Category: politics

  • भाजपा कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में राहुल गांधी को बताया ‘देवदास’

    बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को विपक्षी दलों की होने वाली बैठक के पहले प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सत्ता और विपक्ष के नेताओ के बीच जहां जमकर बयानबाजी हो रही है, वहीं पोस्टर वार भी जारी है। इस बीच, भाजपा के प्रदेश कार्यालय के बाहर शुक्रवार को लगाए गए एक पोस्टर की चर्चा खूब हो रही है। इस पोस्टर में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को देवदास बताया गया है और फिल्म देवदास के डायलॉग भी लिखे गए हैं। हालांकि यह पोस्टर किसने लगाया है, इसका उल्लेख पोस्टर में नहीं है।

    पोस्टर में सबसे ऊपर फिल्म अभिनेता शाहरुख खान की तस्वीर लगाई गई है, जबकि नीचे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की तस्वीर है। शाहरुख खान के लिए ‘ रील लाइफ ‘ देवदास लिखा गया है तो वहीं राहुल गांधी के लिए रियल लाइफ देवदास लिखा गया है। पोस्टर में जहां शाहरुख खान के सामने फिल्म देवदास के डायलॉग को लिखा गया है, जबकि राहुल गांधी की तस्वीर के सामने उसी के अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा गया है।

    राहुल गांधी के तस्वीर के सामने लिखा गया है कि ममता दीदी ने कहा बंगाल छोड़ दो, केजरीवाल ने कहा दिल्ली और पंजाब छोड़ दो, लालू, नीतीश ने कहा बिहार छोड़ दो, अखिलेश ने कहा उत्तर प्रदेश छोड़ दो, स्टालिन ने कहा तमिलनाडु छोड़ दो। वह दिन दूर नही जब सब मिलकर कहेंगे कांग्रेसी (राहुल) राजनीति छोड़ दो।

  • कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु में कचरा कर लगाने के संकेत दिए

    ऐसे समय में जब लोग गुस्से में हैं और विपक्षी भाजपा बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर आड़े हाथ ले रही है, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को बेंगलुरु में कचरा कर लगाने का संकेत दिया। सिस्टम और नागरिकों के बीच इंटरफेस प्रदान करने वाले ब्रांड बेंगलुरु पोर्टल का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कई शहरों में कचरा उपकर लगाया जाता है।

    उन्होंने कहा, हमें बेंगलुरु में कचरा उपकर जमा करने और बिजली के बिलों में शामिल करने का सुझाव मिला है। शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु की आबादी 1.60 करोड़ है। आधिकारिक आंकड़े इसे 1.30 करोड़ बताते हैं। शहर में प्रतिदिन लगभग 50 लाख लोग आते हैं और जो लोग नौकरी के लिए यहां आते हैं, वे यहां की प्रकृति की सराहना करने के बाद बसने का निर्णय लेते हैं। जो भी बेंगलुरु आता है, वह अपने मूल स्थानों पर वापस नहीं जाएगा।

    उन्होंने कहा, मैं बेंगलुरु का निवासी हूं। मैं जनता की राय लेने के लिए उद्यम कर रहा हूं और बिल्डरों और उद्योगपतियों की राय पहले ही एकत्र कर चुका हूं। वरिष्ठ नागरिकों की राय भी मानी जाती है। मैं पूर्व सीएम से मिलूंगा और पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई से समय मांगूंगा। शिवकुमार ने कहा, “कई शहरों में कचरे के लिए सेस वसूला जाता है और सुझाव दिया जाता है कि यहां भी हमें कचरे पर सेस जमा करना चाहिए। उन्होंने इसे बिजली बिल में जोड़ने का सुझाव दिया है। लेकिन, इसे बिजली बिल में जोड़ना संभव नहीं है।”

