Category: politics

  • Ashok Gehlot On Sachin Pilot: लाल डायरी का जिक्र सोची समझी साजिश, पायलट ?

    Ashok Gehlot On Sachin Pilot: राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने को है। बीजेपी सत्ता में आने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। तो कांग्रेस नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लाल डायरी को लेकर सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने बीते दिन बयान दिया था की अगर मैं न होता तो अशोक गहलोत झेल में होते। वही अब इसी संदर्भ में एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा यह सब सोची समझी साजिश है, बीजेपी कांग्रेस से भयभीत है वह हमारे नेताओं के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। 

    उन्होंने आगे कहा- हम सब जानते थे राजस्थान में पीएम का दौरा होने वाला है। पीएम के दौरे से पूर्व लाल डायरी का जिक्र हुआ जो पहले से सुनियोजित था। मेरे और पायलट के मध्य जो विवाद था वह खत्म है। हम 2023 में मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हमारी जीत होगी और हम पुनः राजस्थान में सरकार बनाएंगे। गहलोत ने आगे कहा – शहरी रोजगार योजना, 500 रुपये में सिलेंडर, 25 लाख का बीमा जैसी कई बेहतरीन योजनाएं हमारी सरकार ने जनता को दी हैं जनता हमारे लिए प्रथम है। जनता के समर्थन से हम पुनः सरकार बनाने जा रहे हैं। 

    उन्होंने कहा- बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं है वह जनता को भ्रमित करना चाहती है और लोगों के बीच नकारात्मक चीजे पहुंचा कर जनता को कांग्रेस के खिलाफ करने की कोशिश में जुटी हुई है। 
     

  • Rahul Gandhi Attacks BJP: सत्ता के लिए बीजेपी मणिपुर क्या पूरे देश को फूंक सकती

    Rahul Gandhi Attacks BJP: कांग्रेस  के पूर्व अध्यक्ष ने ऑनलाइन माध्यम से युवा कांग्रेस को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्हें सत्ता का भूखा बताया। उन्होंने कहा- पीएम को मणिपुर से कोई मतलब नहीं है वह सत्ता के लिए पूरे देश को आग में झोंक सकते हैं। 

     राहुल कहते हैं पीएम मणिपुर के लिए  क्या कर रहे हैं। उनको मणिपुर से कोई मतलब नही है। आज उनकी विचारधारा की वजह से मणिपुर जल रहा है। आरएसएस और बीजेपी को सिर्फ सत्ता से प्यार है यह लोग सत्ता के लिय मणिपुर क्या पूरा देश जला देंगे। उनकी और कांग्रेस की विचारधार के बीच युद्ध चल रहा है। उनको अब किसी के दुःख या पीड़ा से कोई फर्क नही पड़ता है। 

    उन्होंने आगे कहा- हम  संविधान की रक्षा, देश को जोड़ने और सामाजिक असमानता खत्म करने के लिए लड़ रहे हैं लेकिन बीजेपी कुछ चुनिदा लोगों की मदद करने को आतुर है। वह चाहती है कुछ विशेष लोग देश चलाएं और देश का सारा धन उनके पास जाए। 

    वह लोग हिन्दुस्तान को बांटने का काम करते हैं। उनके ह्रदय में देश प्रेम की भावना नही है। हमारे हम में देश प्रेम है इसलिए जब देश को तकलीफ होती है, किसी के साथ अनुचित होता है तो हमारा दिल दुखता है। 

  • Pm Narendra Modi: इंडिया छोड़ो ही अब देश को बचाएगा और भारत को विकसित भारत बनाएगा

    राजनीति- देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की जनता को सम्बोधित किया। जनता को सम्बोधित करते पीएम बोले आजादी के वक्त महात्मा गांधी ने नारा दिया था की अंग्रेजों भारत छोड़ो और अंग्रेज भारत छोड़ गए। आज इस नारे को भारत के घर-घर तक पहुंचने की आवश्यकता है यह नारा देश के विकास से जुड़ा है। देश के कल्याण के लिए इसकी पुनः आवश्यकता है। 

