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  • क्यों गरीब की भूख बनी राजनीति का सबसे बड़ा हथियार

    देश– केंद्र सरकार गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों को गरीब कल्याण योजना के तहत मुफ्त राशन मुहैया करवाती है। बीते दिनों में इस योजना की अवधि एक वर्ष बढ़ा दी गई। इस योजना के तहत हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलो राशन मुफ्त दिया जाता है। आज देश के करीब 81.35 करोड़ लोग केंद्र की इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

    इस योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने कोरोना काल के दौरान की थी। क्योंकि उस वक्त लोग बेरोजगार हो गए थे। प्रतिबंध के कारण उनके पास रोजगार नहीं था और केंद्र सरकार का लक्ष्य था कि कोई भी भूखा न सोए। लेकिन अब जब कोविड खत्म हो गया है और सभी प्रतिबंध हट गए हैं। तब भी इस योजना के तहत लोगों को राशन दिया जा रहा है। जो अब सवालों के घेरे में है। 
    विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार लोगों को मुफ्तखोरी की आदत लगा रही है और रोजगार से बचने के लिए उन्हें मुफ्त राशन देखर अपना गुलाम बना रही है। वहीं कई लोगों का दावा है कि सरकार ने योजना की अवधि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के परिपेक्ष्य में बढाई है।
    विपक्ष का कहना है कि देश मे 20 करोड़ लोग ही गरीबी रेखा के नीचे हैं तो फिर 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन देना। केंद्र सरकार का राजनीतिक स्वार्थ है। सरकार शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी चीजों के मध्य कटौती करने लोगों को मुफ्त राशन बांट रही है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

    क्या है मुफ्तखोरी की सियासत-

    भारत सबसे बड़े लोकतंत्र वाला देश है। भारत के लोग स्वतंत्र हैं उनके पास अपना जीवन अपने मुताबिक जीने का अधिकार है। लेकिन भारत की राजनीति सदैव गरीबों के इर्द गिर्द घूमती नजर आई है। राजनेता कितना भी समाज सेवी हो उसने अपने स्वार्थ के लिए गरीब की भूख को अपना निशाना बनाया है।
    इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ के बलबूते पर जनता का दिल जीतकर कई वर्षों तक देश पर राज किया। वहीं अब बीजेपी सरकार ने भी गरीबों की भूख को अपना हथियार बनाया। कोविड काल को सरकार ने कहीं न कहीं अपने स्वार्थ के लिए उपयोग किया और लोगों को मुफ्त राशन मुहैया करवाकर उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
    अब आज स्थिति यह है कि कोरोना से निजात मिल गया। लोग अपने काम पर वापस चले गए हैं। लेकिन गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों को सरकार द्वारा मुफ्त राशन निरंतर मुहैया करवाया जा रहा है। राशन देने की अवधि बढाकर अब सरकार कहीं न कहीं इसके बलबूते पर अपना राजनीतिक स्वार्थ भी साध रही है और लोगों को आकर्षित भी कर रही है।

  • ठाकरे ने चुनाव आयोग को खत्म करने की मांग की, 2024 के बाद अराजकता की चेतावनी दी

    शिवसेना-यूबीटी के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को एक चौंकाने वाले बयान में कहा कि पार्टी के नाम-चिन्ह पर चुनाव आयोग का फैसला ‘अस्वीकार्य’ है और मांग की कि चुनाव आयोग को ‘भंग’ कर देना चाहिए। मीडिया कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने चुनाव आयोग के पिछले शुक्रवार के फैसले को ”गलत” करार दिया और कहा कि उनकी पार्टी ने 2024 के बाद देश में ”तानाशाही” की आशंका जताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ठाकरे ने कहा- इस तरह के अलोकतांत्रिक निर्णय धन बल के आधार पर नहीं किए जा सकते..यह असंवैधानिक फैसला है। हम मांग करते हैं कि ईसीआई को भंग कर दिया जाए, जजों की तरह एक निष्पक्ष चुनाव आयोग का चुनाव किया जाए और तब तक इसका काम सुप्रीम कोर्ट ही देखे। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति की तर्ज पर उचित प्रक्रिया के साथ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की आवश्यकता की मांग की।

