Category: politics

  • अगर मुझसे स्वयं नीतीश कुमार आकर कहें तब भी मैं जेडीयू नहीं छोडूंगा- उपेंद्र कुशवाहा

    राजनीति- जेडीयू में नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के बीच घमासान जारी है। सुबह से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह पार्टी छोड़ने वाले हैं। लेकिन मीडियाकर्मियों से बातचीत करने के बाद उन्होंने यह साफ किया कि अभी वह ऐसा कुछ नही करने वाले हैं।
    उन्होंने कहा, यदि मुझसे नीतीश कुमार आकर स्वयं यह कह देंगे कि तुम जेडीयू छोड़ दो। तो भी मैं पार्टी नहीं छोडूंगा। मैं अभी दुखी हूं पार्टी के हालत देखकर। बीते कई दिनों से मेरे बारे में कई तरह की बातें हो रही हैं। दुख इस बात का है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इन सभी बातों को बढ़ावा दे रहे हैं। 
    लोग कह रहे हैं कि मेरी आरजेडी के साथ डील हुई है। मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बस यही सलाह देना चाहूंगा कि उन्हें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि कौन उनका अपना है और कौन पराया।

  • क्यों मुलायम सिंह यादव को लेकर बदल गए बीजेपी के तेवर

    देश – भाजपा ने जब राम मंदिर आंदोलन शुरू किया तो यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। उन्होंने इस अभियान का जमकर विरोध किया। इस बात से बीजेपी तिलमिला उठी। बीजेपी ने मुलायम सिंह यादव को मुल्ला मुलायम सिंह कहना शुरू कर दिया। यह सिलसिला कई साल तक चला। वहीं साल 2022 के चुनाव में अचानक से बीजेपी ने पुनः कारसेवकों पर चली गोलियों के लिए सपा को निशाना बनाया।
    लेकिन जब बीजेपी केंद्र में पहुंची और राम मंदिर निर्माण का फैसला आ गया। तो मुलायम सिंह यादव के प्रति बीजेपी दयालुता का भाव रखने लगी और उन्हें सम्मान की नजर से देखने लगी। धीरे धीरे बीजेपी ने अपना विस्तार ओबीसी वोट की करना शुरु किया। 
    वहीं साल 2019 के लोकसभा में जब मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे और उन्होंने घोषणा कि यह उनका अंतिम चुनाव होगा। तो बीजेपी ने उनके सम्मान में मैनपुरी से अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। 
    वहीं जब मुलायम सिंह यादव का निधन हुआ तो उनके सम्मान में यूपी में योगी आदित्यनाथ ने राजकीय शोक घोषित किया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अमित शाह उनसे मिलने अस्पताल गए। योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेताओं ने सपा सुप्रीमो को श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
    इसके साथ ही बीजेपी सरकार ने मुलायम सिंह यादव को देश के दूसरे सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सभी बातें यह इशारा कर रही हैं कि अब बीजेपी ओबीसी वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद में जुटी हुई है। हालाकि अभी बीजेपी के लिए यह करना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि बीते नवंबर में जब मैनपुरी में उप चुनाव हुआ तो सपा प्रत्याशी और मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव की जबरदस्त जीत हुई।

  • परीक्षा पर चर्चा में बोले पीएम हार्ड और स्मार्ट वर्क का अंतर समझें

    देश- देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज युवाओं और अभिभावकों के साथ परीक्षा पर चर्चा कर रहे हैं। इस चर्चा में कला उत्सव प्रतियोगिता के करीब 80 विजयता समेत 120 छात्र और शिक्षक शामिल हुए हैं।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों के मन से बोर्ड परीक्षा का भय खत्म कर उन्हें ध्यान केंद्रित कर अपने लक्ष्य को कैसे साधना है। यह बता रहे हैं।
    जानकारी के लिए बता दें यह कार्यक्रम नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सुबह 11 बजे शुरू हो गया है. इस कार्यक्रम का शिक्षा मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य द्वारा ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीधा प्रसारण किया जा रहा है।
    इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट education.gov.in पर इन सभी लाइव ब्रॉडकास्ट के लिंक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा के दौरान यह भी कहा कि आज हम जिन लोगों को सफल देख रहे हैं। वह सामान्य से इतने लोकप्रिय हुए और आज हमारी प्रेरणा बन गए हैं। वहीं आप हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क की विधि को समझे और स्मार्ट हार्ड वर्क को अपनाए। यही सफलता की सीढ़ी है।

