Category: politics

  • कलह बन रही काल , कैसे बिना मुख्यमंत्री लगेगी कांग्रेस की नैया पार

    राजनीति:- कांग्रेस की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जहाँ अभी कुछ महीने पहले पांच राज्यों में मिली हार के बाद कांग्रेस ने खुद के वजूद को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। वही अब गुजरात और हिमाचल का चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। क्योंकि इन दोनों राज्यों में भाजपा के हाँथो में सत्ता है वही गुजरात मे पिछले 30 सालों से भाजपा की विजय का शंख नाद हो रहा है। 

    वही अब खबर यह सामने आ रही है कि इन दोनों विधानसभा सींटो को जीतने के लिए कांग्रेस यहां सामुहिक तौर पर चुनाव लड़ेगी और किसी बड़े नेता का चेहरा मुख्यमंत्री के तौर पर घोषित नहीं करेगी। यानी इस बार कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री के चुनावी रण में ताल ठोकेंगी। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस का सीधा मुकाबला भाजपा से है। हालाकि गुजरात मे आम आदमी पार्टी लगातार इस कोशिश में लगी है कि वह कांग्रेस की पकड़ पर अपना वर्चस्व स्थापित कर सके। 
    राजनीतिक विशेषज्ञयों का कहना है कि कांग्रेस ने सामुहिक चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी में मची अंदरूनी कलह के कारण लिया है। क्योंकि कांग्रेस के कई नेता भाजपा की ओर रुख कर चुके हैं और अगर अब कांग्रेस मुख्यमंत्री का नाम घोषित करती है तो हो सकता है इसके फायदे से ज्यादा कांग्रेस को नुकसान झेलने पड़ जाए। 
    वही अगर हम बात गुजरात की राजनीति की करें तो गुजरात मे कांग्रेस पिछले 27 सालों से सत्ता में आने की कवायद में लगी हुई है। गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां हिंदुत्व की राजनीति होती हैं और प्रत्येक राजनीति दल जाति और धर्म के नाम पर जनता को लुभाने की कोशिश करता है। वर्ष 2017 में कांग्रेस ने गुजरात मे भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी और वह एक मजबूत दल के रुप मे उभर कर सामने आई थी।

  • महंगाई बेरोजगारी के जिम्मेदार मोदी नहीं मुगल:- ओवैसी

    राजनीति;- केंद्र सरकार इस समय विपक्ष के निशाने पर है। आय दिन विपक्षी दल मोदी की आलोचना करते देखे जाते हैं। वही अब एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर केंद्र सरकार को घेरा है। एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने कहा आज देश के जो हालात हैं महंगाई और बेरोजगारी उफान पर है उसके जिम्मेदार मोदी नहीं मुगल है।

    ओवैसी ने ट्वीटर पर एक वीडियो साझा किया है इसमे वह एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बरस रहे हैं। वीडीयो में ओवैसी कहते हैं कि आज देश मे महंगाई बढ़ रही है। बेरोजगारी उफान पर है। डीजल 100 रुपये पार बिक रहा है। लेकिन इस सबके लिए जिम्मेदार मोदी नहीं है बल्कि यह सब औरंगजेब की वजह से हो रहा है।
     

     

    उन्होंने आगे कहा, वही अगर हमारे देश के बच्चे आज बिना नौकरी के भटक रहे हैं तो इसके जिम्मेदार सिर्फ अकबर है। आज पेट्रोल 104 रुपये में बिक रहा है। लेकिन पेट्रोल के बढ़े दामो का कारण ताजमहल है अगर ताजमहल न होता तो पेट्रोल 40 रुपये में बिकता। उन्होंने कहा मैं मानता हूं मुगलों ने ताजमहल, लालकिला बनवाकर गलती की उन्हें पैसा बचाकर रखना चाहिए था। उन्होंने आगे सवाल करते हुए कहा क्या भारत मे सिर्फ मुगलों की सरकार थी क्या भारत मे महज अकबर और औरंगजेब ने किया क्या चंद्रगुप्त और अशोक भारत की सत्ता में नहीं थे। लेकिन भाजपा को सिर्फ हर चीज के जिम्मेदार मुगल ही दिखाई देते हैं।