    उन्होंने आगे विपक्ष को इंगित करते हुए कहा – आज हम समृद्ध भारत का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। जैसे गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया आज उसी प्रकार देश को भ्रष्टाचार छोड़ो इंडिया, परिवारवाद छोड़ो इंडिया, तुष्टीकरण छोड़ो इंडिया। ये छोड़ो इंडिया ही अब देश को बचाएगा और भारत को विकसित भारत बनाएगा। 

    पीएम के भाषण से साफ़ पता चलता है बीट इंडिया यानी छोड़ो इंडिया का नारा विपक्ष के गठबंधन पर कटाक्ष पर रहा है। क्योंकि विपक्ष के गठबंधन का नाम इंडिया है और बीते कई दिनों से बीजेपी के नेता और पीएम विपक्ष पर बरस रहे हैं। 

     

  • RAHUL GANDHI: राहुल की शादी का राजनीतिक कनेक्शन

    राजनीति: कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के चर्चा में रहते हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने अपनी छवि को काफी हद तक बेहतर बना लिया है। पुराने राहुल और आज के राहुल में जमीन-आसमान का अंतर है। राहुल गांधी आज जनता के नेता बन चुके हैं। आय दिन वह महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों से मिलते रहते हैं। राहुल की सादगी जनता को खूब पसंद आ रही है। लेकिन इस बीच एक बात जो राहुल को लेकर सुर्खियों में है वह है उनकी शादी। आय दिन यह जिक्र छिड़ जाता है कि राहुल गांधी शादी कब रहे हैं क्या राहुल ने अपने लिए लड़की खोज ली है या राहुल की शादी के जिक्र के कुछ राजनीतिक मायने हैं। 

    कैसे छिड़ा राहुल की शादी का जिक्र :

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी की शादी का जिक्र भारत जोड़ो यात्रा के दौरान से छिड़ा हुआ है। राहुल गांधी से जब उस दौरान उनसे पूछा गया की वह शादी कैसी लड़की से करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया उनको ऐसी लड़की चाहिए जिसमें उनकी माँ और दादी इंदिरा गांधी के गुण हों। राहुल गांधी की बात से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह राजनीति में प्रखर और मुद्दों की समझ रखने वाली लड़की से शादी करना चाहते हैं। 

    राहुल जब आम आदमी की तरह एक मैकेनिक से मिलने जाते हैं तो वह भी राहुल से उनकी शादी को लेकर सवाल करता है। राहुल उससे भी कहते हैं मैं शादी कर लूंगा और उसे शादी में आने के लिए आमंत्रित भी करते हैं। वही विपक्ष एकता की पहली बैठक जब पटना में होती है तो राहुल की शादी का जिक्र लालू प्रसाद यादव छेड़ते हैं। वह कहते हैं आपको शादी कर लेनी चाहिए थी हम सब आपकी बारात जाते। चाहिए अब आप शादी कर लीजिए राहुल गांधी उनको भी विश्वास दिलाते हैं कि वह जल्द ही शादी कर लेंगे। 

    वही अभी हाल ही में राहुल गांधी के घर जब हरियाणा के पानीपत से किसान महिलाएं आती हैं। तो वह सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से मिलती हैं। महिलाएं खूब मस्ती करती हैं और सोनिया गांधी से बातचीत के दौरान कहती हैं कि अब राहुल गांधी की शादी कर देनी चाहिए। सोनिया महिला को जवाब देती हैं आप लड़की ढूढ़ लो हम शादी करवा देंगे। 

    अगर हम गौर करें तो इस वर्ष राहुल गांधी की शादी का इतना जिक्र हुआ है कि हर कोई यह अनुमान लगा रहा है कि उनकी शादी कहीं राजनीति में बड़ा बदलाव तो नहीं लाने जा रही है। क्या राहुल की शादी का संबंध राजनीति से जुड़ा है। क्योंकि लालू ने  जब राहुल की शादी का जिक्र किया तो इसे पीएम पद से जोड़ा गया था। 

