Category: politics

  • Prashant Kishor: नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव पर बरसे प्रशांत किशोर

    राजनीति: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है। राजनेता जमीनी स्तर पर स्वयं को मजबूत करने की कवायद में जुटे हुए हैं। नीतीश कुमार गठबंधन के बलबूते बिहार में अपनी सत्ता स्थापित करना चाहते हैं। वही रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव पर हमला बोला है। 

    उन्होंने आगे कहा – मैं बिहार का रहने वाला हूँ, मुझे चुनाव में लाला और नीतीश कुमार नहीं हरा सकते। मैं चुनाव में इनके दांत खट्टे कर दूंगा मुझे धकियाना इनके बस की बात नहीं है। बंगाल में आप मेरी ताकत देख चुके हैं बीजेपी में बहुत प्रयास किया लेकिन 100 पर ही टिक गए। 

    ये जो नेता लोग हैं इन्हें लगता है इनके लिए राह आसान है। लेकिन यह मुझे नहीं जानते। बड़े-बड़े नेता मुझसे सलाह लेते हैं मेरी रणनीति ने अपनी विजय पताका फहराते हैं। मैं इनके पसीने छुड़ाने आया हूँ। मुझे पता है यह आसान नहीं है लेकिन मैं करूँगा। 

  • MP Election 2023: मध्य प्रदेश में दलित वोटरों पर घमासान

    PM Modi to visit Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में अब बीजेपी (BJP) आदिवासियों के बाद दलित वोटरों को लुभाने में जुटी है. इसके लिए बीजेपी ने राज्य के सागर जिले में संत रविदास का मंदिर बनाने और समरसता यात्रा निकालने का फैसला किया है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अगस्त को सागर जाएंगे. इस दौरान वह मंदिर का शिलान्यास करेंगे और एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित करेंगे. पीएम जनसभा के लिए सागर जिले के ढाना एयरपोर्ट के पास एक विशाल तंबू लग रहा है. 

    पीएम मोदी के दौरे को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री सागर में संत रविदास मेमोरियल मंदिर और उनके जीवन से जुड़े पहलुओं पर बन रहे संग्रहालय किन आधारशिला रखेंगे. उन्होंने बताया कि सागर में संत रविदास की याद में निकाली जाने वाली समरसता यात्राओं का समापन होगा. बता दें कि बीजेपी प्रदेश के चार दलित बहुल आबादी वाले जिलों से समरसता यात्राएं निकालेगी. 

    कांग्रेस ने बीजेपी पर साथ निशाना

    वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है. पार्टी का कहना है कि राज्य का दलित समुदाय बीजेपी के पाखंड को समझता है. भारतीय जनता पार्टी को चुनाव के पहले दलित याद आ रहे हैं. 

    मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे सागर का दौरा

    उधर दलित वोट साधने के लिए कांग्रेस भी सागर और बुंदेलखंड में अपनी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का दौरा कराना चाहती थी. 13 अगस्त तारीख को उनका प्रदेश में जाना तय था, लेकिन प्रधानमंत्री का दौरा तय होने के बाद खरगे का दौरा टल गया. वह अब 22 अगस्त को मध्य प्रदेश जाएंगे.  

    दलितों को लुभाने की कोशिश

    दरअसल, प्रदेश में कुल 17 से 18 प्रतिशत आबादी दलितों की है. यहां करीब 64 लाख दलित वोटर हैं, जिनके लिए 230 विधानसभा की सीटों में से 35 सुरक्षित सीटें है. इनमें से पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 18 सीट तो बीजेपी ने 17 सीटें जीती थीं.

    15 सीटों पर दलितों का प्रभाव

    वहीं, कमलनाथ की सरकार गिरने के बाद कांग्रेस के चार एससी विधायक बाद में बीजेपी में बीजेपी में शामिल हो गए थे. यानि अभी 21  दलित विधायक बीजेपी के पाले में है.  इसके अलावा मध्यप्रदेश के दस से 15 जिलों में दलित आबादी अच्छी संख्या में है और जो चुनाव परिणामों पर सीधा असर डालती है.  

