Category: politics

  • Lok Sabha Election: 2024 में काम करेगा बीजेपी का यह फार्मूला

    Lok Sabha Election: 2024 का लोकसभा चुनाव एक साल से भी कम वक्त में होना है, इसीलिए बीजेपी एक्शन मोड में आ चुकी है. बीजेपी ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल किया है. पार्टी ने पंजाब, आंद्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं. इस फेरबदल में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनावों का भी ख्याल रखा गया है. 

    चुनावी राज्य तेलंगाना के लिए बीजेपी ने जी किशन रेड्डी को मैदान में उतार दिया है. रेड्डी को पार्टी ने तेलंगाना का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. वे बंदी संजय कुमार की जगह लेंगे. पंजाब में भी पार्टी ने बदलाव किया है. कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए सुनील जाखड़ को बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. वे अश्विनी शर्मा की जगह लेंगे.

    झारखंड में बीजेपी बाबूलाल मरांडी पर दांव लगाया है. दीपक प्रकाश की जगह उन्हें राज्य में बीजेपी की कमान सौंपी गई है. दक्षिणी राज्य आंद्र प्रदेश में बीजेपी ने सोम वीरराजू की जगह पुरंदेश्वरी को पार्टी की कमान सौंपी है.

    जी किशन रेड्डी की होने वाली है मंत्रिमंडल से छुट्टी?

    बीजेपी में ये आमतौर पर होता नहीं है कि कोई मंत्री संगठन का भी पद संभाले. तेलंगाना के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी इस समय मोदी कैबिनेट में मंत्री है. इससे एक बात का संकेत मिलने लगा है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है. 

    बीजेपी का 2024 प्लान

    विधानसभा चुनाव की बात करें तो तेलंगाना में वैसे तो कांग्रेस और केसीआर की पार्टी बीआरएस के बीच द्विध्रुवीय मुकाबला है. यहां पर बीजेपी के सिर्फ के सिर्फ 3 विधायक हैं, लेकिन जब बात आम चुनाव यानि लोकसभा की आती है तो बीजेपी यहां तेजी से उभरती नजर आती है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने तेलंगाना में 4 लोकसभा सीटें जीती थीं. इस बार पार्टी मिशन साउथ को और मजबूत करना चाहती है. इस बात को कांग्रेस अच्छे से समझती है और पार्टी ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है. राहुल गांधी ने केसीआर को बीजेपी की बी टीम कह कर हमला बोला है.

    झारखंड में आदिवासियों को रिझाने की कोशिश

    बीजेपी झारखंड में बाबूलाल मरांडी पर दांव खेलकर आदिवासी वोटबैंक को मजबूत करने की उम्मीद लगाए बैठी है. उसे लगता है कि बाबूलाल मरांडी के आने से आदिवासी वोट उसकी तरफ आकर्षित होगा और 2019 के मुकाबले आगामी लोकसभा चुनाव में उसे फायदा होगा.

    पंजाब और आंध्र प्रदेश में नई रणनीति

    पंजाब और आंध्र प्रदेश में बीजेपी बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है, लेकिन यहां कांग्रेस से आए नेताओं को कमान देकर उसने अपनी रणनीति में बदलाव का संकेत दे दिया है. इससे ये पता चलता है कि पार्टी में अब उसे मौका मिलेगा, जिसका बेस मजबूत है. इस कदम से दूसरी पार्टी के उन नेताओं को बल मिल सकता है, जो बीजेपी में आने का मन बना रहे हैं.

  • भाजपा सरकार के पास जनता को राहत देने का कोई तरीका नहीं

    राजनीति: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा- महंगाई बढ़ती जा रही है लेकिन सरकार के पास कोई तरीका नहीं है कि वह इस समस्या का समाधान निकाल पाए। 

    उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा – महंगाई चरम पर है, भाजपा सरकार के पास जनता को राहत देने का कोई तरीका नहीं। बेरोजगारी चरम पर है, भाजपा सरकार के पास युवाओं को रोजगार देने का कोई तरीका नहीं। भाजपा सरकार काम के नाम पर जीरो है, इसलिए दाम के दम पर खरीद-फरोख्त करके जनता के बीच जाने की तैयारी है।

     