    ठाकरे ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2024 का चुनाव देश में आखिरी हो सकता है और उसके बाद अराजकता शुरू हो जाएगी, और सभी दलों से सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने नए राजनीतिक घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी की शिवसेना को व्यवस्थित रूप से नष्ट करने की रणनीति करार दिया। पिछले शुक्रवार को, चुनाव आयोग ने सीएम शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना घोषित किया था और इसे मूल पार्टी का नाम शिवसेना और धनुष-तीर का चुनाव चिन्ह दिया था, जिसके बाद ठाकरे पक्ष का विरोध भड़क उठा। मामले में जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए, ठाकरे ने कहा कि उनके समूह ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि निलंबित विधायकों का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने तक अपना फैसला टाल दिया जाए।

    उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग यही चुनना था कि विधायी ताकत के आधार पर पार्टी का नाम-चिन्ह किसे मिलेगा, तो उन्होंने हलफनामा, प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज क्यों मांगे, जिसके लिए हमने लाखों रुपये खर्च किए। उन्हें मामले में घटनाओं की श्रृंखला की समयरेखा को ध्यान में रखना चाहिए था। ठाकरे ने कहा- हमसे सब कुछ चुरा लिया गया है..हमारी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह, यहां तक कि ‘ज्वलंत मशाल’ का (अस्थायी) प्रतीक भी छीन लिया जा सकता है, लेकिन वह ठाकरे का नाम नहीं चुरा सकते। हमने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और मामला कल (21 फरवरी) को आएगा।

    चुनाव आयोग के आदेश के बाद, नाराज शिवसेना-यूबीटी के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि पार्टी के नाम-चिन्ह को हड़पने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई और आने वाले दिनों में इस पर और खुलासा करने की धमकी दी है। ठाकरे ने अपने शीर्ष नेताओं और जिला पार्टी प्रमुखों के साथ भविष्य की कार्रवाई, महाराष्ट्र विधानमंडल के आगामी बजट सत्र, सुप्रीम कोर्ट में आने वाले मामलों आदि पर चर्चा की, यहां तक कि उनकी पार्टी इकाइयों ने चुनाव आयोग के खिलाफ राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया।

  • गठबंधन में भय:- कांग्रेस को तलाश साथ की, विपक्ष को शंका हार की

    राजनीति– 135 साल पुरानी राजनीतिक पार्टी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। हर ओर से कांग्रेस को नकारा जा रहा है। लेकिन इस सबके बाद भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हौसले बुलंद हैं। भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी ने जनता के बीच जाकर कांग्रेस को स्थापित करने का प्रयास किया और अपनी छवि जमीनी नेता के रूप में विकसित की।

    कांग्रेस ने विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास किया। कई बड़े दलों को भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ने का न्योता दिया। लेकिन सपा, बसपा, रालोद नेता इसमें नहीं शामिल हुए। लेकिन इन नेताओं ने राहुल गांधी को शुभकामनाएं दीं। वहीं अब जब लोकसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है तो कांग्रेस अपना राजनीतिक तानाबाना बनने में लग गई है।
    सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बलबूते भाजपा को टक्कर देने की योजना बना रहे हैं। कांग्रेस को इस वक्त एक ऐसे गठबंधन की तलाश है जो न सिर्फ केंद्र से बीजेपी को उखाड़ फेंके। बल्कि कांग्रेस के लिये भी संजीवनी बूंटी साबित हो। लेकिन अभी तक इस कड़ी में कोई सफलता मिलती नजर नहीं आ रही है।

