Category: politics

  • Atal Bihari Vajpayee on Indira Gandhi: सिद्धांतो की पक्की इंदिरा ने नहीं किया अपशब्दों का उपयोग, अनोखा था अटल के साथ रिश्ता

    Atal Bihari Vajpayee on Indira Gandhi:: भारत विविधताओं का देश है। भारत की राजनीति ऐसी है कि उसमें वह लोग भी रूचि दिखाते  हैं जिनका राजनीति से कोई सम्बन्ध नहीं। इंदिरा गांधी हों या अटल बिहारी वाजपेयी। किसी ने भी अपनी गरिमाओं को नहीं लांघा। भाषा की सौम्यता ने हमेशा यह बताया की हमारे बीच सिर्फ पार्टी के मूल्यों का मतभेद है। हम एक दूसरे का सम्मान करते हैं। लेकिन अगर हम आज की राजनीति की बात करें तो अब भाषा में विनम्रता नहीं है, महज वोट बैंक के लिए राजनेता व्यक्तिगत प्रहार पर उतर आते हैं। कोई भरी सभा में अपने प्रतिद्वंदी के स्वागत में गलियां उड़ा देता है तो कोई किसी के परिवार पर कींचड़ उछाल देता है। बात जब इतने से नहीं बनती है तो धर्म का बीड़ा ठाकर समाज में दंगा करवा देता है। लेकिन आज हम आपको अटल बिहारी वाजपेयी और इंदिरा गांधी के बीच रिश्ते के विषय में बताने जा रहे हैं। यह दोनों एक दूसरे के प्रतिद्वंदी होने के बाद कैसे एक दूसरे के प्रति सम्मान जनक भाव रखते थे। 

    इंदिरा गाँधी और अटल बिहारी –

    अटल बिहारी बड़े सौम्य स्वाभाव के व्यक्ति थे। वह जब भी अपनी बात किसी के सम्मुख रखते तो विनम्रता से रखते थे। उनका मानना था कि आवेश में आकर आप किसी को अपनी बात के लाभ और हानि से परिचित नहीं करवा सकते हैं। वही इंदिरा गांधी जनता से  जुडी राजनेत्री थीं। वह जमीनी स्तर की राजनीति करती थीं, जनता के बीच जाकर उनका हाल पूछती हाँ कभी-कभी क्रोध में आकर कुछ निर्णय ले लेतीं। 

    पहली बार इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के मध्य मतभेद प्रिवी पर्स (सरकारी भत्ता) के परिपेक्ष्य में हुआ। 1969 को लोकसभा ने दो-तिहाई बहुमत से राजाओं को प्रिवी पर्स न दिए जाने का बिल पास किया। लेकिन एक दिन बात राज्य सभा में यह एक वोट से गिर गया। इंदिरा गांधी ने इस बिल को त्वरित रूप से समाप्त कर दिया। इंदिरा के इस निर्णय से अटल आहात थे उन्होंने इसे संविधान और सदन के अपमान की संज्ञा दी। 

    कब शब्दों से बरसे अटल-

    पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी ने सन 1971 में अपने भाषण के दौरान इंदिरा गांधी पर शाब्दिक प्रहार किया – उन्होंने कहा भारतीय लोकतंत्र में जो भी पवित्र है प्रधानमंत्री उसकी दुश्मन हैं। 

    जब उनकी पार्टी ने राष्ट्रपति पद के लिए उनके उम्मीदवार को स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने पार्टी ही तोड़ दी। जब संसद ने प्रिवी पर्स समाप्त करने के बिल को पास नहीं किया तो उन्होंने अध्यादेश का सहारा लिया। 

    जब सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश को अवैध करार दिया तो उन्होंने लोकसभा भंग कर दी।  अगर ‘लेडी डिक्टेटर’ का बस चले तो वो शायद सुप्रीम कोर्ट को भी भंग कर देंगी। 

