Category: politics

  • योगी के नेतृत्व में चमका उत्तरप्रदेश

    देश- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला और कहा यह पहली बार हुआ है जब बजट सत्र बिना चर्चा के समाप्त हो गया। विपक्ष ने सदन का काफी वक्त बर्बाद किया। यह शर्मनाक है जनता विपक्ष को इसका जवाब जरूर देगी। 

    उन्होंने आगे योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा- पहले जब मैं यूपी आता तो गांव-गांव बिजली नहीं रहती। रमजान पर 24 घण्टे बिजली रहती थी। सपा, बसपा, कांग्रेस ने यूपी में सदैव जातिगत राजनीति की है। लेकिन योगी के नेतृत्व में यूपी दंगा मुक्त प्रदेश बना है।
    योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ में 4583 करोड़ की 117 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। यूपी का एक भी गांव नहीं है जहां बिजली न आती हो। योगी ने गांव-गांव 24 घण्टे बिजली पहुंचाई। हर घर योजना के तहत 60 फीसदीं लोगों के घर मे पानी मिल रहा है। आप लोग साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का समर्थन कीजिए। बीजेपी का उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है।

  • राजनीति के एक और पावर कपल लेने जा रहे तलाक

    उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिवारों में कलह और तलाक की खबरें तेजी से सामने आ रही हैं। यूपी के मंत्री दया शंकर सिंह और उनकी पत्नी व पूर्व मंत्री स्वाति सिंह के तलाक के बाद अब पूर्व मंत्री और यूपी विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच विवाद सुर्खियां बटोरता जा रहा है। राजा भैया ने दिल्ली के साकेत स्थित फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी है। उनकी 28 साल पुरानी शादी को खत्म करने की याचिका पर 23 मई को सुनवाई होगी। सुनवाई सोमवार को स्थगित कर दी गई, क्योंकि पारिवारिक अदालत की न्यायाधीश शुनाली गुप्ता छुट्टी पर थीं। भानवी सिंह के वकील ने भी जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

    राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच मतभेद तब सामने आने लगे जब उन्होंने राजा भैया के करीबी सहयोगी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ इस साल फरवरी में दिल्ली में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई। भानवी ने अपनी एफआईआर में दावा किया है कि अक्षय ने धोखे से अपने सहयोगी को उसके स्वामित्व वाली फर्म में निदेशक के रूप में नियुक्त किया। उसने दावा किया कि वे उसकी कंपनी को हड़पना चाहते थे। भानवी ने कहा कि उन्होंने निदेशक नियुक्त करने के लिए उनके जाली हस्ताक्षर किए और फर्जी दस्तावेज बनाए।

    हालांकि बाद में राजा भैया ने पत्रकारों से कहा कि अक्षय ने कुछ भी गलत नहीं किया है और वह उनके साथ हैं। राजा भैया के करीबी लोगों का दावा है कि भानवी पिछले तीन सालों से दिल्ली में रह रही है, यह इस बात का संकेत है कि दंपति के बीच कुछ ठीक नहीं थीं। सूत्रों ने पुष्टि की, कि परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने दोनों के बीच मतभेदों को सुलझाने के कई प्रयास किए, लेकिन सभी व्यर्थ किए। राजा भैया और भानवी सिंह ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के दो साल बाद फरवरी 1995 में शादी कर ली। सूत्रों के मुताबिक, तलाक की अर्जी में राजा भैया ने कहा है कि उनकी पत्नी ने न सिर्फ घर छोड़ा बल्कि साथ रहने से भी इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि भानवी ने अक्षय पर झूठे आरोप लगाए और परिवार के सदस्यों के बीच विवाद पैदा किया जो उनके प्रति मानसिक और भावनात्मक क्रूरता को दर्शाता है।

    राजा भैया और भानवी के चार बच्चे हैं – दो बेटियां और जुड़वां बेटे। सबसे बड़ी बेटी राघवी का जन्म 1996 में हुआ। दूसरी बेटी बृजेश्वरी का जन्म 1997 में हुआ। राघवी शूटर हैं। जुड़वां बेटे शिवराज और बृजराज का जन्म 2003 में हुआ था। 1993 से सक्रिय राजनीति में राजा भैया कुंडा से लगातार 7वीं बार विधायक हैं। यूपी की राजनीति में उनका दबदबा उनके गृह जिले प्रतापगढ़ से भी आगे तक है। उन्होंने कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सरकारों में मंत्री के रूप में कार्य किया है। वह अब अपने स्वयं के जनसत्ता दल के प्रमुख हैं।

  • जनता ने बीजेपी से मोड़ा मुह, कांग्रेस को करना होगा ये काम

    राजनीति– अपने अस्तित्व की तलाश में जुटी कांग्रेस आत्मविश्वास के साथ खड़ी हो गई है। राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य कई कांग्रेस के बड़े नेता इस उम्मीद में हैं की जनता उनका समर्थन करेगी। अगर विपक्ष उनका साथ देता है तो वह केंद्र से एनडीए की सरकार गिरा देंगे।