  • Modi Surname Case: राहुल गांधी को राहत मिली है, मुश्किलें खत्म नहीं

    Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शुक्रवार (4 अगस्त) को बड़ी राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी. 2019 में मोदी सरनेम पर टिप्पणी को लेकर गुजरात की एक कोर्ट ने राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी. 

    सुप्रीम कोर्ट से सजा पर रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक सूरत की सत्र अदालत से इस मामले में फैसला नहीं आ जाता. राहुल गांधी ने कन्विक्शन के खिलाफ सूरत की सत्र अदालत में अपील दायर कर रखी है, जो अभी लंबित है. ऐसे में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत तो मिली है लेकिन उनकी कानूनी मुश्किलें अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं. आइए जानते हैं अब इस केस में आगे क्या होगा?

    राहुल गांधी की सांसदी होगी बहाल

    मार्च 2023 में निचली अदालत से 2 साल की सजा मिलने के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी. लोकसभा सचिवालय ने इस बारे में नोटिफिकेशन जारी किया था. अब सुप्रीम कोर्ट से सजा पर रोक के बाद राहुल गांधी एक बार फिर लोकसभा में लौटने के लिए तैयार हैं. शुक्रवार (4 अगस्त) को फैसला आने के बाद कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने का समय मांगा था और उनसे राहुल गांधी की सदस्यता तत्काल बहाल करने की मांग की थी. स्पीकर ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं.

    क्या है प्रक्रिया?

    लोकसभा सचिवालय के अधिकारी कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद इसका अध्ययन करेंगे. इसके बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल करने के संबंध में एक आदेश जारी किया जाएगा. हालांकि, इस प्रक्रिया के पूरी होने की निश्चित समय सीमा नहीं है लेकिन आशा है कि राहुल गांधी अगले सप्ताह लोकसभा की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे.

    इसी साल एक मामले में हुआ ऐसा

    राहुल गांधी की तरह का ही एक मामला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सांसद मोहम्मद फैजल के साथ इसी साल हो चुका है. जनवरी 2023 में एक आपराधिक मामले में 10 साल की सजा पाने के बाद उनकी संसद सदस्यता चली गई थी. मार्च में उन्होंने केरल हाई कोर्ट में अपील की, जहां उनकी दोषसिद्धि और सजा निलंबित कर दी गई थी. इसके बाद उनकी संसद सदस्यता बहाल हो गई थी.

    कानूनी मुश्किल अभी खत्म नहीं

    सुप्रीम कोर्ट से कन्विक्शन पर रोक के बावजूद राहुल गांधी की मुश्किल अभी खत्म नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सजा पर रोक लगाई है. दोषसिद्धि को रद्द करने पर फैसला गुजरात की सूरत कोर्ट को लेना है, जहां पर राहुल गांधी ने अपील दायर कर रखी है. इसके पहले सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर तत्काल रोक लगाने की मांग खारिज कर दी थी. 

    क्या था मामला?

    राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में एक रैली में कहा था कि मोदी सरनेम वाले चोर होते हैं. इसी बयान को लेकर बीजेपी नेता और गुजरात सरकार में मंत्री रहे पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था. मार्च 2023 में सूरत की निचली अदालत ने राहुल गांधी को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी. खास बात ये है कि इस आरोप में राहुल गांधी को अधिकतम सजा दी गई थी. यानि अगर निचली अदालत ने एक दिन भी सजा कम दी होती तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता पर असर न पड़ता.

