Category: politics

  • PM Modi Cabinet Meeting: विपक्ष को जवाब देने के लिए तैयार हो रहा प्लान?

    PM Modi Meeting: संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम ऑफिस में वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की. इन मंत्रियों में अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, प्रहलाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन मेघवाल, अनुराग ठाकुर के नाम शामिल है. वहीं दूसरी ओर लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा भी शुरू हो गया है.

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से दो टूक कहा कि आप जो भी चर्चा चाहते हैं वो होगी लेकिन आप तय नहीं करेंगे कि कौन जवाब देंगे. वहीं मणिपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों सदनों में बयान देने की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन पार्टियों (I.N.D.I.A) संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रही हैं.

    विपक्ष बीजेपी पर लगातार हमलावर –

    मणिपुर मुद्दे को लेकर कांग्रेस बीजेपी पर लगातार हमलावर बनी हुई है. यही वजह है कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए कहा- ”आज संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन है. ‘इंडिया’ की मांग स्पष्ट है. मणिपुर में तीन मई के बाद के भयावह घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री को सदन में एक विस्तृत बयान देना चाहिए‌. यही उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए कोई ड्रामा नहीं करेंगे, जैसा कि वह ऐसे मौकों पर अक्सर करते हैं. इनकार करना, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, ध्यान भटकाना और बदनाम करना उनकी आदत है.”

    कांग्रेस ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मणिपुर के विषय पर संसद के भीतर वक्तव्य देना चाहिए, जिसको लेकर पूर्वोत्तर का यह राज्य इंतजार कर रहा है और पूरा देश उनकी ओर देख रहा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की यह मांग भी है कि समाधान की सामूहिक इच्छा को व्यक्त करने के लिए सदन में चर्चा हो. 

  • BEML Privatization: केंद्र सरकार करेगी अब इस बैंक का प्राइवेटाइजेशन

    BEML Privatization: केंद्र की मोदी सरकार प्राइवेटाइजेशन की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है। खबर है की जल्द ही बीईएमएल (BEML) बैंक का प्राइवेटाइजेशन कर दिया जाएगा। इस परिपेक्ष्य में स्थानीय राज्य सरकार से भूमि के ट्रांसफर को पूरा करने के लिए अंतिम मंजूरी होनी बाकी है। जैसे ही यह होता है बैंक का केंद्र सरकार द्वारा प्राइवेटाइजेशन हो जाएगा। 

    सरकार बीईएमएल (BEML) में अपनी 26 फीसदी की हिस्सेदारी हटाने की बात कर रही है। अगर सरकार ऐसा करती  तो बैंक पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं बचेगा। अभी बैंक में सरकार की 54% की हिस्सेदारी है। राज्य सरकार द्वारा जैसे ही जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होती है वैसे ही केंद्र सरकार के नीति निर्देर्शों के मुताबिक़ बैंक का प्राइवेटाइजेशन कर दिया जाएगा। 

    बता दें बैंक की बिक्री पर सरकार को शेयर मूल्य पर करीब 232.5 मिलियन डॉलर (1900 करोड़ रुपये) हास‍िल हो सकते हैं।  वित्तीय वर्ष 2024 में विनिवेश आय में 510 बिलियन रुपये जुटाने की योजना को मजबूती मिलेगी

  • राजस्थान: क्या सचिन पायलट के साथ फिर ‘जादू’ हो गया?

    कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 29 सदस्यीय प्रदेश चुनाव समिति का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट इसके सदस्यों में शामिल हैं. इसमें पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थकों से कम प्राथमिकता दी गई है

    पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश चुनाव समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी. पार्टी नेता रघुवीर मीणा, रघु शर्मा, हरीश चौधरी, प्रताप सिंह काचरियावास, रामेश्वर डूडी, मोहन प्रकाश और लालचंद कटारिया इस पैनल का हिस्सा हैं. 

    समिति का गठन खड़गे, राहुल गांधी, कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर रंधावा, डोटासरा, सचिन पायलट और राज्य के कई विधायकों और मंत्रियों के छह जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में एक चुनावी रणनीति बैठक में भाग लेने के कुछ दिनों बाद किया गया है. 

