Category: politics

  • सचिन पायलट और सीएम गहलोत में खींचतान जारी

    डेस्क। शुक्रवार को सचिन पायलट ने सीएम अशोक गहलोत पर तंज कसा था और उन्होने कहा था कि बुजुर्गों को युवा पीढ़ी के बारे में सोचना चाहिए और युवाओं को भी न्याय मिलना चाहिए। आगे उन्होंने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न के इस्तीफे का जिक्र भी किया और कहा कि अर्डर्न को आठ साल पहले शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने अपनी कम सार्वजनिक रैंकिंग के कारण पद छोड़ दिया और अब पार्टी के लिए काम करने का फैसला भी किया है।
    बता दें इससे पहले एक वीडियो सामने आया था जिसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री कथित तौर पर कह रहे हैं कि महामारी के बाद पार्टी में ‘बड़ा कोरोना’ घुस चुका है। और ऐसा माना जा रहा है कि गहलोत ने कथित तौर पर पायलट की तुलना कोरोनावायरस से करी थी।
    वहीं सारे विवाद के बीच थरूर ने कहा है कि जब हम अपने सहयोगियों के बारे में बात कर रहे हैं, तो हमें अपने शब्दों का प्रयोग सोच-समझकर हमें करना चाहिए। वहीं मुझे इस बात का गर्व है कि अपने 14 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने कभी किसी के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया है।
    आगे उन्होंने कहा एक-दो बार मैंने कहा कि मैं कीचड़ में कुश्ती नहीं लड़ना चाहता। उन्होंने कहा- ‘इसलिए मेरा अपने साथियों से अनुरोध है कि अपने भाई-बहनों के बारे में ऐसी बातें कहना आपके लिए ठीक नहीं है और वे निश्चित रूप से इसे कहने के तरीके खोज भी सकते हैं और निजी तौर पर और भी बहुत कुछ कह भी सकते हैं।

  • क्या भारत जोड़ो यात्रा का हुजूम बनेगा वोटर? शशी थरूर से पूछा गया सवाल

    डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव जम्मू-कश्मीर पर जा पहुंची है। साथ ही ऐसे में इस यात्रा को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं भी काफी तेज हो गई हैं।
    इसी के साथ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को राजस्थान के जयपुर में भारत जोड़ो की सफलता को लेकर बड़ा बयान भी दिया है और साथ ही थरूर ने कहा कि इस यात्रा के जरिए राहुल गांधी ने पूरी तरह लोगों की सोच बदल कर रख दी है।
    इसके साथ ही राहुल लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं और हर वर्ग के व्यक्ति से मुलाकात भी कर रहे हैं। साथ ही राहुल ने राजस्थान के अंदरूनी विवाद पर भी बयान दिया और कहा- हमें अपने साथी के बारे में सोच समझकर बोलना भी चाहिए।
    तिरुवंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर जयपुर में एक लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने आए थे और थरूर से जब पूछा गया कि क्या आपको विश्वास है कि आने वाले चुनाव में भारत जोड़ो यात्रा की सफलता कांग्रेस के लिए वोटों में बदल जाएगी? तो इस पर उन्होंने कहा- हर कोई कहता है कि यह साबित होना बाकी है मैं भी स्वीकार करता हूं कि यह साबित होना बाकी है और हम इसे साबित कर सकते हैं।
    शशि थरूर ने आगे कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने राहुल गांधी की छवि को बदल दिया है और पूरा ‘पप्पू कारोबार’ तीन आरोपों के इर्द-गिर्द चल रहा था। जिसमें पहला है कि वो एक दिन धरने की घोषणा करेंगे और अगले दिन विदेश भाग जाएंगे। यहां आज वे मजबूती से खड़े हैं और 160 दिन से लगातार चल ही रहे हैं। साथ ही अब आप फालतू की बातें नहीं कर सकते हैं।
    इसके साथ दूसरा आरोप था कि वह घमंडी किस्म के नेता हैं, उन तक पहुंच पाना बहुत ही मुश्किल होता है और वे किसी से मिलते-जुलते नहीं हैं. आज सभी वर्गों के लोग उनसे मिल रहे हैं पर वो यात्रा में साथ चल रहे हैं। राहुल उनका हाथ पकड़ते हैं और साथ आगे भी बढ़ते हैं।
    इसके अलावा तीसरा था कि वे गंभीर किस्म के राजनीतिज्ञ नहीं हैं राहुल ने इस यात्रा में अब तक दर्जनों प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की है और उन्होने सवालों के जवाब दिए। साथ ही उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री ने कितनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

