Category: politics

  • 2022 में भारतीय हेल्थटेक प्लेटफॉर्म में फंडिंग 55 फीसदी घटी

    पिछले साल भारत में हेल्थटेक कंपनियों में कुल फंडिंग 55 फीसदी (साल-दर-साल) घटकर 1.4 अरब डॉलर रह गई, बुधवार को एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई। ग्लोबल एसएएएस-आधारित मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्शन के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 2.4 अरब डॉलर से 2022 में 606 मिलियन डॉलर, यानी 75 प्रतिशत की गिरावट के कारण निवेश में भारी गिरावट आई है। 2022 में सीड-स्टेज फंडिंग भी 52 प्रतिशत घटकर 75.2 मिलियन डॉलर हो गई।

    हालांकि, 2022 में शुरुआती चरण की फंडिंग 26 प्रतिशत बढ़कर 743 मिलियन डॉलर हो गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 के दौरान हीथ टेक कंपनियों द्वारा जुटाए गए कुल फंड का 70.3 फीसदी साल की पहली छमाही में रिकॉर्ड किया गया। आगे कहा गया है, “फंडिंग विंटर, मौजूदा वृहद आर्थिक स्थिति और बढ़ती ब्याज दरों के कारण दुनिया भर के निवेशक अपना पैसा खर्च करने में अधिक सतर्क हो गए हैं। यह प्रवृत्ति भारत में भी हेल्थटेक क्षेत्र में देखी गई है।”

    2021 में 10 की तुलना में 2022 में केवल दो 100 मिलियन डॉलर से अधिक फंडिंग राउंड हुए। डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म मेडीबडी ने क्वाड्रिया कैपिटल, लाइटरॉक इंडिया और अन्य से सीरीज सी फंडिंग राउंड में 125 मिलियन डॉलर जुटाए। उपभोक्ता पोषण मंच हेल्थ कार्ट ए91 पार्टनर्स और अन्य से सीरीज एच राउंड में 135 मिलियन डॉलर जुटाए। ऑनलाइन फार्मेसी टाटा 1एमजी 2022 में यूनिकॉर्न बनने वाला एकमात्र भारतीय हेल्थटेक प्लेटफॉर्म था।

    केडब्ल्यूई बेटिलिगुनजेन एजी, एबीएम हेल्थ केयर इनवेस्टमेंट्स और अन्य की भागीदारी के साथ इसने टाटा डिजिटल के नेतृत्व में एक दौर में 40.8 मिलियन डॉलर जुटाए। इससे कंपनी का मूल्यांकन बढ़कर 1.3 अरब डॉलर हो गया, जिससे टाटा 1एमजी एक यूनिकॉर्न बन गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेलीमेडिसिन सेवा प्रदाता लिटस 2022 में सार्वजनिक होने वाली इस क्षेत्र की एकमात्र कंपनी थी।

    बेंगलुरु और मुंबई में हेल्थटेक कंपनियों ने अब तक का अधिकतम निवेश (3.1 अरब डॉलर प्रत्येक) को आकर्षित किया, जिसके बाद गुरुग्राम (1.1 अरब डॉलर) का स्थान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिकोइया कैपिटल, एक्सेल और चिराटे वेंचर्स हेल्थटेक इंडिया सेगमेंट में अब तक के शीर्ष निवेशक हैं।

  • देश पर शासन करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं राहुल

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उन्हें लगता है कि इस देश पर शासन करना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, राहुल गांधी ने ओबीसी समुदाय का अपमान किया और जब अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, तो उन्होंने कहा कि अदालत ही गलत है। राहुल गांधी सोचते हैं कि इस देश पर शासन करना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।

    उन्होंने आगे कहा, राहुल गांधी हकदारी की राजनीति करते हैं। वह सोचते हैं कि चूंकि वह गांधी परिवार में पैदा हुए, इसलिए वह संविधान, अदालत और संसद से ऊपर हैं। वह यह भी सोचते हैं कि वह भारत के संविधान से ऊपर हैं। जो लोग हम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, उन्हें यह याद करने की कोशिश करनी चाहिए कि कैसे यूपीए सरकार के दौरान देश में संस्थानों को कमजोर करने की साजिश चल रही थी।

    उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंगलवार के बयान को दोहराया। वैष्णव ने कहा, सभी भ्रष्टाचारी एक स्टेज पर आ गए हैं, वे खुश नहीं हैं क्योंकि पीएम मोदी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गरीब लोगों को उनके अकाउंट में हर संभव मदद मिले। यह विपक्ष को मंजूर नहीं, वह भ्रष्टाचार के दिनों में वापस जाना चाहते हैं।