    समिति में गहलोत सरकार के 16 मंत्रियों को शामिल किया गया है. इनमें गहलोत समर्थक आठ और पायलट खेमे के सिर्फ दो मंत्री शामिल हैं. बाकी छह मंत्री किसी खेमे में नहीं हैं. हालांकि, गहलोत के सबसे खास माने जाने वाले दो मंत्रियों शांति धारिवाल और महेश जोशी को समिति में शामिल नहीं किया गया है . 

    पैनल में गहलोत के वफादारों का दबदबा ? 

    राजस्थान में कांग्रेस चुनाव समिति की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा करेंगे, जबकि पैनल में सभी जातियों, समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया. हालांकि कई मंत्रियों को सदस्य नियुक्त किया गया है लेकिन गहलोत के वफादार समिति पर हावी दिख रहे थे.

    कृषि विपणन राज्य मंत्री मुरारी लाल मीणा पायलट के एकमात्र प्रमुख समर्थक हैं, जिन्हें समिति में शामिल किया गया. जयपुर में राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पैनल की सदस्यता ने सुझाव दिया था कि इस साल दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण में गहलोत खेमे का पलड़ा भारी रहेगा.

    चूंकि न तो गहलोत और न ही पायलट को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इसकी वजह यह है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने और महत्वपूर्ण सीटों के लिए उम्मीदवारों का चयन करने के लिए आम सहमति बनाने की ओर अपना झुकाव रख रहा है. लेकिन गहलोत की पार्टी के ज्यादा नेताओं को चुनाव समिति में शामिल किया गया है.

    वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी ने इस बारे में एबीपी न्यूज को बताया कि राजस्थान को या पूरे कांग्रेस को लेकर अशोक गहलोत की छवि सबसे ज्यादा भरोसेमंद रही है. ऐसे में अशोक गहलोत को कमजोर करना किसी भी कीमत पर मुमकिन नहीं है.  सैनी ने कहा ‘ मलिकार्जुन खड़गे , सोनिया गांधी, राहुल गांधी या प्रियंका गांधी सभी को ये पता है कि कांग्रेस के लिए ज्यादा वफादार कौन है? 

    सैनी ने कहा’ कांग्रेस ने गोविंद सिंह डोटासरा को चेयरमैन बनाया गया, क्योंकि ये न लगे कि पार्टी पर किसी का दबदबा है. लेकिन चुनाव समिति में जिन भी लोगों को शामिल किया गया है उनमें से ऐसा कोई भी नहीं है जो गहलोत का विरोध कर सके. राजनीतिक मूल्यांकन ये बताते हैं कि सचिन पायलट के पास एक समुदाय का सपोर्ट है, जिसे पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती’. 

    सैनी ने कहा ‘चुनाव समिति में गहलोत के खेमे के ज्यादा समर्थकों को शामिल करना गहलोत की ताकत की तरफ इशारा है. इस विधानसभा चुनाव में भले ही गहलोत सीएम न बनाए जाएं लेकिन सीएम वही बनेगा जिसकी तरफ गहलोत इशारा करेंगे. 

    सैनी ने ये भी बताया कि कांग्रेस ने समिति के गठन को लेकर न तो अशोक गहलोत से न तो सचिन पायलट से मशवारा लिया है. ये पूरी तरह से पार्टी का फैसला है. उन्होंने आगे कहा कि समीति में ऐसे नेता भी हैं जो किसी खेमे में शामिल नहीं हैं. लेकिन ये पूरी तरह से दिखावटी है. पार्टी पर सिर्फ गहलोत का दबदबा है. पार्टी गहलोत पर भरोसा करती है और उन्हीं पर प्रयोग भी करेगी. 

    गहलोत के दो करीबियों को समिति में शामिल नहीं किया गया 

    गहलोत के सबसे खास माने जाने वाले दो मंत्रियों शांति धारिवाल और महेश जोशी को समिति में शामिल नहीं किया गया है. तो क्या ये गहलोत के लिए झटका नहीं माना जाए , इस सवाल पर सैनी ने बताया कि शांति धारिवाल अशोक गहलोत के सबसे ज्यादा विश्वासनीय हैं. वहीं महेश जोशी अशोक गहलोत की ही दूसरी छवि माने जाते हैं. इन दोनों के समिति में न होना या होना अशोक गहलोत के लिए कोई सिर दर्द नहीं है, क्योंकि समिति में शामिल न होकर भी ये दोनों ही नेता वही करेंगे जो अशोक गहलोत कहेंगे. 