  • Himanta Biswa Sarma: इनके बच्चे बजरंग दल-बीजेपी में शामिल नहीं होते

    Himanta Biswa Sarma Family Photo: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार (4 अगस्त) को उनकी फैमिली फोटो को लेकर कमेंट करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि देखकर हैरानी होती है कि एक पारिवारिक फोटो को लेकर ऐसी बातें की जा रही हैं. पत्नी और बच्चों के साथ उनकी एक तस्वीर को लेकर ट्विटर यूजर्स ने कहा कि हिंदू वर्चस्ववादी नेता अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने के लिए भेजते हैं और उन्हें कभी भी राइट विंग संगठनों में शामिल नहीं होने देते. इस पर हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि ऐसा मानना गलत होगा कि उनका 22 साल का बेटा सही उम्र पर सही विकल्प नहीं चुनेगा.

    हिमंत ने बुधवार (2 अगस्त) को फैमिली के साथ एक फोटो ट्विटर पर पोस्ट की थी, जिस पर कुछ यूजर्स ने कमेंट कर कहा, ‘हिंदूवादी वर्चस्ववादी नेता अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने के लिए भेजते हैं, वे वेस्टर्न कपड़े पहनते हैं और एक लग्जरी लाइफ का आनंद लेते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने बच्चों को ‘हिंदू खतरे में हैं’ के नाम पर बजरंग दल या दुर्गा वाहिनी या बीजेपी आईटी सेल में शामिल नहीं होने दिया.

    क्या बोले हिमंत सरमा?
    इस पर हिमंत ने जवाब दिया कि यह देखकर हैरानी होती है कि आपने एक फैमिली फोटो को सिर्फ देखकर ही इतने कठोर निष्कर्ष निकाल लिए. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमने 31 जुलाई को फैमिली डिनर के साथ रिनिकी का जन्मदिन मनाया. यह तस्वीर डिनर के बाद की है. सरमा ने कहा कि उनका बेटा अभी 22 साल का है और पढ़ाई कर रहा है. पहले से ही यह मान लेना गलत होगा कि वह सही उम्र पर सही विकल्प नहीं चुनेगा.

    सरमा बोले. संगठन में शामिल होने के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण जरूरी
    उन्होंने यह भी कहा कि हमारे वैचारिक परिवार, जिसे आमतौर पर संघ परिवार कहा जाता है, के अंदर संगठनों में शामिल होने के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की जरूरत होती है. हिमंत ने कहा, ‘बीजेपी आईटी सेल या हमारे वैचारिक परिवार के किसी संगठन में शामिल होने के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है. संगठन में शामिल होना सिर्फ किसी नेता का बेटा या बेटी होने पर आधारित नहीं होना चाहिए. हमारे बच्चों के लिए संगठन में प्रवेश करना आसान होने के आपके सुझाव से ऐसा महसूस होता है कि आप वंशवादी उत्तराधिकार को बढ़ावा देने में विश्वास रखते हैं.’

  • Modi Surname Case:राहुल गांधी की सदस्यता बहाल करने की मांग तेज

    Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब उनकी सदस्यता बहाल करने की मांग तेज हो गई है. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhary) ने शनिवार (5 अगस्त) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चिट्ठी लिखी. 

    इससे पहले लोकसभा में कांग्रेस नेता ने ओम बिरला से मिलने का समय भी मांगा था. राहुल गांधी की सदस्यता तत्काल बहाल करने की मांग की थी. स्पीकर ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं.

    दरअसल, सूरत कोर्ट की तरफ से राहुल गांधी को 2 साल की सजा दिए जाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने एक नोटिफिकेशन जारी कर उनकी लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया था. इस आरोप में राहुल गांधी को सूरत कोर्ट की तरफ से अधिकतम सजा दी गई थी. यानि अगर निचली अदालत ने एक दिन भी सजा कम दी होती तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता पर असर न पड़ता.

    पत्र में क्या मांग की गई?