  • क्या बीजेपी के लिए काल बनेंगी ममता बनर्जी

    राजनीति एक ऐसा परिवार जहां कोई किसी का अपना नहीं है। आज जो आपके साथ है हो सकता है कल वही आपके खिलाफ हो। पल-पल यहां साथियों के रंग बदलते हैं। ठिकाने बदलते हैं और परिवार बदलते हैं। आज जो हमें एक विशेष राजनीतिक दल का सबसे विश्वसनीय सदस्य लगता है कल वहीं उस दल पर कटाक्ष करते मिलता है। यह हमारे लोकतंत्र का ही दम है जो राजनेताओं को आजादी से अपना राजनीतिक दल बदलने की आजादी देता है। हां ये सत्य है कि राजनेता अपने स्वार्थ के लिए ऐसा करते हैं। 

    आज की राजनीति को अगर हम देखें तो यह ईमानदारी की छवि गढ़ने और जनता को लुभाने के लिए चलती है। प्रत्येक राजनेता मैदान में जनता को अपने जाल में फांसने के उद्देश्य से उतरता है। कोई जाति के नाम पर जनता को खुद से बंधता है। तो कोई धर्म के नाम पर। कोई स्वार्थ के लिए हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति करता है और मजे से जनता को लड़वाकर अपना वोट-बैंक मजबूत करता है।राजनेताओं का यह व्यवहार तो आम था। कि अब विपक्ष का नया रूप देखने को मिल रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब विपक्ष के नेताओं में एकजुटता का भाव दिखा। 
    राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा शुरू की। राहुल का उद्देश्य था कि वह विपक्ष को एकजुट कर सकें और आगामी चुनाव में विपक्ष एकता का बल दिखे। राहुल गांधी का प्रयास अच्छा था कई राजनीतिक दल राहुल गांधी के साथ आए। लेकिन कई दलों ने राहुल गांधी से दूरी बनाने में अपना भला समझा। लेकिन जब बीते दिन राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हुई तो हड़कंप मच गया। सभी विपक्षी दलों का राहुल गांधी को भरपूर समर्थन मिला। विपक्ष के नेताओं ने इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या बताया।
    वहीं ममता बनर्जी जिन्होंने सागरदिघी विधानसभा में हुए उपचुनाव में मिली हार से नाराज होकर कांग्रेस से दूरी बनाई थी। उनके व्यवहार में राहुल की सदस्यता रद्द होने के बाद कांग्रेस के प्रति नरम रुख देंखने को मिला। ममता बनर्जी ने विपक्ष से बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने की अपील की। ममता बनर्जी ने भेदभाव पूर्ण रवैया के विरोध में आयोजित रैली में कहा 2024 का लोकसभा चुनाव जनता और बीजेपी के मध्य है।
    ममता ने जब आग बबूला होकर कहा कि बीजेपी का अहंकार खत्म करना होगा। अब विपक्ष को एकजुट होना होगा। अब हमको दुशासन से छुटकारा पाना होगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सत्ता से दुशासन को हटाना होगा।
    ममता के इस सख्त रुख पर राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि यह बीजेपी के लिए काल साबित हो सकता है। पश्चिम बंगाल में ममता जनता के ह्रदय में रहती हैं। वह एक शेरनी के रूप में उभरी हैं। अगर विपक्ष एक साथ आया और ममता ने मजबूती के साथ विपक्ष एकता में साथ निभाया तो यह समर्थन बीजेपी के लिए काल बन जाएगा। विपक्ष एकता बीजेपी की शाख हिला देगी।

  • गुजरात में गरजे कांग्रेस- पीएम के गढ़ में राहुल लगाएंगे सेंध

    देश- राहुल गांधी की संसद सदयता रद्द हो गई है। कांग्रेस लगातार बीजेपी पर हमलावर है। गुजरात मे हुए विधानसभा चुनाव में इसबार कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। लेकिन अब गुजरात मे कांग्रेस स्वयं को पुनः स्थापित करने के लिए तैयारी में जुट गई है।

    कांग्रेस गुजरात सरकार की विफलता को जनता के बीच दिखाने के लिए गुजरात में एक महीने के भीतर 300 सम्मेलन करने की तैयारी में है।
    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर कहते हैं- पार्टी दो चरणों मे गुजरात की जनता से सम्पर्क साधने का प्रयास करेगी। 6 से 12 अप्रैल और 15 से 25 अप्रैल तक गुजरात मे कांग्रेस सम्मेलन के जरिये बीजेपी सरकार की नाकामियों का पर्दा फाश करेगी। सूत्रों का दावा है कि इस सम्मेलन में राहुल गांधी को निमंत्रण दिया जाएगा।
    उन्होंने आगे कहा, हम लोकतांत्रिक देश के निवासी हैं। आवेदन करने पर अधिकारियों को विरोध करने की अनुमति देने का प्रावधान है। कांग्रेस स्थानीय पुलिस स्टेशन में विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति का आवेदन करेगी। अब हमको अनुमति मिले या न मिले हम अपने कार्यक्रम स्थगित नहीं करेंगे।