  • वो भारत जोड़ने निकले हैं भारत 1947 में टूट चुका है

    देश- केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को इंगित करते हुए राहुल गांधी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, कांग्रेस नेता पूरी दुनिया मे भारत को बदनाम कर रहे हैं। राजनीति सिर्फ सरकार बनाने के हित से नहीं होनी चाहिए। सरकार समाज और देश बनाने के लिए होनी चाहिए।
    उन्होंने आगे कहा, एक नेता भारत जोड़ने निकले हैं। भारत अब पहले जैसा नहीं है। भारत बदल चुका है। भारत के पराक्रम का लोहा पूरा विश्व मान रहा है। लेकिन वह भारत के शुर वीरों के विषय मे पता नहीं क्या क्या बोलते नजर आ जाते हैं।
    वह हमारे जवानों पर सवाल उठाते हैं। जो कांग्रेस नेता भारत जोड़ने की बात कर रहे हैं। क्या हमारा भारत टूटा हुआ है। हमारा भारत 1947 में टूट चुका है। अब भारत की छवि बदल गई है। अब भारत पहले जैसा नहीं है कि जिसने जैसे चाहा उसे दबा लिया। अब भारत जवाब देना जानता है।
    वह कहते हैं हिंदुस्तान में चारो ओर नफरत है। क्या मोदी जी नफरत बांट रहे हैं। आज जिस भारत की सराहना विश्व स्तर पर हों रही है। कांग्रेस नेता उसकी आलोचना कर रहे हैं। हम पूरी दुनिया को अपना परिवार मानते हैं। क्योंकि भारत सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है।

  • जानें केसीआर की जनसभा पर क्या बोले नीतीश कुमार

    राजनीति– तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की खम्मम में आयोजित जनसभा इस समय सुर्खियों में है। क्योंकि इस जनसभा में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ विपक्ष के कई नेता भी शामिल हुए। 
    लेकिन इस बैठक के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निमंत्रण नहीं मिला। जो चर्चा का विषय बन गया। नीतीश कुमार ने इस पर अपना बयान देते हुए कहा, यदि मुझे निमंत्रण मिलता तो भी मैं नहीं जा पाता। राजस्व का काम अधिक है। 
    मैं उसे नहीं छोड़ सकता। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, यदि सभी गैर एनडीए दल साथ आते हैं तो इसका फायदा 2024 के चुनाव में होगा। अभी जो बैठक हुई। मैं उसके बारे में नहीं जानता। मैं अपनी काफी व्यस्त हूँ।

  • आज यूपी में भाजपा की बड़ी बैठक, योगी आदित्यनाथ करेंगे संबोधित

    डेस्क। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 22 जनवरी को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अयोजित की जाएगी। कार्यसमिति के उद्घाटन सत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित भी करेंगे। इसके साथ ही कार्यसमिति में उत्तर प्रदेश से केंद्र सरकार में मंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश भाजपा पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी सहित कुल 700 लोग भी मौजूद रहेंगे।
    इसके साथ ही प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया गया है कि रविवार सुबह 10 बजे से उद्घाटन सत्र होगा। वहीं उसके बाद राजनीतिक प्रस्ताव का सत्र भी होगा। तीसरे सत्र में संगठन की आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की जानी है।
    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता के बीच पहुंचने का एजेंडा भी सौंपा है। 
    पार्टी 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं से संपर्क कर उन्हें देश के राजनीतिक इतिहास से अवगत भी कराएगी। इसके साथ ही मोदी सरकार के शासन में प्राप्त उपलब्धियां भी बताएगी। वहीं उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी शुरू किया जाना है। 