    दूसरी तरफ वरिष्ठ मंत्री बीडी कल्ला को समिति में शामिल नहीं करना चर्चा का विषय बना हुआ है. राजस्थान की राजनीति पर पकड़ रखने वाले पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने एबीपी न्यूज को बताया कि बीडी कल्ला का समिति में न शामिल करना कोई हैरानी की बात नहीं है. मुख्यमंत्री को छोड़ कर 70 पार के नेताओं को समिति में शामिल नहीं किया गया है. 

    श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि ये चुनाव संचालन समिति का काम पूरे प्रदेश में चुनाव से संबधित उम्मीदवारों का चयन करना होगा. इस समिति में पायलट खेमें से सचिन पायलट के अलावा मुरारी लाल मीणा को ही लिया गया है.

    बाकी के ज्यादातर सदस्य गहलोत खेमे के हैं. लेकिन इसके इतर समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस प्रमुख रामेश्वर डूडी, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश, एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर, राज्यसभा सदस्य नीरज डांगी और कांग्रेस के गुजरात प्रभारी रघु शर्मा, पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी और उत्तर प्रदेश प्रभारी जुबैर खान शामिल हैं. 

    वहीं कांग्रेस आलाकमान के करीबी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का नाम गहलोत के ठीक बाद सदस्यों की लिस्ट में सामने आया. प्रताप सिंह खाचरियावास, लालचंद कटारिया, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, उदय लाल आंजना, शाले मोहम्मद, ममता भूपेश, गोविंद राम मेघवाल, प्रमोद जैन भाया, शकुंतला रावत, अशोक चांदना और भजन लाल जाटव को सदस्य बनाया गया है. 

    श्याम ने बताया कि अशोक गहलोत के खेमे से जिन 15 मंत्रियों को लिया गया है वो अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते हैं. आदिवासी से लेकर राजपूत जाति के नेताओं को सदस्य बनाया गया है. साफ है कि कांग्रेस ,सोशल इंजिनियरिंग बेहद ही साफ तरीके से कर रही है. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृतव की कोशिश ये रही है कि वो सबको साथ लेकर चलने का संदेश देना चाह रही है. पार्टी ये दिखा रही है कि इस बार का चुनाव किसी एक नेता के नाम पर नहीं लड़ा जाएगा.  

    श्याम ने आगे कहा कि पार्टी का कहना है कि ये चुनाव युवाओं का चुनाव होगा लेकिन पार्टी ने कांग्रेस युवा दल को समिति में शामिल नहीं किया है.  सेवा दल भी इसमें शामिल नहीं है. दबदबा गहलोत खेमे का है.

    टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने अभी भी कुछ साफ नहीं किया है. कांग्रेस ये कह रही है कि एक व्यक्ति का शासन नहीं होगा. समिति में सदस्यों को जिस तरह से शामिल किया गया है उसे देखने पर भी ऐसा लग रहा है, लेकिन पायलट खेमे को कम तरजीह देना इस बात की तरफ इशारा है कि पायलट कांग्रेस के लिए गैरजरूरी हैं. 

  • Stalin Interview: बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है

    Stalin Interview Nadu: तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज द्रमुक मुनेत्र कड़गम पिछले दो महीने से किसी न किसी कारणों से पूरे देश में चर्चा में रही है. फिर चाहे वह डीएमके के मंत्री सेंथिल बालाजी की ईडी के हाथों गिरफ्तारी हो या फिर बीजेपी को हराने की कोशिश के तहत बनाए गए गठबंधन I.N.D.I.A के गठन में पार्टी की भूमिका रही हो. इन सभी के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एबीपी नाडु के साथ एक विशेष इंटरव्यू में विपक्षी गठबंधन, केंद्रीय एजेंसियों के छापों के साथ ही बीजेपी के विरोध पर खुलकर बात की.

    तमिलनाडु सरकार की सीएम नाश्ता योजना, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और पुधुमई पेन योजना का जिक्र करते हुए जब सीएम स्टालिन से पूछा गया कि वह महिलाओं की शराबबंदी की मांग को लेकर भी घोषणा करेंगे तो उन्होंने कहा, करुणानिधि की शताब्दी के मौके पर 500 शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं. चरणबद्ध तरीके से शराब की दुकानों की संख्या कम करने और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा की जाएगी.

    बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू- स्टालिन

    विपक्षी गठबंधन इंडिया में अलग-अलग विचारधारा की पार्टियों में कैसे सामंजस्य बैठेगा, इस सवाल पर तमिलनाडु सीएम ने कहा, कई मौकों पर डीएमके ने पहले ही साबित कर दिया है कि विभिन्न विचारधारा वाले राजनीतिक दल एक सामान्य कारण के आधार पर एकजुट हो सकते हैं. 

    उन्होंने कहा, बेंगलुरु में विपक्ष की बैठक में मैंने हिस्सा लिया था, इंडिया का गठन भारत को बचाने के लिए हुआ है. एकजुट विपक्ष को देखकर बीजेपी को खतरा है. भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस विचार के साथ काम करती है कि वह प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और अन्य एजेंसियों का उपयोग करके पार्टियों को दबा सकती है. मेरा मानना है कि बेंगलुरु में बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.’

    बीजेपी को हराने का क्या है प्लान?

    बीजेपी को हराने के लिए अपनी रणनीति के बारे में उन्होंने बताया, मैंने विपक्ष की बैठक में 7 अहम रणनीतियां रखी हैं. धर्मनिरपेक्ष दलों की एकता से तमिलनाडु में जीत हासिल करने में मदद मिली. इसी तरह मैंने राष्ट्रीय स्तर पर सभी को एकजुट होने की बात कही. जो भी पार्टी किसी राज्य में मजबूत है तो उसके नेतृत्व में उस राज्य में गठबंधन बनना चाहिए. चुनाव करीब आने पर बाकी रणनीति के बारे में पता चल जाएगा.

    कौन होगा विपक्ष का पीएम कैंडीडेट?

    विपक्ष के लिए पीएम कैंडीडेट के सवाल पर डीएमके नेता ने कहा, प्रधानमंत्री कौन है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, समतावादी भारत की रक्षा की जाए. बेंगलुरु बैठक के बाद मैंने कहा कि गठबंधन इस तथ्य पर आधारित है कि किसे सत्ता में नहीं आना चाहिए. मकसद यही है कि बीजेपी को हराया जाए. 

    उन्होंने 2004 का जिक्र करते हुए कहा, जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सत्ता में आया, तो किसी ने भी यह घोषणा या उम्मीद नहीं की थी कि डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री बनाया जाएगा. हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि उनके नेतृत्व में 10 वर्षों के स्थिर शासन ने भारत के निरंतर विकास का मार्ग प्रशस्त किया.

    बीजेपी को तमिलनाडु में सफलता नहीं मिलेगी- स्टालिन

    तमिलनाडु में बीजेपी के विस्तार के सवाल पर स्टालिन ने कहा, बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जो केवल धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की नकारात्मक राजनीति करती है. पिछले 9 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धि बताने में असमर्थ बीजेपी सत्तारूढ़ सरकार की छवि खराब करने के इरादे से ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है ताकि उस पर सेंध लगाई जा सके.

    उन्होंने कहा, तमिलनाडु में विपक्षी अन्नाद्रमुक को बीजेपी ने गुलाम बना लिया है. बीजेपी तमिलनाडु के लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए भ्रष्ट अन्नाद्रमुक के कंधों पर चढ़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन ये सपना पूरा नहीं होगा.

    गिरफ्तारी के बाद भी सेंथिल बालाजी को मंत्रिमंडल से न निकालने पर भी तमिलनाडु सीएम ने खुलकर बात की. उन्होंने कहा, सेंथिल बालाजी के मामले में, जांच एजेंसी को संदेह से परे काम करना चाहिए था, न कि द्रमुक के नेतृत्व वाली सरकार को. कहा कि सेंथिल बालाजी के इस्तीफे पर सवाल उठाने वाली बीजेपी को पहले अपने मंत्रिमंडल से उन सभी मंत्रियों को हटाना चाहिए जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है. राजनीति में नैतिकता की बात एकतरफा नहीं हो सकती है.

  • Himanta Biswa Sarma: महाभारत को लव जिहाद से जोड़ने वाले बयान पर भड़के सीएम हिमंत बिस्वा

    Himanta Biswa Sarma: असम के गोलाहाट में हुए तिहरे हत्याकांड को लेकर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस हत्याकांड को लव जिहाद बता दिया, इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा की तरफ से एक बयान सामने आया, जिससे विवाद और ज्यादा बढ़ गया. उन्होंने इस हत्याकांड को महाभारत की घटना से जोड़ दिया, जिसके बाद अब सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि अगर कोई कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराता है तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. 