    क्या है एकता का सूत्र-

    विपक्ष एकता की बात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि कांग्रेस जल्द ही अपना निर्णय ले और हमसे आकर मिले। क्योंकि अब वक्त कम है और बिहार सरकार बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने का संकल्प ले चुकी है।
    नीतीश कुमार ने यह भी दावा किया है कि अगर विपक्ष एक हो गया तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी महज 100 सीटों पर सिमट जाएगी और 2024 में केंद्र में परिवर्तन का बिगुल बजेगा।
    वहीं अगर हम यूपी की बात करें। तो उत्तरप्रदेश का विपक्ष कांग्रेस से हाथ मिलाने में भय महसूस कर रहा है। क्योंकि बीते विधानसभा चुनाव में जब सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के विरोध में जाकर अखिलेश यादव ने कांग्रेस से हाथ मिलाया और रातों रात यूपी की सड़कों पर कांग्रेस और सपा के प्यार के पोस्टर चमकने लगे। 
    लेकिन जनता को यह बात हजम नहीं हुई और इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 311 विधानसभा सीटों पर जबकि कांग्रेस ने 114 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। 311 सीटों में समाजवादी पार्टी को महज 47 सीटें मिलीं और कांग्रेस को सिर्फ सात सीट मिल सकी।
    सपा के मन मे भय है कि अगर वह कांग्रेस के साथ जाते हैं तो हो सकता है इससे उनका अपना वोट बैंक प्रभावित हो और लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का सपना टूट जाए। 

    गठबंधन में भय-

    कांग्रेस की स्थिति उत्तरी भारत मे बेहतर नहीं है। जनता के बीच इंदिरा गांधी की सकारात्मक छवि बनी हुई है। ललेकिन कांग्रेस को लोग ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं जिसे जनता से अस्वीकार कर दिया है। 
    राहुल गांधी भले ही भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से आज जनता के नेता बनकर उभरे हैं और उनके भाषणों की जमकर चर्चाएं हो रही हैं। लेकिन इस सबके बाद भी उत्तर भारत में कांग्रेस का वोट बैंक मजबूत नहीं है।
    हां अगर हम कांग्रेस की स्थिति दक्षिण भारत में देखें तो वहाँ बेहतर है। क्योंकि दक्षिण भारत मे आज भी भाजपा सत्ता के लिए संघर्ष कर रही है और लोग कांग्रेस पर विश्वास जता रहे हैं। 
    हालाकि उत्तरभारत में विपक्ष कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से भयभीत है। क्योंकि विपक्ष को लगता है कि अगर उन्होंने कांग्रेस से हाथ मिलाया तो हो सकता है जनता में उनके जो समर्थक हैं। वह उनका हाथ छोड़ दें। लेकिन विपक्ष यह भी जनता है कि अगर कांग्रेस से वह मिलकर चलता है तो दक्षिण भारत में कांग्रेस को जो समर्थन मिल रहा है उसके बलबूते पर वह केंद्र में यूपीए को स्थापित कर सकता है और एनडीए की शाक हिला सकता है।

  • भाजपा सरकार ने पूरे सिस्टम को तानाशाही में बदल दिया : अखिलेश

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने पूरे सिस्टम को तानाशाही में बदल दिया है। अखिलेश यादव आज यहां अपने एक बयान में कहा कि भाजपा सरकार ने पूरे सिस्टम को तानाशाही में बदल दिया है। जनता के मुद्दों को लेकर धरना प्रदर्शन, आवाज उठाना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। उसकी कवरेज करना मीडिया और पत्रकारों का दायित्व है।

    मीडिया बन्धु विधान भवन पर आज जब विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान अपने दायित्वों का निवर्हन कर रहे थे, मीडिया कर्मियों के साथ मारपीट और अभद्रता की गई जो लोकतंत्र में निन्दनीय है। मीडिया कर्मियों के कैमरे तोड़े गए तथा उन्हें लातघूंसे मारे गए। क्या यही भाजपा का लोकतंत्र है। भाजपा लोकतंत्र को नहीं मानती है। वह जनता व मीडिया के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। भाजपा सरकार अपनी कमियां देखना और सुनना नहीं चाहती है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी दूसरे प्रदेश से आए हैं वे उत्तर प्रदेश की जनता का दु:ख दर्द नहीं समझते हैं। भाजपा सरकार ने बहुत सपने दिखाए लेकिन इन्वेस्टर्स समिट से प्रदेश को कुछ नहीं मिलने वाला है। बुलडोजर वाली सरकार से ऐसी उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।

    सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा की सरकार ने किसान, नौजवान और व्यापारी को बर्बाद कर दिया है। महंगाई, बेरोजगारी चरम पर है। कानून व्यवस्था ध्वस्त है। भाजपा सरकार जातीय जनगणना नहीं करवा रही है। सड़क से लेकर सदन तक भाजपा के बुलडोजर का विरोध जारी रहेगा।

  • लोकसभा चुनाव में यूपी-बिहार उड़ाएंगे गर्दा, यूपीए को मिलेगा जबरदस्त फायदा

    Loksabha election 2024:- साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने को है। चुनाव में अभी पूरा एक वर्ष बचा हुआ है। सत्ताधारी दल भाजपा पुनः सत्ता में वापसी के लिए अपना तानाबाना बुनने में लग गई है। वहीं विपक्ष 2024 के चुनाव में भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए व्याकुल है।

    एक तरफ एनडीए है तो एक तरफ यूपीए। एनडीए को विश्वास है कि जनता के समर्थन से 2024 में पुनः पूर्ण बहुमत से वह सत्ता में आएंगे। वहीं यूपीए को विश्वास है कि जनता एनडीए की नीतियों से परिचित हैं और इसबार केंद्र में परिवर्तन होगा। लेकिन इस परिवर्तन में अगर कोई राज्य सबसे अमुख भूमिका निभाएगा तो वह होगा यूपी और बिहार।

    जानें लोकसभा चुनाव में यूपी-बिहार क्यों हैं महत्वपूर्ण:-

    केंद्र में किसका राज्याभिषेक होगा यह यूपी बिहार से तय होता है। क्योंकि यूपी में 80 संसदीय सीटे हैं। वहीं बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर चुनाव होता है। लेकिन एनडीए के लिए चिंताजनक यह है कि इन दोनों राज्यों में यूपीए की बढ़त दिख रही है। सर्वे के मुताबिक साल 2024 के चुनाव में यूपीए की 25 गुना अधिक बढ़त हो सकती है।
    सर्वे के मुताबिक- बिहार में यूपीए को 47 फीसदी समर्थन मिल रहा है। सबसे ज्यादा लाभ नीतीश कुमार को होता दिख रहा है। महागठबंधन की ओर लोगों का झुकाव अधिक है। दावा भले यह किया जा रहा है कि 2024 में भाजपा वापसी करेगी। लेकिन यूपीए को कमजोर समझना आसान नहीं है। क्योंकि यूपीए काफी मजबूती के साथ उभर रहा है और हो सकता है कि साल 2024 में बीजेपी को यूपीए के सम्मुख घुटने टेकने पड़ जाएं।

  • नागा शांति वार्ता होगी सफल : अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने नागा शांति वार्ता जारी रखी है और यह सफल होगी। नगालैंड के तुएनसांग सदर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने नागालैंड में शांति और विकास दोनों को आगे बढ़ाया है।

    उन्होंने सभा को बताया, नागा शांति वार्ता चल रही है। पीएम मोदी ने जो शुरू किया है वह सफल होगा और आने वाले दिनों में नागा संस्कृति, भाषा, पहनावा, परंपरा और इतिहास को संरक्षित और विकसित किया जाएगा। गृह मंत्री ने ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) द्वारा मतदान बहिष्कार (27 फरवरी) को वापस लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ईएनपीओ के सभी मुद्दों पर चर्चा की गई है और विधानसभा चुनाव के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

    शाह ने कहा, विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता के कारण, समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया जा सका। 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय नागा लोगों के अधिकारों और विकास को सुनिश्चित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। प्रभावशाली नागा निकाय ईएनपीओ ने 4 फरवरी को गृह मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद अलग ‘फ्रंटियर नागालैंड’ राज्य की अपनी मांग के समर्थन में 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने के अपने आह्वान को वापस ले लिया।

