क्यों एमपी में इंडिया गठबंधन के दोनों घटकों (सपा-कांग्रेस) के मध्य विवाद छिड़ गया। 

    जानें क्या बोले दिग्विजय सिंह:

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा- मध्यप्रदेश में कमलनाथ समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार थे। वह मन से सपा से जुड़ना चाहते थे। लेकिन अचानक पता नहीं क्या हुआ की दोनों दलों के मध्य विवाद हुआ और इंडिया गठबंधन के दोनों घटक एक मत पर सहमत नहीं हुए। अखिलेश यादव बेहतर नेतृत्व कर्ता हैं। लेकिन कमलनाथ ने उनको लेकिन जिन शब्दों का उपयोग किया वह अनैतिक हैं। 

    उन्होंने आगे कहा- सहयोगियों में झगड़ा होता रहता है। आपसी मतभेद है आपस में सुलझ जाएगा। अखिलेश यादव कुशल नेतृत्व कर्ता हैं वह राजनीति को समझ रहे हैं। अखिलेश कभी भी भाजपा के साथ नहीं जायेगे। मामला कांग्रेस कार्य समिति और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास गया, लेकिन उन्होंने (सपा के साथ गठबंधन) का मुद्दा राज्य नेतृत्व पर छोड़ दिया। 

    उन्होंने आगे कहा- आगामी लोकसभा चुनाव हम एकजुट होकर लड़ेंगे। इंडिया गठबंधन एकता के सूत्र से बंधा है। राज्य के मुद्दे और राज्य की राजनीति अलग स्तर की होती है। हालाकि एक बात हम जानते हैं कि कमलनाथ ईमानदारी के साथ समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहते थे। 

  • Akhilesh Yadav Poster: पीएम पोस्टर पर अखिलेश ने बोली बड़ी बात

    Akhilesh Yadav Poster: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव तो 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाला है। विपक्ष के राजनेता केंद्र में सत्ता परिवर्तन के लिए लगातार प्रयासरत हैं। बीते दिन सियासी गलियारों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का विवाद सुर्खियों में आ गया। राजनीति के जानकारों का दावा है कि अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन से दूरी बना रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि अखिलेश कांग्रेस से नाराज हैं लेकिन नाराजगी जताने से घबरा रहे हैं। 

    अखिलेश की चाहत खूब है कांग्रेस पर बिफरने की लेकिन वह बिफर नहीं पा रहे हैं। क्योंकि अखिलेश जानते हैं लोकसभा चुनाव में उनका काम गठबंधन के बिना नहीं चल सकता और गठबंधन का काम बिना कांग्रेस के। वही अब ऐसे में सोशल मीडिया पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक पोस्टर सुर्खियों में बना हुआ है। पोस्टर में अखिलेश को भावी प्रधानमंत्री घोषित किया है। पोस्टर से अनुमान लगाया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस के बिना मैदान में ताल ठोकने को तैयार हैं। 

    पोस्टर पर अखिलेश की प्रतिक्रिया: 

    भावी प्रधानमंत्री लिखा अखिलेश यादव का पोस्टर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। उत्तराखंड में पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा सिर्फ भावी प्रधानमंत्री लिख देने से कोई पीएम नहीं बन जाता। हम लोकसभा चुनाव में केंद्र से बीजेपी को सत्ता से हटाना चाहते हैं। पोस्टर में जो लिखा है वह कार्यकर्ता ने अपनी इच्छा जाहिर की है। वही कांग्रेस से अपने विवाद पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। हालाकि जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव मन ही मन पीएम बनने की अभिलाषा रखते हैं। 

    क्या बोले बीजेपी प्रवक्ता:

    भाजपा प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा – अखिलेश यादव को यूपी की जनता ने नकारा दिया है। अखिलेश को अब जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। सहयोगी दल अखिलेश से मुँह मोड़ रहे हैं। अन्य राज्यों में सपा का कोई अस्तित्व नहीं है। पार्टी का जमीनी स्तर पर दम निकल गया है। सपा प्रमुख के सहयोगी नेता ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ देख रहे हैं, जो कभी पूरे नहीं होंगे। जो भावी पीएम का पोस्टर सामने आया है वह सिर्फ इंडिया गठबंधन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आया है। पीएम तो सिर्फ मोदी जी हैं मोदी जी तीसरी बार देश का नेतृत्व करने जा रहे हैं। 

  • UP Politics: सावधान छीन सकता है वोट का अधिकार

    UP Politics: देश में सियासी रंग उड़ने लगा है। कई राज्यों में लोकसभा चुनाव तो कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी उफान पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता के समर्थन से सत्ता में अपनी धाक जमाना चाहते हैं। ज्यादातर दलों की निगाहें ओबीसी वोट बैंक पर हैं। बिहार, यूपी और एमपी जातीय राजनीति के केंद्र बिंदु बने हुए हैं। 