    हत्याकांड को लेकर हुआ विवाद-

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने भूपेन बोरा पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया. साथ ही उनकी गिरफ्तारी की बात भी कह दी. दरअसल गोलाघाट जिले में सोमवार 24 जुलाई को 25 वर्षीय एक व्यक्ति ने पारिवारिक विवाद के कारण अपनी पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी और बाद में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. सीएम सरमा ने इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताया था, क्योंकि पति मुस्लिम और पत्नी हिंदू थी. 

    क्या बोले थे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष-

    सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के इसी बयान पर जवाब देते हुए बोरा ने कहा, ‘‘प्यार और जंग में सब कुछ जायज है. हमारे प्राचीन ग्रंथों में कृष्ण का रुक्मणी को भगाकर ले जाने समेत कई कहानियां हैं और मुख्यमंत्री को आज के दौर में विभिन्न धर्मों तथा समुदायों के लोगों के बीच शादियों को लेकर विरोध का राग नहीं अलापना चाहिए.’’ 

    ‘पुलिस को नहीं रोक पाऊंगा’-

    सीएम सरमा ने बोरा के बयान पर कहा कि ‘लव जिहाद’ और भगवान कृष्ण और रुक्मणी की प्रेम कहानी के बीच समानता बताना निंदनीय है. उन्होंने कहा, ‘‘हम लोगों को गिरफ्तार करने का कदम नहीं उठाना चाहते लेकिन अगर भगवान कृष्ण को विवाद में लाया जाएगा तो कई ‘सनातनी’ लोग पुलिस थानों में मामले दर्ज कराएंगे और फिर मैं पुलिस को कार्रवाई करने से कैसे रोक पाऊंगा?’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई ऐसी टिप्पणियां करने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कराता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’’

    अपने ही धर्म में शादी से बनी रहेगी शांति- बिस्वा सरमा-

    असम के सीएम ने कहा कि इंसानों की गलतियों की तुलना भगवान से नहीं की जानी चाहिए ‘‘जैसे कि हम हजरत मुहम्मद और ईसा मसीह को किसी विवाद में नहीं लाते हैं.’’ मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर हिंदू पुरुष अपने समुदाय की महिलाओं से शादी करते हैं और मुस्लिम पुरुष अपने समुदाय की महिलाओं से शादी करते हैं तो देश में शांति रहेगी. उन्होंने कहा, ‘‘हमने गोलाघाट में तिहरे हत्याकांड में ‘लव जिहाद’ का अंजाम देखा है. इसका शिकार हुईं लड़कियों की आत्महत्या की कई दुखद घटनाएं हुई हैं. मैं युवाओं से हमारे राज्य की शांति तथा सौहार्द के हित में ‘लक्ष्मण-रेखा’ पार नहीं करने की अपील करता हूं.’

  • Lok Sabha Election Survey: इस बार कांग्रेस बना पाएगी लोकसभा चुनाव के बाद सरकार

    Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में अब केवल कुछ ही समय बचा है. इसको लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों में अभी से जंग देखने को मिल रही है. इस बीच आगामी लोकसभा चुनाव में सीटों के लिए किए गए एक सर्वे में कांग्रेस पार्टी के सीटों में बढ़त का अनुमान सामने आया है. 

    टाइम्स नाउ और इटीजी ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर बीते महीने एक सर्वे किया था. इस सर्वे के मुताबिक, देश में एक बार फिर पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है. हालांकि कांग्रेस की बात करें तो सर्वे के आधार पर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहने का अनुमान है. जानें कांग्रेस के लिए सर्वे के आंकड़े कहा कहते हैं. 

    सर्वे में कांग्रेस के आंकड़े
    टाइम्स नाउ इटीजी सर्वे के मुताबिक, बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन एनडीए को कुल 545 लोकसभा सीटों में 285 से 325 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी की बात करें तो कांग्रेस को 111 से 149 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. हालांकि कांग्रेस का प्रदर्शन पिछली लोकसभा चुनाव के मुकाबले काफी बेहतर रहने की उम्मीद है.

    कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव में केवल 52 सीटें ही मिल सकी थीं, वहीं पार्टी के वोट शेयर में भी भाड़ी गिरावट हुई थी. 2019 के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 19.55 फीसदी वोट शेयर ही प्राप्त हुआ था. यही हाल कांग्रेस का लोकसभा चुनाव 2014 में भी देखने को मिला था जिसमें पार्टी मात्र 44 सीटों पर आकर सीमट गई थी. कांग्रेस को लोकसभा चुनाव 2014 में 19 प्रतिशत मत मिले थे. 