  • राहुल गांधी ने मांगी इस नेता से माफी, बोले आपको बुरा लगा

    डेस्क। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा इन दिनों जम्मू कश्मीर में जारी हैं। साथ ही यहाँ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार आम सभाएँ कर लोगो से रूबरू भी हो रहे हैं। साथ ही इसी बीच उन्होंने एक जनसभा के बीच अपने पार्टी के पूर्व नेता और करीबी रहे गुलाम नबी आजाद से माफ़ी भी मांगी हैं।
    साथ ही उन्होंने कहा की “अगर मैंने किसी भी तरह से उन्हें दुःख पहुंचाया हो तो माफ़ी मांगता हूँ”।
    बता दें मीडिया ने जब उनसे यह सवाल किया की आखिर किन वजहों से कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में पूर्व नेता और आपके करीबी रहे गुलाम नबी आजाद को नहीं बुलाया गया तो इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गाँधी ने कहा की गुलाम नबी आजाद की पार्टी के ज्यादातर लोग तो उनके साथ ही बैठे हुए हैं। साथ ही उस तरफ सिर्फ गुलाम नबी आजाद ही बाकी रह गए हैं। साथ ही उन्होंने आगे यह कहा की वह उनका काफी सम्मान भी करते है। अगर उन्होंने उनका किसी भी तरह से दिल दुखाया होगा तो वह गुलाम नबी आजाद से माफ़ी मांगते हैं।
    वहीं इसके अलावा राहुल गाँधी ने दिग्विजय सिंह की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर दिए गए उनके बयान पर भी प्रतिक्रिया ली है और राहुल गांधी ने इस मामले से खुद को किनारे लगाते हुए कहा की जो कुछ भी दिग्विजय सिंह ने कहा हैं वह उनसे सहमत नहीं हैं साथ ही राहुल गाँधी वह देश और देश की सेना का पूरा सम्मान करते हैं। देश की आर्मी जिस तरह का भी ऑपरेशन करते हैं उसे सबूत देने की बिलकुल भी जरूरत नहीं हैं।