    इस पत्र में लिखा है, “सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को केरल के वायंड संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सदस्य राहुल गांधी की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी है, जिसका आदेश गुजरात की सूरत कोर्ट की तरफ से दिया गया था. अनुरोध है कि राहुल गांधी की अयोग्यता को रद्द कर दिया जाए. मैं आपसे अपील करता हूं कि तत्काल प्रभाव राहुल गांधी की सदस्यता को बहाल किया जाए.”

    क्या है पूरा मामला 

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शुक्रवार (4 अगस्त) को बड़ी राहत मिली थी. सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी. दरअसल, 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, ‘कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?’ इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था. 

  • No Confidence Motion Debate: किसी को नहीं छोडूंगा सभी को सजा मिलेगी: पीएम मोदी

    No Confidence Motion Debate: विपक्ष द्वारा पारित अविश्वास प्रस्ताव पर आज सदन में पीएम मोदी का भाषण होगा। पीएम के भाषण से पूर्व सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष और सत्तापक्ष एक दूसरे पर जमकर बरस रहे हैं। वही अब पीएम का सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। 

    पीएम मोदी का यह वीडियो बीजेपी द्वारा शेयर किया गया है। वीडियो में पीएम कह रहे हैं किसी को नहीं छोडूंगा सभी को सजा मिलेगी। यह वीडियो कांग्रेस पर कटाक्ष कर रहा है। पीएम के वीडियो पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा- बड़ी-बड़ी फेकने वाले आज संसद में फेकने वाले हैं। 

  • Rahul Gandhi in Lok Sabha: सदन में kiss का करिश्मा, चर्चा का विषय बनें राहुल गांधी

    देश: बीते दिन सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जोरदार भाषण के साथ शुरुआत की। राहुल के भाषण के जवाब में अमित शाह ने कई बातें कहीं। वही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राहुल के भाषण की सोशल मीडिया पर जमकर तुलना हो रही है। लोग दावा कर रहे हैं कि राहुल गांधी ने सदन में फ्लाईंग किस दिन, उनका यह व्यवहार गरिमा विहीन है। सदन में ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या यह किस पर चर्चा करना आवश्यक है, क्या सदन में इसके अलावा किसी अन्य मुद्दे पर बात नहीं हुई  क्या बीजेपी राहुल के सवालों का जवाब नहीं दे पा रही है या बीजेपी फ़्लाइंग किस के बलबूते लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। 

    क्या था मामला – 

    कल ९ अगस्त को सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी का भाषण शुरू होता है। भाषण में राहुल गांधी बीजेपी पर तीखी प्रतिक्रिया की, मणिपुर से लेकर कई मुद्दों को इंगित करते हुए केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। लेकिन राहुल के जाते ही जब भाषण के लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी खड़ी होती हैं तो चर्चा का विषय बदल जाता है। स्मृति ईरानी कहती हैं, अभी मुझसे पहले जिन्होंने भाषण दिया उन्होंने सदन की गरिमाओं का अपमान किया है। यह अनुचित व्यवहार है उन्होंने सदन में फ़्लाइंग किस उछाला।ऐसी हरकत सिर्फ Misogynist आदमी कर सकता है। यह उनके परिवार का आचरण है यह उस परिवार के संस्कार है। 

    स्मृति ईरानी ने जैसे ही फ़्लाइंग किस का सदन में मुद्दा उठाया सारी चर्चा राहुल गांधी पर अटक गई। फ़्लाइंग किस का वजन इतना बढ़ गया की मणिपुर हिंसा में महिलाओं के साथ हुई अभद्रता से लेकर प्रत्येक मुद्दा उसके सामने शून्य हो गया। सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना होने लगी। 

    मीडिया की मानें तो यह मामला एक मुद्दा नहीं सहजता का था। राहुल गांधीन ने जब अपना भाषण खत्म किया और सदन से जाने लगे तो उनके हाथ से कुछ दस्तावेज गिर गए। जब वह उनको उठाने लगे तो बीजेपी के कई नेता उनपर हंसने लगे। राहुल ने इसका जवाब देते हुए यह शांति से किया। लेकिन बीजेपी के लोग अन्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। 