  • RAJASTHAN POLITICS: राजस्थान का किंग कौन, जनता ने किया खुलास

    RAJASTHAN POLITICS : राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने को हैं। सत्ताधारी दल कांग्रेस सत्ता में पुनर्वापसी हेतु लगातार प्रयास कर रही है तो बीजेपी भी सत्ता में आने के लिए जनता को लुभाने में जुटी है। राजस्थान का चुनाव बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है। बीजेपी सोच रही है कि मोदी मैजिक के बलबूते वह राजस्थान में अपनी जीत का ध्वज लहरा देगी। वही अब इस बीच एबीपी सी वोटर का एक सर्वे सामने आया है। सर्वे में राजस्थान विधानसभा चुनाव के परिपेक्ष्य में बड़ा खुलासा किया गया है। 

    एबीपी सी वोटर के सर्वे के मुताबिक़- राजस्थान में 200 विधानसभा सींटों पर चुनाव होगा। चुनाव में जनता का मूड बदला दिखेगा। जनता का मानना है कि सत्ता में परिवर्तन होते रहना चाहिए। अगर सर्वे की मानें तो राजस्थान में बीजेपी को 109 से 119 सींटें मिल सकती हैं। यानी जनता इस बार पुनः सत्ता में भाजपा को देखने के लिए आतुर है। वही अगर हम कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस को राजस्थान में 78 से 88 सींटों पर जीत हासिल हो सकती है। जनता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्य से असंतुष्ट है। 

    सर्वे के मुताबिक़ बीजेपी को चुनाव में 46% वोट मिल सकते हैं वही कांग्रेस के खाते में महज 41% वोट आ सकते है। इसके अलावा 13 प्रतिशत वोट अन्य दलों के खेमे में जाएंगे। बता दें पिछली बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 200 सभी सींटो  पर अपने प्रत्याशी उतारे थे लेकिन जनता ने कांग्रेस का साथ दिया था और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा व राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनी थी। 

    जनता का कहना है कि राजस्थान में कांग्रेस की नीतियां सही रही हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बड़े सौम्य व्यक्ति हैं लेकिन कांग्रेस की आंतरिक कलह सचिन पायलट और अशोक गहलोत के आपसी मतभेद की वजह से हम अब पुनः बीजेपी का साथ देना चाहते हैं। सत्ता परिवर्तन से शायद जनता के लिए काम हो और  राजस्थान का विकास हो। 

  • Rajasthan Election 2023: अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर राहुल करेंगे कांग्रेस के चुनाव

    Rajasthan Elections 2023: राजस्थान में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर बीजेपी और कांग्रेस हर क्षेत्र में वोटरों को रिझाने के लिए प्रयास कर रही हैं. बीजेपी की बात करें तो पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत अन्य केंद्रीय नेताओं ने प्रदेश का दौरा शुरू कर दिया है. वहीं अब कांग्रेस में भी केंद्रीय नेताओं की एंट्री होने वाली है. नौ अगस्त को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर राहुल गांधी कांग्रेस के चुनाव अभियान का शंखनाद करने राजस्थान आ रहे हैं. राहुल गांधी के साथ में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी आएंगे.बड़ी बात यह है कि यह सभा चार राज्यों के आदिवासियों के सबसे बड़े आस्था के केंद्र मानगढ़ धाम में होगी. इस प्रस्तावित दौरे को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसमें बड़ी संख्या में भीड़ जुटने का प्रयास किया जा रहा है.

    मारवाड़ 28 सीटों पर नजर-

    राजस्थान की राजनीति में हमेशा ही 28 विधानसभा सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों की तरफ से नजर रहती है. यह सीटें हैं राजस्थान के मेवाड़ की, क्योंकि माना जाता है कि यहीं से जीत हार की स्थिति तय होती है. ऐसे में राहुल गांधी का दौरा भी इन्हीं 28 सीटों को लेकर समझा जा रहा है क्योंकि इन 28 में से 16 सीटों पर आदिवासियों का सीधा वर्चस्व है. यह सीटें आरक्षित हैं. आपको बता दें कि मानगढ़ धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सभा कर चुके हैं.