  • कर्नाटक बीजेपी ने मुसलमानों के साथ अन्याय नहीं किया: येदियुरप्पा

    पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य बी.एस. येदियुरप्पा ने गुरुवार को दावा किया कि उनकी पार्टी ने समुदायों के लिए आरक्षण कोटा तय करते हुए राज्य के मुसलमानों के साथ कोई अन्याय नहीं किया है। पत्रकारों को संबोधित करते हुए येदियुरप्पा ने कहा कि 4 प्रतिशत आरक्षण को स्थानांतरित करने से मुस्लिम समुदाय को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, मुसलमानों को ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत लाया गया है। कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।

    येदियुरप्पा ने आगे कहा कि चूंकि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संभव नहीं था, इसलिए उन्हें ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत लाया गया है। केंद्र सरकार गरीब और किसान हितैषी योजनाओं को लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मतभेद हैं तो दूर किया जाएगा। कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा ने हाल ही में पिछली कैबिनेट बैठक के बाद नए आरक्षण कोटा की घोषणा की है। उन्होंने ओबीसी श्रेणी के तहत मुसलमानों के 4 प्रतिशत कोटा को वापस लेकर राज्य के प्रभावशाली समुदायों लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों के कोटा में 2 प्रतिशत की वृद्धि की थी।

    मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने लिनागायत को 7 फीसदी, वोक्कालिगा को 6 फीसदी, एससी (बाएं) को 6 फीसदी, एससी (दाएं) को 5.5 फीसदी, भोवी, बंजारा और अन्य को 1 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की थी। घोषणा के परिणामस्वरूप राज्य भर में हिंसा और विरोध की घटनाएं हुईं। भाजपा ने इसे कांग्रेस का षड्यंत्र और उकसावा करार दिया है राज्य कांग्रेस इकाई ने कहा कि वह सत्ता में आते ही नए आरक्षण कोटे को खत्म कर देगी।

    मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा, धार्मिक अल्पसंख्यकों को सात राज्यों में आरक्षण नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत मुस्लिमों को आरक्षण आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग पिछले 30 वर्षों से लंबित थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने झूठे वादे करने के अलावा कुछ नहीं किया। उन्होंने सोचा था कि बीजेपी के लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा. हमने एक रिपोर्ट प्राप्त करके अपनी प्रतिबद्धता दिखाई, अध्ययन किया, एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया और कानून के अनुसार एक साहसिक निर्णय लिया।

  • अगर सही निकला ओपिनियन पोल तो कर्नाटक में बीजेपी के साथ होगा खेल

    देश- कर्नाटक में चुनाव होने को है। सभी राजनीतिक दल जनता को साधने में जुट गए हैं। अलग-अलग चैनल के ओपिनियन पोल आने शुरू हो गए हैं। लोग खुलकर चुनाव पर चर्चा कर रहे हैं। सर्वे में खुलासा हो रहा है कि लोग वर्तमान की बीजेपी सरकार से नाराज हैं। जनता कर्नाटक में परिवर्तन देखना चाहती है।

    समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के आधार पर अगर बात करें तो राज्य के 17 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो कर्नाटक में पुनः बीजेपी की सरकार नहीं देखना चाहते हैं। वहीं 47 प्रतिशत लोग कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। लोग अब बेरोजगारी, महंगाई, अपराध के मुद्दों पर भी बात कर रहे हैं।
    राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है जब – जब भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमाया है बीजेपी को हार का मुह देखना पड़ा है। झारखंड में जब मुद्दों की बात हुई तो बीजेपी के हाथ से यह राज्य फिसल गया। वहीं अब कर्नाटक की सरकार मुद्दों को उठा रही है। तो संभावना है कि बीजेपी के हाथ से कर्नाटक निकल सकता है।
    सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में 117 सींटो पर इसबार कांग्रेस का कब्जा हो सकता है। इसके साथ ही बीजेपी का हाथ महज 60 से 70 सींटें लगेगी। यदि ओपिनियन पोल का आइडिया सही लगा तो सम्भव है बीजेपी कांग्रेस के हाथ से हार जाएगी।

