Category: politics

  • बीजेपी से क्यों नाराज मुस्लिम समाज

    राजनीति: साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने को है। विपक्ष बीजेपी को हराने के लिए एकजुटता का मंत्र अपना रहा है। लेकिन बीजेपी जमीनी स्तर पर स्वयं को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है वैसे तो बीजेपी का वोट बैंक फिक्स है हिन्दू बीजेपी के समर्थन में दिल खोलकर खड़ा है। लेकिन वर्तमान चुनाव में बीजेपी के लिए अगर कोई समस्या बना हुआ है तो वह है मुस्लिम समाज। बीजेपी भली भांति जानती है कि मुस्लिम वोट बैंक अब कांग्रेस के पक्ष में रुझान दिखा रहा है यदि बीजेपी को मुस्लिम समर्थन नहीं मिला तो आगामी चुनाव में बीजेपी को इसके लिए समस्या से जूझना पड़ सकता है।

    मुस्लिम समाज को बीजेपी से जोड़ने हेतु बीजेपी द्वारा मोदी मित्र योजना को चलाया गया है इस योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक  मुस्लिम लोगों को बीजेपी से जुड़ना और उनको केंद्र की योजनाओं से अवगत करवाना है। यह योजना उत्तर प्रदेश के देवबंद से शुरू की गई है। अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा इस योजना का नेतृत्व किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि योजना के संचालना हेतु देवबंद चुना गया इसका अमुख कारण यह भी है कि यह इस्लामिक केंद्र के रूप में जाना जाता है. इस योजना के तहत लोगों को सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है और केंद्र की योजनाओ से मुस्लिम समाज को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है .

    बीजेपी से क्यों नाराज मुस्लिम समाज :

    मुस्लिम समाज बीजेपी से काफी रुष्ट रहता है .मुस्लिम का मनना है कि बीजेपी के नेतृत्व में देश विभाजनकारी नीति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है .समाज में मुस्लिम के साथ दोहरा व्यवहार हो रहा है, मुस्लिम परिवार को केंद्र की योजनाओं का सुनियोजित लाभ नही मिलता और देश में इस्लाम विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है .मुस्लिम बीजेपी की कट्टर हिन्दू नीति से भी असंतुष्ट है, मुस्लिम समाज का कहना है कि भाजपा सिर्फ हिन्दू हितैसी है बीजेपी ने कभी मुस्लिम हित की बात नहीं की है .भाजपा का उद्देश्य देश को हिन्दू पुरोधा देश बनाना है .

    हालाकि बीजेपी मुस्लिम समाज के इन दावों को खारिज करती है और लगातार यह कहते नजर आती है कि बीजेपी ने देश हित हेतु कार्य किया है भाजपा का उद्देश्य सबका साथ सबका विकास है.

  • राजस्थान में कांग्रेस की होगी मीटिंग सचिन को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

    राजनीति: साल के अंत में कई राज्यों में चुनाव होने को हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ ऐसे राज्य हैं जहाँ कांग्रेस की सरकार है और बीजेपी यहाँ इस बार अपनी पैख जमाना चाहती है। हालाकि कांग्रेस दोनों राज्यों में पुनः वापसी की तैयारी में जुट गई है। नेताओं के मध्य के मतभेद को मिटाकर आलाकमान अब बड़े फैसले लेने के सन्दर्भ में मीटिंग कर रही है। 

    वहीं सभी की नजरें राजस्थान पर टिकी हुई है। राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के मध्य तना- तनी जारी है।  बीजेपी का कहना है पार्टी की आन्तरिक कलह राजस्थान में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ कर देगी। लेकिन अब खबर यह भी आ रही है कि आलाकमान सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी देनी की तैयारी में है। 

    सूत्रों का दावा है कि 3 जुलाई को राजस्थान में एक मीटिंग होने वाली है। मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे और राहुल गांधी भी शामिल होंगे। मीटिंग में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के मध्य के विवाद पर चर्चा होगी। इसके साथ ही सचिन पायलट को कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। 

    बताया जा रहा है कांग्रेस इसबार राजस्थान में सचिन के बलबूते दांव लगाना चाहती है। कांग्रेस यह भली भांति जानती है सचिन राजस्थान की जनता का विश्वास हैं। इसके अलावा मीटिंग ,में आगामी रणनीति और जनता के विश्वास को जीतने के मुद्दे पर गंभीर रूप से चर्चा हो सकती है। 