  • NCP Political Crisis: अजीत नहीं शरद पवार बनाना चाहते थे बीजेपी के साथ सरकार

    NCP Political Crisis: एनसीपी के बागी नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार ने शरद पवार पर कटाक्ष करते हुए कहा – मुझे हमेशा एक दुश्मन की तरह एनसीपी में पेश किया जाता है। जब 2004 में महाराष्ट्र में चुनाव हुआ तो हमारे पास अधिक विधायक थे लेकिन हमने कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनाया अगर उस समय एनसीपी का मुख्यमंत्री बन गया होता तो शायद स्थिति अलग होती। 

    साल 2017 में भी शरद पवार जी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे। 2019 में मैं शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस से मिले हमने सरकार बनाने का तय किया लेकिन बाद में अचानक से सभी ने पलटी मार ली। 

    शरद पवार ने मुझे, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को बीजेपी नेता  देवेंद्र फडणवीस से मिलने भेजा हमारे बीच कैबिनेट बटवारे से लेकर कई अन्य अहम विषयों पर बात हुई। इस दौरान कई बीजेपी नेता मौजूद रहे। 75 साल में तो बीजेपी भी नेताओं का रिटायरमेंट हो जाता है लेकिन यहाँ नहीं। 

    उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दिया। कहा गया सुप्रिया सुले अध्यक्ष बनेगी यह हम सभी ने मान्य किया। लेकिन पुनः इस्तीफ़ा वापस ले लिया गया। वह पद नहीं छोड़ सकते हैं। हमने सुप्रिया सुले से भी बात की उन्होंने कहा पिता जी बहुत अड़ियल हैं किस बात के अड़ियल नहीं समझ आया। 

  • 2024 पर नहीं 2047 पर ध्यान केंद्रित कीजिए- पीएम मोदी

    राजनीति- विपक्ष साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटा हुआ है। एकजुटता के मंत्र से विपक्ष बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहता है। वही बीते दिन दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित कंवेन्शन सेंटर में केंद्रीय मंत्रिपरिषद (Council of Ministers Meeting) की बैठक हुई जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा – आप लोग 2024 का मत देखिये आप 2047 का सोचिए। हम विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं हमें 2047 तक महा शक्ति बनकर उभरना है। विकसित देश का लक्ष्य हासिल करना है। 

    उन्होंने आगे कहा – भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। शिक्षित लोगों की संख्या देश में बढ़ रही है आगामी समय में तकनीकी के क्षेत्र में हम काफी आगे बढ़ेंगे। हमारे पास टेक्नोलॉजी की एक फ़ौज होगी। अगले नौ महीने जनता के बीच जाएं और सरकार के नौ साल के काम के बारे में लोगों को बताएं। सरकार की नीतियों और फैसलों को सही तरीके से कार्यान्वित करना बेहद जरूरी है। 

  • Maharashtra Politics: लूट के माल से अपना घर क्यों भर रही है बीजेपी

    Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में सत्ता का खेल लगातार बदलता जा रहा है. एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के गठबंधन में अचानक एनसीपी के अजित पवार की एंट्री हो गई, जिससे माहौल और ज्यादा गरमा गया. इसी बीच उद्धव गुट वाली शिवसेना लगातार बीजेपी पर हमलावर है. अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना (उद्धव गुट) ने एक बार फिर बीजेपी और पीएम मोदी को निशाने पर लिया. इस संपादकीय का टाइटल- “चोर बाजार के असली मालिक…”  इसमें पीएम मोदी की तस्वीर लगाई गई है. 

    लूट का माल खरीद रही बीजेपी- सामना-

    शवसेना ने सामना में लिखा, कांग्रेस मतलब ‘लूट की दुकान’, झूठ का बाजार ऐसा जोरदार हमला प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में एक कार्यकम में बोलते हुए किया. उनका ऐसा बोलना आम बात है. प्रधानमंत्री को सही मायने में अपनी पार्टी के बारे में बोलना था, लेकिन भूल से उनके मुंह से कांग्रेस का नाम आ गया. कांग्रेस अथवा अन्य राजनीतिक ‘दल’ लूट की दुकान होंगे तो भाजपा लूट का माल खरीदकर अपना घर क्यों भर रही है? इसका खुलासा प्रधानमंत्री मोदी को करना चाहिए. मूलत: भाजपा ही अब राष्ट्रीय चोर बाजार हो गई है. चोरी का, लूट का माल खरीदनेवाली पार्टी के तौर पर बदनाम हो गई है. 