  • स्वामी प्रसाद मौर्या को मिलना चाहिए राम चरित मानस के अपमान का पुरस्कार

    उत्तरप्रदेश- हिंदूओ के प्रमुख धार्मिक ग्रंथ राम चरित मानस पर टिप्पणी करने बाद स्वामी प्रसाद मौर्या विवादों में घिरे हुए हैं। वहीं अब समाजवादी पार्टी ने अपनी कार्यकारणी की घोषणा करते हुए उनका कद बढ़ा दिया है। उन्हें समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है।
    समाजवादी पार्टी के इस एलान के बाद बीजेपी उनपर भड़क उठी है। बीजेपी का कहना है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्या के बयान पर मौन सहमति दे दी है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, स्वामी प्रसाद मौर्या को राम चरित मानस का अपमान करने के परिपेक्ष्य में पुरस्कार मिलना चाहिए।
    उन्होंने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया है कि यह दल उत्तरप्रदेश में सामाजिक तनाव उत्पन्न करना चाहती है और लोगों को जाति के नाम पर बांटने का काम कर रही है। लेकिन यह कभी भी अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सकते हैं। उनके इस कृत्य से अखिलेश यादव का हिन्दू विरोधी चेहरा सभी के सामने खुलकर आ गया है।

  • Budget 2023:- बजट पर बोले केजरीवाल दिल्ली वालों के साथ हुआ सौतेला व्यवहार

    Budget 2023:- बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम आदमी को काफी राहत दी। वहीं बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, बजट में दिल्ली के लोगों के साथ अन्याय हुआ है।
    वह आगे बोले बजट में महंगाई से राहत के परिपेक्ष्य में कोई बात नहीं की गई। न बेरोजगारी पर कोई जिक्र हुआ। शिक्षा बजट घटाकर 2.64 % से 2.5 % और स्वास्थ्य बजट घटाकर 2.2 % से 1.98 % हो गया है। जो वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है।
    यह बजट दिल्ली वालों के साथ सौतेले व्यवहार को दर्शाता है। दिल्ली वालों ने पिछले साल 1.75 लाख करोड़ से ज़्यादा इनकम टैक्स दिया। उस में से मात्र 325 करोड़ रुपये दिल्ली के विकास के लिए दिये। ये तो दिल्ली वालों के साथ घोर अन्याय है।

  • सिर्फ यात्रा नहीं कांग्रेस को मजबूत करना होगा अपना वोट बैंक

    राजनीति:- रामचंद्र गुहा ने कहा है कि भारत को स्वस्थ लोकतंत्र की आवश्यकता है। इसे जीवित रखने के लिए कांग्रेस का जीवित रहना आवश्यक है। इसके लिए कांग्रेस को सिर्फ भारत जोड़ो यात्रा करने की आवश्यकता है बल्कि अब अपना वोट बैंक भी मजबूत करने की जरूरत है।
    रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक इंडिया आफ्टर गांधी के तीसरे संस्करण के विमोचन में कहा, स्वस्थ लोकतंत्र वह है जिसमे कोई एक पार्टी विपक्ष को न चलाए। जैसा भारत 1970 के दशक से 2014 तक देखा है। भारत को मजबूत करने के लिए कांग्रेस को पुर्नजीवित करना आवश्यक है। यह भारत के भविष्य के लिए बेहतर होगा।
    अगर हम साल 2024 के लोकसभा चुनाव को याद करें तो अन्य सभी दलों के बीच वह कांग्रेस ही थी जिसने 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 191 सीट पर आमने-सामने टक्कर दी थी। वहीं साल 2024 में भी यही होगा।

  • क्यों सफल होकर भी असफल रहा गई भारत जोड़ो यात्रा

    देश- कल 30 जनवरी के दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी भारत जोड़ो यात्रा समापन हुआ। यात्रा के समापन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का अनोखा रूप देखने को मिला। लेकिन बीते पांच महिनों के संघर्ष के बाद भी कांग्रेस इस यात्रा के माध्यम से विपक्ष एकता को नहीं दिखा पाई।
    कल समापन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 21 राजनीतिक दलों को निमंत्रण दिया था। लेकिन इस समापन समारोह में महज 9 राजनीतिक दल शामिल हुए यह काफी निराशाजनक रहा। क्योंकि कांग्रेस को यह उम्मीद थी कि अगर उन दलों के कर्ताधर्ता पार्टी में शामिल नहीं हुए तो वह अपने प्रतिनिधियों को समापन समारोह में भेजेंगे।
    वहीं इस समापन समारोह के बाद नीतीश कुमार चर्चा में आ गए हैं। क्योंकि वह बार बार विपक्ष एकता की बात करते दिख रहे हैं। लेकिन उनके दल से कोई भी इस यात्रा का हिस्सा नहीं बना। जानकारी के लिए बता दें कई राजनेता इस यात्रा के समापन समारोह में सुरक्षा के मद्देनजर नहीं शामिल हुए। वहीं कुछ लोग राजनीतिक हित हेतु यात्रा का हिस्सा नहीं बनें।