    हालाकि जानकारों ने यह साफ़ किया है कि राजस्थान में कांग्रेस राहुल या अन्य किसी कांग्रेस लीडर के बलबूते नहीं अपितु सचिन पायलट के बलबूते अपनी विजय पताका लहराना चाहती है।

  • क्यों आप नहीं देखना चाहती राहुल को नेता के रूप में

    राजनीति: विपक्ष लगातार एकजुटता का संदेश दे रहा है। बड़े-बड़े नेताओं का कहना है कि हम मोदी को तभी केंद्र से हटा सकते हैं जब हम एक साथ आएंगे। लेकिन विपक्ष एकता में पद की लालसा लग़ाम कस रही है। अभी तक विपक्ष की तरफ से यह निर्धारित नहीं हो पाया की प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा। प्रत्येक दल अपने नेता को पीएम पद का दावेदार बता रहा है। 

    वहीं अब विपक्ष एकता के परिपेक्ष्य में दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल की पार्टी की नेता  व पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा सदन में दिल्ली के अध्यादेश का कांग्रेस ने विरोध किया था। कांग्रेस के नेतृत्व में आप विपक्ष एकता का साथ देने के लिए तैयार नहीं होगी। अब कांग्रेस को तीसरी बार राहुल के नाम पर चुनावी दांव नहीं चलना चाहिए उन्हें नेता के तौर पर प्रजेंट नहीं करना चाहिए। 

    आप नेता ने आगे कहा- यदि कांग्रेस वास्तव में देश हित की बात कर रही है, यह देश को बचाना चाहती है तो इसे अब तीसरी बार राहुल गांधी को नेता के तौर पर प्रजेंट नहीं करना चाहिए और न इसके लिए विपक्ष को मजबूर करना चाहिए। देश हित हेतु यह अधिक आवश्यक है। बता दें AAP प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संजय सिंह ने 23 जून को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पटना में बुलाई गई विपक्षी दलों की मेगा बैठक में भाग लिया।

  • Lok Sabha Elections: 2024 के लिए तैयार हो गया बीजेपी का मेगा प्लान

    Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 और राज्यों में होने वाल आगामी विधानसभा चुनाव में माइक्रो मैनेजमेंट के लिए बीजेपी का मेगा प्लान तैयार हो चुका है. जानकारी के मुताबिक, बीजेपी ने पहली बार पार्टी के कामकाज को सरल बनाने के लिए देशभर को तीन सेक्टर में बांटा. इसके लिए बीजेपी ने नार्थ रीजन, साउथ रीजन और ईस्ट रीजन तय किए हैं.

    जानकारी के अनुसार, 6, 7 और 8 जुलाई को देश के अलग-अलग हिस्सों में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन मंत्री के साथ रीजन के प्रमुख नेताओं की बैठक होगी. 6 को ईस्ट रीजन, 7 को नॉर्थ रीजन और 8 को साउथ रीजन की बैठक होना तय हुआ है.

    इनके साथ मिलकर बनेगी रणनीति
    बताया जा रहा है कि बैठक में रीजन में आने वाले राज्य प्रभारी, राज्य के प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मौजूद रहेंगे. इसे रीजन की कार्यकारिणी के तौर पर भी देखा जा रहा है. लोकसभा चुनाव 2024 से पहले इसे बीजेपी की बड़ी रणनीतिक एक्सरसाइज माना जा रहा है. 

    कहां और कब होगी बैठक?
    6 जुलाई को ईस्ट रीजन की बैठक गुवाहाटी में होगी. इसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा के पार्टी से जुड़े लोग शामिल होंगे.

    7 जुलाई को नॉर्थ रीजन की बैठक दिल्ली में होगी. इसमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश,  पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, गुजरात, दमन दीव-दादर नगर हवेली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा के बीजेपी नेता शामिल होंगे.

    8 जुलाई को साउथ रीजन की बैठक हैदराबाद में होगी. जिसमें केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मुंबई, गोवा, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप के पार्टी पदाधिकारियों के साथ बातचीत होगी.

    पीएम आवास पर हुई बैठक
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य प्रदेश दौरे के बाद उनके आवास पर बुधवार (28 जून) को बीजेपी की बैठक हुई. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में 2023 के आखिर में होने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई है. 

    बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और बीजेपी संगठन मंत्री बीएल संतोष मौजूद रहे. इसी बीच एबीपी न्यूज को सूत्रों ने बताया कि संगठन में फेरबदल को लेकर किए गए मंथन के बाद पीएम मोदी के साथ ये मीटिंग हुई है ऐसे में संगठन में कई बदलाव हो सकते हैं. 

  • Asaduddin Owaisi On Uniform Civil Code: कार्यकर्ता मुसलमान के घर बुलडोजर चला रहे, मोदी जी मुसलमान के लिए आंसू बहा रहे

    Asaduddin Owaisi On Uniform Civil Code:  एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के बयान को लेकर तंज कसते हुए कहा- मोदी जी ने समान नागरिक सहिंता व पसमादा मुसलमान को लेकर बयान दिया है .ऐसा मालूम होता है उन्होंने बराक ओबामा की बात को समझा नही.एक बात बताइए मोदी जी आप क्या हिन्दू अभिभाजित परिवार को खत्म करेंगे. एक तरफ आपके कार्यकर्ता मुसलमान के साथ दोहरा व्यवहार कर रहे हैं, उनकी मस्जिदों को तोडा जा रहा है, उनके घरों पर बुलडोजर चल रहा है और आप उनके लिए आंसू बहा रहे हैं.

    उन्होंने आगे कहा- आज अगर देश में पसमादा मुसलमान के साथ गलत व्यवहार हो रहा है, उनका शोषण किया जा रहा है तो उसका कारण आप हैं. आपको उनसे वोट मांगने से पूर्व माफी मांगनी चाहिए. आपके सहयोगियों के उनके घर-घर जाकर उनके साथ किये गए अभद्र व्यवहार हेतु माफी मांग लेनी चाहिए. कैसी आप लोगों ने मिलकर उनके  नबी-ए-करीम  का मजाक बनाया.

    मुझे एक बात नहीं समझ आती मोदी जी पाकिस्तान के कानून से प्रेरित क्यों है. तीन तलाक पाकिस्तान में बंद है. भारत में यह कानून तो बन गया लेकिन जमीनी स्तर पर यह काम करते नही दिखा. यह एक कानून दस्तावेज रह गया. सोचा गया था इसके आने से महिलाओं के शोषण पर प्रतिबन्ध लगेगा. लेकिन महिलाओं का शोषण बढ़ गया .यदि कोई कानून बनता है तो वह समाज सुधार के उद्देश्य से बनना चाहिए. उन मर्दों के खिलाफ सख्त कानून बनने चाहिए जो अपनी पत्नी को शादी के बाद कहीं छोड़कर भाग जाते हैं.

    जानें क्या बोले मोदी :

    मोदी ने लोगों को समान नागरिक सहिंता के नाम पर भडकाने का काम किया जा रहा है. देश दो तरह के कानून पर कैसे चल सकता है जब देश संविधान के मुताबिक़ कार्य कर रहा है. संविधान भारत के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देने की बात करता है, सुप्रीम कोर्ट भी बार-बार इसी बात पर जोर दे रहा है. लेकिन यह लोग अपने हित हेतु लोगों को भडकाने का काम कर रहे हैं. जो लोग आज तीन तलाक का समर्थन करते हैं वह मुस्लिम बेटियों के साथ अनन्या कर रहे हैं तीन तलाक से सिर्फ एक बेटी नहीं अपितु पूरा परिवार तबाह हो जाता है.

  • Maharashtra Political Crisis Live: भतीजे की बगावत के बाद शरद पवार का शक्ति प्रदर्शन

    Maharashtra Crisis: महाराष्ट्र में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. राजनीति के धुरंधर अजित पवार अपने चाचा शरद पवार का साथ छोड़ महाराष्ट्र की बीजेपी-शिंदे गठबंधन वाली सरकार में शामिल हो गए. अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. उनके साथ आठ और विधायकों ने भी मंत्री पद शपथ ली. 

    NCP से बगावत के बाद अजित पवार ने कहा- ‘अगर एनसीपी शिवसेना के साथ जा सकती है तो बीजेपी के साथ क्यों नहीं, विकास के लिए शिंदे सरकार में शामिल हुए. विपक्ष में कोई एक ऐसा नहीं है जो देश के भविष्य के बारे में सोचकर देश के लिए काम कर रहा हो. आने वाले दिनों में कई और चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल होंगे. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बीते 9 सालों में देश अच्छे से चलाया जा रहा है. मोदी जी को हराने के लिए विपक्षी दल साथ में आए हैं लेकिन वह मोदी जी को हराने में असमर्थ हैं.’