    शिंदे-अजित पवार पर गंभीर आरोप-

    देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए शिवसेना के मुखपत्र में लिखा है- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री फडणवीस मोदी के आदेश का पालन करते हुए कहते हैं, ‘मैं फिर आऊंगा, ऐसा बोला था. आते समय ‘दो’ को लेकर आया.’ ये दो मतलब शिंदे-अजीत पवार. दोनों पर बेशुमार भ्रष्टाचार के आरोप हैं. मतलब ‘आते समय भ्रष्टाचार व लूट का माल लेकर आए.’ ऐसा ही श्रीमान फडणवीस कहना चाह रहे होंगे. प्रधानमंत्री मोदी आठ दिनों पहले बोले थे, ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस यह सबसे भ्रष्ट पार्टी है.’ उसी राष्ट्रवादी पार्टी को उन्होंने तुरंत गोद में बैठा लिया. 

    ‘भ्रष्ट पार्टी के विधायक बीजेपी में होते हैं शामिल-

    सामना में आगे केसीआर का जिक्र किया गया. शिवसेना ने संपादकीय में लिखा, अब मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर हमला बोला है. केसीआर सरकार मतलब सबसे भ्रष्ट सरकार, ऐसा आरोप मोदी ने लगाया है. अब हमें उस केसीआर पार्टी की चिंता है. क्योंकि मोदी जिस पार्टी को भ्रष्ट कहते हैं अगले कुछ दिनों में वह पार्टी भाजपा का मित्र बनकर सत्ता में शामिल हो जाती है. अथवा भ्रष्ट पार्टी में फूट डालकर उसमें सबसे भ्रष्ट गुट को भाजपावासी बनाया जाता है. यही भाजपा का राजनीतिक शिष्टाचार बन गया है. 

    ‘तेलंगाना में भी हो सकता है खेल-

    सामना में लिखा गया, भाजपा को अपनी ‘लूट की दुकान’ चलाने के लिए अन्य दलों के चोरों की जरूरत है क्या? अथवा ऐसे चोरों के चयन के लिए उसने किसी राष्ट्रीय समिति का गठन किया है क्या? पिछले कुछ कालखंड को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पद की प्रतिष्ठा और गरिमा का बिल्कुल भी भान नहीं रखा है. आगामी दिनों में तेलंगाना विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए वहां के मुख्यमंत्री पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. कल यही केसीआर अथवा इनकी पार्टी से टूटकर लोग भाजपा में शामिल हो गए तो यही केसीआर मोदी के लिए सबसे सच्चे साबित होंगे. 

    सामना में मध्य प्रदेश में हुई उस घटना का भी जिक्र किया गया, जिसमें एक दलित पर पेशाब की गई. इसमें लिखा गया, मध्यप्रदेश में भाजपा के लोग दलितों पर अत्याचार कर रहे हैं. एक दलित पर भाजपा के मदमस्त पदाधिकारी द्वारा खुलेआम पेशाब करने की घटना से देश ही नहीं दुनियाभर में छी-छी हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर कोई बयान नहीं दिया. भोपाल में एक दलित युवा को भाजपा के कार्यकर्ता ने तलवे चाटने के लिए मजबूर किया, यह प्रकरण भी भयंकर है. 

    मणिपुर हिंसा और खालिस्तान का जिक्र
    मणिपुर हिंसा और खालिस्तान आंदोलन का जिक्र करते हुए सामना में लिखा गया, मणिपुर में भाजपा की सरकार रहते हुए वहां दो महीने से जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. लगभग दो सौ के आसपास लोगों की यहां मौत हुई है और प्रधानमंत्री ने अब तक मणिपुर हिंसाचार पर मुंह नहीं खोला है. इसे क्या कहेंगे? प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में खालिस्तानी आंदोलन फिर से सिर उठा रहा है. कनाडा से लेकर लंदन तक खालिस्तानी समर्थक हमारे दूतावास के सामने जाकर देश विरोधी नारे लगाते हैं तो कहीं दूतावास पर तोड़फोड़ करते हैं और सरकार इस संदर्भ में पूरी तरह से मौन धारण किए हुए हैं. 