  • पूर्वोत्तर में 2025 तक पूरी होंगी 1.76 लाख करोड़ रुपये की कनेक्टिविटी परियोजनाएं : अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 1.76 लाख करोड़ रुपये की सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी परियोजनाओं को 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। मिजोरम में 2,500 करोड़ रुपये की 11 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवरस पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट भारत द्वारा म्यांमार में शुरू की गई सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट भारत और म्यांमार द्वारा संयुक्त रूप से भारत के पूर्वी बंदरगाहों से म्यांमार के साथ-साथ म्यांमार के माध्यम से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में कार्गो के शिपमेंट के लिए परिवहन का एक मल्टी-मोडल मोड बनाने के लिए शुरू किया गया था।

    शाह ने कहा कि पीएम-देवाइन (पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधान मंत्री विकास पहल) के तहत बजटीय आवंटन में 276 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पिछले नौ वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में 53 बार दौरा किया, जबकि केंद्रीय मंत्रियों ने क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाने के लिए 432 बार दौरा किया। यह क्षेत्र मोदी सरकार के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न चरमपंथी संगठनों के 8,000 उग्रवादियों के आत्मसमर्पण और विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर के साथ, इस क्षेत्र में हिंसक गतिविधियों में काफी हद तक कमी आई है।

    शाह ने जोखवासंग में असम राइफल्स के नए बटालियन मुख्यालय का उद्घाटन किया, जो आइजोल शहर से 15 किमी दूर है। वहीं गृह मंत्री ने स्मार्ट सिटी परियोजना, आइजोल बाईपास सड़कों और आइजोल, चम्फाई और ममित जिलों के लिए कई सड़क परियोजनाओं सहित कई ढांचागत परियोजनाओं की आधारशिला रखी। उन्होंने राज्य की राजधानी के मध्य में असम राइफल्स मैदान के उत्तरी हिस्से में बनने वाले 193 करोड़ रुपये के लालडेंगा सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला भी रखी।

    अधिकारियों के अनुसार असम राइफल्स, जो म्यांमार के साथ मिजोरम की 510 किलोमीटर की सीमा की रखवाली कर रही है, के आइजोल में दो ठिकाने हैं, पहला जोडिन में और दूसरा खातला में है। जोडिन में बटालियन मुख्यालय को जोखवासंग में स्थानांतरित कर दिया गया है। मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने कहा कि लालडेंगा सांस्कृतिक केंद्र की नींव रखने और असम राइफल्स बटालियन मुख्यालय को स्थानांतरित करने के साथ, विशेष रूप से एमएनएफ और आम तौर पर मिजोरम के लोगों की आकांक्षा एक वास्तविकता बन गई है।

    1990 के दशक की शुरुआत से असम राइफल्स को आइजोल शहर के केंद्र से स्थानांतरित करना एमएनएफ की प्रमुख प्रतिबद्धताओं में से एक रहा है। केंद्रीय अर्धसैनिक बल ने एक झड़प में सात नागरिकों को मार गिराया था। इसके बाद लालडेंगा द्वारा असम राइफल्स को स्थानांतरित करने की मांग पहली बार 1988 में उठाई गई थी। नवंबर 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में एमएनएफ के महत्वपूर्ण वादों में से एक स्थानांतरण भी था। फरवरी 2019 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने असम राइफल्स को उस वर्ष 31 मई तक अपने बटालियन मुख्यालय को जोखवासांग में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। हालांकि, विभिन्न कारणों से इसमें देरी हुई।

  • बिहार जीतेगी बीजेपी, नीतीश को कहा गिरगिट

    राजनीति- बिहार(Bihar) के नालंदा में हुई हिंसा को लेकर राजनीति(politics) तेज हो गई है। विपक्ष बिहार सरकार(Bihar government) पर हमलावर है। वहीं नवादा में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(union minister Amit Saha) ने कहा, साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव(loksabha election) में बीजेपी (BJP)की जीत का बिगुल बजेगा। बीजेपी बिहार(Bihar BJP) की 40 सींटो पर जीत दर्ज करेगी।

    उन्होंने आगे कहा, जनता को मोदी जी का काम दिख रहा है। साल 2024 में जनता का समर्थन से केंद्र में बीजेपी(BJP government) की सरकार बनेगी। वहीं साल 2025 में बिहार की जनता राज्य में बीजेपी की सरकार बनाएगी। हम लोकसभा चुनाव(loksabha election) में बिहार की 40 सींटो पर जीत दर्ज करने जा रहे हैं।
    उन्होंने आगे साराराम का जिक्र किया। मुझे वहां जाना था। लेकिन वहां माहौल खराब है। आगजनी हो रही है गोलियां बरस रहीं हैं। जनता से मैं माफी मांगता हूं। अलगी बार वहां जरूर जाऊंगी। मैंने गवर्नर को फोन किया तो जेडीयू अध्यक्ष ने सवाल उठाए। मैंने उनसे कहा,मैं गृह मंत्री हूँ मैं गवर्नर से बात तो कर सकता हूँ।