  • कार्यपालिका और न्यायपालिका में अंतर जरूरी

    डेस्क। सोमवार को दिल्ली की तीस हजारी अदालत में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कानून मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि मेरा भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के साथ सीधा संपर्क रहे है। वहीं हम हर छोटे से लेकर जटिल मुद्दों तक पर चर्चा करते हैं।
    इसी के साथ रिजिजू ने कहा कि, “कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच कोई तनाव भी नहीं है। अगर कोई बहस और चर्चा नहीं है तो यह लोकतंत्र कैसा है? अगर सरकार और न्यायपालिका के विचारों में अंतर है तो कुछ लोग इसे ऐसे पेश करते हैं जैसे कोई महाभारत हो रहा हो लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।
    अपने भाषण के दौरान रिजिजू ने पूर्व सीजेआई एनवी रमना द्वारा लिखे गए एक पत्र का भी उल्लेख किया गया है। वहीं उस पत्र में सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों की होने वाली आलोचना के संबंध में विचार भी व्यक्त किए गए हैं। रिजिजू ने कहा, “इन दिनों न्यायाधीश भी थोड़ा सावधान हैं। वे ऐसा निर्णय नहीं देंगे जिससे समाज में कड़ी प्रतिक्रिया हो। साथ ही आखिरकार जज भी एक इंसान होता है और जनमत उसे भी प्रभावित करता है। सोशल मीडिया स्क्रूटनी का भी सीधा असर जजों पर पड़ता ही है।”
    नेता और जज में अंतर?
    इसके बाद न्यायाधीशों की नियुक्तियों की तुलना राजनेताओं के चुनावों से करते हुए रिजिजू ने कहा है कि एक न्यायाधीश एक बार न्यायाधीश बन जाता है, इसलिए उसे फिर से चुनाव का सामना नहीं करना पड़ता है। जनता जजों की छानबीन भी नहीं कर सकती… इसलिए मैंने कहा है कि जजों को जनता नहीं चुनती इसलिए वह उन्हें बदल भी नहीं सकती। लेकिन जनता आपको देख रही है कि आपके फैसले को देख रही है। जज जिस तरह से इंसाफ देते हैं, लोग उसे देख भी रहे हैं।
    किरन रिजिजू ने सीजेआई चंद्रचूड़ को लिखे उस पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सरकार के प्रतिनिधि को शामिल करने का सुझाव दिया भी गया था। रिजिजू ने कहा कि ऐसा करना उनका कर्तव्य था और, “2015 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) को पेश करने वाले संवैधानिक संशोधन को “असंवैधानिक” को करार दिया था।”
    साथ ही कानून मंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका भी जरूरी है। वहीं मोदी सरकार ने न्यायपालिका को कमजोर करने के लिए एक भी कदम नहीं उठाया है। हमारा काम संस्था के प्रति सम्मान का प्रमाण है और यदि आप न्यायपालिका के अधिकार या गरिमा को कमजोर करते हैं तो लोकतंत्र सफल भी नहीं हो सकता है।

  • पेपर लीक की चिंता हमें भाजपा से अधिक- अशोक गहलोत

    देश- राजस्थान में पेपर लीक का मामला हंगामा मचाए है। गहलोत सरकार पर भाजपा लगातार कटाक्ष करते नजर आ रही है।
    वहीं अब अशोक गहलोत ने बीजेपी पर जमकर शाब्दिक बाण छोड़े हैं और कहा है उन्हें जिंतनी चिंता पेपर लीक है उससे कई गुना ज्यादा चिंतत हम हैं।
    अशोक गहलोत ने कहा, पेपर लीक की चिंता भाजपा से अधिक हमें है। हमने जिंतनी नौकरियां लगवाई उतनी भारत मे किसी राज्य सरकार ने नहीं लगवाईं। 
    वहीं यदि हम पेपर लीक के संदर्भ में बात करें तो यह हर राज्य में हो रहा है। जहाँ भाजपा की सरकारें हैं वहां भी यह समस्या है। लेकिन हम इसपर संख्ती से कार्य कर रहे हैं।

  • गुजरात की तर्ज पर होगा मध्यप्रदेश चुनाव, आम आदमी पार्टी निभाएगी क्या भूमिका

    राजनीति– बीते कुछ माह बाद मध्यप्रदेश में चुनाव होने वाला है। वर्तमान में यहां भाजपा की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में भाजपा के सामने खड़ी हैं। सामान्य तौर पर यहां भाजपा और कांग्रेस के मध्य कांटे की टक्कर होती है। दोनों ही दलों ने जनता को अपने खेमे में करने की रणनीति तैयार कर ली है।
    लेकिन इस सबके बीच आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश में दस्तक दी है। विशेषज्ञ का कहना है कि मध्यप्रदेश का चुनाव गुजरात की तर्ज पर होगा और आम आदमी पार्टी स्वयं को भाजपा का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनाकर कांग्रेस का पत्ता साफ करने की कोशिश में लगेगी।