    अजित के महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल होने पर समर्थकों में जश्न
    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अजित पवार के समर्थकों ने उनके महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल होने और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बारामती में पटाखे फोड़कर जश्न मनाया. बारामती के विधायक अजित पवार के समर्थक रविराज तावड़े ने कहा, “हम अजित दादा के साथ हैं. वह जो भी निर्णय लेंगे, हम उसे स्वीकार करेंगे.”

    उन्होंने दावा किया कि बारामती के अधिकांश युवा और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग अजित पवार के साथ हैं. मालेगांव चीनी सहकारी मिल के निदेशक और राकांपा की पुणे जिले की युवा शाखा के पूर्व अध्यक्ष योगेश जगताप ने कहा, “अजित पवार का मतलब विकास की राजनीति है. उन्होंने बारामती का विकास करते हुए पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया है.”

  • अनिल अंबानी फेमा जांच के तहत मुंबई में ईडी के सामने पेश हुए

    Anil Ambani News: उद्योगपति अनिल अंबानी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से जुड़ी जांच के सिलसिले में सोमवार को मुंबई में ईडी के अधिकारियों के समक्ष पेश हुए. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 64 वर्षीय अनिल अंबानी विदेशी फेमा की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए बैलार्ड एस्टेट क्षेत्र में संघीय एजेंसी के कार्यालय पहुंचे थे. जिस मामले में अनिल अंबानी को तलब किया गया था, उसके बारे में तत्काल जानकारी नहीं मिल पाई है. रिलायंस समूह के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी इससे पहले 2020 में यस बैंक के प्रमोटर राणा कपूर और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी ईडी के सामने पेश हुए थे. 

  • Maharashtra NCP Crisis: अजित पवार को झटका, 2 विधायकों ने लिया यू-टर्न

    NCP Political Crisis: महाराष्ट्र में हुए बड़े सियासी उलटफेर के बाद यू-टर्न का सिलसिला भी शुरू हो गया है. अजित पवार (Ajit Pawar) के साथ बगावत करने वाले दो विधायकों ने घर वापसी कर ली है. अजित पवार के समर्थक विधायक दिलीप मोहिते पाटिल (Dilip Mohite Patil) ने सोमवार (3 जुलाई) को दावा किया कि अजित पवार ने बिना बताए कल विधायकों के हस्ताक्षर लिए थे. हम उनके इस कदम से सहमत नहीं हैं.

    दिलीप मोहिते पाटिल रविवार (2 जुलाई) को शपथग्रहण समारोह में मौजूद थे. इनके अलावा एनसीपी विधायक मकरंद पाटिल भी बगावत के अगले दिन एनसीपी चीफ शरद पवार के साथ नजर आए. मकरंद पाटिल रविवार को शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए थे और सोमवार को शरद पवार की कार में बैठे दिखाई दिए. 

    एनसीपी ने बागी विधायकों पर एक्शन-

    इसी बीच एनसीपी ने शपथ लेने वाले विधायकों पर एक्शन लेते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया है. महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा किसी को भी पार्टी के चिह्न को इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है, ऐसा किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. एनसीपी चीफ शरद पवार भी पूरे राज्य का दौरा करने वाले हैं.  

    शरद पवार करेंगे जनसभाएं-

    शरद पवार के दौरे की शुरुआत शिवनेरी से होगी. पहली सभा दिलीप वालसे पाटिल के मतदार संघ में होगी. शरद पवार की दूसरी सभा धनंजय मुंडे के परली विधानसभा क्षेत्र में होगी. दिलीप वाल्से पाटिल और धनंजय मुंडे ने रविवार को मंत्री पद की शपथ ली थी. शरद पवार ने कहा कि अजित पवार के खेमे से कई लोगों ने मुझे फोन किया और कहा कि उनकी विचारधारा एनसीपी से अलग नहीं है और वे अगले कुछ दिनों में अंतिम फैसला लेंगे. मेरे पास पहले विधायकों के जाने के 2-3 पुराने अनुभव हैं. आगे नतीजे अच्छे होंगे.