    इंदिरा ने नहीं कहे अपशब्द –

    इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक जीवन में भाषा की विनम्रता को सदैव बनाए रखा। उनका कहना था हमें पूरा देश सुनता है यदि हम अपनी भाषा में विनम्रता नहीं रखते हैं तो यह पूरे देश को नकारात्मक संदेश देती है। हम अपने विरोधियों का विरोध सौम्यता के साथ भी कर सकते हैं। इंदिरा ने अपने संकल्प को जीवित रखा और अपने पूरे राजनैतिक करियर में अपशब्दों का उपयोग नहीं किया। उन्होंने जब भी जनसंघ पर कटाक्ष किया तो यही कहा- जनसंघ ने सड़कों और कॉलोनियों के नाम बदलने के अलावा कुछ भी नहीं किया है। 

    इंदिरा की तारीफ में बोले अटल –

    अटल ने कहा- मैं ख़ुश हूँ कि इंदिरा गाँधी याह्या ख़ाँ को सबक सिखा रही हैं. हमारे पास एक ऐतिहासिक मौक़ा है कि हम एक धर्मशासित देश को समाप्त कर दें या उसके जितना संभव हो उतने छोटे टुकड़े कर दें। उन्होंने आगे यह भी कहा- इंदिरा गाँधी की भी ये कहकर तारीफ़ की कि उन्होंने दो सप्ताह की लड़ाई में ठंडे दिमाग़ से काम लिया और देश को आत्मविश्वास से भरा नेतृत्व प्रदान किया। 

  • Lok Sabha Elections 2024: हरियाणा में एकता की दिल्ली में टूट

    Haryana News: हरियाणा में अगले साल होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज होती जा रही है. इसी बीच पार्टियों के नेताओं का दल-बदल का सिलसिला शुरू हो चुका है. बीजेपी, जेजेपी, आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियों के नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा है. गुरुवार को राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के दिल्ली आवास पर सैंकड़ों की संख्या में अन्य पार्टियों से आए नेताओं ने कांग्रेस पर विश्वास जताया. दीपेंद्र हुड्डा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई है. 
    गठबंधन में टूट से कांग्रेस को फायदा-

    हरियाणा में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन के बीच चल रही खींचतान का फायदा कांग्रेस को मिलता दिखाई दे रहा है. बीजेपी-जेजेपी के नेताओं में इस बात का संदेह बना हुआ है कि बीजेपी जेजेपी का गठबंधन खत्म होगा या फिर गठबंधन मिलकर ही चुनाव लड़ेगा. जिसकी वजह से अब पार्टी के नेता कांग्रेस का रूख करने लगे है. दूसरा आप नेताओं को प्रदेश में पार्टी का जनाधार नजर नहीं आ रही है. जिसकी वजह से वो भी पार्टी से किनारा कर रहे है.

    एक्टिव मोड में नजर आ रही कांग्रेस-

    लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस एक्टिव मोड में नजर आ रही है. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया की चंडीगढ़ में बैठक का असर ये हुआ कि चार धड़ों में बंटी कांग्रेस अब दो धड़ों में बंटी नजर आई. रणदीप सिंह सुरजेवाला, कुमारी शैलजा और किरण चौधरी सभी एक मंच पर दिखाई दिए और प्रदेश की गंठबंधन सरकार को जमकर घेरा. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं कर रहे है. यानि पूरी तरीके से गठबंधन सरकार पर हावी होने का प्लान तैयार हो रहा है.