  • सचिन के बलबूते राजस्थान जीतेगी कांग्रेस

    राजनीति: राजस्थान में साल के अंत में चुनाव होना। कांग्रेस ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत के मध्य जारी आपसी मतभेद खत्म कर दिया है। कांग्रेस का खत्म हुआ मतभेद बीजेपी के लिए समस्या बन सकता है। क्योंकि पायलट राजस्थान के मजबूत नेता माने जाते हैं, युवा बड़ी संख्या में सचिन  का समर्थन करता है। अब अगर ऐसे में बीजेपी ने राजस्थान विजय हेतु कोई नया सूत्र नहीं अपनाया तो कांग्रेस को टक्कर देना बीजेपी के मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि सचिन की लोकप्रियता के चलते 2018 के चुनाव में बीजेपी को राजस्थान में करारी हार का सामना करना पड़ा था। 

    बीते चुनाव में राजस्थान में 39 सीट में से कांग्रेस ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन बात तब बिगड़ने लगी जब सचिन पायलट को  मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। गुर्जर जाति के लोग कांग्रेस से नाराज हो गए और पार्टी में आपसी कलह देखने को मिली। जानकारों का कहना है कि राजस्थान की राजनीति दो जाति मीणा और गुर्जर के इर्द-गिर्द घूमती है। यह दोनों जातियां  सचिन पायलट की ओर झुकाव रखती हैं। जब सचिन को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो दोनों के मन में कांग्रेस के प्रति खिन्न भाव आ गया। 

    जानकारों का मानना है कि यह दोनों जातियां इस बार कांग्रेस को वोट देने से पूर्व विचार अवश्य करेगी अब ऐसे में यदि बीजेपी इन्हें अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है तो कांग्रेस के लिए राजस्थान में जीत दर्ज करना असंभव हो सकता है। 

    क्या है कांग्रेस का क्रेज –

    राजस्थान में भले ही सचिन पायलट और अशोक गहलोत के मध्य विवाद देखने को मिला है लेकिन आज भी  जनता की जुबान पर कांग्रेस का नाम है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने जनता को खूब प्रभावित किया है। जनता का कहना है कि कांग्रेस जमीन से जुडी पार्टी है कांग्रेस आम जनमानस के भाव को  समझती है और सचिन पायलट कांग्रेस के वह नेता है जो युवाओं से सीधे जुड़कर उनके बेहतर भविष्य के लिए बेहतर निर्णय लेने का सामर्थ्य रखते हैं। 

    सचिन पायलट एक ऐसे नेता हैं जिनकी लोकप्रियता किसी विशेष सीट तक सीमित नहीं है। हर तरफ सचिन का क्रेज है हर विधानसभा सीट पर सचिन की धाक जमी हुई है और अगर वास्तव में कांग्रेस राजस्थान में पुनर्वापसी करती है तो उसका सम्प्पूर्ण श्रेय सचिन पायलट को जाएगा। सूत्रों का दावा यह भी है की सचिन पायलट इस चुनाव में एक नए अवतार में नई जिम्मेदारी के साथ नजर आएंगे। 

  • भाजपा छत्तीसगढ़ के लोगों को और उनकी मूलभूत जरूरतों को समझती है- पीएम

    राजनीति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज छत्तीसगढ़ पहुंचे और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करीब 7600 करोड़ रुपये की लागत वाली 10 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और चुनाव से पूर्व यह मोदी का पहला दौरा था। मोदी के स्वागत में कई भाजपा नेताओ के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद रहे। 

    परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद छत्तीसगढ़ में मोदी ने चुनावी हुंकार भरी और कांग्रेस पर भड़क उठे। मोदी बोले पंजा आम जन मानस के अधिकारों की बली चढ़ा रहा है। कांग्रेस लोगों से उनका हक मार रही है। कांग्रेस के लोग मेरे लिए अपशब्दों का उपयोग करेंगे, मेरी कब्र खोदने की बात कहेंगे लेकिन यह नहीं जानते जो डर गया वो मोदी नहीं हो सकता। 

    उन्होंने आगे कहा – जो राज्य विकास में पीछे रहे भाजपा ने उन्हें विकास से जोड़ने का हर संभव प्रयास किया। भाजपा विकास को भारत के कोने -कोने तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। छत्तीसगढ़ के विकास में भाजपा की अहम भूमिका रही है। भाजपा छत्तीसगढ़ के लोगों को और उनकी मूलभूत जरूरतों को समझती है। 

  • Rajasthan Congress Meeting: राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी नहीं होनी चाहिए हावी

    Rajasthan Congress Meeting: राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अहम बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल रहे. इस बैठक को राजस्थान चुनाव की तैयारियों और अशोक गहलोत-सचिन पायलट के बीच की तनातनी खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा गया. इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में मौजूद रहे. बताया गया कि राहुल गांधी ने राजस्थान के सीएम को बैठक में कई सुझाव भी दिए, जिनमें से एक ब्यूरोक्रेसी पर लगाम लगाने का सुझाव भी था. इस बैठक के दौरान राजस्थान में गहलोत सरकार के कामकाज की तारीफ भी की गई. 