    राहुल ने भाषण में किन मुद्दों को उठाया –

    राहुल गांधी ने सदन में जोर दार भाषण दिया था। गरीब 30 मिनट तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार बीजेपी पर बरसते रहे। राहुल गांधी ने अपने भाषण में मणिपुर को केंद्र में रखा। उनके भाषण में मुख्य रूप से मणिपुर हिंसा, हिंसा से प्रभावित महिलाएं और पीएम मोदी की मणिपुर पर चुप्पी मुख्य मुद्दे के रूप में रहे। राहुल ने भाषण के दौरान सवाल किया कि मणिपुर पीएम क्यों नहीं गए वही मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए व्यवहार को भारत माता की हत्या से जोड़ दिया। 

    फ़्लाइंग किस पर चर्चा कितनी जरुरी –

    सदन में कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन चर्चा का विषय राहुल गांधी द्वारा सदन में उछाली गई प्लाइंग किस को आवश्यक बताया गया। स्मृति ईरानी ने मुद्दे को हवा दी और इसे अनुचित बताते हुए महिलाओं का अपमान बताया। जबकि बीजेपी सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह जिनके ऊपर यौन शोषण के मामले दर्ज हैं वह सदन में उन महिलाओं के बीच बैठे हुए थे। 

    अब एक सवाल यह भी उठता है जो बीजेपी ब्रज भूषण शरण सिंह से एक सवाल नहीं पूछ पाती वह राहुल की फ़्लाइंग किस पर इतना बवाल क्यों मचाये हुए है।   जानकारों का मानना है बीजेपी राहुल की बेहतर होती छवि से परेशान है। बीजेपी को यह अनुभूति होने लगी है कि राहुल गाँधी महिलाओं के बीच अपने एक उम्दा छवि बनाने में सफल हुए हैं। बीजेपी से यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। बीजेपी फ़्लाइंग किस की चर्चा को हवा देकर राहुल की छवि ही धूमिल नहीं करना चाहती अपितु कहीं न कहीं मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। 

    क्या कहते हैं सोशल मीडिया यूजर्स –

    अजीत भारती कहते हैं – कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण के उपरान्त, स्मृति ईरानी की तरफ़ ‘फ्लाइंग किस’ का इशारा किया। यदि यह सत्य है, तो यह नीचता कोई नई बात नहीं। यह तो उस से अपेक्षित है। किसी दिन यह नशेड़ी संसद में ‘हैंड जॉब’ और ‘ब्लो जॉब’ के भी इशारे करेगा।

    दुर्भाग्य यह है कि इस बात को पूरा वामपंथी और बड़ी बिंदी नारीवादी गिरोह ‘मुहब्बत की दुकान’ कह कर उचित ठहराएगा। भाजपा की महिला सांसदों ने लोकसभाध्यक्ष से इसकी शिकायत करने की बात की है। मैंने तब ही कहा था कि बड़ी बिन्दी गैंग यह कहेगी कि राहुल गाँधी मोहब्बत की दुकान हैं, भाजपा वाले नफरती हैं, उन्हें प्यार की भाषा समझ में नहीं आती। 
    प्रियंका चतुर्वेदी ने राहुल गाँधी के छिनरपन को ‘प्रेम का इशारा’ कह कर बचाव किया है।

    सुप्रिया श्रीनेत –

    स्मृति ईरानी अपनी नौटंकी बंद करो

    शर्म करो, 78 दिन तक जब तक वो भयावह वीडियो नहीं आया – मुँह से एक शब्द नहीं फूटा आपका यह नक़ली आक्रोश और पाखंड बेशर्मी का एक नया मानक है। किसी के पास इस नाटक के लिये वक़्त नहीं है। स्मृति ईरानी एक औरत के नाम पर भी धब्बा हैं, मंत्री होने के नाम पर तो धब्बा हैं ही…”