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बीते दिनों से अपने बयान को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। कोई कह रहा है कि अखिलेश के सुर बदले हुए हैं, जल्द ही इंडिया गठबंधन में फुट देखने को मिलेगी तो कोई कह रहा है विपक्ष मसले को सावधानी से सुलझा लेगा। लेकिन इस बीच यूपी के शाहजहांपुर में अखिलेश यादव भय का भयंकर कार्ड खेलते हुए दिखे। 

    क्या है अखिलेश का भय कार्ड:

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव बोले समय बदल गया है। बीजेपी जनता को बरगला रही है। यदि बीजेपी पुनः सत्ता में आती है तो हो सकता है वह हमारा वोट का अधिकार छीन ले। यदि ऐसा हुआ तो हम बदलाव कर पाएंगे नहीं। हम सभी को मिलकर लम्बी लड़ाई लड़नी है हमारे समक्ष बड़ी चुनौती है। 

    शाहजहांपुर की स्थिति पर क्या बोले अखिलेश:

    अखिलेश यादव कहते हैं शाहजहांपुर की स्थिति बेहद खराब है। पिछली बार जब मैं आया और सभा को सम्बोधित किया तो लगा हम चुनाव जीत रहे हैं। आपको दोष नहीं दे रहा। आप लोगों ने भरपूर समर्थन किया हमें चुनाव अधिकारियों ने हरवा दिया। यह शहर नौ बार के विधायक और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का है। शहर की हालत पतली है सड़कें टूटी -फूटी पड़ी हैं। वह चाहते तो शहर का नक्शा बदल सकते थे। हमें आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ लड़ना होगा। क्योंकि अगर आज आपसी मतभेद में उलझे रहे तो 2024 हमारे हाथ से निकल जाएगा। 

  • माता कौशल्या की भूमि अकबर को देना धर्मनिरपेक्षता नहीं, कांग्रेस राम की नहीं बाबर की अनुयायी

    Himanta Biswa Sarma Attack On Congress: हिन्दू और हिन्दू राष्ट्र देश में बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस बीजेपी पर आय दिन हिन्दुओं के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाती है। वही अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस राज्य में हिन्दुओ के साथ बढ़ रहे अत्याचार को इंगित पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। सीएम बिस्वा ने कहा- बघेल सरकार छत्तीगढ़ में विफल रही है। भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य धर्मांतरण और लव जिहाद की मार झेल रहा है। आदिवासियों का लगातार धर्मांतरण करवाया जा रहा है लेकिन सरकार चुप्पी साधे है। 

    उन्होंने आगे कहा- सीएम भूपेश बघेल स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं। छत्तीसगढ़ में लगातार लव जिहाद के मामले बढ़ रहे हैं। हिन्दू महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। आदिवासियों को धर्मांतरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्या यह सीएम बघेल की धर्म निरपेक्षता है। भारत हिन्दुओं का देश है और हिन्दुओं का ही रहेगा। हम धर्मनिरपेक्षता को जानते हैं। धर्म निरपेक्षता की जो अवधारणा हमें ज्ञात है वह बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर और हमारी संस्कृति से मिली है। 

    माता कौशल्या की भूमि अकबर को देना धर्मनिरपेक्षता नहीं:

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बोले बघेल जी आप हमे धर्मनिरपेक्षता न सिखाइए। राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाना धर्मनिरपेक्षता नहीं है। धर्म परिवर्तन करवाना धर्मनिरपेक्षता नहीं है और माता कौशल्या की भूमि अकबर को देना धर्म निरपेक्षता नहीं है। असम में मैं जल्द ही बहु विवाह पर प्रतिबंध लगाने का कानून बनाने जा रहा हूँ। कानून का मसौदा तैयार है उम्मीद है दिसम्बर तक कानून बन जाएगा। 

    कांग्रेस ने की बाबर की पूजा:

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बोले बीजेपी ने सत्ता में आने से पूर्व जनता से वादा किया कि सत्ता में आते ही हम राम मंदिर बनवायेगे। हमने अपना वादा पूरा किया। कोर्ट ने राम मंदिर के हित में फैसला सुनाया। आज राम मंदिर निर्माण काम पूर्ण होने वाला है। साल 2024 जनवरी में मंदिर का उद्घाटन होगा। कांग्रेस 60 वर्ष तक सत्ता में रही लेकिन कांग्रेस ने कभी राम मंदिर बनवाने के लिए प्रयास नहीं किया। वह करते भी क्यों वह राम को नहीं वास्तव में बाबर को पूजते हैं। 

  • Rajkummar Rao to Be Appointed as National Icon by Election Commission

    In a recent announcement, the Election Commission has revealed its decision to appoint the renowned Bollywood actor Rajkummar Rao as a National Icon. This distinguished recognition by the poll body is part of an initiative to inspire and motivate citizens to actively engage in the electoral process. The official appointment ceremony is scheduled to take place on Thursday, October 26, 2023.