    वहीं कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर ऐसी खबर सामने आई है जो बीजेपी के लिए समस्या बन सकती है। मई में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ओर जनता का रुझान कम है। राजनीतिक विशेषज्ञ का दावा है कि कर्नाटक इस बार कांग्रेस के साथ है। उम्मीद है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनेगी।
    राजनीतिक जानकारों का दावा है कि कांग्रेस कर्नाटक में बीजेपी के लिए समस्या बन गई है। दक्षिण की जनता राहुल गांधी के समर्थन में है। अगर कर्नाटक कांग्रेस के हाथ लगता है तो यह अन्य राज्यों में कांग्रेस को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। 
    वैसे तो यह संभव नहीं है कि किसी राज्य को देखकर अन्य राज्यों में मतदान हो। लेकिन इससे मुह नहीं चुराया जा सकता कि कर्नाटक में कांग्रेस की मजबूत छवि अन्य राज्यों की जनता को प्रभावित कर सकता है।
    कर्नाटक में बीजेपी की हार विपक्ष के लिए संजीवनी बूंटी साबित होगी। यह विपक्ष में जान डालेगी। बीजेपी के लिए यह समस्या होगा लेकिन इससे यह नहीं हो सकता कि कांग्रेस अन्य राज्यों में मजबूत हो जाएगी। लेकिन लोकसभा चुनाव के परिपेक्ष्य से कांग्रेस बीजेपी को टक्कर देने के काबिल जरूर होगी।
    कांग्रेस बीते कई सालों से चुनाव हार रही है। कांग्रेस को लेकर यह नैरेटिव तैयार है कि जनता ने उसे नकार दिया है। अब अगर कांग्रेस जनता के बीच उठना चाहती है तो उसको अपनी छवि बनाने के लिए अपने ऊपर कई राज्यों में जीत का ठप्पा लगाना होगा। 
    बता दें कर्नाटक में 10 मई को मतदान होगा। 13 मई को नतीजा आएगा। वर्तमान में कर्नाटक में बीजेपी की सरकार है।

  • सभापति को सरकार के गुणगान नहीं करने चाहिए

    देश- कांग्रेस नेता बीजेपी पर हमलावर हैं। वहीं अब उन्होंने राज्य सभा के सभापति जगदीप धनकड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उनको निष्पक्ष रहने की हिदायत दी है।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश में उनके उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है जिसमे उन्होंने कहा विदेश यात्रा पर जाते समय लोगों को अपना राजनीतिक चश्मा तोड़ देना चाहिए। 
    उन्होंने कहा, सभापति को निष्पक्ष होना चाहिए। उन्होंने सरकार के गुणगान नहीं करने चाहिए।

     

  • मोदी ने लोकतंत्र का किया नाश

    राजनीति – कांग्रेस नेता लगातार केंद्र सरकार पर लोकतंत्र खत्म करने का आरोप लगाते हैं। वहीं अब कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल (K. C. Venugopal) ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश का लोकतंत्र खत्म कर दिया है। हमें अब एकजुट होना होगा। विपक्ष को एकता का सूत्र अपनाकर तानाशाही पर प्रहार करना होगा। 

    बता दें वेणुगोपाल शाम को मुंबई पहुंचे और उन्होंने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साथ आधे घंटे से अधिक समय तक बैठक की जिसके बाद दोनों नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। 

    उन्होंने आगे कहा- उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस के मध्य एकजुटता है। हम जानते हैं कि हमें तानाशाही के खिलाफ एकजुटता से लड़ना होगा। जल्द ही उद्धव ठाकरे दिल्ली आकर सोनिया गांधी से मुलाक़ात करेंगे और मुंबई आकर राहुल गांधी उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात करेंगे। 

    वेणुगोपाल यहीं नहीं रुके उन्होंने केंद्र सरकार का नाम लिए बिना उनको नरभक्षी और सत्ता का भूखा बताया। 