    ब्यूरोक्रेसी पर नियंत्रण की बात
    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने ओबीसी रिजर्वेशन, एग्रेसिव कैंपेनिंग, टिकट रद्द करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की. इसी दौरान राहुल गांधी और अशोक गहलोत के बीच भी बातचीत हुई. जिसमें राहुल ने गहलोत से कहा कि राज्य के बड़े फैसलों में नौकरशाही को हावी न होने दें. राहुल ने गहलोत से ब्यूरोक्रेसी पर नियंत्रण और पार्टी कार्यकर्ताओं को महत्व देने की बात कही. 

    कार्यकर्ताओं की बात सुनें- राहुल गांधी
    रिपोर्ट में बताया गया है कि राहुल गांधी ने गहलोत से कहा कि राजस्थान में कुछ योजनाओं में पार्टी कार्यकर्ताओं की राय नहीं ली जा रही है. इसके उलट नौकरशाही को तरजीह दी जा रही है. कार्यकर्ताओं को काम पर लगाना चाहिए और आने वाले वक्त में उन्हें एक मैसेज दिया जाना चाहिए. जिससे आने वाले चुनाव में पार्टी मजबूती के साथ उतर पाए. 

    राहुल-खरगे ने किया जीत का दावा
    इस बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं की तरफ से राजस्थान में दोबारा सरकार बनाने का दावा भी किया गया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के नेतृत्व में आज राजस्थान के कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की. कांग्रेस राजस्थान में एक बार फिर सरकार बनाएगी और जनता के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करती रहेगी.”

    राहुल के अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बैठक को लेकर ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ‘‘जन-सेवा, राहत और सबका उत्थान, प्रगति के पथ पर बढ़ता राजस्थान… कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में समावेशी विकास एवं जन-कल्याण की योजनाओं को घर घर पहुंचाया है. पार्टी एकजुट होकर आगामी चुनाव में जनता के बीच जाएगी.

  • Maharashtra Congress Meeting: दल-बदल के खतरे के बीच महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में बैठक

    Maharashtra Congress Meeting: महाराष्ट्र के दो बड़े विपक्षी दल शिवसेना और एनसीपी अब बीजेपी के साथ सरकार में शामिल हो चुके हैं. इन दोनों ही दलों के ज्यादातर विधायक पाला बदल चुके हैं और पार्टी दो फाड़ हो चुकी है. ऐसे में अब कांग्रेस अकेली ऐसी पार्टी बची है, जिसके कुनबे में सेंधमारी नहीं हुई है. इसी बीच दिल्ली में कांग्रेस के बड़े नेताओं की महाराष्ट्र को लेकर एक अहम बैठक होने जा रही है. 11 जुलाई को होने जा रही इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे. 

    राजनीतिक हालात पर होगी चर्चा-
    पार्टी सूत्रों ने बताया है कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और राहुल गांधी महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रदेश के राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे. इस दौरान विधायकों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर भी चर्चा हो सकती है. क्योंकि पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में विधायकों की अदला-बदली वाला मौसम चल रहा है. ऐसे में कांग्रेस को भी पार्टी में फूट की चिंता सताने लगी है. 

    बीजेपी नेताओं ने किया दावा-
    महाराष्ट्र कांग्रेस की चिंताएं तब ज्यादा बढ़ गईं, जब बीजेपी नेताओं की तरफ से विधायकों के संपर्क में होने की बात कही गई. एनसीपी में दो फाड़ के बाद बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि इकलौती विपक्षी दल कांग्रेस के भी कई विधायक उनके संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में वो भी गठबंधन के साथ जुड़ सकते हैं. महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने दावा किया कि कांग्रेस और अन्य दलों के नेता एनडीए में शामिल होना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता अपनी पार्टी से खुश नहीं हैं. 