    Encouraging Civic Participation

    The Election Commission’s practice of designating well-known personalities as ‘National Icons’ serves as a catalyst for fostering greater voter participation. This initiative aims to instill a sense of responsibility and duty in the electorate, encouraging them to exercise their right to vote.

    Over 161 Million Voters Prepare for Upcoming Assembly Elections

    Reports indicate that a staggering 161 million citizens residing in five different Indian states are gearing up to cast their votes in the forthcoming assembly elections. This massive voter turnout underscores the significance of active civic engagement and the role it plays in shaping the country’s future.

    A Tribute to Rajkummar Rao’s Commitment

    Rajkummar Rao’s selection as a National Icon is not merely a result of his exceptional acting prowess but also his dedication to a larger social cause. In the film ‘Newton,’ he portrayed the character of a poll officer stationed in a Naxal-affected district of Chhattisgarh. His outstanding performance in the film received widespread acclaim and recognition, further emphasizing the importance of civic duty.

    An Active Social Presence

    Beyond his remarkable cinematic achievements, Rajkummar Rao and his wife, Patralekha, recently made a notable appearance at the Rasrang Navratri festival. The event, organized by the Shrikant Eknath Shinde Foundation in Dombivli, demonstrates the couple’s active involvement in social and cultural affairs.

    Personal Milestones

    In the realm of personal life, Rajkummar Rao and his long-time girlfriend and fellow actor, Patralekhaa, exchanged vows on November 15, 2021. Their union is not only a celebration of love but also symbolizes the power of personal commitment and responsibility.

    Upcoming Projects

    Turning the spotlight back to his professional endeavors, Rajkummar Rao is set to reunite with Janhvi Kapoor in ‘Mr And Mrs Mahi.’ Additionally, the actor is slated to take on the lead role in the inspirational biopic of industrialist Srikant Bolla, titled ‘Sri.’ Furthermore, audiences can look forward to his upcoming project, ‘Vicky Vidya Ka Woh Wala Video,’ in which he will star alongside Tripti Dimri. Rajkummar Rao’s commitment to both the cinematic arts and societal causes continues to inspire and motivate individuals across the nation.

    As the Election Commission’s newly appointed National Icon, Rajkummar Rao embodies the spirit of active citizenship and serves as a role model for all. The formal ceremony to honor his designation will be a momentous occasion, celebrating the fusion of art and civic duty.

  • Madhya Pradesh Election 2023: क्यों दिग्विजय ने जताई कमलनाथ के बयान पर आपत्ति

    Madhya Pradesh Election 2023: मध्य्प्रदेश में चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है। कांग्रेस सत्ता में आने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बीते दिन सपा-कांग्रेस के मध्य सियासी बयानों ने हलचल मचा दी। वही अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अखिलेश यादव को लेकर बड़ा बयाना दिया और उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पता नहीं क्यों एमपी में इंडिया गठबंधन के दोनों घटकों (सपा-कांग्रेस) के मध्य विवाद छिड़ गया। 

    जानें क्या बोले दिग्विजय सिंह:

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा- मध्यप्रदेश में कमलनाथ समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार थे। वह मन से सपा से जुड़ना चाहते थे। लेकिन अचानक पता नहीं क्या हुआ की दोनों दलों के मध्य विवाद हुआ और इंडिया गठबंधन के दोनों घटक एक मत पर सहमत नहीं हुए। अखिलेश यादव बेहतर नेतृत्व कर्ता हैं। लेकिन कमलनाथ ने उनको लेकिन जिन शब्दों का उपयोग किया वह अनैतिक हैं। 

    उन्होंने आगे कहा- सहयोगियों में झगड़ा होता रहता है। आपसी मतभेद है आपस में सुलझ जाएगा। अखिलेश यादव कुशल नेतृत्व कर्ता हैं वह राजनीति को समझ रहे हैं। अखिलेश कभी भी भाजपा के साथ नहीं जायेगे। मामला कांग्रेस कार्य समिति और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास गया, लेकिन उन्होंने (सपा के साथ गठबंधन) का मुद्दा राज्य नेतृत्व पर छोड़ दिया। 

    उन्होंने आगे कहा- आगामी लोकसभा चुनाव हम एकजुट होकर लड़ेंगे। इंडिया गठबंधन एकता के सूत्र से बंधा है। राज्य के मुद्दे और राज्य की राजनीति अलग स्तर की होती है। हालाकि एक बात हम जानते हैं कि कमलनाथ ईमानदारी के साथ समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहते थे। 