    राहुल की शादी और राजनीति :

    साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने को है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही केंद्र में अपनी जीत का ध्वज लहराने की कवायद में जुटे हुए हैं। 962 के बाद से चुनाव आयोग ने आम चुनावों में जेंडर के आधार पर मतदान के आंकड़े देने शुरू किए। इस समय कांग्रेस के पास सबसे अधिक महिला वोटर थे। लेकिन 2019 के चुनाव में यह वोट बैंक शिफ्ट हुआ। महिलाओं का विश्वास बीजेपी पर बड़ा। जानकारों का मानना है पहले कांग्रेस का मुख्य चेहरा सोनिया और इंदिरा गांधी रही हैं। महिलाओं को लगता था कि कांग्रेस उनकी पार्टी है लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने मुख्य चेहरे के रूप में राहुल को आगे किया कांग्रेस पर महिलाओं का विश्वास कम हुआ और बीजेपी ने इसका फायदा उठाया। 

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी अगर शादी करते हैं तो इसका लाभ उन्हें राजनीति में होगा यह कहना बेहद मुश्किल है। क्योंकि जनता ने ऐसे नेताओं को भी स्वीकार किया है जो बिना महिला के राजनीति में उभर कर आए हैं। उनके पास पत्नी का साथ नहीं था लेकिन उन्होंने जनता का दिल जीत लिया। 

    हाँ यह कह सकते हैं यदि कांग्रेस नेता किसी बेहतर समाज से जुडी महिला से विवाह करते हैं तो यह कांग्रेस को मजबूती देगा और कांग्रेस के पास सोनिया के बाद एक नया मजबूत चेहरा होगा जिसे महिलाओं के बीच उनके रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। 

  • INDIRA GANDHI: आपातकाल में इंदिरा गांधी का साथी बना था आरएसएस

     

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    पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लीडरों से अच्छे संबंध थे। दोनों ही मदद के लिए एक दूसरे के पास जाते थे। आपातकाल के दौरान संघ ने न सिर्फ इंदिरा का साथ दिया, बल्कि 1980 में उन्हें सत्ता में लौटने में मदद भी की। हालांकि खुद इंदिरा संघ से सावधानीपूर्वक दूरी बनाए रखती थीं। आजादी से अगले छह दशकों में भारत के प्रधानमंत्रियों की कार्यशैली को लेकर पत्रकार नीरजा चौधरी की नई किताब ‘हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में यह दावे किए गए हैं

    पुस्तक में चौधरी ने लिखा कि संघ के खिलाफ होते हुए भी इंदिरा में आपातकाल में उसका समर्थन हासिल कर लिया था। आपातकाल के दौर में आरएसएस तीसरे प्रमुख बालासाहेब देवरस ने उन्हें कई बार लिखा। कई संघ लीडर कपिल मोहन के जरिए संजय गांधी से संपर्क करते थे। नीरजा के अनुसार इंदिरा को यह अंदेशा था कि मुसलमान कांग्रेस से नाराज हो सकते हैं, इसी वजह से वे अपनी राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती थीं। इस काम में आरएसएस से थोड़ा सा समर्थन बल्कि उसका तटस्थ रुख भी उनके लिए बड़ा मददगार साबित होता। साल 1980 में जब अटल बिहारी वाजपेयी अपनी सेकुलर छवि बनाने में जुटे थे, इंदिरा गांधी कांग्रेस का हिंदूकरण कर रहीं थीं।