    शिवकुमार ने कहा, बेंगलुरु शहर के मानकों को और ऊपर उठाने के लिए पोर्टल लॉन्च किया गया है। कई इलाकों में फुटपाथ की समस्या है और शहर में यातायात को संभालने वाले सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों की राय ली जाती है। सुरंग बनाने के लिए एक राय है जो कर सकते हैं बसों और ट्रेनों की आवाजाही की सुविधा। जयदेव अस्पताल के पास की परियोजना को इस संबंध में एक पायलट माना जाता है।

  • ऐसा क्या बोले लालू प्रसाद यादव की बीजेपी की हो गई बत्ती गुल

    राजनीति: बीते दिन पटना में विपक्षी दलों की मीटिंग हुई। यह मीटिंग लोकसभा चुनाव के परिपेक्ष्य से हुई। बीजेपी को हराने के लिए विपक्ष एकता से चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहा है। विपक्ष की मीटिंग को लेकर बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर खूब हंगामा काटा। किसी ने कहा बारात तो तैयार है लेकिन दूल्हा कौन है। कोई बोला मंच पर हाथ मिल गए हैं लेकिन दिन नही मिले। वही इस सबके बीच लालू यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह राहुल गाँधी को शादी करने की सलाह देते नजर आ रहे हैं। कई लोग उनके इस बयान को बीजेपी को मुह तोड़ जवाब बता रहे हैं तो कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि शायद राहुल गाँधी विवाह का मुड बना रहे हैं। 

    जानें बयान के राजनीतिक मायने :

    बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और सुशील कुमार मोदी ने विपक्ष की मीटिंग पर तंज कसा। बीजेपी सांसद  सुशील कुमार मोदी कहते दिखे नीतीश कुमार ने एक ऐसी बारत तैयार की है जिसमें सभी दुल्हे हैं कोई भी बाराती नही है। सब अपनी-अपनी बात मनवाने पर उतावले हैं कोई समझौते पर तैयार नहीं हर कोई प्रधानमन्त्री पद का दावेदार है।  अरविन्द केजरीवाल विपक्ष एकता की सभा में शामिल हुए क्या वह कांग्रेस के साथ दिल्ली और पंजाब में सीट बंटवारा कर पायेंगे। 

    मीटिंग में क्या बोले लालू की उसे बताया जा रहा बीजेपी पर पलटवार:

    विपक्ष एकता की मीटिंग में राहुल गाँधी को सलाह देते लालू प्रसाद यादव बोले हम आपकी बारात का हिस्सा बनना चाहते हैं, शादी कर लीजिये। शादी कर लेनी चाहिए थी। लालू की बात पर मुस्कुराते हुए राहुल कहते हैं, हम कर लेगे आपकी बात मान लेंगे। दोनों के बीच हुए इस संवाद को बीजेपी नेताओं के बयान से जोड़कर सोशल मीडिया पर जंग छोडी हुई है।

  • Tomato Price Hike: क्या देश की वित्त मंत्री टमाटर खाती हैं?

    Tomato Price Hike:  महगाई से आम आदमी पहले ही परेशान था कि आज सुबह २० रूपये में बिकने वाला टमाटर 80-100 में बिकने लगा. टमाटर के दाम में आए उछाल को लेकर विपक्ष के नेता लगातार वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण पर कटाक्ष कर रहे हैं. वही अब उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक ट्वीट करते हुए लिखा- क्या देश की वित्त मंत्री टमाटर खाती हैं? क्या टमाटर के बढ़ते दामों का जवाब दे पायेंगी?