    गृह मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम (एएफएसपीए) को नागालैंड के सात जिलों के 15 पुलिस थाना क्षेत्रों से वापस ले लिया गया है, और तीन से चार साल के भीतर पूरे नागालैंड से एएफएसपीए को वापस ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जैसा कि मोदी सरकार ने कई आतंकवादी संगठनों के साथ शांति समझौते सहित कई काम किए हैं, पिछले आठ वर्षों के दौरान पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में चरमपंथी हिंसा की घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई है।

    शाह ने कहा कि आठ साल में नागरिकों की हत्या में 83 प्रतिशत की कमी आई। उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने 50 से अधिक बार पूर्वोत्तर का दौरा किया और क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाई पर पहुंचाया। 75 साल में पहली बार किसी गरीब आदिवासी महिला के भारत की राष्ट्रपति बनने का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 से पहले आदिवासी क्षेत्रों और आदिवासी लोगों के विकास के लिए केंद्रीय बजट 21,000 करोड़ रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर 86,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

    गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के दूरस्थ और दूर-दराज के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए 130 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए उपग्रह आधारित सर्वेक्षण और निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2015 से, 53 बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 142 ऐसी परियोजनाएं अब नागालैंड में पाइपलाइन में हैं, नागालैंड के 14 लाख लोगों को प्रति माह 5 किलो चावल मुफ्त मिल रहा है।

    गृह मंत्री ने आवास, जल आपूर्ति, किसानों को नकद हस्तांतरण और स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने में केंद्र की मदद पर भी प्रकाश डाला। गृह मंत्री ने सोमवार को नगालैंड के मोन कस्बे में एक चुनावी रैली को संबोधित किया और मोन कस्बे में रात बिताई। शाह ने म्यांमार की सीमा से सटे मोन जिले में अपने प्रवास के दौरान ईएनपीओ और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

  • राहुल गांधी के नेता बनने के बाद से गिरता जा रहा है कांग्रेस नेताओं का स्तर – अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा की घोर निंदा करते हुए कहा है कि जबसे राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के नेता बने हैं, तबसे कांग्रेस पार्टी के नेताओं का स्तर दिन-प्रतिदिन नीचे गिरता चला गया है।

    नागालैंड में एक चुनावी रैली को संबोधित हुए पवन खेड़ा के बयान को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस को पूरे देश के अंदर कहीं सफलता नहीं मिल रही है और कांग्रेस के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया है वह राहुल गांधी की भाषा के अनुकूल है।

    शाह ने 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव में भी कांग्रेस की करारी हार की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि 2019 में भी पीएम मोदी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था और इसका नतीजा यह रहा है कि कांग्रेस को लोक सभा में विपक्ष का दर्जा भी नहीं मिल पाया। उन्होंने आगे कहा कि अब जिस प्रकार की भाषा प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस्तेमाल की गई है, जनता इसे देख चुकी है। देश की जनता इसका हिसाब बैलेट बॉक्स के माध्यम से करेगी और 2024 में कांग्रेस पार्टी दूरबीन से भी ढूंढने पर नहीं मिलेगी।

  • कुमार विश्वास की आरएसएस पर की गई टिप्पणी से सियासी बवाल

    मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में इन दिनों कवि कुमार विश्वास की राम कथा चल रही है, इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जोड़ते हुए एक ²ष्टांत सुनाया, जिस पर राज्य में सियासी बवाल हो गया है। कुमार विश्वास ने राम कथा के दौरान एक घटनाक्रम का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके दफ्तर में एक बालक काम करता है और उससे उन्होंने पढ़ने लिखने की बात की, और वह बालक आरएसएस से जुड़ा हुआ है। चार-पांच साल पहले बजट आने वाला था, तब उसने सवाल किया बजट कैसा आना चाहिए, तो मैंने कहा कि रामराज्य जैसा आना चाहिए, उस पर बालक ने कहा कि रामराज्य में बजट कहां होता था, तो उससे मैंने कहा कि तुम्हारी समस्या तो यही है कि वामपंथी कुपढ़ है और तुम अनपढ़ हो।