    इंदिरा में हिंदुओं का नेता देखते थे देवरस
    पुस्तक में इंदिरा के करीबी रहे अनिल बाली के हवाले से दावा किया गया कि संघ ने उन्हें 1980 में 353 सीटों की विशाल जीत के साथ सत्ता में लौटने में मदद की, वे खुद इतनी सीटें नहीं जीत सकती थीं। जल्द विमोचित होने जा रही पुस्तक में बाली का कथन है कि इंदिरा गांधी मंदिरों में बहुत जाने लगी थीं, जिसने संघ के लीडरों को प्रभावित किया। बालासाहेब देवरस ने तो एक बार टिप्पणी भी की कि ‘इंदिरा बहुत बड़ी हिंदू हैं।’ बाली के अनुसार देवरस और बाकी संघ लीडर इंदिरा में हिंदुओं का नेता देखते थे।

    कई नेताओं ने छोड़ी कांग्रेस, वीपी सिंह जैसा असर कोई न छोड़ सका
    चौधरी के अनुसार कांग्रेस छोड़ने वाला कोई भी नेता वीपी सिंह जैसा प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति में नहीं डाल सका, चाहे वे चंद्रशेखर हों या शरद पवार, रामकृष्ण हेगड़े, ममता बनर्जी और जगन मोहन रेड्डी। वीपी सिंह ने दक्षिण, वाम, केंद्रीय और क्षेत्रीय ताकतों को साथ लेकर गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई, भले ही एक साल से कम वक्त के लिए। यह पहला असली राष्ट्रीय-गठबंधन था। क्षेत्रीय पार्टियों को पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में भागीदारी मिली। पार्टी छोड़ने वाले बाकी नेता केवल राज्यों तक सीमित रहे, बल्कि कई बार सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के ही समर्थन की जरूरत उन्हें हुई।

    पाकिस्तान तोड़ने का श्रेय दिया
    इससे पहले 1971 में पाकिस्तान के विखंडन और बांग्लादेश के जन्म ने भी आरएसएस को अभिभूत किया। तत्कालीन संघ प्रमुख माधव सदाशिव गोलवलकर ने उन्हें लिखा, ‘इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय आपको जाता है।’ तीन साल बार जब परमाणु परीक्षण किए, तो संघ फिर से इंदिरा गांधी की तारीफ में जुट गया। संघ हमेशा से सैन्य तौर पर एक मजबूत भारत चाहता था।

  • INDIAN POLITICS: अविश्वास प्रस्ताव के पीछे क्या है राज

    राजनीति; मणिपुर हिंसा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के मध्य विवाद जारी है। विपक्ष लगातार सदन का बहिष्कार कर रहा है और मणिपुर हिंसा पर पीएम मोदी से जवाब मांग रहा है। मणिपुर हिंसा को लेकर अमित शाह ने विपक्ष से कहा कि वह इस विषय पर सदन में बात करने को तैयार हैं लेकिन विपक्ष ने उनकी बात को नजर अंदाज किया और सदन अध्यक्ष ओम बिरला के सम्मुख सदन के नियम 198 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया। अविश्वास प्रस्ताव को सदन अध्य्क्ष ने स्वीकार कर लिया लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ कि इस विषय पर आखिर चर्चा कब होगी। 

    हालाकि यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले इस सप्ताह में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव क्यों ? क्या मणिपुर की हिंसा पर इसको लाना उचित ? क्या विपक्ष इसके माध्यम से केंद्र की राजनीति में परिवर्तन लाना चाहती है। 

    विपक्ष लगातार प्रयास कर रहा है कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन हो। वही सदन शुरू होने से पूर्व अचानक से सोशल मीडिया पर महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का एक वीडियो वायरल होता है। वीडियो वायरल होने ही हड़कंप मच जाता है। केंद्र सरकार सवालों के घेरे में होती है। मणिपुर की घटना पर पीएम का एक बयान आता है और विपक्ष को सदन में हंगामा करने के लिए एक मुद्दा मिल जाता है। 

    विपक्ष सदन शुरू होते ही मणिपुर के नाम पर सत्ता पक्ष को घेरने लगता है। बार-बार विपक्ष की तरफ से दावा होता है की मोदी सरकार मणिपुर मामले पर चर्चा करने से भाग रही है। हालाकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष से मणिपुर हिंसा पर बात करने की बात मीडिया के सामने कहते हैं। उनका दावा था सत्तापक्ष बात करने को तैयार है लेकिन विपक्ष इस मसले पर हंगामा करना चाहता है। 