    देखें क्या बोले युजर्स:

    एक यूजर लिखता है- टमाटर या कोई भी सब्जी/भाजी/तरकारी, कोई फैक्ट्री प्रोडक्ट नहीं है; जो शेड के नीचे हो। बेतहाशा बारिश हो रही है। किसान-मजदूर खेत में काम नहीं कर पा रहे हैं। मंडियों में आवक कम हो गई तो टमाटर की कीमत बढ़ गई। थोड़ा सब्र कर लो। किसान के नुकसान और दर्द पर दो शब्द नहीं।हमेशा सस्ता चाहिए। एक अन्य यूजर कहता है- टमाटर सस्ता होता है तो किसान आंदोलन करते हैं और महंगा होता है तो राजनेता सरकार से जवाब मांगते हैं 3 कृषि कानून आपकी पार्टी ने विरोध किया था और आंदोलन का समर्थन किया था आज टमाटर का उचित भाव ना किसान को मिल रहा है और ना जनता को सारा मुनाफा दलाल की झोली में जा रहा है और करिए विरोध।

    एक यूजर तो ताज्जुब व्यक्त करते हुए लिखता है- अरे गजब नेता है यह। टमाटर की सच्चाई तो जानो पहले। अरे भाई किसान ने उगाया ही नहीं टमाटर क्योंकि उसके दाम बहुत सस्ते थे और रखरखाव उससे महंगा था। बाकी कहर बरसात ने दे डाला। जहां उगा है वहां से आ जाएगा 2 महीने में रेट भी ठीक हो जाएंगे। बाकी सत्ता सत्ता सपना सपना। एक यूजर उनके सवाल के जवाब में लिखता है- पक्का कहता हूं वह खाना छोड़ देंगीं क्योंकि उन्हें पता है टमाटर की फसल खराब हो चुकी है मानसून का दौर है सब्जियां महंगी होती ही और आप देशद्रोहियों का मकसद टमाटर के आयात पर जोर देना है ताकि भारतीय विदेशी मुद्रा की हानि हो।मेरी पत्नी ने आज 2किलो टमाटर की जरूरत को 250ग्राम में बदला।

  • Lok Sabha Elections 2024: गठबंधन पर लगी मुहर, जानें डीटेल में पूरी कहानी

    Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दल एकजुट होने की पूरी कोशिश में हैं. बिहार की राजधानी पटना (Patna) में इसे लेकर 23 जून को विपक्षी दलों की महाबैठक भी हुई थी. विपक्ष ने इसे ऐतिहासिक बैठक करार दिया था. अब जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने बैठक में बनाई गई रणनीति को लेकर एबीपी न्यूज से बातचीत की. 

    केसी त्यागी का दावा है कि 450 सीटों पर बीजेपी के एक उम्मीदवार के मुकाबले विपक्ष के एक उम्मीदवार को उतारने पर रणनीति बन चुकी है. त्यागी ने एक दर्जनों राज्यों का नाम लेकर बताया कि कहां-कहां बीजेपी के मुकाबले एक साझा उम्मीदवार उतरेगा. उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस का और उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन लगभग तय है.”

    कौन-कौन से राज्य शामिल

    त्यागी ने बताया इसमें बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, नॉर्थ ईस्ट की सभी सीटें, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत लगभग एक दर्जन से ज्यादा राज्य शामिल हैं. उन्होंने कहा, “2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जिस तरह का रुझान बीजेपी के पक्ष में था लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. जनता के बड़े हिस्से में वर्तमान सरकार को लेकर काफी निराशा है. 

    इन दलों को नहीं था न्योता

    त्यागी ने कहा, “2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जिस तरह का रुझान बीजेपी के पक्ष में था इस बार ऐसा नहीं होगा. जनता के बड़े हिस्से में वर्तमान सरकार को लेकर काफी निराशा है. केसी त्यागी ने कहा, “हमे खुशी है कि ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक दलों के नेता इस बैठक में शामिल हुए. हमने बीजेडी, वाईएसआर, केडीपी और बीआरएस को नहीं बुलाया था.”