    ये नेता कांग्रेस में हुए शामिल-

    अनिल पाल्हावास प्रदेश प्रवक्ता (BJP), सुशील सरपंच कापड़ो एवं उपाध्यक्ष सरपंच एसोसिएशन हिसार, मंजू ढाका जिला उपाध्यक्ष रोहतक (आप), अमित कुमार बनियानी हलका BC प्रधान (रोहतक JJP), अनूप सरपंच बीड़ हांसी अपने सकड़ों साथियों सहित जिसमें गज्जू सरपंच पाल्हावास, राहुल बागी पाल्हावास, सन्नी कुमार कोसली, बजरंग कुमार कोसली, रौनक सांगवान लिसाना, लक्ष्मण पाल्हावास ,मोहित पाल्हावास, दीपक कुमार पाल्हावास, ब्रिजेश रंगा रेवाड़ी, हरमन रेवाड़ी, मोहित यादव कापाटोरी, मनोज यादव सरपंच जाटूसाना, अरविंद कुमार आशियाकी, दीपक पाल्हावास, शिवराज पाल्हावास, प्रताप पाल्हावास, सुनील पाल्हावास, मनीष पाल्हावास, राहुल पाल्हावास, नितिन पाल्हावास, कपिल मालियाकी, जतिन उषमापुर, मनोज पाल्हावास, संजय पाल्हावास, हर्ष पाल्हावास, नवीन पाल्हावास,संजय पाल्हावास, सुनील पाल्हावास, संजीव पाल्हावास, संदीप पाल्हावास,मनोज पाल्हावास, सुरेंद्र पाल्हावास, जयवीर सरपंच गाधला, मोहित सदस्य ब्लॉक समीति जाटूसाना, सत्यनारायण पाल्हावास, सतपाल जिलारा, सुनील बागी पाल्हावास, विजय कुमार प्रजापत चौकी नंबर-2, ब्रहमप्रकाश पाल्हावास, मनोज , अजय सरपंच रोहडाई, गौरव पाल्हावास, सुरेश जांगड़ा, लोकेश जांगड़ा,रित्तिक, रित्तिक कुमार, रोबिन ठाकरान, साहिल जांगड़ा, आदर्श शर्मा ,विनय जांगड़ा, गोविंद यादव खेड़ा खुर्मपुर, अंकित यादव खेड़ा खुर्मपुर, कपिल यादव खेतियावास, नवीन यादव पाल्हावास, महासिंह गाधला, प्रदीप गाधला, एस एन यादव, ललित वर्मा, एन जी गौस्वामी, भरत भूषण, अमित सिंह, मनीष ,रॉकी, तेहरी चिहड़, अरविंद चिहड़, हनी वर्मा,महेंद्र भौरिया बीड़ हांसी, राजबीर भौरिया बीड़ हांसी, भोलू टाक पंच ग्राम पंचायत रामायण एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी बाली सेना, विक्रम बाल्मीकि मेहंदा उपाध्यक्ष बाली सेना, दीपक टाक रामायण आदि के नाम शामिल हैं.

  • Uniform Civil Code: बीजेपी और विपक्ष एक ही एजेंडे पर कार्यरत

    Uniform Civil Code: देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बहस जारी है। विपक्ष लगातार समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध कर रहा है। मुस्लिम समाज के लोग इसके खिलाफ एकजुट आवाज उठा रहे हैं। वही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी और विपक्ष पर हमला बोला है।  

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असुद्दीन ओवैसी कहते हैं विपक्ष और बीजेपी समान हैं दोनों में कोई खास अंतर नहीं है। विपक्ष को यह साबित करना होगा की वह बीजेपी से अलग है। हमारी पार्टी समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध करेगी क्योंकि इसे मजलूमों पर थोपा जा रहा है। यह अनुचित है। वही विपक्ष को अलग रणनीति पर चलना चाहिए। विपक्ष बीजेपी को हराना चाहता है लेकिन विपक्ष उसी एजेंडे पर काम करता है जो बीजेपी सेट करती है। यदि विपक्ष वास्तव में बीजेपी से लड़ना चाहता है तो उसे स्वयं को अलग दिखाना होगा। 

    उन्होंने आगे कहा- विपक्ष के दल में बड़े -बड़े चौधरी हैं। वहां ओवैसी से अछूतों के लिए कोई स्थान नहीं है। हम भी बीजेपी को हराना चाहते हैं हमारा एजेंडा भी बीजेपी की हार है। लेकिन विपक्ष में ओवैसी नहीं है। उन्होंने विपक्ष की मीटिंग में केसीआर को आमंत्रित नहीं किया। क्या हमारे केसीआर कोई कमजोर नेता हैं लेकिन विपक्ष की यही नीति है। 

    समान नागरिक संहिता (UCC) पर विधि आयोग ने आम जनता से राय मांगी थी। बीजेपी चुनाव के समय समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र छेड़ती है। बीजेपी की नीति भड़काऊ मुद्दों पर चुनाव जीतना है। बीजेपी अपने हित हेतु विधि आयोग का उपयोग कर रही है। 

  • Congress On PM Modi France Visit: कांग्रेस बीजेपी के मध्य छिड़ा सोशल मीडिया युद्ध