    विपक्ष और सत्तापक्ष की दलीले सुनने और समझने के बाद राजनीति के जानकारों का कहना है कि- विपक्ष मणिपुर के मद्दे को तलवार बनाकर केंद्र सरकार की जड़ें काटना चाहता है। विपक्ष जिस तरह से सदन में हंगामा कर रहा है उससे जनता के बीच एक संदेश जा रहा है। जनता ख़ास कर महिलाएं इस घटना से प्रभावित हुई हैं। 

    विपक्ष बार-बार यह बता रहा है जलते मणिपुर पर पीएम मौन हैं पीएम का मौन अब जनता को काटने लगा है और अगर विपक्ष इसी प्रकार पीएम को सवालों के घेरे में उतारता रहा तो जनता के मन में यह बात उपजने से कोई नहीं रोक सकता की प्रधानमंत्री महिलाओं के साथ हुई बर्बरता पर कुछ नहीं कर रहे हैं। मणिपुर की घटना से अधिक अपनी सत्ता से प्यार है। 

    इसके साथ ही विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पारित किया है। यह अगर सत्ता गिराने के परिपेक्ष्य से है तो यह विपक्ष की एक रणनीति है। लेकिन यदि यह वास्तव में सहानुभति के परिदृश्य से है तो इसकी सराहना होनी चाहिए। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को सदन अध्यक्ष से स्वीकृति मिल गई है। विपक्ष जानता है अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा को लाइव दिखाया जाता है। अब सत्ता पक्ष यदि विपक्ष के सवालों का सही तरीके से जवाब नहीं देती है और अविश्वास प्रस्ताव पर सूचीबद्ध तरीके से चर्चा नहीं होती है। तो यह चर्चा अब केंद्र सरकार के लिए ऐसीपीड़ा बनेगी जिसके घाव साल 2024 के लोकसभा चुनाव में गहरा जाएंगे। 

  • Delhi Ordinance Bill: लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश बिल हुआ पेश तो AAP बोली

    Delhi Ordinance: दिल्ली के अधिकारियों की ट्रासंफर और पोस्टिंग से जुड़े अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेयक केंद्र सरकार ने लोकसभा में मंगलवार (1 अगस्त) को पेश किया. इसे सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में रखा. इसको लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये अलोकतांत्रिक है. 

    न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुता्बिक आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा कहा, ”राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 दिल्ली में लोकतंत्र हटाकर बाबूशाही स्थापित करेगा. विधेयक संसद में आज तक का पेश सबसे अलोकतांत्रिक और अवैध दस्तावेज है.”

    राघव चड्ढा ने आगे कहा कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार से सभी अधिकार छीनकर उपराज्यपाल को देने वाला विधेयक है. उन्होंने बताया कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के सभी सदस्य और संविधान का सम्मान करने वाले सदस्य इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे. 

    विधेयक के कानून बनने के बाद क्या होगा?
    यह विधेयक कानून बनने के बाद उपराज्यपाल को यह अधिकार प्रदान करेगा कि दिल्ली सरकार के अधिकारियों के तबादले और तैनाती में अंतिम निर्णय उनका ही होगा. कैबिनेट ने 25 जुलाई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी. विधेयक को लेकर दिल्ली की आप सरकार और केंद्र के बीच तनातनी है. 

    केंद्र सरकार विधेयक क्यों लेकर आई
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती केजरीवाल सरकार के पास होगा. इससे पलटते हुए केंद्र सरकार अध्यादेश 19 मई को ले आई. इसकी जगह ही सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया है. 

    बता दें कि केजरीवाल की सरकार ने अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बीते कुछ महीनों के दौरान केजरीवाल ने देशभर की यात्रा की और विधेयक के खिलाफ समर्थन जुटाने और इसे राज्यसभा में पारित होने से रोकने के लिए विपक्षी नेताओं से मुलाकात की. 