    ‘जिन्हें बुलाया वो सब थे मौजूद’

    उन्होंने कहा, “इस तरह के प्रचार गलत हैं कि ये दल बैठक में शामिल नहीं हुए. हमारा कोई निमंत्रण इन दलों को नहीं गया था और जिन भी दलों को बुलाया गया था लगभग वो सभी बैठक में मौजूद थे. जो दल, नेता और मुख्यमंत्री मौजूद थे उनकी लगभग 450 लोकसभा सीटों पर मजबूत स्थिति है. इन सीटों पर हम बीजेपी के एक उम्मीदवार के मुकाबले में एक उम्मीदवार को उतारने के फैसले पर लगभग सहमत हैं.” 

    आप को लेकर क्या बोले?

    आम आदमी पार्टी को लेकर उन्होंने कहा, “विपक्षी दलों की बैठक किसी एक पार्टी की नहीं बल्कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक थी लिहाजा उसमें किसी एक पार्टी का एजेंडा नहीं रखा जाता. उसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के कॉमन एजेंडे पर चर्चा होती है. अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं को सलाह दूंगा कि फिलहाल जल्दबाजी में कोई बयान न दें.”

  • 9 साल का एक ही सवाल है आखिर किसका है ये अमृतकाल?

    राजनीति: कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने बढ़ती महंगाई को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा – सरकार अब गरीबों को भूल गई है। सरकार पूंजीपतियों का धन बढ़ाने में जुटी हुई है। गरीब आज भोजन के लिए परेशान है मध्यमवर्ग आज अपने भविष्य के लिए चिंतित है। 9 साल में एक ही सवाल है किसका है यह अमृतकाल। 

    राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा – 

    टमाटर: ₹140/किलो
    फूल गोभी: ₹80/किलो
    तुअर दाल: ₹148/किलो
    अरहर दाल: ₹219/किलो

    और पकाने का गैस सिलेंडर ₹1,100 के पार 

    पूंजीपतियों की संपत्ति बढ़ाने और जनता से टैक्स वसूल करने में व्यस्त भाजपा सरकार, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भूल ही गई।

    युवा बेरोज़गार हैं, रोज़गार है तो आय कम और महंगाई से बचत खत्म। गरीब खाने को तड़प रहे हैं, मध्यमवर्ग बचाने को तरस रहा है।

    कांग्रेस शासित राज्यों में हमने महंगाई से राहत के लिए गैस के दाम घटाए, आर्थिक सहायता के लिए गरीबों के खातों में पैसे डाले।

    नफ़रत मिटाने, महंगाई, बेरोज़गारी हटाने और समानता लाने का प्रण है भारत जोड़ो यात्रा – भाजपा को जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने नहीं देंगे।

    9 साल का एक ही सवाल है!
    आखिर किसका है ये अमृतकाल?

    एक यूजर कहता है – देश मैं नफ़रत की राजनीति का परिणाम है कि जनता महंगई , बेरोज़ागारी और भुखमरी का तांडव देख रहीं है जबकि तानाशाह अपने लिये चुनावी फ़ंड की ख़ातिर देश की जनता के सपने 2 लोगों के बैच रहा है!

    वही एक अन्य यूजर कहता है – आज़ाद भारत के सबसे विफल प्रधानमंत्री हैं नरेंद्र मोदी। जिस दिन पहली सार्वजनिक प्रेस वार्ता लेंगे , ठीक उसी दिन अरबों रुपयों से बनाई गई उनकी झूठी छवि सामने आ जाएगी। ये देश का दुर्भाग्य है की देश का प्रधान मंत्री देश के हर असल मुद्दों पर चुप है, वे बस भाजपा के प्रचारक बन सके प्रधानमंत्री नहीं।

     

  • UCC: ‘राष्ट्र और परिवार एक नहीं

    Unifrom Civil Code: पीएम मोदी के समान नागरिक संहिता (UCC) पर दिए बयान के बाद देश में इसे लेकर राजनीति गर्म है. मंगलवार (27 जून) को भोपाल में पीएम मोदी ने देश में समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा था. पीएम मोदी ने कहा था दो कानून होने से घर नहीं चलता है, ऐसे में दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा. पीएम मोदी के बयान पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने इसे विभाजनकारी राजनीति बताया था. वहीं. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने यूसीसी को लेकर देश और परिवार की तुलना को गलत बताया है.