  • भारत जोड़ो यात्रा कितनी सफल रही

    देश- कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी को समाप्त हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत जोड़ो यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 21 विपक्षी दलों को निमंत्रण दिया लेकिन इस समापन समारोह में महज 11 दल के लोग शामिल हुए। विपक्षियों का कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आपने लक्ष्य को साधने में असफल रही है।
    बीजेपी का दावा है कि यह यात्रा वविपक्ष को एकजुट करने के उद्देश्य से शुरू हुई थी। लेकिन अंतिम समय मे विपक्ष ने राहुल का साथ नहीं दिया और यात्रा का मक़सद अधूरा रह गया। लेकिन इन सभी दावों के बीच राहुल गांधी ने कहा है कि, विपक्ष आज साथ नहीं दिखा। 
    लेकिन सिर्फ इस बात से यह आंक लेना कि विपक्ष एकजुट नहीं है यह गलत है। क्योंकि कोई भी साथ कब आता है जब उनके बीच संवाद होता है। विपक्ष एकजुट है और वह एकसाथ आएंगे।
    राहुल गांधी ने बार बार इस यात्रा के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी और आरएसएस नफरती विचारधारा के लोग हैं। यह भारत को बांटने का काम करते हैं। यह लोग देश को नफ़रत की आग में झोंक रहे हैं और हमारी यात्रा नफरत के बीच मोहब्बत की दुकान खोलने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
    लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि समय के साथ राहुल गांधी ने स्वयं को एक मजबूत नेता के रूप में विकसित किया। उनके भाषणों में अब गम्भीरता दिखाई देती है। राजनीति के मुद्दे की अब वह समझ रखते हैं। लेकिन यह सब होने के बाद भी उनकी छवि चुनाव में कांग्रेस को फायदा नहीं दिला सकती। क्योंकि जिस विपक्ष को वह एकजुट करने की कवायद में लगे हैं वह विपक्ष कुर्सी की अभिलाषा रखता है। वहीं कुर्सी की अभिलाषा व्यक्ति को एकजुट नहीं होने देती।

  • समावेशी विकास का सपना बिहार जैसे राज्यों को आगे बढ़ाये बिना संभव नहीं- नीतीश कुमार

    Union budget:- कल जब बजट आया तो सत्ताधारी दल भाजपा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की खूब सराहना की। हर ओर अमृत काल के बजट की चर्चा रही। लेकिन इस सबके बीच विपक्ष बजट से निराश नजर आया। तेजस्वी यादव ने इसे लोकलुभावन बताया। तो केजरीवाल बोले बजट में दिल्ली वालों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है।
    वहीं अब बजट को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा बयान दिया है। नीतीश कुमार बोले बजट से बिहार के हाथ निराशा लगी है। यह बजट दूरदृष्टि वाला नहीं है। विशेष राज्य की मांग को बजट में अनदेखा किया गया है। बजट में विकास के वादे हुए। लेकिन समावेशी विकास बिना बिहार के विकास के सम्भव नहीं है।
    नीतीश कुमार ट्वीट करते हुए लिखते हैं- केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया गया आम बजट निराशाजनक है। इसमें दूरदृष्टि का अभाव है। हर वर्ष बजट की प्राथमिकताएं बदल दी जाती हैं, जो फोकस और निधि के अभाव में पूरी नहीं हो पा रही हैं।
    बिहार को इस बजट से निराशा हाथ लगी है और एक बार फिर विशेष राज्य का दर्जा देने की मॉग की अनदेखी की गयी है। समावेशी विकास का सपना बिहार जैसे राज्यों को आगे बढ़ाये बिना संभव नहीं है। समावेशी विकास के तहत बिहार सरकार ने केन्द्रीय बजट (2023-24) में वित्त मंत्रियों की बैठक में राज्य के लिए 20,000 करोड़ रूपये के स्पेशल पैकेज की मांग की थी जिसे बजट में नहीं दिया गया है। युवाओं के लिये रोजगार सृजन को लेकर बजट में कोई खाका दिखाई नहीं दे रहा है।
    राज्यों की वित्तीय स्थिति को नजरअंदाज किया गया है। राज्य सरकार की ऋण सीमा में वर्ष 2023-24 में कोई छूट नहीं दी गई है। बिहार सरकार ने अपने ज्ञापन में इसे 4.5 प्रतिशत (4% एवं 0.5% सशर्त) तक रखने का आग्रह किया था जो पिछड़े राज्यों के विकास में तथा नए रोजगार सृजन में लाभप्रद होता। केन्द्रीय बजट में भारत सरकार ने सात प्राथमिकताओं (सप्तऋषि) का निर्धारण किया है। यह योजना केन्द्र सरकार की पूर्व से चल रही योजनाओं की केवल री-पैकेजिंग है। बिहार सरकार वर्ष 2016 से ही सात निश्चय-1 एवं वर्ष 2021 से सात निश्चय-2 के अन्तर्गत नई योजनाओं को सफलता से क्रियान्वित कर रही है।