  • पीएम का मुसलमानों को साधने का मास्टर प्लान, खतरे में डाल देगा विपक्ष का अस्तित्व

    डेस्क। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक मीटिंग में जब ये कहा कि मुस्लिमों में भी सोशल इंजीनियरिंग की खासा आवश्यकता है। उन्होंने पसमांदा मुस्लिमों के विकास पर फोकस की बात कही तो देश में मुस्लिमों के इस तबके को लेकर भी एक बहस छिड़ चुकी है। 

    इस घोषणा के बाद से ही भाजपा मोदी की इस लाईन पर काम करने की रणनीति बनाने में लगी है। लेकिन विपक्ष के लिए ये एक बड़ी ही चिंता की बात है।

    विपक्ष के लिए खतरा हैं भाजपा का ये प्लान

    विपक्ष के लिए पीएम की ये बात एक खतरे की घंटी की तरह है। खासकर यूपी व बिहार के हिस्सों में, क्योंकि यहां पर ज्यादातर मुस्लिम तबका बीजेपी के खिलाफ वोट करता है। अगर बीजेपी सोशल इंजीनियरिंग करके पसमांदा यानि पिछड़े मुस्लिमों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है तो विपक्ष के पास कुछ नहीं बचेगा। बता दें कि यूपी के एक मंत्री कहते हैं कि उन्हें यकीन है की पसमांदा मुसलमान बीजेपी को समर्थन देंगे। उन्होंने यह दावा भी पेश किया है कि हाल के असेंबली चुनाव में तकरीबन 8 प्रतिशत पसमांदा मुस्लिमों ने सीएम योगी के लिए भाजपा को वोट किया था। 

    पसमांदा मुसलमान कौन?

    भारतीय मुसलमान भी जाति व्यवस्था के शिकार हैं। हिन्दू की तरह ही वोभी सैकड़ों बिरादरियों में बंटे हुए हैं। उच्च जाति के मुस्लिमों को अशरफ कहा जाता है। इनका ओरिजिन पश्चिम या मध्य एशिया से बताया जाता है।

    जहां एक ओर मुस्लिमों आबादी में 15 फीसदी उच्च वर्ग माने जाते हैं। वहीं बाकी के 85 फीसदी अरजाल और अजलाफ दलित और बैकवर्ड कहे जाते हैं। बता दें ये मुसलमान आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक हर तरह से पिछड़े और दबे हुए हैं। ऐसे में भाजपा का ये कदम एक साथ पूरे आधे से ज्यादा मुसलमानो को अपनी ओर करने का है।

  • ममता बोली क्या नुपुर की गिरफ्तारी पर बोलना आवश्यक

    Politics:- भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर जहां मुस्लिम समाज लगातार विरोध कर रहा है। वही अब इनकी गिरफ्तारी को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी राय व्यक्त की है। ममता बनर्जी से जब इंडिया टुडे में दिए इंटरव्यू के दौरान नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने पत्रकारों से उल्टा सवाल किया कहा कि क्यों नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए।

    उन्होंने पत्रकार से कहा क्या आपको लगता है कि मुझे उनका नाम लेना चाहिए। मुझे उनका नाम लेना गलत लगता है क्योंकि उन्होंने एक नेशनल चैनल के माध्यम से घृणा फैलाई। मुझे लगता है उनका नाम नहीं लेना चाहिए मुझे उनसे किनारा कर लेना चाहिए। यह एक तरह से बीजेपी की साजिश है देश मे घृणा फैलाने और नफरत को बढ़ावा देने की। भाजपा इसके तहत अपना राजनीतिक लाभ साधेगी। 
    जानकारी के लिए बता दें नुपुर शर्मा ने टीवी डिबेट के दौरान पैगम्बर मोहम्मद पर विवादित बयान दिया था जिसके बाद भारत समेत कई मुस्लिम देशों ने नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग की। वही अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नुपुर को लताड़ लगाई और कहा कि आज देश का जो माहौल है उसके लिए नुपुर शर्मा का बयान जिम्मेदार है। वही उदयपुर में टेलर की हत्या हुई उसके लिए भी नुपुर शर्मा का बयान जिम्मेदार है।