    Congress On PM Modi France Visit:  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़्रांस के दौरे पर गए और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनपर तंज कसा। उनके तंज से बीजेपी और कांग्रेस के मध्य सोशल मीडिया वार छिड़ गया है। बीजेपी नेता एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लिखती हैं – एक व्यक्ति जो भारत के आंतरिक मामलों में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप चाहता है, एक निराश राजवंश जो ‘मेक इन इंडिया’ की महत्वाकांक्षा को ठेस पहुंचाता है. जब हमारे प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सम्मान मिलता है तो वह भारत का मजाक उड़ाता है। 

    उन्होंने आगे कहा – लोगों की ओर से अस्वीकार किए जाने के बाद, वह इस बात से नाराज हैं कि रक्षा अनुबंध अब राजघराने के दरवाजे पर नहीं पहुंच रहे हैं.” पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के निमंत्रण पर फ्रांस की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गए थे. वह फ्रांस की यात्रा संपन्न कर शनिवार को एक दिवसीय यात्रा के लिए यूएई पहुंचे हैं। 

    स्मृति ईरानी के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत कहती हैं एक महिला जो अन्य महिलाओं के खिलाफ अत्याचार पर एक शब्द भी नहीं बोलती, जो हमारे एथलीटों के यौन शोषण पर चुप रहती हैं, जो कमर तोड़ने वाली महंगाई चुप हैं, उनका काम सिर्फ राहुल गांधी के खिलाफ जहर उगलना है। 

    उन्होंने आगे कहा- वे (स्मृति ईरानी) अपनी ही पार्टी में दरकिनार कर दी गईं। केवल सुर्खियों में बने रहना चाहती हैं. मैं आपको एक डॉक्टर को दिखाने का भी सुझाव देती हूं, नफरत का ये स्तर खुद को नुकसान पहुंचाने वाला है। खूब सारी मोहब्बत.” वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, “स्मृति ईरानी इस मुद्दे पर पीएम से कुछ बोलने के लिए कहें. प्रधानमंत्री दुनिया भर में घूम रहे हैं, लेकिन मणिपुर पर एक मिनट के लिए भी बात नहीं कर रहे। 

  • CONGRESS ON BJP MEETING: बीजेपी की बैठक से कांग्रेस खुश, बोली बड़ी बात

    CONGRESS ON BJP MEETING:: साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव हेतु बीजेपी और कांग्रेस अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस विपक्ष एकता के बलबूते बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहती है वही बीजेपी अपनी रणनीति में बदलाव कर विपक्ष एकता को ही धराशयी करने में जुटी है। वही अब खबर मिली है की मंगलवार के दिन होने वाली बीजेपी की बैठक से कांग्रेस काफी प्रसन्न है। क्योंकि कांग्रेस का यह मानना है की बीजेपी अब भयभीत है। पहले बीजेपी को यह लगता था विपक्ष को वह आसानी से तोड़ देंगे लेकिन अब वह भी विपक्ष की रणनीति अपना कर छोटे दलों के साथ गठबंधन करने को अमादे हैं। 

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बीजेपी पर वार करते हुए कहा- यह विपक्ष को अकेले हराने की बाद करते थे। इनका दावा था विपक्ष इनके सम्मुख शून्य है। लेकिन अब यह एनडीए में नई जान फूकने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। विपक्ष एकता बीजेपी के लिए समस्या बन गई है आगामी समय में यह परिवर्तनकारी साबित होगी। अचानक से चिराग की पार्टी राजग याद आ गई। यह वही राजग है जिसका एक समय बीजेपी जिक्र तक नहीं करती थी। राजग एनडीए गठबंधन में जान फूंकने और पुनः मजबूती से खड़ी करने के उद्देश्य से याद की गई है। बीजेपी के मन में विपक्ष एकता का भय है। 

    वहीं कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा- बीजेपी फेल हो चुकी है जनता उनके फरेब को समझ चुकी है अब परिवर्तन होगा। जनता बदलाव के पथ पर आगे आई है।  पटना की बैठक में साथ आए 26 विपक्षी दल एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। बीजेपी यह देख बौखलाई है बीजेपी को कुछ समझ नहीं आ रहा है। हम एकजुट होकर बीजेपी को मात देंगे। 