  • कौन बनेगा विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार

    देश– साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी में पक्ष व विपक्ष जुट गया है। जहां एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी उपर्युक्त हैं और पूरे देश मे उनकी सकारात्मक छवि बनी हुई है। वहीं यूपीए की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा यह अभी कोई नहीं जानता। 
    विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि विपक्ष एक ऐसे नेता की तलाश कर रहा है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कांटे की टक्कर दे सके। लेकिन विपक्ष में अभी ऐसी कोई छवि नजर नहीं आ रही है। हालाकि भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी ने स्वयं को मजबूत बनाया है और वह अब प्रधानमंत्री पद का विकल्प बन गए हैं।
    लेकिन इन सबके बीच चार नाम ऐसे हैं जिन्हें लोग यूपीए की ओर से प्रधानमंत्री के रूप में देख भी सकते हैं और अगर यूपीए की सरकार बनती है तो जनता उन्हें आसानी से स्वीकार कर लेगी।

    नीतीश कुमार-

    नीतीश कुमार को लेकर बीते कई महीनों से यह बात सुर्खियों में है कि वह विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी कर सकते हैं। हालाकि नीतीश कुमार इस बात को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने साफ कह दिया है उन्हें पद की अभिलाषा नहीं है क्योंकि वह सिर्फ भाजपा को सत्ता से बाहर करना चाहते हैं। 
    वहीं अगर नीतीश कुमार देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो उनके पास नेतृत्व का अनुभव भी है और वह जमीनी स्तर से जुड़ाव भी रखते हैं। कई बार मुख्यमंत्री पद पर कार्य कर चुके नीतीश कुमार उम्र के हिसाब से इस पद के लिए सटीक साबित हो सकते हैं। लेकिन इनका प्रधानमंत्री बनना विपक्ष एकता को कितना स्वीकार होगा यह नहीं कहा जा सकता। क्योंकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से नीतीश कुमार को समर्थन मिलना थोड़ा मुश्किल है।

    शरद पवार-

    शरद पवार एक समय मे कांग्रेस के विश्वसनीय नेताओं में से एक रहे हैं। लेकिन जब सोनिया गांधी ने इंडिया गांधी की मौत के बाद कांग्रेस संभाली थी। तो आपसी मतभेद के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और अपनी पार्टी का गठन किया। अगर शरद पवार को विपक्ष प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करता है तो यह विपक्ष की उम्मीदों पर खरे उतरे सकते हैं। क्योंकि शरद पवार के पास राजनीति का अच्छा तजुर्बा है और उम्र के लिहाज से लोग उनका सम्मान भी करते हैं।

    ममता बनर्जी-

    ममता बनर्जी जो की वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री है। लोग इन्हें इनकी सादगी के लिए जानते हैं। पश्चिम बंगाल की जनता से इनका सीधा संबंध है और यह लोगों के दिलों पर राज करती हैं। अगर विपक्ष इन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करता है तो विपक्ष को महिलाओं की सहानुभूति और समर्थन प्राप्त होगा। क्योंकि इंदिरा गांधी के बाद यह पहली बार होगा जब कोई महिला प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी करेगी। 
    विपक्ष की ओर से ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाना यह संकेत देगा कि यूपीए महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। कांग्रेस महिलाओं को आगे लाने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है। वहीं ममता बनर्जी का राजनैतिक तजुर्बा देश को एक अलग दिशा दे सकता है और इससे विपक्ष को मजबूती भी मिल सकती है।

    राहुल गांधी- 

    यदि विपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाता है तो विपक्ष को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि भले ही राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से जनता के बीच अपनी सकारात्मक छवि बना ली है और वह एक गम्भीर नेता के रूप में उभर कर आए हैं। लेकिन जनता ने अभी उन्हें प्रधानमंत्री की छवि में नहीं स्वीकार किया है।