  • बिहार की राजनीति में क्या नया बदलाव लाएगी नीतीश की चुप्पी

    राजनीति: बिहार की राजनीती को समझना आसान नहीं है। यहाँ कब क्या बदलाव आ जाए कोई नहीं जानता। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो अभी तक भाजपा का बखान करते थे दल बदलतेही  ही भाजपा विरोधी बन गए हैं। वर्तमान में नीतीश कुमार की छवि विपक्ष को एकजुट करने वाले पुल के रूप में विकसित हुई है। वही अब नीतीश की चुप्पी ने हर किसी को परेशान कर दिया है। काफी दिनों से नीतीश कुमार मौन धारण किये हुए राजनीति कर रहे हैं। हालांकि यह बात सभी जानते हैं कि नीतीश कुमार बहुत अधिक बोलने वाले नेता नहीं हैं लेकिन वह जब सन्न ने चुप्पी साधते हैं तो बिहार में बड़ा बदलाव भी देखने को मिलता है। 

    नीतीश की चुप्पी ने सोशल मीडिया पर हंगामा काट रखा है। कई लोग कह रहे हैं कि नीतीश कुमार पुनः पलटी  मारने को हैं तो कई लोग कह रहे हैं कि नीतीश कुमार विपक्ष को नया आधार देने की योजना बना रहे हैं। बीजेपी नेताओं का दावा है कि अगर अब नीतीश कुमार भाजपा की ओर झुकाव दिखाते हैं तब भी उन्हें भाजपा परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। लोगों के अनुमान के बीच नीतीश के करीबियों ने दावा क्या है कि जो भी बातें हो रही हैं उनमे कोई दम नहीं है क्योंकि नीतीश कुमार क्या करने वाले हैं इस बात का पता कोई पहले से नहीं लगा सकता। 

    उन्होंने आगे कहा – नीतीश कुमार शांत स्वाभाव के व्यक्ति हैं वह उग्र होकर कोई भी निर्णय नहीं लेते वह क्या करने वाले हैं यह तब पता चलता है जब वह अपना निर्णय लेकर उसपर काम शुरू कर देते हैं। नीतीश पहले से भले अपनी बात सभी से नहीं जाहिर करते लेकिन उनका यह स्वाभाव उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है। क्योंकि वह सोच समझ कर निर्णय लेते हैं और उसपर बाद में अडिग रहते हैं। 

    क्या है नीतीश की असहजता में –

    राजनीति के जानकारों का कहना है नीतीश कुमार भले ही कुछ बोलते नहीं है। लेकिन जब भी वह असहज हुए हैं हमने बड़ा बदलाव देखा है। बीते वर्ष जब भाजपा के नेताओं द्वारा नीतीश की आलोचना हुई तो नीतीश ने चुप्पी साधी वह असहज हुए और उन्होंने भाजपा को अलविदा कहा व महागठबंधन की सरकार बना ली। वही अब नीतीश जो विपक्ष को एकजुट करने के सूत्रधार बनें हैं क्या उनको विपक्ष के बीच वह सम्मान मिल रहा है या उनके साथ कम का व्यवहार उन्हें विपक्ष एकता में असहज कर रहा है जिसके चलते उन्होंने पुनः चुप्पी साध कर किसी बड़े बदलाव की तरफ इशारा किया है। 

    क्योंकि नीतीश कुमार ही वह कड़ी हैं जिसने विपक्ष को एकजुट करने की नीव रखी वह अलग -अलग जगह नेताओं से मिले। नेताओं को यह विश्वास दिलाया की यदि बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकना है तो विपक्ष को एकजुट होना होगा। एकता की ताकत बीजेपी को आसानी से धूल चटा सकती है। नीतीश ने भले यह साप कर दिया है कि उन्हें पद की चाहत नहीं है वह प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते हैं लेकिन नीतीश समर्थक यह बार-बार कह रहे हैं कि नीतीश विपक्ष को जोड़ने की मजबूत कड़ी हैं नीतीश कुमार को विपक्ष में एक बड़ा पद मिलना चाहिए। 

    विपक्ष एकता की जब मीटिंग हुई तो कई दल एक साथ आए और उन्होंने एकता का संकल्प लिया लेकिन मीटिंग में समन्वय नहीं बैठा और केजरीवाल ने स्वयं को विपक्ष एकता से अलग कर लिया। अब लोगों को नीतीश के निर्णय का इंतजार है कि क्या नीतीश कुमार विपक्ष को एकजुट करेंगे या विपक्ष को एक नई राजनीति के दर्शन करवाएंगे।