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबर ने ट्वीट कर लिखा, माननीय प्रधानमंत्री ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की वकालत करते हुए राष्ट्र को परिवार के बराबर बताया है. सामान्य रूप से देखने पर ये तुलना सही लग सकती है, लेकिन वास्तविकता बहुत अलग है.

    चिदंबरम ने बताया देश और परिवार में अंतर

    चिदंबरम ने परिवार और राष्ट्र में अंतर बताते हुए लिखा, एक परिवार खून के रिश्तों से एक धागे में बंधा होता है, जबकि एक राष्ट्र संविधान के तहत एक साथ आता है, जो एक राजनीतिक-कानूनी दस्तावेज है. उन्होंने आगे कहा, यहां तक कि परिवार में भी विविधता होती है. भारत के संविधान ने भारत के लोगों के बीच विविधता और बहुलता को मान्यता दी है.

    यूसीसी को थोपा नहीं जा सकता- चिदंबरम

    चिदंबरम ने कहा, समान नागरिक संहिता इच्छा है. इसे किसी एजेंडे के तहत बहुसंख्यक सरकार के जरिए लोगों के ऊपर थोपा नहीं जा सकता है. पीएम मोदी ये दिखाने की कोशिश करनी चाहिए कि यूसीसी एक सामान्य प्रैक्टिस है. उन्हें पिछले विधि आयोग की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए, जिसमें कहा गया है कि इस समय ये संभव नहीं है.

    यूसीसी से बढ़ेगा विभाजन- चिदंबरम

    कांग्रेस नेता ने लिखा, भाजपा की कथनी और करनी के कारण आज देश बंटा हुआ है. लोगों पर यूसीसी थोपना इस विभाजन को केवल और बढ़ाएगा. उन्होंने लिखा, यूसीसी के पक्ष में प्रधानमंत्री का मजबूती से बोलने का उद्येश्य मुद्रास्फीति, बेरोजगारी, हेट क्राइम, भेदभाव और राज्यों के अधिकारियों को नकारने से ध्यान भटकाना है, जिससे लोगों को सतर्क रहना होगा.

    उन्होंने लिखा, बीजेपी सुशासन देने में फेल हो चुकी है, जिसके बाद अगला चुनाव जीतने और वोटर्स का ध्रुवीकरण करने के लिए यूसीसी का मुद्दा लेकर आई है.

  • भारत में इस जगह बीजेपी है सबसे कमजोर

    राजनीति: लोकसभा चुनाव के लिए सभी दल अपनी कमर कस चुके हैं। अब यह स्पष्ट है कि विपक्ष एकता के बलबूते सत्ताधारी दल को धूल चटाने का प्रयास करेगा। हर तरफ जनता को लुभाने का ताना बाना बुना जा रहा है। बीजेपी लगातार मुस्लिम वोट बैंक को साधने में जुटी है और विपक्ष लगातार जमीनी स्तर पर जनता से जुड़कर जनता की आवाज बनने के प्रयास में लगा है। लेकिन इन सभी गतिविधियों के बीच एक बात जो सभी के मन में खटक रही है वह यह है कि आखिर विपक्ष और सत्ता पक्ष का कौन सा एरिया सबसे मजबूत है। 

    जानें भारत के किस एरिया में नहीं चलता मोदी मैजिक:

    उत्तर भारत में भले ही मोदी -योगी का जादू छाया है लेकिन दक्षिण भारत में मोदी मैजिक की कोई छाप नहीं दिखती। दक्षिण भारत के लोग बीजेपी के कार्य से जरा असंतुष्ट नजर आते है इसका जीता जाता उदाहरण कर्नाटक में बीजेपी को मिली करारी हार है। दक्षिण में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के अलावा पुडुचेरी और लक्षद्वीप ऐसे क्षेत्र हैं जहां भाजपा को विभाजनकारी पार्टी के रूप में जाना जाता है। जानकारों का कहना है यदि भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया और हिन्दू वादी नीति के बलबूते चुनाव लड़ती रही तो उत्तर भारत में भाजपा स्वयं को कभी मजबूती के साथ स्थापित नहीं कर पाएंगी। 