    संदीप सिंह –

    राहुल गांधी के भाषण के जवाब में गृह मंत्री अमित शाह को 2 घंटे से ज्यादा का भाषण देना पड़ा, स्मृति ईरानी को और ज्यादा चिल्लाना पड़ा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को शांत रहना पड़ा, फ्लाइंग किस के नाम पर मणिपुर को छुपाया गया, भाजपा वालों में रावण का अहंकार दिखा अंत में राहुल की जीत हुई।

    पुनीत कुमार सिंह –

    स्मृति ईरानी मणिपुर से ध्यान हटाने के लिए बहुत ही अश्लील तमाशा कर रही हैं। आजतक पर मौसमी सिंह/ऐश्वर्या पालीवाल/पॉलोमी साहा की ज्वाइंट बाइलाइन रिपोर्ट में कहा गया है, “भाषण खत्म होने के बाद जब राहुल गांधी सदन से बाहर निकल रहे थे तो उनके कुछ कागज जमीन पर गिर गए. इन कागजों को उठाने के लिए राहुल नीचे झुके तो बीजेपी के सांसद हंसने लगे. इस पर राहुल ने ट्रेजरी बेंच की तरफ फ्लाइंग किस दिया और मुस्कुराते हुए निकल गए.” 

    स्मृति ईरानी कहीं सीन में नहीं हैं, बिना मतलब नाक फड़फड़ा रही हैं। मणिपुर में महिलाओं को नंगा करके घुमाया गया, उनकी नाक नहीं फड़फड़ाई। 
    महिला पहलवानों की दुर्गति की गई, उनकी चीख नहीं निकली। बिलकिस के अपराधी छोड़ दिए गए, उन्हें झोंटा नोचव्वल वाला गुस्सा नहीं आया। हाथरस और उन्नाव में क्या क्या हुआ, उन्हें गुस्सा नहीं आया। उन्हें गुस्सा है खुद की अश्लील कल्पना पर कि राहुल गांधी ने उन्हें फ्लाइंग किस किया।यह बेहद शर्मनाक है।

     

  • No Confidence Motion: या तो आप कंट्रोल कीजिए या फिर…

    No Confidence Motion Debate: लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर तीसरे दिन (10 अगस्त) की चर्चा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा, जिस पर सदन में हंगामा हो गया. 

    बीच में उठकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि ‘या तो आप कंट्रोल कीजिए या फिर…’ दरअसल, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपने भाषण के दौरान कहा, ”मणिपुर में हमने देखा कि हमारे घर की मां-बहन को वस्त्रहीन हालत में, विवस्त्र करके उनके ऊपर हमले हो रहे हैं, बलात्कार की घटना घट रही है.” इसी दौरान कांग्रेस नेता ने महाभारत काल की द्रौपदी का जिक्र कर दिया.

    इस पर सदन में हंगामा होने लगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी सीट से उठकर कहा, ”माननीय अध्यक्ष जी, आपने एक अपील की थी कि बहस को शांति से सुना जाए. हम बड़े धैर्य पूर्वक सुन रहे थे. उन्होंने कहा कि ब्रिटिश की कार्य पद्धति हमारी संसद ने एडॉप्ट की है. पूरे देश का अपमान किया, हम चुपचाप बैठे रहे. हमारी संविधान सभा ने यह पूरी प्रक्रिया तय की है, स्वीकार की है…”

    लोकसभा अध्यक्ष से की कांग्रेस नेता को कंट्रोल करने की अपील

    इसके बाद गृह मंत्री ने कहा, ”माननीय अध्यक्ष जी, इसके बाद भी (विपक्ष के नेता) अनर्गल बोलते रहे हैं. अभी ये जो प्रयास कर रहे हैं, उनकी पार्टी ने उनको समय नहीं दिया, आपने समय दिया, उसमें कुछ स्कोर करना चाहते हैं, मगर इस सदन की एक गरिमा है, देश के प्रधानमंत्री जी के बारे में जिस प्रकार का ये उल्लेख कर रहे हैं, मुझे लगता है, ये विपक्ष के नेता के लिए शोभा नहीं देता. आपको उनको या तो कंट्रोल करना चाहिए, या तो ट्रेजरी बेंच के एमपी भी ये नहीं सुन पाएंगे.