  • इस मुस्लिम विधानसभा सींट पर है भाजपा का राज

    Gujarat politics:- गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को है। जहाँ पक्ष विपक्ष गुजरात भेदने को अपनी कमर कस चुके हैं। वही सत्ताधारी भाजपा का गुजरात में लंबे समय से वर्चस्व स्थापित है ओर यह इस बार भी गुजरात की सत्ता अपने हाँथो से नहीं जाने देना चाहती है। वही गुजरात की एक सींट ऐसी भी है जो मुस्लिम बाहुल्य है लेकिन उसपर भाजपा का दबदबा है। असल मे गुजरात की मांडवी विधानसभा सींट है जहां भाजपा 7 बार चुनाव जीत चुकी है ओर कांग्रेस यहां अपना वर्चस्व स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रही है।

    वही अगर हम इस बार के विधानसभा चुनाव की बात करे तो इस सींट को जीतना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। क्योंकि यह सींट वैसे तो भाजपा के हाँथो में है लेकिन अबकी बार एआईएमआईएम और कांग्रेस दोनो की नजरें इस सींट पर है ओर एआईएमआईएम लगातार मुस्लिम को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। यह लगातार 10 फीसदी मुस्लिम आबादी को अपनी ओर करना चाह रहे हैं। मांडवी सींट गुजरात की वह सींट है जो मुसलमान बाहुल्य होने के बाद भी पिछली 7 बार से भाजपा के हाँथ में है। 
    इस सींट पर 4 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है वही 7 बार यहां भाजपा को जीत हासिल हुई है। वर्तमान समय मे इस विधानसभा सींट पर भाजपा का विधायक है। लेकिन इस बार इस सींट को भाजपा जीत पाएगी या नहीं यह कह पाना संभव नहीं है। इस सीट पर 224901 मतदाता हैं। वर्ष 2017 में इस विधानसभा सींट पर भाजपा की ओर से वीरेंद्र सिंह जड़ेजा को मैदान में उतारा था। उन्हें इस चुनाव में 79469 वोट मिले थे। इस विधानसभा सींट से 1960 से सात बार भाजपा अपनी जीत का डंका बजा चुकी है।

  • केशव ने बताया राजनीति और संघर्ष में अंतर लोग बोले संघर्ष का नतीजा की सिराथू हारे

    Uttarpradesh:- उत्तरप्रदेश सरकार और विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता आय दिन एक दूसरे पर कटाक्ष करते दिखाई देते हैं। वही अगर हम बात उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की करे तो यह अपने शाब्दिक बाणों से अक्सर अखिलेश यादव पर वार करते हैं। वही अब इस बीच इन्होंने अखिलेश यादव का बिना नाम लिए उन्हें घेरा है और उन्हें विरासत में मिली राजनीति और संघर्ष का अर्थ समझाया है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव का नाम लिए बिना एक ट्वीट किया और उनपर निशाना साध दिया। केशव बोले विरासत की राजनीति और संघर्ष से राजनीति के बीच के अंतर को जनता समझ चुकी है! केशव के इस ट्वीट पर यूजर्स जमकर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। लोग केशव के ट्वीट पर केशव को घेरने लगे हैं। 
    एक यूजर केशव के ट्वीट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहता है कि मौर्या जी पता है आप संघर्ष की राजनीति करके आए हैं अभी इन सब फालतू बातों में समय व्यर्थ ना करते हुए जनता के लिए भी कुछ काम करिये ये चुनावी ट्वीट बंद करो। वही दूसरा यूजर कहता है कि जनता समझ चुकी है इसी का परिणाम है कि आप हारे हुए हैं। आपको यह मौलिक अधिकार नहीं है कि आप किसी पर अंगुली उठाएं। लेकिन आप जबर्दस्ती अधिकार जताने की कोशिश करते हो। लोकतंत्र में हारे हुए व्यक्ति का कितना महत्व है यह आप भली भांति जानते हैं। आप लोगो ने जो बेईमानी से सत्ता हासिल की है उसपर इतरा रहे हो उसका प्रतिफल आपको कभी न कभी अवश्य मिलेगा।
    एक यूजर केशव पर भड़कते हुए बोला, आपकी विधान सभा मे जनता ने आपको इस अंतर को समझा भी दिया है आशा है आप इस सबक को कभी नही भूलेंगे। वही दूसरा यूजर कहता है कि आप की राजनीति का ही परिणाम है कि आज देश की न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा रहा है उसे बदनाम किया जा रहा है जिनको जनता ने नकार दिया पैसे के दम पर सरकार बना रहे हैं राज्यों की पुलिस आपस में लड़ रही हैं एक साजिश के तहत कानून को बंधक बनाने का कार्य किया जा रहा है।