    अमित शाह ने नीतीश कुमार पर क्या बोला-

    अमित शाह(Amit Saha) ने कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार(Nitish Kumar) लालू यादव (Lalu Yadav)के खेमे में गए। यह उनका निजी स्वार्थ था। लालू के बेटे को सीएम बनना है और नीतीश कुमार को पीएम। लेकिन अभी वैकेंसी फुल है। पीएम तो मोदी ही बनेंगे। लालू यादव का बेटा सीएम नहीं बन सकता है। हां मैं यह स्पष्ट कर देता हूँ कि नीतीश कुमार और ललन के लिए बीजेपी में कोई जगह नहीं है। अब उनके लिए बीजेपी के सभी दरवाज़े बन्द हैं।
    नीतीश कुमार लोगों के बीच जातिवाद का जहर घोल रहे हैं। लालू के बेटे ने उनको गिरगिट, पलटू कहा था और आज वह उनके ही साथ हैं। बिहार में बीजेपी की सरकार बनेगी। नीतीश ने जनता को धोखा दिया है। नीतीश आज जिस यूपीए के साथ गए हैं। उसकी केंद्र में सरकार रही है। उसने बिहार को क्या दिया है।
    मोदी के नेतृत्व में बिहार का विकास हुआ है। बिहार में आज दंगा हो रहा है जनता से मेरा अनुरोध है कि आप हमारा समर्थन कीजिए और बिहार में बीजेपी की सरकार बनवा दीजिए। हम दंगों को बन्द करवाएंगे। हम कानून व्यवस्था का राज स्थापित करेंगे।

  • कमजोर पड़ने पर बीजेपी दंगे भड़कती और लोगों का ध्रुवीकरण  करती- मल्लिकार्जुन खड़गे

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    कमजोर पड़ने पर बीजेपी दंगे भड़कती और लोगों का ध्रुवीकरण  करती- मल्लिकार्जुन खड़गे

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    बीजेपी की नीति हिंसा को बढ़ाना।

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    बिहार हिंसा पर खड़गे ने किया कटाक्ष।

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    संजय राउत -बंगाल में हो रही हिंसा योजनाबद्ध, प्रायोजित और बीजेपी की लक्षित

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    जेपी को अपने नुकसान का डर है या जहां बीजेपी सरकार कमजोर है वहां दंगे होते

  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने रणदीप सुरजेवाला के ‘420 बोम्मई सरकार’ वाले बयान पर किया पलटवार

     कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सोमवार को राज्य कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला पर आरक्षण पर उनकी 420 बोम्मई सरकार टिप्पणी को लेकर पलटवार किया। सीएम ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस नेताओं ने आरक्षण देने के लिए ‘अवैध’ और ‘संवैधानिक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है. सीएम बोम्मई ने आरक्षण पर एआईसीसी महासचिव और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने संविधान में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान किया था। तदनुसार, राज्य सरकार ने एससी / एसटी समुदायों की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश की।

    उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर या उनके द्वारा लिखित संविधान पर भरोसा नहीं है। सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर कहा था, बीजेपी अब जनता पार्टी के साथ विश्वासघात कर रही है। सीएम बोम्मई ने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान एससी/एसटी समुदायों के लिए कुछ नहीं किया और उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। वे झूठ बोल रहे हैं कि जस्टिस नागमोहन दास आयोग की रिपोर्ट चार साल पहले सौंपी गई थी। सच्चाई यह है कि बीएस येदियुरप्पा सरकार द्वारा आयोग को छह महीने का विस्तार दिया गया था।

    मेरे शासन के दौरान, एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई और सहमति ली गई। बाद में, राज्य मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदायों के पक्ष में निर्णय लिया गया। सरकार ने इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने का आदेश जारी किया।कांग्रेस पर यह आरोप लगाने के लिए कि भाजपा सामाजिक न्याय का पालन नहीं कर रही है, बोम्मई ने कांग्रेस पार्टी को दलित, पिछड़े, लिंगायत और वोक्कालिगा विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा, यह भाजपा सरकार थी जिसने सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया। कांग्रेस नेता के सत्ता में आने पर आरक्षण आदेश वापस लेने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने का सवाल ही नहीं उठता। उनके पास ऐसा करने की ताकत या अवसर नहीं है। इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कामों को देखकर कांग्रेस नेता हिल गए हैं।