    अधीर रंजन चौधरी ने नीरव मोदी से की पीएम मोदी की तुलना 

    अधीर रंजन ने पलटवार करते हुए कहा, ”अमित शाह आप थोड़ा बैठ जाइए, प्रधानमंत्री जी को गुस्सा नहीं आता, आपको क्यों आता है इतना?” लोकसभा अध्यक्ष ने अधीर रंजन चौधरी से कहा, ”आप मुद्दों पर बोलिए.” अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ”मुद्दे पर तो बोलते हैं सर, बहुत दिन पहले सुना कि इस देश से हजारों का रुपया लूटकर नीरव मोदी भागे थे. कोई भी उनको पकड़ नहीं सका. हमारे एनडीए सरकार की इतना ताकत है, उन्हें छू नहीं सकी. वो कैरेबियाई समुद्र के बीच में मस्ती करते देखे जाते हैं. जो मर्जी वो कहते रहते हैं.”

    इतना बोलते हुए अधीर रंजन चौधरी बोल उठे, ”मैंने सोचा कि नीरव मोदी सारी जिंदगी के लिए हमारे से दूर चले गए लेकिन अब पता चला कि नीरव मोदी दूर नहीं गए, मणिपुर की घटना देखने के बाद ये पता चला नीरव मोदी यहां हिंदुस्तान में जिंदा है और नरेंद्र मोदी नीरव मोदी बनके अभी भी चुपचाप, अपनी चुप्पी साधकर बैठे हैं.”

    रिकॉर्ड से निकाला गया बयान

    अधीर रंजन चौधरी के इतने कहने पर सत्तापक्ष के सांसदों ने खड़े होकर विरोध किया. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा, ”सर, इनको (अधीर रंजन चौधरी) माफी मांगना चाहिए, इनकी पार्टी ने इन्हें समय नहीं दिया, समय हमारी पार्टी से लिया है और अभी क्या-क्या बात कर रहे हैं, अनाप-शनाप बात नहीं चलेगी…” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इनके (अधीर रंजन) के बयान को एक्सपंज करना चाहिए और इन्हें माफी मांगनी चाहिए. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बयान को रिकॉर्ड से निकाल दिया है.

  • Lok Sabha Election 2024: तमिलनाडु कांग्रेस नेताओं के साथ खरगे और राहुल की बैठक

    Lok Sabha Polls 2024: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार (4 जुलाई) को पार्टी की तमिलनाडु इकाई के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई.

    बैठक के बाद खरगे ने कहा कि तमिलनाडु में डीएमके के साथ कांग्रेस का गठबंधन मजबूत बना हुआ है. इसमें कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पार्टी के प्रदेश प्रभारी दिनेश गुंडूराव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केएस अलागिरी और कई अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल थे.

    ‘डीएमके के साथ हमारा गठबंधन मजबूत है’
    कांग्रेस अध्यक्ष ने बैठक की तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारी से जुड़ी बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. डीएमके और समान विचारधारा वाले दलों के साथ हमारा गठबंधन मजबूत बना हुआ है.

    खरगे ने कहा, ‘हमारे नेताओं को लोगों तक पहुंचना चाहिए और हम पर उनका भरोसा मजबूत करना चाहिए. तमिलनाडु के लोग के कामराज के दौर से कांग्रेस को स्वीकारते आए हैं और हम कामराज के कल्याण और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने का इरादा रखते हैं.’ कामराज तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी थे जो 1960 के दशक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे.