    कुमार विश्वास की यह बात सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा की ओर से तल्ख बयान दिया गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा हितेष बाजपेई ने ट्वीट कर कहा है, क्या इस रंगे सियार (कुम्हार विषवास) की पिटाई होनी चाहिए न? साथ ही आमजन से हां और लपक कर, दो विकल्प देकर राय मांगी गई है।

    वहीं कुमार विश्वास ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि उन्हें किस तरह से धमकियां भी मिल रही हैं, इस बयान के बाद। इसको लेकर कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अजय सिंह यादव ने कहा है कि कुमार विश्वास बुद्धिमान व्यक्ति हैं और उन्होंने जो बात कही है वह सोच समझकर ही कही है, मगर वर्तमान दौर की राजनीतिक में भाजपा और आरएसएस को लेकर सच बोलना पर धमकी जबाव में मिलती है।

  • खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने पर जयराम रमेश ने कहा- ‘टाइगर जिंदा है’

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश(CONGRESS leader jayram ramesh) ने पार्टी नेता पवन खेड़ा(Congress leader Pawan Khera) को राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट(supreme court) को धन्यवाद दिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट(suprem court) ने दिखा दिया है कि ‘टाइगर जिंदा(tiger zinda hai) है’। यह दावा करते हुए कि उत्तर प्रदेश और असम में खेड़ा के खिलाफ कई प्राथमिकी(Assam police arrested pawan khera) हैं, रमेश ने कहा कि जिग्नेश मेवाणी(jiggnesh mewani)के साथ भी ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस(indian national congress) पार्टी एफआईआर से विचलित नहीं होगी और अडानी का मुद्दा उठाती रहेगी।

    17 फरवरी को अडानी-हिंडनबर्ग(adani hindanburg report) को लेकर प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(prime minister narendra modi) के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता खेड़ा(congress leader pawan khera) के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गईं। सुप्रीम कोर्ट(suprem court) ने गुरुवार को खेड़ा को अंतरिम जमानत पर रिहा करने की इजाजत दे दी(Supreme Court on Thursday ordered the grant of interim bail to Congress leader Pawan Khera till February 28 )। हालांकि, शीर्ष अदालत(SC) ने कहा कि खेड़ा(PAWAN KHERA) द्वारा दायर याचिका एफआईआर(FIR) को रद्द करने के लिए नहीं थी, बल्कि एफआईआर(FIR) को एक साथ करने के लिए है, क्योंकि सभी एफआईआर(FIR) का समाधान एक ही है। अदालत ने खेड़ा के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को ट्रांसफर और क्लब करने का भी आदेश दिया।

  • नहीं बचेगा सपा का नाम, स्वामी प्रसाद मौर्या ठोकने आए हैं आखिरी कील

    उत्तरप्रदेश:- उत्तरप्रदेश में धार्मिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सपा नेता स्वामी प्रसाद पर बीजेपी हमलावर है। वहीं अब बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने सपा नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा- यह समाजवादी पार्टी में आखिरी कील ठोकने आए हैं। आगामी समय मे समाजवादी पार्टी का नाम और निशान नहीं बचेगा। यह उन्होंने आगरा में आयोजित एक निजी कार्यक्रम के दौरान कही है।

    उन्होंने आगे कहा, अखिलेश यादव से मैं प्रेम करता हूँ। वह पढ़े लिखे बालक हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। लेकिन कुछ लोग उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर देंगे। अब यह निर्णय अखिलेश यादव को लेना है कि वह राम चरित मानस के परिपेक्ष्य में कितना राजनीतिक नुकसान उठाएंगे। मैं उन्हें सलाह नहीं दूंगा। लेकिन मुलायम सिंह यादव ने कहा था साक्षी जी महाराज की बात को नजरअंदाज मत करना।