  • यूपी में चल रहा बंदूक राज तुम लोग डूब मरो- ओवैसी

    देश- अतीक अहमद की हत्या का मामला पर एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी लगातार योगी सरकार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि अतीक की हत्या योगी सरकार की नीतियों से हुई है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने कहा- यूपी में कानून का नहीं बंदूक का राज चल रहा है। अतीक अहमद की हत्या कोल्ड ब्लेडड हत्या है। हत्या मे यूपी की बीजेपी सरकार की भूमिका है। जो कल हुआ उसके बाद क्या जनता कानून और संविधान पर विश्वास कर पाएगी।
    उन्होंने आगे कहा- यह मामला गंभीर है। उसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। एक अलग कमेटी गठित की जानी चाहिए। कमेटी में उत्तरप्रदेश का कोई अधिकार नहीं शामिल होना चाहिए। मैं हमेशा से यह कहता आया हूँ यूपी की योगी सरकार कानून के नहीं बंदूक के आधार पर चलती है।
    उन्होंने आगे कहा- हम शुरुआत से यह बोल रहे थे। लोग हमारी बात को नजरअंदाज कर रहे थे। जो हुआ उसकी निंदा के लिए शब्द नहीं हैं। इससे जनता का संविधान और कानून से विश्वास उठेगा।
    आप हत्या के बाद धार्मिक नारे लगा रहे हैं। इसको हत्यारे नहीं तो क्या देशभक्त कहा जायेगा। क्या बीजेपी उनको हार पहनाएगी। लोग एनकाउंटर का जश्न मना रहे हैं। शर्म करो तुम लोग डूब मरो।
    जानकारी के लिए बता दें कल देर रात अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या की गई। अतीक मीडिया को बाइट दे रहा था तभी उसकी कनपटी पर गोली दागी गई। अपराधियों ने हत्या करने के बाद जय श्री राम के नारे लगाए और सरेंडर कर दिया। अतीक की हत्या से प्रयागराज में सनसनी फैल गई है।

  • मुकुल रॉय रिजेक्टेड नेता हैं, भाजपा को उनकी जरूरत नहीं : सुवेंदु अधिकारी

    तृणमूल कांग्रेस नेता मुकुल रॉय के फिर से भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा के दिग्गज नेता एवं विधान सभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि पार्टी को ऐसे रिजेक्टेड नेता की जरूरत नहीं है।  सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि, हम बूथ पर पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। बूथ पर जिन लोगों ने कांग्रेस, लेफ्ट और टीएमसी को वोट किया है, हम लोग उन्हें पार्टी के साथ लाने पर काम कर रहे हैं, किसी नेता को लाने की जरूरत नहीं है। हमें ऊपर से किसी नेता को लाने की जरूरत नहीं है। हमें ऐसे रिजेक्टेड लोगों की जरूरत नहीं है।

    सुवेंदु अधिकारी ने मुकुल रॉय पर बड़ा आरोप लगाते हुए आगे कहा कि, मई 2021 के बाद पश्चिम बंगाल में जब भाजपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार हो रहा था उस समय जिन्होंने भाजपा का साथ छोड़ा, वह भाजपा का आदमी नहीं हो सकता। भाजपा बंगाल के विकास के लिए मतदाताओं को जोड़ने का काम रही है और पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत नहीं है।

    आपको बता दें कि, मुकुल रॉय ने मंगलवार को एक बंगाली चैनल के साथ बातचीत करते हुए यह कहा था कि वे भाजपा विधायक हैं और भाजपा के साथ रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलकर बात करना चाहते हैं।           इससे पहले मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांग्शु रॉय ने यह दावा किया था कि उनके पिता (मुकुल रॉय) सोमवार देर शाम से लापता हैं।

    आपको बता दें कि, एक जमाने में तृणमूल कांग्रेस मुखिया ममता बनर्जी के काफी करीबी रहे मुकुल रॉय ने उनसे मतभेदों के कारण 2017 में पार्टी को छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था। रॉय 2021 के विधान सभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतरे और जीत कर विधायक भी बने लेकिन बाद में वो फिर से टीएमसी में शामिल हो गए।

  • पार्टी के दर्जे को लेकर अमित शाह को फोन करने का दावा पूरी तरह झूठा : ममता

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के दावों का जोरदार खंडन किया। दावा था कि सीएम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को फोन किया और उनसे तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस लेने के लिए चुनाव आयोग से कहने का अनुरोध किया। हालांकि बनर्जी ने एक बार भी अधिकारी का नाम नहीं लिया। उन्होंने राज्य सचिवालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा- मैंने सुना है कि मंगलवार को एक नए व्यक्ति ने एक जनसभा में दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस लेने के बाद मैंने उनके सर्वोच्च नेता अमित शाह को चार बार फोन किया था। अगर वे इसे साबित कर सकते हैं तो मैं मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दूंगी। लेकिन अगर वह इन आरोपों को साबित नहीं कर सकते हैं, तो क्या वह जमीन पर अपनी नाक रगड़ेंगे?