  • BIHAR POLITICS: जेडीयू में भी टूट संभव

    बिहार की राजनीति में आने वाले समय में बड़ी राजनीतिक उलटफेर होने की अटकलें लगाई जा रही हैं. एक तरफ जहां 18 जुलाई को होने वाली एनडीए की मीटिंग में चिराग पासवान और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को बुलाया गया है तो वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान से लेकर सुशील मोदी तक सबने दावा कर दिया है कि आने वाले समय में बिहार में जेडीयू टूट सकती है. 

    हाल ही में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि, बिहार में सरकार किसी भी वक्त टूट सकती है. उन्होंने कहा था कि जेडीयू के लोग भी नीतीश कुमार से ऊब चुके हैं और दूसरा ऑप्शन तलाश रहे हैं. वह एनडीए का समर्थन भी कर सकते हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने तो जेडीयू में रहते हुए ही यह बात कहनी शुरू की थी और अब भी इस बात को दोहराते रहते हैं.

    ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन सभी नेताओं का दावा सही हो सकता है? महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी की तरह क्या जेडीयू में टूट संभव है?

    कहां से शुरू हुई जेडीयू में फूट पड़ने की बात 

    महाराष्ट्र में एनसीपी की टूट के बाद बिहार के बीजेपी अध्यक्ष सुशील मोदी का बयान आया था. उन्होंने कहा था महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ जो हुआ है वह आने वाले समय में बिहार में भी हो सकता है. यही कारण है कि नीतीश कुमार ने पिछले 13 सालों में अपने पार्टी के विधायकों से कभी एक-एक कर बातचीत नहीं की है. लेकिन अब वह अपने विधायकों के साथ मिल रहे हैं जिससे साफ पता चलता है कि वह डरे हुए हैं कि कहीं महाराष्ट्र की तरह उनकी पार्टी में भी फूट न पड़ जाए.

    बीजेपी के मुताबिक जेडीयू में टूट की वजह

    बीजेपी का कहना है कि जेडीयू के विधायक 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे विपक्षी एकजुटता में राहुल गांधी को पीएम पद का दावेदार नहीं बनाना चाहते है. 

    इसके अलावा हाल ही में नीतीश कुमार का एक बयान आया था कि उनके बाद राज्य की कमान तेजस्वी यादव को सौंपी जाएगी यानी नीतीश के बाद तेजस्वी यादव को बिहार का सीएम बनाया जाएगा. नीतीश के इस बयान से जेडीयू के अधिकतर विधायक नाखुश हैं क्योंकि अगर तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनते हैं तो जेडीयू के जीतने के संभावना कम हो जाएगी.

    क्या वाकई टूट सकती है? 

    वर्तमान में जेडीयू की जो स्थिति है उसे देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि शिवसेना और एनसीपी की तरह जेडीयू में टूट फिलहाल संभव है. दरअसल महाराष्ट्र के चुनावी आंकड़े और बिहार के चुनावी आंकड़ो में काफी अंतर है. यहां की नेता और राजनीति भी महाराष्ट्र की राजनीति से काफी अलग है.  

    आंकड़ों से समझे तो बिहार में गठबंधन में जो सरकार है उसमें आरजेडी के पास फिलहाल सबसे ज्यादा 79 विधायक हैं और जेडीयू के पास 45 विधायक हैं. तीसरे स्थान पर कांग्रस है जिसके पास राज्य में 19 विधायक हैं. फिलहाल इन तीनों पार्टियों ने गठबंधन के तहत सरकार बनाया हुआ है. 

    ऐसे में अगर बीजेपी शिवसेना की तरह जेडीयू को तोड़ने की कोशिश करती है तो जेडीयू के कम से कम 30 विधायकों को एक तरफ होना होगा जो कि बिहार में बेहद मुश्किल है. 

    बिहार में तख्तापलट कितना आसान

    बिहार में अगर भारतीय जनता पार्टी तख्तापलट की कोशिश करती है तो उसे 122 सीटों का आंकड़ा पार करना होगा और फिलहाल पार्टी के पास सिर्फ 74 विधायक हैं. जिसका मतलब है कि बिहार में तख्तापलट करने के लिए बीजेपी को 48 और विधायकों की जरूरत है. 

    वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन के पास फिलहाल करीब 160 विधायक हैं. जिसमें जेडीयू, राजद और कांग्रेस के अलावा तीन वामपंथी दल शामिल हैं. हालांकि इसी साल जून महीने में जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाले हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने नीतीश सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. हम पिछले चार विधायकों के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हुई थी. हालांकि, अब वह एनडीए के साथ है. 

    क्यों नहीं टूट सकती जेडीयू, तीन कारण 

    1.  नीतीश के इर्द-गिर्द शामिल नेताओं विजय चौधरी, अशोक चौधरी, संजय झा और ललन सिंह का अपना जनाधार नहीं.
    2.  विधायकों की संख्या कम है और जितने हैं उनमें से अधिकांश नीतीश के समीकरण के सहारे ही जीतते हैं.
    3. नीतीश के पास साइलेंट वोटर्स हैं. 

    जेडीयू के टूट के दावों के पीछे ‘हम’ का तर्क 

    हम के नेता और पूर्व मंत्री संतोष सुमन की मानें तो पिछली साल सरकार बनाने और जेडीयू के महागठबंधन में शामिल होने से पहले ही यह किया गया था कि नीतीश कुमार जितनी जल्दी हो सके विपक्षी एकता की बागडोर लेकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखेंगे. शुरुआत में सीएम नीतीश को यह प्रस्ताव अच्छा लगा और उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ते हुए आरजेडी का दामन थाम लिया. आरजेडी ने नीतीश कुमार को वादे के अनुसार मुख्यमंत्री पद दे दिया लेकिन नीतीश को जब अपना किया गया वादा पूरा करने को कहा गया तो वह स्पष्ट जवाब देने से बचने लगे हैं. 

    जिसे देखते हुए आरजेडी ने नीतीश को अल्टीमेटम दिया है कि वह जितनी जल्दी हो सके तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाएं और खुद को विपक्षी एकता के लिए आजाद करें. संतोष सुमन के मुताबिक आरजेडी की तरफ से ये भी कहा गया है कि अगर नीतीश ऐसा नहीं करते हैं तो वह उनके ही विधायकों को तोड़ कर तेजस्वी की ताजपोशी करा दी जाएगी. 

    जेडीयू ने इन अटकलों पर नीतीश ने क्या कहा

    जेडीयू में फूट पड़ने के इतने सारे कयास लगाए जाने लगे कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को खुद सामने आना पड़ा. उन्होंने पार्टी में किसी भी तरह की फूट को इनकार करते हुए कहा कि जेडीयू में टूट की आशंका वही लोग जता रहे हैं, जिनकी आदत पार्टियों को तोड़ने की रही है. 

    वहीं नीतीश कुमार जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक को संबोधित करते इन सभी अटकलों और अफवाहों पर फुलस्टॉप लगाते हुए कहा कि बीजेपी विपक्षी दलों की एकजुटता के बाद घबरा गई है. बीजेपी काम ही है झूठा प्रचार करना.

    नीतीश ने क्यों की विधायकों के साथ बैठक 

    2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अब 8 से 9 महीने बचे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार अपनी पार्टी के नेताओं को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं और अपने पार्टी के नेताओं और विधायकों के मन की बात को समझना चाह रहे हैं. इस बार होने वाले लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए चुनौतियां इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उन्हें विपक्षी बीजेपी के साथ-साथ अपने साथी आरजेडी से भी कई मामलों पर चुनौती मिलती रही है. 