  • आप चाहे जो करे सोनिया गांधी आपको तब तक कांग्रेस से नहीं जोड़ेंगी जब तक राहुल है

    राष्ट्रीय:- पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी आय दिन अपनी ही पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए देखे जाते हैं। यह किसान आंदोलन से लेकर महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते रहते हैं। वही अब इन्होंने केंद्र की अग्निपथ योजना का विरोध किया है और इसे युवाओं के भविष्य को लेकर खिलवाड़ बताया है। लेकिन आज इन्होंने बीएसएफ जवानों को लेकर चिंता जाहिर की है ओर कहा है कि इन्हें सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता है।

    वरुण गांधी ने ट्वीट कर कहा कि महज 4 घंटे की नींद, दो-दो शिफ्ट, विषम परिस्थितियों में ड्यूटी और सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं। यह कहानी है देश के बॉर्डर की सुरक्षा करने वाले BSF के जवानों की। 20 से 22 हजार पद खाली, 20 सालों में प्रमोशन। पिछले दस सालों में 1205 जवानों ने ली अपनी जान। फिर भी मेरा देश महान। वरुण गांधी ने अपने ट्वीट के साथ दैनिक भास्कर की वह खबर शेयर की है जो की बीएसएफ जवानों के संघर्ष से जुड़ी हुई है।
    वरुण गांधी के ट्वीट पर यूजर्स अपनी राय दे रहे हैं। एक यूजर कहता है कि आज सब अपना स्वार्थ देख रहे हैं किसी को यह संघर्ष नहीं दिखेगा क्योंकि आज जो सरकार है उसे आम आदमी नहीं दिखाई दे रहा है। वही एक यूजर वरुण गांधी की तारीफ करते हुए कहता है कि मुझे आप पर गर्व है आज तक कोई भी इन जवानों के विषय में सोचा भी नहीं जब से ये सरकार आई है तब से जवानों को जो सुविधाएं मिलती थी उसे भी कटौती कर दी गई। 
    एक यूजर वरुण के ट्वीट के एक अंश पर उत्तर देते हुए बोलता है कि मेरा भारत तो हमेशा से महान है और रहेगा। बस अंतर इतना है अब 8 साल से यहाँ के नेता स्वयंभू महान हैं बड़ी बड़ी बातें करके। भारत माता की जय और वन्दे मातरम बोलकर। फिर देश कहीं भी जाए। दूसरा यूजर कहता है कि सांसद जी आप कितना चाहे बीजेपी के कार्यों पर उंगली उठा ले लेकिन सोनिया गांधी आपको जब तक राहुल गांधी कांग्रेस में है शामिल नहीं करने वाली…अच्छा हैं प्रयास करते रहो। वरना एकदम से 10 साल में आम जनता का ख्याल कैसे आ गया आपको समझ से परे हैं।