    कैसे बनी बीजेपी की सरकार-

    शुरुआती दौर में जब मध्यप्रदेश में चुनाव हुआ। तो कई छोटे छोटे दलों के साथ मिलकर कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई। लेकिन कुछ वक्त के बाद पार्टी के बीच आंतरिक कलह उत्पन्न हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थाम लिया। इससे पार्टी कमजोर पड़ने लगी और भाजपा ने अपनी सरकार बना ली। 
    भाजपा की सरकार बनी तो कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में खड़ी हो गई। वहीं अब मध्यप्रदेश में चुनाव के दौरान कांग्रेस सीधा जनता से संपर्क साध रही है और स्वयं को स्थापित करने के लिए भाजपा सरकार की कमियां गिना रही है।
    लेकिन इस सबके बीच मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी की दस्तक हो चुकी है। अरविंद केजरीवाल दिल्ली मॉडल के बलबूते पर स्वयं को सत्यापित करने की कवायद में जुटी हुई है। अब ऐसे में यह चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है क्योंकि यहां अब सिर्फ कांग्रेस या भाजपा नही बल्कि आम आदमी पार्टी भी मैदान में है।

  • क्या वरुण गांधी का सरनेम बना भाजपा में उनकी उन्नति में बाधा

    डेस्क। यूपी के पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में छाए हुए हैं। वहीं बयानबाजी के जरिए अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने वाले वरुण को लेकर अटकलें है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले वे अपनी नई राह भी खोज सकते हैं।
    साथ ही बीजेपी सरकार की योजनाओं पर हमलावर होने की वजह से वरुण विपक्षी दलों के पसंदीदा भी बने हुए हैं। साथ ही लगभग सभी दल उनमें अपना फायदा भीं खोज रहे हैं। वहीं अटकलें हैं कि भले ही वरुण सपा, आरएलडी के नेताओं व अपनी बहन प्रियंका के संपर्क में हों, पर शायद ही वे किसी दल में शामिल भी होंगे। वहीं सूत्रों के अनुसार, वे पीलीभीत से ही संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार होना भी चाहते हैं। साथ ही वरुण पिछले लंबे समय से बीजेपी से कथित तौर पर नाराज भी हैं। किसान आंदोलन, बेरोजगारी, अग्निवीर योजनाओं समेत कई मुद्दे पर अपनी सरकार को आड़े हाथों भी लेते ही रहे हैं। कभी राजनाथ सिंह ने वरुण को महज 33 साल की उम्र में महासचिव बनाकर बड़ी जिम्मेदारी भी दी थी, पर 2014 के बाद वरुण के सितारे गर्दिश में ही नजर आ रहे है। 
    गांधी सरनेम की वजह से नहीं हो पाई तरक्की?
    देश के सबसे बड़ा सियासी परिवार गांधी फैमिली से आने के बाद भी वरुण को पिछले कुछ सालों में बीजेपी से ज्यादा कुछ प्राप्त नहीं हुआ। दो बार मोदी सरकार के सत्ता में रहने के बावजूद भी वरुण को केंद्र में मंत्री नहीं बनाया गया और 2014 में वरुण की मां मेनका को जरूरी मंत्रिपद दिया गया, लेकिन 2019 में एनडीए सरकार की वापसी पर वह भी छिन चुका है। राजनीतिक एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि वर्तमान सरकार और बीजेपी में वरुण के साइडलाइन होने के विभिन्न वजहों में से एक वजह उनका सरनेम भी है।
     ज्यादातर तमाम बीजेपी नेताओं के निशाने पर सालों से गांधी परिवार ही रहा है फिर चाहे सोनिया गांधी हों, राहुल गांधी हों या फिर प्रियंका वाड्रा, बीजेपी नेता गांधी परिवार पर हमला करते ही रहे हैं। ऐसे में यदि वरुण गांधी को सिर्फ गांधी फैमिली का होने की वजह से आगे बढ़ाया जाता है, तो सवाल खड़े हो सकते हैं कि जिस गांधी परिवार पर पार्टी हमला बोलती है, उनके ही परिवार के एक नेता को आगे बढ़ाने से नहीं चूक रही और यह भी सच है कि वरुण ने राजनीति को बीजेपी में ही आकर सीखा है और भगवा दल से ही वे तीन बार सांसद भी चुने जा चुके हैं।