    दक्षिण भारत में कुल 131 लोकसभा सीटें आती हैं, जिनमें कर्नाटक में 28, तेलंगाना में 17, आंध्र प्रदेश में 25, तमिलनाडु में 39, केरल में 20, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में 1-1 सीट है। इसमें से भाजपा को महज 30 सींटो पर जीत मिली है, जबकि कांग्रेस के खेमे में 27 व अन्य सभी सींटे क्षेत्रिय दलों को मिलीं। यह सभी दल भाजपाई नहीं थे। अब अगर इसबार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी दक्षिण भारत में स्वयं को मजबूती के साथ नहीं खड़ा कर पाई तो केंद्र में परिवर्तन के आसार बढ़ जाएंगे और विपक्ष एकता बीजेपी के विजय चक्र को तोड़ने में सफल हो जाएगी। 

    दक्षिण में किसका है दबदबा :

    बीजेपी आज भले ही स्वयं को सबसे मजबूत पार्टी बता रही है और कांग्रेस जमीनी स्तर पर जनता का दिन जीतने के लिए अपना सारा बल लगा रही है। लेकिन दोनों ही दल दक्षिण भारत में प्रथम पायदान पर नहीं है। दक्षिण भारत में दोनों पार्टियां द्वितीय स्तर की पार्टी हैं क्योंकि जनता की पहली पसंद क्षेत्रिय दल हैं। कर्नाटक में यदि सबसे अधिक वोट किसी को मिलते हैं तो वह उनके क्षेत्र की पार्टी हैं जनता का विश्वास अपने राजनेताओं पर अटूट है और दक्षिण में बीजेपी और कांग्रेस बाहरी पार्टी के रूप में जानी जातीहैं। 

    लेकिन कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत से सदैव सकारात्मक संदेश मिले हैं। कांग्रेस यहां के क्षेत्रिय दलों से जुड़कर जनता के बीच अपनी उम्दा छवि स्थापित करने की कवायद में जुटी हुई है। वहीं इस बार राहुल गाँधी के नेतृत्व में जारी भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस को दक्षिण की जनता से सीधे जोड़ दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि बीजेपी ने अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया तो जल्द ही दक्षिण से बीजेपी का सफाया होगा और विपक्ष अपनी बीजेपी खत्म की रणनीति में सफल होगी।

  • Jammu-Kashmir: फेक ट्वीट’ के फेर में फंसीं महबूबा मुफ्ती

    Complain Against Mehbooba Mufti: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के सामने मुश्किल आ गई है. एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता ने मुफ्ती के खिलाफ जम्मू के नवाबाद पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में मुफ्ती पर सेना के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया है. 

    एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, बोधराज शर्मा नाम के व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि पीडीपी चीफ ने अपने ट्विटर पेज पर एक मैसेज शेयर किया था, जो काफी भड़काऊ था. उन्होंने पुलिस ने मुफ्ती के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है.

    अदालत जाने की दी चेतावनी

    शर्मा ने अपनी शिकायत में कहा है कि महबूबा मुफ्ती ने अमरनाथ यात्रा से पहले बिना किसी सबूत के सेना के खिलाफ पोस्ट लिखी, जो बेहद गैर-जिम्मेदाराना था. उन्होंने ये भी कहा कि अगर पीडीपी चीफ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस मामले को अदालत में ले जाने को मजबूर होंगे.

    क्या है मामला?