  • UP Politics: सावधान छीन सकता है वोट का अधिकार

    UP Politics: देश में सियासी रंग उड़ने लगा है। कई राज्यों में लोकसभा चुनाव तो कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी उफान पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता के समर्थन से सत्ता में अपनी धाक जमाना चाहते हैं। ज्यादातर दलों की निगाहें ओबीसी वोट बैंक पर हैं। बिहार, यूपी और एमपी जातीय राजनीति के केंद्र बिंदु बने हुए हैं। 

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बीते दिनों से अपने बयान को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। कोई कह रहा है कि अखिलेश के सुर बदले हुए हैं, जल्द ही इंडिया गठबंधन में फुट देखने को मिलेगी तो कोई कह रहा है विपक्ष मसले को सावधानी से सुलझा लेगा। लेकिन इस बीच यूपी के शाहजहांपुर में अखिलेश यादव भय का भयंकर कार्ड खेलते हुए दिखे। 

    क्या है अखिलेश का भय कार्ड:

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव बोले समय बदल गया है। बीजेपी जनता को बरगला रही है। यदि बीजेपी पुनः सत्ता में आती है तो हो सकता है वह हमारा वोट का अधिकार छीन ले। यदि ऐसा हुआ तो हम बदलाव कर पाएंगे नहीं। हम सभी को मिलकर लम्बी लड़ाई लड़नी है हमारे समक्ष बड़ी चुनौती है। 

    शाहजहांपुर की स्थिति पर क्या बोले अखिलेश:

    अखिलेश यादव कहते हैं शाहजहांपुर की स्थिति बेहद खराब है। पिछली बार जब मैं आया और सभा को सम्बोधित किया तो लगा हम चुनाव जीत रहे हैं। आपको दोष नहीं दे रहा। आप लोगों ने भरपूर समर्थन किया हमें चुनाव अधिकारियों ने हरवा दिया। यह शहर नौ बार के विधायक और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का है। शहर की हालत पतली है सड़कें टूटी -फूटी पड़ी हैं। वह चाहते तो शहर का नक्शा बदल सकते थे। हमें आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ लड़ना होगा। क्योंकि अगर आज आपसी मतभेद में उलझे रहे तो 2024 हमारे हाथ से निकल जाएगा। 

  • Akhilesh Yadav Poster: पीएम पोस्टर पर अखिलेश ने बोली बड़ी बात

    Akhilesh Yadav Poster: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव तो 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाला है। विपक्ष के राजनेता केंद्र में सत्ता परिवर्तन के लिए लगातार प्रयासरत हैं। बीते दिन सियासी गलियारों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का विवाद सुर्खियों में आ गया। राजनीति के जानकारों का दावा है कि अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन से दूरी बना रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि अखिलेश कांग्रेस से नाराज हैं लेकिन नाराजगी जताने से घबरा रहे हैं। 

    अखिलेश की चाहत खूब है कांग्रेस पर बिफरने की लेकिन वह बिफर नहीं पा रहे हैं। क्योंकि अखिलेश जानते हैं लोकसभा चुनाव में उनका काम गठबंधन के बिना नहीं चल सकता और गठबंधन का काम बिना कांग्रेस के। वही अब ऐसे में सोशल मीडिया पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक पोस्टर सुर्खियों में बना हुआ है। पोस्टर में अखिलेश को भावी प्रधानमंत्री घोषित किया है। पोस्टर से अनुमान लगाया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस के बिना मैदान में ताल ठोकने को तैयार हैं। 

    पोस्टर पर अखिलेश की प्रतिक्रिया: 

    भावी प्रधानमंत्री लिखा अखिलेश यादव का पोस्टर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। उत्तराखंड में पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा सिर्फ भावी प्रधानमंत्री लिख देने से कोई पीएम नहीं बन जाता। हम लोकसभा चुनाव में केंद्र से बीजेपी को सत्ता से हटाना चाहते हैं। पोस्टर में जो लिखा है वह कार्यकर्ता ने अपनी इच्छा जाहिर की है। वही कांग्रेस से अपने विवाद पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। हालाकि जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव मन ही मन पीएम बनने की अभिलाषा रखते हैं। 

    क्या बोले बीजेपी प्रवक्ता:

    भाजपा प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा – अखिलेश यादव को यूपी की जनता ने नकारा दिया है। अखिलेश को अब जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। सहयोगी दल अखिलेश से मुँह मोड़ रहे हैं। अन्य राज्यों में सपा का कोई अस्तित्व नहीं है। पार्टी का जमीनी स्तर पर दम निकल गया है। सपा प्रमुख के सहयोगी नेता ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ देख रहे हैं, जो कभी पूरे नहीं होंगे। जो भावी पीएम का पोस्टर सामने आया है वह सिर्फ इंडिया गठबंधन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आया है। पीएम तो सिर्फ मोदी जी हैं मोदी जी तीसरी बार देश का नेतृत्व करने जा रहे हैं।