    उन्होंने एक सवाल उठाया कि क्या यह गलत संदेश गृह मंत्री के रूप में अमित शाह के इस्तीफे की उनकी मांग के कारण जानबूझकर दिया गया था, अमित शाह वे बयाव दिया था कि अगर भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की 42 में से 35 सीटों पर जीत हासिल करती है, तो मौजूदा राज्य सरकार 2025 से पहले ही गिर जाएगी।

    बनर्जी ने कहा- यह सच है कि मैंने उनके इस्तीफे की मांग इसलिए की क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उनका व्यवहार उनके पद के अनुरूप नहीं था। उनकी टिप्पणियां देश की संघीय लोकतांत्रिक प्रणाली के विपरीत थीं। इसलिए, मैंने उनके इस्तीफे की मांग की। भाजपा हमेशा तृणमूल कांग्रेस के बारे में लोगों को गलत संदेश देती है।

    अधिकारी ने मंगलवार को हुगली जिले के सिंगूर में एक रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस लेने की घोषणा के तुरंत बाद, बनर्जी ने अमित शाह को 2024 के लोकसभा चुनाव तक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने की अपील की। बनर्जी ने बुधवार को यह भी कहा कि उनकी पार्टी का नाम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ही रहेगा। उन्होंने कहा, भाजपा चुनाव आयोग को प्रभावित कर सकती है। लेकिन हमारी पार्टी का नाम वही रहेगा।

  • कितना झुकेंगे नीतीश कुमार- बीजेपी नेता

    राजनीति- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन के साथ मुलाकात करते हुए विपक्ष एकता का संदेश दिया। उनकी तस्वीरें जैसी ही सोशल मीडिया पर सामने आईं बीजेपी विपक्ष पर हमलावर हो गई और कौरवों को याद करने लगी। 

    बीजेपी नेता अमित मालवीया ने नीतीश कुमार की राहुल संग मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए कहा- अभी पता नहीं किस-किस के सामने झुकेंगे नीतीश कुमार। बीजेपी नेता खुशबू सुंदर ने उनकी तुलना महाभारत के कौरवों से कर दी।
    बता दें विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहता है। नीतीश कुमार के साथ बैठक में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तेजस्वी यादव, लल्लन सिंह मौजूद रहे हैं।

  • Lokasabha election:- राहुल नहीं तो कौन होगा अमेठी में कांग्रेस प्रत्याशी

    राजनीति– कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि मामले में सूरत कोर्ट ने 2 वर्ष की सजा सुनाई है। उनकी वायनाड से सांसद सदस्यता भी रद्द हो गई है। अब राहुल गांधी आने वाले लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस की ओर से मैदान में ताल भी नहीं ठोक सकते हैं। हालाकि यह मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।

    लेकिन इस बीच यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली अमेठी में अब कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होगा। क्योंकि राहुल तो चुनाव ही नहीं लड़ सकते। राहुल गांधी को साल 2019 में भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन राहुल ने अमेठी के लोगों से अपना जुड़ाव बनाएं रखा।
    सूत्रों का दावा है कि अगर अमेठी से कांग्रेस की ओर से कोई मैदान में उतर सकता है तो वह प्रियंका गांधी, वरुण गांधी, दीपिका सिंह, संजय सिंह में से कोई हो सकता है।

    किस पर विश्वास जताएगी कांग्रेस-

    अगर हम बार प्रियंका गांधी की करें तो यह कांग्रेस की कद्दावर नेता हैं। यह गांधी नेहरू परिवार का सदस्य हैं। उनकी छवि जनता के मध्य इंदिरा गांधी की तरह बनी हुई है। कांग्रेस उनको इंदिरा की परछाईं कहती है।
    प्रियंका गांधी अमेठी की जनता को भली भांति जानती हैं। जनता उनके प्रति सहानुभूति रखती है। वहीं अगर मैदान में वह आती हैं तो जनता का कांग्रेस को अच्छा समर्थन मिल सकता है। उनके अंदाज की जनता कायल है और लोग उनको जमीनी नेता के रूप में जानते हैं।
    प्रियंका गांधी के बाद एक नाम जो सबसे ज्यादा चर्चा में है वह है वरुण गांधी का। वर्तमान समय मे वरुण गांधी पीलीभीत से भाजपा सांसद हैं। हालाकि बीते कई दिनों से यह केंद्र सरकार की आलोचना करते पाए गए हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि वरुण गांधी बीजेपी से संतुष्ट नहीं हैं। अब समय आ गया है जब वह घर वापसी कर सकते हैं।
    इनके अलावा यह भी अटकलें तेज हैं कि वरुण गांधी शायद अब समाजवादी पार्टी का हिस्सा बनें। सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी भी वरुण गांधी को अमेठी से ही मैदान में उतारने की रणनीति बनाएगी।

    कितनी बार कांग्रेस ने जीती अमेठी-

    अमेठी में कांग्रेस का भावनात्मक जुड़ाव है। कांग्रेस को जनता का जबरदस्त समर्थन प्राप्त है। जनता कांग्रेस के प्रति सहानुभूति रखती है। अमेठी में कांग्रेस ने 16 बार अपनी जीत का परचम लहराया है। केवल तीन बार यहां से कांग्रेस को हार का मुख देखना पड़ा।