  • Maharashtra Politics:PM मोदी के साथ शरद पवार क्यों मंच करेंगे शेयर?

    Maharashtra Politics: एनसीपी चीफ शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को एक ही मंच शेयर करते हुए नजर आएंगे. दरअसल, पीएम मोदी को इस दौरान तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट की ओर से लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें एनसीपी मुखिया भी शामिल होंगे. वहीं दूसरी ओर इस कार्यक्रम को लेकर एक नया विवाद भी शुरू हो गया है.

    सियासी गलियारों में अब सवाल उठ रहा है कि पवार किसे प्राथमिकता देंगे क्योंकि केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश से जुड़ा बिल लाने वाली है.

    ‘इस देश के पीएम हैं.. उनका सम्मान करना पड़ेगा’

    एनसीपी में बगावत और अजित पवार के एनडीए में शामिल होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी चीफ शरद पवार एक साथ दिखेंगे. पीएम मोदी और शरद पवार के मंच साझा करने को लेकर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. इसी कड़ी में एनसीपी सांसद वंदना चौहान ने कहा- ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश के पीएम हैं, उनका सम्मान करना पड़ेगा इसलिए प्रोग्राम में शरद पवार जा रहे हैं’. सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दल पीएम मोदी के साथ मंच साझा करने को लेकर नाराज हैं. 

    शरद पवार को चीफ गेस्ट के रूप में किया गया आमंत्रित

    Maharashtra Politics: एनसीपी चीफ शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को एक ही मंच शेयर करते हुए नजर आएंगे. दरअसल, पीएम मोदी को इस दौरान तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट की ओर से लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें एनसीपी मुखिया भी शामिल होंगे. वहीं दूसरी ओर इस कार्यक्रम को लेकर एक नया विवाद भी शुरू हो गया है.

    सियासी गलियारों में अब सवाल उठ रहा है कि पवार किसे प्राथमिकता देंगे क्योंकि केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश से जुड़ा बिल लाने वाली है.

    ‘इस देश के पीएम हैं.. उनका सम्मान करना पड़ेगा’

    बकि उनके भतीजे और मौजूदा डिप्टी सीएम अजित पवार भी गेस्ट लिस्ट में शामिल हैं. 

  • Lok Sabha Election 2024: AAP को एक या दो नहीं 10 गुना होगा लोकसभा चुनाव में

    Lok Sabha Election 2024 Opinion Poll: देश में 2024 के अप्रैल या मई में लोकसभा का चुनाव होना है. दो बड़े गठबंधन एनडीए और इंडिया एक दूसरे से चुनावी भिड़ंत को लेकर तैयार हैं. फिलहाल अरविंद केजरीवाल की पार्टी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है. 26 पार्टियों की विपक्षी गठबंधन बनने के बाद हुए एक सर्वे में AAP पार्टी को फायदा होता दिख रहा है. आम आदमी पार्टी की लोकसभा सीटों में दस गुना का इजाफा होने का अनुमान सामने आया है.

    इंडिया टीवी सीएनएक्स ने बीते शनिवार को एक सर्वे के नतीजे जारी किए. जिसके मुताबिक, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में अबतक का सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. AAP को पिछले चुनाव में मिली एक सीट के मुकाबले इस बार 10 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है. सर्वे के अनुसार, अगर पार्टी 2024 का चुनाव इंडिया गठबंधन के साथ लड़ती है तो वह दिल्ली में पहली बार अपना खाता खोल सकेगी.

    AAP को इन दो राज्यों में फायदा!

    दिल्ली में बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन को दो सीट का नुकसान हो सकता है और इसका फायदा सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी को मिलने का अनुमान है. आंकड़ों के हिसाब से ऐसा कह सकते है कि केजरीवाल की पार्टी को गठबंधन से फायदा मिल सकता है. सर्वे में दिल्ली की सात सीटों में बीजेपी को 5 और आप को 2 सीट मिलने का अनुमान है.

    इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल की पार्टी को पंजाब में बड़ा फायदा होने का अनुमान है. पंजाब की सत्तारूढ़ AAP पार्टी को कांग्रेस के साथ यहां से गठबंधन में चुनाव लड़ने से दोनों पार्टी क्लीन स्वीप कर सकती है. जिसमें आप पार्टी को 8 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है. जबकि कांग्रेस को बचे 5 सीट पर जीत मिल सकती है. पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीट है.

    NDA-INDIA को कितनी सीटें?

    इंडिया टीवी सीएनएक्स में एनडीए को एक बार फिर से बहुमत मिलने का अनुमान है. एनडीए को लोकसभा की कुल 543 सीटों में 318 पर जीत मिल सकती है. जबकि विपक्ष की गठबंधन इंडिया इससे काफी दूर नजर आ रही है. इंडिया गठबंधन को 175 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं अन्य दलों जैसे में क्षेत्रीय पार्टियों को 50 सीटों पर जीत मिल सकती है.

  • UP Politics: 2024 के चुनाव में यूपी में कितनी सीटें जीतेगी सपा?

    Shivpal Singh Yadav Statement: लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. तमाम पार्टियों ने अपना पाला भी चुन लिया है. कहते हैं कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी (UP) से होकर ही गुजरता है. इसके मद्देनजर यूपी में विपक्ष का I.N.D.I.A. गठबंधन पूरा जोर लगा रहा है कि बीजेपी की ज्यादा से ज्यादा सीटें कम की जाएंगे. 2014 में बीजेपी (BJP) गठबंधन ने यूपी में 73 और 2019 में 64 सीटें जीती थीं. इस बार, सपा कोशिश में है कि बीजेपी गठबंधन को कम से कम पर रोका जाए. इस बीच, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के चाचा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने दावा किया है कि सपा और I.N.D.I.A. गठबंधन 2024 के चुनाव में 40-45 लोकसभा सीटें जीत सकता है.

    शिवपाल सिंह यादव का बड़ा दावा

    बता दें कि शिवपाल सिंह यादव यूपी के जौनपुर में एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे. यहां शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 40 से 45 सीटें यूपी में जीतेगी. इंडिया गठबंधन एनडीए से काफी मजबूत और सशक्त है. ये गठबंधन एनडीए को सत्ता से बाहर कर देगा. देशभर में कानून व्यवस्था पूरी तरह जर्जर हो चुकी है.

    महंगाई पर क्या बोले शिवपाल?

    सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने ये भी कहा कि मंहगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है. भ्रष्टाचार अपने चरम पर है. बिजली, सड़क, चिकित्सा और शिक्षा जैसी मूलभूत समस्याओं से उत्तर प्रदेश की जनता जूझ रही है. सपा सरकार में लागू की गई योजनाओं को अपना बताकर बीजेपी की सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है.

    बीएसपी से गठबंधन के सवाल पर दिया जवाब

    सपा छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वालीं सुषमा पटेल के बयान पर शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी से ज्यादा सम्मान किसी पार्टी में किसी को नहीं मिलता है. पार्टी हर वर्ग और हर समाज की है. वहीं, बीएसपी पार्टी से गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन का रिजल्ट देखना तो सब समझ में आ जाएगा.

    इसके अलावा ओमप्रकाश राजभर के बयान पर शिवपाल ने कहा कि यह बहुत हल्के आदमी हैं. इनकी बात का कोई मतलब नहीं निकलता है. यह कब कहां क्या किसको बोल दें. इसका कोई अंदाजा नहीं है. संवैधानिक पद पर रहते हुए क्या बोलते हैं इन्हें पता नहीं होता है. एक दिन प्रधानमंत्री को बोलते हैं कभी कुछ योगी को बोलते हैं. इनकी बात का कोई मतलब नहीं निकलता है.