  • भाजपा सबपर थोपना चाहती अपनी विचारधारा, मैं नही डरती उनसे

    विशेष:- तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा मां काली की पूजा विधि पर दिए अपने बयान से सुर्खियों में है। तृणमूल कांग्रेस ने महुआ मोइत्रा के बयान से दूरी बना ली है और भाजपा लगातार इनकी गिरफ्तारी की मांग उठा रही है ओर इनका जमकर विरोध कर रही है। वही इस मुद्दे पर टीवी चैनल एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान महुआ मोइत्रा ने कहा कि मैने कुछ गलत तो नहीं किया है मैं एक पब्लिक फिंगर हूँ हमारी पार्टी जनता के लिए काम करती है। सभी आजाद है आज के समय मे कोई कुछ भी बोल सकता है। अब जिस तरह का मुद्दा सामने आता है लोग उसी तरह की बात करते हैं। 

    उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा, भाजपा को यह कहने का कतई हक नहीं है कि मैं काली की पूजा कैसे करूंगी। मैं पश्चिम बंगाल में रहती हूं यहां पूजा के कुछ अलग नियम है मैं हिन्दू ही ओर मुझे बंगाल की रस्मे पता है मैं उनको नहीं छोड़ सकती। क्योंकि यह सत्य है यहाँ काली की पूजा मांस और शराब के साथ की जाती है। बीजेपी के लोग जो मेरे खिलाफ शिकायत दर्ज करवा रहे हैं वह वास्तव में पश्चिम बंगाल की संस्कृति को नहीं समझते। वह यह बिल्कुल नहीं जानते की बंगाल में काली की पूजा की क्या विधि है। 
    उन्होंने आगे कहा, मैं हिन्दू हूँ, वही अभी जो डाक्यूमेंट्री का पोस्टर सामने आया मैने अपने बयान में उसपर एक शब्द नहीं कहा। मैं जानती हूं मैंने क्या कहा है। मैं काली की उपासक हूँ ओर मैं उनकी पूजा अपनी परंपराओं के मुताबिक ही करूंगी। मैं भाजपा को चुनौती देती हूं कि उन्होंने मेरे नाम पर पश्चिम बंगाल में जहां जहां प्राथमिकता दर्ज करवाई है उसके 10 किलोमीटर तक काली की पूजा उसी विधि से होगी जैसे मैंने बयान दिया है। उज्जैन में मां काली की पूजा मांस और शराब से की जाती है अगर मैं गलत हूँ। तो मैं अपने शब्दों को वापस ले लूंगी। लेकिन यह सत्य है कि मैं गलत नहीं हूं। 
    उन्होंने कहा भाजपा हमेशा से अपनी विचारधारा को लोगो पर थोपना चाहती है। हम उस देश मे रहते हैं जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग निवास करते हैं ओर हम यहां अलग अलग धर्मो पर चर्चा कर सकते हैं। मैं अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर से कतई नहीं डरती हूँ लेकिन वह उसी तरह पूजा करते हैं जैसे हम करते हैं। भाजपा समर्थकों ने मेरे खिलाफ तहरीर दर्ज करवा कर गलत किया है। धारा 295 ए के तहत जब कोई जानबूझकर किसी के धर्म को ठेस पहुंचाने की कोशिश करता है तो वह अपराध की कैटेगरी में आएगा।

  • मोदी ने किसान और आम आदमी को ठगा

    National:- किसान आंदोलन से सुर्खियों में रहे किसान नेता राकेश टिकैट हर मुद्दे पर खुलकर अपना पक्ष रखते हैं। अभी हाल ही में जहां इन्होंने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना का विरोध किया ओर यह युवाओं के समर्थन में उतरे। वही अब इन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से मोदी सरकार पर कटाक्ष किया है। राकेश टिकैट ने मोदी सरकार पर किसानों और आम आदमी को ठगने का आरोप लगाया है। 

    उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि कृषि उपज को पूंजीपतियों के हवाले कर मोदी सरकार ने किसान-आम जनता को ठगा। गेहूं खरीद में प्राइवेट प्लेयर्स ने काटी चांदी।अब नॉन ब्रांडेड आटा चावल सूजी पर जीएसटी लगा गरीब के मुंह से छीना निवाला। इससे किसान और गरीब दोनों मरेंगे। हकों के लिए आंदोलन ही एक रास्ता। उन्होंने यह ट्वीट आय दिन बढ़ती महंगाई के परिपेक्ष्य में किया है।
     

     

    राकेश के ट्वीट पर यूजर्स की प्रतिक्रिया:-

    एक यूजर कहता है कि ₹2 किलो की प्याज टमाटर और आलू ₹50 किलो बिकती है तब आंख बंद करके सोते रहते हो क्यों नहीं सोचते हो यह नफा क्यों कौन कम रहा है किसानों की कोऑपरेटिव भी बना सकते हो मंडी वाले कितना लूटेंगे आपको। लूटने क्यों दे रहे हो मंडी के खिलाफ आंदोलन चलाओ। वही एक दूसरा यूजर किसान आंदोलन को इंगित करते हुए कहता है कि भारत के’क्षेत्रपति समाज'(किसान कौमों जमींदार भूमिस्वामी समुदाय)ने पिछले वर्ष अद्भूत शांति पूर्वक अन्दोलन से सरकार को झुका दिया था. फैसला वापिस लेने के लिये.अब फिर सरकार एक और हठयोग पर अडी है जो सीधे क्षेत्रपती वर्गों की पीढ़ी को अधिकारों से वंचित करने की योजना दिखायी दे रही है।
    वही एक यूजर बोलता है कि अभी अभी खत्म हुए आन्दोलन पर आपने जितना खर्च कराया,उतना खर्च में किसानों के भले के लिए बहुत कुछ किया जा सकता था। अगर किसानों का भला चाहते हैं तो उनके भले के लिए खर्च कीजिए,आपनी राजनीति के लिए उनको ढाल मत बनाइए।

  • क्या उद्धव ने मजबूरी में दिया है द्रौपदी मुर्मू को समर्थन? पढ़िए ये चौकानें वाला बयान

     

     

    डेस्क। राष्ट्रपति पद की ओर से एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने के पीछे शिवसेना की राजनीतिक मजबूरी बताई जा रही है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि वह अपने विधायकों के दबाव में नहीं हैं साथ ही इसमें कोई रहस्य की बात भी नहीं है कि शिवसेना, हाल ही में हुए विद्रोह के बाद से घायल होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। महाराष्ट्र की राजनीतिक कलह के बाद से ही उसकी ताकत में कमी आई है, जिसके कारण महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के नेतृत्व के सामने और कोई विकल्प नहीं बचा ।

    सोमवार को, पार्टी के 18 शेष सांसदों में से 13 ने ठाकरे द्वारा उनके आवास पर बुलाई गई बैठक में भाग लिया और उनसे राष्ट्रपति पद के लिए NDA की ओर से उम्मीदवार मुर्मू का समर्थन करने और भाजपा और पार्टी के एकनाथ शिंदे गुट के साथ संभावित सुलह का दरवाजा खोलने का अनुरोध भी किया था।

    साथ ही पिछले हफ्ते पार्टी सांसद राहुल शेवाले ने ठाकरे को पत्र लिखकर कहा कि शिवसेना को मुर्मू को समर्थन देना चाहिए। उन्होंने लिखा कि एक ऐसी पार्टी में जहां ठाकरे से शायद ही कभी सवाल किया जाता है, शिवसेना प्रमुख को सांसद का पत्र एक स्पष्ट संकेत था कि उनका प्रभाव पार्टी से भी घट रहा है और पार्टी के सदस्य अब खड़े होने और अपने मन की बात कहने से बिल्कुल नहीं डरते। 

    बीते दिनों विद्रोह के बाद, ठाकरे वैसे भी एक पतली राजनीतिक रेखा पर जा खड़े हुए हैं।