  • Opposition Meeting: विपक्षी दलों की बैठक की तारीख और जगह तय

    Next Opposition Parties Meeting: लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कवायद को गति देने के लिए प्रमुख विपक्षी पार्टियों की आगामी बैठक 17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में होगी. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोमवार (3 जुलाई) को यह जानकारी दी. कांग्रेस नेता ने ट्वीट कर कहा, ‘ पटना में विपक्ष की सफल बैठक के बाद हम अगली बैठक 17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में करेंगे. हम फासीवादी और अलोकतांत्रिक ताकतों को पराजित करने और देश को आगे ले जाने वाले एक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने के अपने संकल्प को लेकर अडिग हैं.’

    पटना में हुई थी विपक्ष की बैठक-

    उल्लेखनीय है कि कांग्रेस समेत 15 से अधिक विपक्षी दलों ने गत 23 जून को बिहार के पटना में बैठक की थी जिसमें उन्होंने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ने और आगे बढ़ने को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी. इस बैठक की मेजवानी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजश्वी यादव की ओर से की गई थी. इस मीटिंग में आरजेडी चीफ लालू यादव और राहुल गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खरगे, हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, फारुख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उद्धव ठाकरे जैसे कई कद्दावर नेताओं शामिल हुए थे. 

    बैठक से पहले एनसीपी में दो फाड़ –

    विपक्षी दलों की अगली बैठक ऐसे समय होने जा रही है जब महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में दो फाड़ हो गई है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार समेत पार्टी के नौ विधायकों ने रविवार (2जुलाई) को एकनाथ शिंदे सरकार में मंत्री पद की शपथ ले ली. जिसमें अजित पवार महाराष्ट्र सरकार में उप मुख्यमंत्री बने और अपने समर्थकों के साथ एनडीए में शामिल हो गए. वहीं, बगावत वाले गुट के साथ एनसीपी प्रमुख शरद पवार के करीबियों में माने जाने वाले प्रफुल पटेल और दिलीप पाटिल भी मौजूद हैं. 

  • अजीत पवार के शिंदे गुट से जुड़ने की वजह

    राजनीति: विपक्ष एकजुटता की बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है। लेकिन बीते दिन महाराष्ट्र में ऐसा भूकंप आया की विपक्ष एकता की नीव हिल गई और बीजेपी पुनः मजबूती के साथ खड़ी हो गई। एनसीपी नेता अजीत पवार ने विद्रोह कर दिया वह अपने 40 विधायकों के साथ शिंदे गुट से जा मिले। शिंदे गुट से जुड़ते ही अजीत पवार के हाथ उप-मुख्यमंत्री का पद आया। राज्यपाल ने अजीत पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाई। अजीत पवार समेत एनसीपी के 9 विधायक शिंदे गुट में शामिल होते ही मंत्री बन गए। 

    लेकिन जैसे ही यह बात सामने आई विपक्ष एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार की पार्टी के नेता अजीत पवार ने शिंदे गुट से हाथ मिला लिया है बवाल मच गया। हर तरफ से विपक्ष एकता सवालों के कटघरे में उतर आई। हालाकि शरद पवार ने यह साफ कह दिया जो लोग पार्टी छोड़कर गए हैं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह पहले भी हो चुका है जो लोग गए उनको चुनाव में हार मिली। हम जनता से जुड़ कर अपनी पार्टी खड़ी कर लेंगे। 

    अजीत पवार के शिंदे गुट से जुड़ने की वजह-

    अजीत पवार ने शिंदे गुट से हाथ मिलाया और वह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बन गए। वहीं अब संजय राउत ने उनके शिंदे गुट से जुड़ने की वजह जांच एजेंसियों का खौफ बताया है। संजय राउत ने कहा- कोआपरेटिव बैंक घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा जांच कर रही थी, लेकिन महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार में उसने अजित के विरुद्ध जांच बंद कर दी थी। इससे ईडी की जांच भी बंद हो गई थी। 

    सरकार बदलने पर जांच एजेंसी का रुख बदल गया और उसने जांच शुरू कर दी। ईडी ने भी अप्रैल में अपना आरोपपत्र दाखिल कर दिया। सिंचाई घोटाले में एसीबी ने उनके विरुद्ध जांच की थी और बांबे हाई कोर्ट में उन्हें क्लीनचिट देते हुए रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने अभी रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है।