  • Important Part Of NDA: विपक्ष की मेगा मीटिंग से पहले बीजेपी ने चिराग पासवान की पार्टी से मुलाकात

    Important Part Of NDA: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की 18 जुलाई की बैठक के लिए लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को आमंत्रित किया है। बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा ने पासवान को पत्र लिखकर एलजेपी को भगवा पार्टी के नेतृत्व वाले ‘एनडीए का एक महत्वपूर्ण हिस्सा’ बताया है. विशेष रूप से, यह घोषणा 17 जुलाई को बेंगलुरु में विपक्ष के दूसरे बड़े हंगामे से कुछ दिन पहले की गई है।

    समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा ट्वीट किए गए पत्र में कहा गया है, “पिछले 9 वर्षों में, आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने देश के बहुआयामी विकास को एक नई ऊंचाई दी है। एनडीए सरकार में गरीब कल्याण, सांस्कृतिक गौरव की बहाली, आर्थिक प्रगति, देश की रक्षा और सुरक्षा, विदेशों में भारत की मजबूत प्रतिष्ठा सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

    नड्डा ने आगे कहा, ”एनडीए सरकार ने पिछले नौ वर्षों में सेवा और सुशासन के वास्तविक दृष्टिकोण को साकार किया है। परिणामस्वरूप, अमृतकाल का भारत देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहा है।” विज़न के नए सपने- 2047 जनभागीदारी और जनविश्वास से।

    नड्डा ने लिखा कि मंगलवार 18 जुलाई को शाम 5 बजे नई दिल्ली के होटल अशोक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एनडीए की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है. पत्र में आगे कहा गया, “आप इस बैठक में सादर आमंत्रित हैं। एनडीए के एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में आपकी भूमिका और आपका सहयोग न केवल गठबंधन को मजबूत करता है बल्कि देश की विकास यात्रा को भी मजबूत करता है। एनडीए सहयोगियों की बैठक में आपकी उपस्थिति का अनुरोध किया जाता है।

  • Chirag Paswan : चिराग की शर्त कैसे पूरी करेगी बीजेपी

    Chirag Paswan : 18 जुलाई को दिल्ली में एनडीए की बैठक होगी, बीजेपी ने बैठक में शामिल होने के लिए चिराग पासवान को आमंत्रित किया। लेकिन चिराग ने बीजेपी की समस्या को बढ़ा दिया। अविभाजित लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने 2019 के लोकसभा चुनावों में जीतीं 6 लोकसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट को मांगा है। यह पहले पार्टी संस्थापक राम विलास पासवान की थीं। 

    सूत्रों के मुताबिक़ चिराग पासवान कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। वह अपनी पारम्परिक सींटो पर अपनी दावेदारी चाहते हैं। चिराग ने यह निर्णय पार्टी के कई नेताओं के साथ बातची करके लिया है। हालाकि बीजेपी के नेताओं का कहना है चिराग की मांग पर जो भी निर्णय आएगा वह आलाकमान का होगा। इसपर चर्चा 18 जुलाई की बैठक में की जाएगी। 

    जानकारी के लिए बता दें वर्तमान समय में चिराग की पार्टी एलजीपी के दो गुट हैं एक तरह चिराग की पार्टी तो दूसरी तरफ उनके चाचा  और केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) है। बीजेपी दोनों के मध्य के मतभेद को सुलझाना चाहती है। मीडिया का कहना की केंद्रीय मंत्री नित्यानंद ने चिराग और पारस दोनों से मुलाकत कर मतभेद मिटाने की बात की है। 

  • NDA Meeting: NDA की जीत पक्की, पीएम ने कही बड़ी बात

    NDA Meeting: बीते दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक हुई। बैठक में साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के परिपेक्ष्य में रणनीति बनाई गई और पीएम मोदी ने विपक्ष एकता को लेकर कई दावे किये। उन्होंने स्पष्ट कहा- वह कभी नहीं जीत सकते, उन्हें सफलता हासिल नहीं होगी। जनता NDA के साथ है हम आने वाले लोकसभा चुनाव में 50 % सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। 

    उन्होंने कहा- साल  में 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में हमें महज 38 फीसदी मत मिले और हमनें सरकार बनाई। 2019 में आकड़ा बढ़ा और हमें 45 फीसदी मत मिले। जनता का विश्वास हमारे साथ है 2024 के लोकसभा चुनाव में हमें पहले की अपेक्षा अधिक मत मिलेंगे।  उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा – जब गठबंधन सत्ता की मजबूरी का हो, जब गठबंधन भ्रष्टाचार की नीयत से हो, जब गठबंधन परिवारवाद की नीति पर आधारित हो, जब गठबंधन जातिवाद और क्षेत्रवाद को ध्यान में रखकर किया गया हो तो ऐसा गठबंधन देश का बहुत नुकसान करता है.

    उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक गठबंधनों की एक लंबी परंपरा रही है, लेकिन जो भी गठबंधन नकारात्मकता के साथ बने वह कभी भी सफल नहीं हो पाए. 
    कांग्रेस पर साधा निशाना
    पीएम मोदी ने कहा कि कहा कि कांग्रेस ने 90 के दशक में देश में अस्थिरता लाने के लिए गठबंधनों का इस्तेमाल किया. कांग्रेस ने सरकारें बनाईं और सरकारें बिगाड़ीं. उन्होंने कहा कि 1988 में एनडीए का गठन हुआ था, लेकिन सिर्फ सरकारें बनाना और सत्ता हासिल करना उसका लक्ष्य नहीं था. 

    उन्होंने कहा, ‘‘राजग किसी के विरोध में नहीं बना था, राजग किसी को सत्ता से हटाने के लिए नहीं बना था. राजग का गठन देश में स्थिरता लाने के लिए हुआ था. जब किसी देश में एक स्थिर सरकार होती है तो देश एक साहसिक निर्णय लेता है जो देश के फलसफा को बदल देता है. ’’

    पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (राजग) में एन का अर्थ ‘न्यू इंडिया’, डी का अर्थ ‘डेवलप्ड नेशन’ और ए का अर्थ है ‘लोगों की आकांक्षा’. आज युवा, महिलाएं, मध्यम वर्ग, दलित और वंचित लोग राजग पर भरोसा करते हैं. 

  • Opposition Parties Meeting: INDIA हो सकता है विपक्षी गठबंधन का नाम

    Opposition Meeting: बेंगलुरु में विपक्षी दलों की दूसरी बैठक हो रही है. इस बैठक में विपक्ष के महागठबंधन के नाम पर चर्चा की गई है. सूत्रों को मुताबिक, विपक्षी गठबंधन का नाम इंडिया हो सकता है. बैठक में ये सुझाव दिया गया. इसके अलावा अखिलेश यादव ने पीडीए (पिछला दलित गठबंधन) का सुझाव दिया, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया.

    एक छोटे दल ने सेव इंडिया अलायंस या सेक्युलर इंडिया अलायंस का सुझाव भी दिया था. इसके अलावा बैठक में सीट बंटवारे को लेकर राज्य निहाय कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है. इसी बीच टीएमसी के सांसद डेरेक ओब्रायन ने ट्वीट कर लिखा, “चक दे इंडिया.

    विपक्षी नेताओं ने क्या कहा?

    बेंगलुरु में इकट्ठा हुए विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने कहा, “ये एक अच्छी, सार्थक बैठक है. रचनात्मक निर्णय लिए जाएंगे. आज जो चर्चा हुई उसके बाद का नतीजा इस देश के लोगों के लिए सही हो सकता है.” वहीं एनसीपी चीफ शरद पवार ने बैठक में अपनी बात रखते हुए कहा, “सब मिलकर बीजेपी को हरायेंगे

    विपक्षी गठबंधन के इंडिया का मतलब? 

    I –  Indian 
    N- National 
    D- Democractic 
    I – Inclusive 
    A – Alliance 

    लालू यादव का मोदी सरकार पर निशाना

    आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा, “देश और लोकतंत्र को बचाना होगा, गरीबों, युवाओं, किसानों, अल्पसंख्यकों की रक्षा करनी होगी. मोदी सरकार में सभी को कुचला जा रहा है.” इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 10 साल के कार्यकाल में लगभग हर क्षेत्र को पूरी तरह से चौपट कर दिया, उनसे छुटकारा पाने का समय आ गया है.

    मल्लिकार्जुग खरगे ने क्या कहा?

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुग खरगे ने कहा कि कांग्रेस की सत्ता या प्रधानमंत्री पद में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारा इरादा हमारे संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरेपक्षता और सामाजिक न्याय की रक्षा करना है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच राज्य स्तर पर मतभेद हैं, लेकिन ये मतभेद विचारधारा से संबंधित नहीं हैं.