    राजस्थान से साधेंगे मध्य प्रदेश-

    मानगढ़ धाम राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों के आदिवासियों का सबसे बड़े आस्था का केंद्र है. राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में चर्चा है कि यह दौरा राजस्थान के आदिवासियों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के भी आदिवासियों को रिझाने के लिए किया जा रहा है.यह भी चर्चा है कि आदिवासी क्षेत्र में पिछले चुनावों में उभरकर सामने आई भारतीय ट्राइबल पार्टी को भी साधने की कोशिश की जाएगी.

  • Tariq Mansoor News: क्यों चर्चा में हैं बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तारिक मंसूर

    Tariq Mansoor News: साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी रणनीति बना ली है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आप पदाधिकारियों की सूची जारी की है। पदाधिकारियों की सूची में कई नए नाम शामिल है। इसी में एक नाम है तारिक मंसूर का। तारिक मंसूर को बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित किया गया है। तारिक मंसूर राजनीति में आने से पूर्व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। 

    तारिक मंसूर का बीजेपी के साथ पुराना संबंध है बीजेपी ने उन्हें विधानपरिषद भेजा। वही अब बीजेपी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। बीजेपी ने तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया इसके पीछे एक वजह उनका पसमांदा मुस्लिम समाज से आना भी है। बीजेपी लगातार पसमांदा मुस्लिम को आकर्षित करने और उन्हें बीजेपी के पक्ष में लाने के लिए प्रयास कर रही है। वही अब तारिक मंसूर को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए बीजेपी ने पसमांदा मुस्लिम को अपना वोट बैंक बनाने की राह पर पहला कदम बढ़ा दिया है। 

    कौन हैं तारिक मंसूर –

    तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रहे हैं। अपने पद से इस्तीफ़ा देने के बाद सरकार द्वारा इन्हें विधानपरिषद के लिए नामित किया गया। यह महज पांच साल तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। साल 2023 में यह पद्म अवार्ड कमेटी के सदस्य के लिए नामित हुए। यह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के भी सदस्य थे। वर्तमान में तारिक मंसूर को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। 

     

  • Manipur Violence: नेहरू की वजह से बिगड़े मणिपुर के हालात

    Manipur Violence: संसद में मणिपुर हिंसा को लेकर लगातार हंगामा जारी है, विपक्ष इस मामले पर प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांग रहा है. वहीं अब मोदी सरकार के मंत्री और बीजेपी सांसद भी विपक्ष को जवाब दे रहे हैं. हाल ही में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर संसद से जमकर हमला बोला था, जिसमें उन्होंने राहुल को ही हिंसा का जिम्मेदार ठहरा दिया. उनके बाद अब बीजेपी के एक और सांसद ने राहुल गांधी को मणिपुर हिंसा से जोड़कर एक बयान दिया है. उन्होंने मणिपुर हिंसा का ठीकरा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर फोड़ दिया. 

    नेहरू की वजह से बने ऐसे हालात- बीजेपी सांसद
    बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार ने एएनआई से बातचीत में कहा कि मुझे नहीं पता, राहुल गांधी को राजनीतिक इतिहास के बारे में कितनी जानकारी है. उन्होंने कहा, ”वो हमेशा गलत बयानबाजी करते हैं. ये चर्चा संसद में हो जाए तो कांग्रेस के खिलाफ जनमत तैयार हो जाएगा. 1960 में मणिपुर के लिए जवाहर लाल नेहरू एक कानून लाए, जिसकी वजह से ये हालात हैं. 

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस संसद में बहस नहीं चाहती है. वो केवल पीएम मोदी पर सवाल खड़े करना चाहते हैं. उन्हें पहले बहस करनी चाहिए, फिर उसके बाद पीएम मोदी उनके सवालों के जवाब देंगे.”

    स्मृति ईरानी ने राहुल को ठहराया था जिम्मेदार
    केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की मणिपुर को लेकर चुप्पी पर लगातार सवाल उठ रहे थे, हालांकि महिलाओं का वीडियो आने के बाद उन्होंने ट्वीट किया, लेकिन उसके बावजूद विपक्ष लगातार उनसे सवाल पूछ रहा था. इसी बीच संसद में स्मृति ईरानी ने अपने भाषण में राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला और पूछा कि उन्हें ये बताना चाहिए कि मणिपुर में उन्होंने कैसे आग लगाई. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस शासित राज्यों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महिला नेताओं को राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार में होने वाले अपराधों पर भी बोलना चाहिए.