    महबूबा मुफ्ती ने शनिवार (24 जून) एक ट्वीट कर सेना के खिलाफ गंभीर आरोप लगाया था. पीडीपी चीफ ने लिखा था, “सेना की 50 आरआर के जवानों की तरफ से पुलवामा की एक मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर करने की खबर सुनकर स्तब्ध हूं. यह तब हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यहां मौजूद हैं.”

    महबूबा मुफ्ती ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताते हुए चिनार कोर की कमान संभालने वाले लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से जांच करने की मांग की. उन्होंने लिखा, “ये सब यात्रा से पहले किया गया है, जोकि केवल उकसावे की कार्रवाई है.” मुफ्ती ने लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को टैग करते हुए कहा, “इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए.” 

    बाद में मीडिया रिपोर्ट को शेयर करते हुए उन्होंने जांच शुरू करने को लेकर सेना का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने लिखा, जडूरा की घटना में त्वरित कार्रवाई करने के लिए चिनार कोर को धन्यवाद. केवल वास्तविक जवाबदेही ही नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच विश्वास बहाल करेगी. कश्मीर एकमात्र राज्य है जहां अमरनाथ यात्रा जैसी तीर्थयात्रा ईद के साथ होती है. यही कश्मीरियत की भावना है.

  • बीजेपी से क्यों नाराज मुस्लिम समाज

    राजनीति: साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने को है। विपक्ष बीजेपी को हराने के लिए एकजुटता का मंत्र अपना रहा है। लेकिन बीजेपी जमीनी स्तर पर स्वयं को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है वैसे तो बीजेपी का वोट बैंक फिक्स है हिन्दू बीजेपी के समर्थन में दिल खोलकर खड़ा है। लेकिन वर्तमान चुनाव में बीजेपी के लिए अगर कोई समस्या बना हुआ है तो वह है मुस्लिम समाज। बीजेपी भली भांति जानती है कि मुस्लिम वोट बैंक अब कांग्रेस के पक्ष में रुझान दिखा रहा है यदि बीजेपी को मुस्लिम समर्थन नहीं मिला तो आगामी चुनाव में बीजेपी को इसके लिए समस्या से जूझना पड़ सकता है।

    मुस्लिम समाज को बीजेपी से जोड़ने हेतु बीजेपी द्वारा मोदी मित्र योजना को चलाया गया है इस योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक  मुस्लिम लोगों को बीजेपी से जुड़ना और उनको केंद्र की योजनाओं से अवगत करवाना है। यह योजना उत्तर प्रदेश के देवबंद से शुरू की गई है। अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा इस योजना का नेतृत्व किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि योजना के संचालना हेतु देवबंद चुना गया इसका अमुख कारण यह भी है कि यह इस्लामिक केंद्र के रूप में जाना जाता है. इस योजना के तहत लोगों को सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है और केंद्र की योजनाओ से मुस्लिम समाज को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है .

    बीजेपी से क्यों नाराज मुस्लिम समाज :

    मुस्लिम समाज बीजेपी से काफी रुष्ट रहता है .मुस्लिम का मनना है कि बीजेपी के नेतृत्व में देश विभाजनकारी नीति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है .समाज में मुस्लिम के साथ दोहरा व्यवहार हो रहा है, मुस्लिम परिवार को केंद्र की योजनाओं का सुनियोजित लाभ नही मिलता और देश में इस्लाम विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है .मुस्लिम बीजेपी की कट्टर हिन्दू नीति से भी असंतुष्ट है, मुस्लिम समाज का कहना है कि भाजपा सिर्फ हिन्दू हितैसी है बीजेपी ने कभी मुस्लिम हित की बात नहीं की है .भाजपा का उद्देश्य देश को हिन्दू पुरोधा देश बनाना है .

    हालाकि बीजेपी मुस्लिम समाज के इन दावों को खारिज करती है और लगातार यह कहते नजर आती है कि बीजेपी ने देश हित हेतु कार्य किया है भाजपा का उद्देश्य सबका साथ सबका विकास है.