    राहुल गांधी क्या बोले?
    बैठक को लेकर राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में हुई बैठक में तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं के साथ 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सार्थक चर्चा हुई. सभी तमिलनाडुवासियों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण करना कांग्रेस पार्टी के दृष्टिकोण का एक अभिन्न अंग है.’

  • PM Modi Parliament Speech: विपक्ष को भले हमारे ऊपर विश्वास नहीं, लेकिन जनता का विश्वास बीजेपी

    PM Modi Parliament Speech: मणिपुर हिंसा के संदर्भ में विपक्ष सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया। कल अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने 2 घंटे का दमदार भाषण दिया। भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस के कार्यकाल से लेकर विपक्ष के नेताओं पर हमला बोला। पीएम ने कहा- विपक्ष को भले हमारे ऊपर विश्वास नहीं है लेकिन जनता का विश्वास बीजेपी है। 

    पीएम मोदी ने क्या कहा –

    मोदी ने कहा, विपक्ष को भले हमारे ऊपर अविश्वास है लेकिन जनता हमपर विश्वास करती है। हम जिस देश में रहते हैं वहां के लोग अखंड विश्वासी लोग हैं। ये समाज विश्वास का है। समाज के लोगों ने गुलामी का दौर देखा लेकिन उनका विश्वास कभी डगमगाया ही नहीं। हमारा समाज विश्वास के संकल्प से चलता है।

    पीएम आगे बोले आप इसे विश्वासघात कर तोड़ने की कोशिश मत करो- पीएम मोदी अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, बीते नौ सालों में देश के सामान्य नागरिक का विश्वास नई बुलंदी को छू रहा है, नए अरमानों को छू रहा है. मेरे देश के नौजवान विश्व की बराबर करने के सपने देखने लगे हैं, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है. हर भारतीय विश्वास से भरा हुआ है. आज का भारत न दबाव में आता है न दबाव को मानता है. आज जो कि दुनिया का विश्वास भारत पर बढ़ा है, उसका एक कारण भारत के लोगों का खुद पर विश्वास बढ़ा है. कृपा करके इस विश्वास को मत तोड़िए. समझ नहीं सकते तो चुप रहो, इंतजार करो लेकिन देश के विश्वास को विश्वासघात कर तोड़ने की कोशिश मत करो. 

    2047 तक भारत होगा विकसित देश
    प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 का विजन बताते हुए कहा कि बीते वर्षों में विकसित भारत की एक मजबूत नींव रखने में हम सफल रहे, हमने सपना लिया है कि 2047 में जब देश आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब इस विश्वास के साथ मैं कहता हूं कि जो नींव आज मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, उस नींव की ताकत है कि 2047 में हिंदुस्तान विकसित हिंदुस्तान होगा, भारत विकसित भारत होगा. ये सब देश वासियों की ताकत से होगा, उनके परिश्रम से होगा, उनकी सामूहिक शक्ति से होगा… ये मेरा विश्वास है. 

    साथ मिलकर करें काम
    अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि मैं सदन के साथियों से आग्रह करूंगा कि आप समय को पहचानिए, साथ मिलकर चलिए… इस देश में मणिपुर से भी गंभीर समस्याएं पहले भी आई हैं, आइए मिलकर चलें, राजनीति के लिए मणिपुर की भूमि का इस्तेमाल न करें… वहां जो हुआ है वो दुखपूर्ण है, उस दर्द को समझकर दर्द की दवाई बनकर काम करें, यही हमारा काम होना चाहिए. 

    अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि अगर ये प्रस्ताव नहीं आया होता तो शायद हमें भी इतना सब कुछ कहने का मौका नहीं मिलता, इसीलिए मैं फिर एक बार प्रस्ताव लाने वालों का आभार व्यक्त करता हूं, लेकिन ये प्रस्ताव देश के विश्वासघात का प्रस्ताव है.